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बिहार वाला फॉर्मूला यूपी में आजमाएगी BJP? तावड़े ने मिशन-2027 के लिए कसी कमर

   लखनऊ उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने सत्ता की हैट्रिक लगाने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया है. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय लखनऊ दौरे के दौरान मिशन-2027 के लिए पार्टी के रणनीतिक खाके यानी ब्लूप्रिंट की नींव रखी. बिना किसी भारी तामझाम और सादगी के साथ लखनऊ पहुंचे तावड़े ने जीत की हैट्रिक लगाने के लिए संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने से लेकर नैरेटिव सेट करने तक कई अहम दिशा-निर्देश दिए।  बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों को परखा. इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ दोनों उप-मुख्यमंत्रियों से मुलाकात और बातचीत भी की. इसके अलावा संगठन के लोगों के साथ मंथन कर सारा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है।  विनोद तावड़े ने पार्टी पदाधिकारियों को विधानसभा चुनाव 2027 के लिए टारगेट दिया. उन्होंने कहा कि हमें हर बूथ को मजबूत करना होगा, कोई बूथ छूटना नहीं चाहिए और उसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाएं. इसके साथ ही उन्होंने सभी जातियों को साधने का मंत्र भी दिया और कहा कि संख्या चाहे कम हो या ज्यादा, लेकिन कोई जाति छूट न जाए, हमें सबको जोड़ना होगा।  यूपी फतह का खाका खींच गए तावड़े बिहार चुनावों में एनडीए के चुनावी प्रबंधन और तालमेल के सफल फार्मूले को यूपी की जमीन पर उतारने का काम तावड़े ने शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश के बीजेपी प्रभारी बनने के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने 2027 का विधानसभा चुनाव मजबूत संगठन के बलबूते और पीएम मोदी व सीएम योगी के नाम और काम पर लड़ने के संकेत दिएच इस तरह सरकार और संगठन दोनों के साथ समन्वय बनाकर 2027 के चुनाव में उतरने का खाका खींच गए।  विनोद तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद दिनभर पार्टी दफ्तर में क्षेत्रीय पदाधिकारियों से मुलाकात की. उन्होंने प्रदेश के महामंत्रियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ बैठक की. बीजेपी संगठन के नेताओं से मुलाकात के दौरान विनोद तावड़े ने साफ कहा कि बूथ की मजबूती ही 2027 के चुनाव की जीत का आधार बनेगी।  तावड़े ने पदाधिकारियों से कहा कि वे हर बूथ के अनुसार कार्ययोजना बनाएं. किस बूथ पर जीत की क्या स्थिति है, इसकी ठीक से समीक्षा करें. इसके अलावा जहां कमी नजर आए, उसे दुरुस्त करें. इस तरह हारी हुई बूथों को चिह्नित करते हुए वहां पार्टी को मजबूत करने के निर्देश भी दिए।  सपा के पीडीए का काउंटर प्लान तैयार अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड की काट के लिए तावड़े ने 'परफॉर्मेटिव नैरेटिव' पेश किया. उन्होंने सपा के पीडीए पर तंज कसते हुए इसे 'पराया धन अपना' करार दिया और जमीन पर अवैध कब्जे तथा महिला सुरक्षा (स्त्रीधन) जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को घेरने का संकेत दिया. इसके साथ ही बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने का खाका भी खींचा।  तावड़े ने कहा कि हमें सभी वर्गों का साथ चाहिए, ऐसी कोई भी जाति न हो जो अछूती रह जाए. यूपी बड़ा प्रदेश है और हर क्षेत्र में अलग-अलग जातियों का प्रभाव है. यदि किसी जाति के वोटरों की संख्या कम है, तो भी हमें उसे छोड़ना नहीं है, उनसे संपर्क करके उन्हें पार्टी से जोड़ने का प्रयास करना है. इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष की तैयारी पर नजर रखकर अपनी रणनीति बनाने की नसीहत दी।  विपक्ष के प्रत्याशी का तोड़ तलाशने का टास्क बीजेपी प्रभारी ने कहा कि विपक्षी तैयारियों पर हमें पूरी नजर रखनी होगी. विपक्ष का कोई नेता या प्रत्याशी मजबूत है, तो उसकी मजबूती का आधार पता करना होगा और फिर उसी के अनुसार अपनी रणनीति तैयार करके मजबूत होना होगा. पार्टी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने विपक्ष के मजबूत प्रत्याशियों पर खास नजर रखने और उनका तोड़ निकालने के लिए कहा है. इसका यह संदेश भी है कि यदि विपक्ष के मजबूत प्रत्याशी को अपने पाले में लाकर जीत मिलती है, तो आखिर में यह भी एक विकल्प हो सकता है।  बीजेपी संगठन को निर्देश दिए गए कि 2022 के चुनाव में गंवाई गई 57 सीटों और एनडीए की हारी हुई 130 सीटों की गहन समीक्षा की जाए और बूथ स्तर पर शक्ति केंद्रों में युवाओं को जोड़ा जाए. इस तरह से विनोद तावड़े 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता की हैट्रिक लगाने ही नहीं, बल्कि बिहार की तरह क्लीन स्वीप करने का प्लान बना रहे हैं।  वीआईपी कल्चर से दूरी बनाकर दिया संदेश बीजेपी के प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के बाद विनोद तावड़े ने उत्तर प्रदेश आने से पहले ही साफ कर दिया था कि उनके स्वागत की एक भी होर्डिंग शहर में नहीं लगनी चाहिए और न ही उनका नाम दिखाई देना चाहिए. ऐसे में जिन लोगों ने विनोद तावड़े के लिए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाए थे, उन्हें रातों-रात उन्हीं लोगों ने हटा लिया।  अब विनोद तावड़े ने नया मंत्र दिया और पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लखनऊ में समय बिताने के बजाय अपने-अपने आवंटित विधानसभा क्षेत्रों में जाएं, रात को वहीं प्रवास करें और स्वागत-सत्कार के चक्कर में न पड़ें. मार्च 2027 तक, यानी विधानसभा चुनाव होने तक सभी पदाधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं और चुनावी अभियानों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए।  संगठन-सरकार के साथ मजबूत समन्वय प्रदेश प्रभारी तावड़े ने भाजपा के सभी प्रदेश मोर्चों के अध्यक्षों से भी संवाद किया. इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द अपनी कार्यसमिति बनाएं. सूत्रों के अनुसार हफ्तेभर के अंदर कार्यकारिणी गठित करने के लिए उन्होंने कहा है. यह भी कहा गया कि जब कार्यकारिणी गठित हो जाए, तो उन्हें आगे का टारगेट दिया जाएगा जिसे पूरा करने के लिए सभी को मिलकर जुटना होगा।  तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की. सूत्रों के अनुसार उन्होंने सरकार के कामकाज की जानकारी ली और कल्याणकारी योजनाओं पर बात की. सरकार और संगठन में समन्वय के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई।  सीएम के साथ बैठक में संगठन के सहयोग से सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने और विकास को मुद्दा बनाने पर सहमति बनी. इससे पहले उन्होंने शनिवार … Read more

