samacharsecretary.com

लोक मिलनी कार्यक्रम में भगवंत मान ने गिनाईं योजनाएं, बोले- पंजाबियों की भलाई सबसे जरूरी

अमृतसर   मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक बार फिर साफ किया कि आम आदमी पार्टी सरकार की प्राथमिकता पंजाब और इसके लोग हैं, जबकि कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल कुर्सी की लड़ाई में उलझे हुए हैं. जिंदवड़ी गांव में आयोजित लोक मिलनी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि आप सरकार से पहले केवल 22 फीसदी के मुकाबले अब पंजाब के 80 फीसदी खेतों तक नहरी पानी पहुंच चुका है और इसे 100 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है।  मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि पंजाब को अपने पानी, चंडीगढ़ और पंजाब विश्वविद्यालय की रक्षा के लिए भाजपा और अकाली दल से दूर रहने की जरूरत है, उन्होंने सरकार के 14,000 किलोमीटर नहरी पानी की पाइपलाइन नेटवर्क, मुफ्त बिजली, मैरिट आधारित नौकरियों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार एक खुशहाल और रंगला पंजाब बनाने के लिए काम कर रही है।  इस लोक मिलनी के कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक्स पर लिखा, “श्री आनंदपुर साहिब के गांव जिंदवड़ी में लोगों के साथ दिल की बातें साझा कीं. पारंपरिक पार्टियों ने हमेशा कुर्सी और परिवारवाद की राजनीति की है, लेकिन हमारी सरकार आम लोगों के लिए काम कर रही है. हमने युवाओं को मैरिट पर नौकरियां, बेहतरीन शिक्षा, खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन और मुफ्त बिजली दी है. गांवों के विकास को तेज करने के लिए हमने छह पंचायतों को 20-20 लाख रुपये के चेक भी सौंपे. हमारा एकमात्र उद्देश्य खुशहाल और प्रगतिशील ‘रंगला पंजाब’ बनाना है। इंकलाब जिंदाबाद।  विपक्षी पार्टियों पर बरसे मान लोक मिलनी के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "हमारी सरकार के पिछले साढ़े चार साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान हमने राज्य के लोगों की भलाई और पंजाब की तरक्की के लिए पूरी लगन से काम किया है. दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों ने हमेशा राज्य को बेरहमी से लूटा है और लोगों के संसाधनों की लूट कर उनका शोषण किया है. ये लोग किसी रहम के हकदार नहीं हैं और उन्हें उनके पापों का सबक सिखाया जाना चाहिए।  उन्होंने कहा, "कुछ दिन पहले तक अकाली नेता सुखबीर बादल भाजपा के खिलाफ झंडा उठाए घूम रहे थे, लेकिन अब वह राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए पबों के बल आ गए हैं. उनका एकमात्र उद्देश्य बिना किसी वैचारिक समानता के सत्ता हासिल करके राज्य को तबाह करना है, जो पंजाब के लिए बेहद घातक होगा. ये लोग अवसरवादी हैं, जिनका राज्य से कोई सरोकार नहीं है. मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे इन पार्टियों के गुमराह करने वाले हथकंडों में कभी न आएं, जिन्हें पंजाब की कोई चिंता नहीं है।  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आगे कहा, "इन पार्टियों का राज्य और इसके लोगों के खिलाफ काम करने का रिकॉर्ड दागी रहा है और इन्हें कभी माफ नहीं किया जा सकता, भाजपा पंजाब विरोधी मानसिकता की शिकार है और इसने हमेशा पंजाब के साथ अन्याय किया है, चाहे वह पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बी.बी.एम.बी.), सतलुज यमुना लिंक (एस.वाई.एल.) नहर, हरिके नहर, गणतंत्र दिवस की झांकियां, ग्रामीण विकास फंड (आर.डी.एफ.) या सीमावर्ती क्षेत्र के फंडों का मुद्दा हो।  बीजेपी पर हमला बोलते हुए मान ने कहा- "काले कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान शहीद हुए पंजाब के 700 से अधिक किसानों की हत्या से भाजपा के हाथ रंगे हुए हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा, "आप अपनी जनहितैषी और विकासोन्मुखी नीतियों के कारण देशभर में अपने पंख फैला रही है. राजस्थान में स्थानीय निकायों के चुनावों में पार्टी की जीत इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है. पारंपरिक पार्टियों ने अपने बेबुनियाद और विभाजनकारी हथकंडों से हमेशा आम आदमी को मूर्ख बनाया है।  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "वास्तव में इन पार्टियों ने अपने सत्ता के दिनों में एक-दूसरे के हितों की रक्षा की, जिसके कारण इनके कुकर्म कभी सामने नहीं आए. आज लोग ‘आप’ को चुन रहे हैं और इस पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘झाड़ू’ राज्य और देश की राजनीतिक व्यवस्था की सफाई कर रहा है, इसलिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।  अकाली दल को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "अपने लंबे कुशासन के दौरान अकालियों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी का पाप किया, इस घिनौने अपराध के दोषियों को संरक्षण दिया और निर्दोष लोगों पर गोलीबारी की अनुमति दी. अकालियों ने पंजाबियों की मानसिकता को भावनात्मक ठेस पहुंचाने और राज्य में कई तरह के माफिया को संरक्षण देने के अलावा राज्य को बेरहमी से लूटा, अकालियों को दिया गया हर वोट बेअदबी के पक्ष में होगा।  उन्होंने कहा, "अकाली नेतृत्व को कभी माफ नहीं किया जा सकता क्योंकि वह राज्य की कई पीढ़ियों की नस्लकुशी के लिए जिम्मेदार था, क्योंकि उनके लंबे कुशासन के दौरान नशे के कारोबार को संरक्षण दिया गया और यह फलता-फूलता रहा. लोग इन पार्टियों के गुमराह करने वाले प्रचार में नहीं आएंगे और आने वाले दिनों में इन्हें उचित सबक सिखाएंगे।  अकाली नेता सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "सुखबीर बादल जमीनी हकीकतों से अनजान हैं क्योंकि उन्होंने पूरी जिंदगी सुख-सुविधाओं और आलीशान माहौल में बिताई है. सुखबीर बादल कॉन्वेंट के पढ़े हुए हैं, जिन्हें राज्य की बुनियादी भौगोलिक स्थिति का भी ज्ञान नहीं है, लेकिन वह पंजाब में सत्ता हासिल करना चाहते हैं. बाकी सब छोड़िए, पूर्व उपमुख्यमंत्री राज्य की बुनियादी फसलों में भी अंतर नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें बुनियादी मुद्दों के बारे में बहुत कम ज्ञान है।  मुख्यमंत्री ने दावा करते हुए कहा, "मैं राज्य का बेमिसाल विकास सुनिश्चित करने के लिए अपना खून-पसीना बहा रहा हूं और हर गुजरते दिन के साथ हम लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कई नई जनहितैषी पहल कर रहे हैं. पुराने नेताओं के विपरीत मैंने सरकारी खजाने से एक पैसा भी नहीं मांगा, बल्कि यह सुनिश्चित किया है कि करदाताओं का एक-एक रुपया जनकल्याण के लिए समझदारी से खर्च किया जाए।  उन्होंने कहा, "लोगों का बेटा और भाई होने के नाते मैंने पुराने नेताओं की तरह आलीशान जिंदगी जीने के बजाय लोगों के दुख-दर्द और मुश्किलों को साझा करने पर ध्यान केंद्रित किया है, पहले किसी … Read more

