samacharsecretary.com

झारखंड राज्यसभा चुनाव में सियासी गणित और क्रॉस वोटिंग की अटकलें तेज

 रांची झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया. राज्य के सभी 81 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है. अब सबकी नजरें मतगणना और नतीजों पर टिकी हैं. शाम चार बजे से मतों की गिनती शुरू होगी और करीब सात बजे तक तस्वीर साफ हो जाएगी. अगले चार घंटे झारखंड की राजनीति के लिए सबसे बेचैन करने वाले साबित हो सकते हैं, क्योंकि दावे बहुत हैं और गणित उससे भी ज्यादा दिलचस्प है. तीन उम्मीदवारों के बीच है मुकाबला राज्यसभा चुनाव में कुल तीन उम्मीदवार मैदान में हैं. झामुमो ने बैजनाथ राम को प्रत्याशी बनाया है, कांग्रेस की ओर से प्रणव झा चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नथवानी मैदान में हैं. दो सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में मुकाबला संख्या बल, रणनीति और संभावित क्रॉस वोटिंग के इर्द-गिर्द घूम रहा है. यही वजह है कि मतदान समाप्त होने के बावजूद राजनीतिक हलचल थमी नहीं है. रिजॉर्ट पॉलिटिक्स भी रही चर्चा में इस बार राज्यसभा चुनाव के दौरान झारखंड में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स भी चर्चा का विषय बनी रही. मंगलवार से कांग्रेस और एनडीए के कई विधायकों को रांची के विभिन्न होटलों में ठहराया गया था. इसका मकसद विधायकों को एकजुट रखना और किसी भी तरह की राजनीतिक उठापटक से दूर रखना बताया गया. हालांकि झामुमो ने अपने विधायकों को किसी होटल या रिसॉर्ट में नहीं रखा. पार्टी नेतृत्व का कहना रहा कि उन्हें अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है. हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका पर भी नजर राज्यसभा चुनाव के दौरान हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म रखा. कई नेताओं ने साफ कहा कि यदि इंडिया गठबंधन के निर्धारित 56 वोटों से अधिक या एनडीए के 24 वोटों से काफी ज्यादा मत सामने आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर सवाल उठेंगे. यही कारण है कि मतगणना शुरू होने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा में कोई “खेला” होता है या फिर चुनावी मैदान में कोई “घोड़ा बिदक” जाता है. इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन 81 सदस्यीय विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक शामिल हैं. इसी संख्या बल के आधार पर गठबंधन ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा को जीत दिलाने का दावा इंडिया गठबंधन लगातार कर रहा है. एनडीए के पास 24 वोट, नथवानी पर दांव दूसरी तरफ एनडीए के पास कुल 24 वोट हैं. भाजपा के 21 विधायक हैं, जबकि आजसू, जदयू और लोजपा के एक-एक विधायक हैं. इसी समर्थन के आधार पर एनडीए ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी का समर्थन किया है. हालांकि मौजूदा संख्या के आधार पर नथवानी की राह आसान नहीं मानी जा रही है. ऐसे में उनकी जीत की संभावना काफी हद तक अतिरिक्त समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर मानी जा रही है. 28 वोट का जादुई आंकड़ा करेगा फैसला राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 28 वोट का जादुई आंकड़ा पार करना जरूरी है. बैजनाथ राम की स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और परिमल नथवानी के बीच असली मुकाबला माना जा रहा है. अब शाम सात बजे तक झारखंड की राजनीति की धड़कनें तेज रहेंगी. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन राज्यसभा जाएगा, बल्कि यह भी है कि क्या संख्या का गणित जीत जाएगा या फिर राजनीति का रसायन एक बार फिर सबको चौंका देगा. आखिर लोकतंत्र में बैलेट बॉक्स खुलने तक हर दावा सिर्फ दावा ही होता है, नतीजा नहीं.

निकाय चुनाव में मोहाली का बढ़ा उत्साह, शुरुआती घंटों में 13.18 फीसदी वोटिंग

मोहाली. जिले में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदान सुबह से शांतिपूर्ण माहौल में जारी है। सुबह 8 बजे मतदान शुरू होने के बाद पहले दो घंटों में मोहाली नगर निगम के वार्ड 1 से 25 तक 13.18 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। वहीं वार्ड नंबर 26 से 50 तक वोटिंग प्रतिशत 13.9 रहा। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की कतारें देखने को मिलीं और युवाओं के साथ साथ बुजुर्ग मतदाताओं ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। जिले के अलग अलग नगर परिषद और नगर निगम क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में अंतर देखने को मिला। सुबह 10 बजे तक बनूड़ में सबसे ज्यादा 19.4 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जबकि जीरकपुर में सबसे कम 9 फीसदी वोटिंग हुई। कुराली में 16.30 फीसदी और डेराबस्सी में 13.9 फीसदी मतदान रिकार्ड किया गया। चुनाव अधिकारियों के अनुसार मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है और सभी बूथों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बता दें कि इस बार चुनाव बैलट पेपर के माध्यम से करवाए जा रहे हैं। मोहाली नगर निकाय चुनाव मतदान प्रतिशत (वार्ड अनुसार) नगर निकाय का नाम (वार्ड)     मतदान प्रतिशत (%) नगर निगम मोहाली (वार्ड 1-25)     13.18 % नगर निगम मोहाली (वार्ड 26-50)     13.9 % नगर परिषद कुराली     16.30 % नगर परिषद डेराबस्सी     13.9 % नगर परिषद जीरकपुर     9 % नगर परिषद बनूड़     19.4 % नगर परिषद नयागांव     16 %

