samacharsecretary.com

अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी समय से पहले हुए अंतर्ध्यान, 5 दिन में पूरी तरह पिघली हिम शिवलिंग

श्रीनगर  अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन बाद ही बाबा बर्फानी का प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु गुफा में दर्शन कर चुके हैं। हिमलिंग के इतनी जल्दी पिघलने के बाद अमरनाथ श्राइन बोर्ड की व्यवस्थाओं और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।अमरनाथ यात्रियों के लिए दुख वाली खबर सामने आई है. यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन बाद ही हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु गुफा तक पहुंचकर दर्शन कर चुके हैं. अमरनाथ यात्रा इस बार 3 जुलाई से शुरू हुई थी और 7 जुलाई को बाबा बर्फानी पूरी तरह से अंतर्ध्यान हो गए. हर वर्ष 57 दिन तक चलने वाली बाबा अमरनाथ यात्रा का रक्षाबंधन के दिन यानी सावन पूर्णिमा पर समापन होता है. लेकिन महज पांच दिन में ही बाबा बर्फानी के अंतर्ध्यान होने से अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड पर सवाल खड़े हो रहे हैं।  3 जुलाई से शुरू हुई थी यात्रा इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी। बताया जा रहा है कि 7 जुलाई तक प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया। जबकि यह यात्रा हर साल 57 दिनों तक चलती है और इस बार इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन (सावन पूर्णिमा) के दिन होना है। श्राइन बोर्ड ने क्या कहा? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि हिमलिंग का बनना और पिघलना पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है। उन्होंने इसे मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों से जुड़ी सामान्य घटना बताया है।अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों से जब इस बारे में बात कई गई तो उन्होने इस स्थिति को प्राकृतिय प्रकिया का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया. लेकिन कश्मीर के पर्यावरणविदों का मानना है कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति देना इसका सबसे बड़ा कारण है. उनका कहना है कि लाखों भक्तों की गर्म सांस हिमलिंग सहन नहीं कर पा रहा है और श्राइन बोर्ड के अधिकारी भी यह मानते हैं लेकिन उन्होंने इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की. साथ ही हिमलिंग के पिघलने से रोकने के लिए किए गए सभी उपाय भी इनको नाकाफी साबित हुए।  पर्यावरणविदों ने जताई चिंता कश्मीर के कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से गुफा के आसपास का तापमान बढ़ता है, जिससे हिमलिंग तेजी से पिघल सकता है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। हालांकि, इस दावे पर सभी विशेषज्ञों की एक जैसी राय नहीं है और हिमलिंग के जल्दी पिघलने के पीछे मौसम और जलवायु भी अहम कारण माने जाते हैं। मौसम और तापमान का भी असर विशेषज्ञों के अनुसार, अमरनाथ गुफा में बनने वाला प्राकृतिक हिम शिवलिंग हर साल तापमान, बर्फबारी और मौसम की स्थिति के अनुसार आकार लेता है। ऊंचाई वाले इलाकों में बढ़ता तापमान, कम बर्फबारी और जलवायु परिवर्तन जैसी स्थितियां इसके बनने और पिघलने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।  अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड ने झाड़ा पल्ला अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने इसके पिघलने की प्रक्रिया से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि यह प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि कश्मीर के पर्यावरणविद इसे मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना था कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल होने की अनुमति देने से ऐसा हुआ है।  भक्तों की गर्म सांसों से पिघल रहा है हिमलिंग! पिछले कई सालों से जिस तेजी से हिमलिंग पिघल रहा है उसे रोकने की खातिर किए जाने वाले उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। दरअसल गुफा में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने से हिमलिंग को नुकसान पहुंच रहा है क्योंकि लाखों भक्तों की गर्म सांसों को हिमलिंग सहन नहीं कर पा रहा है। श्राइन बोर्ड के अधिकारी अप्रत्यक्ष तौर पर भक्तों की सांसों की थ्योरी को मानते हैं पर प्रत्यक्ष तौर पर वे इसे कुदरती प्रक्रिया करार देते थे।  पहले भी जल्दी पिघल चुका है हिमलिंग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 23 मई को हिमलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट थी। 29 जून तक यह घटकर करीब 5 फीट रह गई और अब इसके पूरी तरह पिघलने की जानकारी सामने आई है। यह पहली बार नहीं है जब हिमलिंग यात्रा के दौरान जल्दी पिघला हो। वर्ष 2016 में यात्रा शुरू होने के करीब 10 दिन बाद ही हिमलिंग पिघल गया था। वहीं, 2013 में भी यात्रा समाप्त होने से पहले ही हिमलिंग अंतर्ध्यान हो गया था। 28 अगस्त तक चलेगी अमरनाथ यात्रा इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था। इसी वजह से यह हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक मानी जाती है।

