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गरीबों के लिए नई योजना, ₹5 में फिश-राइस देने का CM शुभेंदु अधिकारी ने किया ऐलान

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य की 400 कैंटीनों में 5 रुपये में माछ भात (मछली और चावल) मिलेगा. वहीं अवैध बांग्लादेशियों को लेकर उन्होंने सख्त बयान दिया और कहा कि उन्हें सीधे बांग्लादेश भेज दिया जाएगा. जेल में रखकर  उन पर एक भी पैसा खर्च नहीं किया जाएगा।   अब शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने माछ-भात को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार 5 रुपये में माछ-भात मुहैया कराएगी. उन्होंने बताया कि इसके लिए राज्यभर में 400 कैंटीन खोली जाएंगी, जहां सिर्फ 5 रुपये में माछ-भात मिलेगा।  शुभेंदु सरकार का ये फैसला राजनीतिक लिहाज से भी काफी मायने रखता है, क्योंकि बंगाल की संस्कृति में मछली का एक अपना महत्व है. बंगाल में 'माछे-भात बंगाली' कहावत भी चलती है. बंगाल में माछ-भात को सांस्कृतिक पहचान माना जाता है।  अब सरकार ने सिर्फ 5 रुपये में माछ-भात देने का ऐलान किया है. कल्याणी में एक बैठक में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सब्सिडाइज्ड फूड की सुविधा पूरे बंगाल में बनी डेडिकेटेड कैंटीनों में शुरू की जाएगी, जहां 5 रुपये में माछ-भात मिलेगा।  पश्चिम बंगाल सरकार कल (27 मई) से 'अन्नपूर्णा योजना' के लिए फॉर्म जारी करेगी, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये दिए जाएंगे। फॉर्म भरते ही 3,000 रुपये ट्रांसफर होने शुरू हो जाएंगे। सीएम ने एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पूरे बंगाल में 400 विशेष कैंटीनों में 5 रुपये में मछली-चावल का भोजन मिलेगा। लक्ष्मी भंडार योजना की भी शुरुआत होगी। इसकी कल विस्तृत जानकारी मिलेगी। आपको कल ही फॉर्म की एक प्रति भी मिलेगी। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों व्यवस्थाएं रहेंगी। क्या है सरकार का प्लान? बताया जा रहा है कि बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद ही शुभेंदु अधिकारी ने इस योजना पर काम शुरू कर दिया था. ममता सरकार में 5 रुपये में अंडा-भात मिलता था, लेकिन अब यहां इतने ही रुपये में मछली को शामिल किया जाएगा।  बंगाल में ममता सरकार के दौर में सरकारी कैंटीन बनाई गई थीं, जहां दिहाड़ी मजदूर, मजदूर, ऑटो-रिक्शा चलाने वाले और गरीब लोग 5 रुपये में अंडा-भात खा सकते थे. अब राज्य की 400 कैंटीनों में माछ-भात दिया जाएगा।  ममता बनर्जी ने फैलाया था डर बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान मछली बड़ा मुद्दा बनी थी. तब टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने मांस-मछली खाने को लेकर डर फैलाया था।  ममता बनर्जी ने कई चुनावी रैलियों में आरोप लगाया था कि अगर बीजेपी सत्ता में आ गई तो मांस, मछली और अंडा खाने पर बैन लगा देगी. उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी वाला अपनी मर्जी का खाना दूसरों पर थोपते हैं।  इसके बाद बीजेपी के तमाम नेताओं ने भरोसा दिलाया था कि ऐसा कुछ नहीं होगा. बीजेपी सांसद रवि किशन ने तो यहां तक कह दिया था कि बंगाल के लोग 4 मई के बाद 4 गुना मछली खाएंगे. उन्होंने कहा था कि जहां-जहां एनडीए सरकार है, वहां से मछली लाकर बंगाल के कुएं-तालाबों में डालेंगे। 

शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, बोले- अब हर मौत का हिसाब होगा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर हुए हमलों को लेकर ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने चेतावनी दे दी है कि 2021 चुनाव के बाद हुए कथित हमलों की कानूनी जांच की जाएगी। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी कानून हाथ में नहीं लेने की हिदायत दी है। खास बात है कि 2026 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अधिकारी पहली बार रविवार को नंदीग्राम पहुंचे थे। हमलों का रखा है रिकॉर्ड नंदीग्राम में अधिकारी ने कहा कि भाजपा ने उसके कार्यकर्ताओं पर हुए तृणमूल कांग्रेस के कथित हमलों का रिकॉर्ड रखा है। उन्होंने कहा, '2021 विधानसभा चुनावों के बाद कई भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों को तोड़ा गया और कई पार्टी समर्थकों को मारा गया। सभी का हिसाब रखा गया है और सभी को कानूनी न्याय मिलेगा।' उन्होंने कहा, 'अगर आप चाहें, तो तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घरों की ईंटें खींच लें, लेकिन ऐसा कभी नहीं करना। भाजपा ऐसे कामों को बढ़ावा नहीं देती है। मुझे सब याद है और मैं किसी भी बात को नहीं छोड़ूंगा।' मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा, 'मेरे लिए वोट करने में कई लोग मारे गए हैं।' उन्होंने कहा, 'मैंने पूरा रिकॉर्ड रखा है। भरोसा कीजिए, मैं नंदीग्राम का कर्ज चुकाऊंगा।' नंदीग्राम से वादा रविवार को नंदीग्राम में आयोजित रैली में, अधिकारी ने विधायक पद से अपने इस्तीफे को लेकर समर्थकों के बीच फैली चिंताओं को दूर करने की कोशिश की और इस बात पर जोर दिया कि सीट छोड़ने से इस क्षेत्र से उनका जुड़ाव कमजोर नहीं होगा। नंदीग्राम को अपना 'घर' और अपने राजनीतिक उत्थान की जन्मस्थली बताते हुए अधिकारी ने कहा कि 2003 से संघर्ष के दौरान बना उनका रिश्ता भवानीपुर जाने के बावजूद पहले की तरह कायम रहेगा। अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। जीत के बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट खाली कर दी। इससे पहले 2021 में भी नंदीग्राम में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को मामलू अंतर से हरा दिया। हालांकि, 2026 में उन्होंने बनर्जी के सामने ही 15 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की है। छोटे भाई को दी जिम्मेदारी खास बात है कि सीएम अधिकारी ने नंदीग्राम की जिम्मेदारी छोटे भाई सोमेंदु अधिकारी को दी है। उन्होंने कहा, 'फिलहाल मेरे ऊपर पूरे राज्य की ज़िम्मेदारी है। सरकार चलाने के काम के दबाव के कारण मैंने सोमेंदु अधिकारी को यह खास जिम्मेदारी सौंपी है। नंदीग्राम में पंचायत, प्रशासन और जनता की सेवा से जुड़े मामलों में पांच विधायक उनकी मदद करेंगे।'

