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जाट सिख, ओबीसी और एससी वोट बैंक पर नजर, BJP से लेकर कांग्रेस तक ने बनाई नई रणनीति

 चंडीगढ़  पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की कवायद तेज कर दी है। राज्य की चारों प्रमुख पार्टियां—भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिरोमणि अकाली दल (शिअद), आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस अपने पारंपरिक जनाधार को बचाने के साथ-साथ नए सामाजिक समूहों में पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। जाट सिख, ओबीसी, एससी-बीसी, व्यापारी, महिला और युवा वर्ग अब सभी दलों की राजनीतिक रणनीति के केंद्र में आ गए हैं। भाजपा ने पिछले कुछ समय में अपने सामाजिक विस्तार पर विशेष जोर दिया है। पार्टी ने प्रदेश नेतृत्व में जाट सिख चेहरे को आगे किया है और साथ ही ओबीसी, सैनी तथा अन्य पिछड़े वर्गों के बीच लगातार कार्यक्रम और संवाद अभियान चला रही है। पार्टी का प्रयास शहरी और व्यापारी दल की पारंपरिक छवि से बाहर निकलकर ग्रामीण और कृषि प्रधान वर्गों तक पहुंच बढ़ाने का है। अकाली दल बढ़ा रहा सामाजिक दायरा शिरोमणि अकाली दल भी बदलते राजनीतिक हालात के बीच अपना सामाजिक दायरा बढ़ाने में जुटा है। पार्टी पहले ही 70 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में एससी-बीसी, महिला और यूथ विंग को सक्रिय कर चुकी है। इसके अलावा हाल ही में 67 विधानसभा हलकों में उद्योग एवं व्यापार विंग के हलका प्रधान नियुक्त किए गए हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि संगठन में विभिन्न वर्गों की भागीदारी बढ़ाकर शहरी और गैर-पारंपरिक वोट बैंक में पकड़ मजबूत की जा सकती है। आप ने कल्याण बोर्ड गठित किए उधर, आम आदमी पार्टी सरकार ने भी विभिन्न समुदायों तक सीधी पहुंच बनाने के लिए जिला और विधानसभा स्तर पर कल्याण बोर्ड गठित करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार पहले ही 21 राज्य स्तरीय कल्याण बोर्ड बना चुकी है और अब इनका विस्तार सभी जिलों और 117 विधानसभा क्षेत्रों तक करने की योजना पर काम चल रहा है। आधिकारिक तौर पर इन बोर्डों का उद्देश्य समुदायों से जुड़े मुद्दों और सुझावों को सरकार तक पहुंचाना बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे चुनावी तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। कांग्रेस सामाजिक संतुलन बनाने में जुटी वहीं, कांग्रेस भी संगठन के पुनर्गठन के साथ सामाजिक संतुलन बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। पार्टी ने हाल के महीनों में जिला और हलका स्तर पर नियुक्तियों में विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया है। इसके अलावा कांग्रेस के एससी विभाग, ओबीसी विभाग, किसान कांग्रेस, महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस और व्यापार प्रकोष्ठ को फिर से सक्रिय करने की कवायद चल रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रदेश नेतृत्व को सभी फ्रंटल संगठनों और विभागों को विधानसभा स्तर तक सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि चुनाव से पहले हर सामाजिक वर्ग के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जा सके। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी जिला और विधानसभा स्तर पर सामाजिक समूहों के प्रभावशाली प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठकें शुरू करने की तैयारी में है। इसका मकसद उन वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करना है, जहां पिछले चुनावों में पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ था। सूत्रों का कहना है कि संगठनात्मक फेरबदल में भी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है। पारंपरिक वोट बैंक से आगे बढ़ी राजनीति राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब की राजनीति अब केवल पारंपरिक वोट बैंक के इर्द-गिर्द नहीं घूम रही। सभी प्रमुख दल अपने पुराने आधार को बरकरार रखते हुए नए सामाजिक समूहों में स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। संगठनात्मक नियुक्तियों, अलग-अलग विंगों की सक्रियता और समुदाय आधारित संपर्क अभियानों से यह संकेत मिल रहे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जातीय और सामाजिक समीकरण निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।  

