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UP में वोटर लिस्ट में बड़ा झटका: 2 करोड़ से ज्यादा नाम कटे, कई दिग्गजों की सीट पर खतरा!

लखनऊ उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रोसेस के बाद 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से कम हुए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर शहर में सबसे कम 33,094 वोट कटे हैं, जो प्रदेश के उन टॉप 5 शहरी क्षेत्रों में शामिल है, जहां सबसे कम गिरावट दर्ज की गई. इसके उलट डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की लखनऊ कैंट विधानसभा सीट उन टॉप 5 क्षेत्रों में है, जहां सबसे ज्यादा 1.47 लाख वोट कम हुए हैं. यह आंकड़े मुख्यमंत्री द्वारा कार्यकर्ताओं को दी गई उस चेतावनी के बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने बूथ स्तर पर मेहनत न करने पर भयावह परिणाम भुगतने की आशंका जताई थी. पूरे सूबे में औसतन हर सीट पर 13.24 फीसदी मतदाता कम हुए हैं. विश्लेषण दिखाता है कि भारतीय जनता पार्टी की तुलना में समाजवादी पार्टी की सीटों पर वोट कम कटे हैं. बीजेपी की शहरी सीटों पर औसतन 18.11 फीसदी वोट घटे, जबकि एसपी की शहरी सीटों पर यह आंकड़ा 16.36 फीसदी रहा. दिग्गज नेताओं की सीटों पर भारी फेरबदल नेताओं की जीत के मार्जिन और कटे हुए वोटों का अंतर काफी डराने वाला है. लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से राजेश्वर सिंह 56 हजार वोटों से जीते थे, लेकिन वहां 1.42 लाख मतदाता कम हो गए. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना 82 हजार से जीते थे और 90 हजार वोट कट गए. कुंडा में राजा भैया की सीट पर 55 हजार वोट कम हुए, जबकि उनकी जीत का मार्जिन केवल 30 हजार था. इसी तरह रायबरेली में अदिति सिंह की सीट पर 56 हजार वोट कम हुए हैं. एसआईआर के आंकड़ों में एसपी की 102 सीटों पर वोट कटने का दायरा 26 हजार से 1.07 लाख तक रहा, जबकि बीजेपी की 257 सीटों पर यह 26 हजार से 3.16 लाख तक पहुंच गया. मुस्लिम बहुल अमरोहा शहर (एसपी सीट) में सबसे कम 26,233 वोट कटे, वहीं बीजेपी की साहिबाबाद सीट पर सबसे ज्यादा 3,16,484 वोट घट गए. ग्रामीण इलाकों में दोनों दलों के बीच का अंतर सिर्फ एक फीसदी के करीब है. सहयोगी दलों की स्थिति और योगी का मॉडल राजनीतिक दलों के लिहाज से देखें तो अपना दल की सीटों पर 27 हजार से 72 हजार, सुभासपा की सीटों पर 28 हजार से 50 हजार और निषाद पार्टी की सीटों पर 30 हजार से 59 हजार वोट कम हुए हैं. आरएलडी की सीटों पर भी 27 हजार से 48 हजार वोटों की कमी आई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड़कर कोई बड़ा नेता अपना क्षेत्र पूरी तरह नहीं बचा पाया है.

