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साल में दूसरी बार भारत आएंगे व्लादिमीर पुतिन, BRICS समिट में दुनिया की नजरें

 नई दिल्ली रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। यह सम्मेलन 12-13 सितंबर को आयोजित होगा। क्रेमलिन ने इसकी पुष्टि कर दी है। एक साल के भीतर पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले रूसी राष्ट्रपति पिछले साल दिसंबर में 23वें भारत-रूस एनुअल समिट में हिस्सा लेने के लिए यहां आए थे। बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत में थे। ब्रिक्स नेताओं की बैठक पिछले साल जुलाई में ब्राजील के रियो डि जनेरियो में हुई थी। यह ब्रिक्स का 17वां शिखर सम्मेलन था, जिसका विषय था-‘अधिक समावेशी और सतत शासन के लिए वैश्विक दक्षिण सहयोग को सशक्त बनाना।’ भारत के लिए रूस अहम क्यों भारत का रूस संबंध विदेश नीति के लिए काफी अहम है। खासतौर पर पिछले कई दशकों से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और ऊर्जा संबंध काफी करीबी रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ अरसे में भारत, अमेरिका के नजदीक आया है। इसके बावजूद, भारत अभी भी रूस को अपनी दीर्घकालीन रणनीतिक हितों की सुरक्षा में अहम सहयोगी मानता है। भारत के लिए रूस इसलिए भी अहम है क्योंकि, देश के डिफेंस स्ट्रक्चर में यह एक बड़ी भूमिका निभाता है। भारतीय सशस्त्र बलों के सैन्य हार्डवेयर का एक बड़ा हिस्सा रूसी मूल का है। इसमें एस-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस सिस्टम, सुखोई लड़ाकू विमान और संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल शामिल हैं। दशकों में, मॉस्को भारत का सबसे भरोसेमंद सप्लायर बनकर उभरा है जो उन्नत सैन्य उपकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रणनीतिक रक्षा सहयोग प्रदान करता है। तेल संकट में भी बड़ा मददगार एक जो सबसे अहम बात है, वह यह है कि मौजूदा हालात को देखते हुए रूस भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी तेजी से महत्वपूर्ण हो गया है। यूक्रेन संघर्ष के बाद मॉस्को पर पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते, भारत ने रियायती रूसी कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ा दिया। इस कदम ने नई दिल्ली को वैश्विक ऊर्जा मूल्य झटकों से बचाने, घरेलू ईंधन की कीमतों को स्थिर करने और आर्थिक अनिश्चितता के समय मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद की। चीन के खिलाफ भी आएगा काम रक्षा और ऊर्जा के अलावा, इस संबंध का जियो-पॉलिटिकल महत्व भी काफी है। रूस के साथ भारत की घनिष्ठ भागीदारी तेजी से ध्रुवीकृत हो रहे वैश्विक क्रम में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। मॉस्को के साथ मजबूत संबंध बनाए रखकर, नई दिल्ली यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती है कि रूस की चीन के साथ बढ़ती साझेदारी सीधे भारतीय हितों के खिलाफ एक गठबंधन में न बदल जाए। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कई संवेदनशील मुद्दों पर लगातार भारत का समर्थन भी किया है, जिससे नई दिल्ली को वीटो रखने वाली वैश्विक शक्ति का समर्थन मिलता है। ब्रिक्स क्या है ब्रिक्स एक प्रभावशाली संगठन है, जिसे मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर बनाया था। इसका मकसद पश्चिमी देशों के पारंपरिक भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभुत्व को चुनौती देना था। यह संगठन विश्व की जनसंख्या और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का एक विशाल हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है। इसका ध्यान अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणालियों में सुधार करने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है।

रूस-चीन की बढ़ेगी नजदीकी, पुतिन के दौरे से द्विपक्षीय वार्ता के संकेत

बीजिंग दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देशों के बीच कूटनीतिक गठजोड़ और मजबूत होने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीन दिवसीय चीन यात्रा खत्म होने के तुरंत बाद, अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन का आधिकारिक दौरा करने वाले हैं। क्रेमलिन और चीनी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रपति पुतिन 19 और 20 मई को चीन की यात्रा पर रहेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के तुरंत बाद रूस ने ऐलान किया है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही चीन जाएंगे. क्रेमलिन ने कहा कि यात्रा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे के तुरंत बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 19-20 मई को चीन की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। क्रेमलिन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन अपनी इस यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मॉस्को और बीजिंग के बीच ‘व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करना’ है। दोनों शीर्ष नेता कई ‘प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों’ पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। बातचीत के अंत में दोनों देशों के बीच एक साझा घोषणापत्र पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके अलावा, पुतिन चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात करेंगे, जहां दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर गहन चर्चा होगी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने गुरुवार को कहा कि पुतिन की चीन यात्रा अब लगभग तय है और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत की तैयारी पूरी हो चुकी है. हालांकि उन्होंने यात्रा की सटीक तारीख नहीं बताई, लेकिन संकेत दिए कि यह दौरा जल्द होने वाला है. रूस और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं. पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अब तक 40 से ज्यादा बार मुलाकात कर चुके हैं. दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात सितंबर 2025 में बीजिंग में हुई थी. अब पुतिन की प्रस्तावित चीन यात्रा पर दुनिया की नजरें टिक गई हैं. माना जा रहा है कि इस मुलाकात में यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन संबंध, ऊर्जा व्यापार और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर बड़ी रणनीति बन सकती है. दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के हालिया चीन दौरे के दौरान भी शी जिनपिंग ने पुतिन का जिक्र किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के खत्म होते ही रूस और चीन की बढ़ती नजदीकियां फिर चर्चा में आ गई हैं. रूस ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बहुत जल्द चीन का दौरा करेंगे और इस यात्रा की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.

