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4 जुलाई की सुनवाई से पहले पंजाब की राजनीति गरमाई, AAP ने विपक्ष के आरोपों पर दिया जवाब

 चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े विवाद और अकाल तख्त की ओर से सुनाए गए फैसले को लेकर आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री इस मामले पर अपना पक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं और वह इससे आगे कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं करना चाहते। अमन अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो कह चुके हैं, वही उनका स्पष्ट रुख है। उन्होंने कहा कि विवाद से जुड़े तथ्यों की पुष्टि केवल फोरेंसिक जांच के जरिए ही हो सकती है और सच्चाई सामने लाने के लिए तकनीकी जांच का इंतजार किया जाना चाहिए। अमन अरोड़ा ने कहा कि उनके अनुसार मुख्यमंत्री के स्पष्टीकरण के बाद फिलहाल इससे आगे कुछ कहना उचित नहीं होगा। उन्होंने दोहराया कि मामले की सत्यता फोरेंसिक जांच से ही स्थापित हो सकती है। उधर, अकाल तख्त की ओर से इस मामले में सुनाए गए फैसले के तहत आम आदमी पार्टी के कुछ विधायकों और नेताओं को भी श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होने के लिए तलब किया गया है। अकाल तख्त की ओर से जारी आदेश के अनुसार आप विधायकों को 4 जुलाई को श्री अकाल तख्त साहिब में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। गौरतलब है कि एक वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, जिसके बाद विभिन्न सिख संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से आपत्ति जताई गई थी। इस मामले में अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद फैसला सुनाया गया। अकाल तख्त ने संबंधित व्यक्तियों को पेश होकर अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही कह चुके हैं कि विवादित वीडियो उनकी नहीं है और उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह श्री अकाल तख्त साहिब और सिख धार्मिक संस्थाओं का पूरा सम्मान करते हैं। अब इस पूरे मामले पर राजनीतिक और धार्मिक हलकों की नजरें 4 जुलाई को होने वाली पेशी और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

पंजाब में संगठन विस्तार पर जोर, 2027 की तैयारी में आम आदमी पार्टी का बड़ा प्लान

 चंडीगढ़ पंजाब राज्य में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (आप) ने संगठन और सरकार के कामकाज को सीधे जनता तक पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर जनसंपर्क अभियान शुरू करने की रणनीति बनाई है। पार्टी ने अपने मौजूदा विधायकों और हलका इंचार्जों को निर्देश दिए हैं कि वे अगले दो महीनों तक अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार लोक मिलनियां आयोजित कर लोगों के बीच रहें और सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड पेश कर रहे है। पार्टी ने संभावित चुनावी उम्मीदवारों को हर दिन तीन लोक मिलनियां आयोजित करने का लक्ष्य दिया है। इन बैठकों के जरिए न केवल सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी दी जा रही है, बल्कि क्षेत्र के लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को भी जाना जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य है कि 15 अगस्त तक हर विधानसभा क्षेत्र के सभी गांवों और प्रमुख शहरी वार्डों तक पहुंच बनाई जाए। 2027 की शुरुआती चुनावी तैयारी पार्टी के अंदर इसे 2027 के लिए शुरुआती चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पहले से ही विभिन्न इलाकों में लोक मिलनियां कर रहे हैं, जबकि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल समेत कई मंत्री भी अपने-अपने क्षेत्रों में जनसभाएं और संवाद कार्यक्रम शुरू कर चुके हैं। जिन विधायकों और हलका इंचार्जों को पार्टी संभावित उम्मीदवार मान रही है, उन्हें अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए रंगला पंजाब फंड से राशि भी उपलब्ध कराई जा सकती है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए करीब 10 करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों की योजना बनाई गई है, ताकि चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर काम दिखाई दे सके। जनाप्रतिनिधियों को बाहर न जाने की सलाह पार्टी नेतृत्व ने जनप्रतिनिधियों को अगले दो महीनों तक अपने विधानसभा क्षेत्रों में अधिकतम समय देने और अनावश्यक रूप से क्षेत्र से बाहर न जाने की सलाह भी दी है। वहीं, आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी आने वाले समय में व्यापारियों और उद्योग जगत से जुड़े वर्गों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकते हैं, जिससे पार्टी का समर्थन आधार और व्यापक बनाया जा सके। मानना है कि लगातार जनसंपर्क, विकास कार्यों की प्रस्तुति और लाभार्थी वर्गों से सीधा संवाद, आप की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। पार्टी इस अभियान के जरिए सरकार की योजनाओं को राजनीतिक समर्थन में बदलने की कोशिश में जुटी है।

