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शिरोमणि अकाली दल के वर्चस्व को AAP की चुनौती?

चंडीगढ़. पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक पंथक सियासत शिरोमणि अकाली दल के इर्द-गिर्द घूमती रही है। सिख पंथ से जुड़े धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक मुद्दों पर अकाली दल की पकड़ मजबूत मानी जाती थी लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह समीकरण तेजी से बदलता दिख रहा है। आम आदमी पार्टी की सरकार की ओर से आनंदपुर साहिब में विधानसभा सत्र आयोजित करना और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूपों के गायब होने के मामले में तीखी कार्रवाई ने पंथक राजनीति में आप की गंभीर एंट्री का संकेत दिया है। वहीं, श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पंथक मामले में तलब करके मामले को और गरमा दिया है। अकाली दल का जन्म ही पंथक आंदोलन से हुआ। गुरुद्वारा सुधार आंदोलन से लेकर एसजीपीसी पर नियंत्रण तक, अकाली दल ने सिख धार्मिक संस्थाओं के माध्यम से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। ग्रामीण पंजाब, खासकर माझा और मालवा के पंथक बहुल क्षेत्रों में अकाली दल लंबे समय तक स्वाभाविक विकल्प रहा। पंजाब के कुल मतदाताओं में करीब 30-35 फीसदी ऐसे हैं, जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पंथक मुद्दों से प्रभावित होते हैं। इनमें से अधिकांश का झुकाव ऐतिहासिक रूप से अकाली दल की ओर रहा। आप सरकार के तीन बड़े कदम पंथक सियासत में नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। आनंदपुर साहिब में विधानसभा सत्र केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं था, बल्कि सिख इतिहास और अस्मिता को संवैधानिक सम्मान देने का संदेश था। वहीं, श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूप गायब होने के मामले में तेज जांच और कार्रवाई ने पंथक मतदाताओं में यह धारणा बनाई कि सरकार केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने को तैयार है। तीसरा कदम तीन शहरों को धार्मिक दर्जा देने का रहा, जो पंथक वोटर के लिए सकारात्मक संकेत माना गया। अकाली दल पहले ही नेतृत्व संकट, परिवारवाद और सीमित नेतृत्व विकल्पों से जूझ रहा है। विधानसभा और लोकसभा में उसकी सीटें घटकर बहुत कम रह गई हैं। बेअदबी प्रकरणों में निर्णायक कार्रवाई न होना और युवा पंथक मतदाताओं से भावनात्मक दूरी ने उसकी विश्वसनीयता कमजोर की है। ऐसे में जो पंथक वोटर कभी अकाली दल के साथ खड़ा होता था, अब विकल्प तलाश रहा है। सियासी जानकार भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि अगर पंथक वोटर का केवल 10-15 फीसदी हिस्सा भी अकाली दल से खिसकता है, तो इसका सीधा असर 15–20 विधानसभा सीटों पर पड़ सकता है। माझा क्षेत्र के अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, आनंदपुर साहिब, फतेहगढ़ साहिब, मोगा, बठिंडा और बरनाला में अकाली दल की पारंपरिक पकड़ कमजोर होने लगी है जबकि आप ने पंथक वोटरों पर सेंधमारी कर ली है। अकाली दल की ऐतिहासिक भूमिका से इन्कार नहीं किया जा सकता, लेकिन अब उसका पंथक एकाधिकार कमजोर हुआ है। आम आदमी पार्टी ने प्रशासनिक और नीतिगत कदमों के जरिए पंथक राजनीति में नए समीकरण खड़े किए हैं। पंजाब की पंथक राजनीति अब केवल विरासत से नहीं, बल्कि प्रदर्शन और विश्वसनीयता से तय होगी। यही अकाली दल की सबसे बड़ी परीक्षा है और आम आदमी पार्टी के लिए नया राजनीतिक अवसर। इस वर्ष को चुनावी साल के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में किसी भी तरह के पंथक मामले को सियासत से जोड़ कर देखा जाना स्वाभाविक है।

