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पंजाब का अजब विरोधाभास: विदेश पलायन के बीच वोटरों की संख्या में 45 लाख का इजाफा

चंडीगढ़   पंजाब में एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। राज्य के गांवों और शहरों से युवा बेहतर शिक्षा और रोजगार के लिए विदेश जा रहे हैं। इसके बावजूद पंजाब की मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है। यह स्थिति राज्य के बदलते सामाजिक ढांचे पर सवाल उठाती है। 2009 से 2024 के बीच पंजाब में मतदाताओं की संख्या में करीब 45 लाख की वृद्धि हुई। यह संख्या 1.69 करोड़ से बढ़कर 2.14 करोड़ से अधिक हो गई। 2009 के लोकसभा चुनाव में 1,69,58,380 मतदाता थे। 2022 के विधानसभा चुनाव तक यह आंकड़ा 2,14,99,804 तक पहुंच गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी मतदाता आधार करीब 2.15 करोड़ रहा। हालांकि, इसी दौरान मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई। 2012 के विधानसभा चुनाव में 78.60 फीसदी मतदान हुआ था। यह 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर 62.80 फीसदी रह गया। मतदाताओं की संख्या बढ़ने के बावजूद मतदान का उत्साह कम हुआ है। विदेश जाने की होड़ इसी अवधि में पंजाब के युवाओं में विदेश जाने की होड़ तेज हुई है। प्रवासन अध्ययनों के अनुसार कुल विदेश प्रवासन का 73.16 फीसदी हिस्सा 2016 के बाद का है। कनाडा 41.88 फीसदी के साथ पंजाबियों का सबसे पसंदीदा गंतव्य है। दुबई 16.25 फीसदी और ऑस्ट्रेलिया 9.63 फीसदी के साथ अन्य प्रमुख गंतव्य हैं। 2016 के आसपास 75 हजार विद्यार्थी सालाना कनाडा जाते थे, जो 2022 से 2024 के बीच बढ़कर 1.35 लाख से 1.50 लाख हो गए। उच्च शिक्षा पर असर और आर्थिक बोझ विदेश जाने की इस दौड़ का असर राज्य की उच्च शिक्षा पर भी पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक लाख से अधिक विद्यार्थियों की कमी आई है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अध्ययनों के अनुसार ग्रामीण परिवारों ने बच्चों को विदेश भेजने के लिए 14,342 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। विदेश भेजने की लागत जुटाने के लिए 5,636 करोड़ रुपये की कृषि भूमि और घरेलू संपत्तियां बेची गईं। एक बच्चे को विदेश भेजना कई परिवारों के लिए लाखों रुपये की परियोजना बन चुका है। इसके बावजूद विदेश जाने की चाह लगातार बढ़ी है। मतदाताओं की संख्या में वृद्धि का कारण राजनीति के विशेषज्ञ प्रो कुणाल ने इस विरोधाभास पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि हजारों युवा विदेश जा रहे हैं, पर पंजाब की जनसांख्यिकी बदली है। चंडीगढ़ से सटे क्षेत्रों में हिमाचल और जेएंडके के लोगों की संख्या बढ़ी है। लुधियाना, फतेहगढ़ साहब और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक शहरों में बाहरी प्रदेशों से लोग आकर बसे हैं। मतदाता सूची में नाम होना और चुनाव में मतदान करना अलग बातें हैं। विदेश में रहने वाले भारतीयों की मतदाता पात्रता कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।   

पंजाब में नए वोटर्स के लिए जरूरी खबर, 12 सितंबर तक कर सकते हैं अप्लाई; SIR पर भी दर्ज कराएं आपत्ति