अमरनाथ यात्रा के बीच बड़ा अपडेट! बाबा बर्फानी का शिवलिंग घटकर 1 फीट, मौसम का दिखा असर

श्रीनगर  अमरनाथ यात्रा का आज चौथा दिन है। तीर्थ यात्रियों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रही है। वहीं, इसके बीच एक चिंता बढ़ाने वाली खबर भी है। कहा जा रहा है कि पवित्र शिवलिंग का आकार पिघलकर 1 फीट रह गया है। खास बात है कि जून के अंत में ऊंचाई करीब 7 फीट देखी गई थी। खास बात है कि यह यात्रा 57 दिनों तक चलती है। तेजी से पिघल रहे बाबा बर्फानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरनाथ में शिवलिंग अब पिघलकर करीब 1 फीट बचे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, 23 मई को ऊंचाई 7 फीट थी, जो 29 जून को 5 फीट पर आ गई थी। अब ताजा तस्वीर में देखा जा रहा है कि शिवलिंग की ऊंचाई घटकर 1 फीट के आसपास रह गई है। खास बात है कि शिवलिंग का निर्माण प्राकृतिक रूप से हर साल होता है, जिसे जियोलॉजी में स्टैलेगमाइट कहा जाता है। कैसे होता है शिवलिंग का निर्माण दरअसल, गुफा के ऊपर चूना पत्थर और जिप्सम दरारों से बर्फ और ग्लेशियर के पिघलने से पानी बहता है। पानी जैसे ही गुफा की जमीन तक पहुंचता है, तो बेहद कम तापमान में यह जमना शुरू कर देता है। ऊपर की ओर जमने के क्रम के बाद एक शिवलिंग का आकार तैयार हो जाता है। श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी अमरनाथ यात्रा के तीसरे दिन रविवार को लगभग 24 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकतिक रूप से निर्मित हिम शिवलिंग के दर्शन किए। इसके साथ ही बीते तीन दिन में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 60 हजार के आसपास पहुंच गई है। तीन जुलाई से शुरू अमरनाथ यात्रा 28 अगस्त तक जारी रहेगी। जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से 1,211 महिलाओं सहित 5,794 तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था सोमवार तड़के अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ। उन्होंने बताया कि पांचवें जत्थे में 21 बच्चे, 599 साधु और 76 साध्वियां शामिल हैं। वे तड़के तीन बजकर 10 मिनट से तीन बजकर 45 मिनट के बीच कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में अलग-अलग काफिलों में आधार शिविर से रवाना हुए। इनमें से 139 वाहनों में सवार 3,490 तीर्थयात्री अनंतनाग जिले के पहलगाम में नुनवान आधार शिविर की ओर जा रहे हैं। जबकि 128 वाहनों में 2,304 तीर्थयात्री गांदरबल जिले के बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुए हैं। कठिन यात्रा और हजारों किमी की ऊंचाई तीर्थयात्री अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के छोटे लेकिन खड़ी चढ़ाई वाले 14 किलोमीटर के बालटाल मार्ग से एक साथ यात्रा कर रहे हैं। यह गुफा मंदिर दक्षिण हिमालय में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यात्रा के लिए वैध परमिट है जरूरी उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को अमरनाथ यात्रा पर जाने के इच्छुक सभी तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे अपनी तय तारीख के लिए वैध पंजीकरण परमिट मिलने के बाद ही यात्रा करें। उन्होंने कहा कि सिर्फ पंजीकृत यात्रियों को ही तय तारीख पर पवित्र गुफा मंदिर तक जाने की अनुमति दी जाएगी। यह अपील जम्मू-कश्मीर में बिना सही पंजीकरण के बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के पहुंचने की वजह से की गई है। कड़ी सुरक्षा के बीच हो रही है यात्रा सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों वाला सुरक्षा घेरा, दोनों रास्तों पर नो-फ्लाई जोन, वॉचटावर, कड़ी निगरानी और तीर्थयात्रियों के काफिले की रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। पुलिस ने सभी रजिस्टर्ड सर्विस प्रोवाइडर्स को क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र जारी किए हैं, ताकि उनके पहचान पत्रों की तुरंत जांच हो सके और उग्रवादियों को सपोर्ट स्टाफ बनकर घुसने से रोका जा सके। इसके अलावा तीर्थयात्रियों, गाड़ियों और सर्विस देने वालों के लिए आरएफआईडी टैग जारी किए गए हैं ताकि उनकी रियल टाइम ट्रैकिंग की जा सके। साथ ही, सीसीटवी कैमरों का एक बड़ा नेटवर्क दोनों तीर्थ मार्गों पर आवाजाही पर नजर रख रहा है।

कड़ी सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा जारी, 4,812 तीर्थयात्रियों का तीसरा जत्था जम्मू से हुआ रवाना