रूस की विजय दिवस परेड शांत, सैन्य गतिविधियां रुकेंगी और कैदियों का आदला-बदली होगा

मॉस्को  यूक्रेन युद्ध के लगातार जारी रहने और सुरक्षा खतरों के बीच रूस ने शनिवार को अपना विजय दिवस परेड बेहद सीमित रूप में आयोजित किया. हर साल 9 मई को मॉस्को के रेड स्कॉयर पर होने वाली यह परेड रूस के सबसे बड़े राष्ट्रीय आयोजनों में मानी जाती है. यह दिन सोवियत संघ की नाजी जर्मनी पर जीत और दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए लाखों लोगों की याद में मनाया जाता है. लेकिन इस बार का आयोजन पहले के मुकाबले काफी अलग दिखाई दिया।  आमतौर पर रूस इस परेड में अपनी सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन करता रहा है. टैंक, मिसाइल सिस्टम और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें रेड स्कॉयर पर दिखाई जाती थीं। हालांकि इस साल सुरक्षा कारणों और यूक्रेन हमले के खतरे की वजह से टैंक या भारी सैन्य वाहन सड़क पर नहीं उतारे गए।  इसके बजाय रूस ने अपनी सैन्य ताकत को बड़े डिजिटल स्क्रीन और सरकारी टीवी प्रसारण के जरिए दिखाया. इसमें Yars इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, आर्कान्जेस्क परमाणु पनडुब्बी, पेरेसवेत लेजर हथियार, सुखोई Su-57 फाइटर जेट, एस-500 मिसाइल सिस्टम और कई ड्रोन व आर्टिलरी सिस्टम शामिल थे।  परेड में रूसी सैनिकों और नौसेना के जवानों ने मार्च किया. इनमें कुछ ऐसे सैनिक भी शामिल थे जो यूक्रेन युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं।  राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रेड स्क्वायर में व्लादिमीर लेनिन समाधि के पास बैठे दिखाई दिए. उनके साथ रूसी युद्ध वेटरन्स भी मौजूद थे. इस बार परेड में नॉर्थ कोरिया के सैनिक भी शामिल हुए. रिपोर्ट के मुताबिक ये सैनिक रूस के कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेनी बलों के खिलाफ लड़ाई में शामिल रहे हैं।  राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने लगभग आठ मिनट का भाषण दिया. उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन युद्ध में जीत हासिल करेगा. उन्होंने कहा कि 'विशेष सैन्य अभियान' चला रहे रूसी सैनिक NATO समर्थित ताकतों का सामना कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आगे बढ़ रहे हैं. राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध में जीत हासिल करने वाली पीढ़ी आज के सैनिकों को प्रेरणा दे रही है।  इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के युद्धविराम की घोषणा की जानकारी दी. उन्होंने ने कहा कि वे इस युद्धविराम को और लंबे समय तक बढ़ते देखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे विनाशकारी संघर्ष बन गया है. उनके मुताबिक हर महीने हजारों युवा सैनिक मारे जा रहे हैं।  रूस और यूक्रेन दोनों ने हाल के दिनों में एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने के आरोप लगाए थे, लेकिन शनिवार से शुरू हुए नए सीजफायर के उल्लंघन की कोई बड़ी रिपोर्ट सामने नहीं आई।  रूस ने यूक्रेन को चेतावनी दी थी कि अगर उसने विजय दिवस परेड को निशाना बनाया तो कीव पर बड़ा मिसाइल हमला किया जाएगा. मॉस्को ने विदेशी दूतावासों को भी सतर्क रहने को कहा था।  वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने व्यंग्यात्मक अंदाज में बयान जारी करते हुए कहा कि रूस की 9 मई की परेड 'होने दी जाएगी' और यूक्रेनी हथियार रेड स्कॉयर को निशाना नहीं बनाएंगे. परेड के दौरान मॉस्को में सुरक्षा बेहद कड़ी रही। शहर के कई रास्ते बंद किए गए और सड़कों पर भारी सुरक्षा बल तैनात रहे. रॉयटर्स की तस्वीरों में हथियारबंद सैनिक पिकअप ट्रकों पर तैनात दिखाई दिए।   सैन्य गतिविधियां रुकेंगी और कैदियों की अदला-बदली होगी रूस और यूक्रेन के बीच पिछले 4 साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन का सीजफायर होगा. यह युद्धविराम 9 मई, 10 मई और 11 मई तक लागू रहेगा. डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि दोनों देशों ने तीन दिन के सीजफायर पर सहमति जताई है. ट्रंप ने बताया कि रूस में यह समय विक्ट्री डे के जश्न का है. वहीं यूक्रेन भी दूसरे विश्व युद्ध का एक अहम हिस्सा रहा है, इसलिए यह समय दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस सीजफायर के दौरान सभी तरह की सैन्य गतिविधियों को रोका जाएगा. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच 1,000 कैदियों की अदला-बदली भी की जाएगी।  ट्रंप ने पुतिन को कहा थैंक्यू ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह अनुरोध उन्होंने खुद किया था और इसके लिए उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की का धन्यवाद किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कदम लंबे समय से चल रहे इस खतरनाक युद्ध को खत्म करने की शुरुआत साबित हो सकता है. ट्रंप ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है और इसे खत्म करने के लिए बातचीत लगातार जारी है. उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि शांति की दिशा में कोशिशें हर दिन आगे बढ़ रही हैं और दुनिया इस युद्ध के अंत के और करीब पहुंच रही है। 

