samacharsecretary.com

PM मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन पर भव्य आयोजन, 17 सितंबर को जलेंगे एक लाख दीप

रायपुर. भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि प्रधानमंत्री के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन के लिए 17 सितंबर को पूरे प्रदेश में 36 लाख ‘आशीर्वाद के दीये’ जलाए जाएंगे। प्रत्येक मतदान केंद्र पर कम से कम 100 दीये जलाने का लक्ष्य रखा गया है। व्यापक जनांदोलन बनेगा यह अभियान शर्मा ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि यह अभियान केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा और राष्ट्र निर्माण का व्यापक जनांदोलन बनेगा। इसमें हर गांव, शहर, बूथ और परिवार की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक बूथ पर हर परिवार दीप जलाकर प्रधानमंत्री मोदी के सेवा समर्पण के प्रति आभार प्रकट करेगा और ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प लेगा। सात अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर विशेष मशाल स्थापित की जाएगी और प्रमुख चौकों पर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी, जिससे प्रधानमंत्री सभी जिला केंद्रों को संबोधित करेंगे। वडनगर से वाराणसी तक युवाओं की विशेष यात्रा इस दौरान युवाओं की एक विशेष यात्रा प्रधानमंत्री के जन्मस्थान वडनगर से उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक निकाली जाएगी। ‘वडनगर से वाराणसी’ कार्यक्रम में 250 बाइकों पर 500 यात्री वडनगर में हाटकेश्वर महादेव का अभिषेक करेंगे। ‘सेवा मेरा योगदान’ अभियान में होगी आम जन की भागीदारी ‘सेवा मेरा योगदान’ अभियान में भाजपा कार्यकर्ता और आम नागरिक प्रशासनिक एवं सामाजिक स्तर पर सेवा गतिविधियों में भाग लेंगे। उप मुख्यमंत्री ने ‘सेवा के रंग’ रंगोली प्रतियोगिता, ड्राइंग एवं भाषण प्रतियोगिताओं, और नमो सेवा गाथा कार्यक्रम की जानकारी दी। सीएम-पीएम रहते हुए मोदी की कहानियां सुनाएंगे जनसेवक महाकुंभ कार्यक्रम के तहत सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का सम्मेलन होगा। मोदी के सीएम और पीएम रहते ‘25 साल की 25 कहानियां’ कार्यक्रम में देश के बड़े बदलावों को प्रस्तुत किया जाएगा। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में 25 प्रमुख सेवा गतिविधियों की सूची जारी की जाएगी, जिनमें नागरिक स्वेच्छा से कार्य चुनकर सुधार करेंगे। पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन, उपाध्यक्ष जी. वेंकट, मंत्री अमित साहू, अंबिकेश केशरी, और भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकारिहा भी उपस्थित रहे।  

यूपी में तीसरी बार सरकार बनाने की रणनीति पर मंथन, सेवा संकल्प अभियान पर जोर

लखनऊ भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष शुक्रवार की शाम दो दिनी यूपी दौरे पर लखनऊ पहुंचे। उन्होंने प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर हुई कोर कमेटी की बैठक में सरकार और संगठन से यूपी का सियासी फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुई इस बैठक में सेवा संकल्प अभियान, विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव की तैयारी, राज्यसभा चुनाव पार्टी संगठन के गठन का काम जल्द करने के साथ ही विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर चर्चा हुई। विधानसभा चुनाव से पहले इस बड़े अभियान के जरिए हर वर्ग तक पहुंचने की रणनीति पर मंथन हुआ। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन ने सरकार और संगठन के बेहतर समन्वय से सेवा संकल्प अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा किएक महीने चलने वाले इस अभियान के जरिए युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और हर लाभार्थी तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। 17 सितंबर को हर बूथ पर प्रत्येक लाभार्थी परिवार आर्शीवाद का दीया जलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करेगा। उन्होंने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं तक पहुंचना है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर प्रभावी ढंग से प्रचार पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अभियान को लेकर सरकार के स्तर पर की गई तैयारियों पर चर्चा की। प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने सांगठनिक स्तर पर की तैयारी को साझा किया। उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने कहा कि यूपी में तीसरी बार प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने को लेकर विस्तार से मंथन हुआ है। यूपी प्रभारी विनोद तावड़े, सह प्रभारी जगदीश भाई पटेल,प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मौजूद रहे। चुनाव की तैयारियों पर हुई बात: पंकज प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बताया कि बैठक में मिशन-2027 को लेकर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि प्रदेश कार्यसमिति की बैठक कराए जाने को लेकर भी कोर कमेटी में चर्चा हुई। सूत्रों की मानें तो पार्टी के मोर्चा-प्रकोष्ठों के जल्द गठन और संगठन की योजनानुसार प्रवास शुरू करने को कहा गया है। वहीं नवंबर में प्रस्तावित 11 विधान परिषद सीटों की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित के आगामी दिनों में होने वाले दौरों-कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा की गई। महामंत्रियों संग बैठक,कानपुर जाएंगे बीएल संतोष शनिवार को सुबह प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर पार्टी के प्रदेश महामंत्रियों संग बैठक करेंगे। इसके अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं से भी मिलेंगे। उसके बाद कानपुर जाएंगे। वहां कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। फिर रविवार को दिल्ली रवाना होंगे। इससे पूर्व शनिवार शाम यूपी प्रभारी विनोद तावड़े के साथ लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचने पर प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रजबहादुर, महामंत्री संजय राय, रामप्रताप चौहान, गोविंद नारायण शुक्ला सहित अन्य ने स्वागत किया।

2024 की हार से BJP ने लिया सबक, यूपी के 18,900 कमजोर बूथों पर ‘हाइपर-लोकल’ रणनीति