Punjab News: मनरेगा में बदलाव के खिलाफ PM को AAP भेजेगी 10 लाख मजदूरों की चिट्ठी

चंडीगढ़. पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) ने मनरेगा कानून में संशोधन के​ खिलाफ अभिया शुरू किया है. पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि एक बार फिर AAP ने खुद को गरीबों और मजदूरों की सच्ची हितैषी साबित किया है. हमने राज्य के 10 लाख से अधिक मनरेगा मजदूर परिवारों की पीड़ा और मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है. केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G-RAM G) अधिनियम से बदल दिया है. उन्होंने कहा, 'पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मंगलवार को आम आदमी पार्टी के विधायक मनरेगा मजदूरों द्वारा लिखे गए लाखों पत्रों के साथ सदन में पहुंचे. इन पत्रों में उन मेहनतकश परिवारों का दर्द और संघर्ष दर्ज है, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं. इस दौरान मनरेगा मजदूर भी विधानसभा में मौजूद रहे, जिससे सदन में गरीबों की आवाज और मजबूत हुई.' आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने इन पत्रों को केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इन्हें सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का फैसला किया है. सरकार का उद्देश्य केंद्र को जमीनी हकीकत से अवगत कराना और मनरेगा मजदूरों की समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित कराना है. पंजाब के मनरेगा मजदूर लंबे समय से कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं. मजदूरी के भुगतान में देरी सबसे बड़ी परेशानी है, जिससे गरीब परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ता है. उन्होंने कहा, 'कई इलाकों में मजदूरों को समय पर काम नहीं मिल पाता, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है. केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा फंड समय पर जारी न किए जाने के कारण योजना का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है. आम आदमी पार्टी फाइलों में दबकर रह जाने वाली गरीबों की आवाज को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है. यह पत्र अभियान केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की एक ठोस कोशिश है, ताकि मनरेगा फंड समय पर जारी हों और मजदूरों को उनका पूरा हक मिल सके.' आम आदमी पार्टी ने दोहराया है कि वह हमेशा गरीबों और मजदूरों के साथ खड़ी रही है और आगे भी उनके अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ती रहेगी.

AAP वर्करों पर फायरिंग का मामला, लुधियाना में 18 कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज

लुधियाना लुधियाना के बचितर नगर इलाके में ब्लाक समिति चुनाव में हुई जीत का जश्न मना रहे आप वर्करों पर कांग्रेसियों द्वारा चलाई गई गोलियों के मामले में कमिश्नरेट पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में महिला कांग्रेसी पंच सहित पूर्व सरपंच को भी पुलिस ने नामजद किया है। पुलिस ने इस गोलीकांड में अज्ञात सहित 18 के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ साथ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।  पुलिस ने यह मामले बचित नगर के रहने वाले प्रवीण कुमार की शिकायत पर पूर्व सरपंच जसबीर सिंह, अजय वीर सिंह, उदयवीर सिंह, निंदा सरपंच, तजिंदर सिंह उर्फ लाडी, पूजा पंच और हरपाल सिंह बब्बू के साथ साथ अज्ञात पर दर्ज किए हैं।  सूत्रों की माने तो पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, लेकिन अभी खुलासा नहीं किया है कि किन तीन लोगों को काबू किया गया है। बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापामारी करने में जुटी है। उधर, गोली लगने से घायल हुए लोगों को देर रात सिविल अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कुछ अब भी अस्पताल में दाखिल है।  प्रवीण कुमार द्वारा पुलिस के पास दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक जीत के बाद पार्टी वर्कर धन्यवाद रैली निकाल रहे थे। इसी दौरान आरोपियों ने अपने एरिया में रैली नहीं आने दी। इसे लेकर बहसबाजी शुरू हो गई। जिसके बाद आरोपियों ने मारपीट की और सीधी गोलियां चलाई। इस गोलीकांड में पांच लोग घायल हो गए। जिन्हें तुरत इलाज के लिए अस्पताल दाखिल कराया गया। जबकि एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसमें आप वर्कर कांग्रेसियों को धमका भी रहे है और ललकारें मार कर चेतावनी दे रहे है। दोनों वर्करों के हाथ में तेजधार हथियार पकड़े हुए है। जिसके बाद दोनों पक्षों की तरफ से मारपीट हुई और पत्थरबाजी शुरु हो गई। इस दौरान महिला अपने साथियों को रोक रही है और पूर्व सरपंच जसबीर सिंह ने सीधी गोलियां चलानी शुरु कर दी। जो पांच लोगों की टांगों पर जा लगी। जिससे सभी घायल हो गए।  गोलीकांड के बाद इलाके में दहशत का माहौल बचितर नगर इलाके में हुए गोलीकांड के बाद दहशत का माहौल बना हुआ है। देर रात को भी एरिया में पुलिस का सख्त पहरा रहा और पुलिस की टीमें गश्त करती रही। शुक्रवार सुबह भी पुलिस ने इलाके में गश्त की और टीमें अलग अलग एंगलों से जांच करने में जुटी रही। पुलिस ने इलाके के कुछ लोगों से भी पूछताछ की है और उनके बयान नोट किए है। बाकी पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कांग्रेस नेता को AAP नेता चैलेंज देते वीडियो में दिखे AAP ने झड़प के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, इस झड़प और फायरिंग का वीडियो सामने आया है। जिसमें एक घर के बाहर गुट के साथ कांग्रेस नेता को AAP के वर्कर चैलेंज देते हुए नजर आ रहे हैं। इसके बाद उनमें बहस हुई और पहले पथराव और बाद में फायरिंग हुई। इस घटना से गुस्साए AAP के वर्करों ने लुधियाना-मलेरकोटला रोड पर मराडो पुलिस चौकी के पास बीती रात जाम लगा दिया था। AAP से ब्लॉक समिति चुनाव जीते सुखमीत सिंह खन्ना ने कहा था कि मैंने जसदेव नगर से चुनाव जीता। कांग्रेस के गुंडों को यह बात हजम नहीं हुई। इस सीट के लिए राजा वड़िंग उसका परिवार, कुलदीप वैद, उसका परिवार और बैंस ब्रदर्स, सभी ने जोर लगाया, फिर भी वह हार गए। अब सीधी गोलियां चला रहे। हिंसक झड़प के वीडियो में क्या दिख रहा… 1.57 मिनट के वीडियो में दिख रहा है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के वर्कर एक दूसरे को ललकार रहे हैं। आम आदमी पार्टी के वर्करों में सबसे आगे हाथ में तलवार लिए निहंग सिंह के बाणे में एक व्यक्ति है। लगातार दोनों गुट एक-दूसरे को धमकियां देते हुए नजर आ रहे है। दोनों गुटों के लोगों के हाथों में ईंट-पत्थर और डंडे नजर आ रहे है। दोनों गुट एक दूसरे को गालियां देने लगे। जब AAP के समर्थक करीब पहुंचे तो सबसे पहले ईंटें कांग्रेस की वर्करों की तरफ से चलाई गई। जिसके बाद आम आदमी पार्टी के वर्करों ने भी ईंटें बरसाई। आप वर्करों ने कांग्रसियों को ईंटें मार कर खदेड़ा। तभी अचानक से गोलियां चलने की आवाज आने लगी। क्रीम रंग की जैकेट पहने व्यक्ति ने आम आदमी पार्टी के वर्करों पर सीधे गोलियां चलाई। फायरिंग कर रहे व्यक्ति की वीडियोग्राफी आप वर्करों ने की। गोलीबारी में अचानक एक गोली बुजुर्ग गुरमुख सिंह के लगी जो जमीन पर गिर गया। जो गोली चला रहा, उसे कांग्रेस नेता जसबीर सिंह बताया जा रहा है। गोली बुजुर्ग को लगने के बाद एक महिला उसे खींचते हुए कहीं ले जाती नजर आई। इस वीडियो में 3 से 4 बार फायरिंग की आवाज सुनी गई।