ज्योति बसु और ममता सरकार में नहीं हुआ जो, क्या अब सुवेंदु अधिकारी करेंगे बड़ा फैसला?

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की राजनीति बदलते ही अब उन मुद्दों पर भी तेजी दिखने लगी है, जो दशकों तक फाइलों और विवादों में दबे रहे. कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के भीतर मौजूद 136 साल पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद को लेकर फिर से हलचल तेज हो गई है. यह वही मस्जिद है, जिसे लेकर पिछले करीब 30 साल से केंद्र सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी लगातार चिंता जताती रही थी. लेकिन हर बार मामला धार्मिक संवेदनशीलता और राजनीतिक टकराव के कारण आगे नहीं बढ़ पाया. अब बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तस्वीर बदलती दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक नई सरकार और केंद्र के बीच तालमेल बढ़ने के बाद मस्जिद को एयरपोर्ट परिसर से बाहर शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. यही वजह है कि प्रशासन, एयरपोर्ट अथॉरिटी और जिला अधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही हैं. सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों और बंगाल की नई राजनीतिक दिशा का भी बन चुका है।  दिलचस्प बात यह है कि यह मस्जिद एयरपोर्ट बनने से भी पहले की बताई जाती है. स्थानीय लोग इसे बांकड़ा मस्जिद के नाम से जानते हैं. मस्जिद रनवे के बेहद करीब मौजूद है और इसी कारण एयरपोर्ट संचालन में लंबे समय से दिक्कतें आ रही हैं. एविएशन अधिकारियों का दावा है कि मस्जिद की वजह से सेकेंडरी रनवे का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा. बड़े इंटरनेशनल विमानों की लैंडिंग और आधुनिक ILS सिस्टम लगाने में भी रुकावट बनी हुई है. यही कारण है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी लंबे समय से इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव देती रही. अब सूत्र बता रहे हैं कि ईद-उल-अजहा के बाद इस मुद्दे पर बड़ा फैसला हो सकता है. हालांकि प्रशासन फिलहाल इसे पूरी तरह आपसी सहमति और शांति के साथ हल करने की रणनीति पर काम कर रहा है. मस्जिद कमेटी से भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है और अगले हफ्ते फिर अहम बैठक होने की संभावना है।  एयरपोर्ट सुरक्षा बनाम धार्मिक ढांचा, अब तेज हुई हलचल     कोलकाता एयरपोर्ट के भीतर मौजूद यह मस्जिद सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एयर ट्रैफिक ऑपरेशन के लिए भी बड़ी चुनौती मानी जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह ढांचा एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल से करीब 150 मीटर अंदर और सेकेंडरी रनवे से सिर्फ 165 मीटर की दूरी पर मौजूद है. अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों के अनुसार सक्रिय रनवे के 240 मीटर के दायरे में कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए. इसी वजह से एयरपोर्ट अधिकारियों को रनवे के टचडाउन पॉइंट को 88 मीटर पीछे शिफ्ट करना पड़ा था।      हालांकि मौजूदा रनवे छोटे और मीडियम साइज के विमानों के लिए पर्याप्त है, लेकिन बोइंग 787 और एयरबस A330 जैसे बड़े विमानों के संचालन में परेशानी आती है. एयरपोर्ट सूत्रों का कहना है कि अगर यह बाधा हटती है तो कोलकाता एयरपोर्ट की इंटरनेशनल क्षमता और बढ़ सकती है. यही नहीं, कोहरे के दौरान इस्तेमाल होने वाला एडवांस ILS सिस्टम भी इस क्षेत्र में पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पाया है. इससे सर्दियों में फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित होते हैं।  30 साल तक क्यों अटका रहा मामला?     एयरपोर्ट अथॉरिटी ने पहली बार इस मस्जिद को शिफ्ट करने का प्रस्ताव करीब तीन दशक पहले दिया था. उस दौरान ज्योति बसु सरकार थी. इसके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य और फिर ममता बनर्जी सरकार के समय भी यह मुद्दा उठा, लेकिन हर बार राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया. प्रशासन को डर था कि किसी भी जल्दबाजी से तनाव पैदा हो सकता है।      अब सत्ता परिवर्तन के बाद माहौल बदला हुआ दिखाई दे रहा है. नई सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रही है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले भी सार्वजनिक रूप से एयरपोर्ट सुरक्षा और ऑपरेशनल दिक्कतों का मुद्दा उठा चुके हैं. सूत्रों का दावा है कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बढ़ने के बाद अब इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है।  मस्जिद कमेटी ने क्या कहा? सूत्रों के मुताबिक मस्जिद कमेटी ने भी बातचीत में सहयोग का संकेत दिया है. कमेटी का कहना है कि वे एयरपोर्ट के विकास और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के खिलाफ नहीं हैं. लेकिन वे चाहते हैं कि पूरी प्रक्रिया सम्मानजनक और सहमति के साथ हो. कमेटी ने यह भी मांग रखी है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों से भी राय ली जाए।  फिलहाल प्रशासन वैकल्पिक जमीन और नई मस्जिद के ब्लूप्रिंट पर काम कर रहा है. बताया जा रहा है कि नई जगह पहले से ज्यादा बड़ी और सुविधाजनक हो सकती है. अधिकारियों की कोशिश है कि ईद के बाद इस मुद्दे पर सहमति का अंतिम फार्मूला तैयार कर लिया जाए।  हाई सिक्योरिटी के बीच होती है नमाज मौजूदा समय में इस मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई जाती है. नमाजियों को CISF की जांच से गुजरना पड़ता है. इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट के हाई सिक्योरिटी जोन के भीतर बस से मस्जिद तक ले जाया जाता है. रोजाना 10 से 25 लोग यहां नमाज पढ़ने आते हैं, जबकि शुक्रवार को यह संख्या 80 तक पहुंच जाती है।  सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि एयरसाइड के भीतर किसी भी सिविलियन मूवमेंट से ऑपरेशन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यही कारण है कि लंबे समय से इसे सुरक्षा जोखिम भी माना जाता रहा है. एयरपोर्ट प्रशासन चाहता है कि भविष्य में ऐसी स्थिति पूरी तरह खत्म हो और रनवे क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित जोन बना रहे।  क्या बंगाल में अब बदल रही है राजनीति की दिशा? राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ एयरपोर्ट या मस्जिद का मुद्दा नहीं है. यह बंगाल की नई राजनीतिक कार्यशैली का संकेत भी माना जा रहा है. भाजपा लंबे समय से इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात करती रही है. अब जब राज्य और केंद्र की सोच एक दिशा में दिखाई दे रही है, तो कई पुराने विवादित प्रोजेक्ट्स भी तेजी पकड़ सकते हैं।  हालांकि विपक्ष इस पूरे मामले को राजनीतिक नजरिए से भी देख रहा है. उनका कहना है कि धार्मिक मामलों में सरकार … Read more