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए भाजपा अब पूरी तरह से एक्टिव हो गई है. सीएम योगी आदित्यनाथ अलग-अलग इलाकों में जनसभाएं कर भले ही सियासी माहौल बनाने में जुटे हों, लेकिन भाजपा एक रिकवरी प्लान पर भी काम कर रही है. इसके तहत 2024 में जिन विधानसभा सीटों पर हार मिली है, उनके एक-एक बूथ की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।  भाजपा सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए 'हाइपर-लोकल' मोड में उतर गई है. मकसद बिल्कुल साफ है, हर बूथ, हर नंबर और हर वोट पर ध्यान देना. पार्टी 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली हार को सिर्फ़ एक बड़ी राजनीतिक हार के तौर पर नहीं देख रही है. उसने डेटा की गहराई से जांच की है और उन खास पोलिंग बूथों की पहचान की है, जहां 2022 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के बीच उसका सपोर्ट बेस कम हुआ।  भाजपा सूत्रों ने बताया कि पार्टी ने 2022 में जिन 18,900 बूथों पर जीत हासिल की थी, 2024 के चुनाव में उन्हीं बूथों पर वोट कम मिले हैं. यह संख्या अब पार्टी की संगठनात्मक रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है. इसीलिए भाजपा ने पहले इन बूथों का हिसाब-किताब करने, कमजोर जगहों की पहचान कर उन्हें मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए रिकवरी प्लान बनाया है।  भाजपा के सामने ग्रामीण बूथों की चुनौती भाजपा की बूथ स्तरीय कवायद से मिली सबसे अहम जानकारी भौगोलिक है. भाजपा ने जिन 18,900 बूथों को चिह्नित किया है, उनमें से लगभग 80 फीसदी बूथ ग्रामीण इलाकों के हैं. खासकर छोटे गांवों और बिखरी हुई बस्तियों वाले बूथ हैं। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर जैसे शहरी केंद्र अपेक्षाकृत ज़्यादा मज़बूत रहे. इससे साफ है कि भाजपा का आधार ग्रामीण इलाकों में घट रहा है, जिसे दुरुस्त करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं।  भाजपा के सामने अब सिर्फ़ पूरे राज्य में राजनीतिक संदेश पहुंचाने की चुनौती नहीं है; चुनौती यह पहचानना है कि कौन-से ग्रामीण समुदाय दूर हो गए, वे क्यों दूर हुए और उन्हें वापस कैसे लाया जाए।  वॉर रूम से जमीनी लड़ाई तक का प्लान यूपी में भाजपा की रणनीति डेटा एनालिसिस से आगे बढ़कर संगठन को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने की ओर बढ़ रही है.  भाजपा के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े 16 से 22 सितंबर के बीच फिर से यूपी का दौरा करेंगे. उनकी समीक्षा में जिन मुद्दों पर खास तौर पर चर्चा होगी, उनमें वे बूथ शामिल हैं जहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था और उन्हें वापस जीतने की रणनीति बनाना शामिल है।  भाजपा की यह प्रक्रिया असल में एक पॉलिटिकल फीडबैक लूप है: बूथ की पहचान करना, सामाजिक बदलाव को समझना, स्थानीय मुद्दों की पहचान करना, और उसके बाद संगठन को फिर से खड़ा करके दोबारा से बूथ को वापस जीतना. भाजपा का मानना है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव का नतीजा पूरे राज्य के औसत आंकड़ों से तय नहीं होता; यह हज़ारों अलग-अलग बूथों पर जीत-हार से तय होता है, जहां वोटों के अंतर को मापा जा सकता है, वोटरों की पहचान की जा सकती है और संगठन की कमियों को सुधारा जा सकता है।  भाजपा का यूपी में रिकवरी प्लान भाजपा के यूपी में नए गणित का आधार बूथ प्रबंधन है. यूपी में 18,900 का आंकड़ा सिर्फ़ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह 2024 में मिली हार को माइक्रो-लेवल पर चुनावी रिकवरी प्लान में बदलने की भाजपा की रणनीति है. अवध और पूर्वांचल सबसे ज़्यादा जोखिम वाले इलाके हैं. ग्रामीण बूथ मुख्य चुनावी मैदान हैं, तथा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को एकजुट करना एक अहम चिंता है।  बसपा के कमज़ोर होने से विपक्ष के वोट ट्रांसफर का पैटर्न बदल गया है. इसके अलावा बुंदेलखंड जैसे इलाकों में स्थानीय मुद्दे अभी भी अहम हैं. भाजपा अब इसी गणित को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है ताकि 2027 में दोबारा वापसी कर सके।  अवध और पूर्वांचल में भाजपा की चुनौती डेटा से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में हर जगह नुकसान एक जैसा नहीं था. अवध क्षेत्र में भाजपा ने 2022 में इलाके की 154 विधानसभा सीटों में से 101 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में वह इनमें से सिर्फ़ 51 सीटों पर आगे थी।  यह कुल मिलाकर 50 सीटों का नुकसान है, 2022 के नतीजों के मुकाबले 49.5 फीसदी की गिरावट. अमेठी, फैज़ाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर जिलों में यह नुकसान साफ़ तौर पर देखा गया, जिससे अवध भाजपा के चुनावी नक्शे में सबसे ज़्यादा दबाव वाले इलाकों में से एक बन गया है। अवध की तरह ही पूर्वांचल इलाके में भी भाजपा को झटका लगा था. 2022 में भाजपा ने पूर्वांचल इलाके की 102 विधानसभा सीटों में से 53 सीटें जीती थीं. इसके दो साल बाद, लोकसभा चुनाव के दौरान वह सिर्फ़ 36 सीटों पर आगे थी। यह कुल मिलाकर 17 सीटों या 32.1 फीसदी की गिरावट रही।  बूथ-लेवल पर यह गिरावट खास तौर पर जौनपुर, गाज़ीपुर, मछलीशहर, चंदौली और ग्रामीण प्रयागराज में देखी गई। भाजपा जिन राजनीतिक वजहों पर गौर कर रही है, उनमें गैर-यादव ओबीसी वोटरों के एक हिस्से का समाजवादी पार्टी की तरफ़ जाना शामिल है, जहां अखिलेश यादव का 'पीडीए' फार्मूला प्रभावी रहा।  पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में नफा-नुकसान पश्चिमी इलाके में भी गिरावट देखी गई, हालांकि अवध और पूर्वांचल के मुकाबले नुकसान कम था. पश्चिमी यूपी में भाजपा ने 2022 में 76 विधानसभा सीटों में से 57 सीटें जीती थीं; 2024 में वह 43 सीटों पर आगे रही. इस तरह कुल 14 सीटों या 24.6 फीसदी का नुकसान हुआ।   रुहेलखंड में 2022 के चुनाव में भाजपा ने 52 सीटों में से 30 सीटें जीती थीं. 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी बढ़त घटकर 22 सीटों पर आ गई, यानी कुल आठ सीटों या 26.7 फीसदी की गिरावट हुई। पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड को मिलाकर कुल 128 विधानसभा सीटें हैं; भाजपा ने 2022 के चुनाव में इनमें से 87 सीटें जीती थीं और 2024 के लोकसभा चुनाव में 65 सीटों पर बढ़त बनाए रखीच।  वहीं, बुंदेलखंड की तस्वीर कुछ अलग हैय 2022 में भाजपा ने 19 में से 14 विधानसभा सीटें जीती थीं, … Read more

