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मौत का बुलाव,नौकरी के लालच में रूसी सेना में जबरन भर्ती हुआ था हरियाणा का लाल, आखिरी कॉल में मांगी थी जान की भीख

फतेहाबाद हरियाणा के फतेहाबाद जिले के कुम्हारिया गांव में मातम छाया हुआ है। 23 साल के अंकित जांगड़ा की अस्थियां और अवशेष शनिवार को जब उसके गांव पहुंचे, तो न केवल एक परिवार का सपना टूटा, बल्कि उन सैकड़ों भारतीय युवाओं की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान लग गया जो बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाकर युद्ध की आग में फंस गए हैं। अंकित ने आखिरी बार कहा था, "हमें बचा लीजिए… हमारी जान किसी भी पल खतरे में पड़ सकती है।" 'द ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 10 सितंबर 2025 को अंकित जांगड़ा ने अपनी जान की भीख मांगी थी। वह रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी इलाके में फंसा हुआ था। उस कॉल के 24 घंटे के भीतर उससे संपर्क टूट गया। महीनों के इंतजार और प्रार्थनाओं के बाद, शुक्रवार को उसके परिवार को वह खबर मिली जिससे वे सबसे ज्यादा डरते थे। अंकित अब इस दुनिया में नहीं रहा। कैसे शुरू हुआ यह 'मौत का सफर'? अंकित जांगड़ा फरवरी 2025 में स्टडी वीजा पर मॉस्को गया था। वहां उसने एक कॉलेज में लैंग्वेज कोर्स में दाखिला लिया और अपना खर्च चलाने के लिए एक रेस्टोरेंट में पार्ट-टाइम काम करना शुरू किया। अंकित और उसके दोस्त विजय पूनिया को एक महिला एजेंट ने ऊंचे वेतन वाली नौकरियों का लालच दिया। पढ़ाई और छोटी नौकरियों के बहाने गए इन युवाओं को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया। अंकित के साथ हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लगभग 15 अन्य युवक भी थे। वापसी का रास्ता सिर्फ मौत अंकित ने अपनी आखिरी बातचीत में जो खुलासे किए, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले थे। उसने बताया कि उन्हें रूस से करीब 200-300 किमी दूर कब्जे वाले क्षेत्र सेलिडोव में रखा गया था। उन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद 20 लाख रुपये और 1.5-2 लाख रुपये मासिक वेतन का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें कभी वहां से जाने नहीं दिया गया। ये युवा ब्रेड और जैम पर जिंदा थे। अंकित ने बताया था कि उनके समूह के 5 साथियों की पहले ही मौत हो चुकी थी। बंदूक की नोक पर भर्ती जब इन युवाओं ने वापस घर जाने की जिद की, तो रूसी अधिकारियों ने उन पर बंदूकें तान दीं। अधिकारियों का कहना था, "या तो यहां मरोगे या दुश्मन को मारोगे, वापस जाने का कोई रास्ता नहीं है।" परिवार की अंतहीन गुहार अंकित के बड़े भाई रघुवीर जांगड़ा और पूरे परिवार ने अपने बेटे को बचाने के लिए हर दरवाजा खटखटाया। परिवार ने दिल्ली और चंडीगढ़ के अधिकारियों, रूसी दूतावास, विदेश मंत्रालय (MEA) और रक्षा मंत्रालय से बार-बार गुहार लगाई। सिरसा सांसद कुमारी शैलजा और रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी विदेश मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद, अंकित को जिंदा वापस नहीं लाया जा सका। अब परिवार की सबसे बड़ी चिंता अंकित के दोस्त विजय पूनिया को लेकर है, जिसका अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। रूस में जबरन भर्ती का पैटर्न अंकित की कहानी कोई इकलौती घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां भारतीय युवाओं को हेल्पर या मल्टी-टास्किंग स्टाफ के नाम पर रूस बुलाया गया और फिर उन्हें अग्रिम मोर्चे पर लड़ने के लिए मजबूर किया गया। भारत में सक्रिय कई संदिग्ध एजेंट सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे हैं। भारत सरकार ने रूस से कई बार अनुरोध किया है कि धोखे से भर्ती किए गए भारतीयों को कार्यमुक्त किया जाए, लेकिन युद्ध की भीषणता के बीच यह प्रक्रिया बेहद जटिल और धीमी साबित हो रही है। गांव में पसरा सन्नाटा शनिवार को जब अंकित का पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंचा और फिर उसके गांव कुम्हारिया ले जाया गया, तो वहां का माहौल हृदयविदारक था। गांव वाले आक्रोशित हैं और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनके कई सवाल हैं। उस महिला एजेंट पर कार्रवाई कब होगी जिसने इन युवाओं को मौत के मुंह में धकेला? विजय पूनिया कहां है? क्या सरकार अन्य लापता युवाओं को सुरक्षित वापस लाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी?

