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ऐशबाग में टूटेंगे 600 पुराने मकान, उनकी जगह बनेंगे बहुमंजिला आवासीय परिसर

 भोपाल  राजधानी भोपाल के ऐशबाग इलाके में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। यहां जर्जर हो चुके 600 ईडब्ल्यूएस मकानों को गिराए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड ने सभी निवासियों को 13 नवंबर तक अपने घर खाली करने और सामान हटाने का अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। निर्धारित समय सीमा के बाद प्रशासन की ओर से विध्वंस अभियान चलाया जाएगा। ज्यादातर मकानों पर अवैध कब्जा हाउसिंग बोर्ड की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ऐशबाग क्षेत्र के इन 600 जर्जर मकानों में से वर्तमान में केवल 110 यूनिटों में ही उनके मूल कानूनी आवंटी निवास कर रहे हैं। बाकी के बचे हुए अधिकांश मकानों पर अनाधिकृत या अवैध कब्जा बताया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से भोपाल नगर निगम (BMC) ने मई 2016 में ही इन संरचनाओं को असुरक्षित घोषित कर दिया था, जिसके बाद साल 2018 में भी नोटिस जारी किए गए थे। जर्जर मकानों की जगह बनेगा नया कॉम्प्लेक्स मौजूदा जर्जर संरचनाओं को पूरी तरह ढहाकर उनकी जगह एमपी री-डेवलपमेंट पॉलिसी, 2022 के तहत एक आधुनिक बहुमंजिला आवासीय परिसर का निर्माण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य पुराने और खतरनाक हो चुके आवासों को हटाकर नागरिकों को सुरक्षित और बेहतर आवास उपलब्ध कराना है। हाउसिंग बोर्ड के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई पुलिस और भोपाल नगर निगम के सहयोग से शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से पूरी की जाएगी। अनधिकृत कब्जाधारियों को नहीं मिलेगा कोई फायदा हाउसिंग बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पुनर्विकास योजना का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जो वैध रूप से इन मकानों के आवंटी हैं। जो मूल कानूनी आवंटी मकान खाली करने के लिए लिखित सहमति देंगे, उन्हें पुनर्निर्माण की अवधि के दौरान कलेक्टर रेट के हिसाब से मासिक किराया सहायता दी जाएगी। हालांकि, अनाधिकृत रूप से रह रहे कब्जाधारियों को इस वित्तीय सहायता या नए फ्लैट का कोई लाभ नहीं मिलेगा। पात्र परिवारों को मिलेंगे बड़े फ्लैट पुनर्विकास नीति के तहत बनने वाले नए बहुमंजिला परिसरों में मूल आवंटियों को कई तरह की सुविधाएं दी जाएंगी। योजना के नियमों के अनुसार, पात्र और मूल कानूनी आवंटियों को उनके मौजूदा फ्लैट्स के मुकाबले 20 प्रतिशत बड़े नए फ्लैट्स उपलब्ध कराए जाएंगे। हाउसिंग बोर्ड और स्थानीय प्रशासन ने सभी रहवासियों से अपील की है कि वे किसी भी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए तय समय सीमा के भीतर अपने घर स्वयं खाली कर दें।  