चंडीगढ़  मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) पंजाब और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा राज्य में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-2026' (SIR) का काम तेजी से चलाया जा रहा है। अगर आपकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है, या फिर आप 1 अक्टूबर 2026 तक 18 साल के हो रहे हैं, तो आप आवेदन कर सकते है।  फर्स्ट टाइम वोटर्स के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक, नया वोटर कार्ड बनवाने और ड्राफ्ट वोटर सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरकर 12 सितंबर 2026 तक आवेदन किया जा सकता है। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में किसी भी तरह की गलती, गलत नाम, पते में सुधार या किसी फर्जी/अयोग्य वोटर का नाम हटाने को लेकर यदि कोई दावे और आपत्तियां हैं, तो इन्हें 13 सितंबर तक संबंधित कार्यालयों या ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करवाया जा सकता है। यदि किसी नागरिक का नाम ड्राफ्ट रोल में छूट गया है या वोटर आईडी में संशोधन की आवश्यकता है, तो आयोग की ओर से अलग-अलग प्रकार के फॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं। यह अभियान राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में चलाया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। नए मतदाता बनने, NRI वोटर के रूप में पंजीकरण कराने, नाम कटवाने या पते में सुधार के लिए आवेदन प्रक्रिया को आसान और डिजिटल बनाया गया है। फर्स्ट टाइम वोटर्स कैसे कर सकते हैं आवेदन जानिए…     चुनाव आयोग की अपील : चुनाव आयोग ने फर्स्ट टाइम वोटर्स बनने वाले युवाओं से अपील की है कि जो भी वोटर्स बनने की शर्तों को पूरा करते हैं वो अपनी वोट जरूर बनवाएं। 12 सितंबर तक वो ऑनलाइन या ऑफ लाइन सिस्टम को अपनाकर अपना नाम फाइनल मतदाता सूची में शामिल करवाएं ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में वो मतदान कर सकें।     ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया: सबसे पहले भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल voters.eci.gov.in पर जाएं या अपने स्मार्टफोन में ECINet App (वोटर हेल्पलाइन ऐप) डाउनलोड करें। पोर्टल या ऐप पर मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्ट्रेशन/लॉगिन करना होगा।     फार्म-6 भरना होगा: आन लाइन रजिस्ट्रेशन करते हुए फर्स्ट टाइम वोटर्स को फार्म-6 का विकल्प चुनना होगा। उसके बाद फार्म में जो जानकारियां मांगी गई सभी भरनी अनिवार्य होंगी। फार्म भरते समय नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, वर्तमान व स्थाई पता आदि ध्यानपूर्वक भरें ताकि बाद में किसी तरह का बदलाव न करवाना पड़े।     दस्तावेज अपलोड: फार्म नंबर छह के साथ आवेदक को पासपोर्ट साइज फोटो, आयु प्रमाण पत्र (जैसे 10वीं का सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट) और निवास प्रमाण पत्र (बिजली बिल, राशन कार्ड, बैंक पासबुक आदि) की कॉपी अपलोड करें। फॉर्म सबमिट करने के बाद एक रेफरेंस आईडी मिलेगी, जिससे आप अपने आवेदन का स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं।     ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया: जो युवा ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज नहीं हैं, वे अपने नजदीकी बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा ERO के दफ्तर जाकर हार्ड कॉपी में फॉर्म-6 प्राप्त कर सकते हैं। फॉर्म को पूरी तरह भरकर आवश्यक दस्तावेजों की फोटोकॉपी सेल्फ अटेस्ट करके BLO या ERO दफ्तर में 12 सितंबर 2026 से पहले जमा कराएं।

भारत में SIR से 11.83 करोड़ नाम हटे, ब्राजील में पड़े थे 11.18 करोड़ वोट; क्या कहते हैं आंकड़े?

नई दिल्ली भारत में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान यानी विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर नया बहस खड़ा हो गया है। अब तक की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 11.83 करोड़ नाम हटाए गए हैं। यह संख्या कितनी विशाल है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिशत में यह आंकड़ा 12.1 है। तुलनात्मक रूप से देखें तो 2022 के ब्राजील आम चुनाव में कुल 11.18 करोड़ वोट पड़े थे। वहीं दुनिया में भारत और चीन के अलावा केवल 14 देश ही ऐसे हैं जिनकी कुल आबादी ही 10 करोड़ से अधिक है। इतने बड़े पैमाने पर हटाए गए नाम ने देश में राजनीतिक चर्चा को गर्म कर दिया है। सरकार के आलोचकों का तर्क है कि इस प्रक्रिया के कारण लाखों वैध और वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं। दूसरी ओर सरकार के समर्थकों का दावा है कि केवल मृत, किसी दूसरे जगह पर चले गए और फर्जी मतदाताओं को ही सूची से बाहर किया गया है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि सच्चाई इन दोनों राजनीतिक दावों के बीच स्थित है। बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में संशोधन के बाद चुनाव हो चुके हैं। यहां एसआईआर के बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में 8.1% की गिरावट दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात जैसे 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यहां पूर्व सूची की तुलना में 10.7% नाम कम हुए हैं। 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जहां अभी केवल ड्राफ्ट रोल जारी हुआ है वहां यह दर 17% तक देखी गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि शुरुआत में नाम हटने की दर बहुत अधिक होती है, लेकिन दावे और आपत्तियां दर्ज होने के बाद अंतिम सूची में कई नाम वापस जुड़ जाते हैं। क्या कहते हैं आंकड़े? आपको बता दें कि 17 राज्यों में चुनाव एसआईआर का ड्राफ्ट चरण पूरा हो चुका है। यहां एसआईआर से पहले 36.09 करोड़ वोटर थे। ड्राफ्ट रोल के बाद 29.94 करोड़ बचे। यहां अभी फाइनल वोटर लिस्ट आना बाकी है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 8 ऐसे राज्य हैं जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई चुनाव नहीं हुआ है। ऐसे राज्यों में 34.01 करोड़ वोटर थे। ड्राफ्ट रोल में 29.25 करोड़ रह गए। फाइनल लिस्ट आने के बाद 30.36 करोड़ मतदाता बचे। मताधिकार से वंचित हो रहे हैं लोग? इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बावजूद अब तक के आंकड़े एक दिलचस्प पैटर्न दिखाते हैं। जिन राज्यों में संशोधन के बाद चुनाव हुए हैं, वहां कुल मतदान में बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है। इसके विपरीत मतदाता सूची में कुल नाम कम होने के कारण मतदान प्रतिशत में वृद्धि देखी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि गलतियां नहीं हुई हैं। जमीनी स्तर पर और कुछ विधानसभा क्षेत्रों में वास्तविक मतदान संख्या घटी है। कई जगहों पर कागजी औपचारिकताओं के भारी बोझ के कारण नागरिकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल में लगभग 27 लाख मतदाता सूची से हटाए जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

वोटर लिस्ट में नाम कटा? महाराष्ट्र SIR के बाद 30 सितंबर तक करें दावा, ऐसे जुड़वाएं नाम

