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मतदाता सूची सुधार अभियान: धनबाद के 2372 बूथों पर रोज 3 घंटे मिलेंगी सेवाएं

धनबाद  झारखंड में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले की तैयारी की प्रक्रिया चल रही है। 30 जून से एसआइआर होना है। मतदाताओं की सुविधा और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तैयारियों को लेकर धनबाद जिला निर्वाचन विभाग ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। चार जून से धनबाद जिले के सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) प्रतिदिन सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे। इस संबंध में उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी आदित्य रंजन जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेंगे। जिला निर्वाचन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, बीएलओ की बूथ पर नियमित उपस्थिति से मतदाताओं को विभिन्न कार्यों के लिए कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। निर्धारित समय के दौरान अनमैप्ड मतदाताओं की मैपिंग, मतदाता सूची से संबंधित त्रुटियों का सुधार, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, पता परिवर्तन तथा अन्य निर्वाचन संबंधी कार्य किए जा सकेंगे। धनबाद में कुल 2,372 मतदान केंद्र वर्तमान में जिले में 2,372 मतदान केंद्र हैं, जहां बीएलओ प्रतिदिन तीन घंटे उपलब्ध रहेंगे। हालांकि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिले में मतदान केंद्रों की संख्या बढ़कर 2,484 हो जाएगी। जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी कालिदास मुंडा ने बताया कि प्रत्येक बीएलओ को प्रतिदिन तीन घंटे अपने संबंधित बूथ पर रहना अनिवार्य होगा। इससे आम मतदाताओं को सीधे बूथ स्तर पर सेवाएं मिल सकेंगी और अनमैप्ड मतदाताओं की पहचान व मैपिंग का कार्य भी तेजी से पूरा होगा। मदताता सूची को अद्यतन बनाने में मिलेगी मदद उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से एसआईआर अभियान को भी गति मिलेगी और मतदाता सूची को अधिक शुद्ध एवं अद्यतन बनाने में सहायता मिलेगी। निर्वाचन विभाग को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से मतदाताओं की भागीदारी बढ़ेगी और चुनावी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनाया जा सकेगा।  

ASDDF फॉर्मूला के तहत वोटर एब्सेंट, शिफ्ट, डेथ, डुप्लीकेट या फॉरेन नेशनल मतदाताओं की सूची अपडेट की जाएगी

