samacharsecretary.com

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया कितनी मुश्किल? 5 चरणों में समझें पूरा नियम

 नई दिल्ली  भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाना इतना आसान नहीं है और सरकार भी चाहे तो सीधे तौर पर सीईसी को नहीं हटा सकती। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जजों की तरह ही विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। सीईसी को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज में सरकार के सीधे दखल को रोकने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। आजाद भारत के इतिहास में कभी भी किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से नहीं हटाया गया है। हालांकि, इसकी कोशिशें तो हुईं लेकिन ऐसा हो न सका। आइए पीछे के पन्नों को पलटकर देखते हैं… 1992… टीएन शेषन के खिलाफ मांग 1992 में वामपंथी दलों ने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को हटाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। यह कोशिश किसी औपचारिक प्रस्ताव के रूप में आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि इसे पेश करने के लिए जरूरी संसदीय समर्थन नहीं मिल पाया। 2006… चुनाव आयुक्त नवीन चावला के खिलाफ एनडीए की याचिका मार्च 2006 में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने राष्ट्रपति को याचिका देकर चुनाव आयुर्त नवीन चावला को हटाने की मांग की। 2009… नवीन चावला के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश 2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने पक्षपातपूर्ण व्यवहार और राजनीतिक झुकाव के आरोपों का हवाला देते हुए चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की औपचारिक सिफारिश की। बाद में तत्कालीन यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) सरकार ने इस सिफारिश को खारिज कर दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया सीईसी को हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से उन संवैधानिक प्रावधानों के तहत होती है जो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। अनुच्छेद 324(5) संविधान का अनुच्छेद 324(5) यह तय करता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से केवल उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। अनुच्छेद 124(4) अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जज को तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि राष्ट्रपति का आदेश न हो। यह आदेश संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद ही जारी किया जा सकता है। इस प्रस्ताव के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित तथा वोट देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जरूरी है। साथ ही, यह प्रस्ताव उसी सत्र में राष्ट्रपति को सौंपा जाना चाहिए और यह साबित होना चाहिए कि जज ने दुर्व्यवहार किया है या वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ है। सीईसी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने और उसे पूरा करने के काम में पांच अलग-अलग चरण शामिल हैं। पहला चरण… नोटिस जमा करना मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए राज्यसभा के चेयरमैन या लोकसभा के स्पीकर को एक औपचारिक नोटिस दिया जाता है। इस नोटिस को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्य या राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्य का समर्थन जरूरी है। दूसरा चरण… जांच समिति का गठन अगर नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है तो पीठासीन अधिकारी हटाने के खास आधारों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक खास समिति बनाता है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज या चीफ जस्टिस, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और पीठासीन अधिकारी की राय में कानून के एक जाने-माने जानकार शामिल होने चाहिए। तीसरा चरण… जांच और रिपोर्टिंग गठित समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी औपचारिक जांच रिपोर्ट चेयरमैन या स्पीकर को सौंपती है। चौथा चरण… संसदीय वोटिंग अगर जांच समिति मुख्य चुनाव आयुक्त को साबित हो चुके दुर्व्यवहार या अक्षमता का दोषी पाती है तो मामले को वोटिंग के लिए संसद में लाया जाता है। इस प्रस्ताव को पास करने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है- सदन के कुल सदस्यों के बहुमत का समर्थन और दोनों सदनों में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई का बहुमत। पांचवां चरण… राष्ट्रपति का आदेश अगर हटाने का बिल या प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों से सफलतापूर्वक पास हो जाता है तो इसे राष्ट्रपति के सामने पेश किया जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का आधिकारिक आदेश जारी करते हैं। संसद में मौजूदा संख्या-बल मौजूदा संसदीय समीकरणों के तहत संसद के दोनों सदनों में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करना किसी भी एक विपक्षी गुट के लिए एक ऐसी गणितीय बाधा है जिसे पार करना नामुमकिन है। क्यों है असंभव? लोकसभा में 360 का आंकड़ा छूने के लिए विपक्ष की मौजूदा कुल संख्या से कहीं ज्यादा सीटों की जरूरत है। अगर हम बीजेपी की 240 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 300 सदस्य ही बचते हैं। इसलिए 360 तक पहुंचना मुमकिन नहीं है। इसी तरह राज्यसभा में 162 के आंकड़े तक पहुंचना गणितीय रूप से सीमित है। अगर हम बीजेपी की 116 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 127 गैर-बीजेपी सदस्य बचते हैं। डीएमके (22 लोकसभा, 8 राज्यसभा) को विपक्षी गठबंधन इंडी के बजाय अन्य की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि संख्याबल में कमी के बावजूद विपक्ष हटाने का प्रस्ताव क्यों ला रहा है?