नई सड़कों और पुलों को लेकर योगी सरकार की बड़ी तैयारी, बजट और टेंडर प्रक्रिया तेज

लखनऊ  अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश सरकार विकास कार्यों को रफ्तार देने में जुट गई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडलीय दौरा शुरू कर दिए हैं। इन दौरों में मुख्यमंत्री जन प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। जन प्रतिनिधियों से उनके विधान सभा क्षेत्र में इस वर्ष नई सड़कें व पुल-पुलियों की प्राथमिकता की जानकारी ले रहे हैं। विभाग की तैयारी जुलाई से ही नई योजनाओं के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को वाराणसी मंडल में जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक मंडलीय दौरे की शुरूआत कर दी। मुख्यमंत्री रविवार को गोरखपुर में गोरखपुर मंडल के जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री का मंडलीय दौरा इसी महीने पूरा हो जाने की उम्मीद है। निर्माण कार्यों की प्राथमिकताएं की जा रहीं तय मंडलीय बैठकों के माध्यम से इस साल विभागीय बजट से नई सड़कें व पुल-पुलियों के निर्माण कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं। जिसके आधार पर पीडब्ल्यूडी निर्माण कार्यों को तेजी से शुरू कराएगा। विभाग के प्रमुख सचिव अजय चौहान के मुताबिक जन प्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर सभी जिलों की कार्ययोजना आ गई है। मुख्यमंत्री की मंडलीय बैठकें पूरी हो जाने के बाद चयनित कार्यों का काम तेजी से शुरू कराया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि जुलाई से ही विभाग चयनित कार्यों के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया का काम शुरू कर देगा। जिससे सितंबर से धरातल पर युद्धस्तर पर काम शुरू कराया जा सके। आवंटित किए 35156 करोड़ इस वित्तीय वर्ष में पीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्यो के लिए 35,156 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जिसमें से 11,718 करोड़ रुपये से नई सड़कें व पुल-पुलिया बनाई जाएंगी। शेष बजट पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने पर खर्च किया जाएगा। लगभग 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नई सड़कें व पुल-पुलियों का काम इस वर्ष शुरू किया जाना है। विभाग ने तय किया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांच करोड़ रुपये तक की लागत वाली योजनाओं को 50 प्रतिशत धनराशि तथा इससे बड़ी योजनाओं के लिए 20 से 30 प्रतिशत तक बजट जारी किया जाएगा।  

सतीश पूनियां और अलका गुर्जर ने दाखिल किया राज्यसभा पर्चा

जयपुर राजस्थान राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राजस्थान इकाई के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनियां और राष्ट्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर ने अपना नामांकन भर दिया है. दोनों नेताओं ने विधानसभा परिसर पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़, डिप्टी सीएम प्रेम चंद बैरवा और दीया कुमारी, सांसद मंजू शर्मा, सांसद घनश्याम तिवारी समेत राजस्थान सरकार के कई मंत्री और दूसरे प्रमुख नेता मौजूद रहे. बीजेपी के दोनों प्रत्याशियों का जोरदार स्वागत सतीश पूनियां और अलका गुर्जर ने दोपहर करीब 12:30 बजे शुभ मुहूर्त में पर्चा दाखिल किया. दोनों प्रत्याशी और बाकी नेता इससे पहले जयपुर में बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में इकट्ठे हुए. वहां दोनों प्रत्याशियों का जोरदार स्वागत किया गया. संख्या बल के हिसाब से राजस्थान में बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलेगी. कांग्रेस के नीरज डांगी पहले ही अपना नामांकन कर चुके हैं. अगर आज किसी चौथे उम्मीदवार ने नामांकन नहीं किया तो बीजेपी और कांग्रेस के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे. 11 जून को नामांकन पत्रों की जांच के बाद औपचारिक तौर पर तीनों के निर्वाचन का ऐलान कर दिया जाएगा. सीएम भजनलाल शर्मा ने दी बधाई राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सतीश पूनियां और अलका गुर्जर के साथ तस्वीर शेयर कर उन्हें बधाई दी. सीएम भजनलाल शर्मा ने लिखा, "आज भाजपा प्रदेश कार्यालय में राज्यसभा चुनाव हेतु राजस्थान से भाजपा प्रत्याशी सतीश पूनियां और अलका गुर्जर से नामांकन से पूर्व आत्मीय भेंट कर उनका अभिनंदन किया तथा शुभकामनाएं दीं. इस अवसर पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन अजेय कुमार, और केंद्रीय गजेंद्र सिंह शेखावत सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारीगण, जनप्रतिनिधिगण एवं सम्मानित कार्यकर्ता उपस्थित रहे." मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट – इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति – धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं.  