वोट प्रतिशत के विश्लेषण ने बदली तस्वीर! AAP की सीटें घटने के संकेत, कांग्रेस और BJP को बढ़त की उम्मीद

चंडीगढ़  पंजाब में हाल ही में हुए 8 नगर निगमों और 75 नगर कौंसिलों के चुनाव के पार्टीवाइज वोटिंग के आंकड़े सामने आ गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा वोट % सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को मिला है। मगर, यह 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले कम है।  वोटिंग से ये भी स्पष्ट हो रहा है कि कांग्रेस अभी भी AAP के मुकाबले वोटरों के बीच मजबूत विकल्प है। जिन क्षेत्रों में निगम और कौंसिल के चुनाव हुए, उनमें 68 विधानसभा सीटें आती हैं। अगर कांग्रेस को इन निकाय चुनावों में मिले वोट % को देखें तो उन्हें फायदा हो सकता है। इसी तरह भाजपा को भी शहरों में बढ़त मिलती नजर आ रही है। वहीं अकाली दल फिर फिसड्‌डी साबित हुआ है। इसके बीच चौंकाने वाली बात ये है कि अगर अकाली दल और भाजपा आपस में गठजोड़ कर लें तो 2027 के चुनाव में कांग्रेस की जगह वह AAP को टक्कर दे सकती है। निकाय चुनाव में मिले वोट % से 2027 के लिए क्या संकेत:- एंटी-इन्कम्बेंसी भी बिगाड़ेगी आप का गणित 2022 में AAP ने 42% से ज्यादा वोट शेयर के साथ एकतरफा चुनाव जीता था। 117 में से 92 सीटें AAP को मिलीं थीं। वहीं इन चुनाव वाले क्षेत्रों में आप ने 68 में से 54 सीटें जीती थीं। अब 2026 के स्थानीय चुनावों में AAP का वोट शेयर बड़े शहरों में 36.80% और छोटे शहरों में 35.24% पर आ गया है। वोट शेयर का यह 6% से 7% का नुकसान करीब 20 से 25 सीटों का नुकसान कर सकता है। 2022 में कांग्रेस सत्ता में थी और कांग्रेस के खिलाफ जो एंटी-इन्कम्बेंसी थी, उसका फायदा AAP को मिला था, वह अब 2027 में AAP के खिलाफ जा सकता है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप का कहना है कि शहरी और अर्ध-शहरी सीटों पर जहां त्रिकोणीय मुकाबला है, वहां विपक्ष का वोट बढ़ना AAP के जीत के मार्जिन को खत्म कर सकता है। निकाय चुनाव में सत्ता पक्ष को हमेशा ज्यादा वोट मिलते हैं जबकि विधानसभा चुनाव में एंटी इन्कम्बेंसी भी आप को झेलनी पड़ेगी। ऐसे में आप की सीटें इससे भी कम हो सकती है। आप का वोट शेयर खिसकने से कांग्रेस का फायदा पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि नगर कौंसिल के चुनावों में कांग्रेस का 21.89% वोट शेयर यह दिखाता है कि उसका कैडर और पारंपरिक वोटर अभी भी जमीन पर मौजूद है। अकाली दल के कमजोर होने का सीधा फायदा ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में कांग्रेस को मिल रहा है। जो लोग AAP सरकार से नाराज होंगे, उनके लिए कांग्रेस अभी भी सबसे बड़ा मुख्य विकल्प बनकर उभर रही है। इसके अलावा सरकार की एंटी इन्कम्बेंसी का फायदा भी कहीं न कहीं कांग्रेस को मिलेगा। ऐसे में कांग्रेस की सीटें 20 से ज्यादा हो सकती हैं। भाजपा शहरी क्षेत्रों में लगातार कर रही ग्रोथ पॉलिटिकल एक्सपर्ट व सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि नगर निगमों यानि बड़े शहरों में भाजपा का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। जिन आठ नगर निगमों में चुनाव हुआ है, वहां पर 2021 के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर लगभग दो गुना हो गया। नगर निगमों में वोट शेयर 9 फीसदी से बढ़कर 17.58 फीसदी हो गया। इन 8 नगर निगम सीटों में से भाजपा 5-6 सीटें सीधे जीत सकती है, और नगर कौंसिल के दायरे में आने वाली 60 सीटों में से भी 3-5 सीटों पर चौंकाने वाले नतीजे दे सकती है। कुल मिलकार कर 68 सीटों में से 8 से 11 सीटें जीत सकती है। वहीं सरकार की एंटी इन्कंबेंसी का फायदा भी भाजपा को मिल सकता है। इसके अलावा भाजपा ने छोटे शहरों में बड़े नेताओं को पार्टी में शामिल करना शुरू कर दिया है। इन चुनावों में भी बड़े चेहरों का फायदा भाजपा को मिला है। भाजपा ने पहली बार अबोहर नगर निगम जीता है। शहरी क्षेत्रों में शिरोमणि अकाली दल ग्राफ डाउन अकाली दल का वोट शेयर शहरों में 9% और कस्बों में 11% पर आ गया है। इस वोट शेयर के साथ विधानसभा सीट जीतना बेहद मुश्किल होता है। शिअद केवल उन 1 या 2 पारंपरिक सीटों पर ही सिमट कर रह जाएगी। शिअद का कोर वोटर पंथक वोट माना जाता रहा है अब वो भी पार्टी से कटता नजर आ रहा है। ऐसे में शहरी क्षेत्रों में अकाली दल का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। SAD-BJP से गठबंधन हुआ तो मिलेगी मजबूती शिअद और भाजपा गठबंधन होता है तो आंकड़े कुछ और हो जाएंगे। पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि इन निकाय चुनावों में भाजपा और अकाली दल का वोट प्रतिशत जोड़ दिया जाए तो इनकी स्थिति और बेहतर हो जाती है। उनका कहना है कि शिअद को नगर निगम में 8.98 प्रतिशत वोट मिले और भाजपा को 17.58 प्रतिशत वोट मिले। दोनों का वोट प्रतिशत जोड़ा जाए तो यह 26.5 प्रतिशत से ज्यादा हो जाता है। जो कि कांग्रेस के वोट प्रतिशत से ज्यादा है। इसी तरह नगर काैंसिल में भी है। शिअद को 11.80% और भाजपा को 9.46% वोट मिले हैं जो कि मिलाकर 21.5 प्रतिशत के आसपास हो जाता है जो कि कांग्रेस के लगभग बराबर है।

ED एक्शन पर गरमाई सियासत, AAP नेताओं ने भाजपा महासचिव के निवास के बाहर किया विरोध

