samacharsecretary.com

उत्तर प्रदेश में SIR सर्वे की शुरुआत! अधिकारी घर-घर जाकर करेंगे डेटा कलेक्शन

लखनऊ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत उत्तर प्रदेश में मंगलवार से अगले एक महीने तक बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर गणना पत्र उपलब्ध कराएंगे और मतदाताओं को ये प्रपत्र भरने में मदद करेंगे। निर्वाचन आयोग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, एसआईआर अभियान के तहत बीएलओ चार नवंबर से आगामी चार दिसंबर तक घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र (एन्यूमरेशन फॉर्म) उपलब्ध कराएंगे। बीएलओ गणना प्रपत्र की दो प्रतियां मतदाताओं को उपलब्ध कराएंगे और इसे भरने में भी मदद करेंगे। बीएलओ मतदाताओं द्वारा भरे हुए गणना प्रपत्र एकत्र करेंगे और उसकी रसीद देंगे। आयोग ने मतदाताओं से अनुरोध किया है कि वे गणना प्रपत्र भर कर और उस पर हस्ताक्षर करके जल्द से जल्द अपने बीएलओ को उपलब्ध कराएं। मतदाता गणना प्रपत्र की दोनों प्रतियों को भरें, अपनी नवीनतम तस्वीर लगाएं और हस्ताक्षर करें। आयोग के मुताबिक, मतदाता निर्वाचन आयोग पोर्टल से भी अपना गणना प्रपत्र डाउनलोड कर सकते हैं। अधिक जानकारी एवं सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। आयोग के अनुसार, निर्वाचक नामावली का प्रकाशन आगामी नौ दिसंबर को होगा जिस पर अगले साल आठ जनवरी तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकेंगी। नोटिस, सुनवाई और सत्यापन एवं निस्तारण का काम नौ दिसंबर से अगले साल 31 जनवरी तक किया जाएगा। निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन अगले साल सात फरवरी को किया जाएगा।  