जम्मू जम्मू-कश्मीर में जम्मू यात्री निवास आधार शिविर से श्री अमरनाथ यात्रा के लिए 4812 तीर्थयात्रियों का तीसरा जत्था शनिवार को 'बम बम भोले' के जयकारों के बीच पवित्र गुफा मंदिर के लिए रवाना हुआ।अधिकारियों के अनुसार, 2041 तीर्थयात्री बालटाल के लिए रवाना हुए, जबकि2771 तीर्थयात्री बसों और निजी वाहनों के काफिले में पहलगाम मार्ग से यात्रा करने के लिए निकले। यात्रा का काफिला कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना हुआ। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को आधार शिविर से तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस बीच जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को श्री अमरनाथ यात्रा के तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया। इसमें कहा गया है कि वार्षिक यात्रा के लिए पहले से पंजीकरण कराना अनिवार्य है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार इस रास्ते पर प्रतिदिन जाने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या सीमित कर दी गयी है। बाबा बर्फानी के अलौकिक दर्शन कर लौटे श्रद्धालु उधर, वार्षिक श्री अमरनाथ यात्रा 2026 शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बालटाल और पहलगाम, दोनों मुख्य मार्गों से हर्षोल्लास के साथ शुरू हुई। बालटाल मार्ग से सुबह रवाना हुए पहले जत्थे के कई श्रद्धालु बाबा बर्फानी के अलौकिक दर्शन कर बेहद खुशी-खुशी लौट आए। पवित्र गुफा के दर्शन कर लौटे श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह और आस्था की अलग ही झलक दिखाई दी। उन्होंने कहा कि दिव्य दर्शनों से अद्भुत आनंद मिला है। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस वर्ष पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी अपने पूर्ण आकार में विराजमान हैं। पहले दिन दर्शन करने वाले यात्रियों ने खुद को बहुत ही सौभाग्यशाली बताया। उनका कहना है कि उन्हें पहली आरती और प्रथम पूजा के दौरान बाबा बर्फानी के दिव्य स्वरूप के दर्शन का अवसर मिला। उनका कहना है कि यात्रा मार्ग पर मौसम ने थोड़ी परीक्षा जरूर ली लेकिन भोलेनाथ की भक्ति के आगे सारी मुश्किलें आसान हो गईं। उन्होंने कहा कि दर्शन कर जत्थे का हर सदस्य भगवान शिव के रंग में रंग गया। पवित्र शिवलिंग के दर्शन कर अद्भुत आनंद मिला : पंकज पहले जत्थे में शामिल श्रद्धालु पंकज सावंत ने बताया कि वे सुबह करीब पांच बजे दर्शन के लिए निकले। यात्रा के दौरान तेज बारिश और घने कोहरे के कारण चढ़ाई कठिन रही लेकिन बाबा भोलेनाथ की कृपा से सभी बाधाएं आसान लगने लगीं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब नौ बजे जब वे पवित्र गुफा पहुंचे, तब वहां केवल सात-आठ श्रद्धालु ही मौजूद थे। भीड़ कम होने के कारण उन्हें पांच से दस मिनट तक शांतिपूर्वक पवित्र शिवलिंग के दर्शन और ध्यान का अवसर मिला। वहां का नजारा अद्भुत था, जिससे आत्मिक आनंद मिला।  

‘बम बम भोले’ से गूंजा जम्मू, अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना, श्रद्धालुओं में दिखा जबरदस्त उत्साह