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल, अभिषेक बनर्जी पर आरोपों के बीच CM का डायमंड हार्बर दौरा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के नए-नवेले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी आज  शनिवार डायमंड हार्बर का दौरा करने वाले हैं। तृणमूल के दूसरे सबसे बड़े नेता अभिषेक बनर्जी का यह संसदीय क्षेत्र है। मुख्यमंत्री यहां प्रशासनिक और पार्टी से जुड़े दोनों तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री इस शनिवार को विशेष रूप से एक प्रशासनिक बैठक करने के लिए भी डायमंड हार्बर जा रहे हैं। इस दौरान कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। इससे पहले यहां ममता बनर्जी की सरकार थी। आरोप है कि इस दौरान अभिषेक बनर्जी के पसंदीदा अधिकारियों की यहां पोस्टिंग की गई थी। आपको यह भी बता दें कि इसी इलाके में आने वाले फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की एक बैठक में शामिल होने का भी कार्यक्रम है। यहां चुनाव अभी बाकी है। इसके बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का 19 मई को एक बार फिर फाल्टा जाने का कार्यक्रम है। उस दिन वे यहां एक रोड शो करने वाले हैं। मुख्यमंत्री ने पिछले मंगलवार को भी चुनाव से जुड़ी एक बैठक की थी। आपको बता दें कि फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के लिए मतदान 21 मई को होना है। दूसरे चरण के दौरान यहां भी वोट पड़े थे, लेकिन चुनाव आयोग ने बाद में उन वोटों को रद्द कर दिया और 21 मई को दोबारा मतदान की नई तारीख घोषित की। वोटों की गिनती 24 मई को होनी है। फाल्टा पहले से ही सुर्खियों में था। वहां तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान और उत्तर प्रदेश से तैनात किए गए पुलिस पर्यवेक्षक और आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा के बीच विवाद हो गया था। इसी वजह से चुनाव आयोग ने उस विधानसभा क्षेत्र की पूरी चुनावी प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला किया था। TMC विधायक दिलीप मंडल के आवासों की तलाशी इससे पहले पुलिस ने दक्षिण 24 परगना जिले में गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक दिलीप मंडल के दो आवासों में तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई एक कथित वायरल वीडियो के संबंध में की गई है जिसमें विधायक पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी और धमकी देने का आरोप है। पश्चिम बंगाल पुलिस के जवान, केंद्रीय बलों के साथ आज सुबह डायमंड हार्बर पुलिस जिले के अंतर्गत पायलान इलाके में विधायक के आवास पर पहुंचे और चल रही जांच के हिस्से के तौर पर तलाशी शुरू की। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि तलाशी बिष्णुपुर के विधायक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में लगाए गए विशिष्ट आरोपों के आधार पर की जा रही है। उन्होंने कहा, "प्राथमिकी में लगाए गए विशिष्ट आरोपों के आधार पर जारी जांच केतहत तलाशी की जा रही है। कानून के अनुसार सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।" पुलिस सूत्रों के अनुसार मंडल के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। जांचकर्ता सोशल मीडिया पर चल रहे कथित वीडियो से जुड़े आरोपों की जांच कर रहे हैं, जिनमें विधायक को कथित तौर पर एक जनसभा के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ धमकी भरे बयान देते हुए देखा गया था।

बंगाल की राजनीति में हलचल: शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम छोड़ने का किया ऐलान