BLO ट्रेनिंग पूरी, अब 72 हजार बूथों पर एसआईआर के जरिए घर-घर जाएगा टीम

भोपाल  मध्य प्रदेश में मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए बिहार की तर्ज पर आज से सिस्टमैटिक इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट (SIR) का काम शुरू हो रहा है. इसके लिए ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 65 हजार बूथ लेवल अधिकारी (BLO) प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों के 72 हजार बूथों पर घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे. इस अभियान में हर वोटर को 2003 के एसआईआर के आधार पर मिली जानकारी से फिर से वेरिफाई किया जाएगा. MP में आज से शुरू होगी SIR दरअसल, बिहार की तर्ज पर आज से मध्य प्रदेश में भी एसआईआर की शुरुआत हो रही है. मध्य प्रदेश के सभी 65,000 बीएलओ का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है. बीएलओ घर-घर जाकर आयोग द्वारा जारी किए गए फॉर्म बाँटेंगे. वे 2003 की एसआईआर के आधार पर मतदाताओं से जानकारी एकत्र करेंगे. बता दें कि राज्य की सभी 230 विधानसभा सीटों के हर बूथ के हर मतदाता का दोबारा सत्यापन किया जाएगा. जब BLO आपके घर पहुंचें तो सबसे पहले क्या करें? चुनाव आयोग ने नागरिकों से बीएलओ के साथ पूरा सहयोग करने की अपील की है, लेकिन कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि घर-घर जाकर सर्वेक्षण के दौरान बीएलओ कोई भी दस्तावेज़ नहीं लेंगे. अगर सत्यापन के दौरान पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी कोई समस्या आती है, तो बीएलओ केवल ईआरओ (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) को सूचित करके ही नागरिकों से ज़रूरी दस्तावेज़ मांग सकते हैं. अगर सत्यापन के दौरान पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी कोई समस्या आती है, तो बीएलओ ईआरओ को सूचित करके नागरिकों से ज़रूरी दस्तावेज़ मांग सकते हैं. बीएलओ आयोग द्वारा अधिकृत पहचान पत्र साथ लाएंगे. नागरिक यहां पहचान पत्र देखकर जानकारी साझा कर सकते हैं.  यूपी-एमपी समेत इन 12 राज्यों में होगी SIR की शुरुआत, कब भरा जाएगा फॉर्म? जानें सब कुछ चुनाव आयोग बिहार के बाद अब नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की शुरुआत करने जा रहा है. इसका मंगलवार (4 नवंबर) से आगाज होगा. इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर प्रक्रिया 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ समाप्त होगी. इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 51 करोड़ वोटर्स हैं. बिहार के बाद एसआईआर का यह दूसरा चरण है. बिहार में अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की गई थी. बिहार में करीब 7.42 करोड़ नामों को वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था. दूसरे चरण में, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की कवायद होगी, उनमें अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. घर-घर सर्वेक्षण के दौरान बीएलओ दस्तावेज नहीं लेंगे, विवाहित महिलाओं को मायके से मंगानी होगी डिटेल इस व्यवस्था के अंतर्गत वर्ष 2003 में जिन महिलाओं की उम्र 18 साल नहीं थी और एक जनवरी 2003 को जारी एसआईआर के दौरान जो महिलाएं विवाहित नहीं थीं। ऐसी महिलाओं को अब खुद को वोटर साबित करने के लिए मायके से अपना मतदाता क्रमांक और मतदान केंद्र क्रमांक मंगवाना होगा। सीईओ एमपी इलेक्शन ने कहा है कि घर-घर सर्वेक्षण के दौरान बीएलओ कोई भी दस्तावेज़ एकत्र नहीं करेगा। ऐसे होगा एसआईआर का काम चुनाव आयोग ने वर्ष 2002 से 2008 के बीच देश के सभी राज्यों की एसआईआर कराई है। इसका डेटा चुनाव आयोग की वेबसाइट के अलावा एमपी सीईओ की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसमें वोटर पूरी जानकारी भरकर एमपी में हुई 2003 की एसआईआर के आधार पर अपना मतदाता क्रमांक, मतदान केंद्र क्रमांक और अन्य जानकारी हासिल कर सकते हैं। यह जानकारी उन्हें बीएलओ द्वारा दिए गए फाॅर्म में भरकर देना होगी। नए वोटर्स के लिए फॉर्म 6 भरने को देंगे बीएलओ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा ने कहा है कि जिन परिवारों में कोई नया सदस्य 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका है, उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए बीएलओ द्वारा फॉर्म 6 उपलब्ध कराया जाएगा। यदि किसी परिवार सदस्य का निधन हो गया हो या वह अन्यत्र स्थानांतरित हो गया हो, तो उसकी जानकारी भी बीएलओ को दें ताकि सूची से नाम विलोपित किया जा सके। झा ने कहा कि घर-घर सर्वेक्षण के दौरान बीएलओ कोई भी दस्तावेज़ एकत्र नहीं करेगा। दस्तावेज केवल तभी आवश्यक होंगे जब किसी एंट्री का सत्यापन पूर्ववर्ती रिकॉर्ड से मेल न खाए। ऐसी स्थिति में संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्री अधिकारी (ERO) अलग से सूचना देकर आवश्यक दस्तावेज़ मांगेगा। बीएलओ आयोग द्वारा अधिकृत पहचान पत्र लेकर आएंगे, नागरिक उनसे पहचान पत्र देखकर जानकारी साझा करें। मतदाता ऐसे तलाश सकेंगे अपना नाम     एसआईआर 2003 में वोटर अपना नाम तलाशने के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट https://voters.eci.gov.in/ ओपन करेंगे।     इसे ओपन करने पर वोटर को जिस राज्य में 2003 में वोटिंग की है या वोटर के माता पिता, परिजन ने वोट डाला है, उस राज्य पर क्लिक करना होगा।     इसके बाद राज्य और संबंधित जिला तथा विधानसभा क्षेत्र पर क्लिक करना होगा।     वोटर या उसके परिजन ने विधानसभा क्षेत्र में जिस गांव, वार्ड के मतदान केंद्र में वोट डाला है, उसे ध्यान कर संबंधित मतदान केंद्र स्थल का नाम तलाशना पड़ेगा।     अगर 2003 में निवास वाले मोहल्ले में आबादी ज्यादा न हो तो आसानी से एक ही क्लिक में संबंधित मतदान केंद्र की वोटर सूची आ जाएगी जिसमें मतदाता क्रमांक और मतदान केंद्र की जानकारी निकालकर उसे बीएलओ द्वारा दिए गए फाॅर्म में भरना होगा।     अगर कोई अपनी जानकारी नहीं दे पाता है तो उसे फाॅर्म में बताए गए 11 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज देना होगा जिसके आधार पर बीएलओ उस मतदाता को वेरिफाई करेगा। 2026 में इन राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव इनमें से तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. असम में भी 2026 में चुनाव होने हैं, लेकिन वहां मतदाता सूची के पुनरीक्षण की घोषणा अलग से की जाएगी, क्योंकि राज्य में नागरिकता सत्यापित करने के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में प्रक्रिया चल रही है. साथ ही नागरिकता कानून का एक अलग प्रावधान असम में लागू होता है. एसआईआर को लेकर क्या बोला इलेक्शन कमीशन मुख्य निर्वाचन … Read more