 जम्मू  जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यहां भगवती नगर आधार शिविर से अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को कश्मीर स्थित पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों के लिए रवाना किया।करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए 57 दिनों की वार्षिक तीर्थयात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी। यात्रा अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे, लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग से एक साथ आरंभ होगी। इसका समापन 28 अगस्त को होगा। अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल सिन्हा ने तीर्थयात्रियों के काफिले को रवाना करने से पहले भगवती नगर आधार शिविर में विशेष पूजा-अर्चना की।इस अवसर पर उनके साथ पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात, विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा, भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा, भाजपा के स्थानीय विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। ‘बम-बम भोले’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बर्फानी बाबा की’ के जयघोष के बीच पांच हजार से अधिक तीर्थयात्री कड़े सुरक्षा प्रबंध में सुरक्षित वाहनों के काफिले में दोनों आधार शिविरों के लिए रवाना हुए।समारोह के बाद उपराज्यपाल सिन्हा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘हर-हर महादेव! बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा शुरू हो गई है। जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से श्री अमरनाथ जी यात्रा-2026 के लिए तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। अमरनाथ यात्रा गहन आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।’’ पहला जत्था बालटाल और पहलगाम बेस कैंप के लिए भेजा गया है. इन दोनों मार्गों से श्रद्धालु 3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. 57 दिनों तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी।  जयपुर से पहुंचे श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर बाबा बर्फानी के दर्शन की खुशी साफ दिखाई दी. जी मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान के जयपुर से आए Genz Group के सदस्यों ने ज़ी मीडिया से बातचीत में कहा कि लोग अक्सर छुट्टियां बिताने या घूमने के लिए अलग-अलग जगहों का रुख करते हैं, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य बाबा अमरनाथ के दर्शन करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है।  कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना हुआ यात्रा काफिला यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को सीआरपीएफ की सुरक्षा में रवाना किया गया. सुरक्षा बलों के वाहन पूरे काफिले के आगे और पीछे मौजूद रहे ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे. यात्रा में शामिल प्रत्येक सरकारी और निजी वाहन की पहले विस्तृत जांच की गई. जांच पूरी होने के बाद ही वाहनों को काफिले में शामिल किया गया और उन पर सत्यापन का विशेष टैग लगाया गया।  ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम से रखी जा रही निगरानी इस बार यात्रा मार्ग पर बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे रूट पर तैनात हैं. संवेदनशील इलाकों में ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है.प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं. जम्मू से लेकर पवित्र गुफा तक विभिन्न स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था, लंगर, चिकित्सा सेवाएं, एम्बुलेंस, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और हेल्प डेस्क उपलब्ध कराए गए हैं।  हर साल उमड़ती है आस्था की विशाल भीड़ प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल वैध पंजीकरण और RFID कार्ड के साथ ही यात्रा करें तथा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके. हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्रशासन को इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम पहले से किए गए हैं।  उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर बढ़ाया गया प्रत्येक कदम भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक यात्रा की कामना की।तीर्थयात्रियों ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए प्रबंधों पर संतोष व्यक्त किया। पहली बार यात्रा पर आए सूरत के सुरेश कुमार ने प्रशासन और सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं तथा सहयोग की सराहना की। जूनागढ़ अखाड़े के बाबा गोगा नाथ ने इस यात्रा को भगवान का आशीर्वाद बताते हुए साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।काशी से 20 साधुओं के साथ आए संत सुखम दास ने कहा कि बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। दास पिछले 32 वर्षों से अमरनाथ यात्रा पर जाते आ रहे हैं।उत्तराखंड के श्रद्धालु वैभव ने पहले जत्थे का हिस्सा बनने पर खुशी जताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा व्यक्त किया। जयपुर की रजनी देवी ने भी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं के काफिले को भारी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया। उनकी सुरक्षित आवाजाही के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा नियंत्रण के विशेष उपाय लागू किए गए हैं।यातायात प्रबंध से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राजमार्ग के विभिन्न हिस्सों में दो जुलाई से 28 अगस्त तक यातायात प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। इसके लिए प्रतिदिन यातायात परामर्श और वाहनों के आवागमन का समय निर्धारित किया गया है। इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के लिए 3.90 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जबकि जम्मू में तत्काल पंजीकरण की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।पूरे जम्मू क्षेत्र को बहुस्तरीय सुरक्षा बलों की तैनाती और तकनीक आधारित निगरानी के साथ व्यापक सुरक्षा के दायरे में रखा गया है। भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने अमरनाथ यात्रा को देश की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक बताते हुए विश्वास जताया कि यह यात्रा शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से संपन्न होगी।विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी तीर्थयात्रियों का स्वागत किया … Read more

अमरनाथ यात्रा को लेकर हाई अलर्ट, खुफिया एजेंसियों ने आतंकी साजिश की आशंका जताई

श्रीनगर   आगामी अमरनाथ यात्रा को लेकर भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बिगड़ते हालात से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अमरनाथ यात्रा के दौरान किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की कोशिश कर सकती है। इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होने जा रही है। चौतरफा मुश्किलों से घिरा है पाकिस्तान खुफिया अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के लिए इस समय पीओके, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की स्थिति बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर पीओके में जारी विरोध प्रदर्शनों ने इस्लामाबाद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अधिकारियों का दावा है कि हाल ही में अफगानिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किया गया हवाई हमला भी अंदरूनी दबाव से ध्यान भटकाने की कोशिश का हिस्सा था। इस हवाई हमले में 35 लोगों की मौत हुई। अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की आशंका क्यों? भारतीय एजेंसियों के मुताबिक, इंटरसेप्ट किए गए कुछ इनपुट से संकेत मिले हैं कि पाकिस्तान भारत में भी आतंकी हमले की साजिश रच रहा है। इसके लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई जम्मू-कश्मीर के जंगलों में छिपे कुछ आतंकियों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है। एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं आतंकियों के जरिए अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकी हमले की साजिश रची जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान, इन आतंकियों को पहलगाम जैसा बड़ा हमले करने के निर्देश देने की कोशिश कर रहा है। अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने अमरनाथ यात्रा मार्ग पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पुलिस ने पूरे मार्ग पर आतंकवाद रोधी तंत्र को और मजबूत किया है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरे और अत्याधुनिक डिजिटल स्कैनिंग सिस्टम भी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल नजर रखी जा सके। पंजाब भी निशाने पर? एक खुफिया अधिकारी के अनुसार, आईएसआई पिछले कुछ समय से पंजाब और जम्मू-कश्मीर में अपने मॉड्यूल को फिर से सक्रिय करने का प्रयास कर रही है। अधिकारी का दावा है कि पाकिस्तान चाहता है कि भारत में जल्द कोई बड़ी आतंकी घटना हो, ताकि पीओके और अन्य क्षेत्रों में बगावत के हालात से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। पीओके के हालात से पाकिस्तान पर बढ़ रहा दबाव खुफिया अधिकारियों का कहना है कि पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं। वहां के लोग अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान के भीतर भी बड़ी संख्या में लोग पीओके के लोगों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे वहां की सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान पर दबाव बढ़ता जा रहा है।   