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी तेज, सितंबर में जुटेंगे सियासी दिग्गज; पार्टियों ने कसी कमर

चंडीगढ़  पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर सियासी तौर पर बेहद अहम रहने वाला है। प्रदेश में एक के बाद एक बड़े केंद्रीय नेताओं के दौरे से चुनावी माहौल गरमाने के आसार हैं।  नशे के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी की यात्रा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पहुंचने की चर्चा है, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी 19 सितंबर के बाद पंजाब का दौरा कर सकते हैं।कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए सचिन पायलट को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में सितंबर पंजाब की सियासत में शक्ति प्रदर्शन और चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम होगा।  17 से भाजपा की चार यात्राएं भाजपा 17 सितंबर से नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर चार यात्राएं आयोजित करेगी। इसकी शुरुआत भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन कर सकते हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इसके समापन कार्यक्रम के दौरान जालंधर में शामिल होने की संभावना है। दो यात्राएं मालवा क्षेत्र में होंगी जहां पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 69 हैं जबकि एक-एक यात्रा माझा और दोआबा क्षेत्रों में होगी। पंजाब विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं जिसके लिए अभी से भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है। इन यात्राओं में शाह के अलावा अन्य केंद्रीय मंत्रियों की भी ड्यूटी लगाई जा रही है इसलिए चार यात्राओं के दौरान आधे से ज्यादा केंद्रीय मंत्रियों का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। 19 से गरजेंगे राहुल इसी तरह 19 सितंबर के बाद विपक्ष के नेता राहुल गांधी पंजाब आएंगे जो हरिमंदिर साहिब में माथा टेकने जाएंगे। साथ ही वह पंजाब कांग्रेस की तरफ से आयोजित की जाने वाली यात्रा में भी शामिल होंगे। जानकारी के अनुसार 150 किलोमीटर की यह यात्रा चार दिन चल सकती है। अमृतसर के बाद यह यात्रा करीब 20 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगी जिसके जरिये पार्टी सूबे में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए काम करेगी। कांग्रेस के नए प्रभारी भी आएंगे पंजाब इसी तरह पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट भी अगले सप्ताह से पहले पंजाब आ सकते हैं जिनका कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। 7 और 8 सितंबर को पूर्व प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल का यहां आना तय था लेकिन इससे ठीक पहले ही कांग्रेस नेतृत्व ने प्रभारी बदल दिया। अब पार्टी जल्द पायलट का दौरा आयोजित करवाने की तैयारी कर रही है क्योंकि पंजाब कांग्रेस को पहले ही गुटबाजी का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व सीएम एवं सांसद चरणजीत चन्नी के समर्थक इससे पहले खुलकर पार्टी कार्यक्रमों के दौरान चन्नी के समर्थन में आवाज बुलंद कर सकते हैं। अब पायलट के सामने प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी को खत्म करने की बड़ी चुनौती है। इससे पहले राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री के बीच चल रही खींचतान के दौरान पंजाब से सुखजिंदर सिंह रंधावा को 2022 में राजस्थान कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था और अब जब पंजाब कांग्रेस के मौजूदा प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सांसद चरणजीत चन्नी के बाद खींचतान की चर्चाओं का बाजार गर्म है तो सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। आप पंजाब ने भी बढ़ाई सूबे में गतिविधियां  आम आदमी पार्टी (आप) ने भी विधानसभा चुनाव से पहले गतिविधियां बढ़ा दी हैं। सीएम भगवंत सिंह मान खुद भी अलग-अलग हलकों में जाकर लोक मिलनी कर रहे हैं। साथ ही मंत्रियों और पार्टी के नेताओं को भी इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। आने वाले दिनों आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल के भी प्रदेश में बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी चल रही है। इस तरह शिअद ने भी सभी हलकों में रैलियों और बैठकों का दौर शुरू कर दिया है।  

देर रात भोपाल बीजेपी ने जारी की जिला कार्यसमिति, 90 नेताओं को जिम्मेदारी; पचौरी को अहम स्थान

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी ने भोपाल में जिला संगठन की नई टीम का ऐलान कर दिया है। रविवार देर रात करीब डेढ़ बजे जिला कार्यसमिति की सूची जारी की गई। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति के बाद जिलाध्यक्ष रविंद्र यती ने सदस्यों के नामों की घोषणा की। नई कार्यसमिति में कुल 90 कार्यकर्ताओं को जिला कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है। इनमें मनोज राठौर, मनोज राजू अनेजा, राजेश खटीक, महेश जोशी, दिनेश पांडे, अनुषा सिंह रघुवंशी, पूजा भारद्वाज, विकास शर्मा (बंटी), सुमत कुमार जैन और सुनील व्यास समेत कई नेताओं को जगह मिली है। सुरेश पचौरी को संगठन में अहम जगह नई सूची में सबसे चर्चित नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी का है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पचौरी को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। इस श्रेणी में कुल 23 नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें रघुनंदन शर्मा, पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी, ध्रुवनारायण सिंह, महापौर मालती राय, राहुल कोठारी और सुमित पचौरी समेत वरिष्ठ नेता शामिल हैं। स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सरकार और संगठन से जुड़े प्रमुख चेहरों को जगह दी गई है।   90 कार्यकर्ताओं को सदस्य बनाया कार्यसमिति में कुल 90 कार्यकर्ताओं को सदस्य बनाया गया है। इनमें मनोज राठौर, मनोज राजू अनेजा, राजेश खटीक, महेश जोशी, दिनेश पांडे, अनुषा सिंह रघुवंशी, पूजा भारद्वाज, विकास शर्मा (बंटी), सुमत कुमार जैन और सुनील व्यास समेत कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को जगह मिली है। 23 नेताओं को स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया  इसके अलावा 23 नेताओं को स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। इनमें कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी, रघुनंदन शर्मा, पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी, ध्रुवनारायण सिंह, महापौर मालती राय, राहुल कोठारी और सुमित पचौरी सहित अन्य नेता शामिल हैं। 21 कार्यकर्ता विशेष आमंत्रित सदस्य वहीं, संगठन ने 21 कार्यकर्ताओं को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया है। इनमें कृष्णमोहन सोनी, हीरेन्द्र बहादुर सिंह (हीरू), अनिल अग्रवाल लिली, नेहा बग्गा, भक्ति शर्मा, सतीश विश्वकर्मा और संदीप बाथम प्रमुख हैं। अनुभवी नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं का संतुलन नई जिला कार्यसमिति में अनुभवी नेताओं के साथ संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी जगह दी गई है। पार्टी की नई टीम में विभिन्न स्तर के नेताओं को शामिल कर संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने की कोशिश की गई है।नई कार्यसमिति के गठन के बाद अब जिला संगठन की आगामी गतिविधियों और कार्यक्रमों में इन नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिए संगठन को मजबूत करने की तैयारी बीजेपी की नई जिला कार्यसमिति के गठन को आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। पार्टी संगठन को बूथ और जिला स्तर पर मजबूत करने के साथ कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने पर जोर दे सकती है।90 नेताओं को शामिल कर बनाई गई नई टीम के जरिए भोपाल में संगठनात्मक गतिविधियों को और प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है। जिलाध्यक्ष ने बधाई दी  जिलाध्यक्ष रविन्द्र यती ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों और सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ता भाजपा की रीति-नीति के अनुरूप काम करते हुए बूथ से लेकर जिला स्तर तक संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि शेष कार्यसमिति सदस्यों की घोषणा भी जल्द की जाएगी। 21 नेताओं को विशेष आमंत्रण जिला संगठन ने 21 कार्यकर्ताओं को विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल किया है। इनमें कृष्णमोहन सोनी, हीरेन्द्र बहादुर सिंह (हीरू), अनिल अग्रवाल लिली, नेहा बग्गा, भक्ति शर्मा, सतीश विश्वकर्मा और संदीप बाथम सहित अन्य नाम शामिल हैं। इस सूची के जरिए संगठन ने अलग-अलग स्तर पर सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिला टीम से जोड़ने की कोशिश की है। जिलाध्यक्ष रविंद्र यती ने नई जिम्मेदारी पाने वाले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि नई टीम संगठन की विचारधारा और तय कार्यक्रमों के अनुसार काम करते हुए पार्टी को बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक मजबूत करने में भूमिका निभाएगी। भाजपा जिला संगठन के मुताबिक कार्यसमिति के शेष सदस्यों के नाम भी जल्द घोषित किए जाएंगे। इसके साथ ही आने वाले समय में नई टीम के सामने संगठन को जमीनी स्तर पर और सक्रिय करने की जिम्मेदारी होगी। 