काले झंडे, कर्मचारियों का विरोध और स्कूलों से जुड़े मुद्दे… पंजाब में मान सरकार पर बढ़ी सियासी घेराबंदी

चंडीगढ़ पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए कुछ विवादों ने सियासी रंग ले लिया है। राजनीतिक दल इन मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे हैं और इनके जरिये सरकार को घेरने के साथ चुनावी समीकरण साधने की कोशिश में हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई मामलों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मुख्य सचिव, डीजीपी समेत अन्य अधिकारियों से जांच के बाद रिपोर्ट मांगी है। अमूमन विधानसभा चुनाव से पहले धरने और प्रदर्शन सियासी माहौल को गर्म करते हैं। राजनीतिक दल भी इन आंदोलनों को अपने एजेंडे से जोड़ते हैं। पंजाब में पिछले कुछ दिनों में सामने आए इन विवादों ने इस सिलसिले को और तेज कर दिया है। विपक्षी दल जहां इन्हें सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं वहीं सरकार डैमेज कंट्रोल में जुटी है।  काला झंडा दिखाने से लेकर लाठीचार्ज तक मोहनजीत सिंह का मामला : सुनाम के शेरों गांव में मुख्यमंत्री की लोक मिलनी के दौरान नशे के खिलाफ आवाज उठाते हुए मोहनजीत सिंह ने छत पर खड़े होकर काला झंडा फहराया था। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। बाद में मोहनजीत ने पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप लगाया। भाजपा, शिअद और कांग्रेस के नेताओं ने उसका समर्थन करते हुए सरकार को घेरा। राज्यसभा सांसद तरुण चुघ की शिकायत पर आयोग ने मुख्य सचिव, डीजीपी, संगरूर एसएसपी और डीसी से तत्काल जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। पांच करोड़ के आरोप : मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर दुराचार के आरोपी को बचाने के लिए कथित तौर पर पांच करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस रणजीत सिंह की शिकायत पर आयोग ने मुख्य सचिव और डीजीपी से जांच रिपोर्ट मांगी है। सफाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज : बरनाला में मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों पर पुलिस लाठीचार्ज के आरोप लगे। महिलाओं समेत प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का आरोप है। आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पूछा है कि लाठीचार्ज का आदेश किन परिस्थितियों में दिया गया और इसकी मंजूरी किस अधिकारी ने दी। घायलों की संख्या, चोटों की प्रकृति, चिकित्सा स्थिति और मुआवजे की जानकारी भी मांगी गई है। स्कूलों से छात्राओं और आवारा कुत्तों तक सीमावर्ती स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस : पंजाब के सीमावर्ती सरकारी स्कूलों में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाने के आरोप लगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सरकार की ओर से मोर्चा संभाला। आयोग ने मुख्य सचिव से राज्य, जिला और स्कूल स्तर की कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। मोगा में छात्राओं से कथित उत्पीड़न : सरकारी स्कूल में छात्राओं से कथित यौन उत्पीड़न के मामले में आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया। मुख्य सचिव और मोगा एसएसपी को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। शिक्षा विभाग प्रधानाचार्य को निलंबित कर चुका है। रूपनगर में बच्ची की मौत : आवारा कुत्तों के हमले में आठ वर्षीय बच्ची की मौत के मामले में भी आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया। पंजाब में आवारा कुत्तों के आतंक और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इन मामलों को लेकर विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ इन विवादों के और सियासी मुद्दा बनने के आसार हैं।