मुंबई  महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.06 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। ये लोग पिछली वोटर लिस्ट में शामिल कुल मतदाताओं का लगभग 21.14 प्रतिशत थे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सोमवार 31 अगस्त को यह जानकारी दी। राज्य के चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7.71 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम शामिल हैं। इनमें 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड जेंडर (अन्य लिंग) के मतदाता शामिल हैं। मुंबई में मतदाताओं की संख्या में लगभग 36.1 लाख की कमी आई है। यानी करीब 35 फीसदी वोटर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं। महाराष्ट्र की पिछली वोटर लिस्ट में जून तक करीब 9.8 करोड़ मतदाता दर्ज थे। जबकि SIR के बाद जारी ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर लगभग 7.7 करोड़ रह गई है। यानी आंकड़ों के हिसाब से करीब 21.1 फीसदी की कमी आई है। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम हमेशा के लिए वोटर लिस्ट से हट गया है। ऐसे लोगों को 30 सितंबर तक अपना दावा और आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया गया है। क्यों हटाए गए नाम? अधिकारियों ने बताया कि 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना फर्म) जमा नहीं हो पाए। उनसे संपर्क नहीं हो सका। शायद उनकी मृत्यु हो गई थी। या उन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया था। SIR प्रोसेस से पहले महाराष्ट्र में 9.78 करोड़ मतदाता रजिस्टर्ड थे। इनमें से 78.86 प्रतिशत को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा फॉर्म 28.6 लाख पुणे में जमा नहीं हो पाए। इसके बाद ठाणे (28.5 लाख), मुंबई उपनगर (26.5 लाख), नागपुर (14.43 लाख), नासिक (10.27 लाख) और मुंबई शहर (9.5 लाख) का नंबर आता है। मुंबई में 36.1 लाख मतदाता कम SIR के बाद मुंबई के मतदाता आंकड़ों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में करीब 36.1 लाख मतदाता कम हुए हैं, जो पिछली लिस्ट की तुलना में लगभग 35 फीसदी है। यह कमी कई कारणों से हुई है। मतदाता गणना के दौरान जिन लोगों के फॉर्म उपलब्ध नहीं हो सके या जिनके बारे में जानकारी नहीं मिली, उन्हें विभिन्न कैटेगरी में रखा गया। 17 लाख डुप्लीकेट नामों का भी मामला मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम के अनुसार, करीब 17 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज पाए गए थे। इन नामों को एक साथ मिलाकर हटाया गया है। इसलिए इन्हें पूरी तरह से 'फर्जी' या 'डुप्लीकेट मतदाता' मानना सही नहीं होगा। यानी एक ही व्यक्ति का नाम अगर एक से अधिक जगह दर्ज था। उसे एक निर्वाचन क्षेत्र में बरकरार रखते हुए दूसरे स्थान से हटाया गया, तो इससे कुल मतदाता संख्या में कमी दिखाई देती है। 30 सितंबर तक वापस जुड़ सकता है नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम बाहर होने वाले मतदाताओं के लिए यह आखिरी मौका नहीं है। वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। अगर किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है तो उसे अपने क्षेत्र के संबंधित चुनाव अधिकारी या BLO से संपर्क करके अपना दावा पेश करना होगा। जरूरी प्रक्रिया और दस्तावेज पूरे करने के बाद नाम को वोटर लिस्ट में शामिल कराने का अवसर मिलेगा। 18 साल के होने वाले युवाओं को भी मौका इस प्रक्रिया में पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। जो युवा 1 अक्टूबर से पहले 18 वर्ष की उम्र पूरी कर रहे हैं, वे भी इस अवधि के दौरान मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे पहली बार मतदान करने वाले पात्र युवाओं को भी आगामी चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता मिलेगा। ऑनलाइन ऐसे चेक करें अपना नाम वोटर ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम देखने के लिए नागरिक ECI के वोटर पोर्टल और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। वोटर अपने EPIC नंबर के जरिए भी नाम और संबंधित डिटेल्स की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर भी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उपलब्ध कराई गई है। नाम नहीं है तो कौन सा फॉर्म भरना होगा? ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं होने पर पात्र व्यक्ति Form 6 के जरिए वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। यानी जिन लोगों का नाम SIR के दौरान ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गया है, उनके पास अभी दावा दाखिल कर अपना नाम वापस सूची में शामिल कराने का अवसर मौजूद है।     नाम जोड़ने के लिए: Form 6     मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए: Form 7     एड्रेस या अन्य डिटेल्स में सुधार के लिए: Form 8 ड्राफ्ट लिस्ट को अंतिम सूची न समझें महाराष्ट्र में मतदाता संख्या में इतनी बड़ी गिरावट के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है। यह फाइनल लिस्ट नहीं। जिन लोगों के नाम इसमें नहीं हैं, वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। इसलिए महाराष्ट्र और खासकर मुंबई के मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपना नाम अभी चेक करें। अगर नाम गायब है या डिटेल्स में कोई गलती है, तो तय समय सीमा के भीतर आवेदन कर सुधार या नाम शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी करें। आखिर 2.07 करोड़ नाम इस लिस्ट में क्यों आए? चुनाव आयोग ने इस आंकड़े का पूरा हिसाब भी जनता के सामने रखा है:     76.80 लाख वोटर ऐसे हैं जो परमानेंटली कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं (ठोस जानकारी मिलने के बाद).     75.52 लाख लोग वेरिफिकेशन के दौरान घर पर मिले ही नहीं या उनका पता नहीं चल पाया.     34.81 लाख वोटरों का निधन हो चुका है (सर्टिफिकेट या परिवार की रिपोर्ट के आधार पर).     17.63 लाख नाम डुप्लीकेट हैं या वो किसी और इलाके में भी रजिस्टर्ड हैं.     2.23 लाख वोटर अन्य कारणों से इस लिस्ट … Read more