पंजाब में नशे के खिलाफ भाजपा का अभियान तेज, पूनिया ने कार्यकर्ताओं से की बैठक; संगठन पर फोकस

चंडीगढ़ पंजाब भाजपा के नए प्रभारी एवं राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सतीश पूनिया ने गुरुवार को पार्टी नेताओं के साथ प्रस्तावित ‘नशामुक्त पंजाब यात्रा’ की तैयारियों को लेकर बैठक की। बैठक में यात्रा के आयोजन और इसकी रूपरेखा के साथ पंजाब में संगठन को और मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई। पूनिया ने पार्टी की चुनावी तैयारियों को गति देने और संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक में पंजाब के सह-प्रभारी डॉ. नरेंद्र रैना और प्रदेश महासचिव (संगठन) मंत्री श्रीनिवासुलु समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक के दौरान पंजाब से जुड़े राजनीतिक और संगठनात्मक विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। 117 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा पूनिया के पंजाब प्रभारी बनने के बाद पार्टी ने राज्य में संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को तेज किया है। वह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भाजपा पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। साथ ही उन्होंने नशे को पंजाब के प्रमुख मुद्दों में शामिल करते हुए इसके खिलाफ पार्टी की ओर से एक सुव्यवस्थित अभियान चलाने की बात कही है। भाजपा की प्रस्तावित नशामुक्त पंजाब यात्रा को इसी अभियान की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का फोकस नशे के मुद्दे को चुनावी स्तर पर प्रमुखता से उठाने के साथ-साथ संगठन को मजबूत करने पर है। पूनिया ने हालिया बैठकों में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और पुराने अनुभवी नेताओं तथा नए कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया है। पूनिया के सामने पंजाब में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार के साथ चुनावी आधार मजबूत करने की चुनौती है। ऐसे में नशामुक्त पंजाब यात्रा को लेकर हुई बैठक को पार्टी की आगामी राजनीतिक गतिविधियों की तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।  

एक महीने तक सेवा और सहभागिता का महाअभियान, 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक होंगे आयोजन