5.5 लाख भोपालियों के घर पहुंचेंगे BLO, 60% मतदाता स्पेशल रिवीजन में शामिल

भोपाल मध्य प्रदेश में शुरु हुई स्पेशल इंसेन्टिव रिवीजन यानी एसआईआर की प्रक्रिया को 2003 की वोटर लिस्ट के आधार पर तय किया जाएगा। 2003 से 2025 के बीच जिले की मतदाता सूची में कुल 9.26 लाख से अधिक मतादाता बढ़ चुके हैं। एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक अफसरों के अनुसार, बढ़े हुए मतदाताओं में से 60 फीसदी यानी करीब साढ़े पांच लाख मतदाता ऐसे हैं जो अन्य शहरों, राज्यों से भोपाल पहुंचे हैं। इन्हें ही अब एसआईआर में अपने मूल निवास, पहचान, जन्म से जुड़े दस्तावेज दिखाने होंगे। 2003 की मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं और उनके परिजन को स्वत: ही 2025 की सूची में शामिल कर लिया गया है। 2003 में भोपाल -04 विधानसभाएं थीं -11.88 लाख वोटर्स थे इन विधानसभाओं में -3.45 लाख वोटर्स गोविंदपुरा विधानसभा -4.22 लाख वोटर्स दक्षिण विधानसभा -2.21 लाख वोटर्स नार्थ विधानसभा -1.99 लाख वोटर्स बैरसिया में थे आज से लगेगी ड्यूटी बीएलओ के साथ सहायक भी दिया जाएगा। गुरुवार से इसके लिए ड्यूटी शुरू हो जाएगी। एसआईआर के लिए प्रशिक्षण का एक भाग पहले ही तय हो चुका है। एसडीएम के माध्यम से बीएलओ ने 2003 की सूची से मौजूदा सूची का मिलान की प्रक्रिया अपने स्तर पर पूरी कर ली है। आगामी काम के लिए विधानसभा स्तर पर प्रशिक्षण होगा। एक विधानसभा में 12 से अधिक स्थान इसके लिए तय किए जा रहे हैं। तय समय में पूरे होंगे काम- कलेक्टर भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि, एसआईआर के लिए टीम ट्रेनिंग शुरू की जा रही है। तय समय में मतदाता सूची से जुड़े काम पूरे कर लिए जाएंगे।

चुनावी मोर्चा मजबूत करने में जुटी कांग्रेस, SIR पर घमासान के बीच 51 हजार बीएलए की तैनाती

जयपुर राजस्थान में मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR) के ऐलान के साथ ही सियासी आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला शुरू हो चुका है। कांग्रेस आरोप लगा रही है कि SIR के बहाने बीजेपी वोट चोरी करना चाहती है। वहीं बीजेपी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस को ही वोट चोर बता दिया। कांग्रेस के आरोप इधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि कांग्रेस ने SIR में लोगों से फॉर्म भरवाने के लिए अब तक 51 हजार बीएलए बना दिए हैं। उन्होंने कहा कि दो दिन में बन जाएंगे हर बूथ पर कांग्रेस पार्टी का बीएलए रहेगा और 200 की 200 विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर की निगरानी हेतु ऑब्जर्वर लगाए जाएंगे और  यह सभी ऑब्जर्वर अपने-अपने क्षेत्र में भाजपा की बेईमानी को रोकेंगे। भाजपा सरकार कब तक चुनाव टालेगी सरकार को पंचायती राज और नगर निकाय चुनाव तो करवाने ही पड़ेंगे और उस वक्त जनता के समक्ष भाजपा की पोल खुल जाएगी, उनका झूठा आवरण उतर जाएगा आखिर कब तक भाजपा ब्यूरोक्रेसी के माध्यम से सरकार चलाएगी। बीजेपी का पलटवार इधर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने डोटासरा के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा  कि हर बार 18 वर्ष के नव जवान का नाम जोड़ा जाता है और जो मृतक है, उसका नाम काटा जाता है. और आपने तो कई बार वोट चोरी की है. बाबा साहब आंबेडर को किसने हराया, आप लोगों ने हराया. किस प्रकार से आप लोगों ने लिस्ट तैयार की. ये हिंदुस्तान कोई धर्मशाला नहीं है कि आपने बांग्लादेश और रोहिंग्या के लोगों को वोटर बना दिया, चुनाव जीतने के लिए. वे लोग यहां की जमीन को सुरक्षित रखने वाले नहीं हैं। निर्वाचन विभाग की तैयारियां- 70% मतदाताओं की जियो-मैपिंग पूरी राजस्थान में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता आंकड़ों का अपडेट जारी किया गया है। 27 अक्टूबर 2025 तक प्रदेश में कुल 5 करोड़ 48 लाख 84 हजार 570 मतदाता दर्ज हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, 2002 और 2025 की मतदाता सूचियों की भौगोलिक मैचिंग (Geo-Mapping) का कार्य 70.55% पूरा हो चुका है। वहीं, BLO ऐप के माध्यम से किए गए सर्वे में पाया गया कि 79.32% मतदाताओं की आयु 40 वर्ष से अधिक है, जबकि 22.22% मतदाताओं की उम्र 40 वर्ष से कम है। निर्वाचन विभाग ने बताया कि यह डेटा राज्यभर में चल रही विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट करने और सत्यापित करने का कार्य तेजी से जारी है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का निर्देश: सभी राजनीतिक दल करें बीएलए की नियुक्ति