नगरीय निकायों एवं पंचायतों की मतदाता सूची में नाम जोड़ने- काटने के लिये पहली बार ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

नगरीय निकायों एवं पंचायतों की मतदाता सूची में नाम जोड़ने- काटने के लिये पहली बार ऑनलाइन आवेदन की सुविधा 8317 आवेदकों ने किया ऑनलाइन आवेदन भोपाल राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव ने बताया है कि प्रदेश में पहली बार नगरीय निकायों एवं त्रि-स्तरीय पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं को नाम जोड़ने, कटवाने और नाम संशोधन के लिये ऑनलाइन सुविधा दी गयी। इस सुविधा का लाभ लेते हुए कुल 8317 आवेदकों ने ऑनलाइन आवेदन किया। इनमें से नगरीय निकायों में 1496 और पंचायतों में 6848 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए। नगरीय निकायों में 675 ऑनलाइन आवेदन नाम जोड़ने, 770 नाम कटवाने और 24 आवेदन नाम में संशोधन के लिये प्राप्त हुए हैं। वहीं त्रि-स्तरीय पंचायतों में 1701 आवेदन नाम जुड़वाने, 4960 नाम कटवाने और 187 आवेदन नाम में संशोधन के लिये प्राप्त हुए हैं। इन सभी आवेदनों पर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।  

चुनाव आयोग की बड़ी तैयारी! मुक्तसर में हर वोटर तक पहुंचेगा अमला, शुरू होगा विशेष पुनरीक्षण अभियान

 श्री मुक्तसर साहिब  भारत चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत जिले में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाएगा। जिला चुनाव अधिकारी सह उपायुक्त अमित कुमार पंचाल ने बताया कि जिले में 25 जून से 24 जुलाई तक विशेष अभियान चलाकर घर-घर जाकर मतदाताओं से फार्म भरवाए जाएंगे। जिला चुनाव अधिकारी ने बताया कि इस अभियान के लिए पूरे चुनावी अमले की ड्यूटी लगा दी गई है। जिले में 753 बूथ स्तरीय अधिकारी, 81 सुपरवाइजर, चार निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और आठ सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बूथ स्तरीय अधिकारी को औसतन 300 घर और लगभग 1200 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी गई है ताकि काम सुचारु रूप से पूरा किया जा सके। उन्होंने बताया कि 15 जून से 24 जून तक बूथ स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षण देने और अन्य प्रशासनिक तैयारियों का कार्य किया जाएगा। इसके बाद 25 जून से घर-घर जाकर विशेष पुनरीक्षण अभियान शुरू होगा। दोहरी वोट रखना अपराध जिला चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दोहरी वोट रखना भारतीय संविधान के अनुसार अपराध है, जिसके लिए एक वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जिले के सभी मतदाताओं को इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत फार्म भरना अनिवार्य होगा। उपायुक्त ने बताया कि जिला चुनाव कार्यालय द्वारा की गई प्रारंभिक मैपिंग के तहत जिले के कुल 6 लाख 91 हजार 402 मतदाताओं में से 6 लाख 38 हजार 878 मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। यह कुल मतदाताओं का 92.40 प्रतिशत है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जानें SIR के लिए जरूरी बातें उन्होंने बताया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2003 को योग्यता तिथि निर्धारित की गई है। इसके अलावा मतदान केंद्रों को तर्कसंगत बनाने का कार्य 24 जुलाई 2026 तक पूरा किया जाएगा। मतदाता सूची का प्रारूप 31 जुलाई 2026 को प्रकाशित होगा। उन्होंने जानकारी दी कि मतदाता सूचियों से संबंधित दावे और आपत्तियां 31 जुलाई से 30 अगस्त 2026 तक जमा करवाई जा सकेंगी, जबकि इनका निपटारा 28 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। जिला चुनाव अधिकारी ने जिले के सभी मतदाताओं से अपील की कि वे इस अभियान में चुनाव अमले का पूरा सहयोग करें ताकि मतदाता सूचियों को पूरी तरह सही और पारदर्शी बनाया जा सके।

बंगाल चुनाव में 18% वोटिंग, ममता का गड़बड़ी का आरोप, नादिया में BJP वर्कर पर हमला