अमृतसर. पंजाब के अमृतसर में केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के विरोध में रविवार को आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग के निवास स्थान के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में पंजाब सरकार के मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, विधायक जसबीर सिंह, आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष प्रभबीर सिंह बराड़, विधायक डाॅ. इंदर बीर सिंह निज्जर, विधायक डाॅ. अजय गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों की आवाज दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। आप नेताओं ने आरोप लगाया कि बीते दिनों पंजाब मंत्रिमंडल के मंत्री संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी पूरी तरह राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी लगातार जनहित के मुद्दे उठा रही है और इसी कारण पार्टी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। लोकतंत्र के लिए बताया खतरा मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि आम आदमी पार्टी डरने वाली नहीं है और पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता जनता की आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार यह सोचती है कि गिरफ्तारियों और दबाव की राजनीति से विपक्ष को चुप कराया जा सकता है तो यह उसकी गलतफहमी है। विधायक डाॅ. इंदर बीर सिंह निज्जर ने कहा कि पंजाब की जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा। वहीं विधायक डाॅ. अजय गुप्ता ने कहा कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को निशाना बनाना लोकतंत्र के लिए ठीक संकेत नहीं है। चुग के घर के बाहर बनाया सुरक्षा घेरा प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस बल भी बड़ी संख्या में तैनात रहा। पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करवाने के लिए इलाके में निगरानी बढ़ाई हुई थी। प्रदर्शन के दौरान आप कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी वापस लेने की मांग की। आम आदमी पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि इसी तरह विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई जारी रही तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

पंजाब में सियासी हलचल तेज, AAP विधायकों को लेकर पार्टी अलर्ट मोड में

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के 7 राज्य सभा सांसदों द्वारा बीजेपी में जाने के बाद पार्टी में हलचल तेज है। इन सात में से 6 सांसद पंजाब से थे, जबकि एक दिल्ली से थी। पार्टी से सातों सांसद के बागी होने पर पंजाब में पार्टी की टूट रोकने के लिए प्रदेश प्रभारी मनीष सिसोदिया एक्टिव हो गए है। उन्होंने बुधवार को सभी विधायकों को जालंधर बुलाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान सीएम भगवंत मान और मनीष सिसोदिया सभी विधायकों के साथ बातचीत करेंगे। एजेंडा नहीं हुआ सार्वजनिक हालांकि आम आदमी पार्टी द्वारा यह बैठक क्यों बुलाई गई है, इसका एजेंडा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी के 7 राज्य सभा सांसदों द्वारा बीजेपी में विलय होने के बाद विधायकों का मन टटोला जाएगा। 65 AAP विधायक मारेंगे पलटी- कांग्रेस राघव चड्ढा समेत 4 सांसदों द्वारा बीजेपी में जाने के बाद कांग्रेस की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आई थी। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा था कि प्रदेश में आम आदमी पार्टी के करीब 65 विधायक पलटी मारने की तैयारी में है। उन्होंने यह भी कहा था कि भगवंत मान भी एकनाथ शिंदे की तरह हो सकते है। पंजाब में AAP को लगा झटका पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। इससे पहले पार्टी के 7 राज्य सभा सांसदों का दूसरी पार्टी में जाना अरविंद केजरीवाल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इन सात में से 6 सांसद उच्च सदन में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते थे। वहीं राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने 2022 में प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इतने बड़े स्तर पर सांसदों का पार्टी छोड़ना किसी भी दल के लिए गंभीर चुनौती होती है। इससे यह संदेश जाता है कि पार्टी के अंदर समन्वय और संवाद की कमी है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर AAP पर तीखा हमला बोला और इसे पार्टी के टूटने की शुरुआत बताया। AAP ने बताई साजिश दूसरी ओर, AAP नेतृत्व ने इसे साजिश करार देते हुए कहा कि उनके नेताओं पर दबाव बनाया गया। पार्टी ने अपने विधायकों और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं।

बलबीर सिंह सीचेवाल का बड़ा खुलासा, ‘आप छोड़ने वाले सांसदों ने मुझे भी बुलाया था, पर मैंने मना कर दिया’