भोपाल मास्टर प्लान पर आज रात तक आपत्ति दर्ज करने का मौका, कैचमेंट बदलाव का विरोध

भोपाल  भोपाल मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट पर आपत्ति और सुझाव दर्ज कराने की अंतिम तारीख को लेकर असमंजस बढ़ गया है। शनिवार रात 12 बजे तक ऑनलाइन दावे-आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी, लेकिन लगातार अवकाश के कारण नागरिकों को परेशानी होने की आशंका है। इसी को देखते हुए पर्यावरणविद राशिद नूर खान, क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने समय-सीमा को लेकर सवाल उठाए हैं। समिति ने अंतिम तारीख 27 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की है। अब तक मास्टर प्लान के प्रारूप पर 5 हजार से ज्यादा आपत्तियां मिलने की जानकारी सामने आई है। इनकी छंटनी में करीब 15 दिन लगने का अनुमान है। इसके बाद सुनवाई का कार्यक्रम जारी किया जाएगा। सबसे ज्यादा आपत्तियां बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में बदलाव, कृषि भूमि के भू-उपयोग, भोजताल संरक्षण जोन और सड़कों की चौड़ाई से जुड़े प्रस्तावों पर मिली हैं। कैचमेंट और सड़क चौड़ीकरण पर उठे सवाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में प्रस्तावित बदलावों को लेकर अलग-अलग समूहों ने चिंता जताई है। बड़ा तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में बदलाव का मुद्दा खास तौर पर चर्चा में है। कैचमेंट क्षेत्र जलाशय में पानी पहुंचाने वाली भूमि और प्राकृतिक जल प्रवाह से जुड़ा होता है। ऐसे क्षेत्रों में नियोजन संबंधी बदलावों को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव और जल संरक्षण जैसे सवाल उठ सकते हैं। सड़क चौड़ीकरण के प्रस्तावों पर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। स्थानीय नागरिकों और कारोबारियों की चिंताएं प्रस्तावित सड़क मार्गों, निर्माण और आसपास की संपत्तियों पर संभावित प्रभाव से जुड़ी हो सकती हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रत्येक आपत्ति का विस्तृत विवरण या विभाग की ओर से उन पर दिया गया जवाब शामिल नहीं है। छुट्टियों के बीच अंतिम तारीख पर सवाल मास्टर प्लान का प्रारूप 25 सितंबर 2026 को मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशित हुआ था। आपत्ति और सुझाव देने के लिए 30 दिन का समय निर्धारित किया गया है। पर्यावरणविद राशिद नूर खान ने नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर अंतिम तारीख पर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने मध्यप्रदेश सामान्य खंड अधिनियम, 1957 की धारा 7 का उल्लेख करते हुए कहा है कि यदि निर्धारित अंतिम दिन कार्यालय बंद रहता है और संबंधित प्रावधान लागू होता है, तो अगले कार्यदिवस 27 अक्टूबर को प्रस्तुत आपत्तियों को समय-सीमा के भीतर स्वीकार किया जाए। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने भी संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश को आवेदन देकर आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि आखिरी समय में कार्यालय बंद होने या ऑनलाइन आवेदन में तकनीकी परेशानी के कारण किसी नागरिक की आपत्ति छूटनी नहीं चाहिए। उन्होंने काउंटर, ईमेल और पोर्टल पर आवेदन लेने की तारीख व समय लिखित रूप में स्पष्ट करने तथा आवेदन की रसीद पर तारीख, समय और आवक नंबर दर्ज करने की मांग की है। शनिवार रात तक ऑनलाइन आवेदन की समय-सीमा ड्राफ्ट पर दावे-आपत्तियां दर्ज करने के लिए निर्धारित 30 दिन की अवधि शनिवार रात 12 बजे समाप्त होने की जानकारी दी गई है। शनिवार को सरकारी अवकाश होने के कारण आवेदकों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करने पर जोर रहेगा। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने समय-सीमा के अंतिम चरण को लेकर संयुक्त संचालक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को आवेदन भेजा है। उन्होंने कहा कि क्रेडाई के साथ अन्य संस्थाएं और नागरिक समूह भी मास्टर प्लान पर सुझाव तथा आपत्तियां जुटा रहे हैं। आवेदन में यह आग्रह किया गया है कि अंतिम दिन कार्यालय बंद रहने या ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी परेशानी आने से किसी नागरिक या संगठन की आपत्ति दर्ज होने से न छूट जाए। इस संबंध में विभाग की ओर से क्या अतिरिक्त व्यवस्था की गई है, इसकी जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है। सुनवाई के कार्यक्रम का इंतजार प्राप्त आपत्तियों की छंटनी में लगभग 15 दिन लगने का अनुमान है। इस प्रक्रिया के बाद सुनवाई की तारीखें और कार्यक्रम जारी किए जाने की बात कही गई है। सुनवाई के दौरान अलग-अलग मुद्दों पर दर्ज आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया जाएगा। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति भी समय बढ़ाने के पक्ष में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर आपत्ति और सुझाव प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख 27 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की है। समिति के संयोजक और याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी के अनुसार, प्रकाशन का दिन छोड़कर 30 दिनों की गणना करने पर अंतिम तारीख 25 अक्टूबर बनती है। समिति ने मध्यप्रदेश सामान्य खंड अधिनियम, 1957 की धारा 7 का हवाला देते हुए कहा है कि निर्धारित अंतिम दिन कार्यालय बंद रहने की स्थिति में अगले कार्यदिवस कार्रवाई की जा सकती है। समिति का कहना है कि 24 से 26 अक्टूबर तक अवकाश की स्थिति को देखते हुए नागरिकों को अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए, ताकि वे मास्टर प्लान का अध्ययन कर अपनी आपत्तियां और सुझाव दे सकें। हालांकि, अंतिम तारीख बढ़ाने को लेकर विभाग की ओर से निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है। कैचमेंट एरिया और कृषि भूमि पर किसानों का विरोध मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के खिलाफ विरोध लगातार बढ़ रहा है। शाहपुरा स्थित टीएनसीपी कार्यालय में पिछले दो दिनों से आपत्तियां दर्ज कराने वालों की भीड़ पहुंच रही है। शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के साथ व्यापारी और रहवासी भी पहुंचे। किसानों ने अपनी कृषि भूमि के भविष्य को लेकर चिंता जताई, जबकि अन्य लोगों ने निर्माण और सड़क संबंधी प्रस्तावों पर आपत्तियां दर्ज कराईं। किसानों की मांग है कि उनकी जमीन का उपयोग खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक, खेती अनेक किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है। किसानों ने भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 यानी बीआईजेड-1 और बीआईजेड-2 को हटाने तथा कृषि भूमि का भू-उपयोग कृषि ही रखने की मांग की है। उनका आरोप है कि ड्राफ्ट में बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव का प्रस्ताव है, जिससे उनकी आजीविका और जमीन के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है।   