प्रदेश में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान गांव से शहर तक होंगे सेवा, सहभागिता और विकसित भारत के संकल्प से जुड़े आयोजन भोपाल मध्यप्रदेश में जनसेवा को जनभागीदारी से जोड़ने और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। एक माह के इस अभियान में सेवा, स्वच्छता, सामाजिक सहभागिता, हितग्राही कल्याण, युवा नवाचार और नागरिक दायित्व से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से आमजन को ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ा जाएगा। अभियान में कार्यक्रमों के आयोजन पर जोर के साथ योजनाओं का वास्तविक लाभ, नागरिकों की भागीदारी और गतिविधियों के परिणाम भी फोकस किया जाएगा। प्रत्येक जिले में गतिविधियों का दिनांकवार, स्थानवार और उत्तरदायी अधिकारीवार कैलेंडर तैयार होगा तथा नियमित समीक्षा की जाएगी। जनप्रतिनिधियों के साथ सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, युवाओं, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, वरिष्ठ नागरिकों तथा सामाजिक-आध्यात्मिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके। होंगे दीपोत्सव और ‘कहानी बदलाव की’ जैसे आयोजन अभियान में ‘आशीर्वाद का दीया’ के तहत हितग्राहीमूलक योजनाओं से लाभान्वित लोगों की अद्यतन एवं प्रमाणित सूची तैयार कर चिन्हित क्षेत्रों में परिवारों की सहभागिता से दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम होंगे। उज्जैन के महाकाल लोक और निवाड़ी के रामराजा लोक, ओरछा में भव्य दीपोत्सव आयोजित किए जाएंगे। ‘सेवा चित्र’ के तहत 17 सितम्बर से 7 अक्टूबर के बीच शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में प्रधानमंत्री द्वारा किए गए सेवा कार्यों और विकसित भारत की संकल्पना पर चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। श्रेष्ठ चित्रों की प्रदर्शनी और उत्कृष्ट प्रतिभागियों का सम्मान किया जाएगा तथा चयनित प्रविष्टियों की राज्य स्तरीय प्रदर्शनी भी होगी। ‘सेवा स्मरण’ में सेवा कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को संगीतमय नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए आमजन तक पहुंचाया जाएगा। प्रत्येक जिले में 18 से 20 सांस्कृतिक दलों/नुक्कड़ नाट्य टोलियों को सूचीबद्ध कर विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों और सार्वजनिक स्थलों पर प्रस्तुतियां कराई जाएंगी। कार्यक्रम 17 सितम्बर से शुरू होंगे और 2 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर इनका मंचन होगा। ‘आंगन का मिलन’ 25 सितम्बर से 7 अक्टूबर तक सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर आयोजित होगा। तीन दिवसीय आयोजनों में माताओं और बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। लाभार्थी माताएं अनुभव साझा करेंगी, आंगनवाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं तथा लाभार्थी माताओं का सम्मान होगा और बच्चों के लिए मनोरंजक गतिविधियां की जाएंगी। ‘कहानी बदलाव की’ में शासन की योजनाओं से जीवन में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले हितग्राहियों की वास्तविक कहानियां संक्षिप्त वीडियो एवं डिजिटल माध्यम से सामने लाई जाएंगी। लाभार्थी, योजना, स्थान और बदलाव का विवरण दर्ज कर उत्कृष्ट सफलता-कथाओं को प्रोफेशनल तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा। सेवा ज्योति यात्रा से लेंगे विकसित भारत का संकल्प प्रत्येक जिले और ग्राम स्तर पर ‘सेवा ज्योति यात्रा’ आयोजित होगी। अलग-अलग दिशाओं से निकलने वाली यात्राएं निर्धारित स्थल पर एकत्र होंगी, जहां शासन की प्रमुख विकास उपलब्धियों और सेवा कार्यों की जानकारी दी जाएगी। यहां नागरिक ‘विकसित भारत 2047’ का सामूहिक संकल्प लेंगे। स्थानीय नागरिकों, युवाओं, सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ जिला विकास पुस्तिका का वितरण भी किया जाएगा। मध्यप्रदेश से गुजरने वाली ‘बड़नगर से वाराणसी—जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा’ के पड़ावों पर स्थानीय नागरिकों और विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को जोड़ते हुए कार्यक्रमों को संवादात्मक और सहभागी स्वरूप दिया जाएगा। ‘सेवा मेरा योगदान’ में 25 गतिविधियों से जुड़ेंगे नागरिक अभियान के दौरान ‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत नागरिकों को 25 प्रमुख सेवा गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इनमें रक्तदान, अनाथालय/वृद्धाश्रम भ्रमण, वृक्षारोपण, स्वच्छता, स्वास्थ्य जांच, एक गांव गोद लेकर सेवा कार्य, योग-ध्यान, प्लास्टिक-मुक्त जागरूकता, महिला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, वंचित बच्चों को शिक्षा सहयोग, करियर काउंसलिंग, वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल साक्षरता, अंगदान संकल्प, नशा-मुक्त भारत, पोषण एवं एनीमिया जागरूकता, सड़क सुरक्षा, जल संरक्षण एवं जल स्रोत सफाई, कचरा पृथक्करण एवं कम्पोस्टिंग, साइबर सुरक्षा, फिट इंडिया, वीर गाथा एवं सैनिक सम्मान, दिव्यांगजन सहयोग, मतदाता जागरूकता एवं पंजीयन, वोकल फॉर लोकल और सरकारी योजनाओं की जागरूकता शामिल हैं। नागरिकों को स्वप्रेरणा से सेवा गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सेवा कार्यों का फोटो-वीडियो दस्तावेजीकरण और सोशल मीडिया प्रचार होगा। चयनित गतिविधियों के बिफोर/आफ्टर वीडियो रील माई भारत पोर्टल पर अपलोड कर डिजिटल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए भी नागरिकों को प्रेरित किया जाएगा। नदी घाटों और सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता अभियान एवं श्रमदान होंगे तथा श्रमदान करने वालों को सम्मानित किया जाएगा। ‘सेवा सेतु’ में मौके पर मिलेगा योजनाओं का लाभ ‘सेवा सेतु—सरकार आपके द्वार’ के तहत विधानसभा और विकासखंड स्तर पर शिविर होंगे। संबंधित विभागों के अधिकारी नागरिकों की योजनावार पात्रता का परीक्षण करेंगे तथा पात्र लोगों को आवेदन, दस्तावेज और योजना लाभ प्राप्त करने में मार्गदर्शन देंगे। प्राप्त आवेदनों के निराकरण की पृथक मॉनिटरिंग होगी। ह्यूमन रंगोली से नवाचार तक ‘सेवा के रंग’ में प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर ह्यूमन रंगोली बनाई जाएगी। इसके विषय जनकल्याणकारी योजनाओं, राष्ट्रीय प्रतीकों और विकसित भारत की संकल्पना पर आधारित होंगे। चयनित शहरों में एक ही दिन 108 मीटर व्यास का ‘भारत मंडल’ बनाने की भी योजना है। ‘हैकाथॉन और इनोवेशन चैलेंज’ में युवा, विद्यार्थी, स्टार्टअप, प्रोफेशनल्स और नवाचारकर्ताओं को जोड़ा जाएगा। उत्कृष्ट नवाचारों की प्रदर्शनी, लाइव डेमो और विशेषज्ञ संवाद आयोजित किए जाएंगे। ‘जनसेवक महाकुंभ—पंचायत से पार्लियामेंट’ के तहत 17 अक्टूबर को प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रदेश की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। ‘25 साल, 25 कहानियां’ में विकास और उपलब्धियों के प्रमुख पड़ावों को दर्शाने वाली क्यूरेटेड किट वितरित की जाएगी। इसमें 25 प्रमुख योजनाओं एवं उपलब्धियों की प्रतिकृतियां और विस्तृत जानकारी के लिए क्यूआर कोड होंगे। कार्यक्रमों की संख्या नहीं, परिणाम भी होंगे दर्ज अभियान की गतिविधियों की जिलेवार एवं गतिविधिवार मॉनिटरिंग के लिए सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर पृथक मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक जिले की 13 गतिविधियों का कैलेंडर 12 सितम्बर तक पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा और अभियान अवधि में दैनिक प्रगति अपडेट होगी। केवल कार्यक्रमों की संख्या नहीं, बल्कि वास्तविक परिणाम, फोटो-वीडियो और जहां लागू हो वहां पहले और बाद के साक्ष्य भी दर्ज किये जायेंगे। ‘सेवा सेतु’ में आने वाले नागरिकों, प्राप्त एवं स्वीकृत आवेदनों तथा वास्तविक रूप से लाभान्वित हितग्राहियों का पृथक विवरण रखा जाएगा। ‘सेवा … Read more