पुतिन का 150 साल जीने का सपना, वैज्ञानिक कर रहे हैं उसे साकार, क्या थम जाएगी उम्र?

मॉस्को  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उम्र बढ़ाने वाली नई दवा पर बहुत ध्यान दे रहे हैं. कुछ महीने पहले नवंबर में एक एआई समिट में 73 साल के पुतिन ने कहा था कि इंसान 150 साल तक जी सकता है. अब रूस के विज्ञान और शिक्षा मंत्री डेनिस सेकिरिंस्की ने दावा किया है कि उनके देश के वैज्ञानिक दुनिया की पहली जीन थेरेपी दवा बना रहे हैं जो बूढ़ा होने के प्रोसेस को रोक सकती है।  यह दवा RAGE नाम के जीन को ब्लॉक करेगी जो कोशिकाओं को बूढ़ा बनाने का काम करती है. सेकिरिंस्की ने कहा कि इस जीन को सक्रिय होने से कोशिकाएं बूढ़ी हो जाती हैं लेकिन इसे रोकने से कोशिकाओं की जवानी लंबी हो सकती है. यह खबर पुतिन की लंबी उम्र की चाहत से जुड़ी हुई लग रही है।  RAGE जीन क्या है और दवा कैसे काम करेगी RAGE का पूरा नाम रिसेप्टर फॉर एडवांस्ड ग्लाइकेशन एंडप्रोडक्ट्स है. यह एक रिसेप्टर है जो कोशिकाओं में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया शुरू कर देता है. रूस के वैज्ञानिकों का लक्ष्य है कि जीन थेरेपी से इस रिसेप्टर को ब्लॉक किया जाए ताकि कोशिकाएं ज्यादा समय तक युवा रहें. सेकिरिंस्की ने सरांस्क शहर में लॉन्गेविटी मेडिसिन फोरम में यह बात कही।  उन्होंने कहा कि यह जीन थेरेपी उम्र बढ़ने के खिलाफ लड़ाई में सबसे आशाजनक क्षेत्र है. यह दवा बायोलॉजी ऑफ एजिंग एंड मेडिसिन इंस्टीट्यूट में विकसित की जा रही है. अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया है लेकिन यह पुतिन के लंबे समय के लक्ष्यों से मेल खाता है।  पुतिन और शी जिनपिंग की अमरता वाली अफवाह पुतिन सिर्फ 150 साल तक जीने से संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत में कहा था कि इंसान के अंगों को बार-बार ट्रांसप्लांट किया जा सकता है. जितना ज्यादा जीएंगे उतने युवा लगेंगे. दोनों नेताओं की यह बातचीत सुन ली गई थी. पुतिन लंबे समय से उम्र बढ़ाने के शौकीन हैं. उनके दुश्मन डरते हैं कि वे दशकों तक सत्ता में रहना चाहते हैं. फिर अपनी सबसे बड़ी बेटी या बेटे इवान स्पिरोडोनोव को सत्ता सौंपेंगे. इवान अभी सिर्फ 11 साल के हैं।  वैज्ञानिकों पर दबाव और पुतिन का आदेश रूसी वैज्ञानिकों को हाल ही में आदेश दिया गया कि वे उम्र बढ़ाने से लड़ने वाली अपनी सारी रिसर्च तुरंत सरकार को सौंप दें. एक सूत्र ने बताया कि सबसे बड़े बॉस यानी पुतिन ने टास्क दिया और अधिकारी हर तरीके से इसे लागू कर रहे हैं. वैज्ञानिकों को कहा गया कि कोशिकाओं के खराब होने को रोकने की नई तकनीक, दिमाग और इंद्रियों की कमजोरी रोकने वाले उपाय, इम्यून सिस्टम सुधारने के तरीके और बायोप्रिंटिंग जैसी नई मेडिकल टेक्नोलॉजी के प्रपोजल भेजें।  पुतिन ने रूस में एक नेशनल मिशन शुरू किया है जिसका लक्ष्य नागरिकों की सेहत बचाना और उम्र बढ़ने से लड़ना है. 2030 तक 1 लाख 75 हजार जानें बचाने का लक्ष्य रखा गया है. लेकिन वहीं यूक्रेन युद्ध में लाखों जानें जा चुकी हैं. पुतिन के सभी महलों में आधुनिक अस्पताल बने हैं ताकि उनकी सेहत हमेशा अच्छी रहे. उनकी सबसे बड़ी बेटी मारिया वोरोन्त्सोवा जो 40 साल की एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं वे भी इस उम्र बढ़ाने वाली रिसर्च में शामिल बताई जाती हैं।  पुतिन के एंटी-एजिंग गुरु की मौत पिछले साल पुतिन को बड़ा झटका लगा जब उनके लंबे समय के एंटी-एजिंग गुरु प्रोफेसर व्लादिमीर खाविन्सन की 77 साल की उम्र में अचानक मौत हो गई. खाविन्सन ने दावा किया था कि वे इंसानों को 110-120 साल तक जीने का राज बता रहे थे. उन्होंने पुतिन को तीन पुराने सोवियत नेताओं से बेहतर बताया था।  पुतिन और उनकी प्रेमिका अलिना काबाएवा दोनों खाविन्सन के एंटी-एजिंग कॉकटेल लेते रहे हैं जो सोवियत आर्मी के समय से तैयार किए गए थे. इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर इलिया दावल्याटचिन का कहना है कि पुतिन वास्तव में 150 नहीं बल्कि 97 साल तक जीना चाहते हैं।  2050 में उनका बेटा इवान 35 साल का हो जाएगा जो रूसी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने की उम्र है. कुल मिलाकर पुतिन उम्र बढ़ाने की दवा को अपने और अपने करीबियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं लेकिन यह अभी प्रयोग की स्टेज पर है और कोई गारंटी नहीं है. दुनिया देख रही है कि क्या रूस सच में उम्र बढ़ाने की दुनिया की पहली दवा बना पाएगा। 

पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, भारत और रूस के रिश्तों को मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए एक बार फिर से भारत का दौरा करेंगे। बता दें कि इससे पहले उन्होंने दिसंबर 2025 में भारत का दौरा किया था। ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और नए सदस्य देशों) के नेताओं की यह वार्षिक बैठक आर्थिक सहयोग, व्यापार, वैश्विक शासन और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की जाती है। यह बैठक सितंबर के महीने में हो सकती है। रूस की समाचार एजेंसी टास ने बुधवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के हवाले से बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल के अंत में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में निश्चित रूप से भाग लेंगे। अभी तक शिखर सम्मेलन की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन TASS ने पहले भारतीय सरकार के एक सूत्र के हवाले से बताया था कि यह 12-13 सितंबर को होने वाला है। ब्रिक्स में अब 11 देश हो गए शामिल ब्रिक्स वर्तमान में 11 सदस्य देशों का एक प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसकी शुरुआत 2006 में चार देशों (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) के साथ हुई थी, जिसे तब 'ब्रिक' (BRIC) कहा जाता था। लेकिन 2010 में इसमें दक्षिण अफ्रीका शामिल हो गया जिसके बाद इसे ब्रिक्स कहा जाने लगा। लेकिन अब कुछ और देशों को इससे जोड़ा गया है जिनमें मिश्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं। चौथी बार भारत कर रहा ब्रिक्स की मेजबानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सम्मेलन सितंबर में (संभावित रूप से 12-13 सितंबर) आयोजित होगा। भारत BRICS की चौथी बार मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी मेजबानी कर चुका है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन "निश्चित रूप से" सम्मेलन में शामिल होंगे। रूसी समाचार एजेंसी TASS ने भी इस खबर की पुष्टि की है। भारत ने पुतिन को आधिकारिक निमंत्रण भेजा है और दोनों देशों के बीच कोई बाधा नहीं है। ब्रिक्स में शामिल हैं ये देश BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख उभरते अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं। हाल के वर्षों में इस समूह का विस्तार हुआ है और नए सदस्य भी जुड़े हैं। यह मंच वैश्विक आर्थिक सहयोग, व्यापार वृद्धि, बहुपक्षीय सुधारों, ग्लोबल गवर्नेंस और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में विश्व स्तर पर अनिश्चितता, ऊर्जा संकट, व्यापार युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के बीच यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है। भारत की अध्यक्षता का थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है, जो लोगों-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण पर आधारित है।  भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत पुतिन की यह यात्रा भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग पहले से ही मजबूत है। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी पुतिन भारत यात्रा की थी। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ उन्होंने वार्षिक शिखर सम्मेलन में शिरकत की थी। अब BRICS सम्मेलन में पुतिन की उपस्थिति से ग्लोबल साउथ की आवाज और मजबूती मिलेगी। यह बैठक उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर देगी। इससे पहले दिसंबर में भारत आए थे पुतिन इससे पहले, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर, 2025 को 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका जोरदार स्वागत किया था। इस यात्रा के दौरान आर्थिक संबंधों, ऊर्जा सहयोग और रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने पर चर्चा की गई थी। नेताओं ने भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि की थी।  

