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नगरीय निकायों एवं पंचायतों की मतदाता सूची में नाम जोड़ने- काटने के लिये पहली बार ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

नगरीय निकायों एवं पंचायतों की मतदाता सूची में नाम जोड़ने- काटने के लिये पहली बार ऑनलाइन आवेदन की सुविधा 8317 आवेदकों ने किया ऑनलाइन आवेदन भोपाल राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव ने बताया है कि प्रदेश में पहली बार नगरीय निकायों एवं त्रि-स्तरीय पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं को नाम जोड़ने, कटवाने और नाम संशोधन के लिये ऑनलाइन सुविधा दी गयी। इस सुविधा का लाभ लेते हुए कुल 8317 आवेदकों ने ऑनलाइन आवेदन किया। इनमें से नगरीय निकायों में 1496 और पंचायतों में 6848 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए। नगरीय निकायों में 675 ऑनलाइन आवेदन नाम जोड़ने, 770 नाम कटवाने और 24 आवेदन नाम में संशोधन के लिये प्राप्त हुए हैं। वहीं त्रि-स्तरीय पंचायतों में 1701 आवेदन नाम जुड़वाने, 4960 नाम कटवाने और 187 आवेदन नाम में संशोधन के लिये प्राप्त हुए हैं। इन सभी आवेदनों पर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।  

चुनाव आयोग की बड़ी तैयारी! मुक्तसर में हर वोटर तक पहुंचेगा अमला, शुरू होगा विशेष पुनरीक्षण अभियान

 श्री मुक्तसर साहिब  भारत चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत जिले में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाएगा। जिला चुनाव अधिकारी सह उपायुक्त अमित कुमार पंचाल ने बताया कि जिले में 25 जून से 24 जुलाई तक विशेष अभियान चलाकर घर-घर जाकर मतदाताओं से फार्म भरवाए जाएंगे। जिला चुनाव अधिकारी ने बताया कि इस अभियान के लिए पूरे चुनावी अमले की ड्यूटी लगा दी गई है। जिले में 753 बूथ स्तरीय अधिकारी, 81 सुपरवाइजर, चार निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और आठ सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बूथ स्तरीय अधिकारी को औसतन 300 घर और लगभग 1200 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी गई है ताकि काम सुचारु रूप से पूरा किया जा सके। उन्होंने बताया कि 15 जून से 24 जून तक बूथ स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षण देने और अन्य प्रशासनिक तैयारियों का कार्य किया जाएगा। इसके बाद 25 जून से घर-घर जाकर विशेष पुनरीक्षण अभियान शुरू होगा। दोहरी वोट रखना अपराध जिला चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दोहरी वोट रखना भारतीय संविधान के अनुसार अपराध है, जिसके लिए एक वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जिले के सभी मतदाताओं को इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत फार्म भरना अनिवार्य होगा। उपायुक्त ने बताया कि जिला चुनाव कार्यालय द्वारा की गई प्रारंभिक मैपिंग के तहत जिले के कुल 6 लाख 91 हजार 402 मतदाताओं में से 6 लाख 38 हजार 878 मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। यह कुल मतदाताओं का 92.40 प्रतिशत है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जानें SIR के लिए जरूरी बातें उन्होंने बताया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2003 को योग्यता तिथि निर्धारित की गई है। इसके अलावा मतदान केंद्रों को तर्कसंगत बनाने का कार्य 24 जुलाई 2026 तक पूरा किया जाएगा। मतदाता सूची का प्रारूप 31 जुलाई 2026 को प्रकाशित होगा। उन्होंने जानकारी दी कि मतदाता सूचियों से संबंधित दावे और आपत्तियां 31 जुलाई से 30 अगस्त 2026 तक जमा करवाई जा सकेंगी, जबकि इनका निपटारा 28 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। जिला चुनाव अधिकारी ने जिले के सभी मतदाताओं से अपील की कि वे इस अभियान में चुनाव अमले का पूरा सहयोग करें ताकि मतदाता सूचियों को पूरी तरह सही और पारदर्शी बनाया जा सके।

बंगाल चुनाव में 18% वोटिंग, ममता का गड़बड़ी का आरोप, नादिया में BJP वर्कर पर हमला