2027 चुनाव के लिए BJP का बड़ा प्लान, 125 मौजूदा विधायकों पर संकट; 2024 के नतीजों से लिया सबक

लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब छह महीने से भी कम वक्त बचा है. इस चुनाव में 10 साल से सत्तारूढ़ योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के सामने हैट्रिक लगाने की चुनौती है. भाजपा ने स्थानीय विधायकों के कामकाज और लोकप्रियता का सर्वे कराते हुए जनता का मूड भांपने की कोशिश की है. 2024 के लोकसभा चुनाव से लगे झटके से सबक लेकर भाजपा ने 403 विधानसभा सीटों पर एक गोपनीय और बहुस्तरीय आंतरिक सर्वे कराया है. इस सर्वे रिपोर्ट ने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।  भाजपा का आंतरिक सर्वे सूत्रों की मानें तो इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों के खिलाफ उनके ही क्षेत्रों में जबर्दस्त एंटी इनकंबेंसी है. सीधे तौर पर कहें तो करीब भाजपा में 128 सीटों पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटा या बदला जा  सकता है. पश्चिम यूपी से लेकर पूरब तक मंत्रियों से लेकर दिग्गज विधायकों तक के नाम इस रेड लिस्ट में शामिल हैं. भाजपा यूपी को अपने संगठन के लिहाज से 6 क्षेत्रों में बांटती है. ऐसे में कहां किस क्षेत्र से कितने टिकट कट सकते हैं, ये आंकड़ा चौंकाने वाला है. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल माना जा रहा है।      पश्चिम क्षेत्र की 71 सीटों में 23-25 टिकट कटने के आसार     ब्रज क्षेत्र कुल 65 सीटों में 24-26 टिकट कटने की संभावना     अवध क्षेत्र में कुल 82 सीट में 26-28 टिकट कटने का संकेत     कानपुर क्षेत्र की कुल 52 सीट में 22-24 कटने के कयास     काशी क्षेत्र में कुल 72 सीट में 19-21 का पत्ता कट सकता है     गोरखपुर क्षेत्र की 62 सीटों में 18-22 टिकट कटने की संभावना यूपी में भाजपा की हैट्रिक की चुनौती भाजपा यूपी में हैट्रिक लगाने को पूरी ताकत झोंक रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले एक-डेढ़ महीने में ही राज्य के ज्यादातर जिलों का दौरा कर विकास परियोजनाओं की झड़ी लगा दी है.2022 की जीत की बात करें तो 1985 के बाद यूपी में यह पहला मौका था जब किसी मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी ने लगातार दूसरी बार पूरे बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी. वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित है. अखिलेश यादव जहां पीडीए के सामाजिक समीकरणों पर ध्यान केंद्रित किए हैं, वहीं कांग्रेस दलित-मुस्लिम वोटों को एकजुट करके अपना जनाधार बढ़ाने में जुटी है।  2022 विधानसभा चुनाव में किसको कितनी सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP)- 255 अपना दल (सोनेलाल)-1 2 निषाद पार्टी (NISHAD)- 06 एनडीए (NDA)-  273 कुल सीटें 403: बहुमत 202 गठबंधन में सीटों का बंटवारा भी चुनौती उत्तर प्रदेश में मोदी-योगी लहर को कायम रखते हुए भाजपा को अकेले 41.29% वोट मिले थे. भाजपा का पिछले चुनाव में अपना दल सोनेलाल, निषाद पार्टी जैसे दलों के साथ गठबंधन रहा है. अब एनडीए के खेमे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय लोकदल शामिल है. एनडीए का सपा-कांग्रेस गठबंधन से मुख्य मुकाबला होना तय है. मायावती की बहुजन समाज पार्टी, आजाद समाज पार्टी, एआईएमआईएम जैसे दल भी ताल ठोकने को तैयार हैं। 

बीजेपी का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, 7 मोर्चों के प्रभारी नियुक्त; हरीश द्विवेदी और सतीश पूनिया को अहम जिम्मेदारी

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी ने संगठन के स्तर पर नए सात अलग-अलग मोर्चों के प्रभारियों को नियुक्त किया है. इसमें बस्ती सांसद हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चा को प्रभारी बनाया गया है. इसके अलावा राजस्थान के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया को एसटी मोर्चा को प्रभारी बनाया गया है. आंध्र प्रदेश में भाजपा की प्रदेश अध्‍यक्ष रहीं दग्गुबती पुरंदेश्वरी (डी. पुरंदेश्वरी) को महिला मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है।  बीजेपी के प्रभारियों का ऐलान     युवा मोर्चा- हरीश द्विवेदी     महिला मोर्चा- डी. पुरंदेश्वरी     एससी मोर्चा- संजय भाटिया     ओबीसी मोर्चा – वैजयंत पांडा     किसान मोर्चा – लाल सिंह आर्या      एसटी मोर्चा – सतीश पूनिया     अल्पसंख्यक मोर्चा- गजेंद्र पटेल एससी मोर्चा के प्रभारी बनाए गए संजय भाटिया हरियाणा से भाजपा के एक प्रमुख नेता हैं. वह वर्तमान में राज्यसभा के सदस्य हैं. भाजपा संगठन में राष्ट्रीय महामंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।  ओबीसी मोर्चा की प्रभारी बनाई गईं बैजयंत पांडा ओड़िशा में भाजपा की बड़ी नेता है. वह वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. ओडिशा की केंद्रपाड़ा सीट से लोकसभा जीतने वाली बैजयंत पांडा की ओडिशा विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में बड़ी भूमिका रही है।  किसान मोर्चा के प्रभारी बनाए गए लाल सिंह आर्य मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं. एमपी में उनकी गिनती भाजपा के एक बेहद वरिष्ठ, अनुभवी और प्रमुख दलित नेता के रूप में रही है. वह वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय प्रभारी भी रहे हैं।  सतीश पूनिया राजस्थान भाजपा के कद्दावर नेता हैं. वो राजस्थान में भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. हरियाणा विधानसभा चुनाव में बतौर प्रभारी उन्होंने भाजपा की जीत की हैट्रिक पूरी करवाई थी. पूनिया अभी राज्यसभा सांसद हैं. अब उन्हें एसटी मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। 