किसान आंदोलन का पंजाब की सियासत पर असर, BJP-AAP को नुकसान तो कांग्रेस-अकाली-वारिस पंजाब दे को फायदा?

 पटियाला विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में एक बार फिर किसान आंदोलन गर्मा गया है। एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता रद्द करने और ग्रामीण मजदूरों के लिए पेंशन समेत कई मांगों को लेकर किसान मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर धरना दे रहे हैं। आंदोलन का सीधा असर भाजपा पर पड़ सकता है लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी भी इससे अछूती नहीं है। कांग्रेस और अकाली दल के लिए यह किसानों के बीच खोई जमीन वापस पाने का मौका बन सकता है। भाजपा के लिए ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता की परीक्षा 2020-21 के किसान आंदोलन की राजनीतिक छाया पंजाब में भाजपा पर लंबे समय तक रही। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में किसान संगठनों ने भाजपा के विरोध में अभियान चलाया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा ने भी भाजपा के खिलाफ वोट की अपील की थी। अब भाजपा पंजाब में अपना आधार बढ़ाने में जुटी है। पार्टी 2027 में सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रही है। ऐसे में ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता बढ़ाना उसके लिए बड़ी चुनौती है। अगर आंदोलन के कारण केंद्र और भाजपा के खिलाफ माहौल फिर मजबूत हुआ तो मालवा और दोआबा की ग्रामीण सीटों पर असर पड़ सकता है। किसान संगठनों की सक्रियता वाले इलाकों में भाजपा उम्मीदवारों को विरोध और सवालों का सामना करना पड़ सकता है। चुनौती सिर्फ किसान वोट की नहीं बल्कि पूरे ग्रामीण माहौल की है।  आप को नाराजगी दूर करने और कांग्रेस-अकाली दल को जमीन मजबूत करने का मौका 2020-21 में आप ने किसान आंदोलन का समर्थन किया था। 2022 में पार्टी ने 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई। अब किसान शंभू और खनौरी मोर्चों पर मार्च 2025 में हुई पुलिस कार्रवाई और मांगें पूरी न होने को लेकर मान सरकार से नाराज हैं। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर का आरोप है कि मोर्चों से गायब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य सामान का मुआवजा पंजाब सरकार ने नहीं दिया। एमएसपी कर्ज मुआवजा फसल विविधीकरण और कृषि लागत से जुड़ी मांगों का संबंध राज्य की नीतियों से भी है। ऐसे में आप विधायकों को गांवों में सवालों का सामना करना पड़ सकता है। कांग्रेस के लिए आंदोलन केंद्र की भाजपा सरकार और पंजाब की आप सरकार दोनों को घेरने का अवसर है। हालांकि केवल समर्थन का बयान पर्याप्त नहीं होगा। किसानों के बीच प्रभाव बढ़ाने के लिए उसे मांगों को मजबूती से उठाना होगा। कृषि कानूनों के मुद्दे पर भाजपा से गठबंधन तोड़ने वाला अकाली दल भी किसानों के बीच अपनी पुरानी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। आंदोलन लंबा खिंचा तो उसे ग्रामीण पंजाब में वापसी का अवसर मिल सकता है। राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा के अनुसार किसान आंदोलन का असर भाजपा और आप पर पड़ सकता है क्योंकि किसानों की मांगें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से जुड़ी हैं। मांगें पूरी न होने से दोनों के खिलाफ नाराजगी है। कांग्रेस और अकाली दल सक्रियता से किसानों के समर्थन में आते हैं और उनकी मांगों को उठाते हैं तो दोनों पार्टियां किसानों के बीच अपनी पैठ दोबारा मजबूत कर सकती हैं।  किसान आंदोलन कैसे बिगाड़ सकते हैं भाजपा-AAP का गणित, एक्सपर्ट से जानिए… 1. केंद्र और राज्य के खिलाफ एक साथ मोर्चा: पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप सिंह का कहना है कि किसान संगठनों ने केंद्र और पंजाब सरकार दोनों के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोला है। शंभू और खनौरी बॉर्डरों पर पिछले समय में हुए घटनाक्रमों, पुलिस कार्रवाई और किसान मोर्चों से गायब हुई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व अन्य सामान के मुआवजे का मुद्दा अब तूल पकड़ चुका है। किसान नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार ने न केवल आंदोलनकारियों की सुरक्षा व सहायता में ढिलाई बरती, बल्कि वादे के मुताबिक नुकसान की भरपाई भी नहीं की। उन्होंने कहा कि गांवों में अब आम आदमी पार्टी के विधायकों और नेताओं के खिलाफ पोस्टर-होर्डिंग्स लगाकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कृषि लागत, फसल विविधीकरण और राज्य-स्तरीय मुआवजे से जुड़े मुद्दों के कारण सत्तारूढ़ दल को ग्रामीण क्षेत्रों में भारी जन-असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार से एमएसपी की कानूनी गारंटी और ट्रेड डील रद्द करने की मांग को लेकर किसान अड़े हुए हैं। 2. आप के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती: पवनदीप शर्मा का कहना है कि 2020-21 के आंदोलन में आम आदमी पार्टी ने किसानों का खुलकर समर्थन किया था, जिसका सीधा फायदा उसे 2022 के चुनाव में 92 सीटें जीतकर मिला था। लेकिन सरकार बनने के बाद अब समीकरण बदल चुके हैं। शंभू और खनौरी मोर्चों पर हुई पुलिस कार्रवाई, किसान आंदोलनों के प्रति ढुलमुल रवैये का आरोप और स्थानीय कृषि समस्याओं के हल न होने से ग्रामीण क्षेत्रों में भगवंत मान सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के अनुसार, मोर्चों के दौरान हुए नुकसान और गायब हुई गाड़ियों के मुआवजे पर राज्य सरकार का वादा अधूरा रहा। ग्रामीण पंजाब, जो आप का सबसे मजबूत चुनावी स्तंभ माना जाता था, वहां से वोट बैंक छिटकने का सीधा खतरा पैदा हो गया है। यदि मान सरकार जल्द ही किसान संगठनों को संतुष्ट करने में विफल रहती है, तो आगामी चुनावों में उसके विधायकों को गांवों में प्रवेश करते समय भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। 3. ग्रामीण वोट होगा बैंक प्रभावित: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि 2020-21 के कृषि कानून विरोधी आंदोलन का असर भाजपा अब तक झेल रही है। किसान आंदोलन के कारण 2022 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा की अपीलों के चलते भाजपा को ग्रामीण इलाकों में भारी राजनीतिक विरोध सहना पड़ा। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी को अपने चुनावी बूथ तक लगाने की अनुमति नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। ऐसे में मालवा और दोआबा जैसे विशाल ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 4. किसानों के प्रति भाजपा ने बदली रणनीति: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि किसानों के लगातार विरोध के बीच … Read more