एसआईआर के बाद गाजियाबाद में मतदाता संख्या में बड़ी गिरावट

गाजियाबाद गाजियाबाद में प्रशासन ने शुक्रवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया। एसआईआर से पहले गाजियाबाद जनपद की पांचों विधानसभा में 28,37,991 मतदाता थे। अंतिम प्रकाशन के बाद अब यहां कुल 22,63,513 मतदाता रह गए हैं। जनपद में 5,74,478 मतदाता कम हो गए। इसमें धौलना आंशिक शामिल नहीं है। जनपद में लोनी, मुरादनगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद, मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र हैं। एसआईआर से पहले लोनी विधानसभा में 5,32,755 मतदाता, मुरादनगर में 4,59,698, साहिबाबाद में 10,42,469, गाजियाबाद में 4,68,304 और मोदीनगर में 3,34,765 मतदाता थे। इस तरह पांचों विधानसभा में कुल 28,37,991 मतदाता थे। एसआईआर शुरू होने के दौरान बीएलओ ने घर-घर जाकर मतदाताओं को प्रपत्र उपलब्ध कराए। बूथ पर रहकर भी मतदाताओं से फार्म जमा कराए गए। एसआईआर के प्रत्र जमा होने के बाद प्रशासन ने एक सूची जारी की। प्रशासन ने लोगों से दावे और आपत्ति मांगीं यह सूची जारी होने के बाद जनपद की पांचों विधानसभा में कुल 28,37,991 मतदाता में से 20,19,852 मतदाता रह गए। इस तरह करीब 8 लाख से ज्यादा मतदाता पांचों विधानसभा में कम हो गए। इसके बाद प्रशासन ने लोगों से दावे और आपत्ति मांगी। प्रशासन ने अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले उन लोगों से आपत्ति मांगी थी, जिनके नाम मतदाता सूची में नहीं थे। प्रशासन ने आपत्तियों का निस्तारण कर शुक्रवार को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया। धौलाना आंशिक सीट को छोड़कर जनपद की पांचों विधानसभा में अब कुल 22,63,513 मतदाता रह गए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने बताया कि मतदाता सूची वेबसाइट पर उपलब्ध है। voters.eci.gov.in पर वोटर अपना नाम देख सकते हैं। अब भी अवसर मतदाता सूची में अगर आपका नाम नहीं है तो घबराइए नहीं। आप फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं। राज्य में अगले वर्ष फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव नामांकन के एक हफ्ते पहले तक नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 और संशोधन के लिए फॉर्म-8 भी भर सकते हैं। अंतिम मतदाता सूची पर 15 दिन के अंदर जिला निर्वाचन अधिकारी और 30 दिन के भीतर सीईओ कार्यालय में आपत्ति कर सकते हैं। धौलाना आंशिक सीट पर ये हैं मतदाता धौलाना सीट जनपद हापुड़ में आती है। इसका कुछ हिस्सा गाजियाबाद जनपद में आता है। आंशिक सीट पर कुल 98,189 मतदाता हैं। गाजियाबाद की पांचों विधानसभा और धौलाना आंशिक सीट के मतदाता को जोड़कर कुल 23,61,702 मतदाता हो गए हैं। इस तरह कुल 13,19,238 पुरुष मतदाता और 10,42,330 महिला मतदाता हैं।

मई-जून में संभावित स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियां तेज

रायपुर : आगामी मई -जून माह में संभावित स्थानीय निकायो के आम/उप चुनाव के दृष्टिगत मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियां तेज त्रुटिरहित एवं समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करें प्रेक्षक : राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मई जून-2026 की तैयारियों को गति प्रदान की जा रही है। इसी क्रम में आज निर्वाचक नामावली प्रेक्षकों की ब्रीफिंग आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने की।राज्य निर्वाचन आयुक्त  अजय सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य त्रुटिरहित, पारदर्शी एवं समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटना नहीं चाहिए तथा सभी दावा-आपत्तियों का गंभीरता से परीक्षण कर निर्धारित समय-सीमा में उनका निराकरण किया जाए। उन्होंने पुनरीक्षण कार्य की सघन निगरानी और प्रभावी सुपरविजन पर विशेष बल दिया। बैठक में आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया जा रहा है। इसके लिए 01 अप्रैल 2026 को अर्हता तिथि निर्धारित की गई है। इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले तथा भारत निर्वाचन आयोग की विधानसभा मतदाता सूची में शामिल नागरिक ही स्थानीय चुनाव में मतदाता बनने के पात्र होंगे। निर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन 13 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। इसके पश्चात 20 अप्रैल 2026 तक दावा-आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी तथा 27 अप्रैल 2026 तक उनका निराकरण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 05 मई 2026 को किया जाएगा। आयोग द्वारा बताया गया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन एवं विलोपन के लिए निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे।  बैठक में रिक्त पदों की जानकारी भी साझा की गई। नगरीय निकायों में अध्यक्ष के 4पद एवं 60 पार्षद के पदों पर आम निर्वाचन तथा अध्यक्ष के 4 पद एवं 17 पार्षद पदों पर उप निर्वाचन प्रस्तावित है। वहीं, त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के अंतर्गत जनपद पंचायत सदस्य के 10 पद, सरपंच के 82 पद एवं पंचों के 1110 पद रिक्त हैं, जिन पर निर्वाचन संपन्न कराया जाएगा। इस अवसर पर आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी ने भी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ करें तथा मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करना सुनिश्चित करें।