जिला परिषद और पंचायत समिति में AAP की बड़ी जीत, अकाली दल ने पाया संजीवनी

जालंधर  पंजाब के पंचायत समिति व जिला परिषद चुनाव में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) ने बड़ी जीत दर्ज की है। 50 प्रतिशत सीटें जीतकर आप चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनी है। साथ ही शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को भी चुनाव से संजीवनी मिली है।   आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में आप की बम्पर जीत बताती है कि पंजाब के लोगों को आप सरकार के काम कितने पसंद आ रहे हैं। ये जनता के भरोसे की जीत है। कांग्रेस ने आप को टक्कर दी है जबकि अकाली दल ने भी पिछले कुछ चुनावों के मुकाबले इस बार अच्छा प्रदर्शन किया है। भाजपा के हाथ इस चुनाव में भी निराशा लगी है। चुनाव में सभी दलों के दिग्गजों को भी अपने हलकों में सीटें गंवानी पड़ी है। प्रदेश की 2838 पंचायत समिति और 347 जिला परिषद की जोन के लिए बुधवार को 154 मतदान केंद्रों पर मतगणना शुरू हुई। नतीजों में बहुमत के साथ ही आप ने जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया। पंचायत समिति में आप ने 1316 व जिला परिषद में 145 सीटों पर जीत कर ली है। दिग्गजों के हलकों में हारने के बावजूद सत्तापक्ष का दबदबा जारी है। दूसरे नंबर पर कांग्रेस रही, जिसने पंचायत समिति में 490 और जिला परिषद में 30 सीटों पर जीत दर्ज की है। अकाली दल ने पंचायत समिति में 290 व जिला परिषद में 26 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं भाजपा ने पंचायत समिति में 56 सीटें जीती पर जिला परिषद में उसका खाता नहीं खुला। वहीं आजाद उम्मीदवारों ने पंचायत समिति में 122 व जिला परिषद में 7 सीटें जीती। विधायक भराज व स्पीकर संधवां के गांव में आप हारी सीएम भगवंत मान के पैतृक गांव सतौज में ब्लॉक समिति चुनाव के धरमगढ़ जोन से आप प्रत्याशी हरविंदर पाल ऋषि ने जीत दर्ज की है। वहीं संगरूर से आप विधायक नरिंदर कौर भराज के जद्दी गांव भराज से आप के जिला परिषद प्रत्याशी हार गए जबकि पूर्व वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा के जद्दी गांव ऊभावाल से अकाली दल पुनर्गठित समर्थित आजाद प्रत्याशी शिंदरपाल सिंह चुनाव जीते हैं। स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के गांव आप प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा। पंचायत समिति के 8098 और जिला परिषद के लिए 1249 उम्मीदवार मैदान में थे। मतगणना के दौरान विपक्ष ने कई जगहों पर आम आदमी पार्टी पर धक्केशाही का आरोप लगाया है। अकाली दल ने आरोप लगाया कि शिअद के विजेता उम्मीदवारों को साजिश के तहत हराया गया है वहीं आप ने भी कुछ सीटों पर हार के बाद दोबारा मतगणना की मांग की। सरकार की नीतियों पर भरोसा: अमन अरोड़ा जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों में पार्टी को बड़ा जनादेश देकर पंजाब के लोगों ने आप सरकार के शासन और नीतियों में विश्वास जताया है। जिस तरह के नतीजे आ रहे हैं, उससे आम आदमी पार्टी के पक्ष में एकतरफा जनादेश साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। पंचायत समिति के 867 जोन में पार्टी आगे हैं। पार्टी नेताओं, विधायकों, उम्मीदवारों और खासतौर पर समर्पित कार्यकर्ता को बधाई। यह जीत जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत का नतीजा है। -अमन अरोड़ा, प्रधान, आप पंजाब। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग: वड़िंग आम आदमी पार्टी ने चुनाव को प्रभावित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया गया। इस बीच कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की मेहनत से जो नतीजे आएं हैं उससे मैं संतुष्ट हूं। जिस तरह से चुनाव में धक्केशाही हुई है उसे ध्यान में रखते हुए चुनाव के नतीजों से कोई ज्यादा हैरानी नहीं हुई है। सत्तापक्ष की तरफ से विपक्ष के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिया गया। उम्मीदवारों को धमकाया गया लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस ने चुनाव लड़ा और काफी सीटों पर जीत दर्ज की। असल मुकाबला विधानसभा चुनाव में होगा जिसमें पंजाब के लोग आप को सत्ता से बाहर करेंगे। -अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रधान, पंजाब कांग्रेस। 2027 में लोग जवाब देंगे: प्रितपाल सरकार ने चुनाव में धक्का किया है जिसका वर्ष 2027 में लोग जवाब देंगे। उम्मीदवारों के हस्ताक्षर तक नहीं करवाए गए और नतीजे जारी कर दिए गए। नतीजों को बदला गया है और इससे अधिक धक्केशाही क्या हो सकती है। आप को भाजपा से डर लगने लगा है जिस कारण ही चुनाव में धक्का किया गया। -प्रितपाल सिंह बलियावाल, प्रवक्ता, पंजाब भाजपा।  

