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मतदाता सूची में बड़ा बदलाव: SIR प्रक्रिया अंतिम चरण में, लाखों नाम हो सकते हैं डिलीट

भोपाल प्रदेश में मतदाताओं के गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन शत-प्रतिशत हो गया है। गुरुवार रात 12 बजे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो जाएगी। 16 दिसंबर को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन होगा। इसमें प्रदेश भर के 30 से 35 लाख मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। इनमें मृत, स्थानांतरित, दो स्थान पर नाम वाले मतदाता शामिल हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जिले के विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची से नाम अधिक कटने की संभावना है।   वहीं, जिनके गणना पत्रक तो जमा हो गए लेकिन आवश्यक जानकारी नहीं दी गई है, उन्हें रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा नोटिस देकर दस्तावेज मांगे जाएंगे। एसआईआर में जो गणना पत्रक दिए गए, वे मतदाताओं को भरकर देने थे। इसमें वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनका या उनके माता-पिता, दादा-दादी में से किसी एक के नाम की जानकारी भी देनी थी। जिन मतदाताओं ने वर्ष 2003 के एसआईआर के आधार पर जानकारी न देकर केवल हस्ताक्षर करके गणना पत्रक दिए हैं, उनके नाम तो प्रारूप सूची में आएंगे लेकिन उन्हें नोटिस जारी होंगे। ऐसे मतदाताओं की संख्या करीब 12 लाख है। चूंकि, गणना पत्रक सभी मतदाताओं को जारी किए गए हैं इसलिए जिन मतदाताओं ने एक से अधिक स्थान पर गणना पत्रक जमा किए हैं, उनके नाम केवल एक स्थान पर रहेंगे।   इंदौर में 1.94 लाख मतदाताओं का नहीं मिला 2003 का रिकॉर्ड, अब देने होंगे दस्तावेज भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर सहित अन्य शहरी क्षेत्रों में ऐसे मतदाताओं के नाम अधिक कटेंगे क्योंकि यहां अपेक्षाकृत अधिक मतदाता रोजगार, पढ़ाई आदि कारणों से स्थानांतरित होते रहते हैं। मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की अलग से सूची बनेगी। यह संख्या 18 से 23 लाख हो सकती है। इनके नाम प्रारूप मतदाता सूची में नहीं आएंगे। प्रदेश कांग्रेस के संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि बूथ लेवल एजेंटों से जो जानकारी प्राप्त हो रही है, उसके अनुसार सूची में ऐसे मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में दर्ज हैं, जिनका या तो निधन हो चुका है या फिर दर्शाए पते पर रहते ही नहीं हैं। ऐसे सभी मतदाताओं के नाम सूची से हटेंगे। प्रारूप प्रकाशन के बाद बूथवार मतदाताओं का सत्यापन कराया जाएगा। इसके आधार पर दावा-आपत्ति होंगे। 16 दिसंबर को होगा प्रारंभिक प्रकाशन मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन 16 दिसंबर को होगा। इसमें जो नाम शामिल नहीं होंगे, उन्हें विलोपित माना जाएगा। सूची के आधार पर 15 जनवरी, 2026 तक दावा-आपत्ति होंगे। सात फरवरी तक इनका निराकरण रजिस्ट्रीकरण अधिकारी करेंगे। प्रारूप सूची में नाम नहीं आया तो भी अवसर यदि किसी भी कारण से प्रारूप मतदाता सूची में नाम नहीं आता है तो भी नाम जुड़वाने का अवसर रहेगा। इसके लिए दावा या आपत्ति की प्रक्रिया में भाग लेना होगा। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को निर्धारित पहचान पत्र बताने होंगे। इस आधार पर निर्णय होगा। एक नजर में 27 अक्टूबर, 2025 की स्थिति में मतदाता- 5,74,06,143 मतदान केंद्र- 65,014 गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन हुआ- 5,74,06,098