नई दिल्ली  चुनाव आयोग ने दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने बुधवार को कहा कि 30 जून से बीएलओ घर-घर जाकर तय नियमों के अनुसार यहां SIR की प्रक्रिया शुरू करेंगे। एक महीने के अंदर इसे पूरा किया जाएगा। इसके लिए आयोग ने ASDDF फॉर्मूला तैयार किया है। बीएलओ मौके पर जाकर देखेंगे कि क्या कोई वोटर एब्सेंट है, कहीं और शिफ्ट हो गया है, डेथ हो गई या डुप्लीकेट मतदाता है या फॉरेन नेशनल है। ऐसे कारण अगर आस-पड़ोस से पूछताछ और लिस्ट की चेकिंग के बाद मिलते हैं तो वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया जाएगा। अशोक कुमार ने बताया कि BLO जब लोगों के घर आएंगे, तो वे दो कॉपियों वाला एक एन्यूमरेशन फॉर्म देंगे। इसकी एक कॉपी भरकर वापस बीएलओ को देनी होगी। अगर आपका घर बंद मिलता है या आप बीएलओ से नहीं मिल पाते हैं, तो वे आपके घर में फॉर्म छोड़कर चले जाएंगे। नियम के मुताबिक, बीएलओ को एक घर में कम से कम तीन बार चक्कर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। तब ASDDF के तहत उनका नाम काटा जाएगा। ऑनलाइन फॉर्म भरने का विकल्प भी खुला रखा गया है। वेबसाइट पर मौजूद है पुराना रिकॉर्ड जनता को अपने पुराने रिकॉर्ड ढूंढने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए वेबसाइट voters.eci.gov.in पर साल 2002 की वोटर लिस्ट अपलोड कर दी गई है। जो लोग 2002 से दिल्ली में स्थायी रूप से रह रहे हैं, वे वहां अपना ब्योरा देख सकते हैं। फॉर्म पर BLO का नाम और नंबर अशोक कुमार ने कहा कि एन्यूमरेशन फॉर्म पर संबंधित बूथ के बीएलओ का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होगा। फॉर्म भरने में समस्या आने पर या 2002 की लिस्ट नाम न मिलने पर बीएलओ से जानकारी ले सकते हैं। इसके लिए दिल्ली में 13,033 बीएलओ की ड्यूटी लगाई जाएगी। क्या है ASDDF? वोटर एब्सेंट (A) है, कहीं और शिफ्ट (S) हो गया है, डेथ (D) हो गई है या डुप्लीकेट (D) मतदाता है या फॉरेन नेशनल (F) है। अशोक कुमार ने कहा कि एन्यूमरेशन फॉर्म पर संबंधित बूथ के बीएलओ का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होगा। जिन्हें फॉर्म भरने में समस्या आ रही है या 2002 की सूची में उनका नाम नहीं मिल रहा है, तो सीधे बीएलओ को फोन करके जानकारी ले सकते हैं। इसके लिए राजधानी में 13,033 बीएलओ को जमीन पर उतारा जा रहा है। सरकारी अमले के साथ-साथ इस काम में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए 6 प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त किए गए 29,758 बूथ लेवल एजेंट भी फील्ड में सक्रिय रहेंगे दिल्ली से बाहर से आने वाले कैसे खोजें अपना नाम अगर 2002 के बाद दिल्ली में आकर बस गए हैं, तो आपका नाम जिस राज्य से आप आए हैं, वहां की 2002 से 2005 की SIR सूची में दिखेगा। इसके लिए आपको ईसीआई की वेबसाइट voters.eci.gov.in में जाना होगा। यहां 'सर्च योर नेम लास्ट एसआई' पर क्लिक करें। फिर 'सर्च बाय इलेक्टर डिटेल्स' में अपनी जानकारी भरकर डिटेल्स प्राप्त करें। दिल्ली के लोग ऐसे खोजें अपना नाम www.ceo.delhi.gov.in पर जाएं। जहां आपको सर्च बार में EPIC नंबर इलेक्टर डिटेल और पोलिंग स्टेशन के विकल्प दिखाई देंगे। इनसे आप 2002 की मतदाता सूची की डिटेल्स निकाल सकते हैं। यदि 2002 का EPIC नंबर मालूम है तो अपना नंबर और कैप्चा एंटर करें। अगर इलेक्टर डिटेल से सर्च करना चाहते हैं तो इसके ऑप्शन में जाकर AC नंबर भरें।  

वोटर लिस्ट अपडेट के लिए तैयार रहें! 30 जून से दिल्ली में घर-घर पहुंचेंगे BLO, नोट करें तारीखें