भोपाल  मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने मंगलवार को मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ निर्वाचन सदन, भोपाल में बैठक की। बैठक में उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2025 की प्रक्रिया की जानकारी दी और सभी राजनीतिक दलों से अपने बूथ लेवल एजेंट (BLA) की अनिवार्य नियुक्ति करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर की दूसरी चरण की तारीखें घोषित की जा चुकी हैं, जिनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है। प्रदेश में पुनरीक्षण प्रक्रिया औपचारिक रूप से प्रारंभ हो चुकी है और मतदाता सूची फिलहाल फ्रीज कर दी गई है। नागरिक अपने नाम की स्थिति voters.eci.in या मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट पर देख सकते हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि पुनरीक्षण के दौरान बीएलओ तीन बार घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सूची में सम्मिलित हो सके। नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए क्रमशः फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 भरना आवश्यक होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति एन्यूमरेशन फॉर्म में मिथ्या जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ जुर्माना या कारावास का प्रावधान है। बैठक में संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राम प्रताप सिंह जादौन, उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजय श्रीवास्तव, सुरभि तिवारी, राजेश यादव, कांग्रेस से जेपी धनोपिया, भाजपा से भगवानदास सबनानी और एसएस उप्पल, तथा आम आदमी पार्टी से सुमित चौहान उपस्थित रहे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी झा ने बताया कि प्रक्रिया के दौरान नागरिक पासपोर्ट, जन्म प्रमाण-पत्र, शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, निवास या जाति प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेजों से अपनी पात्रता सिद्ध कर सकेंगे। पुनरीक्षण की प्रमुख तिथियां – 28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक बीएलओ प्रशिक्षण – 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक घर-घर सर्वेक्षण – 9 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन – 9 दिसंबर 2025 से 9 जनवरी 2026 तक दावा-आपत्तियां – 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 

पश्चिम बंगाल में अधिकारी तबादलों के 24 घंटे बाद चुनाव आयोग हुआ सक्रिय, SIR पर बड़ी मीटिंग