MP में 17 सितंबर से बीजेपी का बड़ा अभियान, 20 यात्राओं से कवर होंगे 55 जिले; जानें पूरा प्लान

भोपाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर 25 वर्ष पूरे होने पर भाजपा 17 सितंबर से वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर तक 10-10 यात्राएं निकालने जा रही है। इन यात्राओं के लिए ऐसे रूट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि एक यात्रा का मार्ग दूसरी यात्रा से न टकराए। मध्यप्रदेश से होकर गुजरने वाले अलग-अलग मार्गों के जरिए प्रदेश के सभी 55 जिलों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी स्तर पर इसे उत्तर भारत की सबसे बड़ी यात्राओं में से एक के रूप में तैयार किया जा रहा है। इन यात्राओं में उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा कवर होगा। गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और दिल्ली से होकर ये यात्राएं गुजरेंगी। अलग-अलग नेताओं को दी जिम्मेदारी अब तक 13 रूट फाइनल किए जा चुके हैं, जबकि बाकी रूट को लेकर मंथन चल रहा है। मध्यप्रदेश में भाजपा ने यात्राओं के संचालन और व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी है। यात्राओं का उद्देश्य केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं रहेगा। इनमें स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने, सेवा गतिविधियों और 2047 के संकल्प को भी शामिल किया जाएगा। आम लोगों के सुझाव लेंगे बीजेपी नेता यात्रा की कार्ययोजना में जनभागीदारी, विकास, सेवा और सांस्कृतिक जुड़ाव को प्रमुखता दी गई है। हर प्रमुख पड़ाव पर स्थानीय नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों, लाभार्थियों और समुदाय के दूसरे वर्गों को गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। सरकारी योजनाओं से जुड़ी व्यावहारिक सहायता और नागरिकों के सुझाव दर्ज करने की भी योजना है। 25 आइकॉन में चुने जाएंगे मेधावी '25 आइकॉन' अभियान में हर पड़ाव से किसान, शिक्षक, महिला उद्यमी, युवा या खिलाड़ी जैसे स्थानीय प्रेरक व्यक्ति को चुना जाएगा। इनमें से 25 श्रेष्ठ लोगों की छोटी वीडियो कहानियां तैयार कर नमो ऐप पर दिखाने का प्रस्ताव है। साथ ही 'चिट्ठी 2047 के नाम' के जरिए लोगों से पूछा जाएगा कि वे 2047 तक अपने क्षेत्र को किस रूप में देखना चाहते हैं। हर पड़ाव पर 'मेरे लिए भारत की प्रगति…' जनवाणी के जरिए नागरिकों की बात रिकॉर्ड की जाएगी। वाराणसी में इन आवाजों को जोड़कर 90 सेकेंड की फिल्म बनाने का प्रस्ताव है। स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों और सामग्री निर्माताओं को भी यात्रा से जोड़ा जाएगा। शहीदों की मिट्टी से लेकर चिकित्सा शिविर तक यात्रा के दौरान जिन क्षेत्रों का संबंध स्वतंत्रता सेनानियों या देश के लिए बलिदान देने वाले स्थानीय वीरों से है, वहां उनके गांव, स्मारक या समाधि स्थल की मिट्टी कलश में एकत्र करने की योजना है। यह मिट्टी वाराणसी के मुख्य कार्यक्रम में अर्पित की जाएगी। इसके अलावा चयनित पड़ावों पर चिकित्सा शिविर, सामान्य स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप और शुगर की जांच तथा परामर्श होगा। हर पड़ाव पर सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन में मदद के लिए योजना पंजीकरण एवं सहायता डेस्क लगाने का भी प्रस्ताव है। 2001 से 2026 तक की विकास यात्रा भी दिखाई जाएगी यात्रा में बुजुर्गों के अनुभव रिकॉर्ड किए जाएंगे। 'पहले और अब' प्रदर्शनी दीवार के जरिए पुरानी और मौजूदा तस्वीरों व दस्तावेजों के माध्यम से सड़क, स्कूल, घर और बिजली जैसी सुविधाओं में आए बदलाव दिखाने की योजना है। वहीं, 'विकास की यात्रा' नुक्कड़ नाटक में 2001 से 2026 तक एक परिवार की कहानी के जरिए बिजली, गैस कनेक्शन, आवास और शिक्षा जैसी सुविधाओं में हुए बदलाव को स्थानीय भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा। नारी शक्ति सम्मेलन और क्विज भी होंगे स्थानीय योजनाओं के लाभार्थियों का सम्मान, नारी शक्ति सम्मेलन, पोस्टर प्रतियोगिता और नमो ऐप के पीपल्स कॉर्नर पर विजेता प्रविष्टियां प्रदर्शित करने का प्रस्ताव भी है। इसके साथ चलती-फिरती 'विकसित भारत 2047' संकल्प एवं हस्ताक्षर दीवार यात्रा के साथ चलेगी और अंत में वाराणसी में प्रस्तुत की जाएगी। जहां रात्रि पड़ाव, वहां 25 दीप जलाएंगे लाभार्थी रात्रि पड़ावों पर '25 साल, 25 दीप' कार्यक्रम होगा, जिसमें 25 लाभार्थी 25 दीप जलाकर दिन का सांस्कृतिक और भावनात्मक समापन करेंगे। प्रमुख पड़ावों पर पौधारोपण भी किया जाएगा और पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय व्यक्ति, संस्था या विद्यालय को देने का प्रस्ताव है।

