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वोट कटवाने का आरोप लगाकर AAP ने BJP को घेरा, पंजाब में लड़ाई लड़ने का किया ऐलान

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के लोकसभा सांसद मलविंदर सिंह कांग ने पंजाब में एसआईआर को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसको लेकर बीजेपी पर भी हमला बोला है। X पर पोस्ट करते हुए सांसद ने कहा मेरे प्यारे पंजाबियों, अब समय आ गया है कि हम सब जागें। 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार  एसआईआर के नाम पर वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव करने की तैयारी कर रही है। यह प्रक्रिया बिना किसी ठोस कारण के हमारे लोकतंत्र की जड़ों को हिला रही है।   हर वैध वोटर के लिए लड़ेंगे लड़ाई  बिहार में हाल ही में एसआईआर के दौरान 65 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए। वहीं, बंगाल में 91 लाख वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए जो कुल वोटर के करीब 12% थे। उन्होंने कहा इसके बाद बीजेपी मुस्कराते हुए चली गई। अब वही मशीनरी पंजाब को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा हम पंजाब में बिहार और बंगाल जैसा नहीं होने देंगे। हम हर एक वैध वोटर को लेकर लड़ाई लड़ेंगे।     बता दें कि पंजाब में 25 जून से मतदाता सूचियों की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का काम शुरू हो जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इस संदर्भ में अधिसूचना जारी कर दी गई है। एसआईआर से पहले इसी संदर्भ पंजाब में चल रहे प्री मैपिंग का काम भी 83.69 प्रतिशत पूरा हो चुका है। बीएलओ एन्युमरेशन फॉर्म लेकर घर-घर तक जाएंगे। इसके लिए 24453 बीएलओ, 2476 सुपरवाइजर, 117 ईआरओ और 234 एईआरओ का सरकारी अमला भी तैयार है। एसआईआर की प्रक्रिया – एसआईआर के तहत पंजाब में 25 जून से 24 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं के एन्युमरेशन फॉर्म भरवाएंगे। – प्रत्येक बीएलओ को औसतन 300 घर और 1200 मतदाता एसआईआर के लिए दिए गए हैं। – बीएलओ को प्रशिक्षण देने और अन्य तैयारियों संबंधी काम 15 से 24 जून तक किया जाएगा। – सूबे के सभी मतदाताओं को एसआईआर के तहत संबंधित फॉर्म भरना होगा। – एसआईआर के तहत 1 जनवरी 2003 की मतदाता सूची से साल 2025 की मतदाता सूची का मिलान किया जाएगा। – पोलिंग स्टेशनों की रेशनलाइजेशन का काम 24 जुलाई को होगा और मतदाता सूची का मसौदा 31 जुलाई को प्रकाशित किया जाएगा। – मतदाता सूचियों संबंधी आपत्तियां और दावे 31 जुलाई से 30 अगस्त तक पेश जा सकते हैं। निपटारा 31 जुलाई से 28 सितंबर तक होगा। – अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 01 अक्तूबर को होगा।  

वोटर लिस्ट जांच को लेकर बड़ा अभियान, पंजाब-चंडीगढ़ में BLO करेंगे डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन

चंडीगढ़  पंजाब और चंडीगढ़ में चुनाव आयोग ने 15 जून से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू करने का ऐलान किया है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और राज्य में करीब 2.14 करोड़ मतदाता हैं। SIR के तीसरी चरण के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस दौरान नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे, जबकि गलत, फर्जी या दोहराए गए नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे। इस मुद्दे पर नेता विपक्ष और कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह ने कहा कि SIR के दौरान लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा- गांव उसी का बचता है, जिसका चौकीदार जागता है। ऐसा न हो कि बाद में पछताना पड़े। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी आखिरी दम तक अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी रहेगी और SIR प्रक्रिया पर पूरी नजर रखेगी। पार्टी अपने वोटरों का ध्यान रखेगी और जिन लोगों की नई वोट बननी है, उनकी वोट भी बनवाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस हर बूथ पर अपने बीएलए तैनात कर रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी की वोट गलत तरीके से न काटी जा सके। SIR की प्रोसेस को 6 सवाल-जवाब में जानें 1. SIR क्या है? यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल से ज्यादा के नए वोटरों को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते में गलतियों को भी ठीक किया जाता है। 2. पहले किस राज्य में हुआ? पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। दूसरे फेज के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में SIR की घोषणा हुई। 3. कौन करता है? ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन करते हैं। 4. SIR में वोटर को क्या करना होगा? SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। 5. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य?     पेंशनर पहचान पत्र     किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र     जन्म प्रमाणपत्र     पासपोर्ट     10वीं की मार्कशीट     स्थायी निवास प्रमाणपत्र     वन अधिकार प्रमाणपत्र     जाति प्रमाणपत्र     राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम     परिवार रजिस्टर में नाम     जमीन या मकान आवंटन पत्र     आधार कार्ड 6. SIR का मकसद क्या है? 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।