4 जुलाई से दो दिन के मध्यप्रदेश दौरे पर रहेंगे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, अहम बैठकों का कार्यक्रम

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार दो दिवसीय प्रवास पर 4 जुलाई को आएंगे मध्यप्रदेश इंदौर में जुटेंगे 1500 से अधिक बीएलओ, करेंगे सीधा संवाद इंदौर भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार 4 और 5 जुलाई को दो दिवसीय प्रवास पर मध्यप्रदेश आ रहे हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला मध्यप्रदेश दौरा है। दो दिवसीय दौरे के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त इंदौर में बूथ लेवल ऑफिस से बात करेंगे एवं दूसरे दिन ओंकारेश्वर और महेश्वर के भ्रमण पर रहोगे। इंदौर में जुटेंगे 5 जिलों के 1500 से अधिक बीएलओ निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त 4 जुलाई को इंदौर पहुंचेंगे। यहां पर लता मंगेशकर सभागृह में आयोजित बीएलओ कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे। इसे दौरान वे इंदौर, उज्जैन, देवास, धार और खंडवा जिले के 1,500 से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के साथ संवाद करेंगे। उल्लेखनीय है कि ज्ञानेश कुमार देश के ऐसे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर चुनाव व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इससे पहले दिल्ली में भी बीएलओ और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के साथ सीधे संवाद की अनूठी पहल की थी। धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों का करेंगे भ्रमण इंदौर में बीएलओ के साथ महत्वपूर्ण बैठक और चर्चा के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ओंकारेश्वर और महेश्वर जाएंगे। इस दौरान वे ओंकारेश्वर में दर्शन और नर्मदा जी का पूजन करेंगे, जिसके बाद ऐतिहासिक महेश्वर किले का भी भ्रमण करेंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सायंकाल इंदौर से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे।  

BJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त से की अपील, बंगाल में 3 चरणों में मतदान कराने की मांग

बंगाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में आयोग की फुल बेंच अभी बंगाल के दौरे पर है और चुनाव से जुड़ी तैयारियों का जायजा ले रही है. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर कभी भी चुनाव तारीखों का ऐलान हो सकता है. इस बीच राज्य में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर चुनाव को 3 चरणों में ही कराए जाने की मांग की है. बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज सोमवार को कोलकाता में चुनाव आयोग की फुल बेंच से मुलाकात की और यह मांग की कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 3 चरणों से ज्यादा चरणों में नहीं कराया जाना चाहिए. पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि आयोग को पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान किसी तरह की हिंसा नहीं होने, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए. BJP ने चुनाव आयोग से चुनावी प्रक्रिया को बहुत ही कम समय में खत्म कराने की अपील की. पार्टी ने कहा, “हमारी पहली मांग है कि चुनाव एक, दो या ज्यादा से ज्यादा 3 चरणों में कराई जाए. 7 या 8 चरणों में चुनाव कराने की कोई जरूरत नहीं है.” विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सुरक्षा माहौल को लेकर गहरी चिंता जताते हुए BJP प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को अपनी 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा. मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ अन्य चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी के साथ आज सोमवार को मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर की पार्टियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं ताकि चुनाव कराने को लेकर उनकी चिंताओं और सुझावों को सुना जा सके. BJP नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त से मिलने वाले 3 सदस्यीय पार्टी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, ने बताया कि पार्टी ने आयोग से विधानसभा चुनाव अधिक से अधिक 3 चरणों में कराने की अपील की है. उन्होंने कहा, “हमने एक, 2 या 3 चरणों में चुनाव की मांग की थी, लेकिन इससे ज्यादा चरणों में नहीं हो.” BJP के नेता शिशिर बाजोरिया, जो प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी थे, ने कहा, “मैंने अपनी आंखों से देखा कि रूट मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण इलाकों कराए जा रहे हैं. ये मुख्य सड़कों पर किए जा रहे हैं जहां कोई लोग नहीं रहते, सिर्फ गाड़ियां गुजरती हैं. इस तरह राज्य पुलिस सेंट्रल फ़ोर्स को काम करने के लिए मजबूर कर रही है.”

CEC ने बताया बिहार में वोटर लिस्ट सुधार और भाषा-अभिवादन नियम, जानें क्या कहा

पटना मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में बिहार के बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) के काम की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि बिहार के 90217 BLOs ने अपने-अपने क्षेत्र में वोटर लिस्ट को सफलतापूर्वक अपडेट किया है। उन्होंने BLOs के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इनके प्रयासों ने न केवल मतदाता सूची को दुरुस्त किया, बल्कि पूरे देश के अन्य BLOs को भी ये काम करने के लिए प्रेरित किया है। भोजपुरी-मैथिली में अभिवादन CEC ने स्थानीय भाषाओं के प्रति सम्मान दिखाते हुए भोजपुरी और मैथिली में बिहार के लोगों का अभिवादन किया। उन्होंने राज्य के सभी मतदाताओं से लोकतंत्र के पर्व को उसी उत्साह से मनाने का आह्वान किया, जिस उत्साह से वे छठ पूजा और अन्य त्योहार मनाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं और अनिवार्य रूप से वोट डालें। बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर यह चुनाव होना है, क्योंकि प्रदेश की वर्तमान सरकार का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है। CEC ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में 16 सदस्यीय टीम दो दिनों से बिहार के दौरे पर थी और उसने चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने के लिए राजनीतिक दलों, प्रशासन, चुनाव अधिकारियों और पुलिस विभाग के साथ विस्तृत बैठकें कीं। 15 दिन में मिलेगा वोटर आईडी कार्ड भोजपुरी और मैथिली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कीस शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बिहार के सब मतदाता के अभिवादन करत बानी, बिहार के सभी मतदाता के अभिवादन करई छी। जैसे हम महापर्व छठ को आस्था और उत्सव की तरह मनाते हैं, उसी तरह लोकतंत्र के महापर्व को भी मनाएं, अपना भागीदारी पक्का करीं, जिम्मेदारी निभाईं और वोट जरूर करीं। साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पहली बार बड़ी पहल की गई है। CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि सुनने में आता था कि वोटर आईडी कार्ड मिलने में देरी होती थी लेकिन अब चुनाव आयोग ने ऐसी व्यवस्था की है कि वोटर को 15 दिन के अंदर उनका वोटर आईडी कार्ड मिल जाएगा।