Bhopal News: अब हर मकान का होगा डिजिटल एड्रेस, जनगणना-2027 में हुई बड़ी पहल

भोपाल  भोपाल शहर में जनगणना-2027 के प्रथम चरण के तहत संपन्न हुई 30 दिवसीय 'आवास गणना' केवल एक पारंपरिक सरकारी प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि इसने भविष्य के 'स्मार्ट भोपाल' की मजबूत नींव रख दी है। कर्मचारियों ने घर-घर जाकर चॉक और मोबाइल ऐप के जरिए जो डेटा जुटाया है, वह शहर के हर मकान को दुनिया के नक्शे पर एक 'यूनिक डिजिटल आइडेंटिटी' (डिजिटल एड्रेस) प्रदान करने जा रहा है। आवास गणना के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, भोपाल के कुल 3,285 हाउस होल्ड ब्लॉक्स में शत-प्रतिशत सर्वे पूरा कर लिया गया है। कागजी कार्रवाई के बजाय मोबाइल ऐप से एकत्र यह रियल-टाइम डेटा भोपाल को डिजिटल और सुव्यवस्थित शहर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। इस डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर भविष्य में शहरी सुविधाओं की योजना बनाने और जरूरत के अनुसार संसाधनों का वितरण करने में मदद मिल सकेगी। आवासीय क्षेत्रों की पहचान स्पष्ट होने से नगर निगम और अन्य सरकारी विभागों के बीच समन्वय बेहतर बनाने की संभावना है। साथ ही, एकत्र किए गए आंकड़े सड़क, पानी, बिजली और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की योजना तैयार करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। कुल जनगणना मकानः शहर में कुल 7,40,923 जनगणना मकान दर्ज किए गए हैं, जो अनुमानित लक्ष्य (7.38 लाख) से अधिक हैं। आवास और परिवारः इनमें से 5,23,328 मकानों में लोग निवास कर रहे हैं, जबकि कुल 5,39,320 परिवारों का प्रामाणिक डेटाबेस तैयार हुआ है। अन्य उपयोग व खाली मकानः शहर में 1,18,159मकान खाली पाए गए हैं और 7,622 मकानों में ताला लगा मिला। वहीं 1,08,991 भवनों का उपयोग व्यावसायिक या अन्य कार्यों के लिए हो रहा है। डेटा से आसान होगी आम नागरिक की जिंदगी     इमरजेंसी सेवाओं में सटीकताः यूनिक लोकेशन नंबर के जरिए एम्बुलेंस, पुलिस और फायर ब्रिगेड बिना रास्ता भटके सीधे आपके दरवाजे तक पहुंच सकेंगी।     ड्रोन और ई-कॉमर्स डिलीवरीः यह डिजिटल नंबर भविष्य की ड्रोन डिलीवरी और ई-कॉमर्स पार्सल को पिन-पॉइंट लोकेशन पर तेजी से पहुंचाएगा।     सटीक शहरी नियोजनः किस इलाके में आबादी का कितना घनत्व है। सीवरेज, पेयजल, बिजली और सड़कों का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर बनेगा।     पारदर्शिताः संपत्ति के मालिकाना हक के रिकॉर्ड में पारदर्शिता आएगी और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन जैसी निगम सेवाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी।

1600 करोड़ के भोपाल सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का बदला प्लान, फंड जुटाएगी SPV

भोपाल   राजधानी में बनने वाले सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के प्लान में बड़ा बदलाव किया गया है। अब मप्र हाउसिंग बोर्ड इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी एक्ट में स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) बनाएगा। पहली बार प्रदेश में किसी सरकारी प्रोजेक्ट के लिए एसपीवी बनाई जाएगी। यह एसपीवी ही प्रोजेक्ट का निर्माण करने से लेकर संचालन करेगी। फंड भी जुटाएगी। 1600 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार को कुछ भी खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। खास यह है कि सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को पहले चरण में तोड़ा नहीं जाएगा। पहले दो सी-टाइप टावर बनाए जाएंगे। इनमें सतपुड़ा और विंध्याचल भवनों के सभी दफ्तरों को शिफ्ट किया जाएगा। इतना ही नहीं, अब इन टावर के ऊपर स्कॉय वॉक नहीं बनेगा। सब-वे के जरिए दोनों टावर आपस में जुड़ेंगे। यह मंत्रालय से भी सब-वे से जुड़ें रहेंगे। नगरीय विकास विभाग और मप्र हाउसिंग बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट के लिए नए सिरे से डीपीआर बनाई है। इसे जल्द मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति में रखा जाएगा। मंजूरी के बाद एसपीवी का गठन कर टेंडर किया जाएगा। पहले की योजना के अनुसार सरकारी खर्च से दो चरण में 13 टावर बनाने थे। इसे परगोले से जोड़ना था। अब इसे बदला गया है। अब तीन चरणों में ऐसे होगा निर्माण अभी विंध्याचल और सतपुड़ा भवनों का निर्मित क्षेत्रफल 76500 वर्ग मीटर है। नए प्रोजेक्ट के पहले चरण में सी-टाइप दो भवन बनेंगे। इनका निर्मित क्षेत्र वर्तमान से करीब डेढ़ गुना या 1 लाख लाख वर्गमीटर से अधिक होगा। दोनों भवनों में मौजूदा सभी ऑफिस शिफ्ट शिफ्ट किए किए जाएंगे। ज इसके बाद दूसरे चरण में सतपुड़ा और विंध्याचल भवनों को तोड़कर एसपीवी दो कमर्शियल टावर बनाएगी। दोनों कमर्शियल भवनों को फेस वर्तमान की तरह वल्लभभवन या डायरेक्टोरेट की तरफ न होकर पीछे की ओर होगा। इसके लिए सतपुड़ा भवन की जगह बनने वाले भवन के सामने से कनेक्टिंग रोड भी बनेगी। विंध्याचल भवन के पीछे जेल रोड है, इसलिए उधर रोड नहीं बनेगी। ध्यान रखा जाएगा कि किसी वन की ऊंचाई वल्लभ भवन से अधिक न हो। भविष्य में कार्यालयों के लिए दो ब्लॉक और बनेंगे। चौथे चरण के लिए दो ब्लॉक विकसित करने की जमीन भी मौजूद रहेगी। फाइनेंस मॉडल और सुविधाएं ऐसी एसपीवी बैंक व वित्तीय संस्थानों से चरणबद्ध लोन लेगी। 30 साल में चुकाएगी। पहले चरण में सी-टाइप भवन बनेंगे। इनमें शिफ्ट होने वाले सरकारी ऑफिस से किराया लेगी। फिर दो कमर्शियल भवनों में ऑफिस स्पेस बेचेगी, किराए पर देगी। सोसायटी बनेगी। यह सभी कार्यालयों व कार्पोरेट्स से शुल्क लेकर मेंटेनेंस करेगी। अभी मंत्रालय के सामने बने गार्डन का लेवल ऊंचा किया जाएगा। यह वर्ल्ड क्लास होगा। गार्डन में दुर्लभ पेड़ पौधों के साथ चारों ओर हरियाली व म्यूजिकल फाउंटेन। इसे मैसूर के बूंदावन गार्डन की तरह विकसित करेंगे। आम नागरिकों के लिए खुलेगा। क्षेत्र में ग्रीन 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर 20 किया जाएगा।