रूस और यूक्रेन के बीच सीजफायर, पुतिन का बड़ा ऐलान; शांति का दौर कितने दिन चलेगा?

मॉस्को  ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद अब दुनिया को एक और खुशखबरी मिली है. जी हां, अब रूस-यूक्रेन के बीच भी सीजफायर हो गया है. हालांकि, यह टेंपररी सीजफायर है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मानें तो रूस अब 2 दिनों तक यूक्रेन पर कोई अटैक नहीं करेगा. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर दो दिन के सीजफ़ायर का ऐलान किया. क्रेमलिन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि यूक्रेन भी इसका पालन करेगा।  क्रेमलीन की ओर से इस बाबत एक बयान जारी किया गया. रूसी बयान में कहा गया, ‘ऑर्थोडॉक्स ईस्टर की आने वाली छुट्टी के सिलसिले में 11 अप्रैल को शाम 4 बजे से 12 अप्रैल को दिन खत्म होने तक सीजफायर का ऐलान किया जाता है. हम मानते हैं कि यूक्रेनी पक्ष भी रूसी संघ का उदाहरण अपनाएगा.’ यानी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर 32 घंटे की युद्धविराम की घोषणा की है।  ईस्टर ईसाइयों के लिए एक बड़ा त्योहार है. यह रविवार को मनाया जाएगा. ऑर्थोडॉक्स चर्चों द्वारा अपनाए गए जूलियन कैलेंडर के अनुसार यूक्रेन और रूस में ईस्टर 12 अप्रैल को पड़ता है।  यूक्रेन ने सीजफायर पर क्या कहा वहीं, रूसी राष्ट्रपति के बयान पर जेलेंस्की का भी बयान आया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के फैसले पर कहा कि कीव ने बार-बार ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के दौरान युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है और उसी अनुसार कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा, ‘यूक्रेन ने बार-बार कहा है कि हम समान कदम उठाने के लिए तैयार हैं. हमने इस साल ईस्टर के दौरान युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था और हम उसी अनुसार कार्रवाई करेंगे. लोगों को एक ऐसा ईस्टर चाहिए जिसमें कोई खतरा न हो और शांति की ओर वास्तविक कदम बढ़ें. रूस के पास भी मौका है कि वह ईस्टर के बाद हमलों पर वापस न लौटे।  पुतिन का यह कदम क्यों अहम पुतिन का यह कदम जेलेंस्की के उस प्रस्ताव के बाद आया है, जिसमें उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के दौरान एक-दूसरे की ऊर्जा संरचना पर हमले रोकने की बात कही थी. उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव अमेरिका के माध्यम से दिया गया था, जो मॉस्को और कीव के बीच बातचीत में मध्यस्थता कर रहा है, क्योंकि युद्ध पांचवें साल में पहुंच गया है।  कब से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच 2022 से ही युद्ध जारी है. रूस और यूक्रेन के बीच दो दिनों के सीजफायर का ऐलान तब हुआ है, जब इससे पहले ईरान और अमेरिका सीजफायर पर सहमत हुए हैं. बीते दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 15 दिनों के सीजफायर का ऐलान किया. ईरान और अमेरिका के बीच आज इस्लामाबाद में शांति वार्ता होगी. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर अटैक किया था. तब से ही युद्ध जारी था। 