Amarnath Yatra: बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए बनारसी स्वाद, चंदनवाड़ी में 70 सेवादार करेंगे सेवा

वाराणसी  बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को इस बार अमरनाथ यात्रा में काशी का विशेष स्वाद चखने का अवसर मिलेगा। श्री बाबा काशी विश्वनाथ सेवा समिति वाराणसी के 70 सेवादार चंदनवाड़ी में विशाल सेवा शिविर और भंडारे का संचालन करेंगे। यह समिति पिछले 25 वर्षों से यात्रा में सेवा प्रदान कर रही है। इसका भंडारा 3 जुलाई से रक्षाबंधन तक चलेगा। समिति के अध्यक्ष दिलीप सिंह बंटी ने बताया कि श्रद्धालुओं को बनारस की प्रसिद्ध पूड़ी-कचौड़ी, गरम जलेबी, ठंडाई और बनारसी पान निःशुल्क परोसा जाएगा। असली स्वाद के लिए बनारस से अनुभवी हलवाई भी ले जाए जा रहे हैं। बनारसी व्यंजनों के साथ-साथ दक्षिण भारतीय, गुजराती और पंजाबी भोजन भी श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराया जाएगा। रोजाना 1000-1500 श्रद्धालुओं के भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही 300 यात्रियों के ठहरने, गर्म कपड़े, शॉल और मोजे की सुविधा भी शिविर में उपलब्ध रहेगी। सेवा कार्य के लिए सेवादारों का पहला जत्था 20 जून को रवाना हो चुका है। शेष 70 सेवादार 28 जून को वाराणसी से ट्रेन द्वारा चंदनवाड़ी पहुंचेंगे। इनमें रसोइये, पदाधिकारी और स्वयंसेवक शामिल हैं। काशी की आतिथ्य परंपरा और बनारसी व्यंजनों की खुशबू इस बार बाबा बर्फानी के दरबार तक पहुंचेगी। श्रद्धालुओं के लिए यह पहल स्वाद के साथ-साथ काशी की सेवा संस्कृति की मिसाल बनेगी। अमरनाथ यात्रा में इस बार श्रद्धालुओं को काशी के विशेष व्यंजनों का अनुभव करने का मौका मिलेगा। वाराणसी की श्री बाबा काशी विश्वनाथ सेवा समिति ने इस बार चंदनवाड़ी में भंडारे का आयोजन किया है, जिसमें 70 सेवादार श्रद्धालुओं की सेवा में जुटेंगे। समिति के अध्यक्ष दिलीप सिंह बंटी ने बताया कि यह भंडारा 3 जुलाई से रक्षाबंधन तक चलेगा। पिछले 25 वर्षों से यह समिति अमरनाथ यात्रा में सेवा कर रही है। इस बार श्रद्धालुओं को बनारस की प्रसिद्ध पूड़ी-कचौड़ी, गरम जलेबी, ठंडाई और बनारसी पान का स्वाद निःशुल्क मिलेगा। इस भंडारे में बनारसी व्यंजनों के साथ-साथ अन्य राज्यों के व्यंजन भी उपलब्ध होंगे। श्रद्धालुओं के लिए रोजाना 1000-1500 लोगों के भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, 300 यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था, गर्म कपड़े, शॉल और मोजे की सुविधा भी शिविर में उपलब्ध रहेगी। सेवा कार्य के लिए सेवादारों का पहला जत्था 20 जून को रवाना हो चुका है। शेष 70 सेवादार 28 जून को वाराणसी से ट्रेन द्वारा चंदनवाड़ी पहुंचेंगे। इनमें रसोइये, पदाधिकारी और स्वयंसेवक शामिल हैं। इस बार काशी की आतिथ्य परंपरा और बनारसी व्यंजनों की खुशबू बाबा बर्फानी के दरबार तक पहुंचेगी। यह पहल श्रद्धालुओं के लिए न केवल स्वाद का अनुभव कराएगी, बल्कि काशी की सेवा संस्कृति की एक नई मिसाल भी पेश करेगी।  