नई दिल्ली दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया 30 जून से बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन के साथ पारदर्शी तरीके से शुरू होगी। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने बुधवार को यह जानकारी दी। अशोक कुमार ने कहा कि 20 जून से 29 जून तक बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) का प्रशिक्षण, गणना प्रपत्रों और अन्य दस्तावेजों की छपाई जैसी आंतरिक तैयारियां की जाएंगी। उन्होंने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया के हर चरण में जांच की व्यवस्था रहेगी तथा राजनीतिक दलों को बूथ स्तर के एजेंटों (बीएलए) के माध्यम से इसमें शामिल किया जाएगा। सभी जानकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की वेबसाइट के जरिए साझा की जाएगी। कुमार ने कहा कि जागरूकता गतिविधियां चलाई जाएंगी और मतदाताओं को गणना प्रपत्र जमा करने में सहायता के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। मतदाताओं को गणना प्रपत्र की दो प्रतियां दी जाएंगी, जिनमें से एक भरकर बीएलओ को लौटानी होगी। मतदाताओं को भरे हुए गणना प्रपत्र ऑनलाइन जमा करने की सुविधा भी मिलेगी। इस प्रक्रिया में एक अक्टूबर तक 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी मतदाताओं को शामिल किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने कहा कि एसआईआर के दौरान 13,000 से अधिक बीएलओ घर-घर जाकर गणना कार्य करेंगे। प्रत्येक मौजूदा मतदाता, जिसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, को गणना प्रपत्र (दो प्रतियों में) दिया जाएगा, जिसे भरकर एक प्रति बीएलओ को लौटानी होगी। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन 30 जून से शुरू होकर 29 जुलाई तक चलेगा जिसके बाद पांच अगस्त को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची सात अक्टूबर को जारी की जाएगी। 13000 से ज्यादा BLO करेंगे गणना मतदाताओं को गणना प्रपत्रों की दो प्रतियां प्रदान की जाएंगी, जिनमें से एक को भरकर बीएलओ को वापस करना होगा। मतदाताओं के पास भरे हुए गणना प्रपत्रों को ऑनलाइन जमा करने की सुविधा भी होगी। इस प्रक्रिया में 1 अक्टूबर की पात्रता तिथि तक 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी मतदाता शामिल होंगे। एसआईआर के दौरान, 13,000 से अधिक BLO घर-घर जाकर गणना करेंगे। दिल्ली के मुख्य चुनाव आयोग के कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, प्रत्येक मौजूदा मतदाता, जिसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, को एक गणना प्रपत्र (दो प्रतियों में) दिया जाएगा, जिसे उन्हें भरकर एक प्रति BLO को वापस करनी होगी। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर की जाने वाली गणना 30 जून से शुरू होकर 29 जुलाई को समाप्त होगी, जिसके बाद मतदाता सूची का मसौदा 5 अगस्त को प्रकाशित किया जाएगा। एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। SIR पर EC को SC से क्लीन चिट सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। अदालत ने माना है कि यह प्रक्रिया संविधान और कानून के अनुरूप है। आसान शब्दों में समझे तो अदालत का मानना है कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग का अधिकार है और इससे मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाए रखने में मदद मिलती है। यह एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया है। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग ने कानून के हिसाब से SIR किया और प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है। EC ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल नहीं किया।