भोपाल में विकास का नया रोडमैप तैयार! 3000 हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर, मिक्स लैंड यूज पर जोर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप का प्रकाशन कर दिया गया है। नए मास्टर प्लान में शहर के विकास के साथ पर्यावरण, रोजगार, यातायात और नागरिक सुविधाओं पर खास जोर दिया गया है। अब प्रशासन इस ड्राफ्ट पर जनता से दावे-आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करेगा। मास्टर प्लान का ड्राफ्ट चार प्रमुख आधारों पर तैयार किया गया है। इनमें प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण, आधुनिक और नागरिक हितैषी विकास, शहर में जरूरी बदलावों को बढ़ावा देना और रोजगार व आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि लंबे अंतराल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 का प्रारूप प्रकाशित किया गया है। इसमें भोजताल, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, आसान आवाजाही और आर्थिक विकास के अवसर देने का प्रयास किया गया है। 51 किलोमीटर का होगा ग्रोथ कॉरिडोर मास्टर प्लान में करीब 3000 हेक्टेयर जमीन ग्रोथ कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है। यह कॉरिडोर ईकेएआई सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक और थोक व्यापार क्षेत्र सहित विभिन्न उपनगरों को जोड़ेगा। ग्रोथ कॉरिडोर में होटल, स्वास्थ्य सेवाएं, आईटी, एआई और डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक, थोक व्यापार, हाइपर मार्केट, मॉल, मल्टीप्लेक्स, कॉरपोरेट ऑफिस, एजुकेशन हब और आवास जैसी गतिविधियां विकसित की जा सकेंगी। यहां मिश्रित उपयोग और ज्यादा घनत्व वाले विकास का प्रस्ताव है। इस कॉरिडोर में लोक परिवहन के लिए बीआरटीएस कॉरिडोर का प्रस्ताव है, जिसे भविष्य में एमआरटीएस में बदला जा सकेगा। विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर मार्गों को भी ग्रोथ कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है। एक ही इलाके में मकान और दुकान मास्टर प्लान में मिश्रित भूमि उपयोग का प्रस्ताव रखा गया है। यानी सड़क की चौड़ाई के आधार पर कुछ क्षेत्रों में आवासीय उपयोग के साथ दुकान और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य लोगों के घर और काम की जगह के बीच दूरी कम करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। चौड़ी सड़कों पर स्थित जमीनों के लिए एफएआर और भवन की ऊंचाई को लेकर अधिक छूट देने का प्रस्ताव है। विकास के नियमों को भी आसान बनाने की बात कही गई है। हरित क्षेत्र 16 से बढ़कर 27 प्रतिशत भोपाल मास्टर प्लान-2005 में हरित क्षेत्र करीब 16 प्रतिशत था। नए भोपाल विकास योजना-2047 में इसे बढ़ाकर करीब 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। भानपुर खंती के पुनर्विकास के लिए यहां गोल्फ कोर्स प्रस्तावित किया गया है। कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र को भी 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। योजना में भोजताल और उसके जलग्रहण क्षेत्र, पहाड़ियों, जंगल, तालाबों, जलाशयों और बाघ भ्रमण क्षेत्रों को संरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। डिजिटल ट्विन सिटी से होगी निगरानी शहर के विकास और निर्माण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी के लिए डिजिटल ट्विन सिटी की व्यवस्था का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य अवैध निर्माण, यातायात और दूसरी शहरी समस्याओं पर समय रहते कार्रवाई करना है। सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्थानों पर लगे निजी सीसीटीवी कैमरों की नेटवर्किंग, सार्वजनिक