बिहार चुनाव में वोटिंग बढ़ी, AAP ने भाजपा पर टिकट बांटकर वोटिंग प्रभावित करने का लगाया आरोप

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्डतोड़ वोटिंग को राजनीतिक दल अलग-अलग चश्मे से देख रहे हैं। कोई इसे सरकार के पक्ष में जनता का समर्थन बता रहा है तो किसी को बदलाव की बयार दिख रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने इसमें एक नया एंगल जोड़ दिया है। पार्टी ने इसे 'वोट चोरी' का दूसरा हिस्सा बताते हुए कहा है कि भाजपा ने अपने वोटर्स को टिकट देकर दूसरे शहरों से बिहार भेजा, इसी वजह से 75 साल में सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक यूट्यूब वीडियो के सहारे दावा किया कि लाखों वोटर्स को भाजपा ने अलग-अलग शहरों से बिहार भेजा था। उन्होंने जिस वीडियो को शेयर किया है उसमें कुछ लोग गले में भाजपा का पटका लटकाए दिख रहे हैं। वह कहते हैं कि वोट देने के लिए बिहार जा रहे हैं और टिकट की व्यवस्था भाजपा की ओर से की गई है। बताया गया कि हरियाणा के करनाल से भाजपा ने वोटर्स को बिहार भेजा था। भारद्वाज ने वीडियो के साथ लिखा, 'भाजपा के करनाल के जिला अध्यक्ष स्टेशन पर मौजूद हैं। भाजपा ने संगठित तरीके से वोटरों को चिन्हित किया। SIR में भाजपा के द्वारा चिन्हित वोटरों की वोट नहीं काटी गई। फिर लाखों तादाद में वोटरों को अलग अलग शहरों से चुनाव से पहले बिहार भेजा गया। ट्रेन की टिकट आदि सारे इंतजाम भाजपा ने किए। इस तरीके से बिहार की वोटिंग 75 साल के सबसे ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची।' बिहार में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान बिहार विधानसभा के लिए पहले चरण के मतदान में गुरुवार को 3.75 करोड़ से अधिक मतदाताओं में से 64.66 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जो राज्य में 'अब तक का सबसे ज्यादा' मतदान प्रतिशत है। इसमें अभी और इजाफे की संभावना है। पहले चरण में 18 जिलों के कुल 121 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ, जहां मतदाताओं की कुल संख्या 3.75 करोड़ से अधिक थी। बिहार में इससे पहले सबसे ज्यादा 62.57 प्रतिशत मतदान 2000 में दर्ज किया गया था। कोविड-19 महामारी के साये में हुए 2020 के विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत 57.29 रहा था।

कमजोर होती विपक्षी दीवार: AAP के बाहर जाने से INDIA ब्लॉक को कितना झटका?