रांची: 30 जून से शुरू होगा विशेष मतदाता पुनरीक्षण, CEO ने दूर की भ्रांतियां

रांची झारखंड में 30 जून से शुरू होनेवाले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) के तहत सूची से नाम कटने को लेकर डरने की कोई बात नहीं है। बीएलओ से लेकर SIR में लगे ऊपर तक कोई पदाधिकारी किसी मतदाता का गलत ढंग से मतदाता सूची से नाम हटा नहीं सकता। SIR को लेकर लागू सिस्टम इतना भरोसेमंद है कि किसी भी स्तर पर गलत ढंग से नाम कटने या जुड़ने की कोई संभावना नहीं है। साथ ही इस प्रक्रिया के दौरान लोगों को नोटिस का जवाब देने, यहां तक कि अपील करने का भी पूरा मौका मिलेगा। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने गुरुवार को धुर्वा स्थित निर्वाचन सदन में आयोजित मीडिया उन्मुखीकरण कार्यक्रम में SIR को लेकर उत्पन्न होनेवाली हर भ्रांति को दूर किया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, SIR में सबसे महत्वपूर्ण राज्य में इससे पूर्व वर्ष 2003 में हुए SIR के बाद तैयार मतदाता सूची है। जिन मतदाताओं के नाम इस सूची में है, उन्हें सत्यापन के दौरान कोई दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं है। घर-घर जाएंगे बीएलओ उन्हें सिर्फ गणना प्रपत्र (इन्यूमरेशन फार्म) भरना होगा, जो बीएलओ के माध्यम से घर तक पहुंचेगा। वर्तमान मतदाताओं में 73 प्रतिशत की इस सूची से मैपिंग हो चुकी है। वैसे मतदाता जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें गणना प्रपत्र भरने के साथ-साथ घोषणापत्र और निर्धारित 11 दस्तावेज की सूची में कोई एक दस्तावेज देना होगा। 18 वर्ष पूरे कर चुके नए मतदाताओं को फार्म-6 के साथ घोषणापत्र भी जमा करना होगा। वहीं, दूसरे राज्यों से आनेवाले मतदाताओं को फार्म-8 के साथ घोषणापत्र देना होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मतदाताओं, एसआइर में लगे कर्मियों, सभी मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए से SIR में सक्रिय सहयोग की अपील की ताकि मतदाता सूची अधिक स्वच्छ समावेशी एवं त्रुटिरहित बन सके। इस अवसर पर अपर मुख्यवनिर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, प्रशिक्षण के नोडल पदाधिकारी देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनीलकुमार उपस्थित रहे। गणना प्रपत्र लेने न्यूनतम 3 बार आपके घर जाएंगे बीएलओ 30 जून से बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस क्रम में वे सभी को गणना प्रपत्र देंगे, जिन्हें भरकर उन्हें देना है। यह पहले से आंशिक रूप से भरा रहेगा। अगर किसी घर में ताला बंद है तो इस प्रपत्र को बीएलओ अंदर डाल देंगे। गणना प्रपत्र भराने तथा घोषणा पत्र व दस्तावेज लेने बीएलओ न्यूनतम तीन बार आपके घर जाएंगे। गणना प्रपत्र जमा करनेवाले मतदाताओं की सूची प्रारुप मतदाता सूची में वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग या बिना मैपिंग के रूप में अलग-अलग शामिल किए जाएंगे। यदि किसी मतदाता का गणना प्रपत्र नहीं मिलता है या उसका नाम अब्सेंट, शिफ्टेड, डेड, डुप्लीकेट (एएसडीडी) सूची में शामिल है तो उसका नाम प्रारुप मतदाता सूची में सम्मिलित नहीं किया जाएगा। गण्ना प्रपत्र भरने में बीएलओ सहयोग करेंगे। एसआइआइ में क्या खास? एक-एक घर में गणना प्रपत्र बीएलओ के माध्यम से पहुंचेगा। उसमें बीएलओ का नाम तथा मोबाइल नंबर भी होगा। इसे कम से कम भरकर तथा हस्ताक्षर कर बीएलओ को जरूर जमा करें। मतदाता सूची से किसी का नाम सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना नहीं हटाया जाएगा। अपील दो स्तर पर की जाएगी। पहली अपील जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त तथा दूसरी अपील मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पास होगी। आधार कार्ड के आधार पर मतदाता होने का दावा नहीं किया जा सकता। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने आधार एक्ट तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि आधार सिर्फ किसी व्यक्ति की पहचान है न कि नागरिक होने का। समय पर पूरा होगा SIR , नहीं मांगेंगे अवधि विस्तार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि राज्य में SIR समय पर पूरा होगा। इसके लिए चुनाव आयोग से अवधि विस्तार नहीं मांगा जाएगा। किसी भी विसंगति को सिस्टम तुरंत पकड़ेगा वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग सही ढंग से हुई है या नहीं, किसी मतदाता का नाम गलत ढंग से सूची से कट गया या जुड़ गया हो तो उसे सिस्टम तुरंत पकड़ लेगा। इसमें कुल 15 प्रकार की होनेवाली विसंगतियां चिह्नित की गई हैं, जिन्हें सिस्टम बता देगा ताकि उसे दूर किया जा सके। गलत करने पर दंड का भी प्रविधान SIR के क्रम में बीएलओ से लेकर ऊपर तक के कोई पदाधिकारी गलत करता है, तो उसके विरुद्ध दंड का भी प्रविधान है। इसके तहत जुर्माना सहित न्यूनतम तीन माह की जेल हो सकता है, जिसे दो वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। इन 11 दस्तावेज में से कोई एक देना होगा अनिवार्य  केंद्र, राज्य सरकार या पीएसयू द्वारा नियमित कर्मचारी या पेंशनर को जारी प्रमाणपत्र एक जुलाई 1987 से पहले सरकार, स्थानीय प्राधिकार, बैंक, डाकघर, एलआइसी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र  पासपोर्ट मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र वन अधिकार प्रमाणपत्र  ओबीसी, एससी, एसटी या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी कोई भी जाति प्रमाणपत्र  राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां भी मौजूद है) राज्य/स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर सरकार द्वारा कोई भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र कब क्या होगा? 23 मई : सभी मतदान केंद्रों पर उन मतदाताओं की सूची का प्रकाशन जिनकी मैपिंग 2003 की मतदाता सूची से नहीं हुई है। 20 जून से 29 जून : SIR में संलग्न कर्मियों का प्रशिक्षण 30 जून से 29 जुलाई : बीएलओ द्वारा घर-घर दौरा 29 जुलाई तक : मतदान केंद्रों का युक्तिकरण 05 अगस्त : प्रारुप मतदाता सूची का प्रकाशन 05 अगस्त से 04 सितंबर : दावा एवं आपत्ति 05 अगस्त से 03 अक्टूबर : दावों और आपत्तियों की 07 अक्टूबर : मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन। बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा आयोग चुनाव आयोग SIR में संलग्न बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। एक सवाल के जवाब में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि बीएलओ के कार्य में बाधा डालनेवाले के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।  