संशोधित समय-सारणी के साथ सेवा मतदाताओं की सूची हेतु विशेष पुनरीक्षण की घोषणा

सेवा मतदाताओं की सूची हेतु विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की संशोधित समय-सारणी जारी भोपाल  भारत निर्वाचन आयोग ने सेवा मतदाताओं (Service Voters) से संबंधित निर्वाचन सूची के अंतिम भाग की विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की संशोधित समय-सारणी जारी कर दी है। यह पुनरीक्षण 1 जनवरी 2026 की योग्यता तिथि के आधार पर किया जा रहा है। आयोग ने अपने पूर्व आदेश (दिनांक 04 नवंबर 2025) को निरस्त करते हुए नई समय-सारणी अधिसूचित की है, जिसे देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा, जिनमें अंडमान एवं निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, लक्षद्वीप, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। नई संशोधित समय-सारणी इस प्रकार है 1. निर्वाचन सूची के अंतिम भागों का प्रारंभिक प्रकाशन तारीख: 16 दिसंबर 2025 2. रिकॉर्ड/कमांडिंग अधिकारियों द्वारा फ़ॉर्म प्राप्त करने, सत्यापन, स्कैनिंग और XML फ़ाइल तैयार व अपलोड करने की अवधि अवधि: 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक 3. हस्ताक्षरित एवं सत्यापित फ़ॉर्मों तथा XML फ़ाइलों का निपटान अधूरे फ़ॉर्म और XML फ़ाइलें वापस की जाएंगी संशोधित फ़ॉर्मों का पुनः प्रेषण अंतिम आदेश ERO द्वारा जारी अंतिम तिथि: 7 फरवरी 2026 4. निर्वाचन सूची के अंतिम भागों का अंतिम प्रकाशन तारीख: 14 फरवरी 2026 चुनाव आयोग ने सभी संबंधित मंत्रालयों—रक्षा, गृह, विदेश मंत्रालय—तथा सीमा सड़क संगठन और संबंधित राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस संशोधित कार्यक्रम का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। आयोग के सचिव  पवन दीवान ने बताया कि यह कदम सेवा मतदाताओं के अद्यतन एवं सटीक पंजीकरण को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, ताकि आगामी चुनावों में उनकी सहभागिता सुगम और व्यवस्थित रहे।  

SIR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: मध्यप्रदेश में 8.13 लाख मृत मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल, 99% फॉर्म डिजिटलाइज

भोपाल   मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम लगातार जारी है। जिसके तहत एन्युमरेशन फॉर्मों को डिजिटलाइज करने का काम जारी है। निर्वाचन सदन के मुताबिक 99 प्रतिशत से ज्यादा फॉर्म डिजिटलाइज किए जा चुके है। जिसके तहत मध्यप्रदेशमें अब तक 8.13 लाख मृत मतदाताओं की पहचान की जा चुकी है। 2,43 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं। जिनके दो जगह नाम मिले है। 10 दिसंबर तक बैठकें आयोजित निर्वाचन सदन द्वारा फॉर्म प्रकाशन और प्राप्ति के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की पहचान और सत्यापन के लिए बैठकें होंगी। सभी मतदान केंद्रों पर 6 दिसंबर से 10 दिसंबर तक बीएलओ बीएलए और अन्य सहयोगियों की बैठकें आयोजित की जाएगी। चुनाव आयोग के निर्देश पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय सभी जिलों में एसआईआर प्रक्रिया तेजी से करवा रहा है और दिन में तीन बार कलेक्टरों से रिपोर्ट ले रहा है। 27 अक्टूबर को वोटर लिस्ट फ्रीज होने के बाद 4 नवंबर से एसआईआर का कार्य शुरू हुआ था, जिसका प्रारूप परिणाम 16 दिसंबर को प्रकाशित होगा। अभी शिफ्टेड मतदाताओं की सूची प्राप्त नहीं हुई है, जो प्रकाशन से पहले स्पष्ट की जाएगी। फार्म नहीं भरा तो कट सकता है वोट मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं को एसआईआर फार्म मिला है, उन्हें 2003 की एसआईआर के आधार पर परिजनों/खुद की जानकारी देना अनिवार्य है। यदि कोई मतदाता बीएलओ के लगातार प्रयासों के बाद भी फार्म जमा नहीं करता, तो उसका नाम भी 16 दिसंबर की सूची से हटाया जा सकता है। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन ने अपील की है कि सभी मतदाता समय रहते फार्म जमा करें, ताकि नाम कटने की स्थिति से बचा जा सके। किन जिलों में सबसे अधिक मृत वोटर्स? सूत्रों के अनुसार जबलपुर और सागर में मृत मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा, जबकि सीहोर और पन्ना में सबसे कम पाई गई है। हालांकि आयोग ने इन आंकड़ों को अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है। 10 दिसंबर तक होगा सत्यापन एसआईआर कार्यवाही के तहत अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डबल-एंट्री वाले मतदाताओं की पहचान के लिए 10 दिसंबर तक हर मतदान केंद्र पर BLO–BLA की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। प्रदर्शित सूचियों का राजनीतिक दलों से अवलोकन कराने और 11 दिसंबर तक आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा तय की गई है, ताकि BLO ऐप के माध्यम से समय पर संशोधन किया जा सके। जबलपुर और साग्र में सबसे ज्यादा मामले एसआइआर से मिले अब तक के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा मृत मतदाता प्रदेश के जबलपुर और सागर जिले में चिह्नित हुए हैं। और सबसे कम सीहोर और पन्ना में मिले है। हालांकि एसआइआर प्रक्रिया अभी जारी होने से आंकड़ों में बढ़ोत्तरी संभव है। इन नामों को सूची से बाहर किया जाएगा। वहीं गणना पत्रक प्राप्त होने पर अनुपस्थित स्थानांतरित, मृत एवं वोहरी प्रविष्टि को छोड़कर अन्य के नाम प्रारूप सूची में शामिल होंगे।