भवनों की बाउंड्री वॉल को पारदर्शी रखने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था जैसे प्रावधान भी किए गए हैं। पार्किंग की समस्या दूर करने पर जोर मास्टर प्लान में मल्टीलेवल और मैकेनाइज्ड पार्किंग को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। सामुदायिक खुले क्षेत्रों के नीचे, आरओबी और फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग की व्यवस्था भी की जा सकेगी। बेसमेंट पार्किंग के लिए जमीन के संयुक्त उपयोग की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है। भौंरी में बनेगी एजुकेशन हब भौंरी क्षेत्र में एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ईकेएआई) सिटी विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य शिक्षा और एआई से जुड़े संस्थानों को बढ़ावा देना है। अनाथ आश्रम, मूक-बधिर विद्यालय, छात्रावास, दिव्यांग विशेष विद्यालय, वृद्धाश्रम और रैन बसेरा जैसी चैरिटेबल गतिविधियों को भी कई तरह के भूमि उपयोग क्षेत्रों में अनुमति देने का प्रस्ताव है। 45 लाख आबादी के हिसाब से तैयार योजना भोपाल विकास योजना-2047 को 1016.90 वर्ग किलोमीटर के निवेश क्षेत्र के लिए तैयार किया गया है। इसमें 254 गांव शामिल हैं और इसे करीब 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। योजना में विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल 61,017.02 हेक्टेयर रखा गया है। अब इस प्रारूप पर प्रशासन जनता से दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करेगा। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। तीन हजार हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर मास्टर प्लान ड्राफ्ट में मेट्रो के तहत भोपाल विकास योजना-2047 के प्रस्ताव में करीब तीन हजार हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित है. इसमें निवेश के लिए माहौल बनाने के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है. यह ग्रोथ कॉरिडोर एजुकेशन, नॉलेज, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक भंडारण एवं थोक परिक्षेत्र के साथ-साथ विभिन्न उपनगरों को भी जोड़ता है। . रेडियल मार्ग से ग्रोथ कॉरिडोर से जुड़ेंगे ये रोड ग्रोथ कॉरिडोर में नगर के बाहर विभिन्न दिशाओं से आने वाले क्षेत्रीय मार्ग जैसे विदिशा मार्ग, रायसेन मार्ग, नर्मदापुरम मार्ग एवं इन्दौर मार्ग को ग्रोथ कॉरीडोर के जरिए शहर से जोड़ा जाएगा. इसमें मेट्रेपोलिटन क्षेत्र के विभिन्न भागों से बेहतर संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया गया है. ग्रोथ कॉरिडोर एवं इसके रेडियल मार्गों का विकास नगर विकास स्कीम के माध्यम से भोपाल विकास प्राधिकरण करेगा. निवेश क्षेत्र की बाहरी सीमा पर स्थित नवीन प्रस्तावित बायपास मार्ग को ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है. ये मार्ग के दोनों ओर 50-50 मीटर भूमि हरित क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित की गई है।  मास्टर प्लान में मिक्स लैंड यूज भी प्रस्तावित भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट में मिक्स लैंड यूज के प्रस्ताव राज्य की टीओडी नीति के अनुरूप आवासीय उपयोग के तहत मार्ग की चौड़ाई के आधार पर मिक्स लैण्ड यूज प्रस्तावित किए गए हैं. जिससे कि वर्क स्पेस और रेजिडेंशियल एरिया में कॉर्डिनेशन हो सके. असीमित एफएआर एवं भवन ऊंचाई नगरीय क्षेत्र की भूमि का अनुकूलतम उपयोग सुनिश्चित करने तथा निवेश मित्र वातावरण तैयार करने के उ‌द्देश्य से मार्ग की चौड़ाई के आधार पर एफएआर का निर्धारण किया गया है।  अधिक चौड़े मार्गों पर स्थित भूमियों को एफएआर एवं भवन की ऊंचाई की सीमा … Read more