बिजली संकट पर इंजीनियरों ने CM भगवंत मान को भेजा SOS, राज्य में उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर

पटियाला  पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने राज्य में थर्मल और सोलर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की मांग की है। महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि पंजाब का बिजली क्षेत्र वित्तीय संकट और बिजली की कमी का सामना कर रहा है। बिजली की बढ़ती कमी से उद्योग, खेती और घरेलू खपतकर्ता प्रभावित हो रहे हैं। तत्काल कदम न उठाने पर आने वाले वर्षों में हालात गंभीर होंगे। पंजाब की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ती मांग से बहुत कम है। इससे पावरकाॅम को ऊर्जा विनिमय से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। राजपुरा और तलवंडी साबो के निजी थर्मल प्लांट कोयला भंडार बनाए रखने में विफल रहे हैं। इन प्लांटों में कोयले की भारी कमी है। यह सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों का सीधा उल्लंघन है। निवेश में देरी से महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता बढ़ेगी। इंजीनियरों के अनुसार पंजाब सरकार की ओर से सब्सिडी की राशि का भुगतान लंबित है। इसके अलावा कई सरकारी विभागों पर बिजली बिलों का भुगतान नहीं करने के कारण भी पावरकॉम पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। एसोसिएशन ने दावा किया है कि एआरआर में खर्चों का अनुमान कम रखे जाने के कारण टैरिफ में अनुचित कटौती हुई है। इससे पावरकॉम के राजस्व पर असर पड़ रहा है। इंजीनियरों के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में पावरकॉम को करीब 7,800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है। संकट के प्रमुख कारण एसोसिएशन के अनुसार, पंजाब को गैर-सौर और रात की उच्चतम मांग पूरी करने के लिए थर्मल उत्पादन क्षमता तुरंत बढ़ानी होगी। ऐसा न करने पर राज्य हर गर्मी में गंभीर बिजली की कमी के चक्र में फंसा रहेगा। पंजाब बिजली की मांग पूरी करने के लिए राज्य के बाहर से खरीदी गई बिजली और निजी उत्पादकों पर तेजी से निर्भर हो रहा है। इस आर्थिक बोझ के कारण तत्काल नीति समीक्षा की आवश्यकता है। क्षमता बढ़ाने में लगातार देरी से बिजली मांग और इन-स्टेट उत्पादन क्षमता का अंतर बढ़ रहा है। वित्तीय चुनौतियां और भविष्य की मांग पावरकाॅम की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। इसका मुख्य कारण पंजाब सरकार का बकाया सब्सिडी का भुगतान न करना है। मौजूदा वित्तीय साल में पावरकाॅम को करीब 7,800 करोड़ रुपये के राजस्व की कमी का सामना करना पड़ सकता है। एसोसिएशन के सुझावों पर ध्यान नहीं दिया गया जबकि औद्योगिक विस्तार, खेती, घरेलू खपत और डेटा सेंटर जैसे उच्च-भार वाले क्षेत्रों से भविष्य में बिजली की जरूरत काफी बढ़ेगी। राज्य-क्षेत्र बिजली उत्पादन परियोजनाओं में निवेश से पंजाब के युवाओं को रोजगार का बड़ा मौका मिलेगा। गर्मियों में बढ़ जाती है मांग पत्र के अनुसार गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही पीक डिमांड के समय पंजाब का अपना बिजली उत्पादन अपेक्षाकृत कम हो जाता है। ऐसे में मांग पूरी करने के लिए बिजली एक्सचेंज से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती है। इससे पावरकॉम पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। एसोसिएशन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे जलविद्युत उत्पादन वाले राज्य भी अब बिजली बैंकिंग के बजाय खुले बाजार में बिजली बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे पंजाब के लिए सस्ती बिजली की उपलब्धता और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। निजी बिजली संयंत्रों पर निर्भरता पर सवाल इंजीनियरों ने निजी थर्मल प्लांटों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे पंजाब का बड़ा पूंजी निवेश निजी क्षेत्र की ओर जा रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकारी क्षेत्र में नए बिजली उत्पादन प्रोजेक्ट शुरू करने और प्रदेश की अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए तत्काल नीति बनाने की मांग की है।    