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (SIR) की घोषणा के ठीक पहले ममता बनर्जी सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा ‘खेला’ खेला है. राज्य सरकार ने 527 अधिकारियों का एक साथ स्थानांतरण कर दिया, जिसमें 67 आईएएस और 460 राज्य सिविल सेवा अधिकारी शामिल हैं. यह कदम चुनाव आयोग के SIR अभियान से ठीक पहले उठाया गया, जिसे विपक्ष ने चुनावी हेरफेर का प्रयास करार दिया. अब आयोग ने तुरंत एक्शन लेते हुए सभी जिलाधिकारियों (DM) के साथ बैठक बुलाई है, जबकि सभी राजनीतिक दलों के साथ भी चर्चा मंगलवार से ही होनी है. ये बैठकें मंगलवार सुबह 10 बजे ही शुरू हो गई . सीनियर उप चुनाव आयुक्त सभी जिलाधिकारियों के साथ सुबह 10 बजे से मीटिंग शुरू करेंगे. यह मीटिंग वर्चुअल होगी और इसमें राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी और सभी जिलों के डीएम शामिल होंगे. इसके बाद आज ही सभी राजनीतिक दलों के साथ मीटिंग होगी. इस कवायद ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले वोटर लिस्ट की सफाई को लेकर तनाव को बढ़ा दिया है. चुनाव आयोग ने सोमवार को SIR के दूसरे चरण की घोषणा की, जिसमें पश्चिम बंगाल सहित 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं. SIR का उद्देश्य वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाना, मृत वोटरों को डिलीट करना, दोहरी एंट्री को दूर करना और प्रवासी वोटरों को अपडेट करना है. प्रक्रिया 28 अक्टूबर से तीन नवंबर तक ट्रेनिंग और प्रिंटिंग के साथ शुरू होगी, जबकि घर-घर सर्वे चार नवंबर से चार दिसंबर तक चलेगा. ड्राफ्ट लिस्ट नौ दिसंबर को जारी होगी, दावा-आपत्ति आठ जनवरी 2026 तक और अंतिम लिस्ट सात फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि यह एक्सरसाइज हर योग्य वोटर को शामिल करने और अयोग्य को हटाने के लिए है. बंगाल में कोई विवाद नहीं है, राज्य सरकार अपना सहयोग देगी. ममता बनर्जी ने किया विरोध हालांकि, ममता बनर्जी ने SIR को ‘NRC जैसा अभ्यास’ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने आयोग पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया और कहा कि आयोग के अधिकारी हमारे अधिकारियों को धमकियां दे रहे हैं. यह ‘लॉलीपॉप सरकार’ का खेल है. बंगाल में दंगे भड़क सकते हैं. जुलाई से ही ममता का रुख आक्रामक रहा है. उन्होंने बीएलओ की मीटिंग पर नाराजगी जताई कि यह राज्य सरकार को सूचित किए बिना हुई. अक्टूबर में उन्होंने कहा कि आयोग आग के साथ खेल रहा है. उत्तर बंगाल में बाढ़ प्रभावित परिवार दस्तावेज कैसे देंगे. टीएमसी का दावा है कि SIR से 1.2 करोड़ वोटरों को हटाने की साजिश है, जो उनके वोट बैंक को नुकसान पहुंचाएगी. इन आरोपों के बीच राज्य सरकार ने 14 जिलाधिकारियों समेत प्रमुख अधिकारियों का तबादला कर दिया. प्रभावित जिलों में उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, कूच बिहार, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, दार्जिलिंग, मालदा, बीरभूम, झारग्राम और पूर्व मिदनापुर शामिल हैं. कई अधिकारी ढाई से चार साल से पद पर थे, जो ECI के तीन साल के नियम का उल्लंघन कर रहे थे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह रूटीन तबादला है, लेकिन SIR शुरू होने के बाद जटिल हो जाता. भाजपा ने इसे ‘अवैध हेरफेर’ बताते हुए आयोग से शिकायत की है. प्रदेश बीजेपी नेता सिसिर बाजोरिया ने कहा कि आयोग की अनुमति के बिना 235 अधिकारियों का तबादला SIR का उल्लंघन है. 17 डीएम, 22 एडीएम, 45 एसडीओ और 151 बीडीओ का तबादला किया गया है. इसे रद्द किया जाए.

चुनाव आयोग : SIR के जरिए वोटर लिस्ट में बदलाव, हर योग्य मतदाता को शामिल किया जाएगा