अमरनाथ यात्रा में हाईटेक सुरक्षा कवच, ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ से हर गतिविधि पर रहेगी नजर

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में सालाना श्री अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए अनंतनाग ज़िले की पुलिस ने ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ शुरू किया है, जो एक व्यापक निगरानी और सुरक्षा पहल है, जिसे पूरे यात्रा मार्ग पर ज़मीन से आसमान तक चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए तैयार किया गया है। गौरतलब है कि श्री अमरनाथ यात्रा अगले हफ़्ते अनंतनाग में पहलगाम और गांदरबल में बालटाल दोनों रास्तों से शुरू हो रही है। इसके लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किये गये हैं। सरकार ने जम्मू से गुफा मंदिर तक जाने वाले दोनों यात्रा मार्गों को ‘नो-फ़्लाई ज़ोन’ घोषित किया है। पवित्र गुफा मंदिर तक जाने वाले दो पारंपरिक रास्तों में से एक पहलगाम वाला रास्ता चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी से होकर गुज़रता है और दक्षिण कश्मीर हिमालय में लगभग 12,756 फ़ुट की ऊंचाई पर स्थित गुफा मंदिर पर समाप्त होता है। ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ के तहत अनंतनाग पुलिस ने आधुनिक तकनीक और रणनीतिक रूप से जवानों की तैनाती के ज़रिए कई स्तरों वाला सुरक्षा और निगरानी तंत्र तैयार किया है। पुलिस के एक बयान में कहा गया, “ हवाई निगरानी के लिए अहम जगहों पर पांंच ड्रोन तैनात किये जा रहे हैं, जो रियल-टाइम (सही समय पर) निगरानी और हालात की बेहतर जानकारी देंगे। हवाई निगरानी नेटवर्क किसी भी उभरती हुई स्थिति का तुरंत आकलन करने और ज़मीनी इकाइयों द्वारा त्वरित कार्रवाई करने में मदद करता है।” पुलिस के अनुसार ज़मीन पर निगरानी क्षमता को मज़बूत करने और इलाके पर बेहतर नियंत्रण रखने के लिए संवेदनशील जगहों पर 28 रणनीतिक ‘मचान मोर्चे’ (ऊंचे निगरानी पोस्ट) बनाये गये हैं। सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत करने और प्रभावी कार्रवाई की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए तय जगहों पर 22 विशेष रूप से प्रशिक्षित निशानेबाज टीमें भी तैनात की गयी हैं। निगरानी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए, यात्रा मार्ग पर अहम जगहों पर 416 हाई-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे और चेहरा पहचानने वाली प्रणाली (ईआरएस) स्थापित की गयी है।  पुलिस ने कहा, “यह प्रणाली लगातार रियल-टाइम निगरानी करते हैं और संदिग्ध गतिविधियों या हरकतों की समय पर पहचान करने में मदद करते हैं, जिससे सुरक्षा के एहतियाती उपाय मज़बूत होते हैं।” ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ के ज़रिए, अनंतनाग पुलिस ने आसमान और ज़मीन पर अपनी नज़रें प्रभावी ढंग से जमा ली हैं और एक ऐसा बेहतरीन निगरानी नेटवर्क बनाया है, जो यात्रा मार्ग की पूरी निगरानी सुनिश्चित करता है। पुलिस ने कहा, “यह पहल सभी तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित माहौल देने के लिए आधुनिक तकनीक और पेशेवर पुलिसिंग के तरीकों का इस्तेमाल करने के प्रति अनंतनाग पुलिस की प्रतिबद्धता को दिखाती है।”

Amarnath Yatra 2026: यात्रियों की हर पल की लोकेशन पर रहेगी नजर, भोपाल से होगा मॉनिटरिंग कंट्रोल