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने रविवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों ने उन्हें भी अपने साथ आने का न्यौता दिया था लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया। सीचेवाल ने कहा कि राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने उन्हें फोन कर आजाद समूह में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था।  सीचेवाल ने सात सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़ने पर दुख जताते हुए इसे आम आदमी पार्टी के साथ बेवफाई करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इन नेताओं को राज्यसभा में भेजकर पंजाब के मुद्दे उठाने का मौका दिया लेकिन अब उन्होंने अचानक पार्टी छोड़ दी।  राघव चड्ढा और संदीप पाठक के फैसले पर भी उन्होंने हैरानी जताई। कहा कि इन नेताओं ने पंजाब में सत्ता का पूरा आनंद लिया और अब पार्टी को अलविदा कह दिया। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने रविवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों ने उन्हें भी अपने साथ आने का न्योता दिया था लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया। सीचेवाल ने कहा कि राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने उन्हें फोन कर आजाद समूह में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था।   सीचेवाल ने सात सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़ने पर दुख जताते हुए इसे आम आदमी पार्टी के साथ बेवफाई करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इन नेताओं को राज्यसभा में भेजकर पंजाब के मुद्दे उठाने का मौका दिया लेकिन अब उन्होंने अचानक पार्टी छोड़ दी।  राघव चड्ढा और संदीप पाठक के फैसले पर भी उन्होंने हैरानी जताई। कहा कि इन नेताओं ने पंजाब में सत्ता का पूरा आनंद लिया और अब पार्टी को अलविदा कह दिया। हमने पंजाब के साथ कोई गद्दारी नहीं की, दस गुना ज्यादा कम करेंगे : साहनी आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद विक्रमजीत साहनी ने आप के आरोपों पर कहा कि हम गद्दार नहीं हैं। हम 10 गुना ज्यादा काम करेंगे। वर्ष 2022 पंजाब विधानसभा चुनाव में सांसद राघव चड्ढा और संदीप पाठक का अहम रोल था लेकिन पिछले कुछ समय से उन्हें साइड लाइन कर दिया गया। राघव चड्ढा और पाठक को साइडलाइन करने से बढ़ा असंतोष सांसद साहनी ने एक टीवी चैनल पर इंटरव्यू के दौरान कहा कि आप के दिल्ली चुनाव हारने के बाद नई टीम ने मोर्चा संभाल लिया। चड्ढा को संसद में उपनेता के पद से हटाने के बाद रोष बढ़ गया। दोनों प्रमुख नेताओं को नजरअंदाज करना गलती थी। बाकी सांसदों में भी इसे लेकर असंतोष था। साहनी ने कहा कि वह इसे लेकर आप प्रमुख केजरीवाल से भी मिले थे। केजरीवाल ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए बोल दिया था।   साहनी ने कहा कि वे इस्तीफा देने लगे थे लेकिन अपने करीबियों के साथ विचार विमर्श के बाद ही इस्तीफा न देने का फैसला लिया और इस दौरान सहमति बनी कि भाजपा ही पंजाब का भला कर सकती है। इसके बाद ही पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा पंजाब को जो मिलना चाहिए था वो सही समन्वय के कारण मिल नहीं पा रहा है।   पिछले चार साल से चुनावी मोड ही चल रहा है और राज्य और केंद्र सरकार दोनों एक दूसरे को कोस रहे रहे हैं। युवा पीढ़ी खेती नहीं करना चाहती है तो ऐसे हालात में पंजाब का क्या हो सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार पंजाब के लिए बहुत कुछ करना चाहती है।   साहनी ने कहा कि फ्रेट सब्सिडी देने के लिए केंद्र तैयार है लेकिन आंकड़ों के साथ प्रस्ताव तो देना ही होगा। चुनाव के बारे में अभी कुछ नहीं कहना चाहता हूं, क्योंकि पंजाब के लोग समझदार हैं और 2027 विधानसभा चुनाव में उचित फैसला लेंगे।  

जालंधर में हरभजन का विरोध, AAP कार्यकर्ताओं ने घर पर लिखा ‘गद्दार’; मित्तल भी शिकार