निशांत समेत 8 नामों का ऐलान, सामाजिक समीकरण साधने में जुटा एनडीए

पटना बिहार विधान परिषद की एक सीट पर उपचुनाव और 9 सीटों पर चुनाव को लेकर एनडीए ने आठ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। एनडीए के दोनों प्रमुख दलों जदयू और भाजपा ने अपने-अपने कोर वोटरों का पूरा ध्यान रखा है। इन आठ उम्मीदवारों में पांच अतिपिछड़ा समाज से जबकि तीन महिलाएं हैं। जदयू ने तीन जबकि भाजपा ने दो अतिपिछड़ों को मौका दिया है। भाजपा ने अपने हिस्से की चार सीटों में से दो सवर्णों के हवाले किया है। घोषित उम्मीदवारों में भाजपा के संजय मयूख को छोड़कर निशांत समेत शेष सात उम्मीदवार पहली बार विधान परिषद जाएंगे। एनडीए की ओर से 9वीं सीट पर मंत्री दीपक प्रकाश का भी विधान परिषद जाना तय है। जल्द ही रालोमो उनकी उम्मीदवारी की घोषणा करेगी। जदयू ने उम्मीदवारों के चयन में आधार वोट के साथ क्षेत्रीय संतुलन को भी साधा है। जदयू की सबसे बड़ी ताकत मानी जाने वाली आधी आबादी को आधी हिस्सेदारी दी गयी है। पार्टी के चार उम्मीदवारों में एक पिछड़ा तो तीन अति पिछड़ा हैं। इनमें एक कुर्मी, एक नोनिया, एक कुम्हार और एक धानुक जाति से हैं। भाजपा प्रत्याशियों में दो सवर्ण और दो अतिपिछड़ा हैं। सवर्ण में एक राजपूत तो एक कायस्थ हैं जबकि अतिपिछड़ा में एक नाई और दूसरी प्रजापति हैं। चार में एक महिला को भी है। इनमें तीन पहली बार तो एक तीसरी बार विधान परिषद के सदस्य बनेंगे। जदयू की सूची में पहला नाम निशांत का है। उन्हें जदयू का अगला चेहरा माना जा रहा है। डॉ. भारती मेहता बीते 25 वर्षों से जदयू के लिए काम कर रही हैं। इस समय जदयू महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष हैं। वह संस्कृत शिक्षा बोर्ड की अध्यक्ष रह चुकी हैं। वहीं, शिवरानी प्रजापति 20 वर्षों से पार्टी में सक्रिय हैं। वे बेतिया जिला परिषद अध्यक्ष रह चुकी हैं। अति पिछड़ी वर्ग में कुम्हार जाति से आती हैं। ललन प्रसाद समता पार्टी के समय से यानी लगभग 32 वर्षों से पार्टी के काम में जुटे हैं। अति पिछड़ा वर्ग के धानुक जाति से आते हैं। भोजपुरी सिने स्टार पवन सिंह काराकाट से निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़े थे। हाल के दिनों में पवन सिंह की मुलाकात भाजपा के शीर्ष नेताओं से हुई थी। उसी समय से कयास लगाया जा रहा था कि पवन सिंह को कुछ अहम जिम्मेवारी दी जाएगी। वहीं, डॉ. संजय मयूख को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया गया है। वे लगातार तीसरी बार उच्च सदन के सदस्य होंगे। इसके पहले पार्टी ने गंगा प्रसाद और मंगल पांडेय को लगातार तीन बार विधान परिषद भेजा था। अनिल कुमार ठाकुर अतिपिछड़ा वर्ग में नाई जाति से आते हैं। वे अभी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। वहीं शीला पंडित (प्रजापति) अभी बाल संरक्षण आयोग की सदस्य हैं। वह डॉ. संजय जायसवाल के प्रदेश अध्यक्ष रहते प्रदेश मंत्री और सम्राट चौधरी के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर चुकी हैं।