कलकत्ता पश्चिम विधानसभा चुनाव के लिए आज दूसरे चरण की वोटिंग जारी है। मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हो चुका है लेकिन मतदान केंद्रों पर सुबह 6 बजे से ही मतदाताओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी।पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की मुख्य बातें: पहले चरण का मतदान पूरा हुआ; अनुमानित मतदान प्रतिशत 92% से अधिक रहा।  दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल की 142 सीटों पर आज वोटिंग हो रही है, पिछले विधानसभा चुनाव में इन 142 में में 123 सीटों पर सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इस चरण के चुनाव में सबकी निगाहें भवानीपुर सीट पर टिकी हुई हैं, क्यूंकि यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने है। बता दें कि भवानीपुर ममता बनर्जी की परंपरागत सीट है, इस लिहाज से यहां पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। इससे पहले सुवेंदु अधिकारी 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हरा चुके हैं। गौरतलब हो कि पहले चरण की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 93% मतदान हुआ था। 4 मई को चुनाव के रिजल्ट आएंगे।  बारानगर में एक बूथ पर 5 बार बदली गई EVM, रुका मतदान बंगाल में हंगामे के बीच मतदान जारी है. इसी बीच बारानगर के बूथ नंबर 72 में ईवीएम में खराबी के कारण मतदान रोक दिया गया है. नाराज मतदाताओं का आरोप है कि मशीन को पांच बार बदला जा चुका है, फिर भी मतदान शुरू नहीं हुआ है. एक मतदाता, मिथु गरई ने कहा, 'हम सुबह 7 बजे से लाइन में खड़े हैं. वो कह रहे हैं कि ईवीएम खराब है. अब हम वापस जा रहे हैं।     'TMC बना रही है चौथी बार सरकार', अभिषेक बनर्जी का दावा ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने बंगाल चुनाव में बीजेपी पर केंद्रीय बलों के अत्याधिक तैनात का आरोप लगाया है. अब अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आईएनएस के युद्धपोत और राफेल, जिन्हें तैनात करना है बाकी आप वो भी कर दो जो भी चीज आपको बांग्लादेश और पाकिस्तान के खिलाफ करना है. वो आप बंगाल के लोगों के खिलाफ कर रहे हो।  टीएमसी नेता ने दावा किया कि बंगाल में 30 लाख मतदाताओं को वोट डालने से रोका गया है. उन्होंने अपनी एक साल पुरानी भविष्यवाणी को दोहराते हुए कहा कि टीएमसी 2021 से भी ज्यादा बहुमत हासिल करेगी. टीएमसी चौथी बार सरकार बना रही है. मैं आपसे 4 मई को मिलूंगा।  भबानीपुर: ममता बनर्जी के मतदान केंद्र के बाहर पहुंचे शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी ने सुबह से ही अपने विधानसभा क्षेत्र भबानीपुर में डेरा डाला हुआ है. उन्होंने बीजेपी पर चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है. इसी बीच बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी भी भबानीपुर पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि बीजेपी नेता उसी मतदान केंद्र के बाहर मौजूद हैं, जहां ममता बनर्जी ने डेरा डाला हुआ है।  मतदाताओं को डराया-धकाया जा रहा है, ममता का केंद्रीय बलों पर आरोप बंगाल में मतदान के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यालय में बैठक के बाद केंद्रीय बलों पर मतदाताओं को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के घरों में जबरन घुसने का भी आरोप लगाया है।  नदिया में भाजपा पोलिंग एजेंट पर हमला, अस्पताल में भर्ती बंगाल विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के लिए मतदान जारी है. मतदान से पहले सुबह करीब 5:30 बजे चापड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हात्रा पंचायत में बूथ नंबर 52 पर भाजपा पोलिंग एजेंट मोशर्रफ पर कथित रूप से बदमाशों के एक गिरोह ने लोहे की रॉड से हमला कर दिया. पुलिस ने बाद में उन्हें बचाया और चापड़ा रूरल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है. डॉक्टरों ने बताया कि उनके सिर में चोट लगी है. उनके सिर में छह टांके लगाए हैं।  मतदान केंद्र के बाहर हंगामा, CRPF ने कई लोगों को हटाया मतदान के दौरान तनाव के बीच एक मतदान केंद्र के बाहर हंगामा मच गया. CRPF जवानों ने कई व्यक्तियों को वहां से हटा दिया. मतदाताओं के अनुसार, EVM मशीन में बार-बार खराबी आने के कारण तीन असफल प्रयासों के बाद सुबह करीब 8:30 बजे मतदान शुरू हो सका. मतदाताओं ने आरोप लगाया कि कुछ लोग मतदान प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने वहां से हटा दिया. एक मतदाता मयूर जैन ने बताया कि वो सुबह 7 बजे से इंतजार कर रहे थे।  उन्होंने कहा, 'मशीन खराब होने के कारण हमें तीन बार वोट डालने से रोका गया. नई मशीन लाई गई, लेकिन उसमें भी समस्या आई. अंदर चीख-पुकार मच गई और गेट बंद कर दिए गए. बाद में कुछ लोगों ने हंगामा करने की कोशिश की, उन्हें पीटा गया और ले जाया गया. आखिरकार सुबह 8:30 बजे मतदान शुरू हुआ.' मयूर जैन ने ये भी कहा कि CRPF के जवान मौजूद थे और प्रशासन पूरी तरह सतर्क था।  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए बुधवार सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया है. दूसरे चरण में सात जिलों की 142 विधानसभा सीटों पर कुल 3,21,73,837 मतदाता वोट डालेंगे. इनमें 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाएं और 792 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं. मतदान के लिए 41,001 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां हर बूथ की वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2,321 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनात किया गया है. कोलकाता में सबसे अधिक 273 कंपनियां लगाई गई हैं।  इसके अलावा 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए हैं. ड्रोन कैमरों से भी मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी. इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवार मैदान में हैं. भांगर सीट पर सबसे अधिक 19 उम्मीदवार हैं, जबकि हुगली जिले की गोगहाट सीट पर सबसे कम 5 उम्मीदवार हैं।  इस चरण में कई दिग्गज नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (भबानीपुर), विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी (भबानीपुर), राज्य मंत्री सुजीत बोस (बिधाननगर), फिरहाद हकीम (कोलकाता पोर्ट), ज्योतिप्रिया मल्लिक (हावड़ा), ब्रात्य बसु (दम दम), सोवंदेब चट्टोपाध्याय (बालीगंज) और बीजेपी के अर्जुन सिंह (नोआपाड़ा), स्वपन दासगुप्ता (राशबिहारी), रूद्रनील घोष (शिबपुर) शामिल हैं. सीपीआई(एम) की मीनाक्षी मुखर्जी (उत्तरपाड़ा), दीप्सिता धर (दम दम … Read more