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) ने इंडिया गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है, जिससे विपक्षी गठबंधन को एक बड़ा झटका लगा है। यह घोषणा ठीक उस वक्त हुई जब गठबंधन के घटक दल 21 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र के लिए अपनी संयुक्त रणनीति तय करने के लिए वर्चुअल बैठक करने वाले थे। क्या AAP का यह 'बाय-बाय' विपक्ष की एकता को झटका देगा। आइए समझते हैं। 'गठबंधन एकजुट, लेकिन AAP की राह अलग' कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने पुष्टि की है कि इंडिया गठबंधन की वर्चुअल बैठक में AAP को छोड़कर सभी दल शामिल होंगे। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा, 'शनिवार को कई कार्यक्रमों के कारण लोग दिल्ली नहीं आ पाएंगे, इसलिए हम संसद सत्र से पहले ऑनलाइन बैठक करेंगे। इसके बाद दिल्ली में मुलाकात होगी।' उन्होंने दावा किया कि गठबंधन एकजुट है, लेकिन AAP के इस कदम ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। TMC का साथ, बिहार और पहलगाम पर फोकस तृणमूल कांग्रेस (TMC), जिसके कांग्रेस के साथ पहले कुछ तनातनी रही है, ने कहा कि उनके राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी इस बैठक में हिस्सा लेंगे। बैठक में बिहार में मतदाता सूची के विशेष संशोधन, पहलगाम हमले पर चर्चा की मांग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान शांति समझौते के दावों जैसे मुद्दों पर मंथन होगा। 'AAP और कांग्रेस के बीच पहले से तनाव' CPI(M) के महासचिव एमए बेबी ने कहा, 'दिल्ली चुनावों के दौरान कांग्रेस और AAP के बीच तनाव शुरू हो गया था। CPI(M) का मानना है कि इंडिया गठबंधन को मजबूत और विस्तारित करना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि दोनों दल अपने मतभेद सुलझा लेंगे।' लेकिन AAP का यह कदम 2024 में नीतीश कुमार के गठबंधन छोड़ने के बाद सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। बिहार में AAP का दांव AAP ने ऐलान किया है कि वह बिहार विधानसभा चुनावों में अकेले उतरेगी। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, 'AAP का बाहर निकलना गठबंधन के लिए दो तरह से नुकसानदायक है। पहला, संसद, खासकर राज्यसभा में गठबंधन कमजोर होगा। दूसरा, AAP आगामी चुनावों में गैर-बीजेपी दलों की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के लिए उम्मीदवार उतार सकती है।' 2026 के चुनावों पर नजर केरल, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में 2026 में चुनाव होने हैं। हालांकि दक्षिण भारत में AAP का प्रभाव कम है, लेकिन एक अन्य कांग्रेस नेता ने कहा कि असम और उन राज्यों में जहां कांग्रेस का बीजेपी से सीधा मुकाबला है, AAP उम्मीदवार उतार सकती है। 'AAP का जाना गठबंधन के लिए फायदेमंद' पंजाब के विपक्षी नेता प्रताप सिंह बाजवा ने इसे सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा, "AAP का बाहर जाना इंडिया गठबंधन को मजबूत करेगा, क्योंकि इससे अस्पष्टता खत्म होगी।" क्या AAP का यह फैसला गठबंधन की एकता को और कमजोर करेगा, या यह गैर-बीजेपी दलों के लिए नई रणनीति बनाने का मौका देगा? यह देखना दिलचस्प होगा।  

आम आदमी पार्टी की नई राह, INDIA गठबंधन से किया किनारा, AAP ने छोड़ा गठबंधन

 नई दिल्ली विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA ब्लॉक की होने जा रही अगली महत्वपूर्ण बैठक से आम आदमी पार्टी (AAP) ने खुद को अलग कर लिया है. पार्टी की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि वह इस बैठक में हिस्सा नहीं लेगी. पार्टी ने खुद को इंडिया गठबंधन से अलग कर दिया है. आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी इंडिया ब्लॉक से बाहर हो चुकी है. क्या बोले संजय सिंह? आज तक से बातचीत में उन्होंने कहा, "इंडिया ब्लॉक लोकसभा चुनाव के लिए था. लोकसभा चुनाव के बाद हमने हरियाणा और दिल्ली विधानसभा चुनाव अकेले लड़े. इसके अलावा पंजाब और गुजरात में उपचुनाव भी हमने अकेले लड़े. आप अब इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं है. हमारे पार्टी और अरविंद केजरीवाल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हम इंडिया ब्लॉक से बाहर हैं." संसद में रणनीति के बारे में उन्होंने कहा, "संसदीय मुद्दों पर हम टीएमसी, डीएमके जैसी विपक्षी पार्टियों का समर्थन लेते हैं और वे भी हमारा समर्थन लेते हैं." बीजेपी पर कसा तंज आप नेताओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच पर संजय सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, "बीजेपी कायरों की पार्टी है. वे केवल एजेंसियों का इस्तेमाल हमारे खिलाफ कर सकते हैं. हम झुकने वाले नहीं हैं." वहीं. रॉबर्ट वाड्रा के मुद्दे पर संजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा, "पिछले 10 सालों से बीजेपी 'जीजाजी' चिल्ला रही है. अगर इतने सालों में वे कोई नतीजे पर नहीं पहुंचे, तो यह उनकी नाकामी है."