गुजरात में 26 अप्रैल को 9000 सीटों के लिए निकाय चुनाव, जानें तारीख और शेड्यूल

गांधीनगर गुजरात में 26 अप्रैल के दिन स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदान होगा. राज्य की 15 महानगरपालिका, 84 नगरपालिका, 13 नगरपालिका में उपचुनाव, 34 जिला पंचायत, 260 तालुका पंचायत की 9000 सीटों के लिए मतदान होना है. गुजरात विधानसभा 2027 के चुनाव के पहले स्थानीय निकाय का चुनाव सभी राजनीतिक पक्षों के लिए सेमीफाइनल माना जा रहा है।  देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह वोटिंग करने अहमदाबाद आ रहे हैं. गांधीनगर के सांसद और देश के गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद महानगरपालिका के नारनपुरा वार्ड नंबर-9 के मतदाता है।  अमित शाह वोटिंग करने 11 बजे नारणपुरा में स्थित नारणपुरा सब जोनल ऑफिस में पहुंचेंगे. अमित शाह के अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल 11 बजे अहमदाबाद में स्थित शिलज प्राथमिक स्कूल में वोटिंग करेंगे. तो गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी सूरत के इच्छानाथ में स्थित सेंट्रल स्कूल में वोटिंग करेंगे।  चुनाव के दिलचस्प आंकड़े बता दें कि गुजरात में होने वाले स्थानीय निकाय के चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या के लिहाज से बीजेपी सबसे आगे है, जहां उसके 9 हजार 237 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस के 8 हजार 443 और आम आदमी पार्टी के 5 हजार 261 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. राज्य में 26 अप्रैल को 30 हजार मतदान केंद्रों और 50 हजार बूथों पर वोटिंग होगी. जिसके बाद परिणाम 28 अप्रैल को घोषित होगा।  हालांकि स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान से पहले ही 730 सीटें निर्विरोध घोषित हुईं है. जिनमें 715 सीटें बीजेपी को मिलीं थी. जो पार्टी के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है. क्योंकि पिछले निकाय चुनावों में निर्विरोध सीटों का आंकड़ा करीब 240 सीटों के आसपास था. इस बार जो सीटें निर्विरोध हुई उनमें 15 नगर निगमों की 43 सीटें शामिल हैं, इन सभी पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है।  इसके अलावा, नगरपालिका की 385 सीटें निर्विरोध हुई हैं, जिनमें 370 सीटें बीजेपी, 12 कांग्रेस और 3 निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई हैं. तालुका पंचायत की 251 सीटें और जिला पंचायत की 51 सीटें भी निर्विरोध घोषित हुई है।  सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम गुजरात में आयोजित होनेवाले स्थानीय निकाय के चुनाव को लेकर गुजरात पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर तैयारियां पूर्ण की हैं. राज्य के 30 हजार मतदान केंद्रों और 50 हजार बूथों पर वोटिंग शांतिपूर्ण माहौल में हो, इसलिए राज्य में 59 हजार 525 होमगार्ड, जीआरडी जवानों और 41 हजार 383 जवानों की फोर्स को डिप्लॉय किया गया है. पुलिस की ओर से संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग करके और सीसीटीवी कैमरा के माध्यम से नजर रखी जाएगी।   

चुनाव न कराने पर NSUI सख्त, चरणबद्ध आंदोलन के साथ विश्वविद्यालयों का घेराव करेगा

रायपुर छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने की मांग को लेकर नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। राजधानी रायपुर स्थित राजीव भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में NSUI पदाधिकारियों ने कहा, लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इसे लेकर संगठन अब प्रदेशभर में आंदोलन करेगा। NSUI के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 27 मार्च से होगी। प्रदेश के सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद 6 अप्रैल को प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों का एक साथ घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इन मुद्दों को लेकर होगा आंदोलन     छात्रसंघ चुनाव की बहाली     छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का संरक्षण     बढ़ती फीस और छात्रवृत्ति में देरी     शिक्षकों की कमी     परीक्षा और परिणाम में अनियमितता     प्लेसमेंट, हॉस्टल, परिवहन और डिजिटल संसाधनों की समस्याएं     प्रशासन की उदासीनता NSUI का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