भोपाल अमरनाथ यात्रा के लिए तैयारियां शुरू हो गई है। पिछले साल अमरनाथ यात्रा के पहले पहलगाम हमले के बाद यात्रियों की सुरक्षा के पूरे इंतजाम श्राइन बोर्ड द्वारा किए जा रहे हैं। यात्रा के लिए पंजीयन कराने वाले यात्रियों को आरएफआईडी कार्ड रेडियो फिक्वेंसी पहचान पत्र यात्रा शुरू करने से पहले लेना होगा। साथ ही घोड़े, खच्चर, पालकी वालों के लिए भी इस बार श्राइन बोर्ड ने क्यूआरकोड बनाए हैं, जिससे यात्री इसे स्केन कर संबंधित की पूरी जानकारी ले सकेंगे। इस क्यूआर कोड के जरिए जत्थे की रियल टाइम लोकेशनस भी मिल सकेगी। इसी प्रकार भोपाल से जाने वाले मंडल भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम कर रहे है। इसके लिए यात्रियों का एक वाट्सऐप क्यूआरकोड बनाया जाएगा, जिससे स्केन करते ही ग्रुप से जुड़कर यात्री की जानकारी ले सकेंगे। यात्रियों के लिए कंट्रोल रूम, क्यूआर कोड तैयार करेंगे ओम शिव शक्ति सेवा मंडल के सचिव रिंकू भटेजा ने बताया कि हमारे मंडल की ओर से 15 जत्थे अलग-अलग तारीखों में रवाना होंगे। पहला जत्था 29 जून को रवाना होगा। हर जत्थे का नेतृत्व करने के लिए पांच लोगों की टीम रहेगी। भोपाल में भी एक कंट्रोल रूम मंडल का रहेगा, जहां सभी यात्रियों की जानकारी रहेगी। बालटाल, पहलगाम सहित यात्रा मार्ग से जत्थे के लोग यहां संपर्क में रहेंगे। साथ ही हर जत्थे के लिए एक वाट्सऐप क्यूआरकोड बनाया जाएगा, यह हर यात्री को दिया जाएगा। अगर यात्रा के दौरान घर परिवार के लोगों का किसी यात्री से संपर्क नहीं हो रहा है, तो परिजन सीधे क्यूआर कोड स्कैन कर ग्रुप से जुड़ जाएंगे और संबंधित यात्री के बारे में जानकारी ले सकेंगे। कई बार यात्रा के दौरान बारिश सहित अन्य कारणों से मोबाइल बंद हो जाते हैं, ऐसे में परिवार के लोग परेशान हो जाते हैं। ऐसे में ग्रुप से जुड़कर परिजन यात्री की जानकारी ले पाएंगे। ग्रुप के जिस सदस्य को जानकारी रहेगी, वह संबंधित यात्री का परिजनों से संपर्क करा पाएगा। युवाओं का ग्रुप निभाएगा भागीदारी जय बाबा अमरनाथ बर्फानी यात्रा मंडल के युवा राम मालवीय ने बताया कि इस बार अधिकांश फ्रेशर्स लोग जा रहे हैं, जो पहली बार यात्रा करेंगे। इसमें कुछ ऐसे यात्री भी रहेंगे जो पहले भी यात्रा कर चुके हैं। सभी एक दूसरे से कनेक्ट रहेंगे। जो फ्रेशर्स जा रहे है, उन्हें रोजाना योग, प्राणायाम, सैर आदि कराई जा रही है। जत्थे में मंडल की कार्यकारिणी के सदस्य भी रहेंगे। पहला जत्था 5 और दूसरा 14 जुलाई को रवाना होगा। आरएफआईडी कार्ड लेना जरूरी होगा अमरनाथ यात्रा के लिए श्राइन बोर्ड ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से पंजीकृत भक्तों को यात्रा के दौरान आरएफआईडी लेना जरूरी होगा। यह कार्ड जम्मू, पहलगाम, बालटाल सहित अन्य सेंटरों से मिलेगा। इस कार्ड में जीपीएस ट्रैकिंग की क्षमता रहेगी, जिससे तीर्थयात्रियों की आवाजाही, ट्रेक, आपात स्थिति पर उनके संपर्क, निगरानी में मदद मिलेगी। बिना कार्ड के किसी भी तीर्थयात्री को अमरनाथ गुफा की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही स्थानीय ड्राइवर, दुकानदारों और यात्रा मार्ग में सहायक पिट्टू, खच्चर वालों को पुलिस वेरिफिकेशन करने के बाद क्यूआर कोड जारी किए जाएंगे।

QR कोड स्कैन करते ही मिलेगी पूरी जानकारी, अमरनाथ यात्रा में हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था