जालंधर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह के पार्टी छोड़ने पर गुस्सा थम नहीं रहा। शनिवार को पंजाब में पार्टी कार्यकर्ता भड़के हुए नजर आए। नाराज कार्यकर्ताओं ने हरभजन के जालंधर स्थित आवास पर गद्दार लिख दिया। गौरतलब है कि पंजाब से राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह शुक्रवार को राघव चड्ढा के नेतृत्व में भाजपा में शामिल हो गए। आम आदमी पार्टी के कुल सात सांसदों ने भाजपा का दामन थामा है। वहीं, एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें अशोक मित्तल की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के गेट पर आप कार्यकर्ता गद्दार लिख रहे हैं। वीडियो में क्या आया नजर इसका वीडियो भी वायरल हुआ है। वीडियो में नजर आ रहा है कि आम आदमी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता हरभजन सिंह के आवास पर पहुंचे हैं। यह लोग उनके घर की दीवार पर स्प्रे पेंट से गद्दार लिख रहे हैं। इस दौरान वहां सुरक्षा में तैनात पुलिस के जवान उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं। हालांकि पुलिस के रोकने के बावजूद यह लोग अपने मकसद में कामयाब हो जाते हैं। ब्लैक स्प्रे पेंट से अंग्रेजी और पंजाबी में दीवार पर गद्दार लिखा नजर आ रहा है। मित्तल काे भी नहीं छोड़ा कुछ ऐसा ही हाल अशोक मित्तल का भी हुआ है। अशोक मित्तल की लवली प्रोफेशन यूनिवर्सिटी के गेट के बाहर बड़ी संख्या में आप कार्यकर्ता पहुंचे। इन लोगों ने गेट पर ब्लैक स्प्रे पेंट से लिखा है, ‘पंजाब का गद्दार’। बताया जाता है कि इन राज्यसभा सांसदों के आप छोड़ने के बाद से पार्टी कार्यकर्ता काफी ज्यादा नाराज हैं। गौरतलब है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहाकि इन लोगों ने पंजाब की पीठ में छुरा घोंपा है और गद्दारी की है। ‘आप’ का क्या कहना है आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह ने शनिवार को कहा कि पार्टी राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर उन सात सांसदों को सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग करेगी, जिन्होंने एक दिन पहले पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था। संजय सिंह ने कहाकि दल-बदल विरोधी कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्यसभा और लोकसभा में किसी भी प्रकार का विभाजन या गुटबंदी नहीं हो सकती। इसे कोई कानूनी मान्यता नहीं मिलती, भले ही दो-तिहाई बहुमत हो। उन्होंने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची और दल-बदल विरोधी कानून दोनों ही राज्यसभा या लोकसभा में किसी भी प्रकार के विभाजन, अलग गुट या धड़े को मान्यता नहीं देते, चाहे दो-तिहाई बहुमत ही क्यों न हो।