नगर परिषद नागौद की मतदाता सूची का प्रकाशन 7 मई को होगा

भोपाल.  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगर परिषद नागौद जिला सतना के रिक्त पार्षद पद के उप निर्वाचन के लिये एक जनवरी 2026 की संदर्भ तारीख के आधार पर फोटोयुक्त मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण 2026 के लिए कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया है। मतदाता सूची का सार्वजनिक प्रकाशन 7 मई को होगा। आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग श्री मनोज श्रीवास्तव ने बताया है कि रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और मास्टर ट्रेनर्स की नियुक्ति और जिला स्तरीय प्रशिक्षण 13 अप्रैल को होगा। फोटोयुक्त प्रारूप मतदाता सूची का नगरपालिका वार्ड एवं अन्य विहित स्थानों पर सार्वजनिक प्रकाशन 17 अप्रैल को किया जायेगा। दावा आपत्ति केन्द्र पर दावे आपत्ति प्राप्त करने की अवधि 17 से 25 अप्रैल तक रहेगी। दावा आपत्ति आवेदन पत्रों के निराकरण की अंतिम तिथि 2 मई 2026 है। फोटोयुक्त अंतिम मतदाता सूची का नगरपालिका वार्ड तथा अन्य विहित स्थानों पर सार्वजनिक प्रकाशन 7 मई को किया जायेगा।  

अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित: प्रदेश में 5.15 करोड़ मतदाता, 31 लाख लोगों के नाम बाहर

जयपुर राजस्थान में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। राज्य की 199 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को कर दिया गया। अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची के अनुसार राज्य में कुल 5 करोड़ 15 लाख 19 हजार 929 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इससे पहले 27 अक्तूबर 2025 को जारी प्रारंभिक आंकड़ों में मतदाताओं की संख्या 5 करोड़ 46 लाख 56 हजार 215 थी। पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कुल 31 लाख 36 हजार 286 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार यह कार्रवाई मृत, स्थानांतरित अथवा अपात्र पाए गए मतदाताओं के नामों के सत्यापन के बाद की गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना था, ताकि आगामी चुनावों में निष्पक्ष और सुचारु मतदान सुनिश्चित किया जा सके। क्र.स. विवरण कुल 1 27 अक्टूबर 2025 को मतदाता 5,46,56,215 2 ड्राफ्ट सूची में शामिल ना हुये मतदाता (ASD) 41,84,891 3 16 दिसम्बर 2025 को ड्राफ्ट सूची में शामिल मतदाता 5,04,71,324 4 ड्राफ्ट सूची प्रकाशन के बाद जोड़े गये कुल नये मतदाता 12,91,365 5 ड्राफ्ट सूची प्रकाशन के बाद हटाये गये कुल मतदाता 2,42,760 6 मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में मतदाता 5,15,19,929 राज्य में युवा मतदाताओं की संख्या में 4.35 लाख से अधिक की बढ़ोतरी राज्य में प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस दौरान 18 से 19 वर्ष आयुवर्ग के युवा मतदाताओं की संख्या में 4,35,061 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो कुल मिलाकर 0.82 प्रतिशत की वृद्धि है। जिलावार आंकड़ों के अनुसार जयपुर जिले में 1.30 प्रतिशत, बाड़मेर में 1.26 प्रतिशत, भरतपुर में 1.22 प्रतिशत, फलौदी में 1.18 प्रतिशत तथा बूंदी में 1.09 प्रतिशत युवा मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के संबंध में 21 फरवरी 2026 को जिला निर्वाचन अधिकारियों की अध्यक्षता में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली-2026 की एक सॉफ्ट कॉपी (फोटो रहित) और एक हार्ड कॉपी संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी स्तर पर निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि कोई भी मतदाता जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट https://election.rajasthan.gov.in तथा https://voters.eci.gov.in पर ऑनलाइन EPIC सर्च के माध्यम से अपनी जानकारी देख सकता है। इसकी जानकारी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी दी गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या बताया? मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इस व्यापक अभियान को राज्य के सभी 41 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ), 199 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ), 1651 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ), 61,136 बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ), लाखों स्वयंसेवकों और प्रमुख राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी से सफल बनाया गया। अभियान में जिला अध्यक्षों के साथ 1,08,252 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) भी शामिल रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पूरी प्रक्रिया के दौरान जागरूकता और सकारात्मक सहयोग के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का भी आभार व्यक्त किया।