एसआईआर की बड़ी उपलब्धि: सभी आठ विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता गणना पत्रकों का शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन कार्य पूरा

एसआईआर :-जिले ने तीन दिन पहले हासिल की बड़ी उपलब्धि सभी आठ विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के गणना पत्रकों के शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण. जबलपुर   मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम के अंतर्गत जबलपुर जिले के नाम बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। विधानसभा क्षेत्र जबलपुर केंट के मतदाताओं के गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के साथ ही आज सोमवार को जिले की सभी आठ विधानसभा क्षेत्र में तीन दिन शेष रहते शत-प्रतिशत गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन पूर्ण कर लिया गया है। जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों पाटन, बरगी, सिहोरा, पनागर, जबलपुर उत्‍तर, जबलपुर पश्चिम एवं जबलपुर पूर्व में यह काम पहले ही पूरा कर लिया गया था।  जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्‍टर राघवेन्‍द्र सिंह ने जिले की आठों विधानसभा क्षेत्र में शत-प्रतिशत मतदाताओं के गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा होने पर सभी बीएलओ एवं बीएलओ के सहायकों, बीएलओ सुपरवाईजर, सेक्‍टर अधिकारियों तथा निर्वाचक रजिस्ट्रिकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रिकरण अधिकारी को बधाई दी है। श्री सिंह ने एसआईआर के अंतर्गत मतदाताओं के घर-घर सत्‍यापन, गणना पत्रकों का वितरण और गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के कार्य के प्रति इन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लगन और निष्‍ठा की सराहना भी की है।  जिला निवार्चन कार्यालय से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम जिले के 19 लाख 25 हजार 472 मतदाताओं में से 2 लाख 62 हजार 722 मतदाताओं के गणना प्रपत्र प्राप्‍त नहीं हुए हैं। इन मतदाताओं में 50 हजार 992 मृत, 77 हजार 450 अनुपस्थित, 1 लाख 18 हजार 898 स्‍थाई तौर पर स्‍थानांतरित मतदाता भी शामिल है। गणना प्रपत्र प्राप्‍त नहीं होने पर ऐसे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाये जा सकते हैं।   जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार जिन मतदाताओं के गणना प्रपत्र नहीं भरे हैं, वे अभी भी 9, 10 और 11 दिसम्‍बर को अपने बीएलओ से संपर्क कर अपने गणना प्रपत्र भरकर सौंप सकते हैं, अन्‍यथा उनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सकेगा। ऐसे मतदाताओं जिनके गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुये हैं उनके नाम 16 दिसम्‍बर को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में मतदान केन्‍द्रों पर रखे जायेंगे तथा इन पर दावे-आपत्तियां प्रस्‍तुत की प्रक्रिया की जा सकेंगी।  जिला निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक ऐसे मतदाता जिनके गणना प्रपत्र डिजिटाइज्ड किये जा चुके हैं उनमें 1 लाख 15 हजार 490 ऐसे मतदाता भी हैं जिनका 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हो सकी हैं, उन्‍हें नोटिस जारी किये जायेंगे। ऐसे मतदाताओं को 16 दिसम्‍बर को प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद दावे-आपत्ति प्राप्‍त करने की प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दस्‍तावेजों में से आवश्‍यक दस्‍तावेज प्रस्‍तुत करने होंगे।  जिला निर्वाचन कार्यालय से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार एएसडीआर (अनुपस्थित, स्‍थानांतरित, मृत और रिपिटेड) श्रेणी के ऐसे मतदाता जिनके गणना प्रपत्र प्राप्‍त नहीं हुए हैं, उनमें विधानसभा क्षेत्र पाटन के 21 हजार 608, बरगी में 24 हजार 308, जबलपुर पूर्व में 51 हजार 015, जबलपुर उत्‍तर में 27 हजार 176, जबलपुर केंट में 41 हजार 801, जबलपुर पश्चिम 47 हजार 139, पनागर 31 हजार 123 एवं सिहोरा विधानसभा क्षेत्र के 18 हजार 552 मतदाता शामिल हैं। एएसडीआर श्रेणी के ये मतदाता जिले के कुल मतदाताओं का 13.64 प्रतिशत हैं।

चुनावी झटका: भोपाल में 4 लाख मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, 2 लाख वोटरों पर खतरा