नई दिल्ली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देशभर में SIR की घोषणा की. इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है. इस चरण में मतदाता सूची के अपडेशन, नए वोटरों के नाम जोड़ने और त्रुटियों को सुधारने का काम किया जाएगा. दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'आज हम यहां स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दूसरे चरण की शुरुआत के ऐलान के लिए मौजूद हैं. मैं बिहार के मतदाताओं को शुभकामनाएं देता हूं और उन 7.5 करोड़ मतदाताओं को नमन करता हूं, जिन्होंने इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाई और इसे सफल बनाया.' दूसरे चरण में इन 12 राज्यों में होगा SIR दूसरे चरण में चुनाव आयोग 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR करा रहा है. इन 12 राज्यों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप शामिल हैं.  उन्होंने आगे बताया कि आयोग ने देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चुनाव अधिकारियों से मुलाकात कर प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की. मुख्य चुनाव आयुक्त का बड़ा संदेश: 12 राज्यों में शुरू होगा SIR मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने छठ पर्व की शुभकामनाओं के साथ बिहार के मतदाताओं को धन्यवाद दिया. उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम की घोषणा करते हुए कहा कि बिहार के पहले चरण के बाद अब 12 राज्यों में ‘SIR’ (स्पेशल इंटीग्रेटेड रिवीजन) कार्यक्रम शुरू किया जाएगा. CEC ने बिहार में इस प्रक्रिया की सफलता पर जोर दिया और बताया कि SIR से बनी मतदाता सूची पर मतदाताओं की ओर से ‘जीरो अपील’ दर्ज की गई है, जो इस प्रणाली की सटीकता और प्रभावशीलता को प्रमाणित करता है. CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इस अभ्यास के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) प्रत्येक मतदाता के घर कम से कम तीन बार दौरा करेंगे, ताकि नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा जा सके और किसी भी गलती को सुधारा जा सके. ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'BLO घर-घर जाकर Form-6 और Declaration Form एकत्र करेंगे, नए मतदाताओं को फॉर्म भरने में मदद करेंगे और उन्हें ERO (Electoral Registration Officer) या AERO (Assistant ERO) को सौंपेंगे.' मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि फेज-2 की ट्रेनिंग मंगलवार से शुरू होगी. साथ ही सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEOs) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEOs) को निर्देश दिया गया है कि वे अगले दो दिनों के भीतर राजनीतिक दलों से मिलकर SIR प्रक्रिया की जानकारी दें. उन्होंने बताया कि आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि मतदाताओं- खासकर बुजुर्गों, बीमार, दिव्यांग (PwD), गरीब और कमजोर वर्गों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए लोगों की तैनाती की जाएगी ताकि उन्हें अधिकतम सहायता मिल सके ज्ञानेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी मतदान केंद्र (polling station) में 1200 से ज्यादा मतदाता नहीं होंगे. बिहार के वोटर्स का किया धन्यवाद दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा- मैं बिहार के मतदाताओं को शुभकामनाएं देता हूं और उन 7.5 करोड़ मतदाताओं को नमन करता हूं, जिन्होंने इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाई और इसे सफल बनाया.' उन्होंने आगे बताया कि आयोग ने देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चुनाव अधिकारियों से मुलाकात कर प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की. अब तक 8 बार हुआ SIR अब तक देश में 1951 से 2004 के बीच आठ बार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) हुआ है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि राजनीतिक दलों ने कई मौकों पर मतदाता सूचियों की गुणवत्ता का मुद्दा उठाया है. आज रात फ्रीज कर दी जाएगी लिस्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इस चरण में जिन राज्यों में SIR होगा, वहां मतदाता सूची आज रात फ्रीज कर दी जाएगी. क्यों जरूरी है SIR? मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा- कई कारण हैं जिनकी वजह से SIR जैसी प्रक्रिया की जरूरत है. इनमें बार-बार पलायन शामिल है, जिसके कारण मतदाताओं का एक से ज़्यादा जगहों पर पंजीकरण हो जाता है, मृत मतदाताओं का नाम नहीं हटाया जाता और किसी विदेशी का गलत तरीके से सूची में शामिल होना शामिल है.' क्या होगी पात्रता? मुख्य चुनाव आयुक्त ने मतदाता के लिए पात्रता को भी स्पष्ट किया, जिसके अनुसार वोट देने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना, कम से कम 18 वर्ष की आयु पूरी करना. निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना और किसी भी कानून के तहत अयोग्य न होना आवश्यक है, जो कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 में निहित है. 12 राज्यों/UTs की वोटर लिस्ट आज रात होगी फ्रीज मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने घोषणा की कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) की मतदाता सूची आज रात से फ्रीज कर दी जाएगी. जहां ‘स्पेशल इंटीग्रेटेड रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया शुरू की जानी है. यह कदम इन क्षेत्रों में विस्तृत SIR अभ्यास शुरू करने से पहले मतदाता सूची को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण है. अब तक 8 बार हुआ SIR अब तक देश में 1951 से 2004 के बीच आठ बार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) हुआ है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि राजनीतिक दलों ने कई मौकों पर मतदाता सूचियों की गुणवत्ता का मुद्दा उठाया है. आज रात फ्रीज कर दी जाएगी लिस्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इस चरण में जिन राज्यों में SIR होगा, वहां मतदाता सूची आज रात फ्रीज कर दी जाएगी.