बंगाल में चुनावी बिगुल, दो चरणों में मतदान की घोषणा

 नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोट डाले जाएंगे। यहां पर 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। चुनाव आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस में इसका ऐलान किया। यहां पर मतगणना 4 मई को होगी। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा दोनों चुनाव आयुक्त सुखवीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। बता दें कि आयोग इस माह इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश का दौरा कर चुनाव तैयारियों का जायजा ले चुका है। आयोग ने इन राज्यों में राजनीतिक दलों, सुरक्षा एजेंसियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया है। चुनाव पर्व, हम सबका गर्व चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहाकि पांच राज्यों के सभी राजनीतिक दलों से बातचीत की गई है। सभी पार्टियों से सुझाव लिया गया है। इस दौरान चुनावी तैयारियों की समीक्षा की गई है। पांच राज्यों में 17.4 करोड़ लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कहाकि यह चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराया जाएगा। इस दौरान उन्होंने कहाकि मैं युवाओं से अपील करना चाहूंगा कि वह चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहाकि चुनाव पर्व हम सबका गर्व है। इन राज्यों के लिए भी घोषणा पश्चिम बंगाल के अलावा चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। बता दें कि असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को, केरल विधानसभा का 23 मई को, तमिलनाडु विधानसभा का 10 मई को और पश्चिम बंगाल विधानसभा का सात मई को तथा पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल 15 जून को समाप्त हो रहा है। इन तारीखों से पहले वहां नई विधानसभा का गठन किया जाना है।  

BJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त से की अपील, बंगाल में 3 चरणों में मतदान कराने की मांग

बंगाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में आयोग की फुल बेंच अभी बंगाल के दौरे पर है और चुनाव से जुड़ी तैयारियों का जायजा ले रही है. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर कभी भी चुनाव तारीखों का ऐलान हो सकता है. इस बीच राज्य में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर चुनाव को 3 चरणों में ही कराए जाने की मांग की है. बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज सोमवार को कोलकाता में चुनाव आयोग की फुल बेंच से मुलाकात की और यह मांग की कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 3 चरणों से ज्यादा चरणों में नहीं कराया जाना चाहिए. पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि आयोग को पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान किसी तरह की हिंसा नहीं होने, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए. BJP ने चुनाव आयोग से चुनावी प्रक्रिया को बहुत ही कम समय में खत्म कराने की अपील की. पार्टी ने कहा, “हमारी पहली मांग है कि चुनाव एक, दो या ज्यादा से ज्यादा 3 चरणों में कराई जाए. 7 या 8 चरणों में चुनाव कराने की कोई जरूरत नहीं है.” विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सुरक्षा माहौल को लेकर गहरी चिंता जताते हुए BJP प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को अपनी 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा. मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ अन्य चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी के साथ आज सोमवार को मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर की पार्टियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं ताकि चुनाव कराने को लेकर उनकी चिंताओं और सुझावों को सुना जा सके. BJP नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त से मिलने वाले 3 सदस्यीय पार्टी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, ने बताया कि पार्टी ने आयोग से विधानसभा चुनाव अधिक से अधिक 3 चरणों में कराने की अपील की है. उन्होंने कहा, “हमने एक, 2 या 3 चरणों में चुनाव की मांग की थी, लेकिन इससे ज्यादा चरणों में नहीं हो.” BJP के नेता शिशिर बाजोरिया, जो प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी थे, ने कहा, “मैंने अपनी आंखों से देखा कि रूट मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण इलाकों कराए जा रहे हैं. ये मुख्य सड़कों पर किए जा रहे हैं जहां कोई लोग नहीं रहते, सिर्फ गाड़ियां गुजरती हैं. इस तरह राज्य पुलिस सेंट्रल फ़ोर्स को काम करने के लिए मजबूर कर रही है.”