SIR वोटर लिस्ट में बड़ा अपडेट: 12 राज्यों में 6.08 करोड़ नाम हटे, यूपी और बंगाल में बदलाव सबसे ज्यादा

नई दिल्ली देशभर में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दूसरे फेज के तहत चुनाव आयोग ने 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इस प्रक्रिया के बाद वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसमें कुल 6.08 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इस अपडेट के बाद इन राज्यों में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 44.92 करोड़ रह गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है, ताकि डुप्लीकेट, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें। इस प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा सहित पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप शामिल रहे। उत्तर प्रदेश और बंगाल में सबसे बड़ा बदलाव सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है, जहां मतदाता सूची से लगभग 2.04 करोड़ नाम हटाए गए हैं। इसके चलते राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और अब यह लगभग 13.39 करोड़ रह गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव मुख्य रूप से मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों को हटाने के कारण हुआ है। दूसरे बड़े राज्य पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूची में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। यहां करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे राज्य की वोटर लिस्ट पहले की तुलना में काफी छोटी हो गई है। यह राज्य पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है, ऐसे में इस बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। 60 करोड़ मतदाता SIR प्रक्रिया के तहत कवर हुए  चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया देश की मतदाता सूची को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए की जा रही है। आयोग के अनुसार, पूरे देश में करीब 99 करोड़ मतदाताओं में से अब तक लगभग 60 करोड़ मतदाता SIR प्रक्रिया के तहत कवर किए जा चुके हैं, जबकि शेष राज्यों में यह अभियान अगले चरण में पूरा किया जाएगा। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर कुछ राज्यों में राजनीतिक विवाद भी देखने को मिला है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कुछ दलों ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आने वाले समय में 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया शुरू की जाएगी। चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि आगामी चुनावों से पहले देशभर की मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट कर लिा जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी हो सके।  

मतदाता सूची की होगी विशेष जांच: झारखंड में SIR अभियान जल्द, ऐसे होगा वेरिफिकेशन

रांची झारखंड में इस महीने से ही एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को कराने की तैयारी के अंतिम चरण में है और इसके लिए जिलों को दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। आयोग का लक्ष्य है कि अधिसूचना जारी होने के लगभग 100 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। लगभग 2.65 करोड़ मतदाता पंजीकृत एसआईआर एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची में दर्ज सभी नामों का सत्यापन किया जाता है। इसका उद्देश्य है फर्जी, मृत, स्थानांतरित या दो जगहों पर दर्ज मतदाताओं के नाम हटाना और सही मतदाताओं को सूची में शामिल करना। राज्य में वर्तमान में लगभग 2.65 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक 73% से अधिक मतदाताओं का सत्यापन हो चुका है। शेष मतदाताओं का सत्यापन और सुधार एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किया जाएगा। प्रारंभिक जांच में ही करीब 12 लाख मतदाता ऐसे पाए गए हैं जिनके नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि की श्रेणी में आ सकते हैं। प्रारंभिक जांच में 6.72 लाख गलतियां पाई गई एसआईआर की तैयारी के तहत अब तक 1.61 करोड़ मतदाताओं का पुराने रिकॉर्ड से मिलान किया जा चुका है और मतदाता सूची में मिली गलतियों को ठीक किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में 6.72 लाख गलतियां पाई गई हैं, जिनमें फोटो, नाम और पते की गड़बड़ियां शामिल हैं। जिलों में बैठक कर रणनीति बनाई जा रही है। बीएलओ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, डिजिटल डेटा अपडेट किया जा रहा है और मतदाताओं की पैरेंटल मैपिंग का काम भी तेजी से चल रहा है। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को निम्न कार्य करने पड़ सकते हैं: पहचान के दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड, पहचान पत्र या अन्य प्रमाण पत्र दिखाना।   अगर नाम, उम्र, फोटो या पते में कोई गलती है तो निर्धारित फॉर्म भरकर सुधार के लिए आवेदन देना।       18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवा अपना नाम मतदाता सूची में जोड़वा सकते हैं।  