रूस-यूक्रेन युद्ध: पुतिन पर हमले की साजिश फेल, डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी और जेलेंस्की के जवाबी हमले की संभावना

मॉस्को  रूस-यूक्रेन जंग का शोला भड़क उठा है. रूस-यूक्रेन युद्ध में एक बड़ा ट्विस्ट आया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर बड़ा ड्रोन अटैक हुआ है. व्लदामीर पुतिन को नींद में ही उड़ाने की साजिश थी. यही कारण है कि 28-29 दिसंबर 2025 की आधी रात पुतिन के नोवगोरोद स्थित आवास पर 91 ड्रोनों से हमला हुआ. मगर हमले की यह साजिश नाकाम हो गई. हमले की शक की सूई सीधे यूक्रेन पर गई है. जिस तरह से पुतिन पर 91 ड्रोन से अटैक हुआ, उससे साफ लग रहा है कि जंग को रुख बदलने की यूक्रेन ने पूरी कोशिश की थी. हालांकि, रूस ने यूक्रेन के प्लान को फेल कर दिया. इस अटैक से पुतिन गुस्से से लाल हैं. वह प्रतिशोध की आग में जल रहे हैं. अब सवाल यह है कि पुतिन क्या जवाबी हमला करेंगे? अगर हां, तो फिर रूस के जवाबी हमले में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की बच पाएंगे? इस अटैक से युद्ध के और तेज होने के आसार हैं. इससे पूरी दुनिया समेत डोनाल्ड ट्रंप भी चिंतित हैं. पुतिन के आवास पर ड्रोन अटैक पर रूस ने सीधे यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि यूक्रेन ने उत्तरी रूस में स्थित राष्ट्रपति आवास पर लंबी दूरी के ड्रोन से हमला करने की कोशिश की. रात के समय लंबी दूरी वाले ड्रोन दागे गए, जिन्हें रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने मार गिराया. सूत्रों की मानें तो यह सब कुछ रात के समय हुआ. पुतिन मॉस्को के अपने घर में सो रहे थे. तभी यूक्रेन ने ड्रोन से हमला करने की कोशिश की. ड्रोन में विस्फोटक लगा था. लेकिन रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने ड्रोन को गिरा दिया. बहरहाल, अभी पुतिन सुरक्षित हैं. पुतिन और ट्रंप के बीच बातचीत     पुतिन ने खुद इस अटैक की सूचना अमेरिका को भी दी है.     पुतिन ने कहा कि यह हमला कायराना हरकत है. रूस इसका जवाब जरूर देगा. उन्होंने यूक्रेन को चेतावनी दी कि अब और नुकसान होगा.     बहरहाल, यूक्रेन को जवाब देने के लिए रूसी सेना तैयार है. रूस अब इसका बदला लेने की कोशिश करेगा. रूसी सेना कीव पर हमला कर सककी है.     अब जेलेंस्की का बंकर भी निशाने पर होगा.     हालांकि, यूक्रेन इस अटैक से पल्ला झाड़ रहा है. जेलेंस्की ने इस अटैक को झूठा करार दिया है और कहा कि यह सब झूठ है. बदला लेगा रूस? विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि रविवार-सोमवार की दरमियानी रात को हुआ ड्रोन हमला कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका क्योंकि ड्रोन को मार गिराया गया था. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि रूस सही समय पर जवाब देने का अधिकार रखता है. लावरोव ने यूक्रेनी हमलों को कीव और उसके सहयोगियों द्वारा शांति वार्ता को पटरी से उतारने की कोशिश बताया. उन्होंने आगे कहा कि मॉस्को यूक्रेन के साथ शांति वार्ता पर अपना रुख बदलेगा, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम के साथ शांति वार्ता जारी रहेगी. रूसी टीवी चैनलों के अनुसार, क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा, ‘पुतिन ने सोमवार को दोनों नेताओं के बीच हुई फोन कॉल में राष्ट्रपति आवास पर हमले के बारे में ट्रंप को बताया. राष्ट्रपति ट्रंप हैरान थे.’ यूक्रेन का प्लान कैसे ध्वस्त सूत्रों का कहना है कि यूक्रेन इस जंग को जीतने के लिए सीधे शतरंज की खेल की तरह राजा को ही चेकमेट करना चाहता था. यूक्रेन सीधे पुतिन को खत्म करके युद्ध जीतना चाहता था. मगर यह साजिश फेल हो गई. अब पुतिन के बदले से जेलेंस्की को खौफ में होंगे. इस अटैक के बाद जेलेंस्की की सुरक्षा बढ़ा दी गई होगी. यूक्रेन की सेना अलर्ट पर होगी. रूस कभी भी बम-गोले बरसा सकता है. रूस-यूक्रेन युद्ध तीन साल से चल रहा है. ट्रंप इसे खत्म करने की कोशिशों में लगे हैं. मगर पुतिन पर हुए इस अटैक ने शांति की उम्मीदों को खत्म कर दिया है. रूस के बयान से साफ लग रहा है कि रूस इसका बदलेगा और ऐसा हुआ तो युद्ध की आग और भड़क सकती है. ट्रंप ने कैसे रिएक्ट किया? बहरहाल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अटैक पर नाराजगी जताई है. उनकी व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात हुई है. पुतिन ने उन्हें साजिश के बारे में बताया. ट्रंप ने बताया कि पुतिन गुस्से से लाल हैं. ट्रंप ने कहा कि यह गलत समय है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि घर पर हमला करना गलत है. ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह बिल्कुल पसंद नहीं आया और यह एक बहुत नाज़ुक समय है. उन्होंने हालात को देखते हुए टॉमहॉक मिसाइलों को रोक दिया, क्योंकि यह हमला करने का सही वक्त नहीं है. उन्होंने कहा कि एक बात आक्रामक रुख अपनाने की हो सकती है, लेकिन किसी के घर पर हमला करना बिल्कुल अलग बात है और फिलहाल ऐसा करना गलत है. ट्रंप ने यह भी कहा कि इस हमले को लेकर पुतिन काफी गुस्से में थे. यूक्रेन जंग थमने की आखिरी उम्मीद भी टूटी? रूस-यूक्रेन जंग की आग और भड़क सकती है. डोनाल्ड ट्रंप भी अब युद्ध की आग को नहीं बुझा पाएंगे. कारण कि रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के घर पर बड़ा अटैक हुआ है. बीती आधी रात को पुतिन के नोवगोरोद स्थित आवास पर 91 ड्रोनों से हमला हुआ. इस अटैक के साथ ही यूक्रेन जंग थमने की आखिरी उम्मीद भी टूटती नजर आ रही है. इस अटैक से पुतिन गुस्से में हैं. वह अब बदले की आग में जल रहे हैं. ट्रंप भी काफी निराश हैं. यूक्रेन अब टारगेट पर है. इस तरह रूस-यूक्रेन युद्ध अब विनाशकारी मोड़ पर आ चुका है. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह हमला सही नहीं था. ऐसा नहीं होना चाहिए था. सबसे पहले जानते हैं कि क्या हुआ. दरअसल, 28-29 दिसंबर 2025 की आधी रात पुतिन के नोवगोरोद स्थित आवास पर 91 ड्रोनों से हमला हुआ. हालांकि, रूस के एयर डिफेंस ने सभी ड्रोनों को नष्ट कर दिया. इस अटैक में पुतिन को कुछ नहीं हुआ. वह पूरी तरह सेफ हैं. इस हमले के पीछे यूक्रेन को ही बताया जा रहा है. यूक्रेन के इस अटैक से पुतिन गुस्से … Read more