सुरक्षा के साए में बंगाल री-पोलिंग, 15 बूथों पर रिकॉर्ड 86.90% मतदान

कोलकाता बंगाल के डायमंड हार्बर व मगराहट पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के 15 बूथों पर शनिवार को कड़ी सुरक्षा में पुनर्मतदान हुआ। डायमंड हार्बर के चार (बूथ नंबर 117, 179, 194 व 243) और मगराहाट पश्चिम के 11 (बूथ नंबर 46, 126, 127, 128, 142, 214, 215, 216, 230, 231 व 232) बूथों पर फिर से वोट पड़े। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शाम पांच बजे तक इन 15 बूथों पर कुल 86.90 प्रतिशत मतदान हुआ। मगराहाट पश्चिम में 86.11 प्रतिशत व डायमंड हार्बर में 87.60 प्रतिशत वोट पड़े। चूंकि मतदान जारी था, इसलिए वोट प्रतिशत बढ़ स्वाभाविक है। इन बूथों पर गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद चुनाव आयोग ने वहां नए सिरे से मतदान कराने का निर्णय लिया था। सुबह मतदान शुरू होने के साथ ही इन बूथों के सामने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। फलता में फिर से कराया जा सकता है मतदान वहीं फलता विधानसभा क्षेत्र में भी फिर से मतदान कराने का आयोग निर्णय ले सकता है। इसे लेकर जल्द उच्च स्तरीय बैठक की जाएगी। सीईओ सूत्रों के अनुसार पुनर्मतदान का निर्णय लिए जाने पर आगामी चार मई को उक्त विस क्षेत्र के वोटों की गिनती स्थगित की जा सकती है। मालूम हो कि इस विधानसभा क्षेत्र में भी बूथों में गड़बड़ी की आयोग को कई शिकायतें मिली हैं। फलता में फिर तनाव, तृणमूल पर भाजपा समर्थकों को धमकाने का आरोप इस बीच शनिवार को फलता के कासिमनगर में फिर तनाव फैल गया। तृणमूल पर भाजपा समर्थकों को मारने-पीटने व धमकाने का आरोप लगा है। इसका प्रतिवाद करते हुए भाजपा समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध कर विरोध-प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ तृणमूल ने इस आरोप को सिरे से नकारा है। आयोग ने इसे लेकर जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मालूम हो कि फलता में उत्तर प्रदेश के सख्त मिजाज आइपीएस अधिकारी व बंगाल में चुनाव आयोग के पुलिस पर्यवेक्षक अजयपाल शर्मा व यहां से तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी जहांगीर खान के बीच गत मंगलवार को वाकयुद्ध देखने को मिला था। अजयपाल शर्मा ने जहांगीर को डराने-धमकाने से बाज आने की चेतावनी दी थी, इसपर जहांगीर ने पलटवार करते हुए कहा था कि अगर अजयपाल शर्मा 'सिंघम' हैं तो वे भी 'पुष्पा' हैं और किसी के दबाव में नहीं झुकेंगे।

राज्यसभा चुनाव में संजय की जीत, कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग से BJP की रणनीति हुई नाकाम, पूर्व CM के लिए छोड़ी थी सीट