संजीव अरोड़ा से जेल में मिलेंगे CM भगवंत मान, गिरफ्तारी के बाद बढ़ी सियासी हलचल

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत मान 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा से मिलने सोमवार को गुरुग्राम की भोंडसी जेल जाएंगे। भगवंत मान दूसरी बार मंत्री अरोड़ा से जेल में मिलने जा रहे हैं।  संजीव अरोड़ा को ईडी ने 9 मई को गिरफ्तार किया था। उसके बाद से वह जेल में हैं। निचली अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है, जबकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका पर अभी सुनवाई चल रही है। संजीव अरोड़ा के जेल जाने के बाद भी पंजाब सरकार उनके साथ खड़ी है। अरोड़ा चार महीने से जेल में हैं, इसके बावजूद पंजाब सरकार ने उन्हें अभी तक मंत्री पद से नहीं हटाया है। आम आदमी पार्टी और खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं। चंडीगढ़ स्थित सरकारी कोठी से हुई थी गिरफ्तारी प्रवर्तन निदेशालय ने फर्जी बिलिंग और लेनदेन से जुड़े मामले में छापेमारी के बाद संजीव अरोड़ा को 9 मई को चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया था। इस दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे। गिरफ्तारी और शुरुआती पूछताछ में कोर्ट के आदेशानुसार संजीव अरोड़ा को हरियाणा की भोंडसी जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वह वहीं बंद हैं और उनकी कानूनी टीम जमानत के लिए प्रयासरत है। भाजपा पर राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार ने इस पूरी कार्रवाई को भाजपा की साजिश करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर गैर-भाजपा शासित राज्यों के नेताओं और मंत्रियों को निशाना बना रही है। मंत्रियों के विभागों में हुआ फेरबदल संजीव अरोड़ा के जेल जाने के बाद उनके अधीन आने वाले सभी प्रशासनिक विभाग पंजाब सरकार ने अन्य कैबिनेट मंत्रियों में बांट दिए, ताकि राज्य के विकास कार्य और विभागीय कामकाज प्रभावित न हों। कानूनी और राजनीतिक विवादों के बावजूद पंजाब सरकार ने संजीव अरोड़ा का इस्तीफा नहीं लिया है। वह अभी भी भगवंत मान कैबिनेट में मंत्री हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान व आप का समर्थन मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले भी संजीव अरोड़ा से जेल में जाकर मुलाकात कर चुके हैं। आज की मुलाकात भी इसी सिलसिले की एक कड़ी है। इसके जरिए मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी यह संदेश देना चाहते हैं कि संकट की इस घड़ी में वे अपने नेता के साथ खड़े हैं। संजीव अरोड़ा पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला क्या है? ED का आरोप है कि 2023-24 में संजीव अरोड़ा की कंपनी ने करीब 157.12 करोड़ रुपए के मोबाइल फोन की बिक्री दिखाई। इनमें 102.50 करोड़ रुपए के मोबाइल फोन UAE की दो कंपनियों को निर्यात किए जाने का दावा किया गया। इन लेन-देन में वास्तविक माल की आपूर्ति के बजाय फर्जी बिल, शेल/डमी कंपनियों और कागजी निर्यात का इस्तेमाल किया गया। ED का दावा है कि संजीव अरोड़ा ने फर्जी खरीद के बिल तैयार किए और कागजों में मोबाइल फोन का निर्यात दिखाकर सरकार से GST समेत अन्य फायदे लिए। जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 102.50 करोड़ रुपए की रकम अवैध तरीके से कलेक्ट की गई। ED की चार्जशीट में अरोड़ा को इस मामले का ‘किंगपिन’ बताया गया है।

पंजाब CM भगवंत मान बेंगलुरु में करेंगे विपश्यना, एक हफ्ते तक नहीं करेंगे सरकारी कार्यक्रम

चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान एक सप्ताह के प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम के लिए बेंगलुरु रवाना हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, वह करीब सात दिनों तक एक निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में रहेंगे। इस दौरान प्राकृतिक उपचार, शरीर की शुद्धि, योग, ध्यान और विशेष खानपान के माध्यम से उनके स्वास्थ्य में सुधार पर ध्यान दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री पिछले कुछ समय से लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों, प्रशासनिक बैठकों और विभिन्न सरकारी गतिविधियों में व्यस्त रहे हैं। लगातार कामकाज और यात्रा के कारण उन्हें पहले भी थकान की शिकायत हुई थी। इसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें कुछ समय आराम करने और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी थी। इसी सलाह के आधार पर उन्होंने एक सप्ताह का यह स्वास्थ्य कार्यक्रम तय किया है। प्राकृतिक चिकित्सा से गुजरेंगे सीएम सूत्रों का कहना है कि इस दौरान मुख्यमंत्री प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के तहत शरीर की शुद्धि की प्रक्रिया से गुजरेंगे। साथ ही योग, ध्यान और विशेष आहार योजना का पालन करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को बेहतर बनाना तथा व्यस्त दिनचर्या के बाद शरीर को फिर से सक्रिय करना है। बेंगलुरु स्थित निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में उनके रहने की पूरी व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों और विशेषज्ञों की निगरानी में उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा। आवश्यकतानुसार उपचार और खानपान की योजना में बदलाव भी किया जा सकता है। रवाना होने से पहले खत्म किए सभी कार्य स्वास्थ्य कार्यक्रम पर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में चल रही कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं से जुड़े कार्यों का उद्घाटन और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी निर्देश भी दिए, ताकि उनकी अनुपस्थिति के दौरान विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी में भी पंजाब सरकार का नियमित कामकाज पहले की तरह चलता रहेगा। विभागों को आवश्यक निर्देश पहले ही दिए हैं और प्रशासनिक व्यवस्था सामान्य रूप से जारी रहेगी। जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री अधिकारियों के संपर्क में भी रहेंगे।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लिया एक सप्ताह का ब्रेक, विपश्यना साधना के लिए पहुंचे बेंगलुरु

 चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान एक सप्ताह के प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम के लिए बेंगलुरु रवाना हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, वह करीब सात दिनों तक एक निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में रहेंगे। इस दौरान प्राकृतिक उपचार, शरीर की शुद्धि, योग, ध्यान और विशेष खानपान के माध्यम से उनके स्वास्थ्य में सुधार पर ध्यान दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री पिछले कुछ समय से लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों, प्रशासनिक बैठकों और विभिन्न सरकारी गतिविधियों में व्यस्त रहे हैं। लगातार कामकाज और यात्रा के कारण उन्हें पहले भी थकान की शिकायत हुई थी। इसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें कुछ समय आराम करने और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी थी। इसी सलाह के आधार पर उन्होंने एक सप्ताह का यह स्वास्थ्य कार्यक्रम तय किया है। प्राकृतिक चिकित्सा से गुजरेंगे सीएम सूत्रों का कहना है कि इस दौरान मुख्यमंत्री प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के तहत शरीर की शुद्धि की प्रक्रिया से गुजरेंगे। साथ ही योग, ध्यान और विशेष आहार योजना का पालन करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को बेहतर बनाना तथा व्यस्त दिनचर्या के बाद शरीर को फिर से सक्रिय करना है। बेंगलुरु स्थित निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में उनके रहने की पूरी व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों और विशेषज्ञों की निगरानी में उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा। आवश्यकतानुसार उपचार और खानपान की योजना में बदलाव भी किया जा सकता है। रवाना होने से पहले खत्म किए सभी कार्य स्वास्थ्य कार्यक्रम पर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में चल रही कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं से जुड़े कार्यों का उद्घाटन और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी निर्देश भी दिए, ताकि उनकी अनुपस्थिति के दौरान विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी में भी पंजाब सरकार का नियमित कामकाज पहले की तरह चलता रहेगा। सभी विभागों को आवश्यक निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं और प्रशासनिक व्यवस्था सामान्य रूप से जारी रहेगी। जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री अधिकारियों के संपर्क में भी रहेंगे।

नशे के खिलाफ एक्शन मोड में CM भगवंत मान, DC-SSP को दिए सख्त निर्देश और चेतावनी

बठिंडा पंजाब में चल रहे ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बीते सोमवार डिप्टी कमिश्नरों, पुलिस कमिश्नरों तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि जब तक पंजाब नशे की बुराई से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता, तब तक इस अभियान को और अधिक तेज किया जाए। विलेज डिफेंस कमेटियों के कार्यों की समीक्षा के लिए आयोजित वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान ने नशों की सप्लाई लाइन तोड़ने और बड़े तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में सफलता हासिल की है, जिससे नशे के अभिशाप की कमर टूट गई है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में किसी भी प्रकार की ढील नहीं बरती जानी चाहिए तथा जमीनी स्तर पर अधिक सशक्त कार्रवाई, अधिक जनभागीदारी और गांवों में विश्वास बहाली के प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि इस गति को बनाए रखते हुए नशों के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल की जा सके। बैठक के कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक्स पर लिखा, “आज बठिंडा के लेक व्यू गेस्ट हाउस से मैंने ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान के अंतर्गत सभी डिप्टी कमिश्नरों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। सभी अधिकारियों को नशों के पूर्ण उन्मूलन के लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई तेज करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। हमारी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। पंजाब की युवा पीढ़ी को बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आइए, हम सभी मिलकर पंजाब को नशामुक्त बनाएं और राज्य को प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।” इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “नशों की सप्लाई लाइन पहले ही तोड़ी जा चुकी है और इस घिनौने अपराध में शामिल बड़े तस्करों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। इस अभियान की गति को बनाए रखना होगा और समय की मांग है कि इसे तब तक और तेज किया जाए, जब तक पंजाब पूरी तरह नशामुक्त नहीं हो जाता।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि विलेज डिफेंस कमेटियों के सदस्य अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर रहे हैं और उन्होंने पिछले तीन महीनों में ही नशा तस्करों के खिलाफ 13,000 से अधिक शिकायतें दर्ज करवाई हैं। उन्होंने कहा, “जिन जिलों में विलेज डिफेंस कमेटियां अपेक्षाकृत कम सक्रिय हैं, उन्हें इस जनहित के मिशन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। प्रत्येक जिले में हर महीने विलेज डिफेंस कमेटियों की बैठकें आयोजित की जानी चाहिए और मैं स्वयं मासिक राज्य स्तरीय बैठकों में उनके कार्यों की समीक्षा करूंगा।” मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की समस्या एक वैश्विक चुनौती है, लेकिन दुनिया में कहीं भी इसके खिलाफ इतनी दृढ़ और व्यापक मुहिम नहीं चलाई गई है। उन्होंने कहा, “पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए विलेज डिफेंस कमेटियों के 1.50 लाख सदस्यों की एक मजबूत शक्ति तैयार की गई है। जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है क्योंकि नशों के खिलाफ इस लड़ाई को जन आंदोलन का रूप देना होगा। नशा एक सामाजिक समस्या है और इस अभियान की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए लोगों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने डीसीज़ और एसएसपीज़ को निर्देश दिए कि वे समाज के प्रत्येक वर्ग का सहयोग प्राप्त करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके क्षेत्रों में कहीं भी नशे की बिक्री न हो और प्रत्येक नशा पीड़ित व्यक्ति को इस दलदल से बाहर निकाला जा सके।  

भगवंत मान की श्री अकाल तख्त साहिब में पेशी क्यों? जानिए क्या है अकाल तख्त और इसके प्रमुख अधिकार