भाजपा नेता चेतन भार्गव ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को दी जन्मदिवस की शुभकामनाएं

भाजपा नेता चेतन भार्गव ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को दी जन्मदिवस की शुभकामनाएं भोपाल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं भोपाल भाजपा के जिला महामंत्री चेतन भार्गव ने भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को जन्मदिवस के अवसर पर आत्मीय शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित की। इस अवसर पर भार्गव ने भगवान श्रीराम एवं इष्टदेव से प्रदेश अध्यक्ष के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की मंगलकामना की। चेतन भार्गव ने प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल को धार्मिक चित्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया। आत्मीय भेंट के दौरान संगठनात्मक विषयों तथा प्रदेश में भाजपा के विस्तार और जनकल्याणकारी कार्यों को लेकर भी चर्चा हुई। संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पहचान चेतन भार्गव लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक कार्यों से जुड़े हुए हैं और भोपाल में सक्रिय भाजपा नेता के रूप में अपनी अलग पहचान रखते हैं। संगठन के विभिन्न अभियानों, जनसंपर्क कार्यक्रमों और पार्टी की गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। वे बूथ एवं विधानसभा स्तर के संगठनात्मक कार्यों में भी दायित्व निभा चुके हैं। पूर्व में उन्हें लोकसभा एवं विधानसभा प्रभारी सहित विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।  भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए मई 2026 में चेतन भार्गव को भाजपा जिला भोपाल का महामंत्री नियुक्त किया गया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से हुए जिला संगठन के विस्तार में उन्हें यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया था।  हाल ही में पार्टी द्वारा चलाए गए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भी चेतन भार्गव को भोपाल जिले का प्रभारी दायित्व सौंपा गया, जो संगठन के प्रति उनकी सक्रियता और कार्यक्षमता में पार्टी के विश्वास को दर्शाता है।  सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय चेतन भार्गव भाजपा के संगठनात्मक दायित्वों के साथ-साथ सामाजिक एवं जनहित के विषयों को लेकर भी सक्रिय रहते हैं। पुराने भोपाल के विभिन्न जनसरोकारों तथा नागरिक समस्याओं से जुड़े मुद्दों में उनकी सहभागिता सामने आती रही है।  हेमंत खंडेलवाल को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए चेतन भार्गव ने कहा कि “प्रदेश अध्यक्ष के रूप में हेमंत जी के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश भाजपा संगठन नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। उनके नेतृत्व में संगठन और अधिक सशक्त एवं प्रभावी होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प तथा प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में सफल होगा।” इस अवसर पर भार्गव ने प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं सफल संगठनात्मक कार्यकाल की मंगलकामना की।

‘बदला हुआ भारत’ दिखाएगी BJP की सोशल मीडिया टीम, Gen Z को रील्स के जरिए बताएगी सरकार के काम