चंडीगढ़  राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्य संजय भाटिया कॉलेज समय से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। इसके बाद भाजपा में सक्रिय रूप से काम किया। वे 2019 के लोकसभा चुनाव में करनाल से जीतकर लोकसभा में पहुंचे थे। उनकी यह देश की दूसरी बड़ी जीत थी। वे 2024 में लोकसभा से हटकर संगठन में सक्रिय हो गए थे। केंद्रीय नेतृत्व ने उनको बिहार और अन्य प्रदेशों के चुनाव में आगे रखा। वे जीटी बेल्ट के पंजाबी चेहरों में सबसे ऊपर हैं। प्रदेश के साथ केंद्रीय संगठन में भी उनकी मजबूत पकड़ है।  संजय भाटिया मूल रूप से पानीपत उरलाना गांव से हैं। वे गांव से कई वर्ष पहले मॉडल टाउन में आकर बस गए थे। उनका जन्म 29 जुलाई 1967 पानीपत में हुआ। वे बीकॉम की पढ़ाई के बाद सामाजिक कार्यों में आगे रहे। उनके पिता जय दयाल भाटिया और मां चंद्र कांता भाटिया हैं। उनकी पत्नी अंजू भाटिया गृहिणी हैं। बड़े बेटे चांद भाटिया सामाजिक कार्यों में आगे रहते हैं। संजय भाटिया कॉलेज समय से राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने आईबी पीजी कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई की। वे एबीवीपी के 1987 में मंडल सचिव और 1989 में जिला महासचिव बने। उनको 1998 में भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश महासचिव बनाया गया। उन्होंने नगर परिषद में पार्षद का चुनाव भी लड़ा था। हरियाणा खादी और ग्राम उद्योग बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे हैं। वे राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पार्टी के कार्यों और संसदीय गतिविधियों में सक्रिय हैं। राजनीति में लगातार सक्रिय रहे संजय भाटिया ने 2019 में लोकसभा चुनाव में करनाल लोकसभा क्षेत्र लड़ा था। उन्होंने कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को 6,89,668 वोटों से हराया था। उनको 9,11,594 वोट मिले थे। यह उनकी देश की दूसरी बड़ी जीत थी। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मनोहर लाल को करनाल लोकसभा का टिकट दिया था। वे इसके बाद भाजपा के केंद्रीय संगठन में सक्रिय हो गए थे। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के लिए भी उनका नाम चर्चाओं में आया था। जीटी बेल्ट का बड़ा पंजाबी चेहरा संजय भाटिया भाजपा में जीटी रोड बेल्ट के बड़े पंजाबी चेहरे हैं। संजय भाटिया का 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट कट गया था। इसके बाद प्रदेशाध्यक्ष के लिए भी नाम चला था। हालांकि भाजपा ने किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया। इसके बाद इस वर्ग के लोगों में कहीं न कहीं पंजाबियों को पीछे धकेलने की बात मन में आती थी। इन सारी दुश्वारियों के बावजूद संजय भाटिया संगठन में केंद्रीय नेतृत्व के साथ मिलकर काम करते रहे। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी वह करीबी हैं। ऐसा माना जा रहा है कि संगठन उनको राज्यसभा में भेजकर पंजाबी बिरादरी के बीच अपनी पैठ को मजबूत करना चाह रहा है। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भी पंजाबी चेहरे के रूप में संजय भाटिया का उपयोग किया जा सकता है। भाटिया के विपक्षी नेताओं के साथ भी संबंध हैं। भाजपा ने इन सभी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाटिया को मैदान में उतारा। कांग्रेस में क्राॅस वोटिंग, भाजपा की रणनीति भी नाकाम हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में नतीजे भले ही साफ दिखे, लेकिन अंदर की कहानी बेहद रोमांचक रही। चुनाव के दौरान खेल कुछ ऐसा रचा गया कि आखिरी पलों तक सस्पेंस बना रहा। अंत में कांग्रेस के करमवीर बौद्ध और बीजेपी के संजय भाटिया जीत गए, मगर भाजपा दूसरी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को जीत के मुहाने पर लाकर चूक गई।  कांग्रेस को क्यों लगा झटका राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को भी काफी बड़ा झटका लगा है। चुनाव से पहले एकजुटता का दावा करने वाली कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है, जबकि चार वोट अमान्य पाए गए। कांग्रेस ने फिलहाल क्रॉस वोटिंग करने वाले नामों का खुलासा नहीं किया है। इतना जरूर कहा है कि उन्हें पता है कि किन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है उनके खिलाफ जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।  जीत के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बीजेपी पर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, बीजेपी ने वोट चोरी के हर हथकंडे अपनाए, लेकिन हमारे विधायक उनके झांसे में नहीं आए। यह वोट चोरी की हार है। हुड्डा ने यह भी आरोप लगाया कि रिटर्निंग अधिकारी ने पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया।  अब भाजपा के चार और कांग्रेस के पास एक सांसद इस चुनाव के बाद हरियाणा से राज्यसभा की पांच सीटों में से अब चार पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस है। भाजपा के तीन सांसद संजय भाटिया, रेखा शर्मा और सुभाष बराला है, जबकि कार्तिकेय शर्मा समर्थित हैं। वहीं, अब कांग्रेस के भी हरियाणा से एक सांसद कर्मवीर बौद्ध हो गए है। भजपा कैसे चूकी दूसरी सीट पर 1 इनेलो से तालमेल नहीं बना पाई भाजपा इनेलो के विधायकों को अपने पक्ष में लाने में असफल रही। अगर ये 2 वोट मिल जाते तो नतीजा अलग होता। 2. अपना एक वोट बचा नहीं सकी भाजपा का एक वोट रद्द होना सीधे तौर पर नुकसानदायक साबित हुआ। इतने करीबी मुकाबले में एक वोट भी भारी पड़ता है। 3. निर्दलीय उम्मीदवार के लिए पर्याप्त मैनेजमेंट नहीं सतीश नांदल को जिताने के लिए जरूरी अतिरिक्त वोटों की व्यवस्था नहीं हो सकी। 4. कांग्रेस के वोट तोड़े, लेकिन पूरी तरह नहीं हालांकि कांग्रेस के कुछ वोट टूटे, लेकिन बीजेपी उन्हें निर्णायक बढ़त में नहीं बदल पाई। 5. कानूनी रणनीति सफल नहीं हुई भरत सिंह बेनीवाल का वोट रद्द कराने की कोशिश की गई, लेकिन यह दांव नहीं चला। अगर यह वोट रद्द हो जाता तो परिणाम बदल सकता था। ऐसी जीती भाजपा-कांग्रेस  हरियाणा में कुल विधायक: 90 इनेलो के वोट (जो नहीं डाले गए) : 2 कुल वोट डाले गए : 88 सही (वैध) वोट: 83 गलत (रद्द) वोट: 5 4 कांग्रेस के, एक भाजपा का (मतलब 5 वोट खराब हो गए, जिनका कोई फायदा नहीं मिला।) जीत के लिए कितना चाहिए था? राज्यसभा चुनाव में हर वोट की कीमत 100 मानी जाती है। 83 वोट × 100 = 8300 अब इसे 3 से बांटते हैं (क्योंकि 2 … Read more