वोट कटवाने का आरोप लगाकर AAP ने BJP को घेरा, पंजाब में लड़ाई लड़ने का किया ऐलान

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के लोकसभा सांसद मलविंदर सिंह कांग ने पंजाब में एसआईआर को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसको लेकर बीजेपी पर भी हमला बोला है। X पर पोस्ट करते हुए सांसद ने कहा मेरे प्यारे पंजाबियों, अब समय आ गया है कि हम सब जागें। 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार  एसआईआर के नाम पर वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव करने की तैयारी कर रही है। यह प्रक्रिया बिना किसी ठोस कारण के हमारे लोकतंत्र की जड़ों को हिला रही है।   हर वैध वोटर के लिए लड़ेंगे लड़ाई  बिहार में हाल ही में एसआईआर के दौरान 65 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए। वहीं, बंगाल में 91 लाख वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए जो कुल वोटर के करीब 12% थे। उन्होंने कहा इसके बाद बीजेपी मुस्कराते हुए चली गई। अब वही मशीनरी पंजाब को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा हम पंजाब में बिहार और बंगाल जैसा नहीं होने देंगे। हम हर एक वैध वोटर को लेकर लड़ाई लड़ेंगे।     बता दें कि पंजाब में 25 जून से मतदाता सूचियों की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का काम शुरू हो जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इस संदर्भ में अधिसूचना जारी कर दी गई है। एसआईआर से पहले इसी संदर्भ पंजाब में चल रहे प्री मैपिंग का काम भी 83.69 प्रतिशत पूरा हो चुका है। बीएलओ एन्युमरेशन फॉर्म लेकर घर-घर तक जाएंगे। इसके लिए 24453 बीएलओ, 2476 सुपरवाइजर, 117 ईआरओ और 234 एईआरओ का सरकारी अमला भी तैयार है। एसआईआर की प्रक्रिया – एसआईआर के तहत पंजाब में 25 जून से 24 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं के एन्युमरेशन फॉर्म भरवाएंगे। – प्रत्येक बीएलओ को औसतन 300 घर और 1200 मतदाता एसआईआर के लिए दिए गए हैं। – बीएलओ को प्रशिक्षण देने और अन्य तैयारियों संबंधी काम 15 से 24 जून तक किया जाएगा। – सूबे के सभी मतदाताओं को एसआईआर के तहत संबंधित फॉर्म भरना होगा। – एसआईआर के तहत 1 जनवरी 2003 की मतदाता सूची से साल 2025 की मतदाता सूची का मिलान किया जाएगा। – पोलिंग स्टेशनों की रेशनलाइजेशन का काम 24 जुलाई को होगा और मतदाता सूची का मसौदा 31 जुलाई को प्रकाशित किया जाएगा। – मतदाता सूचियों संबंधी आपत्तियां और दावे 31 जुलाई से 30 अगस्त तक पेश जा सकते हैं। निपटारा 31 जुलाई से 28 सितंबर तक होगा। – अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 01 अक्तूबर को होगा।  