राजस्थान में SIR में 31 लाख 36 हजार मतदाताओं के कटे नाम

जयपुर. नई दिल्ली। राजस्थान में निर्वाचन विभाग ने 200 में से 199 विधानसभा सीटों की एसआईआर(विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। एक विधानसभा सीट पर पिछले साल,नवंबर में उप चुनाव होने के कारण एसआईआर का कार्य नहीं हो सका था। 199 सीटों पर जारी एसआईआर की अंतिम सूची में राज्य में 31 लाख 36 हजार 286 मतदाताओं के नाम कटे हैं। पिछले साल,16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट सूची के बाद 10 लाख 48 हजार नाम बढ़े हैं। अब प्रदेश में पांच करोड़ 15 लाख 19 हजार 923 मतदाता हैं,जबकि 27 अक्टूबर,2025 को एसआईआर शुरू होने से पहले पांच करोड़ 46 लाख 56 हजार 215 मतदाता हैं। कहां से हैं सबसे अधिक नाम एसआईआर के तहत अंतिम मतदाता सूची में सबसे अधिक नाम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्वाचन क्षेत्र सरदारपुरा से 51 हजार 71 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। सबसे कम ओंसिया विधानसभा क्षेत्र में सात हजार 512 मतदाताओं के नाम कटे हैं। अंतिम मतदाता सूची में 18 से 19 वर्ष के मतदाताओं की संख्या में चार लाख 35 हजार 61 की बढ़ोतरी हुई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने बताया कि मतदाता सूची में नाम हटाने एवं जोड़ने का काम जारी रहेगा। कैसे जुड़वाएं नाम बूथ स्तर के अधिकारी के समक्ष फॉर्म भरकर मतदाता सूची में नाम जुड़वाया जा सकता है। एसआईआर के तहत नाम काटने और कटवाने को लेकर एक लाख छह जार आपत्तियां मिली थी।वहीं नए नाम जुड़वाने को लेकर दस लाख 25 हजार से अधिक आवेदन मिले थे।

वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का असर: नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में 1.70 करोड़ मतदाताओं की कमी

 नई दिल्ली भारत के छह राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम पूरा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिन्हें अयोग्य पाया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या मिलाकर 1 करोड़ 70 लाख से ज्यादा घट गई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह हटाए गए मतदाताओं और नए जोड़े गए योग्य मतदाताओं के अंतर के आधार पर नेट बदलाव है। कितने घटे मतदाता? मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार द्वीप, गोवा और केरल समेत कुल नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 21.45 करोड़ थी। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद यह घटकर करीब 19.75 करोड़ रह गई, यानी कुल मिलाकर 1.70 करोड़ से अधिक मतदाता कम हो गए। गुजरात में 68 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे सबसे ज्यादा नाम गुजरात में हटाए गए हैं। यहां कुल 68 लाख 12 हजार 711 मतदाताओं के नाम सूची से हटे, जिससे कुल मतदाता संख्या लगभग 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ रह गई, यानी करीब 13.40% की कमी दर्ज हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर रहा, जहां करीब 34.25 लाख नाम हटाए गए और मतदाता संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.39 करोड़ हो गई। राजस्थान में 31 लाख तो छत्तीसगढ में 25 लाख मतदाता के नाम हटे अन्य राज्यों में भी बड़ी कटौती देखी गई। राजस्थान में लगभग 31.36 लाख मतदाताओं के नाम हटे, छत्तीसगढ़ में करीब 24.99 लाख, जबकि केरल में करीब 8.97 लाख नाम कम हुए। छोटे राज्यों में गोवा में लगभग 1.27 लाख नाम हटे। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान-निकोबार, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई। किस वजह से हटाए गए मतदाताओं के नाम? चुनाव आयोग के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटाने के मुख्य कारणों में मौत, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, एक से अधिक जगह पंजीकरण होना या पात्रता से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और पात्र नागरिक अब भी नाम जुड़वाने, हटवाने या सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। यूपी, बंगाल और तमिलनाडु में SIR जारी आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के आंकड़े इस महीने के अंत तक जारी किए जाएंगे। देशभर में 12 राज्यों में चल रहे इस अभियान का अगला चरण अप्रैल से शुरू होगा, जिसके तहत पूरे देश में मतदाता सूचियों का सत्यापन जारी रहेगा। विवाद और कानूनी चुनौती,  असम में अलग प्रक्रिया इस पूरे अभियान के दौरान कई जगह शेड्यूल में बदलाव भी किए गए। बिहार की तरह ही तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभियान मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट रखने के लिए किया जा रहा है। असम में एसआईआर की जगह स्पेशल रिविजन प्रक्रिया अपनाई गई थी, जो 10 फरवरी को पूरी हो चुकी है। देशभर में चल रहा है अभियान चुनाव आयोग का यह विशेष पुनरीक्षण अभियान देश के कई हिस्सों में जारी है। बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अभी 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह काम चल रहा है, जहां लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके बाद अगले चरण में 17 राज्यों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 40 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जाएगा।