ईरान जंग के बीच मोजतबा खामेनेई रूस पहुंचे, पुतिन ने उन्हें विमान से उड़ा लिया

मॉस्को अब तक ईरान-अमेरिका युद्ध को लेकर रूस की भूमिका को लेकर सिर्फ बातें की जा रही थीं लेकिन अब एक ऐसी खबर आ रही है, जो सच निकली तो ये युद्ध की दिशा बदलने वाला मोड़ होगा. डोनाल्ड ट्रंप से लेकर नेतन्याहू तक उस दिन से मोजतबा खामनेई के पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं, जब से उन्हें अपने पिता की जगह ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया है. उनके घायल होने की भी खबरें आईं और ईरान की ओर से इससे इनकार भी किया गया. हालांकि अब कुवैती अखबार अल जरीदा ने दावा किया है कि मोजतबा खामेनेई अपने देश में ही नहीं हैं।  अल जरीदा रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा को स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से एक बेहद गुप्त अभियान में रूस ले जाया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें रूसी सैन्य विमान से मॉस्को पहुंचाया गया, जहां उनका ऑपरेशन किया गया और फिलहाल उनका इलाज चल रहा है. बताया गया कि यह कदम उनकी खराब सेहत और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उठाया गया. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हालिया हमलों में उन्हें चोटें आई थीं, लेकिन ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वह सुरक्षित और ठीक हैं और उनका इलाज जारी है।  कैसे तेहरान छोड़े पहुंच गए मॉस्को? रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुरुवार को ही रूस के सैन्य विमान मोजतबा खामेनेई को लेकर मॉस्को आ गया. कहा ये भी जा रहा है कि उन्हें राष्ट्रपति भवन में मौजूद अस्पताल में भर्ती कराया गया. बमबारी और हवाई हमलों के बीच उनका इलाज असंभव होने के कारण उन्हें ईरान से निकालने का निर्णय लिया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया कि पुतिन ने उन्हें अपने यहां शरण देने की पेशकश की, जिसके बाद वे वहां पहुंचे और जाते ही उनकी सफल सर्जरी हुई. सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ईरानी सिक्योरिटी एजेंसीज को खामनेई की लोकेशन लीक होने का खतरा सबसे ज्यादा था, इसीलिए उन्हें मॉस्को में शिफ्ट किए जाने की सिफारिश पर सहमति जताई गई. दावा किया गया है कि खुद पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के साथ बातचीत के दौरान ये प्रस्ताव रखा था।  डोनाल्ड ट्रंप ने कहा – ‘मैंने सुना मर गए मोजतबा’ इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर सवाल उठाए उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं या नहीं. ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के बीच उनके घायल होने की खबरें आईं. एनबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा – ‘मुझे नहीं पता कि वह जिंदा भी हैं या नहीं. अभी तक किसी ने उन्हें दिखाया नहीं है. मैं सुन रहा हूं कि शायद वह जिंदा नहीं हैं. अगर वह जिंदा हैं तो उन्हें अपने देश के लिए समझदारी दिखाते हुए आत्मसमर्पण कर देना चाहिए.’ इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि खामेनेई किसी भी रूप में जिंदा हो सकते हैं लेकिन उनकी चोटों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। 

पुतिन का बड़ा सैन्य संदेश: Su-34 बना दुनिया का पहला फाइटर जेट जो रूस से अमेरिका तक कर सकता है हमला

मॉस्को रूस दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनकी ताकतवर फाइटर जेट बनाने में महारत मानी जाती है। लड़ाकू विमानों को लेकर रूस की अमेरिका और पश्चिम के दूसरे देशों से प्रतिद्वंद्विता रही है। रूस का ऐसा ही लड़ाकू विमान Su-34 है, जो अमेरिका जैसे देशों का भी ध्यान खींचता रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी हवा में देर तक रहने की क्षमता और बड़ा फ्यूल टैंक है। ये एक ऐसा विमान है, जो रूस से अमेरिका तक उड़ान भर सकता है। मिलिट्री वॉच मैगजीन के मुताबिक, रूसी Su-34 स्ट्राइक फाइटर दुनिया में कहीं भी सबसे लंबी ऑपरेशनल रेंज वाला टैक्टिकल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है। इसकी एंड्योरेंस (हवा में रहने की क्षमता) कई तरह के स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स के बराबर है। यह लंबे समय तक घूमने से लेकर डीप पेनेट्रेशन मिशन जरूरतों के लिए ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी देता है। अलग से फ्यूल टैंक की नहीं होती जरूरत पश्चिमी के फाइटर्स के उलट रूसी फाइटर्स को एक्सटर्नल फ्यूल टैंक ले जाते बहुत कम देखा जाता है क्योंकि उनकी लंबी रेंज इंटरनल फ्यूल का इस्तेमाल करती है। इससे वे बिना ड्रैग लगाए लंबी दूरी पर असरदार तरीके से काम कर सकते हैं। ऐसे फ्यूल टैंकों का इस्तेमाल करके उपलब्ध वेपन हार्डपॉइंट की संख्या को कम कर सकते हैं। Su-34 का तीन PTB-3000 3,000 लीटर एक्सटर्नल फ्यूल टैंक के साथ कम देखा जाना बताता है कि एयरक्राफ्ट इंटरकॉन्टिनेंटल रेंज पर ऑपरेशन के लिए कॉन्फिगर होने की एक खास क्षमता है। Su-34 को सोवियत Su-27 एयर सुपीरियोरिटी फाइटर के डेरिवेटिव के तौर पर डेवलप किया गया था, जो 20वीं सदी में सबसे लंबी रेंज वाला फाइटर टाइप था। Su-34 की अमेरिका तक रेंज रूस के Su-34 फाइटर Su-27 से 50 प्रतिशत ज्यादा भारी है। इसका बड़ा साइज ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट AL-31FM2 इंजन का इंटीग्रेशन और रेंज को ज्यादा आसान बनाता है। Su-27 की इंटरनल फ्यूल पर मैक्सिमम फेरी रेंज 4,000 किलोमीटर थी। Su-34 की रेंज 4,800-5,000 किलोमीटर है। 5000 की यह क्षमता और भी बढ़ सकती है। इंटरकॉन्टिनेंटल रेंज को 5,500 किलोमीटर से ज्यादा रेंज माना जाता है। इससे Su-34 इस बड़े माइलस्टोन के करीब पहुंच गया। तीन 3,000 लीटर के ड्रॉप टैंक ले जाने पर Su-34 की फेरी रेंज को टैंकों के वजन और ड्रैग को ध्यान में रखते हुए 8,000 किलोमीटर बढ़ाया जा सकता है। इससे Su-34 मॉस्को से वाशिंगटन डीसी तक उड़ सकता है। यानी यह विमान रूस से सीधे अमेरिका पहुंचने की क्षमता रखता है। बिना रीफ्यूलिंग के उड़ान Su-34 बिना एरियल रीफ्यूलिंग सपोर्ट के इंटरकॉन्टिनेंटल दूरियों पर उड़ सकता है। एयरक्राफ्ट ऐसी रेंज पर ऑपरेट करते समय कुछ ऑपरेशनल इस्तेमाल भी बनाए रख सकता है। इलेक्ट्रॉनिक, रडार और फोटो रेकी के लिए पॉड्स को इंटीग्रेट करने की जेट की क्षमता इसे बिना हथियार लोड के जरूरी भूमिका निभाने में मदद करती है। चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन के चीनी छठी पीढ़ी के फाइटर के आने से Su-34 दुनिया के सबसे लंबी दूरी के फाइटर के तौर पर अपनी जगह खो सकता है। चीनी जेट दुनिया के सबसे बड़े फाइटर के तौर पर Su-34 से आगे निकल सकता है। इसके बावजूद Su-34 की अहमियत बनी रहेगी क्योंकि इसमें नई मिसाइल टाइप को इंटीग्रेट किया जा रहा है।