कलकत्ता पश्चिम विधानसभा चुनाव के लिए आज दूसरे चरण की वोटिंग जारी है। मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हो चुका है लेकिन मतदान केंद्रों पर सुबह 6 बजे से ही मतदाताओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी।पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की मुख्य बातें: पहले चरण का मतदान पूरा हुआ; अनुमानित मतदान प्रतिशत 92% से अधिक रहा।  दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल की 142 सीटों पर आज वोटिंग हो रही है, पिछले विधानसभा चुनाव में इन 142 में में 123 सीटों पर सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इस चरण के चुनाव में सबकी निगाहें भवानीपुर सीट पर टिकी हुई हैं, क्यूंकि यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने है। बता दें कि भवानीपुर ममता बनर्जी की परंपरागत सीट है, इस लिहाज से यहां पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। इससे पहले सुवेंदु अधिकारी 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हरा चुके हैं। गौरतलब हो कि पहले चरण की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 93% मतदान हुआ था। 4 मई को चुनाव के रिजल्ट आएंगे।  बारानगर में एक बूथ पर 5 बार बदली गई EVM, रुका मतदान बंगाल में हंगामे के बीच मतदान जारी है. इसी बीच बारानगर के बूथ नंबर 72 में ईवीएम में खराबी के कारण मतदान रोक दिया गया है. नाराज मतदाताओं का आरोप है कि मशीन को पांच बार बदला जा चुका है, फिर भी मतदान शुरू नहीं हुआ है. एक मतदाता, मिथु गरई ने कहा, 'हम सुबह 7 बजे से लाइन में खड़े हैं. वो कह रहे हैं कि ईवीएम खराब है. अब हम वापस जा रहे हैं।     'TMC बना रही है चौथी बार सरकार', अभिषेक बनर्जी का दावा ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने बंगाल चुनाव में बीजेपी पर केंद्रीय बलों के अत्याधिक तैनात का आरोप लगाया है. अब अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आईएनएस के युद्धपोत और राफेल, जिन्हें तैनात करना है बाकी आप वो भी कर दो जो भी चीज आपको बांग्लादेश और पाकिस्तान के खिलाफ करना है. वो आप बंगाल के लोगों के खिलाफ कर रहे हो।  टीएमसी नेता ने दावा किया कि बंगाल में 30 लाख मतदाताओं को वोट डालने से रोका गया है. उन्होंने अपनी एक साल पुरानी भविष्यवाणी को दोहराते हुए कहा कि टीएमसी 2021 से भी ज्यादा बहुमत हासिल करेगी. टीएमसी चौथी बार सरकार बना रही है. मैं आपसे 4 मई को मिलूंगा।  भबानीपुर: ममता बनर्जी के मतदान केंद्र के बाहर पहुंचे शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी ने सुबह से ही अपने विधानसभा क्षेत्र भबानीपुर में डेरा डाला हुआ है. उन्होंने बीजेपी पर चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है. इसी बीच बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी भी भबानीपुर पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि बीजेपी नेता उसी मतदान केंद्र के बाहर मौजूद हैं, जहां ममता बनर्जी ने डेरा डाला हुआ है।  मतदाताओं को डराया-धकाया जा रहा है, ममता का केंद्रीय बलों पर आरोप बंगाल में मतदान के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यालय में बैठक के बाद केंद्रीय बलों पर मतदाताओं को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के घरों में जबरन घुसने का भी आरोप लगाया है।  नदिया में भाजपा पोलिंग एजेंट पर हमला, अस्पताल में भर्ती बंगाल विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के लिए मतदान जारी है. मतदान से पहले सुबह करीब 5:30 बजे चापड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हात्रा पंचायत में बूथ नंबर 52 पर भाजपा पोलिंग एजेंट मोशर्रफ पर कथित रूप से बदमाशों के एक गिरोह ने लोहे की रॉड से हमला कर दिया. पुलिस ने बाद में उन्हें बचाया और चापड़ा रूरल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है. डॉक्टरों ने बताया कि उनके सिर में चोट लगी है. उनके सिर में छह टांके लगाए हैं।  मतदान केंद्र के बाहर हंगामा, CRPF ने कई लोगों को हटाया मतदान के दौरान तनाव के बीच एक मतदान केंद्र के बाहर हंगामा मच गया. CRPF जवानों ने कई व्यक्तियों को वहां से हटा दिया. मतदाताओं के अनुसार, EVM मशीन में बार-बार खराबी आने के कारण तीन असफल प्रयासों के बाद सुबह करीब 8:30 बजे मतदान शुरू हो सका. मतदाताओं ने आरोप लगाया कि कुछ लोग मतदान प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने वहां से हटा दिया. एक मतदाता मयूर जैन ने बताया कि वो सुबह 7 बजे से इंतजार कर रहे थे।  उन्होंने कहा, 'मशीन खराब होने के कारण हमें तीन बार वोट डालने से रोका गया. नई मशीन लाई गई, लेकिन उसमें भी समस्या आई. अंदर चीख-पुकार मच गई और गेट बंद कर दिए गए. बाद में कुछ लोगों ने हंगामा करने की कोशिश की, उन्हें पीटा गया और ले जाया गया. आखिरकार सुबह 8:30 बजे मतदान शुरू हुआ.' मयूर जैन ने ये भी कहा कि CRPF के जवान मौजूद थे और प्रशासन पूरी तरह सतर्क था।  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए बुधवार सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया है. दूसरे चरण में सात जिलों की 142 विधानसभा सीटों पर कुल 3,21,73,837 मतदाता वोट डालेंगे. इनमें 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाएं और 792 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं. मतदान के लिए 41,001 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां हर बूथ की वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2,321 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनात किया गया है. कोलकाता में सबसे अधिक 273 कंपनियां लगाई गई हैं।  इसके अलावा 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए हैं. ड्रोन कैमरों से भी मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी. इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवार मैदान में हैं. भांगर सीट पर सबसे अधिक 19 उम्मीदवार हैं, जबकि हुगली जिले की गोगहाट सीट पर सबसे कम 5 उम्मीदवार हैं।  इस चरण में कई दिग्गज नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (भबानीपुर), विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी (भबानीपुर), राज्य मंत्री सुजीत बोस (बिधाननगर), फिरहाद हकीम (कोलकाता पोर्ट), ज्योतिप्रिया मल्लिक (हावड़ा), ब्रात्य बसु (दम दम), सोवंदेब चट्टोपाध्याय (बालीगंज) और बीजेपी के अर्जुन सिंह (नोआपाड़ा), स्वपन दासगुप्ता (राशबिहारी), रूद्रनील घोष (शिबपुर) शामिल हैं. सीपीआई(एम) की मीनाक्षी मुखर्जी (उत्तरपाड़ा), दीप्सिता धर (दम दम … Read more