AAP बिहार में लड़ेगी चुनाव, केजरीवाल बोले -India ब्लॉक सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए था, अब हमारा किसी से कोई गठबंधन नहीं

पटना  आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने  अहमदाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और गुजरात में पार्टी के विस्तार और कांग्रेस-बीजेपी दोनों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने साफ किया कि हमारा कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं है और आगामी विधानसभा चुनावों में 'AAP' अकेले दम पर मैदान में उतरेगी. केजरीवाल ने ऐलान किया कि बिहार में आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा, India ब्लॉक सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए था. अब हमारा किसी से कोई गठबंधन नहीं है. विसावदर उपचुनाव में हमने कांग्रेस से अलग लड़कर तीन गुना ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की है. यह जनता का सीधा संदेश है कि अब विकल्प आम आदमी पार्टी है. केजरीवाल का कहना था कि हमारा कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं है, इसलिए विसावदर में हम अलग लड़े. गुजरात में चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे. दिल्ली में हार पर कहा, ऊपर-नीचे होता रहेगा. पंजाब में हमारी सरकार दोबारा बनेगी. केजरीवाल ने कहा, पिछले 30 साल से गुजरात में भाजपा की सरकार है. इस राज्य को बर्बाद करने में बीजेपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. सूरत में जो बाढ़ आई, वो मानव सृजित बाढ़ है, बीजेपी के भ्रष्टाचार का फल है. युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है. किसानों को यूरिया नहीं मिलता है. सभी वर्ग भाजपा से नाराज हैं. फिर भी भाजपा लगातार जीत रही है क्योंकि लोगों के पास विकल्प नहीं था. सब लोग जानते हैं कि कांग्रेस उनकी जेब में है. कांग्रेस पर लोगों का भरोसा नहीं है. केजरीवाल ने आगे कहा, पहले तो कांग्रेस का उम्मीदवार जीतेगा नहीं और जीता तो जीतने के बाद भाजपा में चला जाएगा. लोगों ने मन बना लिया है कि भाजपा के जाने का टाइम आ गया है. आम आदमी पार्टी आज से गुजरात जोड़ो अभियान शुरू कर रही है. चुनाव में 2.5 साल बाकी हैं. हम लोगों के बीच जा रहे हैं. गुजरात के हर घर तक 5-5 बार पहुंचना है. जो युवा भ्रष्टाचार मुक्त विकास देखना चाहते हैं, वो AAP के साथ जुड़ें. गुजरात को तरक्की के लिए अपनी अपनी पार्टी छोड़कर युवा AAP में आएं. हमारा कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं है, इसलिए विसावदर में हम अलग लड़े. India गठबंधन लोकसभा चुनाव के लिए ही था. गुजरात उपचुनाव का दिया उदाहरण उन्होंने अपने बयान में गुजरात उपचुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन का अनुभव अच्छा नहीं रहा। “गुजरात उपचुनाव के समय तय हुआ था कि कांग्रेस और AAP आपसी सहमति से सीटों का बंटवारा करेंगे, लेकिन आखिरी समय में कांग्रेस ने उस सीट पर भी उम्मीदवार खड़ा कर दिया, जहां से AAP पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी थी। यह राजनीतिक विश्वासघात था। उन्होंने बताया कि इसी कड़वे अनुभव के बाद पार्टी ने यह फैसला लिया कि भविष्य में वह किसी भी राज्य में गठबंधन की राजनीति से दूर रहेगी और अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। बिहार में भी आम आदमी पार्टी अब पूरी तैयारी के साथ अकेले मैदान में उतरेगी। सौरभ भारद्वाज ने कहा- बिहार की जनता हमें स्वीकार करेगी सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पार्टी की नीति साफ है- जनता से जुड़े मुद्दे, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली-पानी और रोजगार जैसे बुनियादी सवालों को चुनावी एजेंडे में शामिल करना। उन्होंने भरोसा जताया कि बिहार की जनता आम आदमी पार्टी को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्वीकार करेगी।