लोकतंत्र का महापर्व करीब: चुनाव आयोग आज खोलेगा SIR की तारीखों का पिटारा

नई दिल्ली अगले दो-तीन सालों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों को देखते हुए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) आज देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम की घोषणा करेगा। ECI ने इसकी तारीखों का ऐलान करने के लिए आज शाम सवा 4 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। SIR के तहत देश भर में मतदाता सूचियों को शुद्ध और विश्वसनीय बनाया जाएगा। पहले चरण में 5 राज्यों पर फोकस बताया जा रहा है कि SIR के पहले चरण में उन 5 राज्यों को शामिल किया जाएगा जहां अगले साल 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं:     असम     केरल          तमिलनाडु     पुडुचेरी     पश्चिम बंगाल ECI की घोषणा में करीब 10 से 15 राज्यों को शामिल किया जा सकता है जिनमें अगले 2-3 सालों में विधानसभा चुनाव होने हैं। निकाय चुनाव के बाद होगा SIR: ECI ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिन राज्यों में निकाय चुनाव होने हैं वहां SIR निकाय चुनाव के बाद होगा ताकि चुनावी ड्यूटी में व्यस्त कर्मचारी इस कार्य को पर्याप्त समय दे सकें। SIR के तहत कैसे अपडेट होगी वोटर लिस्ट? विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को त्रुटि रहित बनाना है। इसके लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सर्वे करेंगे।     मृत वोटरों को हटाना: मृत वोटरों के नाम हटाए जाएंगे।     नए वोटरों का पंजीकरण: नए वोटरों का डाटा जुटाकर उनका पंजीकरण (Registration) किया जाएगा और उनके नाम जोड़े जाएंगे।     डुप्लीकेसी खत्म: डुप्लीकेट वोटरों की पहचान करके उनके नाम हटाए जाएंगे।     स्थानांतरण अपडेट: उन वोटरों के नाम भी अपडेट किए जाएंगे जो स्थान शिफ्ट या ट्रांसफर हो चुके हैं।     डेटा सत्यापन: BLOs वोटर लिस्ट में शामिल नामों, EPIC नंबर्स, पते और मोबाइल नंबर जैसी सभी जानकारियों की पुष्टि करेंगे। इस विस्तृत सर्वे के बाद नए वोटर कार्ड जारी किए जाएंगे और एक फाइनल वोटर लिस्ट तैयार की जाएगी जो आगामी चुनावों के लिए शुद्ध और विश्वसनीय होगी। ECI और CEO की बैठकें भारतीय चुनाव आयोग की टीम ने देशभर में SIR का फॉर्मेट फाइनल करने से पहले सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEOs) से मुलाकात की थी। सभी CEOs को पिछली SIR के तहत अपडेट हुई वोटर लिस्ट को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए कहा गया है। उदाहरण के लिए दिल्ली (2008), उत्तराखंड (2006) और बिहार (हाल ही में) की फाइनल वोटर लिस्ट वेबसाइट पर उपलब्ध है।  

बिहार से सबक: चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में SIR पर कर सकता है ढील

नई दिल्ली बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठे विवादों और कानूनी चुनौतियों के बाद, चुनाव आयोग (EC) अब इस प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने जा रहा है। इसका उद्देश्य मतदाताओं की परेशानियों को कम करना और प्रक्रिया को मतदाता अनुकूल बनाना है। बिहार में SIR के दौरान दस्तावेजों की जटिल मांग, फॉर्म न भरने पर नामों की बड़ी संख्या में हटाई गई प्रविष्टियां (डिलीशन) और बहुत कम समय सीमा जैसी समस्याओं को लेकर मतदाताओं में असंतोष था। अब आयोग इन तीनों बिंदुओं पर लचीलापन लाने की योजना बना रहा है। दस्तावेजों की अनिवार्यता में ढील बिहार में पहली बार हर मतदाता से नए दस्तावेजों की मांग की गई थी, जिससे लोगों में भ्रम और तनाव फैला। अब आयोग इस नीति में बदलाव पर विचार कर रहा है ताकि कम से कम मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने पड़ें। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) पुराने रजिस्टरों और पारिवारिक लिंक के आधार पर ऐसे मतदाताओं की पहचान कर रहे हैं जिनसे नए सिरे से प्रमाण पत्र नहीं मांगे जाएंगे। फॉर्म न भरने पर नाम हटाने की नीति में बदलाव बिहार में इस साल SIR के दौरान करीब 65 लाख नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे इनमें मृतक, स्थानांतरित व्यक्ति और वे लोग शामिल थे जिन्होंने एन्यूमरेशन फॉर्म या दस्तावेज जमा नहीं किए। यह प्रक्रिया पहले के रिवीजन की तुलना में असामान्य थी। अब आयोग विचार कर रहा है कि ड्राफ्ट सूची से नाम न हटाए जाएं, बल्कि हर मतदाता को अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले फिर से शामिल होने का अवसर दिया जाए। समय सीमा बढ़ाने पर विचार बिहार में SIR प्रक्रिया तीन महीने तक चली। 25 जून से एक महीने तक एन्यूमरेशन, फिर 30 दिन में वेरिफिकेशन, और 30 सितंबर को अंतिम सूची जारी की गई। यह कार्यक्रम विधानसभा चुनावों की घोषणा से सिर्फ छह दिन पहले पूरा हुआ। इस तंग समय सीमा ने मतदाताओं और सरकारी कर्मचारियों दोनों पर बेहद दबाव डाला। अब आयोग मानता है कि इतनी कठोर समय सीमा, वह भी चुनाव से ठीक पहले, व्यावहारिक नहीं है। इसलिए भविष्य के SIR में अवधि बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है। बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी में होंगे SIR चुनाव आयोग के पास अगले SIR के लिए ज्यादा समय नहीं है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में मई 2026 तक नई विधानसभा बननी है। आयोग आम तौर पर फरवरी के अंत तक चुनाव कार्यक्रम घोषित करता है, इसलिए दीपावली के तुरंत बाद इन राज्यों में SIR की घोषणा की संभावना है। हाल ही में बाढ़ या मौसम की विपरीत परिस्थितियों से प्रभावित राज्य तथा वे राज्य जहां स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं, उनमें SIR को अगले चरण में आयोजित किया जाएगा।