बंपर वोटिंग के बाद CM हेमंत सोरेन बोले—घाटशिला की जनता का दिल से धन्यवाद

घाटशिला  झारखंड की घाटशिला विधानसभा सीट पर बीते मंगलवार को हुए उपचुनाव में शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग संपन्न हुई। सुबह 7 बजे से मतदान की शुरुआत हुई और शाम 5 बजे तक मतदाता उत्साह के साथ अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचे। सीएम हेमंत ने घाटशिला के लोगों का धन्यवाद दिया है। सीएम हेमंत ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "घाटशिला उपचुनाव को लेकर हुए मतदान में सभी वर्गों – खासकर हमारी मईयां, भाइयों-बहनों, बड़े-बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर मतदान किया। आप सभी का लोकतंत्र के इस महापर्व में भागीदार बनने के लिए हार्दिक आभार और जोहार। आज इस अवसर पर झामुमो परिवार के जुझारू सिपाहियों को भी मैं हार्दिक धन्यवाद देता हूं। साथ ही उपचुनाव प्रक्रिया के शामिल सभी पदाधिकारियों और कर्मचारियों को भी बहुत-बहुत आभार और जोहार।" बता दें कि घाटशिला विधानसभा सीट पर कुल 73.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के औसत से अधिक है। इस उपचुनाव में कुल 2,55,823 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें महिलाओं की संख्या 1,30,921 और पुरुष मतदाता 1,24,899 रही। यानी इस बार महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान कर लोकतंत्र की मजबूती का संदेश दिया। इस उपचुनाव में 13 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनकी किस्मत अब EVM (Electronic Voting Machine) में कैद हो चुकी है। अब सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि घाटशिला की जनता ने किसे अपना जनप्रतिनिधि चुना है। मतगणना 14 नवंबर को होगी।  

दूसरे चरण की वोटिंग कल, आज थमेगा चुनावी शोर— इन विधानसभा सीटों पर शाम 4 बजे तक होगा मतदान

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के लिए आज दूसरे चरण का मतदान दो दिन बाद यानी 11 नवंबर को होगा। आज चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है। शाम पांच बजे के बाद चुनाव प्रचार थम जाएगा। दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। इसके लिए 45339 मतदान केंद्र बनाएं गए हैं। इनमें से 4109 बूथों को संवेदनशील बनाया गया है। इसमें 4003 अतिसंविदनशील बूथ घोषित हैं। यहां पर चार बजे तक मतदान होगा। इन विधानसभा में शाम चार बजे तक वोटिंग कटोरिया, बेलहर, चैनपुर, चेनारी, गोह, नवीनगर, कुटुंबा, औरंगाबाद, रफीगंज, गुरुआ, शेरघाटी, इमामगंज, बाराचट्टी के (36 बूथ), बोधगया (200 बूथ), रजौली, गोविंदपुर, सिकंदरा, जमुई, झाझा, चकाई विधानसभा में बनाए गए बूथों पर शाम चार बजे मतदान होगा। वहीं बोधगया में 106 बूथों पर शाम पांच बजे तक मतदान होगा। इन बूथों पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात रहने का निर्देश दिया गया है। जानिए, दूसरे चरण में कितने मतदाता दूसरे चरण के मतदान में 1302 प्रत्याशी चुनावी मैदान हैं। इनमें 1165 पुरुष उम्मीदवार, 136 महिला उम्मीदवार और एक थर्ड जेंड हैं। वहीं तीन करोड़ 70 लाख मतदाता दूसरे चरण में मतदान करेंगे। एक करोड़ 95 लाख पुरुष वोटर हैं। एक करोड़ 74 लाख महिला वोटर हैं। चार लाख चार हजार दिव्यांग वोटर हैं। 63373 सर्विस वोटर हैं। 943 थर्ड जेंडर हैं। 43 एनआरआई हैं। वहीं 18 से 19 साल के मतदाताओं की संख्या सात लाख 69 हजार 356 है। 