भोपाल राजधानी में लगभग चार लाख मतदाताओं का काम होना तय माना जा रहा है तो वहीं दो लाख से अधिक मतदाताओं के नाम पर तलवार लटक रही है। जिले के सात विधानसभा क्षेत्र में चार नवंबर को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम शुरू हुआ था, जिसके तहत अब तक चार विधानसभा क्षेत्र में 100 प्रतिशत पूरा हो चुका है। वहीं बचे हुए तीन विधानसभा क्षेत्र में कुल 23 हजार पत्रक जमा करना शेष रह गए हैं। इस तरह भोपाल ने तय समय सीमा से पहले ही गणना पत्रक वितिरित व जमा करने का काम पूरा कर लिया है। इसके लिए कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने शनिवार को हुजूर विधानसभा क्षेत्र की टीम काे सम्मान कर प्रत्सोहित किया।   बता दें कि जिले में कुल 21 लाख 24 हजार 773 गणना पत्रक वितरित किए गए थे, जिनमें से अब तक 21 लाख एक हजार 697 पत्रक जमा करते हुए 98.86 प्रतिशत काम पूरा किया जा चुका है। जिले के सात विधानसभा क्षेत्र हुजूर, उत्तर और मध्य में शनिवार को 100 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। इस तरह उत्तर में 2 लाख 49 हजार 710,हुजूर में 3 लाख 87 हजार 135 और मध्य में दो लाख 44 हजार 245 मतदाताओं के गणना पत्रक जमा किए जा चुके हैं। भोपाल जिले में मदताओं के आंकड़ें विवरण     संख्या कुल मतदाता     21,25,908 गणना पत्रक वितरित     21,24,773 डिजिटाइज गणना पत्रक     17,02,349 अनकलेक्टेबल गणना पत्रक     3,99,348 कुल जमा गणना पत्रक     21,01,697 नो मैपिंग वाले पत्रक     2,17,548 वहीं दक्षिण-पश्चिम में दो लाख 34 हजार 104 में से दो लाख 33 हजार 722, नरेला में तीन लाख 54 हजार 530 में से तीन लाख 40 हजार 806 और गोविंदपुरा में चार लाख एक हजार 142 में से तीन लाख 92 हजार 155 पत्रक जमा किए गए हैं। इन तीनों विधानसभा क्षेत्र में रविवार को काम खत्म होने के साथ ही एसआइआर की प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी। 17 लाख मतदाताओं के पत्रक हुए डिजिटाइज जिले में एसआईआर के दौरान 21 लाख 24 हजार 773 मतदाताओं के गणना पत्रक वितरित किए गए थे, जिनमें से कुल 17 लाख दो हजार 349 गणना पत्रक डिजिटाइज किए गए हैं। जबकि 3 लाख 99 हजार 348 पत्रक अनकलेक्टेबल हैं, जिनका नाम मदताता सूची से कम होना तय माना जा रहा है। इस तरह जिले में 21 लाख में से 17 लाख ही मतदाता शेष रहने की उम्मीद जताई जा रही है। 2.17 लाख मतदाताओं को मिलेगा नोटिस सात विधानसभा क्षेत्र में 2 लाख 17 हजार 548 मतदाता ऐसे हैं, जिनको निर्वाचन शाखा द्वारा नोटिस भेजा जाएगा।यह वह मतदाता हैं, जिनके मात-पिता, दादा-दादी और स्वयं का मतदाता सूची 2003 में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। ऐसे में अब इनसे दस्तावेज मांगे जाएंगे, जिनके आधार पर ही इनके नाम सूची से कम करने और जोड़े रखने पर निर्णय लिया जाएगा। यह होते हैं अनकलेक्टेबल मतदाता जिन 3 लाख 99 हजार 348 अनकलेक्टेबल मतदाताओं के नाम सूची से कम किए जाने की संभावना है, उनमें ऐसे मतदाता शामिल हैं, जिन्होंने जिला छोड़ दिया है, मृत्यु हो गई है, दो जगह नाम है या फिर मिले ही नहीं है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले इनके नामों पर गहन परीक्षण किया जाएगा, जिससे किसी मतदाता का नाम अनावश्यक रूप से कम न हो।