भोपाल  भाजपा अब Gen Z तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के जरिए सरकार के काम और योजनाओं से हुए बदलाव की कहानियां लोगों तक पहुंचाई जाएंगी। अभियान के तहत हर शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इन रील्स में सरकारी योजनाओं से लाभ लेने वाले वास्तविक लोगों की कहानियां दिखाई जाएंगी। कार्यकर्ता लाभार्थियों से संपर्क कर उनके अनुभव रिकॉर्ड करेंगे। वीडियो में लाभार्थी का नाम, स्थान, जिला, योजना और उससे हुए बदलाव की जानकारी भी शामिल की जाएगी। इन्फ्लुएंसर्स दिखाएंगे ‘बदला हुआ भारत’ अभियान में देशभर के इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को ऐसे स्थानों पर ले जाने की योजना है, जहां सरकारी योजनाओं या विकास कार्यों से बदलाव दिखाई देता है। क्रिएटर्स मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे और अपने अनुभव के आधार पर वीडियो तैयार करेंगे। इसके लिए राज्यों से ऐसे स्थानों की सूची मांगी जाएगी, जहां जीवन, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर या रोजगार के अवसरों में बदलाव दिखाई देता हो। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 50 प्रमुख स्थानों के चयन का प्रस्ताव है। हर शक्ति केंद्र से बनेंगी कम से कम 10 रील अभियान के तहत भाजपा के हर शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इन रील्स में सरकारी योजनाओं से लोगों की जिंदगी में आए बदलाव को दिखाया जाएगा। पार्टी का फोकस सिर्फ योजनाओं की जानकारी देने पर नहीं, बल्कि उनके असर को लोगों की असली कहानियों के जरिए सामने लाने पर होगा। कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के ऐसे लोगों से संपर्क करेंगे, जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है। उनकी कहानी वीडियो में रिकॉर्ड की जाएगी। रील में लाभार्थी का नाम, जगह, जिला, योजना का नाम और उससे हुए बदलाव की जानकारी भी शामिल की जाएगी। इन्फ्लुएंसर्स खुद मौके पर जाकर दिखाएंगे बदलाव इस अभियान में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को भी जोड़ा जाएगा। उन्हें ऐसे स्थानों पर ले जाने की योजना है, जहां सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के कारण जमीन पर बदलाव दिखाई देता है। इन्फ्लुएंसर्स वहां जाकर स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे और अपने अनुभव के आधार पर वीडियो बनाएंगे। इसका उद्देश्य युवाओं तक विकास कार्यों की जानकारी ऐसे तरीके से पहुंचाना है, जिसे वे सोशल मीडिया पर आसानी से देख और समझ सकें। इसके लिए राज्यों से ऐसे स्थानों की सूची तैयार करने को कहा जाएगा, जहां सुरक्षा, रोजगार, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर या लोगों के लिए नए अवसरों में बदलाव दिखाई देता हो। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 50 प्रमुख स्थानों को चुने जाने का प्रस्ताव है। ‘कहानी बदलाव की’ में दिखेंगी कहानियां अभियान का एक प्रमुख हिस्सा ‘कहानी बदलाव की’ नाम से डिजिटल सीरीज होगी। इसमें सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों की वास्तविक कहानियां दिखाई जाएंगी। इस योजना के तहत करीब 25 लाख लोगों की कहानियां सामने लाने का प्रस्ताव है। इनमें से लगभग 25 हजार कहानियों को आगे के लिए चुना जाएगा। इसके बाद करीब 250 प्रभावशाली कहानियों को प्रोफेशनल तरीके से तैयार करने की योजना है। चुनी गई रील्स को राज्यों और जिलों के सोशल मीडिया अकाउंट से भी शेयर किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ये वीडियो पहुंच सकें। WhatsApp से Instagram और YouTube तक फोकस भाजपा के इस अभियान में सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। Instagram और YouTube के लिए 60 सेकंड तक की रील्स बनाने की योजना है। सभी वीडियो में एक जैसे हैशटैग, फ्रेम और अभियान की पहचान का इस्तेमाल किया जा सकता है। कार्यकर्ताओं को सिर्फ वीडियो रिकॉर्ड करने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। वे खुद भी रील बनाएंगे और उन्हें सोशल मीडिया पर शेयर करेंगे। ‘आशीर्वाद का दीया’ से जुड़ेगा डिजिटल अभियान अभियान में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम भी शामिल है। 17 सितंबर की शाम भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों से अपने घरों पर दीप जलाने की अपील की जाएगी। पार्टी के अनुसार, इस दीप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंबे समय की जनसेवा के प्रति आभार और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ा जाएगा। बूथ कार्यकर्ता लाभार्थियों के घर जाकर उन्हें दीप जलाने के लिए प्रेरित करेंगे। दीप जलाते हुए फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर #आशीर्वाद_का_दीया के साथ शेयर किए जाएंगे। इन्फ्लुएंसर्स, मंत्री और मुख्यमंत्री भी इस डिजिटल अभियान में शामिल हो सकते हैं। ‘सेवा मेरा योगदान’ में लोग खुद करेंगे सेवा अभियान के दूसरे हिस्से ‘सेवा मेरा योगदान’ में आम लोगों को सेवा गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। इसके तहत 25 अलग-अलग सेवा गतिविधियों में से कोई एक चुनकर कम से कम 25 मिनट सेवा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सेवा से पहले और बाद का वीडियो बनाकर उसे My Bharat Portal पर अपलोड करने की योजना है। इसके बाद प्रतिभागियों के लिए डिजिटल सर्टिफिकेट भी जारी किया जाएगा। 25 लाख लोगों की कहानियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘कहानी बदलाव की’ अभियान के तहत सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करीब 25 लाख नागरिकों की वास्तविक कहानियां सामने लाने का प्रस्ताव है। इनमें से करीब 25 हजार कहानियां शॉर्टलिस्ट की जाएंगी और लगभग 250 प्रभावशाली कहानियों को प्रोफेशनल तरीके से तैयार किया जाएगा। इन वीडियो को भाजपा के जिला, प्रदेश और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाएगा। WhatsApp से Instagram तक डिजिटल कनेक्ट अभियान में सोशल मीडिया शेयरिंग पर भी खास जोर रहेगा। ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत 17 सितंबर की शाम घर-घर दीप जलाने की अपील की जाएगी। इससे जुड़े फोटो और वीडियो #आशीर्वाद_का_दीया के साथ सोशल मीडिया पर साझा किए जाएंगे। ‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत नागरिकों को 25 सेवा गतिविधियों में से किसी एक में कम से कम 25 मिनट योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सेवा गतिविधि का पहले और बाद का वीडियो बनाकर My Bharat Portal पर रील अपलोड करने की व्यवस्था होगी। इसके बाद डिजिटल सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक कई कार्यक्रम अभियान के तहत स्कूलों में ड्रॉइंग और भाषण प्रतियोगिताएं, गांवों में ‘नमो सेवा गाथा’ के नुक्कड़ नाटक, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ‘आंगन का … Read more

बीजेपी SC मोर्चा में बड़ा फेरबदल, 56 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति में जगह; हॉस्टल प्रभारियों का भी ऐलान

भोपाल  मध्य प्रदेश भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए विभिन्न जिलों में प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों समेत 56 पदाधिकारियों की नियुक्ति की है। प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह परमार ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से नियुक्तियों की सूची जारी की। इसके साथ ही प्रदेश कार्यालय प्रभारी, संभाग प्रभारी, सह सोशल मीडिया प्रभारी, सह मीडिया प्रभारी, छात्रावास संपर्क प्रभारी और स्व-सहायता समूह प्रभारी भी बनाए गए हैं। प्रदेश कार्यसमिति सदस्य     मुरैना: महेश जाटव, मुकेश जाटव     भिंड: धरम सिंह भार्गव, बाबूलाल टैगोर     ग्वालियर नगर: अरविंद बैदौरिया, अर्जुन जाटव, महेश आर्य, मानवेन्द्र मौर्य (मोनू)     श्योपुर: पूर्ण आर्य, दीपकराज वाल्मीकि     शिवपुरी: सुभाष जाटव     सागर: लता साकवार, मूलचंद उर्रिया     छतरपुर: नीरज जाटव     सीधी: राजीव मौर्य, हरिकेश साकेत     जबलपुर नगर: बलराज सोनकर, गोपाल अहिरवार     जबलपुर ग्रामीण: राम महोबिया     कटनी: शिवकुमार चौधरी     छिंदवाड़ा: नितिन डेहरिया     नर्मदापुरम: राजकुमार मकोरिया     हरदा: अरविंद सौदे     भोपाल नगर: डॉ. पंकज कुमार     रायसेन: नेहा आदित्य चावला, जगदीश अहिरवार     विदिशा: सोना सप्रे, राजेश प्रभाकर     सीहोर: रवि नागले     राजगढ़: दिनेश जाटव     इंदौर नगर: दानवीर नरवले, अर्जुन सावले     इंदौर ग्रामीण: महेश गेहलोत, जितेंद्र जटिया     धार: दिनेश बामनिया     बुरहानपुर: राजकुमार बाघ     खरगोन: लच्छीराम नागरे, सुंदरलाल वारसे, एन.एस. सोलंकी     बड़वानी: सुखदेव भोसले, किशोर वर्मा     उज्जैन नगर: मनोज मालवीय, प्रकाश गोमे     उज्जैन ग्रामीण: डॉ. मदन चौहान, प्रकाश जटिया, बबलीलाल मालवीय     शाजापुर: अमित उदय, कंदन जाटव, दिनेश परमार, चंदन सिंह सौराष्ट्र     आगर: प्रभुराम मालवीय, प्रकाश जाटव     रतलाम: नंदकिशोर डुबवाड़ा, योगेश कैथवास     मंदसौर: जितेंद्र अटवाल     नीमच: ओमप्रकाश मेघवाल प्रदेश कार्यालय प्रभारी: गणपत लाल डाबी( प्रदेश महामंत्री, अजा मोर्चा) ये बनाए संभाग प्रभारी     भोपाल: डॉ. जगदीश चौहान     नर्मदापुरम: राकेश सिंह कुचबंदिया     शहडोल: अमित कछवाहा सह सोशल मीडिया प्रभारी: क्षितिज (बाबी) मालवीय सह मीडिया प्रभारी:रामस्वरूप अहिरवार छात्रावास संपर्क प्रभारी एवं सहप्रभारी     प्रभारी: दीपक कुमार भन्नारे     सह-प्रभारी: कमलकांत राजोरिया, दुर्गेश (कालू) चौहान, मनीषा मंगेश रमपुरिया, सरिता मालवीय स्व-सहायता समूह प्रभारी एवं सहप्रभारी     प्रभारी: बरखा वर्मा     सह-प्रभारी: पुष्पा चौहान, पार्वती तामिया