बंगाल में बंपर मतदान, 10% की बढ़ोतरी: 3 करोड़ से ज्यादा वोटर्स ने डाले वोट, किसे मिलेगा फायदा?

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 152 सीटों पर 1478 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. पहले फेज में मतदाओं का उत्साह देखने के लायक था और वोटिंग के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. आजादी के बाद पहली बार है कि बंगाल में 90 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है. इसे लेकर सियासी दल अपने नफे-नुकसान का आकलन कर रहे हैं।  बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों पर 92.88 फीसदी मतदान रहा. अगर यही पैटर्न दूसरे चरण की 142 सीटों पर रहा, तो यह पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा वोटिंग टर्नआउट होगा. हालांकि, 2021 में बंगाल विधानसभा चुनाव 8 चरणों में हुए थे।  2021 के विधानसभा चुनाव में इन 152 सीटों पर 83.2 फीसदी मतदान रहा था जबकि 2026 के विधानसभा चुनाव 92.88 फीसदी वोटिंग हुई. इस लिहाज से 10 फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है. ऐसे में वोटिंग पैटर्न कहता है कि पिछले चुनाव से बढ़ी वोटिंग ने राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी है. ऐसे में सवाल है कि 10 फीसदी ज्यादा वोटिंग बीजेपी या फिर ममता बनर्जी किसे खाते में जाएगी?  पहले चरण की सीटों पर वोटिंग के टूटे रिकॉर्ड पश्चिम बंगाल के 16 जिलों की 152 सीटों पर गुरुवार को वोटिंग हुई, जिसमें 92.88 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. बंगाल में पुरुष की तुलना में महिला मतदाताओं की भागीदारी ज़्यादा रही. महिला मतदान प्रतिशत 92.69 फीसदी रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान 90.92 प्रतिशत था. तीसरे लिंग के मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 56.79 प्रतिशत रहा।  आजादी के बाद बंगाल में पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने वोट डाले हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बंगाल के पहले चरण और तमिलनाडु में वोटिंग संपन्न होने के बाद बयान जारी कर मताधिकार का प्रयोग करने वाले वोटरों और उनके जज्बे को सलाम किया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ये वोटिंग का सबसे ऊंचा ग्राफ है।  बंगाल में इतनी ज्यादा संख्या में मतदान कभी भी नहीं हुआ है. साल 2006 से लेकर अभी तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, उसमें  80 फीसदी से ज्यादा ही वोटिंग रही है. हालांकि, इस बार वोटिंग पैटर्न 90 फीसदी की सीमा को भी पार कर गया है, जिसके पीछे मुख्य वजह एसआईआर प्रक्रिया को मानी जा रही है. बंगाल में हुई एसआईआर प्रकिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के वोट काटे गए हैं, जिसके लिए लोग इस बार मतदान न करके जोखिम नहीं लेना चाहते. यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से निकलकर मतदान करने पहुंचे थे।  किसके पक्ष में जाएगा बढ़ा 10 फीसदी वोट पश्चिम बंगाल में गुरुवार को 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग हुई, जिनमें 12 जिलों में मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत या उससे ज्यादा रहा. इनमें भी सबसे ज्यादा वोटिंग दक्षिण दिनाजपुर में हुई, जहां 94.4 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले. दक्षिण दिनाजपुर में हर 100 में से लगभग 95 वोटर्स मतदान केंद्रों पर अपना वोट डालने आए. दक्षिण दिनाजपुर में कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जहां मुसलमानों की आबादी लगभग 25 प्रतिशत है और हिंदुओं की आबादी 73.5 प्रतिशत है. इस तरह हिंदू बहुल इलाके की सीटों पर जबरदस्त मतदान दिखा। दक्षिण दिनाजपुर के बाद कूचबिहार जिले में 94 प्रतिशत मतदान हुआ है, बीरभूम में 93.2 प्रतिशत, जलपाईगुड़ी में 92.7 प्रतिशत और मुर्शिदाबाद ज़िले में भी लगभग 93 प्रतिशत मतदान हुआ है. मुर्शिदाबाद में पश्चिम बंगाल की 22 विधानसभा सीटें आती हैं. इस जिले में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं. यहां मुसलमानों की आबादी 65 प्रतिशत से ज्यादा है जबकि हिन्दुओं की आबादी सिर्फ 33 प्रतिशत है. हालांकि, पश्चिम बंगाल के पहले चरण में जो वोटिंग बढ़ी है, वो किसी एक इलाके में नहीं बल्कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही बेल्ट में देखने को मिल रही है।  पहले चरण में यह वही इलाका है, जहां पर मुस्लिम वोटर बड़ी संख्या में हैं और घुसपैठ का मुद्दा भी काफी हावी रहा.इसके अलावा वोटिंग में बढोत्तरी में एसआईआर (SIR) को भी अहम वजह माना जा रहा है.अब तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टीएमसी इस जिले में सबसे मजबूत थी, लेकिन अब हुमायूं कबीर चुनौती बन गए हैं. वहीं, बीजेपी ने इस इलाके में घुसपैठ का मुद्दा उठाया था, जिसके चलते भी ध्रुवीकरण हुआ है  बीजेपी और टीएमसी किसे मिलेगा सियासी लाभ विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी ने पहले चरण की 152 में से 59 सीटें जीती थीं, जबकि दूसरे चरण की 142 सीटों में वह केवल 18 पर सिमट गई थी.ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस 2021 में उसने पहले चरण की 152 में से 92 सीटें जीती थीं, जबकि दूसरे चरण में 142 में से 123 सीटों पर कब्जा जमाया था।  2011 से 2024 तक के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें, तो पहले चरण की इन 152 सीटों पर बीजेपी का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है. 2011 में बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. 2016 में यह आंकड़ा सिर्फ 3 तक पहुंचा. लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर बीजेपी ने 86 पर बढ़त बनाई. 2021 विधानसभा चुनाव में 59 सीटें जीतीं. इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में 64 सीटों पर आगे रही।  पीएम मोदी और अमित शाह की अगुवाई में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत इस चरण में झोंक दी है. हालांकि, TMC के लिए भी यह इलाका किसी दुर्ग से कम नहीं है. 2011 में उसने 68 सीटें जीतीं, 2016 में 86 सीटों पर कब्जा किया था जबकि 2021 में 92 सीटों पर पहुंच गई थी. 2019 लोकसभा चुनाव में 57 सीटों पर टीएमसी को बढ़त बनाई. TMC ने 2021 में 92 सीटें जीतकर बड़ा संदेश दिया और 2024 लोकसभा चुनाव में 76 सीटों पर आगे रही. TMC के लिए यह चरण परंपरागत तौर पर मजबूत रहा है, हालांकि 2019 में उसे झटका भी लगा था।  पहले चरण की सीटों में मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिले अहम हैं, जहां 50 से 66 फीसदी तक मुस्लिम हैं. इन तीन जिलों की 43 सीटों में से पिछली बार TMC ने 35 सीटें जीती थीं, जबकि BJP को 8 सीटें मिली थीं. इस बार बीजेपी को हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण पर भरोसा है और ममता बनर्जी की … Read more