वक्फ और बागी हुमायूं: ममता के ‘खेला’ में BJP को मदद करेगी ये तीन शक्तियां

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अब तक के सबसे मुश्किल हालात का सामना कर रही हैं. उनकी हालत सांप-छछुंदर जैसी हो गई है. न निगलते बन रहा है और न उगलते. हिन्दू तो पहले से ही साथ छोड़ने लगे थे, अब उनकी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति भी खत्म होती दिख रही है. हिन्दू वोटर भाजपा की ओर मुखातिब हो गए हैं. पिछली बार 77 भाजपा विधायकों का निर्वाचन बंगाल में उसके प्रति लोगों के बढ़ते आकर्षण का स्पष्ट संकेत था. अव्वल तो गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) ने वैसे मुसलमानों में उनकी छवि को गहरी चोट पहुंचाई है, जो बांग्लादेश और म्यांमार से आकर पश्चिम बंगाल को सुरक्षित ठिकाना बनाए हुए थे. दूसरा संकट बन कर उभरे हैं उनके ही निलंबित विधायक हुमायूं कबीर. कबीर का खेल कामयाब हुआ तो ममता बनर्जी का सारा खेल चौपट हो सकता है. कबीर का कहना है कि ममता बनर्जी अल्पसंख्यक वोटों के बूते 15 साल से सत्ता में बनी हुई हैं. इस बार अल्पसंख्यक उन्हें सबक सिखाएंगे. हुमायूं कबीर राज्य की अल्पसंख्यक बहुल 90 सीटों पर नजर गड़ाए हुए हैं. वक्फ पर अपने स्टैंड से मुकरीं ममता ममता बनर्जी ने पहले कहा था कि बंगाल में वे वक्फ कानून लागू नहीं होने देंगी. इसे लेकर सड़क से लेकर संसद तक उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बवाल मचाया था. बंगाल के मुस्लिम इस बात से आह्लादित थे कि उनके मुद्दे पर ममता का साथ मिल गया है. पर, ममता अपने स्टैंड से अब मुकर गई हैं. उन्होंने बड़ी आसानी से इसे बंगाल में लागू करा दिया. उन्होंने वक्फ संपत्ति का ब्योरा इसके लिए भारत सरकार द्वारा बनाए गए पोर्टल पर अपलोड करने की इजाजत दे दी. बंगाल के मुसलमानों में उनके प्रति नफरत की यह बड़ी वजह बन गई है. उन्हें लगने लगा है कि ममता भी अब उनके लिए भाजपा से कम खतरनाक नहीं रह गई हैं. बिहार में चुनाव के दौरान आरजेडी नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरा तेजस्वी यादव भी वक्फ कानून को डस्टबिन में डालने की बात कहते थे. चुनाव में महागठबंधन की जैसी दुर्गति हुई, शायद ममता के रुख में उसे देख कर ही बदलाव आया है. SIR से बिगड़ गया है ममता का खेल बंगाल में SIR की चर्चा शुरू होते ही ममता बनर्जी ने आसमान सिर पर उठा लिया था. इसे रोकने के लिए उन्होंने तरह-तरह के हथकंडे अपनाए. उनके विरोध का सिलसिला अब भी जारी है. SIR के भय से बांग्लादेश भाग रहे घुसपैठियों को वे सांत्वना दे रही हैं कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं. उन्हें वे वापस बुलाएंगी. ममता बनर्जी तो पहले यहां तक कहती थीं कि बंगाल में कोई घुसपैठिया नहीं. आश्चर्य होता है कि अब से ठीक 20 वर्ष पहले ममता बनर्जी ने लोकसभा में घुसपैठियों की बढ़ती आबादी पर जिस तरह बवाल काटा था, वह अब उसके उलट कैसे बोल रही हैं. दरअसल बांग्लादेशी घुसपैठिए बंगाल की राजनीति की रीढ़ रहे हैं. माल्दा, मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती जिलों में इनकी भरमार है. किसी की विधायकी-सांसदी चुने जाने की चाबी बांग्लादेशी घुपैठियों के ही हाथ में है. बहरहाल ममता की लाख बाधा पहुंचाने की कोशिशों पर चुनाव आयोग ने पानी फेर दिया है. ममता कुछ कर नहीं पाईं. अब हुमायूं से पड़ा है ममता का पाला अल्पसंख्यक वोटरों को खुश करने के लिए ममता बनर्जी ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. इमामों को तनख्वाह तय करना हो या धार्मिक जुलूसों का आयोजन हो; ममता हमेशा उनके साथ खड़ी रही हैं. लेकिन, अब स्थिति बदल गई है. ममता बनर्जी की ही पार्टी के एक विधायक हैं हुमायूं कबीर. उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मसिजद का राग छेड़ कर ममता को हलकान कर दिया है. ममता बनर्जी ने उनके इस आचरण के लिए पार्टी से निलंबित तो कर दिया है, लेकिन वे कितने दिनों तक इस पर अमल कर पाएंगी, यह देखने वाली बात होगी. इसलिए कि मूल रूप से कांग्रेसी रहे हुमायूं कबीर के लिए यह दूसरा मौका है, जब उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया है. इससे पहले भी उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किया गया था. फिर 2021 में उनकी वापसी हो गई. टीएमसी ने हुमायूं कबीर के निलंबन पर सफाई दी है कि उन्हें बाबरी मसिजद निर्माण के लिए नहीं, बल्कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित किया गया है. कौन हैं निलंबित MLA हुमायूं कबीर? हुमायूं कबीर 2021में टीएमसी के टिकट पर मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. वे बनर्जी के मंत्रिमंडल में भी शामिल होते रहे हैं. उन्हें पार्टी ने हाल ही में निलंबित किया है. इसके पहले भी उन पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है. इस बार बाबरी मस्जिद प्रकरण को लेकर उन्हें निलंबित किया गया है. पहली बार 2011 में ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद वे उनके मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने थे. वे अक्सर विवादों का केंद्र बनते रहे हैं. 2015 में उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेता ममता बनर्जी पर आरोप लगाया था कि वे अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को ‘राजा’ बनाना चाहती हैं. इसकी प्रतिक्रिया इस रूप में सामने आई कि उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया गया. 2021 में उनका वनवास खत्म हुआ और टीएमसी ने उन्हें भरतपुर से चुनाव लड़ने का मौका दिया. वे विधायक निर्वाचित हुए. हुमायूं ने बाबरी मस्जिद बनाने की ठानी हुमायूं कबीर ने ऐलान किया था कि मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाई जाएगी. उन्होंने इसके लिए आज (6 दिसंबर 2025) का दिन भी मुकर्रर कर दिया था. बाबरी विध्वंस की वर्षगांठ पर नींव रखने की उनकी घोषणा को टीएमसी ने सांप्रदायिक राजनीति करार दिया और इस आरोप में उन्हें सस्पेंड कर दिया है. ममता बनर्जी ने उन्हें आरएसएस का मुखौटा करार दिया है. लोकसभा चुनाव के दौरान भी हुमायूं कबीर को बोल बिगड़े थे. उन्होंने कहा था- ‘हिंदुओं को भागीरथी नदी में डुबो देंगे, क्योंकि मुर्शिदाबाद में 70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. उन्होंने तो अब यह भी कहा है कि मुस्लिम बहुल सीटों पर अल्पसंख्यक ममता बनर्जी को पाठ पढ़ा देंगे. वे नई पार्टी बनाने का ऐलान भी कर चुके हैं. बंगाल में सांप्रदायिक राजनीति की नींव वर्ष 2011 में हुई जनगणना के अनुसार बंगाल की 9.13 करोड़ … Read more