राजस्थान निकाय चुनाव में बगावत का सैलाब, BJP को 9 हजार तो कांग्रेस को 8 हजार बागियों से चुनौती

जयपुर. राजस्थान निकाय चुनाव में इस बार बीजेपी और कांग्रेस के सामने मुकाबला सिर्फ एक-दूशरे से नहीं है. दोनों पार्टियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनके अपने खुद के ही लोग बन गए हैं. टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों ने बड़ी संख्या में निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया है और अब मैदान छोड़ने को तैयार नहीं हैं. कुल मिलाकर देखें तो ये दोनों पार्टियों के बीच ऐसे लोग हैं जो ये समझने में मुश्किल हालात बना रहे कि कौन जीत दर्ज कर सकता है. आंकड़ों और पार्टी पदाधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेशभर में मोटे तौर पर बीजेपी के करीब 9 हजार और कांग्रेस के 8 हजार से ज्यादा बागी चुनाव मैदान में हैं. दोनों पार्टियों के पास अभी सभी निकायों का पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन आंकड़ों को मोटा अनुमान माना जा रहा है. लेकिन संख्या से ज्यादा चिंता इस बात की है कि इन बागियों में केवल सामान्य दावेदार ही नहीं हैं. कई पुराने पार्टी पदाधिकारी, पूर्व जनप्रतिनिधि, पूर्व पार्षद और स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ रखने वाले नेता भी अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में उतर गए हैं. यही वजह है कि टिकट वितरण के बाद अब दोनों दलों की पूरी रणनीति बदलती दिखाई दे रही है. पहले टिकट देने की लड़ाई थी, अब टिकट बचाने के बाद वोट बचाने की लड़ाई शुरू हो गई है किन इलाकों में सबसे ज्यादा बागी पार्टी    बागियों की अनुमानित संख्या    सबसे ज्यादा चर्चा वाले इलाके बीजेपी    करीब 9 हजार    श्रीगंगानगर, बालोतरा, निम्बाहेड़ा, कोटपूतली, जैसलमेर कांग्रेस    8 हजार से ज्यादा    बालोतरा, जैसलमेर, बाड़मेर, टपूतली, सीसवाली, कुचेरा, झालरापाटन यहां सबसे अहम बात यह है कि यह पूरे प्रदेश का मोटा अनुमान है. दोनों पार्टियों के पास अभी हर निकाय का पूरा आंकड़ा नहीं है. इसलिए इसे अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता बीजेपी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द श्रीगंगानगर बीजेपी की बगावत में श्रीगंगानगर सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है. यहां नगर परिषद में 70 बागी मैदान में हैं. यह संख्या अपने आप में बताती है कि टिकट वितरण के बाद पार्टी के अंदर असंतोष किस स्तर तक पहुंचा है. इसके बाद बालोतरा में 57, निम्बाहेड़ा में 37, कोटपूतली में 35, जैसलमेर में 30 और पदमपुर में 25 बागी चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा बाड़मेर में 23, बारां में 22, सीसवाली में 24 और भीलवाड़ा में 21 बागियों ने बीजेपी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. बीकानेर नगर निगम में 15, सादुलशहर में 17 और श्रीविजयनगर में 12 बागी मैदान में हैं. बीजेपी के प्रमुख बागी आंकड़े निकाय    बीजेपी के बागी श्रीगंगानगर    70 बालोतरा    57 निम्बाहेड़ा    37 कोटपूतली    35 जैसलमेर    30 पदमपुर    25 सीसवाली    24 बाड़मेर    23 बारां    22 भीलवाड़ा    21 सादुलशहर    17 बीकानेर    15 श्रीविजयनगर    12 बीजेपी में सिर्फ दावेदार नहीं, बड़े नाम भी मैदान में बीजेपी की परेशानी इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि कई जगह बगावत करने वालों की स्थानीय पहचान मजबूत है. डीग में बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश कौशिक निर्दलीय मैदान में हैं. बूंदी में नेता प्रतिपक्ष मुकेश माधवानी ने भी मोर्चा खोल दिया है. सादड़ी में पूर्व पालिकाध्यक्ष दिलीप सोनी, पूर्व पालिका उपाध्यक्ष घीसाराम जाट और बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष नारायण राइका निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. राजसमंद में पूर्व पार्षद गोवर्धन लड्ढा, सुरेश माली और हिम्मत मेहता भी अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनाव मैदान में हैं. यह सामान्य टिकट नाराजगी से थोड़ा अलग मामला है. ऐसे नेताओं के अपने समर्थक और स्थानीय संपर्क होते हैं. अगर ये लोग चुनाव तक मैदान में टिके रहते हैं तो बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार को सीधे नुकसान पहुंच सकता है. कांग्रेस की कहानी भी बहुत अलग नहीं कांग्रेस में भी बगावत का आंकड़ा बड़ा है. श्रीगंगानगर में कांग्रेस के 45 बागी मैदान में हैं. बालोतरा में 34, जैसलमेर में 24 और बाड़मेर में 21 बागी कांग्रेस प्रत्याशियों की राह मुश्किल कर रहे हैं. सीसवाली और कुचेरा में 21-21 बागी चुनाव लड़ रहे हैं. झालरापाटन में 19 और पिड़ावा में 18 बागी मैदान में हैं. कोटपूतली और पदमपुर में कांग्रेस के 25-25 बागी बताए जा रहे हैं, जबकि बीकानेर में 13 बागियों ने पार्टी का गणित बिगाड़ा है. कांग्रेस के प्रमुख बागी आंकड़े निकाय    कांग्रेस के बागी श्रीगंगानगर    45 बालोतरा    34 कोटपूतली    25 जैसलमेर    24 बाड़मेर    21 सीसवाली    21 कुचेरा    21 झालरापाटन    19 पिड़ावा    18 पदमपुर    25 बीकानेर    13 मान लीजिए किसी वार्ड में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. दोनों पार्टियों का अपना मजबूत वोट बैंक है. इसी बीच बीजेपी का कोई मजबूत स्थानीय दावेदार टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ता है. ऐसे में वह वोट सीधे कांग्रेस को नहीं देता, लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार के वोट जरूर काट सकता है. इसलिए बागी उम्मीदवार कई सीटों पर जीतने के लिए नहीं, बल्कि अधिकृत प्रत्याशी की जीत रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है. निकाय चुनाव में कई वार्डों में जीत और हार का अंतर बहुत कम रहता है. ऐसे में कुछ सौ वोट भी पूरा चुनाव पलट सकते हैं. अगर किसी मजबूत बागी को एक-दो हजार वोट मिल जाते हैं तो वह अपनी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार की जीत का रास्ता रोक सकता है. अब दोनों पार्टियों का फोकस एक ही है , बागी बैठाओ नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों दलों की कोशिश अब यही है कि प्रभावशाली बागियों को किसी तरह चुनाव मैदान से हटाया जाए. पार्टी के नेता ऐसे दावेदारों से संपर्क कर रहे हैं. उन्हें समझाया जा रहा है कि चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ जाने से संगठन को नुकसान होगा. लेकिन मुश्किल यह है कि कई बागी सिर्फ टिकट के लिए नाराज नहीं हैं. वे लंबे समय से संगठन में काम कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि चुनाव जीतने की स्थिति में होने के बावजूद उनका टिकट काट दिया गया. ऐसे लोगों के लिए सिर्फ यह कहना कि पार्टी का फैसला मानिए, काफी नहीं होगा. यहीं से मान-मनुहार की राजनीति शुरू होती है. वापसी की आखिरी कोशिश क्यों जरूरी है? पार्टी नेतृत्व के … Read more