दुर्ग में एसआईआर के बाद घटे 2.17 लाख मतदाता

दुर्ग. चार महीने तक चले एसआईआर के बाद आज मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया. एसआईआर शुरू होने के पहले 31 अक्टूबर 2025 की स्थिति में जिले में कुल 1452509 मतदाता थे जो आज एसआईआर के बाद अंतिम प्रकाशन के अनुसार घटकर 1235230 रह गए अर्थात एसआईआर के बाद जिले में 2 लाख 17 हजार 279 मतदाता घट गए एसआईआर के दौरान सर्वाधिक 44 हजार 746 मतदाताओं के नाम वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में कटे हैं. शनिवार को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार जिले में महिला मतदाताओं की संख्या 620522 एवं पुरुष 614665 है वहीं 43 तृतीय लिंग है. एसआईआर के पहले व अंतिम प्रकाशन के बाद मतदाताओं के आंकड़े के अनुसार वैशाली नगर विधान सभा में पहले 254291 मतदाता थे जो एसआईआर के बाद घटकर 209545 हो गया है. इसी प्रकार दुर्ग शहर में 42954 मतदाता गायब हो गए. यहां 236265 से घटकर अब 195368 मतदाता रह गए हैं. अहिवारा में 39358 मतदाताओं के नाम कटे हैं. यहां 243616 से घटकर कुल मतदाता अब 2204258 हो गए हैं, जबकि भिलाईनगर में 163324 से घटकर अब 127023 मतदाता रह गए हैं. सबसे कम पाटन में 17125 मतदाताओं के नाम कटे: एसआईआर के दौरान सबसे कम पाटन विधानसभा में मात्र 17125 मतदाताओं के नाम कटे हैं. एसआईआर के पहले मतदाताओं की संख्या के हिसाब से पाटन जिले का चौथे नंबर का बड़ा विधानसभा था जो अब वैशाली नगर के बाद दूसरा सबसे बड़ा विधानसभा हो गया है. पाटन में 222681 से घटकर अब 205556 मतदाता हो गए हैं. इसी प्रकार दर्ग ग्रामीण में 222544 से घटकर अब 195368 मतदाता रह गए हैं. वहीं जिले के अंतर्गत आने वाले साजा विधानसभा के आंशिक क्षेत्र में 7359 एवं बेमेतरा आंशिक में 2260 मतदाता कम हुए हैं. प्रारूप प्रकाशन के बाद हुई 31786 मतदाताओं की वृद्धि : गौरतलब है कि एसआईआर के दौरान घर घर जाकर 4 नवम्बर से 18 दिसंबर 2025 तक गणना पत्रक भरे गए. इसके बाद 23 दिसंबर 2025 को इसका प्रारूप प्रकाशन किया गया. इसके अनुसार मतदाता सूची में जिले में कुल 1203444 मतदाता थे. इसके उपरांत दावा आपत्ति प्राप्त किए गए एवं नोटिस जारी कर सुनवाई की गई, इसमें प्रारूप प्रकाशन के बाद मतदाताओं की संख्या 31786 और बढ़ गई.