भा.ज.पा. विधायक दल की बैठक में सीएम ने एसआईआर प्रक्रिया पर दी अहम दिशा-निर्देश

भोपाल  मध्य प्रदेश में चल रहे मतदाता सूचियों का विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के काम की निगरानी अब भाजपा विधायक भी करेंगे। वे अपनी टीम बनाकर अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में बूथवार नजर रखेंगे। मुख्यमंत्री निवास में शुक्रवार को हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में एसआईआर का उठा मुद्दा उठा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आने वाले डेढ़ माह हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक विधायक को एसआईआर की प्रक्रिया में पूर्ण सक्रियता और समर्पण के साथ शामिल होना होगा, क्योंकि आने वाले चुनाव इसी मतदाता सूची के आधार पर होंगे। वन नेशन, वन इलेक्शन की व्यवस्था के अंतर्गत होने वाले चुनाव भी इसी सूची पर आधारित होंगे। विधायक अपनी टीम के साथ इस पर नजर रखें कि मतदाता सूची में कोई पात्र छूट न और अपात्र का नाम न जुड़ सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 में सहकारिता और कृषि मंडी चुनाव कराएंगे। इसके बाद 2027 में निकाय और 2028 में विधानसभा के चुनाव होंगे। इस हिसाब से देखें तो 2026 से हर साल लगातार चुनाव होंगे। इसलिए एसआईआर को लेकर बूथ स्तर तक गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। सभी जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में समन्वय, संवाद और संगठन की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दें, ताकि एसआईआर प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो सके। रोजगार और विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि सभी जगह एल्डरमेन, जनभागादारी, रोगी कल्याण आदि समितियों की घोषणा जल्द की जानी है। इसलिए सभी जिलों में पार्टी संगठन और वरिष्ठ नेताओं के साथ समन्वय बनाकर इस दिशा में आगे बढ़ें। विधायक बीते दो सालों में प्रदेश में हुए विकास कार्यों का लेखा-जोखा जनता तक पहुंचाएं। दो वर्षों में आठ लाख करोड़ के विकास कार्य होना, रोजगार एवं विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि है। विकास कार्यों के मद्देनजर आपके क्षेत्र में क्या बेहतर हो सकता है, इस संबंध में सांसद, पूर्व सांसद, विधायकों से विचार-विमर्श कर एक विजन डाक्यूमेंट तैयार करें। भाजपा विधायक दल की बैठक में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ल मंचासीन रहे। बैठक का संचालन संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने किया। विधायक भाजपा जिला कार्यालयों में बैठकर कार्यकर्ताओं और जनता की सुने समस्याएं : खंडेलवाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों की नियमित उपलब्धता संगठन और शासन के बीच संवाद को और अधिक मजबूत बनाएगी। मंत्रियों की तरह ही विधायक सप्ताह में एक दिन जिला अध्यक्ष और सांसद के साथ जिला कार्यालय में बैठकर कार्यकर्ताओं और जनता की समस्याएं सुनें। इससे कार्यकर्ताओं की हिचक समाप्त होगी और संगठन के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। हम सभी भाजपा के कार्यकर्ता हैं, इसलिए सदैव व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर संगठन के हित में कार्य करें। प्रत्येक विधायक अपना अधिकतम समय एसआइआर में केंद्रित करें और वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव को चुनौती के रूप में लें। सभी विधायक अपने क्षेत्रों में बूथ स्तर तक जाकर संगठन की गतिविधियों का नियमित निरीक्षण करें और कार्यकर्ताओं से निरंतर संवाद बनाए रखें। एसआईआर प्रक्रिया में विधायकों की सक्रियता अनिवार्य : हितानंद भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद ने कहा कि इस वर्ष अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मशताब्दी वर्ष मना रहे है, जिसका समापन 25 दिसंबर को ग्वालियर और रीवा के कार्यक्रमों में केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में होगा। 16 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होगी। उन्होंने बूथ स्तर पर सूची का सावधानीपूर्वक अवलोकन करने और यदि किसी मतदाता का नाम गलत जुड़ा है या किसी का छूटा है तो संबंधित दावे-आपत्तियां सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि मतदाता सूची का सही और पूर्ण शुद्धिकरण हो सके। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने बिहार में भ्रम फैलाने की कोशिश की लेकिन वे सफल नहीं हुए।