चंडीगढ़  पंजाब के सीएम भगवंत मान श्री अकाल तख्त साहिब के सामने आज अपना पक्ष रखेंगे. वह पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष के साथ जाएंगे. मान एक वीडियो को लेकर विवाद पर हैं. उन पर गुरु द्रोही औ पंथ विरोधी होने के आरोप हैं. इसके अलावा पंजाब सरकार के ईशनिंदा से जुड़े एक अधिनियम को भी पंथ की सलाह के बिना पारित किए जाने से नाराजगी है।  अकाल तख्त के सामने भगवंत मान इससे पहले भी पेश हो चुके हैं, जब उन्होंने वीडियो को फर्जी बताया था. उन्होंने दावा किया था कि वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से बनाया गया है. हालांकि मामले की सुनवाई के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने 15 जून को एक आदेश जारी करते हुए मान को गुरुद्रोही और खालसा पंथ का विरोधी घोषित किया था. ऐसा दावा किया गया है कि फोरेंसिक जांच में वीडियो सही पाया गया है. इसीलिए पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों विधायकों को अकाल तख्त के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।  श्री अकाल तख्त साहिब क्या है? श्री अकाल तख्त साहिब सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था है.सरल शब्दों में कहें तो यह सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक और नैतिक अदालत है. यह अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में है और सिखों के पांच तख्तों में सबसे प्रमुख मानी जाती है. इसका अर्थ है अकाल का सिंहासन, जिसका उद्देश्य सिर्फ आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है, यह समाज, न्याय और समुदाय से जुड़े मामलों में भी फैसला सुनाता है।  सिख नेट के मुताबिक जब गुरु हरगोबिंद के पिता और पांचवें सिख गुरु अर्जन देव को मुगल सम्राट जहांगीर ने शहीद करवाया तो उसके जवाब में गुरु हरगोबिंद ने इसकी स्थापना की थी. जब उन्होंने अकाल तख्त के मंच का अनावरण किया था तो उन्होंने दो तलवारें धारण की थीं. इनमें एक आध्यात्मिक शक्ति पीरी का संकेत देती थी ओर दूसरी सांसारिक शक्ति मीरी का. यह पीरी और मीरी दर्शन ही अकाल तख्त की आत्मा है. जो ये विचार देता है कि धर्म और न्याय अलग नहीं हैं. यानी एक हाथ में आस्था और दूसरे में अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति।  क्या करता है अकाल तख्त?     अकाल तख्त हुक्मनामा यानी धार्मिक आदेश जारी करता है. यह हुक्मनामा दुनिया भर के सिखों पर लागू होता है।      अकाल तख्त सिख हितों के लिए गलत बात करने वाला या हानिकारक कदम उठाने वाले को धार्मिक दंड दे सकती है।      तख्त किसी भी व्यक्ति की सेवा या उसके बलिदानों की सराहना भी कर सकता है जो सिख हितों के लिए काम करते हैं।      यह सिख समुदाय से जुड़े विवादों और महत्वपूर्ण मामलों पर मार्गदर्शन भी देता है।  जत्थेदार होता है अकाल तख्त का मुखिया अकाल तख्त का प्रमुख जत्थेदार ही उसका मुखिया होता है. जत्थेदार को ही दुनिया भर के सिखों का सर्वोच्च प्रवक्ता और प्रमुख माना जाता है. यह एक धार्मिक नेता की तरह होते हैं जिनसे अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त रहें. वर्तमान में कुलदीप सिंह गरगज कार्यवाहक जत्थेदार हैं.इनकी नियुक्त शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से 2025 में की गई थी. हालांकि तकनीकी तौर पर अकाल तख्त एक स्वतंत्र धार्मिक संस्था है।  अकाल तख्त के सामने बुलाए जाने का अर्थ क्या? श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार अगर किसी को पेश होने का आदेश देते हैं तो यह एक तरह का धार्मिक समन है. जो आरेापी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका देता है. जो भी व्यक्ति इसकी अनदेखी करता है वह सिख समुदाय की नजर में अपनी विश्वसनीयता खो देता है. आरोपी अगर पेश होता है तो उसका पक्ष सुनकर अकाल तख्त फैसला करता है कि उसे क्लीनचिट देनी है या फिर प्रायश्चित का आदेश देना है. इसे तनखाह कहा जाता है. यह धार्मिक दंड है. आम तौर पर तनखाह में सेवा कार्य, सार्वजनिक माफी की सजा दी जाती है।  सुखबीर सिंह बादल को मिला था धार्मिक दंड श्री अकाल तख्त साहिब ने 2024 में पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को तनखैया घोषित किया था. उन्हें तनखाह यानी धार्मिक सजा सुनाई गई थी. उन पर आरोप था कि 2007 से 2027 तक पंजाब की शिरोमणि अकाली दल सरकार में कुछ ऐसे फेसले हुए जिनसे पंथक हितों को नुकसान पहुंचा है. इसमें बेअदबी का माला भी शामिल था. सुखबीर सिंह बादल ने अपनी गलतियों के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी. इसके बाद उने तनखाह सुनाई गई थी. उन्हें स्वर्ण मंदिर के बाद सेवादार की वर्दी पहनकर सेवा करनी पड़ी थी।  अकाल तख्त सबसे ऊपर क्यों? सिखों के पांच तख्त हैं. तख्त का अर्थ सिंहासन या सत्ता का आसन होता है. यह सिख धर्म का आध्यात्मिक और सांसारिक केंद्र है. पहला केंद्र श्री अकाल तख्त साहिब है, जो अमृतसर में है. दूसरा तख्त श्री केशगढ़ साहिब है जो आनंदपुर साहिब में है. तीसरा तख्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और चौथा तख्त श्री पटना साहिब तथा पांचवां तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ में है. अकाल तख्त सर्वोच्च इसलिए है, क्योंकि ये पहला तख्त है।   