तुष्टिकरण से लेकर कथनी-करनी तक, सपा की राजनीति पर उठे सवाल; जानें क्या है पूरा मामला

सपा का तुष्टिकरण और कथनी-करनी का सच लखनऊ  चुनाव नजदीक देख समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगभग रोज ही जनता से नए-नए वादे करने में जुट गए हैं और इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा है कि जब वह सत्ता में आएंगे तो बौद्ध तीर्थस्थलों का विकास करेंगे। लेकिन उनके इस वादे को लेकर उत्तर प्रदेश की जनता और विशेषकर दलित-शोषित समाज को यह विचार अवश्य करना चाहिए कि सपा का अतीत क्या रहा है और बौद्ध तीर्थस्थलों के प्रति उनका रवैया पूर्व में क्या रहा है? सच्चाई यह है कि बौद्ध धर्मस्थलों व स्मारकों का विकास या संरक्षण कभी समाजवादी पार्टी के एजेंडे में नहीं रहा। उलटे उनके शासनकाल में बौद्ध अनुयायी किस तरह अपमानित किए गए, इसे एक घटना से समझा जा सकता है।  अखिलेश यादव मार्च 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 17 अगस्त 2012 को लखनऊ के टीले वाली मस्जिद में अलविदा की नमाज़ पढ़ी जाती है। नमाज़ के बाद सुनियोजित ढंग से मुसलमानों की भीड़ मस्जिद से रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए बुद्धा पार्क की तरफ़ बढ़ती है। मौके पर मौजूद पुलिस बल उन्हें नहीं रोकता, क्योंकि वह सपा की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति से भलीभांति परिचित था। पूरी तरह अराजकता पर उतारू भीड़ ने बुद्धा पार्क पर हमला कर दिया और भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर चढ़ कर उसे तोड़ डाला। अन्य बौद्ध-प्रतीकों और दुकानों को भी तहस-नहस कर दिया।   उग्र भीड़ यहीं नहीं रुकती,  उसने भंते श्रीअशोकानंद जी एवं उनके शिष्यों पर प्राणघातक हमला बोल दिया और उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा, उनके कपड़े फाड़ दिए, क्योंकि उन्हें बौद्ध भिक्षुओं के भगवा वस्त्रों से भी नफ़रत थी। उनकी तीन गाड़ियां तोड़ दी गईं। प्रश्न उठता है कि ऐसा क्यों किया गया?  क्योंकि, अलविदा की नमाज़ के बाद मुसलमानों के बीच म्यांमार (बर्मा) के बौद्धों के विरुद्ध ज़हर उगला गया था। उस समय म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों और म्यांमार के बौद्ध नागरिकों के बीच झगड़े चल रहे थे। रोहिंग्या मुसलमानों ने बौद्धों पर हमले किए, उनके मकान जलाए और कई नरसंहार किए। वे म्यांमार के ‘अराकान’ क्षेत्र को बौद्धों से मुक्त करके ‘मुस्लिम’ देश बनाना चाहते थे। इस पर बौद्धों ने अपना बचाव किया और अंततः वहां हुए सांप्रदायिक दंगों में रोहिंग्या मुसलमानों को भागना पड़ा।   इसके बाद रोहिंग्या मुसलमान भारी संख्या में बांग्लादेश होते हुए भारत में भी घुस आये और यहां भी उत्पात मचाने लगे, आतंकी घटनाएं भी कीं। यह बड़ा सवाल है कि भागे हुए रोहिंग्या ने आख़िर दुनिया के 56 मुस्लिम देशों में क्यों नहीं शरण ली, भारत ही क्यों? अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र के तहत, दुनिया भर के मुस्लिम आतंकी और उनका समाज भारत को ‘दारूल इस्लाम’ यानी ‘गजवा-ए-हिन्द’ बनाना चाहता है। झगड़ा म्यांमार में और बुद्ध प्रतिमा तोड़ी जाती है लखनऊ में,  बौद्ध संत और उनके शिष्यों पर हमला लखनऊ में। थाना हज़रतगंज में भंते अशोकानंद जी ने मुकदमा कायम कराया, किंतु तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली अखिलेश सरकार ने दंगाइयों व आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की… क्योंकि दंगाई मुसलमान थे। यह घटना सत्ता के संरक्षण में अराजकता का बड़ा उदाहरण है। दंगाई हज़रतगंज में तोड़फोड़ करते हुए विधानसभा मार्ग तक आ गए, लेकिन पुलिस ने आंसू-गैस और लाठीचार्ज तक नहीं किया। यह पहली बार हुआ कि दंगाइयों की भीड़ चौक से तोड़फोड़ करती हुई संवेदनशील हज़रतगंज होते हुए विधानसभा के सामने पहुंच गई। पुलिस अधिकारी भीड़ के आगे-आगे हज़रतगंज की दुकानें बंद करवाते हुए आगे बढ़ रहे थे। दंगाइयों पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम’ (एनएसए) का मामला बनता था, किंतु अखिलेश जी ने आईपीसी की धाराओं में भी कोई कार्रवाई नहीं कराई। मैं अखिलेश यादव जी को बताना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार सभी धर्मों का सम्मान करती है। इसीलिए “विरासत से विकास” की योजना बनाई गई, अयोध्या में भव्य राममंदिर, काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर, मां विंधवासिनी कॉरिडोर, कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट और प्रदेश में ‘बुद्धिस्ट सर्किट’ योजना के तहत बौद्धस्थलों का विकास हो रहा है। मेरे गृह जनपद सिद्धार्थनगर में भगवान बुद्ध की जन्मस्थली ‘कपिलवस्तु’ से 1898 में अंग्रेज़ ज़मींदार विलियम स्तूप से भगवान बुद्ध की रेलिक्स (अवशेष) निकाल कर लंदन ले गया था। उन अवशेषों की 7 मई 2025 को हांगकांग में नीलामी होनी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में न केवल नीलामी रोकी गई अपितु उन पवित्र अवशेषों को भारत लाकर दिल्ली के राय पिथौरा फोर्ट में एक नवनिर्मित स्मारक में स्थापित कराया गया। मैंने भी प्रधानमंत्री जी को नीलामी रोकने के लिए 5 मई 2025 को पत्र लिखा था। अखिलेश जी को वहां जाना चाहिए, लेकिन वह नहीं जाएंगे, वह अयोध्या भी नहीं जाएंगे, क्योंकि वोट-बैंक का सवाल है। अखिलेश राज में बौद्धों का अपमान हुआ और भाजपा राज में उनका सम्मान। बाबा साहेब ने नागपुर में बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की थी। प्रधानमंत्री जी ने नागपुर दीक्षास्थल सहित बाबा साहेब के सम्मान में ‘पंच तीर्थ’ बनवाए। अखिलेश राज में उत्तर प्रदेश में बाबा साहेब को अपमानित किया गया। उनके नाम पर बने कन्नौज मेडिकल कॉलेज से उनका नाम हटा दिया गया। बाबा साहेब आंबेडकर ग्रीन गार्डेन का नाम बदल कर ‘जनेश्वर मिश्रा पार्क’ कर दिया गया। 5 सितंबर 2016 को गाजियाबाद हज हाउस के लोकार्पण पर अखिलेश यादव के प्रिय मंत्री आज़म ख़ान ने बाबा साहेब को भू-माफिया कहा था, अखिलेश जी ने उन्हें रोका तक नहीं और तालियां बजाते रहे। यह बाबा साहेब से उनकी नफ़रत का खुला उदाहरण था।  मुझे यह कहने में संकोच नहीं कि अखिलेश यादव जी का एजेंडा ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ है। वह स्वयं भी बौद्ध विरोधी, दलित विरोधी, दलित महापुरुष विरोधी व संत विरोधी हैं। 2013 में एक लाख से अधिक दलित अधिकारियों/ कर्मियों को पदावनत करने वाले, लोकसभा में समाजवादी पार्टी के दलित सांसद यशवीर (नगीना बिजनौर) से दलितों के प्रमोशन में आरक्षण का बिल फड़वाने वाले अखिलेश जी के मुंह से बौद्ध तीर्थस्थलों के विकास की बात शोभा नहीं देती। सपा को दलित कभी माफ नहीं करेंगे। जब तक अतीत के इन ऐतिहासिक अपराधों और तुष्टिकरण की नीति का उत्तर नहीं दिया जाता, तब तक बौद्ध स्थलों के संरक्षण के दावे केवल एक राजनीतिक भ्रमजाल से अधिक कुछ नहीं हैं। वंदे मातरम् नमो बुद्धाय ! –    बृजलाल, पूर्व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश … Read more