एसआईआर :- 96.19 फीसदी मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण.

एसआईआर :- 96.19 फीसदी मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण.  सिहोरा विधानसभा में भी हुआ शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा. जबलपुर   मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) के अंतर्गत जिले में 96.19 प्रतिशत मतदाताओं के गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा किया जा चुका है। इनमें 12.07 फीसदी एएसडीआर श्रेणी के मतदाता तथा ऑनलाइन गणना प्रपत्र भरने वाले मतदाता भी शामिल हैं।  जिले की आठ विधानसभा क्षेत्र में से आज गुरूवार को विधानसभा क्षेत्र सिहोरा ने भी शत प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रत्रकों के डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया है। विधानसभा क्षेत्र पाटन और बरगी में दो दिन पहले शत-प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रपत्रों के डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा किया जा चुका है।  जिला निर्वाचन कार्यालय से प्राप्‍त गुरूवार की शाम 8 बजे तक की रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा क्षेत्र पनागर में 99.60, विधानसभा क्षेत्र जबलपुर उत्‍तर में 94.11, विधानसभा क्षेत्र जबलपुर पश्चिम में 92.68, विधानसभा क्षेत्र जबलपुर पूर्व में 91.87 तथा विधानसभा क्षेत्र जबलपुर केंट में 89.05 फीसदी मतदाताओं के गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन पूर्ण हो चुका है।  जिले में कुल मतदाताओं की संख्‍या 19 लाख 25 हजार 472 है। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार इनमें से एएसडीआर श्रेणी के मतदाताओं को मिलाकर अभी तक 18 लाख 52 हजार 018 मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। एएसडीआर की श्रेणी में अभी तक 2 लाख 32 हजार 391 मतदाताओं की संख्‍या दर्ज हुई है। इनमें मृत मतदाताओं की संख्‍या 49 हजार 969, अनुपस्थित मतदाताओं की संख्‍या 55 हजार 603, स्‍थायी रूप से स्‍थानांतरित मतदाताओं की संख्‍या 1 लाख 12 हजार 838 है तथा अन्‍य मतदाताओं की संख्‍या 1 हजार 322 है। मतदाताओं के गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन में 12 हजार 641 मतदाताओं द्वारा भरे गये ऑनलाइन गणना प्रपत्र भी शामिल है। कुल डिजिटाइजड गणना पत्रकों में नो मैपिंग वाले मतदाताओं की संख्‍या 1 लाख 36 हजार 807 है।

जमीन गाइडलाइन और सरकार के दो साल पर भूपेश बघेल का वार, बोले— SIR के खिलाफ माहौल बना