कैबिनेट विस्तार पर सस्पेंस: किन नेताओं की लग सकती है लॉटरी? BJP अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम तैयार

नई दिल्ली  मोदी कैबिनेट में बड़े बदलाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी अपनी नई टीम का खाका तैयार कर चुके हैं. दो जुलाई को गृह मंत्री अमित शाह, नितिन नवीन और बीएल संतोष के बीच एक बहुत अहम बैठक हुई. तीन घंटे तक चली इस सीक्रेट मीटिंग में सरकार और संगठन के नए चेहरों पर मुहर लगी है. यह रिशफल सिर्फ एक सामान्य बदलाव भर नहीं है. इसके पीछे बहुत बड़ी इलेक्शन रणनीति काम कर रही है. कई दिग्गज मंत्रियों की कुर्सी बदल सकती है. संगठन के कई पुराने नेताओं को सरकार में शामिल किया जा सकता है. यह सारी कवायद आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर हो रही है. खासकर उन राज्यों पर फोकस है जहां पार्टी को अपना दम दिखाना है. एनडीए के सहयोगियों को भी कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है. आइए जानते हैं कि इस बड़े बदलाव में किन नेताओं के आएंगे ‘बहुत अच्छे दिन।  क्या होगा नितिन नवीन की नई टीम का स्ट्रक्चर और रणनीति? नितिन नवीन महज 45 साल की उम्र में बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं. उनकी नई टीम में कई युवा और फ्रेश चेहरे शामिल होने जा रहे हैं. संगठन के इस नए स्ट्रक्चर में अनुभव और नई पीढ़ी का एक शानदार बैलेंस देखने को मिलेगा. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव और केंद्रीय मीडिया टीम में नियुक्तियों पर अंतिम चर्चा हो रही है. इस नई टीम को क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है. उन राज्यों को सबसे ज्यादा तरजीह मिल रही है जहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. पार्टी का पूरा फोकस जमीनी स्तर पर मजबूती लाने पर है।  कैबिनेट फेरबदल में किन दिग्गज मंत्रियों का बदल सकता है विभाग?     कैबिनेट रिशफल को लेकर सत्ता के गलियारों में हलचल बहुत तेज है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कई केंद्रीय मंत्रियों को अब संगठन में भेजा जा सकता है. वहीं संगठन के कई दिग्गज नेताओं को सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।      मौजूदा कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल का नाम फाइनेंस मिनिस्टर के तौर पर सबसे आगे चल रहा है. गोयल एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और उनका बैकग्राउंड देश की इकॉनमी को बहुत अच्छे से समझता है।      वहीं मौजूदा फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को एजुकेशन मिनिस्ट्री की कमान मिल सकती है. यह एजुकेशन सेक्टर भी सरकार के लिए बहुत अहम है और यहां बड़े रिफॉर्म्स की जरूरत है।  क्या अनुराग ठाकुर की कैबिनेट में होगी एक शानदार वापसी? अनुराग सिंह ठाकुर के नाम पर भी दिल्ली में बहुत चर्चा हो रही है. उन्हें फिर से कैबिनेट रैंक के साथ एक बड़ा पोर्टफोलियो दिया जा सकता है. अनुराग का यूथ कनेक्शन उनके फेवर में काम कर रहा है. इसके अलावा पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का नाम भी रेस में है. सरकार इकॉनमी को रफ्तार देने के लिए बड़े टेक्नोक्रेट्स पर पूरा भरोसा जता सकती है।  पंजाब से तरुण चुघ को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है. उन्हें कैबिनेट में बड़ी जगह मिल सकती है जिससे पंजाब में पार्टी मजबूत हो. जिन मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनकी जगह भी नए चेहरों को मौका मिलेगा. इसमें हरदीप पुरी और बीएल वर्मा जैसे बड़े नाम शामिल हैं. कुछ पुराने मंत्रियों को गवर्नर बनाकर अलग राज्यों में भेजा जा सकता है।  एनडीए सहयोगियों और नए चेहरों को मिलेगा कैबिनेट में बड़ा इनाम! मोदी कैबिनेट में एनडीए सहयोगियों को खुश रखने पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है. हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए राघव चड्ढा का नाम भी चर्चा में है. उन्हें पंजाब के कोटे से कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. इससे पंजाब में बीजेपी का ग्राफ ऊपर जाएगा।  शिवसेना गुट की ताकत भी लगातार बढ़ रही है. इसके चलते श्रीकांत शिंदे या एकनाथ शिंदे के किसी करीबी नेता को मंत्री पद मिलना लगभग तय है।  जेडीयू चीफ नीतीश कुमार भी केंद्र में अपनी पार्टी के लिए बड़ा रोल चाहते हैं. उनकी डिमांड को देखते हुए जेडीयू का वजन कैबिनेट में बढ़ सकता है।  इसके साथ ही संजय दीना पाटिल को हेल्थ सेक्टर में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. पाटिल को मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर हेल्थ बनाया जा सकता है. बीजेपी संसदीय बोर्ड में होने जा रहा है अहम बदलाव     बीजेपी का संसदीय बोर्ड पार्टी की सबसे बड़ी डिसीजन मेकिंग बॉडी है. इसमें 11 सदस्य होते हैं और अब इसका भी पूरा पुनर्गठन हो रहा है. कई बड़े नेताओं को इस कोर बोर्ड में एंट्री मिल सकती है. राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का नाम इसमें सबसे आगे है. उनका ऑर्गेनाइजेशनल स्किल बहुत शानदार है और वे महाराष्ट्र के अहम नेता हैं।      पश्चिम बंगाल और ओडिशा में जीत के रणनीतिकार सुनील बंसल को भी प्रमोट किया जा सकता है. उन्हें नेशनल इलेक्शन प्लानिंग की कमान मिल सकती है. इसके अलावा महाराष्ट्र के नेता देवेंद्र फडणवीस का नाम भी इस लिस्ट में है. उन्हें पश्चिमी भारत के प्रतिनिधित्व के लिए बोर्ड में लाया जा सकता है।  शिवराज सिंह चौहान बनेंगे हिंदी हार्टलैंड के सबसे बड़े डिसीजन मेकर!     संसदीय बोर्ड में मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता शिवराज सिंह चौहान के नाम पर भी मुहर लग सकती है. आरएसएस के साथ चर्चा के बाद उनकी दावेदारी बहुत मजबूत हुई है. उन्हें हिंदी पट्टी के राज्यों में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।      जेपी संगठन में आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक सिस्टम की तर्ज पर बदलाव होने जा रहा है. टॉप नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों का प्रभारी बनाया जा सकता है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘यह नया बदलाव पूरी तरह से मिशन 2029 को ध्यान में रखकर किया जा रहा है’ .     राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी को उत्तर और पश्चिम भारत की कमान मिल सकती है. सर्बानंद सोनोवाल को नॉर्थईस्ट और के लक्ष्मण को दक्षिण भारत की जिम्मेदारी दी जा सकती है।  नेता का नाम संभावित जिम्मेदारी मुख्य कारण नितिन नबीन बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा और फ्रेश चेहरों के साथ संगठन का नया स्ट्रक्चर बनाना. पीयूष गोयल फाइनेंस मिनिस्टर (संभावित) चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के नाते इकॉनमी की गहरी समझ. … Read more