मतदाता सूची अपडेट: भोपाल में 3.80 लाख नाम हटाए गए, 120+ उम्र के 125 वोटर्स अब नहीं होंगे शामिल

भोपाल  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नाम जोड़ने, हटाने के लिए बुलाए गए दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आज शनिवार को मध्य प्रदेश में मतदाताओं की स्थिति साफ हो जाएगी। जिलों में निर्वाचन अधिकारी मतदाता सूची का प्रकाशन कर बताएंगे कि किस विधानसभा सीट में कितने मतदाताओं के नाम काटे और जोड़े गए हैं। इसके बाद अब चुनाव आयोग की एसआईआर की कार्यवाही भी कम्प्लीट हो जाएगी। अब ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से नाम जोड़ने और हटवाने की प्रक्रिया चलती रहेगी। एसआईआर की कार्यवाही पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत उनके मंत्रियों के क्षेत्र से 8 लाख 20 हजार 255 नाम काटे गए थे। इसके बाद नए नाम जोड़ने को लेकर तय समय-सीमा में सिर्फ 1 लाख 69 हजार 753 आवेदन जमा किए गए। सबसे अधिक नाम मंत्री कृष्णा गौर और विश्वास सारंग के विधानसभा क्षेत्र से कटे थे उसी तरह नए नाम जोड़ने के लिए सबसे अधिक आवेदन जमा हुए थे। पूरे प्रदेश की बात करें तो 42 लाख 74 हजार से अधिक नाम काटने की कार्यवाही एसआईआर में की गई और इसके विपरीत नए नाम जोड़ने के लिए सिर्फ 9 लाख 89 हजार 991 लोगों ने आवेदन जमा किए गए थे। नए नाम जोड़ने के लिए जिन विधानसभा क्षेत्रों में दस हजार से अधिक आवेदन जमा किए गए थे, उसमें मंत्री कृष्णा गौर की गोविंदपुरा विधानसभा सीट सबसे आगे है। यहां 17888 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। इसके बाद मंत्री विश्वास सारंग की सीट नरेला में 15115 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए थे। भोपाल जिले की हुजूर विधानसभा सीट जिसके विधायक रामेश्वर शर्मा हैं, वहां से 13024 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए। इंदौर जिले में इंदौर 2 विधानसभा सीट से 10446 और इंदौर 5 विधानसभा क्षेत्र से 11040 नाम जोड़ने के लिए आवेदन जमा कराए गए। राऊ सीट के लिए 12700, नागदा खाचरौद सीट के लिए 11047 आवेदन जमा कराए गए। भोपाल में 120+ उम्र के 125 वोटर्स स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में भोपाल की वोटर संख्या को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। पहले सर्वे और फिर दावे-आपत्तियों की सुनवाई के बाद वोटर लिस्ट से 3.80 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होगी। बता दें, 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। इसके बाद 22 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर यानी, बीएलओ अपने-अपने बूथ पर बैठें। इस दौरान उन्होंने नए फॉर्म 6, 7 और 8 प्राप्त किए। एसआईआर में जिन मतदाताओं को 'नो मैपिंग' में रखा गया कि उन्हें नोटिस जारी किए गए और 50 दिन के अंदर उनका रिकॉर्ड देखा। 