पहले चरण में 8% ज्यादा मतदान — बिहार में फिर बदल सकती है सत्ता की तस्वीर?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के 18 ज़िलों की 121 सीटों पर उतरे 1314 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. गुरुवार को पहले चरण में मतदाताओं का उत्साह ज़बरदस्त देखने को मिला. पहले फेज की 121 सीटों पर 64.69 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फीसदी मतदान ज्यादा हुआ है. बिहार की सियासत में इस बार के मतदान को अभूतपूर्व माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश के इतिहास में यह सर्वाधिक वोटिंग है. साल 2020 में पहले चरण में 56.1 फीसदी वोटिंग हुई, लेकिन उस समय पहले फेज में 71 सीटों पर चुनाव हुए थे जबकि इस बार 121 सीट पर चुनाव हुए हैं.  चुनाव आयोग के मुताबिक पहले फेज की 121 सीटों पर 64.69 फीसदी मतदान रहा जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर 56 फीसदी के करीब मतदान रहा। इस लिहाज़ से देखें तो वोटिंग पैटर्न कहता है कि पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फ़ीसदी वोटिंग ज़्यादा हुई है। इस बार चुनाव में जिस तरह से मतदान बढ़ा है, उससे सियासी दलों की धड़कनें बढ़ गई हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 18 ज़िलों की 121 सीटों पर वोटिंग हुई, जिसमें मुज़फ़्फ़रपुर और समस्तीपुर जिले में सबसे ज़्यादा मतदान रहा तो पटना में सबसे कम वोटिंग हुई है। मुजफ़्फरपुर में 70.96 फीसदी, समस्तीपुर में 70.63 फीसदी, मधेपुरा में 67.21 फीसदी, वैशाली में 67.37 प्रतिशत हुआ. सहरसा में 66.84 फीसदी, खगड़िया में 66.36 फीसदी, लखीसराय में 65.05 फीसदी, मुंगेर में 60.40 फीसदी, सीवान में 60.31 फ़ीसदी, नालंदा में 58.91 फीसदी और पटना जिले में 57.93 प्रतिशत वोटिंग हुई। इस तरह से बिहार के पहले चरण में 64.69 फीसदी कुल मतदान रहा. बिहार में साढ़े 8 फीसदी मतदान रहा 2020 में पहले फेज में 3.70 करोड़ कुल वोटर थे, जिसमें से 2.06 करोड़ ने वोट किया था. लेकिन अबकी बार पहले फेज में कुल 3.75 करोड़ वोटर हैं, जो पिछली बार से 5 लाख अधिक हैं. इस बार की पहले चरण में 64.69 फासदी वोटिंग हुई. अब सियासी दल इस बढ़े वोटिंग पैटर्न को अपने-अपने लिहाज से मुफीद बता रहे हैं. बिहार में इससे पहले 1951-52 से 2020 तक सबसे अधिक 2000 के विधानसभा चुनाव में 62.57 फीसदी वोट पड़े थे जबकि 1951-52 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनाव में बिहार में सबसे अधिक 1998 में 64.60 फीसदी मतदान हुआ था, जो कि इस बार बिहार में पहले चरण की सीटों पर हुए वोटिंग ने इसे भी पछाड़ दिया. बिहार का वोटिंग पैटर्न के क्या संकेत वोटिंग फीसदी के घटने-बढ़ने का सीधा-सीधा असर चुनाव के नतीजों पर भी पड़ता है. भारत के चुनावी इतिहास में आमतौर पर माना जाता है कि जब वोटिंग ज़्यादा होती है, तो जनता बदलाव (एंटी इंकम्बेंसी) चाहती है. लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता. चुनाव में देखा गया है कि कई बार अधिक मतदान का मतलब सरकार के प्रति समर्थन (प्रो इंकम्बेंसी) भी रहती है.  मतलब साफ  है कि वोटर्स की ये सक्रियता किस दिशा में जाएगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी. एसआईआर के बाद पहली बार चुनाव हुए हैं. एसआईआर में तमाम वोट काटे गए हैं तो कुछ नए वोट जोड़े गए हैं. इस तरह फर्जी वोटर हटाए जाने की वजह से भी वोटिंग बढ़ने का कारण माना जा रहा है,  लेकिन बिहार में जब-जब वोटिंग बढ़ी है तो सत्ता बदल जाती है.  बिहार में वोटिंग बढ़ने से बदली सरकार बिहार में विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो 1951-52 से 2020 तक केवल तीन बार ही 60 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई. 1990 में 62.04, 1995 में 61.79 और अब से पहले सबसे अधिक रिकॉर्ड 2020 में 62.57 वोट पड़े थे, लेकिन इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अभी पहले चरण में 64.69 फ़ीसदी वोटिंग रही है. ऐसे ही अगले चरण में वोटिंग हुई तो बिहार के इतिहास में यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा. बिहार में अभी तक सबसे कम 42.60 फ़ीसदी भी 1951-52 में ही वोट पड़े थे. आजादी के बाद से लेकर अभी तक बिहार में जितने चुनाव हुए हैं, उसके वोटिंग पैटर्न को देखते हैं तो साफ जाहिर होता है कि बिहार में जब-जब मतदान में 5 फीसदी से ज़्यादा इजाफा हुआ है, उसका असर चुनाव पर पड़ा है. बिहार में सरकार बदल गई है, तीन बार देखा गया है कि वोटिंग बढ़ने से कैसे सत्ता पर सियासी असर पड़ा है.  बिहार में 5% से कैसे बदल जाती है सरकार बिहार में सबसे पहले 1967 के चुनाव में वोटिंग में इजाफा हुआ तो सरकार बदली. 1962 में 44.5 फ़ीसदी वोटिंग के मुकाबले 1967 में 51.5 फीसदी मतदान रहा.  इस तरह 7 फ़ीसदी वोटिंग ज़्यादा हुई थी और कांग्रेस के हाथों से सरकार निकल गई थी बिहार में पहली बार गैर-कांग्रेसी दलों ने मिलकर सरकार बनाई थी. 1967 के बाद 1980 में भी यही पैटर्न दिखा. वर्ष 1980 में 57.3 फीसदी मतदान हुआ था जबकि 1977 के चुनाव में 50.5 फ़ीसदी वोटिंग रही. इस तरह 6.8 फ़ीसदी ज़्यादा मतदान हुआ, जिसका नतीजा रहा कि सरकार बदल गई. जनता पार्टी को हार झेलना पड़ा और कांग्रेस वापसी कर गई. बिहार में इस बार समीकरण बदल गए हैं हालांकि, इस बार समीकरण बदल गए हैं. 2020 में एनडीए से अलग चुनाव लड़ने वाले चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा इस बार एनडीए के साथ थे तो मुकेश सहनी इस बार महागठबंधन के साथ हैं। इस बार 104 सीटों पर सीधा मुकाबला है, जबकि 17 सीटों पर त्रिकोणीय लड़ाई दिख रही है. पहले चरण में आरजेडी 72 सीट पर है तो उसके सहयोगी कांग्रेस 24 और सीपीआई माले 14 सीट पर किस्मत आजामा रहे हैं. वीआईपी और सीपीआई छह-छह सीट पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि सीपीएम तीन और आईपी गुप्ता की इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में थे। इस तरह छह सीटों पर महागठबंधन की फ्रेंडली फाइट है. वहीं, एनडीए की तरफ से जेडीयू पहले फेज़ में 57 सीट मैदान में है तो बीजेपी ने 48 सीट पर थी। चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) ने 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम के दो प्रत्याशी मैदान में हैं और जीतनराम मांझी … Read more