भोपाल में दुकानों पर बड़ा एक्शन, गलियों में कारोबार पर लगेगी रोक; पार्किंग भी जरूरी

भोपाल  भोपाल में रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों और सीलिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को करीब 3 घंटे सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीलिंग में लापरवाही पर नाराजगी जताई। कहा- रहवासी इलाकों में कारोबार नहीं होना चाहिए और स्पष्ट रूप से रहवासी उपयोग वाली जगहों पर सीलिंग या डिमोलिशन की कार्रवाई जारी रहेगी। कोर्ट ने कहा- जिन जगहों का लैंड यूज स्पष्ट नहीं है या जहां मिक्स्ड लैंड यूज है, वहां कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। भोपाल में कई जगह निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं होने पर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। कोर्ट ने साफ किया कि उसके आदेशों का पालन हर हाल में सुनिश्चित करना होगा। इसी सुनवाई में 21 साल से अटके भोपाल के नए मास्टर प्लान के ड्रॉफ्ट को जारी करने की मंजूरी भी मिल गई। सरकार फाइनल प्रकाशन से पहले कोर्ट को इसकी जानकारी देगी। नए मास्टर प्लान के लागू होने तक सीलिंग की कार्रवाई नहीं रुकेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। 10 शिकायतें पहुंचीं, शाम को खुल रहे थे सील दुकानें सुनवाई से पहले भोपाल के रहवासियों की करीब 10 शिकायतें एमिकस क्यूरी एके सिन्हा के जरिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचीं। शिकायतों में कहा गया कि नगर निगम ने अगस्त में जिन प्रतिष्ठानों को सील किया था, उनमें से कई सुबह बंद रहते हैं, लेकिन शाम होते ही दोबारा खुल जाते हैं। इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सीलिंग की कार्रवाई में लापरवाही पर नाराजगी जताई। कोर्ट के सामने यह मुद्दा भी आया कि कागजों पर कार्रवाई के बावजूद जमीन पर उसका असर कई जगह दिखाई नहीं दे रहा है। अब नई कमेटी नहीं बनेगी सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए केएन नटराजन ने कोर्ट को बताया कि सरकार से इस संबंध में बात हो चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अब कोई नई कमेटी नहीं बनाई जाएगी। सीलिंग की कार्रवाई में रुकावट नहीं डाली जाएगी। दरअसल, पहले राज्य सरकार ने सीलिंग से जुड़े मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कमेटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। बाद में कमेटी बनाने को लेकर अवमानना का मुद्दा भी उठा। एमिकस क्यूरी एके सिन्हा ने कोर्ट को बताया था कि सरकार की ओर से कमेटी बनाना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना के दायरे में आता है। सरकार के आश्वासन के बाद कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। हालांकि, अवमानना की कार्रवाई होगी या नहीं, यह लिखित आदेश से स्पष्ट होगा। 1995 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं आया सरकार ने कोर्ट को बताया कि भोपाल के लिए 1995 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं आया। 2005 में लागू किया गया मास्टर प्लान भी अपनी अवधि पूरी कर चुका है। इसके बावजूद शहर का विकास पुराने मास्टर प्लान के आधार पर किया जा रहा है। सरकार ने बताया कि नए मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट तैयार है। इसी ड्रॉफ्ट को जारी करने की अनुमति सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी, जिस पर कोर्ट ने अनुमति दे दी। 8,084 प्रतिष्ठानों को मिले थे नोटिस सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के फैसले के बाद नगर निगम ने रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई शुरू की थी। निगम ने शहरभर में नोटिस बांटे थे। करीब 15 दिन तक नोटिस देने की प्रक्रिया चली। नगर निगम की सूची में कुल 62,500 दुकानें दर्ज थे। इनमें से 8,084 दुकानों को नोटिस दिए गए। इसके बाद करीब 190 दुकानों को तीन दिन के लिए बंद या सील किया गया था। व्यापारियों के विरोध के बाद 22 दिन से रुकी थी कार्रवाई नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने प्रदर्शन किया था। विरोध के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी थी। मंगलवार की सुनवाई से पहले करीब 22 दिन से सीलिंग की कार्रवाई नहीं हुई थी। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट पर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि निगम ने गलत कार्रवाई दिखाने वाले दस्तावेज कोर्ट में पेश किए और जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, वे बाद में दोबारा खुल गए। अगस्त में 10 सदस्यीय कमेटी पर लगी थी रोक इस मामले में अगस्त की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच कमेटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ओर से दुकान संचालकों को दिए गए सभी राहत और स्टे आदेश भी रद्द कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की सुनवाई पहले 15 सितंबर को होनी थी, लेकिन उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद मंगलवार को कोर्ट में करीब तीन घंटे तक मामले पर सुनवाई हुई। नियम तोड़ने पर एक्शन नगर निगम की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ढोल ग्यारस को देखते हुए जोन क्षेत्र में निरीक्षण किया। इस दौरान दो स्थानों पर मांस की दुकानें संचालित मिलीं। नगर निगम द्वारा त्योहार के अवसर पर निर्धारित प्रतिबंधों के बावजूद दुकानें खुली मिलने पर टीम ने तत्काल कार्रवाई की। प्रतिबंधित अवधि में दुकान खोलने पर होगी कार्रवाई नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि त्योहारों के दौरान निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों का पालन कराना निगम की प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान यदि प्रतिबंधित अवधि में मांस की दुकानें खुली मिलती हैं तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी। जोन क्रमांक 11 के स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में मांस विक्रेताओं के बीच भी सतर्कता बढ़ गई है। निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में भी क्षेत्र में निरीक्षण जारी रहेगा और नियमों की अनदेखी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।  अब तक ऐसे रहे मास्टर प्लान के ड्राफ्ट     अगस्त 2009 में ड्राफ्ट-2021 जारी हुआ। 2008 से तैयारी शुरू हुई। 813.92 वर्ग किमी क्षेत्रफल व 196 गांवों को शामिल किया था। बड़ा तालाब कैचमेंट- एफटीएल और ग्रीन बेल्ट के नियमों व सर्वे में गलतियों से विरोध हुआ। यह अधिसूचित नहीं हो सका। इसे ही नए सिरे से बनाने के लिए 2011 में कमेटी बनाई। … Read more