AAP के 50 विधायकों में टूट का डर, कांग्रेस ने किया बड़ा अलर्ट

चंडीगढ़   आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका दिया है। चड्ढा आम आदमी पार्टी के दो तिहाई राज्यसभा सांसदों को साथ लेकर भाजपा में शामिल होने वाले हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पंजाब से लेकर नई दिल्ली तक उथल-पुथल मची हुई है। इसी बीच पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने आम आदमी पार्टी को सलाह दी है कि वह सचेत रहे, क्योंकि हो सकता है कि उसके 50 विधायक भी जल्दी ही भाजपा में शामिल हो जाएं। एएनआई से बात करते हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पैसा देखकर लोगों को राज्यसभा सीट दे दी। ऐसे में इन लोगों की कोई विचारधारा नहीं थी। ऐसे में ऐसा संभव था कि वह अलग होंगे, यह तो होना ही था। उन्होंने कहा, "पार्टी ने पैसा देखकर लोगों को राज्यसभा सांसद बना दिया। इनकी कोई विचारधारा तो थी नहीं। ऐसे में वह जैसे आए थे, वह वैसे ही चले गए। मुझे तो डर है कि ऐसे ही आम आदमी पार्टी के 50 विधायक भी न चले जाएं। यह तो केवल सांसद गए हैं। जब विचारधारा नहीं है, आप को लोग पैसा देखकर, इंडस्ट्री देखकर राज्यसभा सदस्य बनाओगे। और उनसे कई तरीके की मदद लोगे, तो यह होना ही था।" कार्यकर्ताओं को बनाना चाहिए था राज्यसभा सांसद: वारिंग कांग्रेस पंजाब सांसद ने कहा कि आम आदमी पार्टी को ऐसे लोगों को राज्यसभा भेजना चाहिए था, जिनकी विचारधारा पता थी। उन्हें कार्यकर्ताओं को यह सीट देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, "जब भी पार्टी विचारधारा का व्यक्ति नहीं चुनती हैं, तो ऐसा ही होता है। वैसे भी इन राज्यसभा सांसदों की पंजाब में कोई कीमत नहीं है। ऐसा माल चाहें आम आदमी पार्टी के पास रहे, चाहें वह भाजपा के पास चला जाए। हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।" यह अन्य पार्टियों के लिए सबक: वारिंग कांग्रेस पंजाब अध्यक्ष वारिंग ने कहा कि इस घटनाक्रम से अन्य पार्टियों को भी सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी लोगों को बड़े पदों की जिम्मेदारियां दें, उसके पहले उनकी विचारधारा की जांच कर लें। अगर केवल पैसे वाले लोगों को ऐसे पद दिए जाएंगे, तो वह लोग छोड़कर भागेंगे ही। उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने कभी भी ऐसे लोगों को राज्यसभा नहीं भेजा। कांग्रेस ने कार्यकर्ता को और विचारधारा से मेल खाने वाले व्यक्तियों को ही राज्यसभा भेजा है। इन राज्यसभा सांसदों को शामिल करके भाजपा यह न सोचे कि उन्होंने पंजाब फतह कर लिया है, क्योंकि इन सांसदों से वैसे भी पंजाब में नफरत ही थी।"

AAP का बड़ा कदम: दिल्ली में भाजपा को बिना मुकाबले जीत का मौका क्यों दिया?