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों पर जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्हें एक सीट खाली करनी थी. उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी है, वह भवानीपुर सीट से ही विधायक रहेंगे. उन्होंने विधानसभा में भवानीपुर विधायक के रूप में शपथ ली है. बता दें कि इस सीट पर उन्होंने बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया था।  दोनों सीटों से जीतने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि मैं 10 दिनों के भीतर एक सीट छोड़ दूंगा. हालांकि उन्होंने कहा था कि कौन सी सीट मुझे रखनी है, इसका निर्णय पार्टी करेगी. मेरी अपनी राय जरूर होगी, जिसे मैं नेतृत्व के सामने रखूंगा।  सुवेंदु बोले, नंदीग्राम से किया गया वादा भी पूरा करता रहूंगा विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि नंदीग्राम से अब किसी अन्य उम्मीदवार को उपचुनाव के जरिए विधायक चुना जाएगा. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नंदीग्राम की जनता को उनकी कमी महसूस नहीं होगी. अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि वे मुख्यमंत्री के रूप में पूरे पश्चिम बंगाल के साथ-साथ नंदीग्राम के लोगों से किए गए हर विकास वादे को पूरा करेंगे। सुवेंदु बोले- नंदीग्राम से उनका अलग रिश्ता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि नंदीग्राम उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा है. उन्होंने 2008 के नंदीग्राम आंदोलन और पुलिस गोलीकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी उन्होंने क्षेत्र के लोगों के साथ खड़े होकर संघर्ष किया था. उन्होंने याद दिलाया कि 2009 से 2016 तक तृणमूल कांग्रेस की विधायक रहीं फिरोजा बीबी को उन्होंने लगातार समर्थन दिया था, जबकि वे स्वयं उस सीट के विधायक नहीं थे. इस बार भी, विधायक पद छोड़ने के बावजूद, नंदीग्राम के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह समर्पित रहेंगे।  ममता बनर्जी को हराकर भवानीपुर से जीते हैं सुवेंदु हालिया चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर सीट पर उन्हें 15,105 वोटों के अंतर से हराया. वहीं नंदीग्राम में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार पवित्र कर को 9,665 वोटों से पराजित किया. भवानीपुर सीट को बनाए रखने के फैसले को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह वही सीट है जिसे लंबे समय तक ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है. सुवेंदु अधिकारी के इस फैसले से अब नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव होना तय है, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी रहेंगी।  नंदीग्राम सीट पर कितने वोटों से जीते थे शुभेंदु? शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर टीएमसी के पबित्र कर को हराया था. बीजेपी कैंडिडेट अधिकारी को इस सीट पर 127301 वोट मिले थे, जबकि टीएमसी कैंडिडेट पबित्र कर को 117636 वोट मिले थे. वहीं तीसरे नंबर पर सीपीआई के संती गोपाल गिरी थे, जिन्हें करीब तीन हजार वोट मिले थे. जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार शेख जरितुल हुसैन 5वें नंबर पर थे और उन्हें सिर्फ 794 वोट मिले थे।  भवानीपुर में शुभेंदु को कितने वोट मिले थे? शुभेंदु अधिकारी ने 2021 के चुनावों में बीजेपी की टिकट पर नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था, उनकी पार्टी को राज्य में बहुमत तो मिला था, लेकिन वह खुद चुनाव हार गई थीं, जिसके बाद भवानीपुर सीट को खाली कराया गया और ममता बनर्जी यहां से चुनाव जीतकर विधायक बनीं थीं. 2026 में एक बार फिर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को चुनाव में पटखनी दे दी. इस चुनाव में शुभेंदु को 73917  वोट मिले थे, जबकि ममता बनर्जी को 58812 वोट मिले. शुभेंदु ने ममता को भवानीपुर में 15105 वोटों से हराया।  नंदीग्राम सीट कितनी महत्वपूर्ण? बंगाल की नंदीग्राम सीट ममता बनर्जी का गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछला चुनाव हारने के बाद ममता ने इस सीट की ओर मुड़कर नहीं देखा. इस सीट को शुभेंदु अधिकारी भी अपना गढ़ मानते हैं. ये उनके राजनीतिक करियर का केंद्र रहा है. साल 2007 में भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ आंदोलन को उन्होंने लीड किया था। 

पेंशन बढ़ोतरी के साथ ताबड़तोड़ एक्शन: CM सुवेंदु ने अवैध फैक्ट्रियों का ‘हुक्का-पानी’ किया बंद