मप्र में 34.25 लाख मतदाता हटे, भाजपा और कांग्रेस दोनों कराएंगी सत्यापन

भोपाल  Madhya Pradesh में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एसआइआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने सियासी दलों की चिंता बढ़ा दी है। अंतिम सूची से 34.25 लाख मतदाताओं के नाम हटने के बाद खासतौर पर Bharatiya Janata Party सक्रिय हो गई है। पार्टी को आशंका है कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कमी आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भाजपा ने बूथ स्तर पर रणनीति बनाते हुए अपने बूथ लेवल एजेंट बीएलए को सक्रिय करने का निर्णय लिया है। बूथवार सत्यापन का अभियान भाजपा अब बूथवार उन मतदाताओं की तलाश करेगी, जो या तो स्थानांतरित हो गए हैं या अनुपस्थित दर्ज किए गए हैं। यह संख्या 31.50 लाख से अधिक बताई जा रही है। पार्टी का कहना है कि यदि ये मतदाता पात्र हैं तो उनके नाम दोबारा सूची में जुड़वाने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा प्रदेश एसआइआर टोली के सहसंयोजक एएस उप्पल ने अभियान चलाने की घोषणा की है। कांग्रेस भी करेगी घर घर मिलान Indian National Congress ने भी अपने बीएलए के माध्यम से हटाए गए मतदाताओं का सत्यापन कराने का फैसला किया है। कांग्रेस का कहना है कि वह पुरानी, प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची का मिलान कराएगी। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई तो न्यायालय का रुख किया जाएगा। आंकड़ों में बदलाव की तस्वीर     एसआइआर से पहले कुल मतदाता 5,74,06,143 थे। प्रारूप सूची के बाद यह संख्या घटकर 5,31,31,983 रह गई। अंतिम सूची में कुल मतदाता 5,39,81,065 दर्ज किए गए, यानी प्रारूप के बाद 8,49,082 की शुद्ध वृद्धि हुई। पूर्व सूची के अनुरूप 34,25,078 नाम हटाए गए।     श्रेणीवार देखें तो 8।46 लाख नाम मृतक श्रेणी में हटे, 31।50 लाख अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए गए और 2।77 लाख नाम दो या अधिक स्थानों पर दर्ज थे। पुरुष मतदाता 2,93,91,548 से घटकर 2,79,04,975 और महिला मतदाता 2,80,13,362 से घटकर 2,60,75,186 रह गए।     राजनीतिक दलों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है, इसलिए अब दोनों प्रमुख दल बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने में जुट गए हैं।  

SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, यूपी में 2.89 करोड़ नाम कटे, छंटनी बिहार से भी ज्यादा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है. इस ड्राफ्ट में कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. आयोग के अनुसार, यह सूची 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के तहत तैयार की गई है, जिसकी शुरुआत 27 अक्टूबर से हुई थी.  यूपी में ड्राफ्ट लिस्ट का प्रकाशन तीन बार टलने के बाद आजा जारी किया गया. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की कॉपी सभी राजनीतिक दलों को दे दी गई है. उन्होंने बताया कि लगभग 18 प्रतिशत लोगों ने फॉर्म जमा नहीं किए. मंगलवार को लोकभवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। पहले कुल 15.44 करोड़ मतदाता थे लेकिन एसआईआर की प्रक्रिया में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। जिन 2.89 करोड़ लोगों के नाम काटे गए हैं उनमें 46.23 लाख मृत, 2.17 करोड़ स्थानांतरित और 25.47 लाख डुप्लीकेट, 79.52 लाख वोटर शामिल हैं। प्रतिशत की बात करें तो करीब 18 फीसदी वोटरों के नाम इस लिस्ट कट गए हैं। उन्होंने बताया, सभी जिलों में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया है। मंगलवार से छह फरवरी तक मतदाता सूची पर दावे व आपत्तियां की जाएंगी। वहीं मंगलवार से लेकर 27 फरवरी तक इन दावे व आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन छह मार्च को किया जाएगा। UP SIR में नाम न मिलने पर करें ये काम ड्राफ्ट सूची में अगर किसी मतदाता का नाम नहीं है तो वह 6 फरवरी तक अपना दावा और आपत्ति दर्ज करवा सकता है. नए व नाम कटने वाले मतदाता को फॉर्म-6 भरना होगा, गलत नाम वालों के लिए फॉर्म-7, संशोधन के लिए फॉर्म-8 भरना होगा. इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों mod में जमा किया जा सकता है. इसके साथ जन्म प्रमाण पत्र, पते और पहचान प्रमाण पत्र जरुर आवश्यक होगा. अपने क्षेत्र के BLO से संपर्क करें. जिन लोगों के नाम इस लिस्ट में नहीं हैं वह 6 फरवरी तक आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. सबसे बड़ा वोटर लिस्ट सफाई अभियान नवदीप रिणवा के मुताबिक वोटर लिस्ट का यह अब तक सबसे बड़ा सफाई अभियान है. अब तक राज्य में 15.44 करोड़ मतदाता दर्ज थे, SIR प्रक्रिया के बाद 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.सबसे ज्यादा नाम ट्रासफर से कटे हैं इनकी संख्या 1.26 करोड़ है. 46 लाख मृतक, डुप्लीकेट 23.70 लाख और जो पते पर नहीं मिले उनकी संख्या 83.73 लाख है, इसके अलावा भी अन्य श्रेणी में शमिल हैं. लखनऊ में सबसे ज्यादा नाम कटे मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया, सबसे ज्यादा 12 लाख मतदाताओं के नाम लखनऊ में कटेंगे। वहीं प्रयागराज में 11.56 लाख, कानपुर नगर में नौ लाख, आगरा में 8.36 लाख, गाजियाबाद में 8.18 लाख, बरेली में 7.14 लाख, मेरठ में 6.65 लाख, गोरखपुर में 6.45 लाख, सीतापुर में 6.23 लाख और जौनपुर में 5.89 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। उन्होंने बताया कि 12.55 करोड़ में से 91 प्रतिशत की मैपिंग हो गई है। अब 1.04 करोड़ को नोटिस जाएगी। यह 8 प्रतिशत हैं। सीईओ ने कहा कि फ़ार्म 6 भरें नए मतदाता बनने को। करेक्शन व शिफ्ट होने वाले फॉर्म 8 भरें । अगर किसी सदस्य जो अब जीवित नहीं है या दूसरी जगह चले गए हैं तो नाम हटाने को फॉर्म 7 भरें। अभी तक नए मतदाता बनने को 15.78 करोड़ ने फॉर्म भरा है। उन्होंने कहा कि पहले यूपी में करीब 15 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से 12.55 करोड़ मतदाताओं (81.30%) ने खुद या परिवार के किसी सदस्य के जरिए गणना प्रपत्र (enumeration form) पर हस्ताक्षर कर उसे जमा किया. उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं ने गणना प्रपत्र जमा नहीं किए, उनके पीछे कई कारण रहे-  46.23 लाख मतदाता (2.99 प्रतिशत)) मृत पाए गए. – 2.17 करोड़ मतदाता या अनुपस्थित (14.06 प्रतिशत)) मिले या वो शिफ्ट कर गए. – 25.47 लाख मतदाता (1.65 प्रतिशत) एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए. इन्हीं कारणों से 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए हैं. फिलहाल यूपी में ड्राफ्ट सूची के अनुसार मतदाताओं की संख्या करीब 12 करोड़ रह गई है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार अब एक पोलिंग स्टेशन पर 1200 से ज्यादा मतदाता नहीं होंगे, जबकि पहले यह संख्या करीब 1500 थी. इसी वजह से नए पोलिंग स्टेशन भी बनाए गए, जिसमें अतिरिक्त समय लगा. निर्वाचन आयोग ने 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया है. जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, वे इस अवधि में आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं. सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण 27 फरवरी तक किया जाएगा, और 6 मार्च 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी. चुनाव आयोग ने 18 साल पूरे कर चुके सभी नए मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना नाम जरूर जांचें. नाम न होने पर फॉर्म-6, और नाम या पते में सुधार के लिए फॉर्म-8 भरने की सुविधा उपलब्ध है