बंगाल में बंपर मतदान, 10% की बढ़ोतरी: 3 करोड़ से ज्यादा वोटर्स ने डाले वोट, किसे मिलेगा फायदा?

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 152 सीटों पर 1478 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. पहले फेज में मतदाओं का उत्साह देखने के लायक था और वोटिंग के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. आजादी के बाद पहली बार है कि बंगाल में 90 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है. इसे लेकर सियासी दल अपने नफे-नुकसान का आकलन कर रहे हैं।  बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों पर 92.88 फीसदी मतदान रहा. अगर यही पैटर्न दूसरे चरण की 142 सीटों पर रहा, तो यह पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा वोटिंग टर्नआउट होगा. हालांकि, 2021 में बंगाल विधानसभा चुनाव 8 चरणों में हुए थे।  2021 के विधानसभा चुनाव में इन 152 सीटों पर 83.2 फीसदी मतदान रहा था जबकि 2026 के विधानसभा चुनाव 92.88 फीसदी वोटिंग हुई. इस लिहाज से 10 फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है. ऐसे में वोटिंग पैटर्न कहता है कि पिछले चुनाव से बढ़ी वोटिंग ने राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी है. ऐसे में सवाल है कि 10 फीसदी ज्यादा वोटिंग बीजेपी या फिर ममता बनर्जी किसे खाते में जाएगी?  पहले चरण की सीटों पर वोटिंग के टूटे रिकॉर्ड पश्चिम बंगाल के 16 जिलों की 152 सीटों पर गुरुवार को वोटिंग हुई, जिसमें 92.88 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. बंगाल में पुरुष की तुलना में महिला मतदाताओं की भागीदारी ज़्यादा रही. महिला मतदान प्रतिशत 92.69 फीसदी रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान 90.92 प्रतिशत था. तीसरे लिंग के मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 56.79 प्रतिशत रहा।  आजादी के बाद बंगाल में पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने वोट डाले हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बंगाल के पहले चरण और तमिलनाडु में वोटिंग संपन्न होने के बाद बयान जारी कर मताधिकार का प्रयोग करने वाले वोटरों और उनके जज्बे को सलाम किया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ये वोटिंग का सबसे ऊंचा ग्राफ है।  बंगाल में इतनी ज्यादा संख्या में मतदान कभी भी नहीं हुआ है. साल 2006 से लेकर अभी तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, उसमें  80 फीसदी से ज्यादा ही वोटिंग रही है. हालांकि, इस बार वोटिंग पैटर्न 90 फीसदी की सीमा को भी पार कर गया है, जिसके पीछे मुख्य वजह एसआईआर प्रक्रिया को मानी जा रही है. बंगाल में हुई एसआईआर प्रकिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के वोट काटे गए हैं, जिसके लिए लोग इस बार मतदान न करके जोखिम नहीं लेना चाहते. यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से निकलकर मतदान करने पहुंचे थे।  किसके पक्ष में जाएगा बढ़ा 10 फीसदी वोट पश्चिम बंगाल में गुरुवार को 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग हुई, जिनमें 12 जिलों में मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत या उससे ज्यादा रहा. इनमें भी सबसे ज्यादा वोटिंग दक्षिण दिनाजपुर में हुई, जहां 94.4 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले. दक्षिण दिनाजपुर में हर 100 में से लगभग 95 वोटर्स मतदान केंद्रों पर अपना वोट डालने आए. दक्षिण दिनाजपुर में कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जहां मुसलमानों की आबादी लगभग 25 प्रतिशत है और हिंदुओं की आबादी 73.5 प्रतिशत है. इस तरह हिंदू बहुल इलाके की सीटों पर जबरदस्त मतदान दिखा। दक्षिण दिनाजपुर के बाद कूचबिहार जिले में 94 प्रतिशत मतदान हुआ है, बीरभूम में 93.2 प्रतिशत, जलपाईगुड़ी में 92.7 प्रतिशत और मुर्शिदाबाद ज़िले में भी लगभग 93 प्रतिशत मतदान हुआ है. मुर्शिदाबाद में पश्चिम बंगाल की 22 विधानसभा सीटें आती हैं. इस जिले में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं. यहां मुसलमानों की आबादी 65 प्रतिशत से ज्यादा है जबकि हिन्दुओं की आबादी सिर्फ 33 प्रतिशत है. हालांकि, पश्चिम बंगाल के पहले चरण में जो वोटिंग बढ़ी है, वो किसी एक इलाके में नहीं बल्कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही बेल्ट में देखने को मिल रही है।  पहले चरण में यह वही इलाका है, जहां पर मुस्लिम वोटर बड़ी संख्या में हैं और घुसपैठ का मुद्दा भी काफी हावी रहा.इसके अलावा वोटिंग में बढोत्तरी में एसआईआर (SIR) को भी अहम वजह माना जा रहा है.अब तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टीएमसी इस जिले में सबसे मजबूत थी, लेकिन अब हुमायूं कबीर चुनौती बन गए हैं. वहीं, बीजेपी ने इस इलाके में घुसपैठ का मुद्दा उठाया था, जिसके चलते भी ध्रुवीकरण हुआ है  बीजेपी और टीएमसी किसे मिलेगा सियासी लाभ विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी ने पहले चरण की 152 में से 59 सीटें जीती थीं, जबकि दूसरे चरण की 142 सीटों में वह केवल 18 पर सिमट गई थी.ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस 2021 में उसने पहले चरण की 152 में से 92 सीटें जीती थीं, जबकि दूसरे चरण में 142 में से 123 सीटों पर कब्जा जमाया था।  2011 से 2024 तक के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें, तो पहले चरण की इन 152 सीटों पर बीजेपी का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है. 2011 में बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. 2016 में यह आंकड़ा सिर्फ 3 तक पहुंचा. लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर बीजेपी ने 86 पर बढ़त बनाई. 2021 विधानसभा चुनाव में 59 सीटें जीतीं. इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में 64 सीटों पर आगे रही।  पीएम मोदी और अमित शाह की अगुवाई में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत इस चरण में झोंक दी है. हालांकि, TMC के लिए भी यह इलाका किसी दुर्ग से कम नहीं है. 2011 में उसने 68 सीटें जीतीं, 2016 में 86 सीटों पर कब्जा किया था जबकि 2021 में 92 सीटों पर पहुंच गई थी. 2019 लोकसभा चुनाव में 57 सीटों पर टीएमसी को बढ़त बनाई. TMC ने 2021 में 92 सीटें जीतकर बड़ा संदेश दिया और 2024 लोकसभा चुनाव में 76 सीटों पर आगे रही. TMC के लिए यह चरण परंपरागत तौर पर मजबूत रहा है, हालांकि 2019 में उसे झटका भी लगा था।  पहले चरण की सीटों में मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिले अहम हैं, जहां 50 से 66 फीसदी तक मुस्लिम हैं. इन तीन जिलों की 43 सीटों में से पिछली बार TMC ने 35 सीटें जीती थीं, जबकि BJP को 8 सीटें मिली थीं. इस बार बीजेपी को हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण पर भरोसा है और ममता बनर्जी की … Read more