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पद संभालने के बाद से ताबड़तोड़ फैसले लेते दिख रहे हैं. सबसे पहले उन्होंने हावड़ा के तिलजला, टॉपसिया इलाके में हादसे के बाद यहां संचालित तमाम अवैध फैक्ट्रियों का बिजली और पानी कनेक्शन काटने के आदेश दिए. वहीं विधवा भत्ता, बुढ़ापा भत्ता और विकलांगता भत्ता 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये करने का आदेश दिया है. नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा की पहली कार्यवाही के दौरान लंच में चावल, मछली, दाल, तले हुए आलू और सब्जियां शामिल थीं।  तिलजला-टॉपसिया की अवैध फैक्ट्रियों पर सख्ती मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तिलजला, टॉपसिया और आसपास के इलाकों में चल रही अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. मंगलवार को तपसिया स्थित एक बहुमंजिला फैक्ट्री में आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन फैक्ट्रियों के पास वैध अनुमति, बिल्डिंग प्लान या फायर एनओसी नहीं है, उनकी बिजली और पानी की सप्लाई काट दी जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों की जान जोखिम में डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. फैक्ट्री मालिक सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और फोरेंसिक टीम ने मौके का निरीक्षण किया है।  चार विभागों की कमेटी गठित घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने चार विभागों की समन्वय समिति बनाई है. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. बिजली विभाग को CESC के साथ मिलकर उन भवनों का ऑडिट करने को कहा गया है जिनके निर्माण की मंजूरी नहीं है. सरकार पहले ऐसे भवन मालिकों को नोटिस देकर सुधार का अवसर देगी. इसके बाद नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।  विधवा, वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन हुआ डबल नई भाजपा सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए विधवा भत्ता, वृद्धावस्था पेंशन और दिव्यांग भत्ता 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह करने का फैसला किया है. इस निर्णय से लाखों लाभार्थियों को सीधा फायदा मिलेगा. सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में जनहित से जुड़े कई और बड़े फैसलों की घोषणा की जा सकती है।  विधानसभा के मेन्यू में मछली नई विधानसभा की पहली कार्यवाही के दौरान विधायकों के लिए दोपहर के भोजन में चावल, मछली, दाल, आलू भुजिया और सब्जियां परोसी गईं. इस बंगाली मेन्यू ने भाजपा सरकार की ओर से एक स्पष्ट संदेश दिया कि वह बंगाल की संस्कृति और खानपान परंपरा का सम्मान करती है।  चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि भाजपा सत्ता में आने पर मछली और मांस खाने पर रोक लगा सकती है. विधानसभा के इस मेन्यू ने उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।  राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश साथ-साथ शुभेंदु अधिकारी के शुरुआती फैसलों से स्पष्ट है कि उनकी सरकार कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के साथ-साथ जनकल्याण और बंगाली अस्मिता पर भी बराबर जोर दे रही है. अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई, गरीबों के लिए राहत और सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से संदेश इन सबने यह संकेत दिया है कि पश्चिम बंगाल की नई सरकार तेज, निर्णायक और प्रतीकात्मक राजनीति का संतुलित मिश्रण पेश कर रही है। 

बंगाल में डबल इंजन सरकार की रफ्तार: सीएम की पहली कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले, बॉर्डर एरियाज की जमीन BSF को 45 दिनों में ट्रांसफर

कोलकाता पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार अस्तित्व में आ गई है. शुभेंदु सरकार सत्ता में आते ही फॉर्म में आ गई. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 5 मंत्रियों के साथ अपनी पहली कैबिनेट बैठक की, जिसमें बॉर्डर पर फेंसिंग करने और बीजेपी के मारे गए 321 कार्यकर्ताओं को सम्मान देने समेत 6 अहम फैसले लिए गए। पहली कैबिनेट बैठक के बाद सीएम शुभेंदु ने बताया कि उनकी पश्चिम बंगाल सरकार ने बांग्लादेश के साथ सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जरूरी जमीन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों में नौकरी के आवेदकों की आयु सीमा पांच साल बढ़ाने की मंजूरी दी गई. यह वादा गृह मंत्री अमित शाह ने किया था।  पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को पहली कैबिनेट बैठक की. इसमें पांच बड़े फैसले किए गए. मीटिंग में शुभेंदु के साथ सभी पांच कैबिनेट मंत्री भी शामिल थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन, सुरक्षा और डबल इंजन सरकार का रोडमैप इस सरकार की प्राथमिकता होगी।  पहली कैबिनेट बैठक में राज्य के मतदाताओं, चुनाव आयोग और इस विशाल चुनाव प्रक्रिया में शामिल सभी कर्मचारियों का धन्यवाद किया गया।  शुभेंदु सरकार के पहले पांच बड़े ऐलान 1. आयुष्मान भारत योजना को लागू किया जाएगा. राज्य और केंद्र सरकार मिलकर राज्य में इसे लागू करने के लिए काम करेंगे।  2. नियमों के मुताबिक, आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रशिक्षण में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।  3. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार (ममता सरकार) ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था।  4. बॉर्डर एरियाज में जमीन ट्रांसफर का काम आज से शुरू होगा. 45 दिनों के अंदर जमीन BSF को ट्रांसफर की जाएगी।   5. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बता दें कि बीजेपी का ऐसा दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई।  नौकरी की सुरक्षा में विस्तार: कैबिनेट की बैठक में छठा अहम फैसला राज्य सरकार की सभी नौकरियों के लिए 5 साल का विस्तार दिया गया है. इस तरह से ये कदम पश्चिम बंगाल में शासन, सुरक्षा और कल्याण की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देते हैं. पश्चिम बंगाल में साल 2015 से कोई भर्ती नहीं हुई है, इसी वजह से सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने की ऊपरी आयु सीमा में 5 साल की वृद्धि की गई है आयुष्मान भारत लागू बीजेपी ने बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि सत्‍ता में आने पर राज्‍य में आयुष्‍मान भारत स्‍कीम को लागू किया जाएगा. अब ये वादा पूरा होने जा रहा है. शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य ने आधिकारिक तौर पर केंद्र की स्वास्थ्य योजना 'आयुष्मान भारत' से जुड़ने का फैसला किया है. CM ने कहा कि अब PM की सभी योजनाएं बंगाल में लागू की जाएंगी।  नौकरशाहों की केंद्रीय ट्रेनिंग और BNS लागू सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पिछली CM ममता बनर्जी द्वारा रोकी गई नौकरशाहों की केंद्रीय ट्रेनिंग और तैनाती को मंजूरी दे दी गई है. साथ ही, बंगाल में अब तक लागू न हुई भारतीय न्याय संहिता यानी BNS आज से प्रभावी हो गई है. अब सभी नए केस नए कानून के तहत दर्ज होंगे।  2015 से बंद भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि सरकार ने माना कि 2015 से राज्य में कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई. CM ने वादे के मुताबिक नई भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने का ऐलान किया.कैबिनेट बैठक के बाद CM सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ये फैसले "नए बंगाल" की दिशा तय करेंगे. विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।  आयुष्मान भारत योजना से गरीब और कमजोर परिवारों को इलाज मिलता है. इसमें हर साल पांच लाख रुपये तक सालाना कवरेज मिलता है. ये इलाज कैशलेस होता है. कैबिनेट बैठक के बारे में और जानकारी देते हुए सीएम शुभेंदु ने कहा, 'बंगाल के सीमावर्ती जिलों में लगातार बदलती जनसंख्या को देखते हुए, हमारे मंत्रिमंडल ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को आवश्यक भूमि सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी है. मुख्य सचिव और राज्य के भूमि एवं भू-राजस्व विभाग के सचिव को अगले 45 दिनों के भीतर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है।  अधिकारी ने आगे बताया कि टीएमसी सरकार ने संविधान और जनता के साथ विश्वासघात किया और जानबूझकर बंगाल में जनगणना प्रक्रिया को रोके रखा ताकि महिलाओं के लिए आरक्षण को रोका जा सके. लेकिन अब मंत्रिमंडल ने राज्य में परिपत्र को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मंजूरी दे दी है।  मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) मतलब नया आपराधिक कानून, जो पूर्ववर्ती आईपीसी और सीआरपीसी की जगह ले रहा है, राज्य में टीएमसी सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया गया था और कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में नए कानून को लागू करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।  बता दें कि बंगाल (293 सीट) में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी है. इस चुनाव में बीजेपी को 207 सीट मिली हैं. वहीं सत्ताधारी ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई।  चुनावी जीत के बाद शुभेंदु को सीएम बनाया गया. उन्होंने ही भवानीपुर विधानसभा से ममता बनर्जी को हराया है. भवानीपुर में शुभेंदु को 73,917 वोट मिले. वहीं ममता 58,812 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं. उनको 15105 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। 

ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में शपथ, शुभेंदु अधिकारी ने संभाली बंगाल की कमान

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल की राजनीति ने शनिवार को रवींद्र जयंती पर नया इतिहास लिख दिया. कोलकाता के विशाल ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने शपथ ली. शुभेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों के एनडीए सरकारों के मुखिया की मौजूदगी में पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए देश भर के नेता तो आये ही, बंगाल के कोने-कोने से आम लोग भी ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचे। शुभेंदु अधिकारी बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तिनिया, निशीथ प्रमाणिक और क्षुदीराम टुड्डू ने मंत्री पद की शपथ ली है। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में कम से कम 20 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बीजेपी के दिग्गज नेता पहुंचे हैं। बीजेपी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हारने वाले दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया था। उन्होंने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा कल ही पेश कर दिया था। मशहूर ब्रिगेड परेड ग्राउंड ने भव्य शपथ ग्रहण समारोह की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही टीएमसी के 15 साल का शासन खत्म हो गया है और पहली बार बंगाल में बीजेपी का सियासी सूर्योदय हुआ है। पहली बार लोक भवन के बाहर लोकतंत्र का उत्सव आजादी के बाद यह पहली बार है, जब बंगाल की किसी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह राजभवन (अब लोक भवन) के बंद कमरों से निकलकर खुले मैदान में आयोजित हो रहा है. बंगाली पंचांग के अनुसार, बैसाख के 25वें दिन पूरा राज्य रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मना रहा है. इसी दौरान रवींद्र संगीत की धुन के बीच राज्यपाल आरएन रवि ने शुभेंदु अधिकारी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी. उनके साथ 5 मंत्रियों दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक किर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक को भी राज्यपाल ने शपथ दिलायी।  ब्रिगेड परेड ग्राउंड में खुली जीप में पीएम मोदी, शुभेंदु और शमिक अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुली जीप में बंगाल के नये चीफ मिनिस्टर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नये चीफ मिनिस्टर के साथ ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आये लोगों का अभिवादन स्वीकार किया. पीएम मोदी हाथ हिला रहे थे और शुभेंदु अधिकारी तालियां बजा रहे थे. थोड़ी देर बाद पीएम मोदी, शुभेंदु और शमिक जीप से उतरकर पैदल ही स्टेज की तरफ बढ़े. इस दौरान वह लोगों से मिलते रहे. कभी हाथ जोड़कर, तो कभी दोनों हाथ हिलाकर प्रधानमंत्री ने लोगों का अभिनंदन किया।   शहीद परिवारों को सम्मान भाजपा ने राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले अपने 200 से अधिक कार्यकर्ताओं के परिजनों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है. उनके बैठने के लिए मंच के पास अलग व्यवस्था की गयी थी. मैदान में आने वाले समर्थकों और मेहमानों के लिए बंगाल के पारंपरिक जायके ‘झालमुड़ी’ और ‘रसगुल्ले’ के स्टॉल लगाये गये थे।  निशीथ प्रमाणिक ने ली मंत्रिपद की शपथ माथाभांगा सीट से विधायक निशीथ प्रमाणिक ने मंत्री पद की शपथ ली है। उन्होंनेन राजनीति की शुरुआत टीएमसी से की थी और 2019 मेंबीजेपी में शामिल हुए थे। वह उत्तर बंगाल से आते हैं। वह केंद्र में राज्य मंत्री रह चुके हैं। वह कूचबेहार से सांसद थे। क्षुदीराम टुड्डू बने मंत्री क्षुदीराम टुड्डू ने मंत्री पद की शपथ ली है। वह बंगाल का आदिवासी चेहरा हैं। पेशे से शिक्षक हैं और सरकारी स्कूल में अध्यापन करते थे। वह रानीबांध से चुनकर आए हैं। उन्होंने संथाली भाषा में शपथ ली है। अशोक कीर्तिनिया ने मंत्री पद की शपथ ली है।  वह बनगांव उत्तर से विधायक हैं। वह मुतआ समुदाय के लिए ऐक्टिव रहते हैं। सामाजिक कार्यों में उनके योगदान को सराहा जाता है। वह लगातार दो बार विधायक बन चुके हैं। इस बार भी बनगांव से उन्हें जीत हासिल हुई है।  अग्निमित्रा पॉल ने ली मंत्रिपद की शपथ  अग्निमित्रा पॉल ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। उन्हें भी उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है। वह आसनसोल दक्षिण से विधायक हैं और 2019 में बीजेपी में शामिल हुई थीं। वह बंगाल में मजबूत महिला चेहरा हैं। वह फैशन डिजाइनर से नेता बनी हैं।  दिलीप घोष बने मंत्री दिलीप घोष ने मंत्री पद की शपथ ली है। जानकारों का कहना है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री भी बनाया जा सकता है। वह लंबे समय से आरएसएस से जुड़े हैं और बंगाल में बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं। वह खड़गपुर सदर से विधायक हैं ब्रिगेड परेड ग्राउंड की खास बातें     900 एकड़ में फैला ‘कोलकाता लंग्स’ : ब्रिगेड परेड ग्राउंड का अपना एक गौरवशाली इतिहास है. इसे दुनिया के सबसे बड़े शहरी पार्कों में गिना जाता है।      सेना का प्रबंधन : लगभग 900 एकड़ में फैले इस विशाल मैदान का रखरखाव भारतीय सेना की पूर्वी कमान के हाथ में है।      क्रिकेट का जन्मस्थान : कहा जाता है कि भारत में सबसे पहले क्रिकेट के बैट-बॉल इसी मैदान पर चले थे, जहां इयोनिया और कोलकाता के बीच मैच हुआ था।      राजनीति का मक्का : 18वीं सदी में जंगलों को साफ कर बनाये गये इस मैदान में 7 लाख से भी अधिक लोगों की रैलियां हो चुकी हैं. माकपा, कांग्रेस, टीएमसी और अब भाजपा, सभी ने यहां से अपनी सांगठनिक ताकत का लोहा मनवाया है।  सुरक्षा का अभेद्य किला ब्रिगेड परेड ग्राउंड कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा के लिए 4000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया था. पूरे मैदान में 1500 सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से नजर रखी जा रही थी. वीवीआईपी मेहमानों के लिए कार्यक्रम स्थल के पास ही अस्थायी हेलीपैड बनाया गया था. मैदान में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ के लिए 100 से अधिक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगायी गयी है, ताकि हर कोई इस पल को लाइव देख सके। 