वोटर लिस्ट जांच को लेकर बड़ा अभियान, पंजाब-चंडीगढ़ में BLO करेंगे डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन

चंडीगढ़  पंजाब और चंडीगढ़ में चुनाव आयोग ने 15 जून से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू करने का ऐलान किया है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और राज्य में करीब 2.14 करोड़ मतदाता हैं। SIR के तीसरी चरण के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस दौरान नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे, जबकि गलत, फर्जी या दोहराए गए नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे। इस मुद्दे पर नेता विपक्ष और कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह ने कहा कि SIR के दौरान लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा- गांव उसी का बचता है, जिसका चौकीदार जागता है। ऐसा न हो कि बाद में पछताना पड़े। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी आखिरी दम तक अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी रहेगी और SIR प्रक्रिया पर पूरी नजर रखेगी। पार्टी अपने वोटरों का ध्यान रखेगी और जिन लोगों की नई वोट बननी है, उनकी वोट भी बनवाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस हर बूथ पर अपने बीएलए तैनात कर रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी की वोट गलत तरीके से न काटी जा सके। SIR की प्रोसेस को 6 सवाल-जवाब में जानें 1. SIR क्या है? यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल से ज्यादा के नए वोटरों को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते में गलतियों को भी ठीक किया जाता है। 2. पहले किस राज्य में हुआ? पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। दूसरे फेज के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में SIR की घोषणा हुई। 3. कौन करता है? ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन करते हैं। 4. SIR में वोटर को क्या करना होगा? SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। 5. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य?     पेंशनर पहचान पत्र     किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र     जन्म प्रमाणपत्र     पासपोर्ट     10वीं की मार्कशीट     स्थायी निवास प्रमाणपत्र     वन अधिकार प्रमाणपत्र     जाति प्रमाणपत्र     राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम     परिवार रजिस्टर में नाम     जमीन या मकान आवंटन पत्र     आधार कार्ड 6. SIR का मकसद क्या है? 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।

SIR वोटर लिस्ट में बड़ा अपडेट: 12 राज्यों में 6.08 करोड़ नाम हटे, यूपी और बंगाल में बदलाव सबसे ज्यादा

नई दिल्ली देशभर में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दूसरे फेज के तहत चुनाव आयोग ने 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इस प्रक्रिया के बाद वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसमें कुल 6.08 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इस अपडेट के बाद इन राज्यों में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 44.92 करोड़ रह गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है, ताकि डुप्लीकेट, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें। इस प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा सहित पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप शामिल रहे। उत्तर प्रदेश और बंगाल में सबसे बड़ा बदलाव सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है, जहां मतदाता सूची से लगभग 2.04 करोड़ नाम हटाए गए हैं। इसके चलते राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और अब यह लगभग 13.39 करोड़ रह गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव मुख्य रूप से मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों को हटाने के कारण हुआ है। दूसरे बड़े राज्य पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूची में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। यहां करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे राज्य की वोटर लिस्ट पहले की तुलना में काफी छोटी हो गई है। यह राज्य पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है, ऐसे में इस बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। 60 करोड़ मतदाता SIR प्रक्रिया के तहत कवर हुए  चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया देश की मतदाता सूची को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए की जा रही है। आयोग के अनुसार, पूरे देश में करीब 99 करोड़ मतदाताओं में से अब तक लगभग 60 करोड़ मतदाता SIR प्रक्रिया के तहत कवर किए जा चुके हैं, जबकि शेष राज्यों में यह अभियान अगले चरण में पूरा किया जाएगा। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर कुछ राज्यों में राजनीतिक विवाद भी देखने को मिला है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कुछ दलों ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आने वाले समय में 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया शुरू की जाएगी। चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि आगामी चुनावों से पहले देशभर की मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट कर लिा जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी हो सके।  