14 फरवरी तक ये काम पूरा हो गया। अब फाइनल मतदाता सूची शनिवार को जारी होगी। पहले इतनी थी मतदाता संख्या एसआईआर से पहले 27 अक्टूबर 2025 की स्थिति में भोपाल की मतदाता संख्या 21 लाख 25 हजार 908 थी, जो अब 17 लाख 45 हजार 453 हो गई है। इस तरह वोटर लिस्ट से 3 लाख 80 हजार 455 मतदाता कम हो जाएंगे। उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे जानकारी के अनुसार, शनिवार को फाइनल वोटर लिस्ट में उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे। इनमें शतक यानी, 100 या इससे अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या भी सामने आएगी। इस उम्र की कैटेगिरी में करीब 125 मतदाता हैं। सबसे कम आवेदन वाले विधानसभा में राजनगर और बीना का नाम छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए सबसे कम 1138 आवेदन आए थे। राजनगर कांग्रेस के पूर्व एमएलए विक्रम सिंह नातीराजा का क्षेत्र है। इसके साथ ही बीजेपी में शामिल होने को लेकर विवादों में चल रही कांग्रेस की एमएलए निर्मला सप्रे भी उन विधायकों में शामिल हैं जिनके यहां नए नाम जोड़ने के लिए कम आवेदन जमा हुए थे। बीना विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर के बाद नाम जोड़ने के लिए 1288 आवेदन जमा हुए। इन विधानसभा सीट में भी दो हजार से कम आवेदन आए चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक टिमरनी विधानसभा सीट से 1463 आवेदन मिले थे। भगवानपुरा सीट से 1556 और रतलाम ग्रामीण के लिए 1629 आवेदन जमा कराए गए तो जावद सीट के लिए 1649 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से 1742 आवेदन आए। पूर्व मंत्री बिसाहू लाल सिंह की सीट अनूपपुर से 1750 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए मिले थे। वहीं शमशाबाद विधानसभा सीट के लिए 1781 आवेदन जमा किए गए। भीकनगांव के लिए 1794, बदनावर सीट से 1799, बड़वाह सीट के लिए 1838 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के विधानसभा क्षेत्र से 1934 आवेदन जमा हुए थे। मंत्री कृष्णा और सारंग के क्षेत्र में सबसे अधिक नाम कटे एसआईआर में सबसे अधिक नाम गोविन्दपुरा से विधायक और मोहन सरकार में मंत्री कृष्णा गौर के क्षेत्र से काटे गए थे। भोपाल जिले की इस विधानसभा सीट से 97052 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। दूसरे स्थान पर इंदौर-5 से बीजेपी विधायक महेंद्र हार्डिया का विधानसभा क्षेत्र है। मोहन सरकार के मंत्री विश्वास सारंग और कैलाश विजयवर्गीय के क्षेत्र से 81235 और 75014 वोटर्स के नाम काटे गए। एसआईआर में सबसे कम 6034 नाम नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र से कटे। एसआईआर ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद जो रिपोर्ट सामने आई थी उसके अनुसार मोहन सरकार के पांच मंत्रियों के क्षेत्र में 50 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। इसमें भोपाल के दो विधानसभा क्षेत्र गोविन्दपुरा और नरेला, इंदौर के इंदौर-1, ग्वालियर जिले की ग्वालियर विधानसभा, ग्वालियर दक्षिण विधानसभा, इंदौर जिले की इंदौर -1 विधानसभा शामिल है। मुख्यमंत्री के यहां 37728, विस अध्यक्ष के यहां 13920 नाम कटे थे एसआईआर के ड्राफ्ट प्रकाशन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विधानसभा सीट उज्जैन दक्षिण से 37728 वोटर्स के नाम काटे गए हैं। मुरैना जिले के दिमनी विधानसभा सीट से विधायक और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के क्षेत्र के 13920 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं। कांग्रेस के विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के विधानसभा क्षेत्र गंधवानी से 14712 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। अटेर विधानसभा कांग्रेस … Read more