पंजाब चुनाव को लेकर BJP का मेगा प्लान, मोदी-शाह और नितिन नवीन बढ़ाएंगे सियासी हलचल

 चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव में अब करीब छह महीने का समय शेष है और भाजपा ने प्रदेश में अपनी चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने सितंबर और अक्टूबर में अपने शीर्ष नेतृत्व के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है।राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संभावित कार्यक्रमों को लेकर पार्टी स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अक्टूबर में तीन दिन पंजाब में रह सकते हैं। हालांकि, अभी दौरे की तारीख तय नहीं हुई है। पार्टी का प्रयास है कि उनके कार्यक्रम को अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला के आसपास केंद्रित किया जाए। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री पहले दिन माझा क्षेत्र के कई विधानसभा क्षेत्रों से रोड शो के माध्यम से गुजर सकते हैं। उनके रात्रि विश्राम के लिए राधा स्वामी सत्संग ब्यास के मुख्यालय पर विचार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की जनसभा को लेकर भी पार्टी में मंथन चल रहा है। भाजपा के कुछ नेता बठिंडा अथवा पटियाला में जनसभा कराने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व से संपर्क में हैं। बठिंडा से पटियाला तक रोड शो की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व मिलकर दौरे की अंतिम रूपरेखा तैयार करेगा। केंद्र की घोषणाओं पर भी मंथन प्रधानमंत्री के दौरे को चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी स्तर पर यह आकलन किया जा रहा है कि केंद्र सरकार पंजाब के लिए किन योजनाओं, परियोजनाओं या घोषणाओं की घोषणा कर सकती है। इसके साथ ही जनता के समक्ष रखे जाने वाले संभावित वादों पर भी मंथन शुरू हो गया है। 18 सितंबर से नशे और कानून-व्यवस्था के खिलाफ यात्रा इसी कड़ी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 18 सितंबर को पठानकोट से पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर यात्रा की शुरुआत करेंगे। भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में नशे और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। 19 से 21 सितंबर के बीच प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी यात्राएं निकाली जाएंगी। इन यात्राओं की संभावित शुरुआत श्री केसगढ़ साहिब, तलवंडी साबो और फाजिल्का से किए जाने पर विचार चल रहा है। यात्रा के दौरान बाइक रैली भी निकाली जाएगी। पार्टी की योजना इन यात्राओं को प्रदेश के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक ले जाने की है। यात्राओं का समापन जालंधर में प्रस्तावित है। यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बड़ी रैली को संबोधित कर सकते हैं। उनकी रैली 29 या 30 सितंबर को होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि तारीख अभी अंतिम नहीं है। यात्राओं के नेतृत्व के लिए एक दर्जन से अधिक केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी है। मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में यात्रा के कार्यक्रम, तीन अन्य शहरों से निकलने वाली यात्राओं और अमित शाह की रैली की तारीख पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है। बैठक में प्रदेश प्रभारी डा सतीश पूनिया, प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और प्रदेश संगठन मंत्री मंथरी श्रीनिवासुलु के शामिल होने की संभावना है। अमित शाह के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद है।