मतदाता संख्या में राज्यवार बदलाव: बिहार-बंगाल में कमी, असम में उछाल

नई दिल्ली बिहार, बंगाल, राजस्‍थान से मध्‍य प्रदेश तक… जहां जहां भी वोटर ल‍िस्‍ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर हुआ, वहां 6% से 14% तक वोटर घट गए.लेकिन असम ने इस ट्रेंड को पूरी तरह पलट दिया है. असम में वोटर ल‍िस्‍ट की सफाई के दौरान मतदाताओं की संख्या में 1.35% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. असम चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल के आंकड़ों ने सियासी पंडितों को भी चौंका दिया है. आखिर असम में ऐसा क्या अलग हुआ? क्या यह घुसपैठ का असर है या फिर इसके पीछे कोई तकनीकी और कानूनी पेंच है? यह बाकी राज्यों के SIR से कैसे अलग है? मंगलवार को असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ड्राफ्ट वोटर ल‍िस्‍ट जारी की. जनवरी 2025 की सूची के मुकाबले इस बार मतदाताओं की संख्या में 1.35% की वृद्धि देखी गई. आंकड़ों पर गौर करें तो असम की तस्वीर काफी दिलचस्प है. यहां 1.25 करोड़ पुरुष और 1.26 करोड़ मह‍िला मतदाता हैं. यानी महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक हो गई है, जो राज्य की बदलती डेमोग्राफी का एक चेहरा है. एक बात और यहां एसआईआर नहीं हुआ था, यहां सिर्फ वोटर ल‍िस्‍ट की जांच की गई थी और फर्जी या मृत वोटर हटाए गए थे. बाकी देश में SIR, तो असम में क्यों नहीं? असम में वोटर क्यों बढ़े, इसके पीछे तकनीकी वजह है. पश्चिम बंगाल, बिहार समेत 12 राज्‍यों में जहां एसआईआर के दौरान घर-घर जाकर वेर‍िफ‍िकेशन क‍िया गया. संदिग्ध, मृत या शिफ्ट हो चुके वोटरों के नाम सख्ती से काटे गए. लेकिन असम में SIR नहीं बल्कि स्‍पेशल र‍िवीजन हुआ. असम को छूट क्यों? इसके पीछे का कारण है NRC यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स. असम में नागरिकता का मुद्दा बेहद संवेदनशील है और एनआरसी अपडेट की प्रक्रिया अभी भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है और अधूरी है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया था कि नागरिकता अधिनियम के तहत असम के लिए अलग प्रावधान हैं और सुप्रीम कोर्ट की देखरेख के कारण यहां प्रक्रिया अलग है. यही वजह है कि जहां अन्य राज्यों में SIR के तहत बड़े पैमाने पर नाम काटे जा रहे हैं, असम में ‘स्पेशल रिवीजन’ के तहत प्रक्रिया थोड़ी अलग है, जिसके परिणामस्वरूप वोटर लिस्ट में वो गिरावट नहीं दिखी जो अन्य जगह दिख रही है. जुड़ने वाले ज्यादा, कटने वाले कम क्‍यों ?     असम में वोटर बढ़ने का दूसरा कारण यह है कि नए जुड़ने वाले लोगों की संख्या, लिस्ट से हटाए गए लोगों से लगभग दोगुनी है. चुनाव आयोग के बयान के मुताबिक, 6 जनवरी से 27 दिसंबर के बीच 7.86 लाख नए नाम जुड़े. लेकिन 4.47 नाम हटाए गए. यानी सीधे तौर पर लगभग 3.4 लाख वोटरों की बढ़ोतरी हो गई.     भले ही 4.47 लाख नाम हटा दिए गए हों, लेकिन असली कहानी उन नामों की है जो चिन्हित तो हुए हैं, लेकिन अभी तक हटाए नहीं गए हैं. ब्लॉक लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर वेर‍िफ‍िकेशन क‍िया, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं.     4.79 लाख वोटर ऐसे म‍िले ज‍िनकी मौत हो चुकी है. 5.24 लाख कहीं और श‍िफ्ट हो चुके हैं. 53,619 नाम ऐसे हैं जो संदिग्ध या डुप्लीकेट हैं. ये सब मौजूदा वोटर ल‍िस्‍ट का लगभग 4% हिस्सा हैं. इनका नाम अभी तक नहीं हटाया गया है. तो ये नाम कटे क्यों नहीं? यही असम की स्‍पेशल र‍िवीजन और बाकी राज्यों की SIR प्रक्रिया का अंतर है. अधिकारियों ने साफ किया है कि इन नामों को अभी तक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत हटाया नहीं गया है. इन्हें हटाने के लिए औपचारिक आवेदन (फॉर्म 7) मिलने का इंतजार किया जाएगा. इसका मतलब यह है कि लगभग 10 लाख ऐसे नाम (मृत या शिफ्टेड) अभी भी ड्राफ्ट रोल में मौजूद हो सकते हैं, जब तक कि उनके खिलाफ फॉर्म 7 भरकर प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती. यही कारण है कि असम का आंकड़ा बढ़ा हुआ दिख रहा है, जबकि SIR वाले राज्यों में ऐसे नामों को आयोग खुद सख्ती से हटा रहा है.