बिहार चुनाव में वोटिंग बढ़ी, AAP ने भाजपा पर टिकट बांटकर वोटिंग प्रभावित करने का लगाया आरोप

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्डतोड़ वोटिंग को राजनीतिक दल अलग-अलग चश्मे से देख रहे हैं। कोई इसे सरकार के पक्ष में जनता का समर्थन बता रहा है तो किसी को बदलाव की बयार दिख रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने इसमें एक नया एंगल जोड़ दिया है। पार्टी ने इसे 'वोट चोरी' का दूसरा हिस्सा बताते हुए कहा है कि भाजपा ने अपने वोटर्स को टिकट देकर दूसरे शहरों से बिहार भेजा, इसी वजह से 75 साल में सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक यूट्यूब वीडियो के सहारे दावा किया कि लाखों वोटर्स को भाजपा ने अलग-अलग शहरों से बिहार भेजा था। उन्होंने जिस वीडियो को शेयर किया है उसमें कुछ लोग गले में भाजपा का पटका लटकाए दिख रहे हैं। वह कहते हैं कि वोट देने के लिए बिहार जा रहे हैं और टिकट की व्यवस्था भाजपा की ओर से की गई है। बताया गया कि हरियाणा के करनाल से भाजपा ने वोटर्स को बिहार भेजा था। भारद्वाज ने वीडियो के साथ लिखा, 'भाजपा के करनाल के जिला अध्यक्ष स्टेशन पर मौजूद हैं। भाजपा ने संगठित तरीके से वोटरों को चिन्हित किया। SIR में भाजपा के द्वारा चिन्हित वोटरों की वोट नहीं काटी गई। फिर लाखों तादाद में वोटरों को अलग अलग शहरों से चुनाव से पहले बिहार भेजा गया। ट्रेन की टिकट आदि सारे इंतजाम भाजपा ने किए। इस तरीके से बिहार की वोटिंग 75 साल के सबसे ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची।' बिहार में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान बिहार विधानसभा के लिए पहले चरण के मतदान में गुरुवार को 3.75 करोड़ से अधिक मतदाताओं में से 64.66 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जो राज्य में 'अब तक का सबसे ज्यादा' मतदान प्रतिशत है। इसमें अभी और इजाफे की संभावना है। पहले चरण में 18 जिलों के कुल 121 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ, जहां मतदाताओं की कुल संख्या 3.75 करोड़ से अधिक थी। बिहार में इससे पहले सबसे ज्यादा 62.57 प्रतिशत मतदान 2000 में दर्ज किया गया था। कोविड-19 महामारी के साये में हुए 2020 के विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत 57.29 रहा था।