इंटरव्यू में बिजली कटौती के बीच जेलेंस्की ने दिखाया यथार्थ: पत्रकार को कहा – यही सच

कीव  रूस-यूक्रेन युद्ध को चार साल बीत गए हैं. इतने सालों से युद्ध कर रहे रूस और यूक्रेन में बहुत कुछ बदल गया है. रूस के कुछ हिस्सों में युद्ध का बुरा प्रभाव दिखता है तो यूक्रेन की राजधानी कीव तक में हाल ये है कि ऊर्जा सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं. इसकी एक बानगी तब देखने को मिली, जब वे मरीनस्की पैलेस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेन्स्की के साथ ब्रिटिश अखबार द गार्जियन का इंटरव्यू चल रहा था. दरअसल ये इंटरव्यू उस वक्त चर्चा में आ गया जब बातचीत के दौरान दो बार बिजली चली गई. इंटरव्यू की वीडियो रिकॉर्डिंग यूट्यूब पर जारी की गई है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि बातचीत के बीच अचानक पूरा हॉल अंधेरे में डूब जाता है. पहली बार बिजली इंटरव्यू की शुरुआत में ही चली गई. इसके बाद कुछ सेकंड तक कमरे में हलचल रही, फिर बैकअप जनरेटर चालू होने के बाद रोशनी लौटी और बातचीत दोबारा शुरू हुई. बोलते-बोलते छा गया अंधेरा इंटरव्यू को जब फिर शुरू किया गया, तो कुछ देर बाद दूसरी बार भी लाइट गुल हो गई. इस बार बातचीत रुकने के बजाय बिना ट्रांसलेटर के ही जारी रही, जब तक कि बैकअप पावर दोबारा चालू नहीं हुआ. इस इंटरव्यू को पत्रकार ल्यूक हार्डिंग रिकॉर्ड कर रहे थे. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि जेलेंस्की ने इस पूरे वाक्ये को बेहद सहजता से लिया और बिजली आने के बाद मुस्कुराते हुए कहा – ‘ये कोई आतंकी हमला नहीं है… ये हमारी जिंदगी की हकीकत है. कीव में और बाकी जगहों पर भी, बिजली का जाना अब आम बात है.’ ऊर्जा ढांचे को पहुंचा है नुकसान जेलेंस्की का यह बयान यूक्रेन की मौजूदा स्थिति को दर्शाता है, जहां रूसी हमलों के कारण ऊर्जा ढांचे को बार-बार नुकसान पहुंचा है. राजधानी कीव समेत कई शहरों में बिजली आपूर्ति अक्सर बाधित रहती है और लोग जनरेटर या बैकअप सिस्टम पर निर्भर रहते हैं. इस घटना का वीडियो वायरल हुआ तो सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा कि ये पश्चिम को दिखाने की कोशिश है कि यूक्रेन किन हालात से जूझ रहा है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ यूक्रेन में स्थिति ऐसी है, यूक्रेन ने भी रूस के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाकर हमले किए हैं, जिसकी वजह से रूस के कई इलाके पूरी-पूरी रात अंधेरे में डूबे रहे. रूस वार्ता के लिए है तैयार  हालांकि इस बीच रूस की ओर से शांति को लेकर एक ऐसी पहल की गई है, जो एक बार फिर से रूस-यूक्रेन युद्ध में किसी समझौते की ओर इशारा करती है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के जवाब में कहा है कि रूस युद्ध का अंत करेगा लेकिन जब वो अपने लक्ष्यों को पा लेगा. वो चाहता है कि ये राजनीतिक और कूटनीतिक तरीके से हो.