बेअदबी मामले में CM मान का बड़ा खुलासा, कहा- गले के निशान बताते हैं पूरी साजिश

चंडीगढ़  बेअदबी मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बड़ा पलटवार करते हुए दावा किया है कि उनके खिलाफ सुनियोजित साजिश रची गई है. वीडियो में दिख रहा शख्स वह नहीं, बल्कि उनके चेहरे का मास्क पहनने वाला व्यक्ति है. इस दौरान, सीएम मान ने गले के निशान से लेकर हुलिये तक कई सबूत पेश भी किए. साथ ही, उन्‍होंने दावा किया कि लोगों के मन में उनके खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने साफ कहा कि धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए करना गलत है और आने वाले दिनों में इस पूरे मामले के पीछे पैसे देने वालों का भी खुलासा किया जाएगा।  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर कई बड़े दावे किए हैं. उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल की गई वीडियो पूरी तरह फर्जी है और इसे सियासी फायदे के लिए तैयार कराया गया है. इस नकली वीडियो के जरिए सिर्फ उनकी छवि खराब करने की कोशिश नहीं है, बल्कि लोगों के मन में उनके खिलाफ धार्मिक आधार पर नफरत पैदा करने की साजिश भी है।      प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भगवंत मान ने एक वीडियो भी दिखाई. उनका कहना था कि वीडियो बनाने का दावा करने वाले जगमन समरा के हाथ में उनके चेहरे वाला मास्क साफ दिखाई देता है. वीडियो में जिस व्यक्ति को दिखाया गया है, उसने उनका मास्क पहना हुआ है।      उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वीडियो असली होती तो उसमें उनके गले पर बचपन के ऑपरेशन का निशान क्यों नहीं दिखाई देता. उन्होंने कहा कि मेरे गले पर बचपन से ऑपरेशन का निशान है, लेकिन वायरल वीडियो में ऐसा कोई निशान नहीं है।      मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति हमेशा चश्मा लगाए हुए नजर आता है, क्योंकि आंखों से असली पहचान छिपाई नहीं जा सकती. होटल के कमरे में गुरु साहब की तस्वीर लगाए जाने की बात भी पूरी तरह गलत है।      उन्होंने कहा कि नवंबर 2016 के बाद वह कभी कनाडा गए ही नहीं, जबकि वीडियो बनाने वाला व्यक्ति कनाडा में बैठा है. सीएम भगवंत मान ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में राजनीतिक साजिश रची गई है. कांग्रेस, अकाली दल और बीजेपी मिलकर उनके खिलाफ सांझा मोर्चा बनाकर काम कर रहे हैं।      उनका कहना था कि उनकी सरकार ने बेअदबी कानून, पालकी साहब वाली गाड़ियों के टोल और पवित्र शहरों को विशेष दर्जा देने जैसे कई अहम फैसले किए हैं, जिन्हें पहले की सरकारें नहीं कर सकीं. इसी वजह से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है।      मुख्यमंत्री मान ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि गुरुद्वारों के बाहर उनके खिलाफ बोर्ड क्यों लगाए जा रहे हैं, जबकि पहले ऐसा कभी नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के प्रधान खुद सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वह सुखबीर बादल के सिपाही हैं।      भगवंत मान ने कहा कि वह पहले भी अकाल तख्त साहिब गए थे और अगर दोबारा बुलाया जाएगा तो फिर जाएंगे. उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने कार्यवाही को लाइव करने की भी अपील की थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. अब अलग-अलग क्लिप जारी कर लोगों को गुमराह किया जा रहा है।  गुरु नानक नाम लेवा संगत के हाथों अंतिम फैसला मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि वह इस नकली वीडियो को अकाल तख्त साहिब को भी भेजेंगे ताकि उसकी निष्पक्ष जांच हो सके. उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला गुरु नानक नाम लेवा संगत पर छोड़ते हैं. साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि जगमन समरा को इंटरपोल की मदद से भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में यह भी सामने लाया जाएगा कि इस वीडियो को बनवाने के लिए पैसा किसने दिया था. मान ने कहा कि चाहे जितनी कोशिश कर ली जाए, पंजाब के लोगों के मन में उनके खिलाफ नफरत पैदा करने की यह साजिश सफल नहीं होगी। 

पंजाब CM VIDEO विवाद में नया मोड़, हरियाणा पुलिस लुधियाना CP-SP से कर सकती है पूछताछ