बख्तियारपुर में नीतीश कुमार ने किया मतदान, लोगों से बढ़-चढ़कर वोट करने की अपील

पटना बिहार में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए गुरूवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 121 सीट पर मतदान जारी है। इसी कड़ी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  ने पटना के बख्तियारपुर में अपना वोट डाला। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा, " लोकतंत्र में मतदान केवल हमारा अधिकार ही नहीं, दायित्व भी है। आज बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान हो रहा है- सभी मतदाताओं से आग्रह है कि अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें। मतदान करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। पहले मतदान, फिर जलपान!" बता दें कि राजधानी पटना समेत मतदान वाले 18 जिलों के कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की कतारें लग गई हैं। ग्रामीण इलाकों में सुबह-सुबह मतदान करने के इच्छुक मतदाताओं की कतारें ज्यादा लंबी देखी जा रही है। इन विधानसभा क्षेत्रों में शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। सभी मतदान केंद्रों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के बीच होने वाले मतदान के दौरान असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

121 सीटों के लिए आज वोटिंग, 45,000+ बूथों पर EVM में बंद होगी 1314 उम्मीदवारों की किस्मत

पटना बिहार में पहले चरण मतदान आज यानी छह नवंबर को हुआ शुरू।  115 विधानसभा क्षेत्र के 45341  मतदान केंद्रों पर सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक वोटिंग होगी। छह विधानसभा क्षेत्रों के 2135 मतदान केंद्रों पर सुबह सात बजे से पांच बजे तक ही वोटिंग होगी।  बुधवार सुबह से ही डिस्पैच सेंटरों से मतदान कर्मी ईवीएम-वीवीपैट और अन्य सामग्री लेने में जुट गए थे ।  शाम तक सभी मतदान केंद्र पर सुरक्षा बल पहुंचें  । आज गुरुवार सुबह पांच बजे ही बूथ लेवल एजेंटों की मौजूदगी में मॉक पोल किया । इसके दो घंटे बाद यानी सात बजे मतदान शुरू हुआ । पहले चरण में इन जिलों में मतदान पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान जारी । यह जिले हैं- मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर और बक्सर। इन 121 सीटों पर कुल 2496 नामांकन दाखिल हुए थे। जांच के क्रम में 1939 को वैध पाया गया। उनमें से 70 प्रत्याशियों ने नामांकन बाद में वापस ले लिया। इसके बाद, कई सेट में नामांकन की छंटनी करते हरेक प्रत्याशी के एक नामांकन को लिया गया तो प्रत्याशियों की कुल वास्तविक संख्या 1314 रह गई। इनमें 1192 पुरुष और 122 महिलाएं शामिल हैं। इस चरण में 102 सामान्य और 19 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों पर मतदान होगा। 10 वीआईपी सीटों का हाल तारापुर: इस सीट पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मैदान में हैं. उनकी आरजेडी के अरुण कुमार साह से सीधी टक्कर मानी जा रही है. जन सुराज के संतोष कुमार सिंह और तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल के सुखदेव यादव भी चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं. राघोपुर: यह आरजेडी की पारिवारिक सीट मानी जाती है. इस बार यहां से राजद नेता तेजस्वी यादव तीसरी बार मैदान में हैं. तेजस्वी ने यहां 2015 और 2020 में भाजपा के सतीश कुमार को हराया था. एनडीए की तरफ से सतीश यादव उन्हें चुनौती दे रहे हैं तो जनसुराज के चंचल कुमार भी सामने हैं. मोकामा: यह सीट इस वक्त जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या और जदयू उम्मीदवार अनंत सिंह की गिरफ्तारी को लेकर काफी चर्चा में है. यहां दो बाहुबलियों की टक्कर है. एक तरफ अनंत सिंह तो दूसरी तरफ  आरजेडी के टिकट पर सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी हैं.  अलीनगर: इस सीट पर बीजेपी ने लोकगायिका मैथिली ठाकुर को मैदान में उतारा है. ठाकुर का यह पहला चुनाव है. उनका मुकाबला आरजेडी के विनोद मिश्रा से माना जा रहा है. बीजेपी उनकी लोकप्रियता को वोट में बदलने की कोशिश में है. छपराः छपरा सीट से मशहूर भोजपुरी गायक खेसारी लाल यादव आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. यहां उनका मुकाबला बीजेपी की छोटी कुमारी के साथ माना जा रहा है. लेकिन निर्दलीय राखी गुप्ता भी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की पूरी कोशिश कर रही हैं.  