PU छात्र संघ चुनाव: NSUI का दबदबा, शीर्ष दो पदों पर किया कब्जा

पटना पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं, जिसमें NSUI ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। अध्यक्ष और महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जीत दर्ज की है। देर रात परिणाम घोषित होते ही विश्वविद्यालय परिसर में समर्थकों के बीच जश्न का माहौल बन गया। अध्यक्ष पद के मुकाबले में NSUI के शांतनु शेखर ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को भारी मतों के अंतर से पछाड़ दिया। शांतनु को कुल 2896 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी छात्र जदयू के प्रिंस कुमार को महज 1400 और ABVP की अनुष्का कुमारी को 924 वोटों से संतोष करना पड़ा। महासचिव पद पर खुशी कुमारी का कब्जा महासचिव पद के लिए भी NSUI की खुशी कुमारी ने निर्णायक बढ़त बनाए रखी। उन्होंने 2164 वोट हासिल कर अपनी जीत सुनिश्चित की। हालांकि, अन्य पदों पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। उपाध्यक्ष पद के मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी शिफत फैज ने 1571 वोटों के साथ बाजी मारी। वहीं ABVP के अभिषेक कुमार 2143 वोट पाकर संयुक्त सचिव का पद हासिल करने में विजयी रहे। जबकि ABVP के ही हर्ष वर्धन को 1519 मत मिले और उन्होंने जीत दर्ज की। कोषाध्यक्ष के पद पर कब्जा करने में सफल हो गए। मतदान में छात्राओं ने लिया बढ़ चढ़ कर हिस्सा इस बार के चुनाव में खास बात यह रही कि छात्राओं ने लोकतंत्र के इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार कुल 65% मतदान दर्ज किया गया।

2026 के चुनावों में पांच राज्यों की होगी परीक्षा, NDA के मुकाबले इंडिया ब्लॉक का जोरदार सामना