मतदाता सूची विवाद ने पकड़ा तूल, पूर्व पार्षद की शिकायत पर पुलिस में मामला दर्ज

जयपुर राजस्थान में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 89 में मतदाता सूची से नाम हटाने की कथित साजिश का मामला सामने आया है। पूर्व पार्षद अकबरद्दीन ने पुलिस थाना लालकोठी (जयपुर पूर्व) में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके नाम को वोटर लिस्ट से हटाने के लिए फर्जी फॉर्म-7 भरकर झूठी घोषणा की गई। अकबरद्दीन ने बताया कि उनका नाम वार्ड 89, बूथ संख्या 107 (सांगानेरी गेट) की मतदाता सूची में EPIC नंबर MCM 3202645 के साथ दर्ज है। उन्होंने SIR प्रक्रिया के तहत नियमानुसार बीएलओ द्वारा दिया गया परिगणना प्रपत्र भी जमा कराया था। पूर्व पार्षद के अनुसार, 15 जनवरी को जब वे बूथ पर पहुंचे तो बीएलओ पुष्पा ने उन्हें बताया कि अशोक नामक व्यक्ति ने उनके नाम, मकान नंबर और EPIC नंबर का उपयोग कर फर्जी फॉर्म-7 जमा कराया। फॉर्म में झूठी घोषणा की गई कि अकबरद्दीन स्थायी रूप से स्थानांतरित हैं, जबकि वे जन्म से उसी पते पर अपने परिवार के साथ निवास कर रहे हैं। अकबरद्दीन ने बताया कि उनका मकान संख्या 188 उनके पिता द्वारा 50 वर्ष पहले खरीदा गया था और वर्षों तक वही उनका पार्षद कार्यालय भी रहा। इसके बावजूद उन्हें उनके संवैधानिक मताधिकार से वंचित करने का प्रयास किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फॉर्म-7 भरने वाला अशोक, भाजपा BLA सुनील का भाई है और दोनों ने मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। आरोप है कि बूथ संख्या 107 पर दर्जनों फर्जी फॉर्म-7 जमा कराए गए। पूर्व पार्षद ने कहा कि आरोपियों ने जानबूझकर बीएलओ को मिथ्या सूचना और साक्ष्य दिए, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दंडनीय है। उन्होंने पुलिस से मांग की कि दोषियों के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।

उत्तर प्रदेश में आज जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट, तीन करोड़ नाम हो सकते हैं बाहर, घर बैठे ऐसे करें चेक