अमित शाह ने किया ऐलान, सुवेंदु अधिकारी होंगे पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री

कोलकाता  गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को बंगाल के सीएम के रहस्य से पर्दा हटा दिया. उन्होंने सुवेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान करते हुए कहा कि बंगाल के अगले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ही होंगे. साथ ही उन्होंने नाम से पहले चले मंथन के बारे में बात करते हुए कहा कि आज भाजपा की ओर से पश्चिम बंगाल विधानसभा सदस्यों की एक मीटिंग रखी गई. उन्होंने कहा कि मुझे और मोहन चरण माझी जी (ओडिशा के सीएम) को पर्यवेक्षक के तौर पर हमें यहां भेजा गया. सभी प्रस्ताव और समर्थन एक ही नाम के मिले हैं, कोई दूसरा नाम नहीं आया है. मैं सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता के रुप में निर्वाचित करता हूं।  पश्चिम बंगाल दशकों तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के ‘मां-माटी-मानुष’ के नारे के बीच अपनी जमीन तलाश रही भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार बंगाल के दुर्ग को फतह कर लिया है. प्रचंड बहुमत के साथ मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब सरकार गठन की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है. बंगाल की कमान राज्य के कद्दावर नेता और ‘भूमिपुत्र’ सुवेंदु अधिकारी को मिलना तय माना जा रहा है. भाजपा आलाकमान की ओर से बस इसका औपचारिक ऐलान होना बाकी है. साथ ही खबर ये आ रही है कि भाजपा बंगाल में कोई भी उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) नहीं बनाएगी. पार्टी का यह फैसला साफ तौर पर सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास और राज्य में सत्ता के एक सशक्त केंद्र को स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।  पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज इतिहास रच दिया गया है. कोलकाता में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी के नाम पर अंतिम मुहर लग गई है. खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुभेंदु के नाम का ऐलान किया. अमित शाह और ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी की मौजूदगी में विधायकों ने सर्वसम्मति से शुभेंदु को अपना नेता चुना. शुभेंदु अधिकारी कल यानी 9 मई को सुबह 11 बजे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।  श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना हुआ पूरा- अमित शाह अमित शाह ने अपने संबोधन में पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का विशेष जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज बंगाल की धरती पर बीजेपी की सरकार बनना डॉ. मुखर्जी के संघर्षों और उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है. शाह के मुताबिक, जिस राष्ट्रवाद की नींव उन्होंने रखी थी, आज उसी पर चलकर बंगाल में पहली बार पूर्ण बहुमत की बीजेपी सरकार बनने जा रही है।  शाम 6:30 बजे राज्यपाल से मिलेंगे शुभेंदु अधिकारी, पेश करेंगे दावा कोलकाता में विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है. शुभेंदु अधिकारी आज यानी शुक्रवार शाम 6:30 बजे राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात करेंगे. इस दौरान वे बीजेपी विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपेंगे और आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।    9 मई का दिन बंगाल के लिए बेहद खास है, क्योंकि इस दिन रवींद्र जयंती मनाई जाती है. इसी शुभ अवसर पर राज्य की पहली बीजेपी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे. भवानीपुर में ममता बनर्जी को मात देने वाले शुभेंदु के साथ दो डिप्टी सीएम भी बनाए जाने की चर्चा है, जिससे राज्य में नए राजनीतिक समीकरण देखने को मिल सकते हैं।   बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने 7 मई को राज्य विधानसभा को भंग कर दिया है. कोलकाता गजट में जारी आधिकारिक अधिसूचना का हवाला देते हुए बताया गया है कि विधानसभा को भंग करने का यह कदम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत के बाद उठाया गया है।  चुनाव के बाद प्रदेश के कई हिस्‍सों से हिंसक टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं. मुख्‍यमंत्री पद के प्रबल दावेदारों में शामिल बीजेपी के दिग्‍गज नेता सुवेंदु अधिकारी के निकट सहयोगी और पीए चंद्रनाथ रथ की हत्‍या ने माहौल को और गरमा दिया है. इन सबके बीच बंगाल में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल में भाजपा की संभावित पहली सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. पार्टी का नया मंत्रिमंडल अनुभवी नेताओं और राजनीति में नए चेहरों का मिश्रण हो सकता है. मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी सबसे प्रमुख दावेदारों में माने जा रहे हैं. भाजपा विधायक दल की बैठक शुक्रवार को कोलकाता में होगी, जिसमें विधायक दल का नेता चुने जाने की संभावना है. इस अहम बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ओडिशा के मुख्‍यमंत्री मोहन चरण माझी करेंगे. चुनाव में जीत के बाद अमित शाह पहली बार बंगाल पहुंच रहे हैं।  अमित शाह शुक्रवार को कोलकाता पहुंचेंगे और बैठक से पहले राज्य भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रारंभिक चर्चा करेंगे. शाम 4 बजे नवनिर्वाचित विधायकों के साथ औपचारिक बैठक होगी, जहां मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व इस बार सरकार और संगठन दोनों में वैचारिक प्रतिबद्धता तथा संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता देना चाहता है. भाजपा के संभावित मंत्रिमंडल में कई नए चेहरों को जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें पहली बार विधायक बनीं रत्ना देबनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जो आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले की पीड़िता की मां हैं. इसके अलावा भारत सेवाश्रम संघ के संत रहे उत्पल महाराज, पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार और पूर्व एनएसजी कमांडो दिपांजन चक्रवर्ती भी मंत्री पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं. भाजपा इन चेहरों के जरिए सामाजिक और भावनात्मक संदेश देने की कोशिश कर सकती है।  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, माणिकतला से विधायक तपस रॉय को विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार हो रहा है. वहीं पार्टी महिला नेतृत्व को भी आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है और एक महिला विधायक को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सभी नाम चर्चा के स्तर पर … Read more