लखीसराय: बिहार के दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा लखीसराय से 2010 से लगातार विधायक हैं. 2020 में उन्होंने कांग्रेस के अमरेश कुमार को हराया था. इस बार भी विजय सिन्हा के सामने अमरेश कुमार मैदान में हैं.  महुआ: लालू यादव द्वारा पार्टी और परिवार से निकाले जाने के बाद तेज प्रताप यादव महुआ से चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी टक्कर आरजेडी विधायक मुकेश रोशन से मानी जा रही है. एनडीए की तरफ से एलजेपी के संजय कुमार सिंह ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है.  बेगूसराय: कभी वामपंथ का गढ़ माने जाने वाली इस सीट पर 2020 में बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. इस बार बीजेपी के कुंदन कुमार का मुकाबला कांग्रेस की अमिता भूषण से है. मंडल युग के बाद यहां की राजनीतिक गणित बदल चुकी है. बांकीपुर: यह पटना की शहरी सीट है, जहां बीजेपी के नितिन नवीन लगातार जीतते आ रहे है. इस बार भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है. उन्हें चुनौती देने के लिए आरजेडी ने रेखा गुप्ता को उतारा है.  दरभंगा शहरी: मिथिलांचल की इस प्रमुख सीट से बीजेपी के राजस्व मंत्री संजय सरावगी मैदान में हैं. उन्हें चुनौती देने के लिए जन सुराज ने पूर्व आईपीएस आरके मिश्रा और मुकेश सहनी की पार्टी ने उमेश सहनी को उम्मीदवार बनाया है.  पहले चरण में किस दल से कितने उम्मीदवार पहले चरण में एनडीए की ओर से जदयू के 57 उम्मीदवार, बीजेपी के 48, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 13 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 2 उम्मीदवार मैदान में हैं. वहीं महागठबंधन की तरफ से आरजेडी के 71, कांग्रेस के 24 और वाम दलों के 14 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. इनके अलावा विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) छह-छह सीट पर, सीपीएम तीन सीटों पर और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) दो सीटों पर चुनाव लड़ रही है. इस चरण में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के 118 उम्मीदवार भी किस्मत आजमा रहे हैं. पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर वोटिंग पटना- मोकामा, बाढ़, बख्तियारपुर, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना सिटी, फतुहा, दानापुर, मनेर, फुलवारी शरीफ (SC), मसौढ़ी (SC), पालीगंज, बिक्रम भोजपुर– आरा, अगिआंव, शाहपुर, बड़हरा, जगदीशपुर, तरारी, संदेश बक्सर– बक्सर, डुमरांव, राजपुर, ब्रह्मपुर गोपालगंज- बैकुंठपुर, बरौली, गोपालगंज, कुचायकोट, भोरे (SC), हथुआ सीवान- जिरादेई, दरौली (SC), रघुनाथपुर, दरौंधा, बड़हरिया, गोरेयाकोठी, महारागंज, सीवान सारण- एकमा, मांझी, बनियापुर, तरैंया, मढौरा, छपरा, गड़खा (SC), अमनौर, परसा, सोनपुर मुजफ्फरपुर- गायघाट, औराई, मीनापुर, बोचहां (SC), सकरा (SC), कुढ़नी, मुजफ्फरपुर, कांटी, बरूराज, पारू, साहेबगंज वैशाली– राजापाकर, महुआ, महनार, राघोपुर, वैशाली, लालगंज, हाजीपुर, पातेपुर (SC) दरभंगा– कुशेश्वर स्थान (SC), गौरा बौराम, बेनीपुर, अलीनगर, दरभंगा ग्रामीण, दरभंगा, हायाघाट, बहादुरपुर, केवटी, जाले समस्तीपुर– कल्याणपुर(SC), वारिसनगर, समस्तीपुर, उजियारपुर, मोरवा, सरायरंजन, मोहिउद्दीननगर, विभूतिपुर, रोसड़ा (SC), हसनपुर मधेपुरा-आलमनगर (SC), बिहारीगंज, मधेपुरा, सिंहेश्वर (SC) सहरसा- सिमरी बख्तियारपुर, सोनबरसा (SC), महिषी, सहरसा खगड़िया- परबत्ता, बेलदौर, अलौली (SC), खगड़िया बेगूसराय– चेरिया बरियारपुर, बछवाड़ा, तेघरा, मटिहानी, साहबपुर कमाल, बेगूसराय, बखरी (SC) मुंगेर– जमालपुर, मुंगेर, तारापुर लखीसराय– सूर्यगढ़ा, लखीसराय शेखपुरा- बरबीघा, शेखपुरा नालंदा- हरनौत, अस्थावां, इस्लामपुर, हिलसा, नालंदा, राजगीर, बिहारशरीफ चुनाव आयोग की जानकारी के मुताबिक पांच विधानसभा क्षेत्रों में सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर एवं महिषी और मुंगेर के तारापुर, मुंगेर और जमालपुर विधानसभा क्षेत्रों में सभी बूथों तथा सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र के 56 बूथों पर सुबह सात से … Read more