मप्र में 34.25 लाख मतदाता हटे, भाजपा और कांग्रेस दोनों कराएंगी सत्यापन

भोपाल  Madhya Pradesh में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एसआइआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने सियासी दलों की चिंता बढ़ा दी है। अंतिम सूची से 34.25 लाख मतदाताओं के नाम हटने के बाद खासतौर पर Bharatiya Janata Party सक्रिय हो गई है। पार्टी को आशंका है कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कमी आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भाजपा ने बूथ स्तर पर रणनीति बनाते हुए अपने बूथ लेवल एजेंट बीएलए को सक्रिय करने का निर्णय लिया है। बूथवार सत्यापन का अभियान भाजपा अब बूथवार उन मतदाताओं की तलाश करेगी, जो या तो स्थानांतरित हो गए हैं या अनुपस्थित दर्ज किए गए हैं। यह संख्या 31.50 लाख से अधिक बताई जा रही है। पार्टी का कहना है कि यदि ये मतदाता पात्र हैं तो उनके नाम दोबारा सूची में जुड़वाने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा प्रदेश एसआइआर टोली के सहसंयोजक एएस उप्पल ने अभियान चलाने की घोषणा की है। कांग्रेस भी करेगी घर घर मिलान Indian National Congress ने भी अपने बीएलए के माध्यम से हटाए गए मतदाताओं का सत्यापन कराने का फैसला किया है। कांग्रेस का कहना है कि वह पुरानी, प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची का मिलान कराएगी। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई तो न्यायालय का रुख किया जाएगा। आंकड़ों में बदलाव की तस्वीर     एसआइआर से पहले कुल मतदाता 5,74,06,143 थे। प्रारूप सूची के बाद यह संख्या घटकर 5,31,31,983 रह गई। अंतिम सूची में कुल मतदाता 5,39,81,065 दर्ज किए गए, यानी प्रारूप के बाद 8,49,082 की शुद्ध वृद्धि हुई। पूर्व सूची के अनुरूप 34,25,078 नाम हटाए गए।     श्रेणीवार देखें तो 8।46 लाख नाम मृतक श्रेणी में हटे, 31।50 लाख अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए गए और 2।77 लाख नाम दो या अधिक स्थानों पर दर्ज थे। पुरुष मतदाता 2,93,91,548 से घटकर 2,79,04,975 और महिला मतदाता 2,80,13,362 से घटकर 2,60,75,186 रह गए।     राजनीतिक दलों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है, इसलिए अब दोनों प्रमुख दल बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने में जुट गए हैं।  

SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, यूपी में 2.89 करोड़ नाम कटे, छंटनी बिहार से भी ज्यादा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है. इस ड्राफ्ट में कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. आयोग के अनुसार, यह सूची 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के तहत तैयार की गई है, जिसकी शुरुआत 27 अक्टूबर से हुई थी.  यूपी में ड्राफ्ट लिस्ट का प्रकाशन तीन बार टलने के बाद आजा जारी किया गया. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की कॉपी सभी राजनीतिक दलों को दे दी गई है. उन्होंने बताया कि लगभग 18 प्रतिशत लोगों ने फॉर्म जमा नहीं किए. मंगलवार को लोकभवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। पहले कुल 15.44 करोड़ मतदाता थे लेकिन एसआईआर की प्रक्रिया में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। जिन 2.89 करोड़ लोगों के नाम काटे गए हैं उनमें 46.23 लाख मृत, 2.17 करोड़ स्थानांतरित और 25.47 लाख डुप्लीकेट, 79.52 लाख वोटर शामिल हैं। प्रतिशत की बात करें तो करीब 18 फीसदी वोटरों के नाम इस लिस्ट कट गए हैं। उन्होंने बताया, सभी जिलों में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया है। मंगलवार से छह फरवरी तक मतदाता सूची पर दावे व आपत्तियां की जाएंगी। वहीं मंगलवार से लेकर 27 फरवरी तक इन दावे व आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन छह मार्च को किया जाएगा। UP SIR में नाम न मिलने पर करें ये काम ड्राफ्ट सूची में अगर किसी मतदाता का नाम नहीं है तो वह 6 फरवरी तक अपना दावा और आपत्ति दर्ज करवा सकता है. नए व नाम कटने वाले मतदाता को फॉर्म-6 भरना होगा, गलत नाम वालों के लिए फॉर्म-7, संशोधन के लिए फॉर्म-8 भरना होगा. इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों mod में जमा किया जा सकता है. इसके साथ जन्म प्रमाण पत्र, पते और पहचान प्रमाण पत्र जरुर आवश्यक होगा. अपने क्षेत्र के BLO से संपर्क करें. जिन लोगों के नाम इस लिस्ट में नहीं हैं वह 6 फरवरी तक आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. सबसे बड़ा वोटर लिस्ट सफाई अभियान नवदीप रिणवा के मुताबिक वोटर लिस्ट का यह अब तक सबसे बड़ा सफाई अभियान है. अब तक राज्य में 15.44 करोड़ मतदाता दर्ज थे, SIR प्रक्रिया के बाद 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.सबसे ज्यादा नाम ट्रासफर से कटे हैं इनकी संख्या 1.26 करोड़ है. 46 लाख मृतक, डुप्लीकेट 23.70 लाख और जो पते पर नहीं मिले उनकी संख्या 83.73 लाख है, इसके अलावा भी अन्य श्रेणी में शमिल हैं. लखनऊ में सबसे ज्यादा नाम कटे मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया, सबसे ज्यादा 12 लाख मतदाताओं के नाम लखनऊ में कटेंगे। वहीं प्रयागराज में 11.56 लाख, कानपुर नगर में नौ लाख, आगरा में 8.36 लाख, गाजियाबाद में 8.18 लाख, बरेली में 7.14 लाख, मेरठ में 6.65 लाख, गोरखपुर में 6.45 लाख, सीतापुर में 6.23 लाख और जौनपुर में 5.89 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। उन्होंने बताया कि 12.55 करोड़ में से 91 प्रतिशत की मैपिंग हो गई है। अब 1.04 करोड़ को नोटिस जाएगी। यह 8 प्रतिशत हैं। सीईओ ने कहा कि फ़ार्म 6 भरें नए मतदाता बनने को। करेक्शन व शिफ्ट होने वाले फॉर्म 8 भरें । अगर किसी सदस्य जो अब जीवित नहीं है या दूसरी जगह चले गए हैं तो नाम हटाने को फॉर्म 7 भरें। अभी तक नए मतदाता बनने को 15.78 करोड़ ने फॉर्म भरा है। उन्होंने कहा कि पहले यूपी में करीब 15 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से 12.55 करोड़ मतदाताओं (81.30%) ने खुद या परिवार के किसी सदस्य के जरिए गणना प्रपत्र (enumeration form) पर हस्ताक्षर कर उसे जमा किया. उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं ने गणना प्रपत्र जमा नहीं किए, उनके पीछे कई कारण रहे-  46.23 लाख मतदाता (2.99 प्रतिशत)) मृत पाए गए. – 2.17 करोड़ मतदाता या अनुपस्थित (14.06 प्रतिशत)) मिले या वो शिफ्ट कर गए. – 25.47 लाख मतदाता (1.65 प्रतिशत) एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए. इन्हीं कारणों से 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए हैं. फिलहाल यूपी में ड्राफ्ट सूची के अनुसार मतदाताओं की संख्या करीब 12 करोड़ रह गई है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार अब एक पोलिंग स्टेशन पर 1200 से ज्यादा मतदाता नहीं होंगे, जबकि पहले यह संख्या करीब 1500 थी. इसी वजह से नए पोलिंग स्टेशन भी बनाए गए, जिसमें अतिरिक्त समय लगा. निर्वाचन आयोग ने 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया है. जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, वे इस अवधि में आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं. सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण 27 फरवरी तक किया जाएगा, और 6 मार्च 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी. चुनाव आयोग ने 18 साल पूरे कर चुके सभी नए मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना नाम जरूर जांचें. नाम न होने पर फॉर्म-6, और नाम या पते में सुधार के लिए फॉर्म-8 भरने की सुविधा उपलब्ध है