 लुधियाना  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जोड़े जा रहे सिख गुरूओं की फोटो पर शराब के छींटे वाले वीडियो की फर्जी रिपोर्ट मामले में चौथा खुलासा हुआ है। इस मामले में गुरुग्राम में केस दर्ज कराने वाले फॉरेंसिक एक्सपर्ट जसप्रीत जस्सी ने दावा किया था।  अब पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम मजीठिया ने इन्हीं 10 लाख के बैंक के लेन-देन के सबूत जारी किए हैं। मजीठिया का दावा है कि यह रकम इसी फर्जी रिपोर्ट के लिए दी गई। वहीं इस मामले में गुरुग्राम पुलिस जल्द लुधियाना के पुलिस कमिश्नर व DIG स्वपन शर्मा और SP जशनदीप गिल से पूछताछ कर सकती है। दो लोग गिरफ़्तार, फ़र्ज़ी फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने का आरोप गुरुग्राम पुलिस ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित विवादित वीडियो की फ़र्ज़ी फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने और डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में दो लोगों को हिरासत में लिया है।  इस मामले में गुरुग्राम के सेक्टर 29 स्थित डीएलएफ़ पुलिस स्टेशन में एफ़आईआर दर्ज की गई है।  यह एफ़आईआर जसप्रीत उर्फ जस्सी नाम के एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है. उनका आरोप है कि उन पर विवादित वीडियो की फ़र्जी फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया गया था।  पुलिस ने अरुण महेंद्रू और अंकित नाम के दो लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है. दोनों को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है।  इस मामले पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बयान जारी कर कहा है कि उन्हें "फंसाने के लिए फ़र्ज़ी वीडियो वायरल कराया गया। आप अगर पूरी स्टोरी देखना चाहते हैं तो हमारे फुल वर्ज़न पर जाएं।  एफ़आईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 (2) (ए), 318 (2), 319, 336 (2), 336 (3) और 340 के तहत दर्ज की गई है. इसके अलावा आईटी एक्ट 2000 की धारा 65 और 66 (डी) भी लगाई गई हैं।  दरअसल, 15 जून को अकाल तख्त साहिब में हुई बैठक के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने 'गुरु दोखी' और 'पंथ विरोधी' कहा था। यह फ़ैसला मुख्यमंत्री मान के कथित विवादित वीडियो से जुड़े केस में लिया गया था।  केस दर्ज कराने वाले जस्सी का दावा था कि इन्हीं दोनों अफसरों ने फर्जी रिपोर्ट के लिए गुरुग्राम के फाइव स्टार होटल क्राउन प्लाजा में सीक्रेट मीटिंग कर डील की थी। रिपोर्ट में भी मनचाहे करेक्शन कराए थे। हालांकि दैनिक भास्कर इन दावों की पुष्टि नहीं करता। CM से जुड़ी वीडियो रिपोर्ट में अब तक के 4 बड़े खुलासे:- 1. सिरसा के बैंक खातों में डिपॉजिट हुए 10 लाख अकाली नेता बिक्रम मजीठिया ने फर्जी रिपोर्ट तैयार के लिए 10 लाख रुपए के लेन-देन के सबूत का दावा किया। मजीठिया का दावा है कि एक अकाउंट में 18 जून को 7.50 लाख रुपए कैश डिपोजिट हुए हैं जबकि दूसरे में 2.5 लाख रुपए डिपोजिट हुए हैं। ये दोनों खाते सिरसा में ही हैं। 2. सीक्रेट मीटिंग से जुड़े 2 CCTV फुटेज फोरेंसिक एक्सपर्ट जसप्रीत सिंह और पुलिस अफसरों की गुरुग्राम के होटल क्राउन प्लाजा में हुई मीटिंग की दो सीसीटीवी फुटेज सामने आई। दावा किया गया कि इसमें एक लुधियाना के पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा हैं और दूसरे एडीसीपी जशनदीप सिंह गिल हैं। यह भी दावा किया गया कि यह मीटिंग CM के वीडियो मामले की जांच को प्रभावित करने और उनके पक्ष में फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाने के मकसद से की गई थी। 3. वॉट्सएप चैट आई सामने SP जशन गिल पंजाब के नाम से मोबाइल में सेव एक नंबर की वॉट्सऐप चैट भी सामने आई है। दावा है कि यह चैट जसप्रीत सिंह के साथ हुई है। इसमें CM की वीडियो रिपोर्ट में बदलाव को लेकर बातचीत हो रही है। इसमें बकायदा रिपोर्ट से पूरे पैराग्राफ तक हटाने के लिए कहा जा रहा है। 4. CP और SP के होटल क्राउन प्लाजा के बिल अकाली नेता बिक्रम मजीठिया ने गुरुग्राम के होटल क्राउन प्लाजा के बिल जारी किए हैं। मजीठिया का दावा है कि 15 जून से 17 जून तक होटल में कमरा बुक कराया गया। इसी दिन DIG (लुधियाना CP) स्वपन शर्मा और SP जशनदीप गिल होटल क्राउन प्लाजा पहुंचे। SP का रूम नंबर 3000 था। 15 से 16 जून तक DIG स्वपन शर्मा का रूम नंबर 3004 था। 17 जून को स्वपन शर्मा रूम नंबर 6004 में शिफ्ट हो गए। हालांकि, भास्कर इन बिलों की पुष्टि नहीं करता। CM भगवंत मान बोले– BJP खुद फंसी फर्जी वीडियो रिपोर्ट के केस मामले में 24 जून को CM भगवंत मान ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा कि जिन लैब में टेस्ट हुए उसके मालिकों को FIR की धमकी देकर डराया गया है। भाजपा खुद फंस गई है। यह मुझे धर्म वाली साइड से बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।