रायपुर SIR को लेकर सियासत जारी है। दिल्ली से लौटे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दौरे को लेकर कहा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। देश में SIR के खिलाफ माहौल बना है, जिससे सरकार को झुकना पड़ा और संसद में चर्चा पर तैयार होना पड़ा। पहले मान लेते तो 2 दिन बर्बाद नहीं होता, इसकी जिम्मेदार सरकार है। जमीन गाइडलाइन पर बृजमोहन अग्रवाल की चिट्ठी को लेकर भूपेश बघेल ने कहा, बृजमोहन खुद बता रहे हैं कि सरकार में उनकी चलती नहीं है। हमने 30% गाइडलाइन कम की थी, इससे रियल एस्टेट में जान आ गई थी। मिडिल क्लास अपने सपने पूरे कर पा रहे थे। अब नई गाइडलाइन से बड़े लोग भी जमीन नहीं खरीद पाएंगे। सरकार शायद अपने आकाओं के करीबी लोगों के लिए योजना ला रही है। प्रदेश सरकार के 2 साल पूरे होने पर पूर्व सीएम बघेल ने कहा, सरकार के 2 साल पूरे होने से पहले ही लोग सड़कों पर उतर आए हैं। व्यापारी, बेरोजगार, कर्मचारी, सब परेशान हैं। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। यह पर्ची वाली सरकार है, जो अहमदाबाद और दिल्ली से चलती है। अंबिकापुर कोयला खदान विवाद पर भूपेश बघेल ने कहा, नियमों का पालन नहीं होगा तो टकराव होगा। जमीन छीनी जाएगी, मुआवजा नहीं मिलेगा तो गरीब क्या करेंगे? भिलाई, दुर्ग के बाद अब सरगुजा, लगातार ऐसे आंदोलन सरकार की निकम्मेपन का नतीजा है। बीजापुर मुठभेड़ में 12 नक्सली ढेर हुए और 3 जवान शहीद हुए, इस पर बघेल ने कहा, शहीद जवानों को श्रद्धांजलि, परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। PMO का नाम सेवा तीर्थ करने पर उन्होंने कहा, प्रभु दर्शन के लिए तीर्थ पर जाते हैं। PMO को तीर्थ घोषित कर दिया गया है। क्या यह आम जनता के लिए खोला जाएगा? VIP और आम भक्त के लिए अलग व्यवस्था तो नहीं? इसमें जनरल के लिए कोई जगह नहीं है। नेहरू-बाबरी मस्जिद बयान पर राजनाथ सिंह को लेकर पूर्व सीएम ने कहा, राजनाथ सिंह को गंभीर मंत्री मानते थे पर उन्होंने हल्का बयान दिया। यदि तथ्य हैं तो सामने रखें, समाज को बांटने का काम न करें। 50–60 साल पुरानी बातें उठाते हैं, वर्तमान मुद्दों पर चुप क्यों हैं?

डिजिटल रिकॉर्ड की रफ्तार तेज: एसआईआर के दूसरे चरण में 47.5 करोड़ फॉर्म अपलोड, 11 दिसंबर तक कर सकेंगे ई-एफ सबमिट

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण ने एक और महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है। आयोग द्वारा दी गई ताजा जानकारी के अनुसार, देशभर में 47.5 करोड़ से अधिक यानी 93 प्रतिशत से ज्यादा एन्यूमरेशन फॉर्म (ईएफ) का डिजिटलाइजेशन पूरा हो चुका है। इस अभियान के तहत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे व्यापक मतदाता सत्यापन कार्य में 99.83 प्रतिशत यानी 50.88 करोड़ से भी अधिक मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाए जा चुके हैं। आयोग ने बताया कि एन्यूमरेशन फॉर्म भरने और जमा करने की अंतिम तारीख 11 दिसंबर है। यानी मतदाताओं के पास अब भी कुछ दिन बचे हैं, जिसमें वे अपने विवरण की पुष्टि, सुधार या बदलाव करा सकते हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दैनिक बुलेटिन के अनुसार, लक्षद्वीप, गोवा, अंडमान-निकोबार जैसे छोटे राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 100 प्रतिशत फॉर्म वितरण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी 99 प्रतिशत से अधिक फॉर्म वितरित हो चुके हैं। डिजिटलाइजेशन में सर्वाधिक प्रगति लक्षद्वीप, गोवा और अंडमान-निकोबार में दिखी है, जहां 97 से 100 प्रतिशत तक फॉर्म डिजिटाइज हो चुके हैं। सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश में 13.27 करोड़ फॉर्म (85 प्रतिशत) डिजिटलाइज्ड हो चुके हैं, जबकि फॉर्म वितरण 99.87 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। देशभर में 5,32,828 बीएलओ और 12 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट्स इस अभियान में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। ईसीआई का स्पष्ट उद्देश्य है कि हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो, अनुचित/दोहराई गई प्रविष्टियां हटें और चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और मजबूत बने। आयोग ने राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया है कि वे अधिक बीएलओ नियुक्त करें ताकि फॉर्म की समीक्षा और सत्यापन में सहयोग किया जा सके। मतदाता अपने बीएलओ या ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म भरकर जमा कर सकते हैं। आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपने विवरण सत्यापित कर दें ताकि आने वाले चुनावों के लिए सूची पूरी तरह तैयार हो सके।