मतदाता सूची अपडेट: MP में लाखों नए नाम शामिल, एक लाख हटेंगे; 21 फरवरी को अंतिम सूची जारी

भोपाल मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के अंतर्गत प्राप्त 95 प्रतिशत दावे-आपत्तियों का निराकरण कर लिया गया है। एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम, उपनाम और आयु में कुछ त्रुटियां थीं, जिन्हें सुधरवाया गया है। वहीं, जिन साढ़े चार लाख मतदाताओं ने अधूरे गणना पत्रक जमा किए थे, उनकी भी सुनवाई कर ली गई है। मतदाता सूची में करीब आठ लाख नए नाम जुड़ेंगे और एक लाख हटेंगे। यह प्रक्रिया शनिवार को पूरी करने के बाद अब 21 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रारूप मतदाता सूची के आधार पर हुए दावे-आपत्ति का निराकरण जिलों में कराया गया है। जो भी आवेदन प्राप्त हुए उनका परीक्षण रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ने कराया है।   एसआईआर में जिनके गणना पत्रक अधूरे थे, उन्हें नोटिस देकर शिविर में बुलाया गया और यदि दस्तावेज पूरे थे तो उनके पक्ष में आदेश पारित किए गए। इसी तरह साफ्टवेयर ने जिन त्रुटियों को पकड़ा था, उन्हें भी दूर कराया गया है। उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने केवल शाब्दिक या आयु गणना की त्रुटि के कारण जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे, उनके नाम सूची से नहीं हटाने के लिए कहा था। वहीं, कांग्रेस, भाजपा सहित अन्य दलों के प्रतिनिधियों द्वारा जो शिकायतें की गई थीं, उनका भी निराकरण करवाया गया है। यदि नाम नही जुड़ा तो आगे भी विकल्प – यदि किसी पात्र मतदाता का नाम किसी भी कारण से इस सूची में शामिल नहीं हो पाता है तो ऐसा नहीं है कि उसका नाम आगे शामिल नहीं होगा। यह एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। वह फार्म छह भरकर अपना नाम जुड़वा सकेगा। इसी तरह नाम, पता आदि जानकारी में संशोधन भी फार्म आठ के माध्यम से हो सकेगा। सूची प्रकाशन के बाद सत्यापन कराएगी कांग्रेस उधर, कांग्रेस ने तय किया है कि 21 फरवरी को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद कांग्रेस बूथवार सूची का सत्यापन कराएगी। इसमें पार्टी की ओर से जो आपत्तियां की गई थीं, उनका निराकरण नहीं हुआ तो फिर चुनाव आयोग को शिकायत की जाएगी।

‘मैं जीवित हूं’ का विरोध प्रदर्शन: वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर कांग्रेस भवन में हंगामा, पूर्व MLA धनेंद्र ने उठाई जांच की मांग