मतदाता सूची की होगी विशेष जांच: झारखंड में SIR अभियान जल्द, ऐसे होगा वेरिफिकेशन

रांची झारखंड में इस महीने से ही एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को कराने की तैयारी के अंतिम चरण में है और इसके लिए जिलों को दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। आयोग का लक्ष्य है कि अधिसूचना जारी होने के लगभग 100 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। लगभग 2.65 करोड़ मतदाता पंजीकृत एसआईआर एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची में दर्ज सभी नामों का सत्यापन किया जाता है। इसका उद्देश्य है फर्जी, मृत, स्थानांतरित या दो जगहों पर दर्ज मतदाताओं के नाम हटाना और सही मतदाताओं को सूची में शामिल करना। राज्य में वर्तमान में लगभग 2.65 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक 73% से अधिक मतदाताओं का सत्यापन हो चुका है। शेष मतदाताओं का सत्यापन और सुधार एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किया जाएगा। प्रारंभिक जांच में ही करीब 12 लाख मतदाता ऐसे पाए गए हैं जिनके नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि की श्रेणी में आ सकते हैं। प्रारंभिक जांच में 6.72 लाख गलतियां पाई गई एसआईआर की तैयारी के तहत अब तक 1.61 करोड़ मतदाताओं का पुराने रिकॉर्ड से मिलान किया जा चुका है और मतदाता सूची में मिली गलतियों को ठीक किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में 6.72 लाख गलतियां पाई गई हैं, जिनमें फोटो, नाम और पते की गड़बड़ियां शामिल हैं। जिलों में बैठक कर रणनीति बनाई जा रही है। बीएलओ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, डिजिटल डेटा अपडेट किया जा रहा है और मतदाताओं की पैरेंटल मैपिंग का काम भी तेजी से चल रहा है। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को निम्न कार्य करने पड़ सकते हैं: पहचान के दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड, पहचान पत्र या अन्य प्रमाण पत्र दिखाना।   अगर नाम, उम्र, फोटो या पते में कोई गलती है तो निर्धारित फॉर्म भरकर सुधार के लिए आवेदन देना।       18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवा अपना नाम मतदाता सूची में जोड़वा सकते हैं।  

राजस्थान में SIR में 31 लाख 36 हजार मतदाताओं के कटे नाम

जयपुर. नई दिल्ली। राजस्थान में निर्वाचन विभाग ने 200 में से 199 विधानसभा सीटों की एसआईआर(विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। एक विधानसभा सीट पर पिछले साल,नवंबर में उप चुनाव होने के कारण एसआईआर का कार्य नहीं हो सका था। 199 सीटों पर जारी एसआईआर की अंतिम सूची में राज्य में 31 लाख 36 हजार 286 मतदाताओं के नाम कटे हैं। पिछले साल,16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट सूची के बाद 10 लाख 48 हजार नाम बढ़े हैं। अब प्रदेश में पांच करोड़ 15 लाख 19 हजार 923 मतदाता हैं,जबकि 27 अक्टूबर,2025 को एसआईआर शुरू होने से पहले पांच करोड़ 46 लाख 56 हजार 215 मतदाता हैं। कहां से हैं सबसे अधिक नाम एसआईआर के तहत अंतिम मतदाता सूची में सबसे अधिक नाम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्वाचन क्षेत्र सरदारपुरा से 51 हजार 71 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। सबसे कम ओंसिया विधानसभा क्षेत्र में सात हजार 512 मतदाताओं के नाम कटे हैं। अंतिम मतदाता सूची में 18 से 19 वर्ष के मतदाताओं की संख्या में चार लाख 35 हजार 61 की बढ़ोतरी हुई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने बताया कि मतदाता सूची में नाम हटाने एवं जोड़ने का काम जारी रहेगा। कैसे जुड़वाएं नाम बूथ स्तर के अधिकारी के समक्ष फॉर्म भरकर मतदाता सूची में नाम जुड़वाया जा सकता है। एसआईआर के तहत नाम काटने और कटवाने को लेकर एक लाख छह जार आपत्तियां मिली थी।वहीं नए नाम जुड़वाने को लेकर दस लाख 25 हजार से अधिक आवेदन मिले थे।

वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का असर: नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में 1.70 करोड़ मतदाताओं की कमी

 नई दिल्ली भारत के छह राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम पूरा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिन्हें अयोग्य पाया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या मिलाकर 1 करोड़ 70 लाख से ज्यादा घट गई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह हटाए गए मतदाताओं और नए जोड़े गए योग्य मतदाताओं के अंतर के आधार पर नेट बदलाव है। कितने घटे मतदाता? मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार द्वीप, गोवा और केरल समेत कुल नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 21.45 करोड़ थी। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद यह घटकर करीब 19.75 करोड़ रह गई, यानी कुल मिलाकर 1.70 करोड़ से अधिक मतदाता कम हो गए। गुजरात में 68 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे सबसे ज्यादा नाम गुजरात में हटाए गए हैं। यहां कुल 68 लाख 12 हजार 711 मतदाताओं के नाम सूची से हटे, जिससे कुल मतदाता संख्या लगभग 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ रह गई, यानी करीब 13.40% की कमी दर्ज हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर रहा, जहां करीब 34.25 लाख नाम हटाए गए और मतदाता संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.39 करोड़ हो गई। राजस्थान में 31 लाख तो छत्तीसगढ में 25 लाख मतदाता के नाम हटे अन्य राज्यों में भी बड़ी कटौती देखी गई। राजस्थान में लगभग 31.36 लाख मतदाताओं के नाम हटे, छत्तीसगढ़ में करीब 24.99 लाख, जबकि केरल में करीब 8.97 लाख नाम कम हुए। छोटे राज्यों में गोवा में लगभग 1.27 लाख नाम हटे। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान-निकोबार, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई। किस वजह से हटाए गए मतदाताओं के नाम? चुनाव आयोग के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटाने के मुख्य कारणों में मौत, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, एक से अधिक जगह पंजीकरण होना या पात्रता से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और पात्र नागरिक अब भी नाम जुड़वाने, हटवाने या सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। यूपी, बंगाल और तमिलनाडु में SIR जारी आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के आंकड़े इस महीने के अंत तक जारी किए जाएंगे। देशभर में 12 राज्यों में चल रहे इस अभियान का अगला चरण अप्रैल से शुरू होगा, जिसके तहत पूरे देश में मतदाता सूचियों का सत्यापन जारी रहेगा। विवाद और कानूनी चुनौती,  असम में अलग प्रक्रिया इस पूरे अभियान के दौरान कई जगह शेड्यूल में बदलाव भी किए गए। बिहार की तरह ही तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभियान मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट रखने के लिए किया जा रहा है। असम में एसआईआर की जगह स्पेशल रिविजन प्रक्रिया अपनाई गई थी, जो 10 फरवरी को पूरी हो चुकी है। देशभर में चल रहा है अभियान चुनाव आयोग का यह विशेष पुनरीक्षण अभियान देश के कई हिस्सों में जारी है। बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अभी 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह काम चल रहा है, जहां लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके बाद अगले चरण में 17 राज्यों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 40 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जाएगा।