भोपाल के पत्रकारों ने जाना जम्मू के औद्योगिक विकास का हाल

भोपाल से आए पत्रकारों के दल ने जम्मू क्षेत्र के औद्योगिक विकास के बारे में जानकारी ली सिडको  इंडस्ट्रियल एरिया में औद्योगिक इकाइयों का किया दौरा भोपाल/जम्मू   पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के नेतृत्व में जम्मू आए पत्रकारों के एक दल ने आज जम्मू में उद्योग और वाणिज्य निदेशालय का दौरा किया। सहायक निदेशक श्री जतिंदर पॉल सिंह ने उनका स्वागत किया और उन्हें जम्मू-कश्मीर इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2021–30 और नई सेंट्रल सेक्टर स्कीम   (NCSS 2021) के तहत जम्मू-कश्मीर में हो रहे तेज़ी से औद्योगिक बदलाव के बारे में जानकारी दी।श्री जतिंदर पॉल सिंह ने  मीडिया दल को बताया कि जम्मू डिवीज़न में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हुआ है। यहां तय औद्योगिक एस्टेट्स में सरकारी ज़मीन पर 1,767 औद्योगिक इकाइयाँ काम कर रही हैं, जिनमें कुल ₹13,391.46 करोड़ का निवेश हुआ है और 49,795 लोगों को सीधा रोज़गार मिला है।  नई सेंट्रल सेक्टर स्कीम 2021 फ्रेमवर्क के तहत, 30 सितंबर 2024 तक 971 इकाइयों का पंजीयन हुआ। इनमें कुल ₹14,294 करोड़ का प्रस्तावित निवेश शामिल है, जिसमें से ₹10,514 करोड़ प्लांट और मशीनरी के लिए हैं। साथ ही, इससे 51,897 लोगों को रोज़गार मिलने का अनुमान है और ₹32,017 करोड़ के वित्तीय प्रोत्साहन का भी अनुमान है। सहायक निदेशक ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र शासित प्रदेश में असल निवेश ₹5,824 करोड़ तक पहुँच गया। यह 2021 से पहले के समय में हुए औसत सालाना निवेश के मुकाबले 13 गुना ज़्यादा है। तेज़ी से काम करते हुए, 1 अगस्त 2026 तक रजिस्टर्ड 440 नई और विस्तार वाली इकाइयों में से 401 (यानी 91 प्रतिशत) ने कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के इतिहास में पहली बार, पैकेजिंग, फ़ूड प्रोसेसिंग, पॉलिमर और फ़ार्मास्यूटिकल्स जैसे तेज़ी से बढ़ने वाले सेक्टर में कई बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ (मेगा इंडस्ट्रियल यूनिट्स) सफलतापूर्वक स्थापित की गई हैं, जिनमें से हर एक में ₹500 करोड़ से ज़्यादा का निवेश हुआ है। प्रतिनिधिमंडल को निवेशकों को मिलने वाले मज़बूत संस्थागत सहयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। इसमें ₹45 लाख तक के  डीजी सेट पर 100% सब्सिडी, ₹50 लाख तक के प्रदूषण नियंत्रण   उपकरणों पर 60% सब्सिडी, पात्र इकाइयों के लिए 10 साल तक 100% नेट SGST की वापसी, 5 साल तक टर्नओवर से जुड़े इंसेंटिव और सिंगल विंडो पोर्टल के ज़रिए मैनेज होने वाला 99 साल तक का पारदर्शी ज़मीन लीज़ फ़्रेमवर्क शामिल है। बाद में, प्रतिनिधिमंडल ने SIDCO इंडस्ट्रियल एरिया में मौजूद फील्ड यूनिट्स का दौरा किया और  नई स्थापित इंडस्ट्रियल यूनिट्स के कामकाज, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं और ऑपरेशनल इकोसिस्टम को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

बावड़िया कलां में 22 मकानों पर नगर निगम का एक्शन, स्वीकृत नक्शे के विपरीत हुआ निर्माण

 भोपाल  बावड़िया कलां स्थित शुभालय विहार में टीएंडसीपी के स्वीकृत नक्शे के विपरीत बने 22 मकानों पर नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें 17 मकान मालिकों को नोटिस देकर 15 दिन में निर्माण खुद हटाने को कहा गया है। पांच अधूरे मकानों का निर्माण रोकने के नोटिस दिए गए हैं। हाईकोर्ट में याचिका के बाद शुरू हुई कार्रवाई इस कार्रवाई के पीछे की वजह यह है कि गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था की 5 एकड़ जमीन पर बने ये निर्माण टीएंडसीपी के स्वीकृत नक्शे के अनुरूप नहीं हैं। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका के बाद उपायुक्त सहकारिता ने 13 फरवरी 2026 को निगम को पत्र लिखा था। इसके बाद निगम ने कार्रवाई शुरू की। खास बात है कि जिन मकानों को अब अवैध निर्माण बताकर हटाने के नोटिस दिए गए हैं, उन्हें नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने ही निर्माण की अनुमति दी थी। इससे निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित के मुताबिक, संस्था के 44 संस्थापक सदस्यों की जमीन पर 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए थे। सहकारिता विभाग इनकी रजिस्ट्रियां शून्य कराने के लिए सिविल कोर्ट भी पहुंच चुका है। 38 रजिस्ट्रियों के 18.74 करोड़ रुपए गायब फरवरी 2026 में सहकारिता विभाग की जांच में सामने आया कि 2018 से 2023 के बीच वास्तविक सदस्यों को दरकिनार कर बाहरी लोगों के नाम करीब 50 रजिस्ट्रियां की गईं। इनमें 32 अवैध पाई गई। 38 रजिस्ट्रियों के करीब 18.74 करोड़ रुपए संस्था के खाते में नहीं आए। ऑडिटर अनिल कुमार रावत की रिपोर्ट के मुताबिक फर्जी दस्तावेजों और हैंडराइटिंग में हेरफेर कर वास्तविक सदस्यों का अधिकार छीना गया। ये रजिस्ट्रियां तत्कालीन अध्यक्ष अनिता विष्ट और तत्कालीन प्रबंधक मनोज साहू के कार्यकाल में हुई थीं।