नंदीग्राम आंदोलन से चमके शुभेंदु अधिकारी, अब भाजपा ने सौंपी बंगाल की कमान

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो गया है। भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी राज्य के अगले सीएम होंगे। कोलकाता में आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में शुभेंदु के नाम पर मुहर लगी। उनके नाम पर आठ प्रस्ताव और समर्थन प्राप्त हुए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुभेंदु के नाम का ऐलान किया और कहा कि दूसरे नाम के लिए भी विधायकों को पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन सभी से सिर्फ शुभेंदु का ही नाम मिला। सीएम पद की रेस में शुभेंदु ही सबसे आगे चल रहे थे। कई अन्य नामों पर भी अटकलें लगीं, लेकिन शुभेंदु का ही पलड़ा भारी माना जा रहा था। कांग्रेस से की शुरुआत शुभेंदु अधिकारी का पूरा परिवार राजनीति से जुड़ा है। उनके पिता शिशिर अधिकारी दिग्गज नेता रह चुके हैं और मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। शुभेंदु के एक भाई सांसद और दूसरे विधायक हैं। शुभेंदु ने अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की और 1995 में कांथी नगरपालिका में पार्षद चुने गए थे। जब ममता बनर्जी ने 1997 में कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी बनाई, तब शुभेंदु अधिकारी भी उनके साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद, 2006 में, अधिकारी कांथी दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए। उसी वर्ष वे कांथी नगरपालिका के अध्यक्ष भी बने। नंदीग्राम आंदोलन में निभाई अहम भूमिका साल 2007 में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन की अगुवाई की। दरअसल, बंगाल की तत्कालीन लेफ्ट सरकार ने एसईजेड स्थापित करने के लिए एक गांव में दस हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने की योजना बनाई थी। ममता बनर्जी ने इसके खिलाफ आंदोलन किया और उसमें शुभेंदु अधिकारी ने उनका साथ दिया। पूरे आंदोलन के दौरान अधिकारी की अहम भूमिका रही। इसी आंदोलन से ममता बनर्जी की पहली बार सरकार पश्चिम बंगाल में बनी। शुभेंदु की गिनती ममता के करीबी नेताओं में की जाने लगी। वह ममता सरकार में मंत्री भी रहे। इसके अलावा, तमलुक लोकसभा सीट से 2009 और 2014 में सांसद बने। छह साल पहले भाजपा में हुए शामिल तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के बढ़ते प्रभाव की वजह से शुभेंदु नाराज हुए और साल 2020 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। 17 दिसंबर 2020 को उन्होंने टीएमसी की सदस्यता से इस्तीफा दिया। 19 दिसंबर 2020 को, उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा ज्वाइन कर ली। धीरे-धीरे वह अमित शाह के भरोसेमंद नेताओं की लिस्ट में शामिल हो गए। 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराकर सभी को चौंका दिया। भले ही भाजपा को 77 सीटें मिलीं, लेकिन पार्टी का जनाधार राज्य में लगातार बढ़ता गया। 2026 विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने भवानीपुर से भी चुनाव लड़ा और ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित कर दिया। अब वे राज्य के अगले व भाजपा के पश्चिम बंगाल में पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।