राजधानी चुनाव अपडेट: नो मैपिंग श्रेणी के मतदाताओं के लिए नोटिस अभियान, सुनवाई होगी तहसील और वार्ड कार्यालय में

भोपाल   मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जिन लोगों के परिजन या खुद का रिकॉर्ड 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिला है। अब उन लोगों को अपनी नागरिकता के प्रमाण पेश करने का समय आ गया है। इसके लिए निर्वाचन शाखा द्वारा जिलेभर में घर-घर नोटिस जारी कर संबंधित दस्तावेज पेश करने की बात कही जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये जानकारी उत्तर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मतदान केंद्र क्रमांक-16 की बीएलओ उजमा इकबाल ने मंगलवार को नोटिस देते हुए मतदाताओं से कही। इसी तरह विभिन्न मतदान केंद्र के बीएलओ ने नो मैपिंग श्रेणी के मतदाताओं को नोटिस देते हुए सुनवाई की तारीख देते हुए दस्तावेज समेत पेश होने को कहा जा रहा है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता का कहना है कि, जिले की 7 विधानसभा क्षेत्रो में कुल 1 लाख 16 हजार 925 मतदाताओं को नो मैपिंग श्रेणी में रखा गया है। इनमें से अबतक 92 हजार 16 मतदाताओं के नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिन्हें बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर वितरित किया जा रहा है। संबंधित नोटिस के साथ एक तारीख भी दी जा रही है। इनकी सुनवाई विधानसभा क्षेत्र के एसडीएम, तहसील न्यायालय, नगर निगम के वार्ड कार्यालयों में करीब 90 अधिकारी की मौजूदगी में होगी। सातों विधानसभा क्षेत्रों के लिए एसडीएम को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) नियुक्त किया गया है। सातों विधानसभाओं में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में संशोधन करवाने के लिए भी करीब 15 हजार 371 फार्म-8 जमा किए गए हैं। इस फार्म के तहत शिफ्टेड, संशोधन आदि का कार्य किया जा सकेगा। इनमें सबसे अधिक फार्म-8 गोविंदपुरा में 3923, नरेला में 2915, हुजूर में 2588 जमा किए गए हैं। विधानसभा क्षेत्र—–नो मैपिंग मतदाता——कुल नोटिस वितरण -बैरसिया————–2,134———————2,134 -उत्तर—————-10,080——————–4,901 -नरेला—————-23,790——————–16,767 -दक्षिण-पश्चिम—–16,596———————15,045 -मध्य—————-10,088———————9,332 -गोविंदपुरा———–30,188——————–19,788 -हुजूर—————–23,049——————–24,049 -कुल——————1,16,925—————–92,016 इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि, सभी विधानसभा क्षेत्रों में 70 फीसदी से अधिक नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस दिए जा चुके हैं। नए साल के पहले हफ्ते में इनकी सुनवाई की जाएगी। इस दौरान उनके द्वारा दिए गए दस्तावेजों के आधार पर ही सूची में नाम जोड़ने पर निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा फार्म-8 और 5 पर भी सुनवाई होगी।

भोपाल में 20 हजार वोटर्स की पहचान, डिजिटाइज हुआ 17 लाख से ज्यादा मतदाताओं का डेटा