भाजपा विधायक को बड़ा झटका, 4 साल की सजा सुनाई; पीड़ित को ₹25 लाख मुआवजा देने के निर्देश

मुजफ्फरपुर/नई दिल्ली दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को बिहार के बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में चार साल की सजा सुनाई. वह फिलहाल बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं. इस घटना में एक महिला डॉक्टर की मौत हो गई थी. कोर्ट ने विधायक पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. स्पेशल जज विशाल गोगने ने सजा का ऐलान करते हुए कहा कि दोषी को आईपीसी की धारा 304 पार्ट-II के तहत चार साल की साधारण कैद और आर्म्स एक्ट के तहत दो महीने की सजा दी जाती है।  कोर्ट ने यह भी कहा कि जुर्माने की राशि पीड़िता के परिवार को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी. बिहार के साहेबगंज से बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह ने कोर्ट से प्रोबेशन पर रिहाई की मांग की थी. उन्होंने दलील दी थी कि उनका किसी की जान लेने का इरादा नहीं था और जनप्रतिनिधि के तौर पर उनका रिकॉर्ड बेदाग रहा है. राजू कुमार सिंह (56 वर्षीय) को आईपीसी की धारा 304 पार्ट-II यानी गैर इरादतन हत्या के अपराध में दोषी ठहराया गया. इसके अलावा उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन का भी दोषी पाया गया।  हर्ष फायरिंग में गई थी महिला डॉक्टर की जान यह घटना 31 दिसंबर 2018 की है, जब राजू कुमार सिंह ने दिल्ली के वसंत कुंज स्थित अपने फार्महाउस में न्यू ईयर पार्टी आयोजित की थी. जश्न के दौरान राजू कुमार सिंह ने हर्ष फायरिंग की, जिसमें डॉ. अर्चना गुप्ता को गोली लग गई. वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने राजू कुमार सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया और अब सजा का ऐलान किया है।  राउज एवेन्यू कोर्ट ने 6 जून को अपने 97 पन्नों के फैसले में कहा था कि उत्सव और जश्न के दौरान की जाने वाली हर्ष फायरिंग देश में एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जो अक्सर लोगों की जान ले लेती है. कोर्ट ने कहा था कि यह मामला भी ऐसी ही एक दुखद घटना का उदाहरण है, जहां बिहार के कई बार विधायक रहे राजू कुमार सिंह की कथित लापरवाह हर्ष फायरिंग के कारण न्यू ईयर पार्टी में शामिल एक महिला की मौत हो गई. कोर्ट ने उपलब्ध सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर माना कि राजू कुमार सिंह ने ही वह गोली चलाई थी, जिससे अर्चना गुप्ता की मौत हुई. राउज एवेन्यू कोर्ट ने  इस मामले में सजा का ऐलान 7 जुलाई, 2026 को किया।  अब राजू कुमार सिंह की विधायकी जानी तय चूंकि राजू कुमार सिंह को दो साल से अधिक की सजा सुनाई गई है, इसलिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत उनकी विधायकी पर अयोग्यता लागू हो सकती है. ऐसे में बिहार विधानसभा की उनकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है. अब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें ऊपरी अदालत से दोषसिद्धि पर राहत मिलती है या नहीं. भारत में सांसद (MP) या विधायक (MLA) की सदस्यता जाने का नियम जनप्रतिनिधित्व कानून (Representation of the People Act), 1951 की धारा 8 के तहत तय होता है. अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा किसी आपराधिक मामले में मिलती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द हो जाती है।  यह नियम सुप्रीम कोर्ट के 2013 के ऐतिहासिक फैसले (लिली थॉमस केस) के बाद लागू हुआ था. पहले दोषी जनप्रतिनिधियों को अपील के लिए कुछ समय मिल जाता था, लेकिन अब सजा होते ही अयोग्यता लागू हो जाती है. हालांकि, अगर ऊपरी अदालत (हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट) सजा पर स्टे (Stay on Conviction) दे दे, तो सदस्यता बच सकती है. सिर्फ सजा पर रोक (Stay on Sentence/Bail) पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि दोषसिद्धि पर रोक जरूरी होती है।