MP में भी लागू होगा ‘SIR’ अभियान: चुनाव आयोग की निगरानी में 5.75 लाख वोटर संदेह के घेरे में

रीवा निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम  की शुरुआत हो गई है। इसमें 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान मतदाताओं का मिलान किया जाएगा। जिन मतदाताओं के माता-पिता के नाम उस समय की वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं थे, उनका सत्यापन किया जाएगा और उनसे जरूरी दस्तावेज मांगे जाएंगे। रीवा और मऊगंज जिले की प्रारंभिक रिपोर्ट आयोग को भेज दी गई है। कुल 5,72,250 मतदाता इस जांच के दायरे में आएंगे। घर-घर जाकर होगी जांच निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 2014 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) डोर-टू-डोर सर्वे करेंगे। रीवा जिले में 1463 और मऊगंज जिले में 518 पोलिंग बूथ शामिल हैं। 1200 से अधिक मतदाताओं वाले मतदान केन्द्रों को विभाजित किया जा रहा है, जिससे दोनों जिलों में करीब 350 नए बूथ बढ़ जाएंगे। कौन-कौन से दस्तावेज देने होंगे जिन परिवारों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें अपना नाम लिस्ट में बनाए रखने के लिए 2–3 दस्तावेज देने होंगे। जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है, उन्हें पिता से संबंध प्रमाणपत्र के साथ कोई एक मान्य दस्तावेज देना होगा। इसके लिए आपको पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, वन अधिकार पत्र, जाति प्रमाणपत्र (OBC/SC/ST), आधार कार्ड, पारिवारिक रजिस्टर, जन्म प्रमाणपत्र, बैंक या सरकारी पहचान पत्र, भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र, पेंशन आदेश आदि देना होगा। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में बढ़े मतदाता? आयोग को भेजी रिपोर्ट के अनुसार शहरी रीवा विधानसभा में मतदाताओं की संख्या 11,239 कम हुई है। वहीं ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता तेजी से बढ़े हैं जैसे…     त्योंथर: +37,287     मनगवां: +93,659     गुढ़: +50,605     सिरमौर: +36,321     मऊगंज: +59,468     देवतालाब: +78,308     2008 में अस्तित्व में आई सेमरिया विधानसभा में अब 2,27,841 मतदाता हैं। BLO का काम हुआ और कठिन पुनरीक्षण कार्य से बूथ लेवल ऑफिसरों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। वर्तमान में वे नगरीय निकायों की वोटर लिस्ट तैयार करने में भी लगे हैं, जिससे शिक्षक BLOs का शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है। जल्द ही आयोग की ओर से डोर-टू-डोर सर्वे की विस्तृत कार्ययोजना जारी की जाएगी। जिला उप निर्वाचन अधिकारी सुधीर बेक का बयान निर्वाचक नामावली के गहन पुनरीक्षण में 2003 की सूची से संबंधित मतदाताओं एवं उनके माता-पिता के नामों का मिलान किया जाएगा। प्रारंभिक जानकारी आयोग को भेज दी गई है, आगे के निर्देशानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी।