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लग्जरी वृद्धाश्रम में खाली कमरों की स्थिति, 80,000 रुपए तक का किराया रोक रहा बुजुर्गों को

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ महीने पहले एक पेड वृद्धाश्रम की शुरुआत हुई थी। यह वृद्धाश्रम आधुनिक सुविधाओं से लैस था। उद्घाटन के इतने दिनों बाद भी इस वृद्धाश्रम में रहने वाला कोई नहीं है। सिर्फ दो बुजुर्गों को छोड़कर यह आधुनिक वृद्धाश्रम पूरी तरह से खाली है। ऐसे में इसकी व्यावहारिकता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 56 बुजुर्ग नागरिकों को रहने की है व्यवस्था इस हाईटेक वृद्धाश्रम में 34 कमरे हैं। इन 34 कमरों में 56 बुजुर्ग नागरिक रह सकते हैं। कमरों के विकल्पों में सिंगल कमरों से लेकर सुइट तक शामिल हैं, जिन्हें बुजुर्गों को अलग-अलग स्तर पर आराम और प्राइवेसी देने के लिए डिजाइन किया गया है। पहले आओ, पहले पाओ की सुविधा वहीं, इस वृद्धाश्रम में बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होती है। उद्घाटन के बाद से, दो कमरों को छोड़कर बाकी सभी कमरे खाली पड़े हैं। कमरे पूरी तरह से तैयार हैं लेकिन इन्हें लेने वाला कोई नहीं है। जनवरी में हुआ था उद्घाटन दरअसल, इसका उद्घाटन इसी साल जनवरी महीने में सीएम मोहन यादव ने किया था। इसके संचालन का जिम्मा एक एनजीओ के पास है। अपनी जरूरत के हिसाब से बुजुर्ग बुकिंग कर सकते हैं। खर्च अधिक होने की वजह से खाली पेड वृद्धाश्रम का कैंपस भोपाल के लिंक रोड पर नंबर 3 पर है। यह 5.25 एकड़ में फैला है। साथ ही इसमें काफी अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं। मगर रिस्पॉन्स कम होने की वजह यह है कि यह किसी बुजुर्ग को रखने का खर्च बहुत ज्यादा है। एक व्यक्ति के लिए हर महीने 45,000 रुपए से ज्यादा का खर्च आता है, जिसे कई लोग अपनी पहुंच से बाहर मानते हैं। 24 करोड़ रुपए की लागत से हुआ था निर्माण यहां रहने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने अब इस बुजुर्गों के आश्रय को अपने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जरिए चलाने का प्रस्ताव रखा है। इसी विभाग ने 24 करोड़ रुपए की लागत से इस विशाल वृद्धाश्रम का निर्माण करवाया था। सरकार इसे न लाभ, न हानि के आधार पर चलाने की योजना बना रही है, जिससे प्रति व्यक्ति रहने का खर्च कम हो जाएगा और ज्यादा से ज्यादा बुजुर्ग नागरिक इसकी ओर आकर्षित होंगे। एक अधिकारी, सामाजिक न्याय विभाग अत्याधुनिक है वृद्धाश्रम इस आश्रय गृह में एसी कमरे, इंटरटेनमेंट और आराम की जगहें, टहलने के लिए पक्का रास्ता, फिजियोथेरेपी सेंटर, लॉन्ड्री, किचन, मेडिकल रूम और रोजमर्रा की जरूरत की सारी चीजें हैं। साथ ही बुजुर्गों की देखभाल करने वाला स्टाफ भी उपलब्ध है। मुनेश्वर कुमार

3700 एकड़ में डेवलप होगी नई सिटी, 20 अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने किया प्रोजेक्ट में रुचि का इज़हार

भोपाल  मध्यप्रदेश में एक नया शहर डेवलप किया जा रहा है। राज्य की राजधानी भोपाल में इसे नॉलेज एंड एआइ सिटी के नाम से विकसित किया जा रहा है। इसे भौरी क्षेत्र में बनाया जाएगा। नॉलेज एंड एआइ सिटी लगभग 3700 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी। यहां प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के कैंपस रहेंगे और एआइ रिसर्च पार्क के तहत डेटा सेंटर बनाया जाएगा। एआइ लैब व रिसर्च हब भी विकसित किया जाएगा। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट पर कई ग्लोबल एजेंसियों की नजर है। भौरी में प्रस्तावित नॉलेज एंड एआइ सिटी के विकास के लिए ऐसी 20 से अधिक एजेंसियोें ने रुचि दिखाई है। अधिकारियों का कहना है कि इसके निर्माण के लिए मुख्य एजेंसी को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। नॉलेज एंड एआइ सिटी भौंरी क्षेत्र में इंदौर-भोपाल कॉरिडोर के पास विकसित होगी प्रस्तावित नॉलेज एंड एआइ सिटी भौंरी क्षेत्र में इंदौर-भोपाल कॉरिडोर के पास विकसित होगी। अभी इसकी विस्तृत योजना तय होनी है। इस प्रोजेक्ट में करीब 38 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। रिसर्च, स्टार्टअप, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एक एकीकृत इकोसिस्टम बनाना उद्देश्य नॉलेज एंड एआइ सिटी प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसके लिए बीडीए को नोडल बनाया है। इसका उद्देश्य रिसर्च, स्टार्टअप, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एक एकीकृत इकोसिस्टम बनाना है। जिले में इसे लेकर काफी चर्चा है। रोडमैप फॉर नॉलेज एंड एआइ सिटी पर एक महत्वपूर्ण सत्र भी आयोजित हो चुका है। प्रोजेक्ट के लिए अनेक ग्लोबल एजेंसियां लालायित, बीडीए और अन्य संबंधित अधिकारी बताते हैं कि 20 से ज्यादा एजेंसियां यह काम करने को तैयार एआई सिटी प्रोजेक्ट से भौरी क्षेत्र का भी खासा विकास होगा। इस प्रोजेक्ट के विकास के लिए अनेक ग्लोबल एजेंसियां लालायित हैं। बीडीए और अन्य संबंधित अधिकारी बताते हैं कि 20 से ज्यादा एजेंसियां यह काम करने को तैयार हैं। अधिकारियों के अनुसार एआई सिटी के निर्माण के लिए जल्द ही मुख्य एजेंसी को फायनल कर लिया जाएगा। ऐसे बढ़ेगी योजना: ग्लोबल यूनिवर्सिटीज के तहत प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के कैंपस होंगे, एआइ रिसर्च पार्क के तहत डेटा सेंटर और एआइ लैब के साथ एक समर्पित रिसर्च हब इस साल के आखिर तक एआई सिटी का काम जमीन पर उतारने की शुरुआत होगी। ग्लोबल यूनिवर्सिटीज के तहत प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के कैंपस यहां होंगे। एआइ रिसर्च पार्क के तहत डेटा सेंटर और एआइ लैब के साथ एक समर्पित रिसर्च हब तय किया जाएगा। स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर में नए उद्यमियों के लिए सुविधाएं दी जाएंगी।

मोहन ने ममता के गढ़ में किया जोरदार प्रदर्शन, कहा- वेस्ट बंगाल में कमल खिलने से कोई ताकत नहीं रोक सकती

भोपाल  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। इस बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 अप्रैल को कोलकाता की दो विधानसभाओं में धुआंधार प्रचार किया। उन्होंने कोलकाता जिले की कमरहाटी विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी अरुप चौधरी और मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर सदर विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी दिलीप घोष के समर्थन में जनता से समर्थन मांगा। दोनों विधानसभाओं में उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई ताकत बंगाल में कमल खिलने से नहीं रोक सकती। पश्चिम बंगाल की जनता जंगलराज और तृणमूल कांग्रेस से त्रस्त हो चुकी है। जनता को अब विकास चाहिए। पश्चिम बंगाल में दहाड़े सीएम मोहन यादव 18 अप्रैल की सुबह सबसे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कमरहाटी विधानसभा पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अब ठहराव नहीं, परिवर्तन और प्रगति की ओर बढ़ने को तैयार है। कई सालों से विकास की दौड़ में पीछे छूटा पश्चिम बंगाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार में नई ऊर्जा, नई दिशा और तेज प्रगति के साथ आगे बढ़ेगा। यहां के हर वर्ग के जीवन में जमीनी स्तर पर बदलाव नजर आएगा। कोलकाता के अंदरुनी इलाकों में बहुत गरीबी है और हालात बेहतर दयनीय हैं। यहां युवाओं के पास रोजगार नहीं है, मजबूरी में लोगों को परिवार का पालन पोषण करने के लिए पलायन करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हर क्षेत्र में विकास की असीमित संभावनाएं हैं। अब बंगाल की जनता टीएमसी के कुशासन और जंगलराज से मुक्ति चाहती है। बंगाल लगातार गर्त में जा रहा है, इसके उत्थान के लिए खिलता कमल और भाजपा की सरकार चाहिए। गौरतलब है कि 18 अप्रैल की सुबह सबसे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कमरहाटी विधानसभा पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अब ठहराव नहीं, परिवर्तन और प्रगति की ओर बढ़ने को तैयार है। कई सालों से विकास की दौड़ में पीछे छूटा पश्चिम बंगाल,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार में नई ऊर्जा, नई दिशा और तेज प्रगति के साथ आगे बढ़ेगा। यहां के हर वर्ग के जीवन में जमीनी स्तर पर बदलाव नजर आएगा। कोलकाता के अंदरुनी इलाकों में बहुत गरीबी है और हालात बेहतर दयनीय हैं। यहां युवाओं के पास रोजगार नहीं है, मजबूरी में लोगों को परिवार का पालन पोषण करने के लिए पलायन करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हर क्षेत्र में विकास की असीमित संभावनाएं हैं। अब बंगाल की जनता टीएमसी के कुशासन और जंगलराज से मुक्ति चाहती है। बंगाल लगातार गर्त में जा रहा है, इसके उत्थान के लिए खिलता कमल और भाजपा की सरकार चाहिए। 'बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए SIR जरूरी' मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सहित जहां हर राज्य तेजी से प्रगति कर रहा है, तो वही बंगाल पिछड़ रहा है। बंगाल की जनता प्रचंड बहुमत से राज्य में बीजेपी की सरकार बनाकर विकास की एक नई इबारत लिखना चाहती है। बंगाल चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है। प्रधानमंत्री मोदी देश की युवा शक्ति, नारी शक्ति, गरीब और अन्नदाताओं के कल्याण के लिए पूर्ण समर्पण भाव से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में चुनाव आयोग के निर्देश पर एसआईआर कराया गया है। इस प्रक्रिया में सही मतदाताओं की पहचान की गई। बंगाल की प्रगति और बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए एसआईआर जरूरी है। 'जनता चाहती है बीजेपी का शासन' दूसरी ओर, शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी दिलीप घोष के समर्थन में प्रचार किया। यहां उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता की चेहरे की चमक बता रही है कि दुनिया की कोई ताकत यहां कमल खिलने से नहीं रोक सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है और बंगाल में भी भाजपा चुनाव जीतेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भाजपा प्रत्याशी दिलीप घोष को बंगाल में भाजपा का शुभंकर बताया। उन्होंने कहा कि जैसे लोहा पारस के संपर्क में आने पर सोना बन जाता है। उसी प्रकार अगर कोई कार्यकर्ता दिलीप के संपर्क में आए तो वह भाजपा का बन जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिलीप घोष के समर्थन में भव्य रोड शो भी किया। इस रोड शो में कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय जनता उमड़ पड़ी। रोड शो में उपस्थित लोगों ने भारत माता की जय और जय श्रीराम के नारे लगाए। तेजी से करेंगे विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कमरहाटी विधानसभा क्षेत्र की गलियों में घूमकर जनता से बीजेपी के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनकल्याण के कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगा तो विकास की राह पर बहुत आगे बढ़ेगा। पश्चिम बंगाल कभी देश का सबसे अच्छा राज्य था। लेकिन पहले कम्युनिस्ट पार्टी और बाद में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सरकारों ने बंगाल का पूरा बेड़ा गर्क कर दिया। बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए एसआईआर जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सहित जहां हर राज्य तेजी से प्रगति कर रहा है, तो वही बंगाल पिछड़ रहा है। बंगाल की जनता प्रचंड बहुमत से राज्य में बीजेपी की सरकार बनाकर विकास की एक नई इबारत लिखना चाहती है। बंगाल चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है। प्रधानमंत्री मोदी देश की युवा शक्ति, नारी शक्ति, गरीब और अन्नदाताओं के कल्याण के लिए पूर्ण समर्पण भाव से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में चुनाव आयोग के निर्देश पर एसआईआर कराया गया है। इस प्रक्रिया में सही मतदाताओं की पहचान की गई। बंगाल की प्रगति और बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए एसआईआर जरूरी है। जनता चाहती है बीजेपी का शासन दूसरी ओर, शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी दिलीप घोष के समर्थन में प्रचार किया। यहां उन्होंने कहा कि पश्चिम … Read more

भोपाल टॉकीज तक ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार, काली माता मंदिर से 6 जंक्शन होंगे री-डिजाइन

भोपाल भोपाल शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। तलैया स्थित काली माता मंदिर से तीन मोहारा तक करीब 3.2 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर ट्रैफिक सुधार की नई योजना पर काम शुरू हो गया है। इस योजना के तहत काली माता मंदिर तिराहा से भोपाल टॉकीज चौराहे के बीच आने वाले 6 प्रमुख जंक्शनों (3 चौराहे और 3 तिराहे) को नए सिरे से डिजाइन किया जाएगा। विस्तृत प्लान पुलिस कमिश्नर के सामने प्रस्तुत किया गया इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा ट्रैफिक पुलिस ने School of Planning and Architecture (SPA) के साथ मिलकर तैयार की है। सोमवार को यह विस्तृत प्लान पुलिस कमिश्नर के सामने प्रस्तुत किया गया, जिसमें हर जंक्शन की मौजूदा समस्याओं और उनके समाधान को चिन्हित किया गया है। इस कॉरिडोर में भोपाल टॉकीज, नादरा बस स्टैंड, अल्पना, संगम, भारत टॉकीज और काली माता तिराहा जैसे व्यस्त जंक्शन शामिल हैं। ट्रायल में सामने आई असली समस्या हमीदिया रोड स्थित भोपाल टॉकीज चौराहे पर किए गए ट्रायल के दौरान यह पाया गया कि ट्रैफिक जाम की मुख्य वजह सड़क की चौड़ाई की कमी नहीं, बल्कि सड़क का गलत उपयोग और खामीपूर्ण डिजाइन है। ट्रायल के दौरान लेन डिसिप्लिन, स्टॉप लाइन और टर्निंग स्पेस में बदलाव कर ट्रैफिक फ्लो को बेहतर बनाया गया। जंक्शनों पर होंगे ये प्रमुख बदलाव नई डिजाइन के तहत ट्रैफिक मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए कई सुधार किए जाएंगे:     स्टॉप लाइन, जेब्रा क्रॉसिंग और टर्निंग एंगल में सुधार     अनावश्यक कट और अवैध पार्किंग हटाई जाएगी     पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ विकसित किए जाएंगे बाजार क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती कॉरिडोर के दोनों ओर घनी कमर्शियल गतिविधियों के कारण ट्रैफिक और पार्किंग का संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। इस समस्या के समाधान के लिए योजना में सड़क किनारे पार्किंग के साथ-साथ जरूरत के अनुसार मल्टीलेवल पार्किंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। यह पहल शहर में ट्रैफिक मैनेजमेंट को आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

भोपाल में शुरू हुआ सूखे कचरे से कोयला बनाने का ट्रायल, 220 करोड़ में बना प्लांट

भोपाल भोपाल के आदमपुर छावनी में अब शहर के सूखे कचरे से कोयला बनाया जाएगा। नगर निगम ने पीपीपी मोड में 220 करोड़ रुपये की लागत से टोरिफाइड चारकोल प्लांट स्थापित किया है। इस प्लांट के माध्यम से प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे का निपटारा किया जाएगा और इसका ट्रायल रन भी शुरू कर दिया गया है। टोरिफाइड चारकोल प्लांट का महत्व स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम ने यह कदम शहर में सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने के लिए उठाया है। आदमपुर छावनी में स्थापित यह प्लांट नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) के सहयोग से संचालित होगा। यहां से निर्मित टोरिफाइड चारकोल का उपयोग एनटीपीसी अपने औद्योगिक उपयोग में करेगी। ट्रायल रन और कचरे का प्रबंधन नगर निगम ने ट्रायल रन के लिए 3 दिनों में कुल 800 टन सूखा कचरा प्लांट को दिया है। पूरे ट्रायल रन के दौरान लगभग 1800 टन सूखे कचरे को प्रोसेस किया जाएगा। यह प्रक्रिया शहर से निकलने वाले सूखे कचरे के निपटान के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी। तीन दिन में 800 टन कचरा पहुंचा ट्रायल के शुरुआती तीन दिनों में ही प्लांट में 800 टन सूखा कचरा पहुंचाया गया है। अधिकारियों के अनुसार ट्रायल के दौरान कुल 1800 टन कचरे का उपयोग किया जाएगा हर दिन 400 टन कचरे की प्रोसेसिंग 15 एकड़ में फैले इस प्लांट में प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे को प्रोसेस कर टोरिफाइड चारकोल तैयार किया जाएगा। यह तकनीक कचरा निपटान के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन के लिए भी उपयोगी साबित होगी।  बनारस के बाद दूसरा संयंत्र, जहां बिजली का कोयला बनेगा  बनारस के बाद देश में दूसरे टोरिफाइड चारकोल प्लांट के रूप में आदमपुर खंती में स्थापित संयंत्र का ट्रायल रन शुरू हो गया है। इस प्लांट के जरिए रोज 400 टन सूखे कचरे को प्रोसेस कर चारकोल में बदला जाएगा 2021 में हुआ था अनुबंध 12 अक्टूबर 2021 को अनुबंध होने के करीब पांच साल बाद प्लांट का ट्रायल शुरू हुआ। इस दौरान 2023 में खंती में आग लगने, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति में देरी और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण प्रोजेक्ट तय समय से पीछे चला गया। बनारस में सेग्रीगेशन की कमी से प्लांट प्रभावित, यहां भी यही चुनौती बनारस में एनटीपीसी का करीब 200 टन प्रतिदिन क्षमता वाला टोरिफाइड चारकोल प्लांट 2021-22 में शुरू हुआ था। वहां संचालन के दौरान सबसे बड़ी समस्या साफ और अलग किया हुआ सूखा कचरा लगातार उपलब्ध न होना रही। इसके कारण प्लांट पूरी क्षमता पर नहीं चल पाया। भोपाल में भी ‘सेग्रीगेशन एट सोर्स’ कमजोर है। ऐसे में यदि घर स्तर पर कचरे का सही तरह से अलग नहीं हुआ, तो प्लांट को पर्याप्त गुणवत्ता वाला कचरा मिलना मुश्किल होगा। इससे इसका संचालन प्रभावित हो सकता है। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह प्लांट केवल नए सूखे कचरे को ही प्रोसेस करेगा, जबकि खंती में पहले से जमा करीब 6 लाख टन लिगेसी वेस्ट जस का तस बना हुआ है। 400 टन क्षमता वाला बायो-सीएनजी प्लांट अब तक शुरू नहीं आदमपुर छावनी में प्रस्तावित 400 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो-सीएनजी प्लांट भी अब तक शुरू नहीं हो सका है। यह प्लांट, जिसे देश का दूसरा सबसे बड़ा बताया गया था, अगस्त 2023 तक शुरू होना था, लेकिन पर्यावरणीय मंजूरी और तकनीकी अड़चनों के कारण इसमें देरी हो रही है। आयुक्त ने किया निरीक्षण नगर निगम आयुक्त Sanskriti Jain ने प्लांट का दौरा कर कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे भोपाल के लिए गौरव का क्षण बताते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम बताया। एक नजर में प्रोजेक्ट 12 अक्टूबर 2021 को हुआ अनुबंध 220 करोड़ रुपये की लागत 15 एकड़ में स्थापित प्लांट प्रतिदिन 400 टन कचरे की प्रोसेसिंग क्षमता पर्यावरण को मिलेगा फायदा यह प्रोजेक्ट कचरे के वैज्ञानिक निपटान के साथ कोयले के विकल्प के रूप में उपयोगी होगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भोपाल देश के चुनिंदा शहरों में शामिल हो सकेगा, जहां कचरे का शत-प्रतिशत उपयोग किया जा रहा है। निगम को होगी लागत में बचत 15 एकड़ क्षेत्र में स्थापित इस प्लांट के संचालन से नगर निगम को सूखे कचरे के निपटान में होने वाले खर्च में बड़ी बचत होगी। पीपीपी मोड में लगाए गए इस प्लांट से नए लेगसी तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और शहर का कचरा प्रबंधन अधिक व्यवस्थित तरीके से होगा। बनारस के बाद भोपाल में दूसरा प्लांट एनटीपीसी के अधिकारियों के अनुसार, बनारस के अनुभव से सीख लेकर भोपाल प्लांट में अपग्रेड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। यह मध्यप्रदेश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जो शहर के कचरे से टोरिफाइड चारकोल का उत्पादन करेगा। नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने शुक्रवार को प्लांट का निरीक्षण किया और ट्रायल रन की सफलता की जानकारी ली। इस प्रोजेक्ट से शहर का कचरा प्रबंधन और स्वच्छता दोनों ही स्तरों पर मजबूत होगा। निगम को बचत होगी पीपीपी मोड पर लगभग 220 करोड़ रुपए की लागत से आदमपुर छावनी में 15 एकड़ भूमि पर एनटीपीसी ने यह प्लांट स्थापित किया है। प्लांट के संचालन से निगम को सूखे कचरे के निष्पादन पर व्यय होने वाली राशि की बचत होगी और नया लेगसी तैयार नहीं हो पाएगा। बनारस के बाद भोपाल में ही लगा है प्लांट निगम कमिश्नर जैन को एनटीपीसी के अधिकारियों ने बताया कि बनारस के बाद भोपाल में देश का दूसरा ऐसा शहर है, जिसने टोरिफाइड चारकोल प्लांट स्थापित करने के लिए अनुबंध किया था। बनारस के प्लांट के संचालन के अनुभव एवं कार्य व्यवहार से सीख लेकर भोपाल के संयंत्र में अपग्रेड टेक्नालॉजी का उपयोग किया गया है। यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश में अपने किस्म का पहला प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से नगर निगम हर रोज सूखे कचरे का निपटारा कर सकेगा।

भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का विस्तार: आष्टा और सोनकच्छ तक, छह जिलों के 2500 गांव होंगे शामिल

भोपाल  भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया की पहली रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का कुल क्षेत्रफल 12 हजार वर्ग किलोमीटर होगा। इसमें सीहोर जिले का आष्टा और देवास जिले का सोनकच्छ इलाका भी शामिल होगा, जो भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाला बड़ा जंक्शन बनेगा। रिपोर्ट अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सौंप दी गई है। वहीं इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो जाएगा।  छह जिलों की 30 तहसीलें शामिल  भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों की कुल 30 तहसीलें और लगभग 2500 गांव शामिल किए जाएंगे। नर्मदापुरम जिले का सिर्फ 6 प्रतिशत हिस्सा ही इसमें लिया गया है। इटारसी को इस एरिया में नहीं जोड़ा गया है। इसमें शामिल प्रमुख तहसीलें और इलाके में बैरसिया, हुजूर, कोलार, आष्टा, बुधनी, दोराहा, इछावर, जावर, रेहटी, सीहोर, श्यामपुर, गोहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर, ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचौर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया, गुलाबगंज, विदिशा, डोलरिया, होशंगाबाद, माखन नगर आदि शामिल हैं।  इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया भी बढ़ेगा इंदौर विकास प्राधिकरण ने पहले सर्वे में 39 शहरों और 1786 गांवों को मिलाकर 9989 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल बताया था। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अब इसमें और इलाके जोड़े जा रहे हैं। नया क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाएगा। यह फायदा होगा दोनों शहरों की बड़ी परियोजनाएं अब मिलकर बनाई जाएंगी। शहरों को जोड़ने, सड़क-बिजली-नल-पानी जैसी सुविधाएं देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। जमीन अधिग्रहण, अतिक्रमण या विभागों के बीच तकरार जैसी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। केंद्र सरकार बड़े शहरों के विकास के लिए अलग से पैकेज देगी। ट्रिलियन प्लस आबादी वाले शहरों को विशेष फंड मिलेगा। दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों को भी 5-5 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद मिलेगी। 6 माह में तैयार होगी रिपोर्ट  बीडीए ने सभी शामिल इलाकों की पूरी जानकारी मांगी है। कृषि, राजस्व, परिवहन, लोक निर्माण, उद्योग, पर्यटन, जल संसाधन समेत कई विभागों से जनसंख्या, उद्योग, लोगों की आय और रोजगार संबंधी आंकड़े मांगे गए हैं। रिपोर्ट तैयार करने में 6 महीने और लग सकते हैं। इसके बाद विस्तृत प्लानिंग शुरू होगी। इस फैसले से भोपाल-इंदौर क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज हो जाएगी और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। 

सिलेंडर की भारी कमी, 25 दिन का नियम कागजों तक ही सीमित, महीने बाद ही मिलेगा नया

भोपाल  पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के लाखों रसोई गैस उपभोक्ता एक नई डिजिटल समस्या से जूझ रहे हैं। तेल कंपनियों द्वारा लागू किए गए 25 दिन के अंतराल के नियम ने व्यवहार में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कागजों में यह नियम पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के लिए बनाया गया है, लेकिन हकीकत में उपभोक्ताओं को दूसरा सिलेंडर पाने के लिए लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। बुकिंग और डिलीवरी की तारीख के बीच बढ़ते अंतर ने डिजिटल सिस्टम को ऐसा जाल बना दिया है, जिसमें आम आदमी की रसोई फंसती नजर आ रही है। डिजिटल नियम बना परेशानी का कारण     राजधानी की विभिन्न गैस एजेंसियों से मिल रही शिकायतों के अनुसार उपभोक्ताओं को दूसरे सिलेंडर के लिए तय समय से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। नियम के अनुसार एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद 25 दिन का अंतराल आवश्यक है, लेकिन सिस्टम की गणना का तरीका उपभोक्ताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।     तेल कंपनियां इस अंतराल की गणना बुकिंग की तारीख से नहीं बल्कि सिलेंडर की डिलीवरी की तारीख से कर रही हैं। यही कारण है कि उपभोक्ता समय पर बुकिंग करने के बावजूद अगला सिलेंडर समय पर नहीं ले पा रहे हैं। डिलीवरी में देरी बढ़ा रही इंतजार     गैस एजेंसियों द्वारा सिलेंडर पहुंचाने में होने वाली देरी भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता ने 20 फरवरी को गैस बुक की और एजेंसी ने सिलेंडर 26 फरवरी को पहुंचाया, तो सिस्टम के अनुसार अगली बुकिंग 24 मार्च से पहले संभव नहीं होगी।     इस स्थिति में उपभोक्ता को लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। एजेंसियों की देरी का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जबकि डिजिटल सिस्टम उन्हें निर्धारित समय से पहले बुकिंग करने से रोक देता है। जरूरत के समय काम नहीं आ रहा सिस्टम     मध्यमवर्गीय परिवारों में अक्सर गैस की खपत स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। घर में मेहमान आने, किसी आयोजन या अन्य कारणों से कई बार सिलेंडर 22–23 दिनों में ही खत्म हो जाता है। ऐसे समय में उपभोक्ता नया सिलेंडर बुक नहीं कर पाते।     मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल पर उपभोक्ताओं को ‘अभी बुकिंग संभव नहीं’ जैसा संदेश मिलता है। इससे लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि संकट के समय तकनीक सुविधा देने के बजाय बाधा बन रही है। पारदर्शिता के नाम पर बढ़ी दिक्कत     शहर के नागरिकों का कहना है कि पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से बनाया गया यह डिजिटल सिस्टम अब आम उपभोक्ता के लिए परेशानी का कारण बन गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पहले ही गैस और ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इस नियम को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। यदि डिलीवरी में देरी हो रही है तो उसकी गणना उपभोक्ता के खिलाफ नहीं होनी चाहिए। नियम में लचीलापन जरूरी     उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि सरकार और तेल कंपनियों को इस डिजिटल व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार बुकिंग की गणना डिलीवरी की तारीख के बजाय बुकिंग की तारीख से होनी चाहिए या फिर विशेष परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त छूट दी जानी चाहिए।     यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह डिजिटल नियम लाखों परिवारों की रसोई पर और भारी पड़ सकता है।  

भोपाल में सेंट्रल विस्टा डिजाइन को मंजूरी, स्टेट कैपिटल कांप्लेक्स के निर्माण पर खर्च होंगे एक हजार करोड़ रुपये

भोपाल  नए सेंट्रल विस्टा (स्टेट कैपिटल कांप्लेक्स प्रोजेक्ट) का डिजाइन फाइनल हो गया है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की बैठक में इस योजना के प्राथमिक स्वरूप पर सहमति दे दी गई है। बैठक में हाउसिंग बोर्ड को चार महीने यानी 30 जून के पहले इसकी डीपीआर फाइनल करने को कहा है। इसके तहत बोर्ड ने टेंडर के माध्यम से आर्किटेक्ट के रूप में फर्म मेसर्स सीपी कुकरेजा का चुनाव कर लिया है। प्रस्तावित नया प्रोजेक्ट लगभग एक हजार करोड़ रुपये का होगा। 33 विभागों ने मांगी जगह जीएडी ने सभी सरकारी विभागों को पत्र लिखकर उनकी ऑफिस की जरूरतों और स्थानांतरण को लेकर जानकारी मांगी थी। जीएडी को 58 विभागों के 84 कार्यालयों से पत्र प्राप्त हुआ है। 33 विभाग के 59 कार्यालय सेंट्रल विस्टा में स्थानांतरण के इच्छुक हैं। इन विभागों ने कुल एक लाख तीन हजार वर्ग मीटर जगह मांगी है। बाकी छह कार्यालय रेनोवेशन व प्रस्तावित भवन के कारण सहमत नहीं है। 19 अन्य के अपने स्वतंत्र और पर्याप्त ऑफिस हैं। हाईटेक होगा ऑफिस सूत्रों के मुताबिक जिन भी ऑफिस में रेनोवेशन या निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, वहां काम रोका जा सकता है। किसी को भी नई जमीन आवंटित नहीं होगी। सभी को सेंट्रल विस्टा में ही जगह दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट में सभी आधुनिक तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कॉर्पोरेट की तरह यह हाईटेक आफिस होगा। 12 नये टावर बनाने का प्लान पुराने हो चुके सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह नया सेंट्रल विस्टा बनेगा। पुराने दोनों भवनों का निर्मित क्षेत्रफल 76,500 वर्ग मीटर है। नये सेंट्रल विस्टा में लगभग दोगुना यानी 1.60 लाख वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्रफल होगा। नई योजना में 12 नये टावर बनाने की योजना है। ग्रीन एरिया और पार्किंग पर विशेष फोकस पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हरित क्षेत्र को 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर 22.46 हेक्टेयर (लगभग चार गुना) किया जा रहा है। साथ ही अगले 50 वर्षों की जरूरतों को देखते हुए विशाल पार्किंग बनाई जाएगी। आम जनता की सुविधा के लिए मेट्रो स्टेशन से कवर्ड पाथ-वे, हाकर्स कार्नर और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था भी इस मास्टर प्लान का हिस्सा है। साझा छत से बिजली व शीतलता प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता 12 टावरों को जोड़ने वाली एक साझा छत (परगोला) होगी। इससे न केवल परिसर का तापमान कम रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर सोलर ऊर्जा भी पैदा की जाएगी। हालांकि, साधिकार समिति ने इस पर आने वाले अतिरिक्त खर्च का विवरण मांगा है। नागरिकों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट     प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आम नागरिकों की सुविधा के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। मप्र शासन की मंशा के अनुरूप बोर्ड इस पर तेजी से काम कर रहा है। – गौतम सिंह, कमिश्नर, एमपी हाउसिंग बोर्ड  

मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भोपाल में प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों के बीच मैत्री वॉलीबाल मैच आयोजित

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी भोपाल में प्रशिक्षणरत 44वें एवं 45वें बैच के  प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षको के मध्य टीम भावना के निर्माण तथा नेतृत्व क्षमता के गुणों के विकास के उद्देश्य से अकादमी स्थित वॉलीबाल ग्राउंड में मैत्री वॉलीबाल मैच का आयोजन किया गया। कार्यक्रम अकादमी के उप निदेशक  संजय कुमार अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक, पीटीएस भौंरी मती यास्मिन जहरा, सहायक निदेशक (बाह्य प्रशिक्षण) मती ज्योति उमठ बघेल, उप पुलिस अधीक्षक  तिलकराज प्रधान आरक्षक  नारायण चौधरी,  अमरीश पटेल सहित अकादमी का समस्त स्टाफ, प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस फैमिली लाइन के परिवारजन भी उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में 44वें बैच की पुरुष एवं महिला टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विजेता का खिताब प्राप्त किया। यह आयोजन प्रशिक्षुओं के मध्य आपसी समन्वय, अनुशासन, खेल भावना एवं नेतृत्व कौशल के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।

भोपाल में महाशिवरात्रि का अनूठा आयोजन, किन्नर शंकराचार्य का अभिषेक और 60 किन्नरों की घर वापसी

 भोपाल महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल में आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इस भव्य आयोजन में हिमांगी सखी को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य के रूप में घोषित कर उनका पट्टाभिषेक किया गया। पुष्कर पीठ से संभालेंगी कमान किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह ऐतिहासिक घोषणा की गई। हिमांगी सखी राजस्थान के पुष्कर पीठ को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य पीठ के रूप में संभालेंगी। मूल रूप से मुंबई निवासी हिमांगी सखी 'मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा' की प्रमुख हैं और वे पहली किन्नर भागवत कथा वाचक भी हैं। 60 किन्नरों की हिंदू धर्म में वापसी सम्मेलन के दौरान एक बड़ा दावा किया गया कि विभिन्न कारणों से धर्म परिवर्तन कर चुके 60 किन्नरों की 'घर वापसी' कराई गई है। आयोजकों ने बताया कि मुस्लिम धर्म अपना चुके इन किन्नरों ने शुद्धिकरण की प्रक्रिया के बाद पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया है। नए जगद्गुरु और महामंडलेश्वरों की नियुक्ति सम्मेलन में किन्नर समुदाय के धार्मिक नेतृत्व को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की गईं…     घोषित जगद्गुरु: काजल ठाकुर (भोपाल), तनीषा (राजस्थान), संजना (भोपाल), संचिता (महाराष्ट्र)।     घोषित महामंडलेश्वर: सरिता भार्गव, मंजू, पलपल, रानी ठाकुर, सागर। यह सम्मेलन किन्नर समुदाय के भीतर चल रहे गद्दी विवाद और धर्म परिवर्तन के आरोपों के बीच आयोजित किया गया, जिसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।