लखनऊ यूपी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी. निर्वाचन आयोग दोपहर 3 बजे लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पूरी प्रक्रिया से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करेगा. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा खुद मीडिया के सामने आकर मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी देंगे. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के जारी होते ही प्रदेश के मतदाता निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना नाम देख सकेंगे. यह सूची आगामी चुनावों की तैयारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसके जरिए साफ हो जाएगा कि किसका नाम मतदाता सूची में बना है और किसे दावे या आपत्ति दर्ज कराने की जरूरत पड़ेगी. निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक कुल 15 करोड़ 44 लाख मतदाता दर्ज थे. लेकिन SIR प्रक्रिया के बाद जो ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जा रही है, उसमें करीब 12 करोड़ 55 लाख मतदाता ही शामिल होंगे. यानी लगभग 2 करोड़ 89 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. किन वजहों से कटे नाम ? निर्वाचन आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से ये श्रेणियां शामिल हैं :  – जिनका निधन हो चुका है – स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता, जो किसी अन्य जिले या राज्य में शिफ्ट हो चुके हैं – दो स्थानों पर पंजीकृत मतदाता, जिनका नाम एक से अधिक जगह दर्ज था – गणना प्रपत्र (Enumeration Form) न भरने वाले मतदाता – लंबे समय से अनुपस्थित मतदाता, जिनका दिए गए पते पर सत्यापन नहीं हो सका निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को साफ और त्रुटिरहित बनाने के लिए इन नामों को हटाना आवश्यक था. 1 करोड़ मतदाताओं की नहीं हो सकी मैपिंग, भेजा जाएगा नोटिस इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है. करीब 1 करोड़ मतदाताओं की मैपिंग पूरी नहीं हो सकी है. ऐसे मतदाताओं को संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) की ओर से नोटिस भेजा जाएगा. नोटिस मिलने के बाद मतदाता को तय समयसीमा में अपनी पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे. निर्वाचन आयोग ने इसके लिए 12 वैध दस्तावेजों की सूची पहले से तय कर रखी है, जिनमें से किसी एक की छायाप्रति हस्ताक्षर के साथ जमा करनी होगी. दस्तावेज सही पाए जाने पर नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़ा जा सकेगा. 6 फरवरी तक दर्ज करा सकते हैं दावे और आपत्तियां ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के साथ ही दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी. मतदाता आज से 6 फरवरी तक अपने नाम से जुड़ी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं या यदि नाम गलती से कट गया हो तो उसे जोड़ने का दावा कर सकते हैं. निर्वाचन आयोग के अनुसार यह तारीख तय की गई है :   दावे और आपत्तियां: आज से 6 फरवरी तक दावे-आपत्तियों का निस्तारण: 7 फरवरी से 27 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 6 मार्च को अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान हर दावे और आपत्ति की निष्पक्ष जांच की जाएगी. लखनऊ में सबसे ज्यादा नाम कटने की आशंका प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जुड़े आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं. सूत्रों के अनुसार, राज्य में सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम लखनऊ जिले में कटे हैं. यहां करीब 12 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने की बात सामने आ रही है. जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार 4.57 लाख मतदाता दिए गए पते पर नहीं मिले वहीं 1.27 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है.  5.39 लाख मतदाता दूसरी विधानसभा या जिले में शिफ्ट हो चुके हैं जबकि कई मतदाताओं ने गणना प्रपत्र भरने से मना कर दिया.  इन सभी कारणों से उनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं. 2003 की सूची बनी आधार निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं का नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज पाया गया, या जिनके अभिभावकों का नाम उस सूची में शामिल था, उनके नाम सुरक्षित रखे गए हैं. ऐसे मतदाताओं की मैपिंग पहले ही पूरी कर ली गई है. इसके उलट, जिन मतदाताओं या उनके अभिभावकों का नाम 2003 की सूची में नहीं मिल पाया है, उन्हें नोटिस भेजकर दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा. वेबसाइट पर ऐसे करें नाम की जांच ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदाता निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना नाम, विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र, और मतदाता विवरण में से जरूरी जानकारी भरकर आसानी से देख सकेंगे. यदि किसी को नाम में त्रुटि या नाम गायब होने की शिकायत है, तो वह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आपत्ति दर्ज करा सकता है. 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस, सभी की नजरें निर्वाचन आयोग पर पूरे मामले को लेकर आज दोपहर 3 बजे लखनऊ में निर्वाचन आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस होने जा रही है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा इस दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची के अंतिम आंकड़े, नाम कटने के कारण, आगे की प्रक्रिया और मतदाताओं के लिए जरूरी दिशा-निर्देश मीडिया के सामने रखेंगे. राजनीतिक दलों से लेकर आम मतदाताओं तक, सभी की नजरें इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हुई हैं. माना जा रहा है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के बाद प्रदेश की सियासत में भी हलचल तेज हो सकती है. अंतिम सूची पर टिकी नजर फिलहाल, आज जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची को अंतिम नहीं माना जाएगा. निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 6 मार्च को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. उसी सूची के आधार पर आगामी चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

भोपाल में मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान की शुरुआत, 1.16 लाख वोटरों की जांच आज से शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक लाख से ज्यादा ऐसे मतदाता हैं, जो निर्वाचन आयोग के डिजिटल नक्शे पर लापता हैं। अगर आप भी उनमें से एक हैं तो सोमवार से आपकी नागरिकता और मतदान के अधिकार की सुनवाई शुरू हो रही है। दरअसल, भोपाल की मतदाता सूची का शुद्धिकरण अभियान चल रहा है। इस प्रक्रिया में 1,16,925 मतदाता ऐसे पाए गए हैं, जिनका पता डिजिटल मैप से मेल नहीं खा रहा है। आसान भाषा में कहें तो सरकारी रिकॉर्ड में आप हैं, पर आपका घर कहां है, इसकी सटीक मैपिंग नहीं हो पा रही है। ऐसे नो मैपिंग वाले मतदाताओं की सुनवाई सोमवार से शुरू हो रही है। सोमवार सुबह से भोपाल के सभी 85 वार्ड कार्यालयों, तहसील और नजूल दफ्तरों में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी इन नो-मैपिंग मतदाताओं की दलीलें सुनेंगे। जिला निर्वाचन कार्यालय अब तक 50 हजार से ज्यादा लोगों को उनके घर पर नोटिस थमा चुका है। वहीं आपके इलाके के बीएलओ घर-घर जाकर नोटिस बांट रहे हैं ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। 4.38 लाख नाम कटे, अब आपकी बारी यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। प्रशासन अब तक सूची से 4.38 लाख फर्जी या अपात्र नाम काट चुका है। ऐसे में अगर आपके पास नोटिस आया है और आप सुनवाई में नहीं पहुंचते, तो मुमकिन है कि अगली बार आप पोलिंग बूथ पर अपना नाम न ढूंढ़ पाएं। बीएलओ पर काम का बोझ बढ़ा है। सर्वर की अपनी सीमाएं हैं, लेकिन एक जागरूक नागरिक के नाते यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने वार्ड कार्यालय पहुंचें। याद रखिए, आपकी एक छोटी-सी लापरवाही आपको लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव यानी मतदान से बाहर कर सकती है। एक तरफ नाम काटे जा रहे हैं तो दूसरी तरफ नए जोड़े जा रहे हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय का अनुमान है कि दो लाख नए मतदाता इस बार जुड़ेंगे। फार्म-6 का वितरण जारी है। सुनवाई में जाते समय साथ रखें ये दस्तावेज अगर आपको नोटिस मिला है, तो वार्ड दफ्तर खाली हाथ न जाएं। आपको भारत की नागरिकता प्रमाणित करने के लिए ये दस्तावेज दिखाने होंगे।     आधार कार्ड या पासपोर्ट।     निवास प्रमाण पत्र (बिजली बिल/राशन कार्ड)।     आयु का प्रमाण।     जारी किया गया नोटिस। वोटर आईडी अपडेट नहीं कराने से नौ-मैपिंग की समस्या     लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का पारदर्शी होना अनिवार्य है। कई बार लोग घर बदल लेते हैं पर वोटर आईडी अपडेट नहीं कराते, जिससे नो-मैपिंग की समस्या आती है। यह सुनवाई आपकी पहचान को डिजिटल रूप से सुरक्षित करने का एक मौका है। – भुवन गुप्ता, उप निर्वाचन अधिकारी  

यूपी चुनावी तैयारी तेज: 6 मार्च को संशोधित मतदाता सूची जारी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को त्रुटिरहित, पारदर्शी और अद्यतन बनाने की दिशा में भारत निर्वाचन आयोग ने अहम कदम उठाते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम की तिथियों में संशोधन कर दिया है। आयोग के इस निर्णय से मतदाता सूची में नाम जोड़ने, सुधार कराने और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया को और सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, अब मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन छह जनवरी 2026 को होगा, जबकि अंतिम प्रकाशन छह मार्च 2026 को किया जाएगा। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अर्हता तिथि एक जनवरी 2026 के आधार पर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण की समय-सारिणी में यह बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना है, ताकि आगामी चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की विसंगति न रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, संशोधित कार्यक्रम के तहत 6 जनवरी 2026 को मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। इस अवधि में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने और नाम, पता या अन्य विवरणों में सुधार के लिए आवेदन किए जा सकेंगे। इसके साथ ही 6 जनवरी से 27 फरवरी 2026 तक नोटिस चरण, गणना प्रपत्रों पर निर्णय तथा प्राप्त दावों एवं आपत्तियों का विधिवत निस्तारण किया जाएगा। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी सभी आवेदनों की जांच कर निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित करेंगे। समस्त प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उत्तर प्रदेश की अद्यतन और शुद्ध मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 6 मार्च 2026 को किया जाएगा। निर्वाचन विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांच लें और यदि किसी प्रकार की त्रुटि हो तो समय रहते दावा या आपत्ति दर्ज कराएं। निर्वाचन आयोग के इस संशोधित कार्यक्रम से मतदाता सूची की गुणवत्ता में सुधार होगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत आधार मिलेगा।