नई दिल्ली दिल्ली की सत्ता गंवा देने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) राजधानी की 'छोटी सरकार' यानि दिल्ली नगर निगम (MCD) से भी दूर हो चुकी है। पिछले एमसीडी चुनाव में बहुमत हासिल करने वाली 'आप' के हालात इन दिनों ऐसे हैं कि लगातार दूसरे साल पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बिना लड़े जीत का मौका दे दिया है। पंजाब, गुजरात से गोवा तक में विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने इस साल भी दिल्ली में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। दोनों पदों के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। आप के पार्षद और विपक्ष के नेता अंकुश नारंग ने कहा, 'हम प्रयास करते तो संख्याबल जुटा सकते थे। कुछ पार्षद मौजूदा व्यवस्था से नाखुश हैं। लेकिन दूसरे दलों की तरह हॉर्स ट्रेडिंग (वोट खरीद-फरोख्त)करने से फायदा नहीं है।' बुधवार को एक पार्टी की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। पार्टी ने तीन में से केवल एक रिक्त स्टैंडिंग कमिटी के लिए नामांकन दाखिल किया है। पार्टी को उम्मीद है कि इस सीट पर वह जीत हासिल कर सकती है। नारंग ने कहा, 'एक बार फिर हमने भाजपा को ना सिर्फ मेयर बल्कि स्टैंडिंग कमिटी का चेयरमैन बनाने का मौका दिया है, क्योंकि पार्टी किसी भी तरह कमिटी में बहुमत हासिल करने की कोशिश करेगी।'आम आदमी पार्टी ने शालीमार बाग से पार्षद जलज चौधरी को कमिटी के लिए उतारा है। नारंग ने कहा कि चौधरी अनुभवी नेता हैं और लंबे समय से इलाके की समस्याओं को उठाते रहे हैं। मेयर-डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमिटी के लिए 5 पदों पर चुनाव मेयर और डिप्टी मेयर के अलावा स्टैंडिंग कमिटी के तीन सदस्यों के लिए भी 29 अप्रैल को ही वोटिंग होगी। 31 मार्च को भाजपा के 6 और आप के तीन प्रतिनिधि 18 सदस्यीय समिति से रिटायर हो गए थे। छह सीटों के लिए चुनाव संबंधित जोन में होंगे जहां के प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हुआ है, जबकि तीन का निर्वाचन सदन में होगा। शेष 9 सदस्यों में भाजपा के पांच और आप के चार सदस्य हैं। बुधवार को भाजपा ने भी एक बैठक करके आगामी चुनाव पर मंथन किया। मेयर पद के लिए भाजपा ने बेगमपुर से पार्षद जय भगवान यादव, महिपालपुर के इंद्रजीत सहरावत और मौजूदा मेयर राजा इकबाल सिंह पर विचार किया। मैदान में उतरेगी कांग्रेस एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी ने मैदान छोड़ने का फैसला किया तो कांग्रेस ताल ठोंकने का दमखम दिखा रही है। कांग्रेस ने मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों के लिए उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। सदन में 250 सीटों में से भाजपा के 123 और आम आदमी पार्टी के 100 पार्षद हैं। 15 पार्षद इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी से हैं। यह गुट आप से अलग हुआ था। कांग्रेस के 9 पार्षद हैं जबकि एक फॉर्वर्ड ब्लॉक और एक निर्दलीय है। एक सीट खाली है। क्या है वोटों का समीकरण मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में पार्षदों के अलावा दिल्ली के सांसद और विधायक भी हिस्सा लेते हैं। इस हिसाब से भाजपा के पास 141 वोट हैं जबकि आप के पास 106 का संख्याबल है। कांग्रेस के पास दिल्ली से कोई विधायक या सांसद नहीं है। पिछले साल भी आम आदमी पार्टी ने दोनों पदों के लिए उम्मीदवार नहीं उतारा था। भाजपा को बिना लड़े ही जीत का मौका मिल गया था।

बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून AAP की ऐतिहासिक सफलता, नील गर्ग ने की सराहना

बठिंडा आम आदमी पार्टी पंजाब के सीनियर लीडर और चेयरमैन नील गर्ग ने कहा कि पंजाब सरकार का बेअदबी के मामलों के खिलाफ सख्त कानून बनाना राज्य के लिए एक ऐतिहासिक पल है। यह बिल, जो मुख्यमंत्री भगवंत मान की लीडरशिप में बैसाखी के पवित्र दिन पंजाब विधानसभा में पास हुआ था, अब गवर्नर गुलाब चंद कटारिया के साइन के बाद कानून बन गया है। चेयरमैन नील गर्ग ने कहा कि बैसाखी के पवित्र दिन लाया गया यह बिल पूरे पंजाब और दुनिया के सिख समुदाय के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। यह सिर्फ एक कानून नहीं है, बल्कि संगत की दुआओं और लंबे संघर्ष का नतीजा है। इस ऐतिहासिक कदम से सिख समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगें पूरी हुई हैं। बेअदबी जैसे सेंसिटिव मुद्दे पर सख्त कानूनी नियम लाकर पंजाब सरकार ने साफ मैसेज दिया है कि धार्मिक भावनाओं से खेलने वालों को कभी बख्शा नहीं जाएगा। नील गर्ग ने इस कानून को लागू करने के लिए सभी MLA, संतों और कानूनी जानकारों का धन्यवाद किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक मौके पर पूरी सिख संगत को बधाई दी और कहा कि यह कानून पंजाब में शांति, भाईचारे और धार्मिक सम्मान को और मजबूत करेगा। चेयरमैन नील गर्ग ने कहा कि यह सिर्फ एक कानून नहीं है, बल्कि पंजाब की आत्मा की रक्षा के लिए लिया गया एक ऐतिहासिक फैसला है। हम सभी गुरु साहिब के आगे सिर झुकाते हैं और इस सेवा के लिए उनका लाख-लाख शुक्रिया अदा करते हैं।