रूस-अमेरिका टकराव: पुतिन का जुकरबर्ग को सबक, चीन पर भी नजर

मॉस्को  मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने आरोप लगाया है कि रूस ने देश में उसकी सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक करने की कोशिश की है, ताकि यूजर्स को स्‍टेट सपोर्टेड डोमेस्टिक ऐप की ओर मोड़ा जा सके. Meta Platforms के स्वामित्व वाले इस ऐप के प्रवक्ता ने बताया कि रूस का यह कदम इंटरनेट स्पेस पर नियंत्रण बढ़ाने और विदेशी टेक कंपनियों की भूमिका सीमित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. तो क्‍या रूस भी चीन की राह पर चलने की तैयारी कर रहा है. दिलचस्‍प है कि चीन ने मैसेजिंग एप से लेकर सोशल साइट्स तक खुद की डेवलप की है. बीजिंग का उद्देश्‍य है कि इसके जरिये देश में पश्चिमी देशों के प्रभाव को रोका जा सकेगा और अमेरिका-यूरोप के टेक्‍नोलॉजी मोनोपोली पर लगाम लगाया जाएगा. अब रूस के कदम ने एक तरफ जहां मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग को उनकी औकात दिखा दी तो दूसरी तरफ अमेरिकी दादागिरी को भी ठोस चुनौती दी है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद मॉस्को और वेस्‍टर्न टेक्‍नोलॉजिकल कंपनियों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है. रूसी अधिकारी घरेलू स्तर पर विकसित ऐप ‘MAX’ को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसे सरकार समर्थित बताया जा रहा है. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस ऐप का इस्तेमाल यूजर्स की निगरानी और डेटा ट्रैकिंग के लिए किया जा सकता है, लेकिन सरकारी मीडिया ने इन आरोपों को निराधार करार दिया है. WhatsApp ने कहा कि रूस द्वारा उठाए गए कदम यूजर्स को एक सरकारी-स्वामित्व वाले सर्विलांस ऐप की ओर धकेलने की कोशिश है. कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘हम उपयोगकर्ताओं को जुड़े रखने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे.’ हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूस में सेवा बहाली को लेकर आगे की रणनीति क्या होगी. WhatsApp पर सख्‍ती इस बीच, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए वीडियो बयान में कहा कि WhatsApp की वापसी रूसी कानूनों के पालन पर निर्भर करेगी. उन्होंने कहा, ‘अगर Meta कॉरपोरेशन कानून का पालन करती है और रूसी अधिकारियों के साथ संवाद करती है, तो समझौते की संभावना बन सकती है. लेकिन यदि कंपनी अडिग रुख अपनाती है और कानून के अनुरूप ढलने के लिए तैयार नहीं होती, तो कोई संभावना नहीं है.’ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के संचार नियामक रोसकोमनादज़ोर ने WhatsApp को अपने ऑनलाइन डायरेक्टरी से हटा दिया है. बताया जाता है कि रूस में इस ऐप के करीब 10 करोड़ यूजर्स हैं, जो इसे देश के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक बनाता है. इस कदम को रूस की डिजिटल नीति में एक और सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है. Apple पर भी गाज रूस ने पिछले साल WhatsApp और टेलीग्राम जैसी विदेशी मैसेजिंग सेवाओं पर कुछ कॉल सुविधाओं को सीमित करना शुरू कर दिया था. अधिकारियों का आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म धोखाधड़ी और आतंकवाद से जुड़े मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करने से इनकार करते हैं. इसके अलावा दिसंबर में Apple के वीडियो-कॉलिंग ऐप FaceTime को भी ब्लॉक कर दिया गया था. टेलीग्राम के रूसी मूल के संस्थापक पावेल ड्यूरोव पहले ही कह चुके हैं कि उनकी कंपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और यूजर्स की गोपनीयता की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहेगी. वहीं, मानवाधिकार संगठनों और डिजिटल राइट ग्रुप्‍स का कहना है कि रूस द्वारा घरेलू प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा देना और विदेशी सेवाओं को सीमित करना इंटरनेट स्वतंत्रता पर गंभीर असर डाल सकता है. डिजिटल संप्रभुता विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल तकनीकी कंपनियों और सरकारों के बीच नियामक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल संप्रभुता, डेटा नियंत्रण और नागरिकों की ऑनलाइन स्वतंत्रता जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है. WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म के संभावित पूर्ण प्रतिबंध से रूस में लाखों यूजर्स की रोजमर्रा की संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. संकेत साफ है कि रूस और वेस्‍टर्न टेक कंपनियों के बीच टकराव आने वाले समय में और गहरा सकता है, जिसका असर वैश्विक डिजिटल इकोसिस्टम पर भी पड़ सकता है.

रूस का बड़ा बयान: तेल के मुद्दे पर भारतीय दोस्त कभी नहीं बदलेंगे

नई दिल्ली रूस ने कहा है कि इस बात पर भरोसे की कोई वजह नहीं है कि 'दोस्त' भारत अपना रुख बदल सकता है। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा। इससे पहले रूस ने कहा था कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। ट्रंप ने कहा है कि भारत अब अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया झाकारोवा ने कहा कि इस बात पर भरोसा करने का कोई कारण नहीं है कि भारत ऐसा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति का किसी स्वतंत्र देश को यह बताना कि वह किसके साथ व्यापार कर सकता है, कोई नई बात नहीं है। रूस के पास इस बात को मानने का कोई कारण नहीं है कि हमारे भारतीय मित्रों ने अपना रुख बदल लिया है।' उन्होंने कहा, 'हम इस बात से सहमत है कि भारत का रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। हम भारत में हमारे साझेदारों के साथ इस क्षेत्र में करीबी सहयोग को जारी रखने के लिए तैयार हैं।' रूस बोला- भारत स्वतंत्र है क्रेमलिन ने  कहा कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और विविधता लाने के उसके फैसले में कुछ भी नया नहीं है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक सवाल के जवाब में कहा, 'हम और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि रूस, भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला एकमात्र देश नहीं है। भारत हमेशा से अन्य देशों से भी ये उत्पाद खरीदता रहा है, इसलिए हमें इसमें कुछ भी नया नजर नहीं आता।' इससे एक दिन पहले पेसकोव ने स्पष्ट किया था कि रूस को भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने के संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान या सूचना प्राप्त नहीं हुई है। रूस के नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड के प्रमुख विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने कहा कि भारतीय तेल शोधन संयंत्र रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। उन्होंने तकनीकी कारण बताते हुए कहा, 'अमेरिका जिस 'शेल ऑयल' का निर्यात करता है, वह हल्के श्रेणी का होता है। इसके विपरीत, रूस भारी और सल्फर युक्त 'यूराल्स' तेल की आपूर्ति करता है। भारतीय तेल शोधन संयंत्रों के ढांचे के अनुसार, उन्हें अमेरिकी तेल को अन्य श्रेणी के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। ऐसे में रूस के तेल को पूरी तरह अमेरिका से बदलना संभव नहीं होगा।'