रायपुर छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने भाजपा और निर्वाचन आयोग को फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है. अभनपुर विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है. धनेन्द्र साहू ने इसे साजिश बताते हुए प्रमाण भी दिया. प्रेस वार्ता में कई महिलाएं और पुरुष गले में मैं अभी जीवित हूं की तख्ती टांगकर मौजूद रहे. जो कथित तौर पर मृत बताकर मतदाता सूची से हटाए गए. वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा अपना जनाधार खो चुकी है, इसलिए जो मतदाता उसे वोट नहीं देते, उनके नाम मतदाता सूची से हटवाए जा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि अभनपुर विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-7 के जरिए करीब 21 हजार मतदाताओं के नाम काटे गए. निर्वाचन अधिकारी से जब फॉर्म-7 से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी गई, तो बीएलए की आपत्तियां देने से इनकार कर दिया गया. धनेंद्र साहू ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने बीएलए के माध्यम से 917 मतदाताओं के नाम विलोपित करवाए. लगभग हर बीएलए को 30 से 40 नाम हटाने के निर्देश दिए गए. जब कांग्रेस ने 914 नामों की जांच की, तो सभी संबंधित व्यक्ति उसी गांव और वार्ड में जीवित पाए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं द्वारा बीएलओ पर दबाव बनाया जा रहा है. कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात कर कहा कि झूठी जानकारी देकर नाम कटवाना आपराधिक कृत्य है. इस पर संबंधित थानों में केस दर्ज होना चाहिए. धनेंद्र साहू का आरोप है कि निर्वाचन आयोग एफआईआर दर्ज कराने को तैयार नहीं है. न तो आपत्तियों का प्रकाशन किया जा रहा है और न ही दावा-आपत्ति की जानकारी कांग्रेस संगठन को दी जा रही है. दबाव के बाद ही निर्वाचन आयोग जानकारी देने को बाध्य हुआ. कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और नियमों के पालन के साथ काम कराने की मांग की है. धनेंद्र साहू ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया में जिनका नाम कटा है, उनमें 70 प्रतिशत नाम मुस्लिम मतदाताओं के हैं. यह साजिश केवल अभनपुर में नहीं हो रही है. इधर बीएलए का कहना है कि उन्होंने आपत्ति नहीं की, भाजपा पार्टी के बड़े पदाधिकारी आए और साइन करवा लिए. धनेंद्र साहू ने कहा यह एक बड़ा षड्यंत्र है, जितने बीएलए हैं वह दूसरे गांव में शिकायत कर रहे हैं. धनेंद्र साहू ने एसआईआर में मतदाता लिस्ट से कटे नामों में करीब 70 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि यह साजिश सिर्फ अभनपुर तक सीमित नहीं है. बीएलए का कहना है कि उन्होंने कोई आपत्ति दर्ज नहीं की थी, बल्कि भाजपा के बड़े पदाधिकारी आए और उनसे साइन करवा लिए.

107 लोगों की मौत का मामला: SIR के खिलाफ बंगाल विधानसभा में प्रस्ताव मंजूर

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि राज्य में विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर फैली घबराहट और चिंता के कारण 107 लोगों की जान चली गई है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए SIR की प्रक्रिया चल रही है। सत्ताधारी दल TMC का आरोप है कि इस प्रक्रिया ने आम जनता के बीच भारी डर पैदा कर दिया है। लोगों को लग रहा है कि यह NRC का ही एक दूसरा रूप है, जिसके माध्यम से उनके नाम मतदाता सूची से काट दिए जाएंगे और उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े होंगे। नियम 169 के तहत प्रस्ताव पेश करते हुए राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया से मतदाताओं को परेशान किया गया और मानसिक तनाव के कारण 107 लोगों की मौत हो गई। निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए उन्होंने दावा किया कि राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग 'परेशान करने का आयोग बन गया है। विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला अभी उच्चतम न्यायालय में लंबित है, इसलिए विधानसभा इस पर विचार-विमर्श नहीं कर सकती। इस मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है: ममता बनर्जी का पक्ष: हाल ही में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में हर दिन 3-4 लोग इस 'SIR के डर' के कारण अपनी जान दे रहे हैं। उन्होंने इसे पिछले दरवाजे से NRC लाने की कोशिश करार दिया है। BJP का पलटवार: विपक्षी दल बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि टीएमसी सरकार लोगों के बीच जानबूझकर अफवाहें और डर फैला रही है ताकि चुनावी लाभ लिया जा सके। उन्होंने इन मौतों को निजी त्रासदियों का राजनीतिकरण बताया है। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद इस मामले में चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। इससे एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की जारी कवायद में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया ताकि 'लोकतंत्र की रक्षा की जा सके।' उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य को निशाना बनाया जा रहा है और इसके लोगों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। ममता बनर्जी बुधवार को उच्चतम न्यायालय में बहस करने वाली पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बन गईं। SIR क्या है और डर क्यों है? SIR चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है। हालांकि, बंगाल में विपक्ष और सरकार के बीच चल रहे टकराव के कारण यह एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। लोगों में डर है कि अगर उनके पास 1971 या पुराने दस्तावेज नहीं हुए, तो उन्हें अवैध घुसपैठिया घोषित कर दिया जाएगा, जैसा कि असम में NRC के दौरान देखने को मिला था। हालांकि चुनाव आयोग के अपने तर्क हैं।