नई दिल्ली साल 2025 अलविदा हो चुका है और नए साल की दस्तक के साथ हम 2026 में दाखिल हो गए हैं. भारत के सियासी परिदृश्य के लिहाज से 2026 को चुनावी साल के तौर पर देखा जा रहा है. साल का आगाज महाराष्ट्र के बीएमसी सहित 29 महानगरों में निगम चुनाव हैं तो दक्षिण भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसमें असल इम्तिहान एनडीए का नहीं, बल्कि विपक्षी गठबंधन का होने वाला है. देश के लिए 2026 पूरी तरह चुनावी साल रहने वाला है. पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल, असम के साथ दक्षिण भारत के पुदुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसके अलावा 75 राज्यसभा सीटों पर अप्रैल से लेकर नवंबर 2026 तक होने हैं तो उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव है, जिसे 2027 का सेमीफाइनल माना जा रहा है. माना जा रहा है कि 2026 के चुनावी नतीजे और राजनीतिक गतिविधियों से सिर्फ सूबे की सियासी बिसात ही नहीं बिछेगी बल्कि देश दशा और दिशा भी तय हो जाएगी. ऐसे में राजनेताओं की बयानबाजी और हर रोज हो रही योजनाओं के ऐलान के चलते इनराज्यों में चुनावी माहौल पर सियासी रंग चढ़ चुका है. 2026 में बिछेगी पांच राज्यों चुनावी बिसात साल 2026 में चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है. असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा के चुनाव होने हैं. असम विधानसभा में 126 सीटें, केरल में 140, तमिलनाडु में 234, पश्चिम बंगाल में 294 और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा की 30 सीटें है. देश के अलग-अलग राज्यों की 75 राज्यसभा सीटें अप्रैल से लेकर जून और नवंबर 2025 खाली हो रही है, जिसमें यूपी की 10, बिहार की 5, महाराष्ट्र की 7, राजस्थान और मध्य प्रदेश की 3-3 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने है. इसके अलावा तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी राज्यसभा चुनाव होने है. महाराष्ट्र में मुंबई के बीएमसी सहित 29 महानगर पालिका परिषद में चुनाव हो रहे हैं. उपचुनाव-निकाय चुनाव का होगा इम्तिहान साल 2024 में देश के कुछ राज्यों में विधानसभा के उपचुनाव भी है. मौजूदा विधायक के निधन से सीटें खाली हुई हैं. गोवा की पोंडा क्षेत्र, कर्नाटक का बागलकोट क्षेत्र और यूपी की घोसी सीट, महाराष्ट्र की राहुरी, मणिपुर की ताडुबी सीट और नागालैंड की कोरिडांग सीट पर चुनाव होने हैं. इसके अलावा कई राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव भी होने हैं, जिसमें महाराष्ट्र के लेकर यूपी तक शामिल है. महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 महानगर निगम के चुनाव हो रहे हैं, लेकिन जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव 2026 में होना है. चुनाव आयोग ने 31 जनवरी 2026 तक निकाय चुनाव करने का लक्ष्य रखा है. हिंदी पट्टी के सबसे अहम सूबे यूपी में पंचायत चुनाव 2026 में होने है, जिसे 2027 का सेमीफाइनल माना जा रहा है. ग्राम पंचायत के प्रधान से लेकर क्षेत्र और जिला पंचायत सदस्यों व अध्यक्षों के चुनाव होंगे. बंगाल में ममता बनर्जी की होगी अग्निपरीक्षा पश्चिम बंगाल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 7 मई, 2026 को खत्म हो रहा है, जिसके चलते यहां पर निर्वाचन आयोग अप्रैल-मई 2026 में चुनाव करा सकता है. बंगाल में कुल 294 विधासनभा सीटें है. 2021 के चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटें जीती थी तो बीजेपी को सिर्फ 77 सीटें मिली थी. ममता बनर्जी 2011 से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज हैं और टीएमसी लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं. ऐसे में ममता बनर्जी की कोशिश लगातार चौथी जीत के लिए तो बीजेपी हरहाल में जीत के लिए बेताब है. ऐसे में ममता बनर्जी के लिए अपनी सत्ता को बचाए रखने की परीक्षा है तो लेफ्ट और कांग्रेस को अपने सियासी वजूद को बचाए रखने का चुनाव है. बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा चुनौती इसीलिए हो गई है कि कांग्रेस और वाम दलों के एकदम पस्त होने से भी बढ़ी है जिनका वोट उसकी तरफ़ आने के ज़्यादा टीएमसी की तरफ़ गया है. पिछले दो चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत सिर्फ डेढ़ फीसदी बढ़ा तो तृणमूल ने तीन फीसदी ज्यादा वोट हासिल किया है. तमिलनाडु में एमके स्टालिन का इम्तिहान तमिलनाडु विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 10 मई 2026 को खत्म हो रहा है. इसके चलते केरल में अप्रैल-मई 2026 में चुनाव हो सकते हैं. तमिलनाडु में भी डीएमके के नेता स्टालिन की परीक्षा होनी है तो AIADMK भी अपनी वापसी के लिए बेताब, लेकिन बीजेपी के साथ गठबंधन टूटने के बाद मुकाबला रोचक हो गया है. 2021 के चुनाव में एमके स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने राज्य की कुल 234 में से 133 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी, DMK के साथ गठबंधन में कांग्रेस ने 18 सीटे जीती थीं . सूबे की सत्ता पर 10 सालों तक काबिज रही AIADMK महज 66 सीटें जीत पाई थी. AIADMK के साथ गठबंधन करने के बाद बीजेपी चार सीटें पाई थी. इस बार के सियासी हालत बदल गए हैं. इस बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सिर्फ एनडीए और इंडिया ब्लॉक में ही नहीं बल्कि तीसरा फ्रंट भी मैदान में है. तमिल एक्टर थलपति विजय ने अपनी पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कज़गम बनाकर डीएमके बनाम AIADMK की लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है. ऐसे में देखना है कि स्टालिन कैसे सत्ता रिपीट करते हैं. केरल में UDF बनाम LDF की चुनावी लड़ाई केरल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 23 मई 2026 को समाप्त हो रहा है. ऐसे में केरल में अप्रैल-मई 2026 में चुनाव होने की संभावना है. केरल में लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल करने वाले वाम मोर्चा के सामने भी यूडीएफ चुनौती है. केरल में पिनराई विजयन अगर तीसरी बार सफल होते हैं तो रेकॉर्ड बन जाएगा, लेकिन हार जाते हैं तो लेफ्ट का देश से सफाया हो जाएगा. ऐसे में लेफ्ट के लिए अपना आखिरी किला बचाए रखने की चुनौती है. केरल का चुनाव लेफ्ट के अगुवाई एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के बीच है. साल 2021 के चुनाव मेंएलडीएफ ने 99 सीटों के साथ सत्ता बरकरार रखी थी. इस बार कांग्रेस की कोशिश सत्ता में वापसी की है. प्रियंका गांधी केरल से सांसद हैं तो राहुल गांधी के राइट हैंड माने जाने वाले केसी वेणुगोपाल भी केरल से … Read more