भोपाल  भोपाल जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत सात विधानसभा क्षेत्र में गणना पत्रक डिजिटाइजेशन का काम छह दिसंबर को पूरा हो गया था। इसके बाद 11 दिसंबर तक अनकलेक्टेबल और नो मैपिंग वाले मतदाताओं की पहचान करने में बीएलओ सहित पूरी टीम जुटी हुई है, ताकि मतदाता सूची से नाम नहीं कटे। इसके तहत तीन दिन में कुल 20 हजार मतदाताओं की पहचान कर ली गई है और उनके पत्रक भी डिजिटाइज किए गए हैं। इस तरह अब जिले में कुल 17 लाख 21 हजार 213 मतदाताओं के गणना पत्रक डिजिटाइज किए जा चुके हैं जो कुल मतदाताओं का 80.96 प्रतिशत है। जिले के सात विधानसभा क्षेत्र बैरसिया, उत्तर, नरेला, दक्षिण-पश्चिम, मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाता हैं, जिनमें से कुल 21 लाख 25 हजार 840 मतदाताओं को गणना पत्रक वितरित किए गए थे। छह दिसंबर तक 100 प्रतिशत काम हो गया था तब कुल 21 हजार 25 हजार 914 गणना पत्रक जमा किए गए थे। पड़ताल के दौरान 20 हजार मतदाताओं का मिला रिकॉर्ड तीन दिन चली पड़ताल के दौरान अनकलेक्टेबल पत्रकों में से करीब 17 हजार 112 मतदातओं का रिकॉर्ड मिल गया है, जिससे अब कुल चार लाख चार हजार 711 मतदाता अनकलेक्टेबल बचे हुए हैं। जबकि नो मैपिंग वाले तीन हजार 395 मतदाताओं का रिकॉर्ड भी मिल गया है, जो अब कुल दो लाख 11 हजार 275 शेष रह गए हैं।इस तरह कुल 20 हजार मतदाताओं का रिकार्ड मिलने से उनके पत्रक डिजिटाइज किए गए हैं। कलेक्टर ने बैठक में दिए निर्देश उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि कलेक्टर ने सभी बीएलओ सहित अन्य अफसरों के साथ मंगलवार रात को बैठक ली, जिसमें निर्देश दिए कि अनकलेक्टेबल श्रेणी में रखे अनुपस्थित, शिफ्ट, मृत एवं दोहरी प्रविष्टि सूची तैयार की जाए। सुझाव और जानकारी के आधार पर संशोधन कराया जाए, अनमैप्ड श्रेणी के मतदाताओं की अधिकतम मैपिंग की जाए। बीएलओ एप में ड्यूपलिकेट मतदाता की जानकारी का नया फीचर जोड़ा गया है, उसकी जांच की जाए।

संशोधित समय-सारणी के साथ सेवा मतदाताओं की सूची हेतु विशेष पुनरीक्षण की घोषणा

सेवा मतदाताओं की सूची हेतु विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की संशोधित समय-सारणी जारी भोपाल  भारत निर्वाचन आयोग ने सेवा मतदाताओं (Service Voters) से संबंधित निर्वाचन सूची के अंतिम भाग की विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की संशोधित समय-सारणी जारी कर दी है। यह पुनरीक्षण 1 जनवरी 2026 की योग्यता तिथि के आधार पर किया जा रहा है। आयोग ने अपने पूर्व आदेश (दिनांक 04 नवंबर 2025) को निरस्त करते हुए नई समय-सारणी अधिसूचित की है, जिसे देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा, जिनमें अंडमान एवं निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, लक्षद्वीप, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। नई संशोधित समय-सारणी इस प्रकार है 1. निर्वाचन सूची के अंतिम भागों का प्रारंभिक प्रकाशन तारीख: 16 दिसंबर 2025 2. रिकॉर्ड/कमांडिंग अधिकारियों द्वारा फ़ॉर्म प्राप्त करने, सत्यापन, स्कैनिंग और XML फ़ाइल तैयार व अपलोड करने की अवधि अवधि: 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक 3. हस्ताक्षरित एवं सत्यापित फ़ॉर्मों तथा XML फ़ाइलों का निपटान अधूरे फ़ॉर्म और XML फ़ाइलें वापस की जाएंगी संशोधित फ़ॉर्मों का पुनः प्रेषण अंतिम आदेश ERO द्वारा जारी अंतिम तिथि: 7 फरवरी 2026 4. निर्वाचन सूची के अंतिम भागों का अंतिम प्रकाशन तारीख: 14 फरवरी 2026 चुनाव आयोग ने सभी संबंधित मंत्रालयों—रक्षा, गृह, विदेश मंत्रालय—तथा सीमा सड़क संगठन और संबंधित राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस संशोधित कार्यक्रम का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। आयोग के सचिव  पवन दीवान ने बताया कि यह कदम सेवा मतदाताओं के अद्यतन एवं सटीक पंजीकरण को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, ताकि आगामी चुनावों में उनकी सहभागिता सुगम और व्यवस्थित रहे।