श्रीनगर इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. इस बार दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा के बेहद कड़े और आधुनिक इंतजाम किए हैं. अमरनाथ यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की जा रही है. इतिहास में पहली बार, अमरनाथ यात्रा मार्ग पर सेवा देने वाले सभी टट्टू वालों (घोड़े वाले), कुलियों, दुकानदारों और टैक्सी ड्राइवरों को एक विशेष 'पहचान' ऐप (Pehchan App) से जोड़ा गया है. 'पहचान' ऐप के तहत, पुलिस वेरिफिकेशन के बाद इन सभी सेवा देने वालों को एक विशेष क्यूआर कोड जारी किया जा रहा है. यात्रा पर आने वाला कोई भी श्रद्धालु अपने मोबाइल से इस कोड को स्कैन करके उस व्यक्ति की सही पहचान कर सकता है. क्या है 'पहचान' ऐप और कैसे करेगा काम? अनंतनाग के SSP आमोद अशोक नागपुरे ने बताया कि इस साल की सुरक्षा व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव 'पहचान' ऐप की शुरुआत है. उन्होंने कहा, ये एक बहुत एडवांस और अनोखी पहल है. इसके जरिए यात्रा मार्ग पर काम करने वाले सभी सेवा प्रदाताओं- जैसे घोड़े वाले, पिट्ठू (कुली) और टैक्सी ड्राइवरों का ऐप आधारित वेरिफिकेशन किया जा रहा है. एसएसपी ने आगे कहा, जांच पूरी होने के बाद पुलिस की तरफ से उन्हें एक खास क्यूआर कोड दिया जाता है. इस क्यूआर कोड की सबसे बड़ी खासियत ये है कि कोई भी पर्यटक, श्रद्धालु या सुरक्षाकर्मी अपने साधारण मोबाइल फोन से इसे स्कैन कर सकता है. स्कैन करते ही उस सेवा प्रदाता की पूरी क्रेडेंशियल सामने आ जाएगी. इससे यात्री पूरी तरह आश्वस्त हो सकेंगे कि उनके साथ मौजूद व्यक्ति पुलिस की ओर से वेरिफाइड है. तैनात होंगी केंद्रीय बलों की 140 कंपनियां SSP आमोद अशोक नागपुरे ने सुरक्षा तैयारियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस साल तीर्थयात्रा की सुरक्षा के लिए अकेले पूरे जिले में CAPF की 140 कंपनियां तैनात की जा रही हैं. इसके साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए कई नए और कड़े कदम भी उठाए गए हैं. श्रद्धालुओं को मिलेगा डर से छुटकारा जम्मू-कश्मीर पुलिस के इस हाई-टेक कदम से अमरनाथ यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी. पहले यात्रा के दौरान अनजान सेवा प्रदाताओं पर भरोसा करना यात्रियों के लिए एक बड़ी चुनौती होता था. लेकिन अब 'पहचान' ऐप और क्यूआर कोड तकनीक के आने से किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान करना बेहद आसान हो जाएगा. स्थानीय प्रशासन को उम्मीद है कि इस तकनीक की मदद से न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यात्रियों और स्थानीय सेवा प्रदाताओं के बीच भरोसा भी बढ़ेगा. फिलहाल, प्रशासन यात्रा शुरू होने से पहले सभी दुकानदारों और मजदूरों का वेरिफिकेशन काम तेजी से पूरा करने में जुटा है.

अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई अलर्ट, यात्रा मार्ग का निरीक्षण करेंगी विशेष टीमें

 जम्मू  श्री अमरनाथ यात्रा की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन अनंतनाग ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। उपायुक्त अनंतनाग एवं यात्रा अधिकारी पहलगाम मार्ग बिलाल मोहुउद्दीन भट्ट ने बुधवार को अधिकारियों की बैठक लेकर यात्रा मार्ग, बेस कैंपों और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर एडवांस पार्टियों की तैनाती की योजना की समीक्षा की। यात्रा तीन जुलाई से शुरु हो रही है। बैठक में एडीसी, एसीआर, एसडीपीओ पहलगाम, तहसीलदारों सहित राजस्व, पुलिस, आरडीडी, एसडीआरएफ, अग्निशमन एवं आपात सेवा, पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने राजस्व, पुलिस, एसडीआरएफ, आरडीडी, आईएफसी और पीडब्ल्यूडी विभागों के अधिकारियों की चार विशेष टीमें गठित की हैं, जो नुनवान बेस कैंप से पवित्र गुफा तक पूरे यात्रा मार्ग का भौतिक निरीक्षण करेंगी। टीमों को मार्ग की स्थिति, संवेदनशील क्षेत्रों, स्वास्थ्य शिविरों, लंगरों, दुकानों और टेंटों के लिए सुरक्षित स्थानों की पहचान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हर छोटे-बड़े पहलू का किया जा रहा विस्तृत आकलन उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा मार्ग पर हर छोटे-बड़े पहलू का विस्तृत आकलन किया जाए, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने फ्लैश फ्लड संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और असुरक्षित स्थानों पर किसी भी प्रकार की स्थापना रोकने के निर्देश भी दिए। इसी क्रम में जिला विकास आयुक्त ने खनाबल में यात्रा के अंतर्गत पूंजीगत व्यय और अन्य कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। बैठक में पीडब्ल्यूडी, जल शक्ति, स्वास्थ्य, पर्यटन, बिजली, एफसीएस एंड सीए सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। 223 कार्यों को मंजूरी, 193 आवंटित, 69 प्रगति पर अधिकारियों ने बताया कि यात्रा से संबंधित कुल 272 कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 100 पूंजीगत व्यय और 172 रेवेक्स परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें से 223 कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, 215 कार्यों के टेंडर जारी किए जा चुके हैं और 193 कार्य आवंटित किए गए हैं। वर्तमान में 69 कार्य प्रगति पर हैं जबकि दो कार्य पूरे हो चुके हैं। बैठक में सड़क संपर्क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता और यात्रियों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाओं की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी जरूरी कार्य गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। प्रशासन ने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और नियमित निगरानी के जरिए अमरनाथ यात्रा 2026 को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारु बनाने के प्रयास जारी हैं।