भोपाल में बिना अनुमति कमर्शियल गतिविधियों पर गिरेगी गाज, हाईकोर्ट ने दिया 7 दिन का समय

भोपाल  भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर चल रहे मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिए हैं शहर में आवासीय और लो-डेंसिटी क्षेत्रों में अवैध निर्माण व गैर-कानूनी व्यावसायिक गतिविधियों पर संकट गहरा गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मॉल, होटल व व्यावसायिक संचालकों को वैधानिक अनुमति पत्र नगरनिगम को दिखाने का निर्देश दिया है। जिस पर निगम विधि पूर्वक उनकी पड़ताल करेगा। दूसरी ओर, शहर के लो-डेंसिटी इलाकों में तय सीमा से 10 गुना तक ज्यादा अवैध निर्माण हो चुके हैं। नगर निगम की नोटिस व सीलिंग कार्रवाई के बीच अफसर अब मास्टर प्लान के जरिए इन्हें नियमित करने का रास्ता तलाश रहे हैं, जिससे मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फिर अटक गया है। मास्टरप्लान नियमित करने की प्लानिंग शहर के जिन क्षेत्रों को 2005 के मास्टर प्लान में लो-डॅसिटी तय कर निर्माण की लिमिट तय कर रखी है, वहां बेशुमार व बड़े निर्माण हो गए है। अब इन निर्माणों को मास्टर प्लान के रास्ते नियमित कराने की कोशिश की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आवासीय परिसरों से व्यावसायिक गतिविधि बंद कराने नगर निगम नोटिस और सीलिंग कर रहा है। दोनों ही पक्ष इसके लिए मास्टर प्लान को लागू करने की मांग कर रहे है। प्लानिंग एरिया के लो-डेंसिटी क्षेत्रों को नियमित करने बीते पंद्रह दिन से टीएंडसीपी और नगरीय प्रशासन के अफसर बैठकें कर रहे हैं। गौरतलब है कि लो-डेंसिटी एरिया में 10 हजार वर्गफीट जमीन पर 0.06 एफएआर से महज 600 वर्गफीट तक के निर्माण की अनुमति है, जबकि यहां दस गुना ज्यादा 6000 से 8000 वर्गफीट तक निर्माण हो गए। ये हैं लो-डेंसिटी के नियम ग्राम बैरागढ़ चिचली, नीलबड़ व मिंडोरी में लो-डेंसिटी तय है। इनमें 48 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर डेंसिटी तय है। इनमें निर्माण के लिए कम से कम 1000 वर्गमीटर यानि 10 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल जरूरी है। यहां निर्माण की अनुमति पर 0.06 एफएआर तय है। यानि 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर 600 वर्गफीट निर्माण ही हो सकता है। इससे अधिक अवैध है। इसमें भी जमीन पर कुल अनुमति का छह फीसदी ही निर्मित किया जा सकता है। कार्रवाई का रास्ता साफ कोर्ट के आदेश के बाद रिहायशी क्षेत्रों में बिना वैध अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की स्थिति साफ हो गई है। अब संबंधित पक्षों को अपने व्यावसायिक उपयोग की वैध अनुमति साबित करने के लिए दस्तावेज निगम के सामने रखने होंगे। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह रिहायशी इलाकों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अब नगर निगम के सामने कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट न्यायिक निर्देश हैं। ट्रैफिक-पार्किंग की समस्या से जूझ रहे रहवासी रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को भी कोर्ट के आदेश से कार्रवाई की उम्मीद है। रहवासी लवनीश भाटी ने कहा कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, अब कोर्ट के आदेश के बाद जमीन पर कार्रवाई की उम्मीद है। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी फैसले का स्वागत करते हुए नगर निगम से रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि जिनके पास वैध अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। ये हैं स्थिति -कलियासोत कैचमेंट में साक्षी ढाबे के पास से अंदर के के क्षेत्र में निर्मित वीआइपी कॉलोनी में 600 वर्गफीट की जगह 6000 वर्गफीट के बंगले बना लिए। मामला कोर्ट में चला गया। -चार इमली, श्यामला हिल्स पर अवैध तौर पर बंगले बन गए। -नरसिंहगढ़ रोड पर लो-डेंसिटी में 12 बड़ी कॉलोनियां बन गईं। -मिंडोरी और संबंधित क्षेत्र में बड़े मकान, रेस्टोरेंट विकसित हो गए। -केरवा डेम से लगी जमीन लो-डेंसिटी है, लेकिन इसकी ओर जाने वाली रोड किनारे अवैध तौर पर कॉलोनियां विकसित हो गईं। कोर्ट ने कहा-कागजात दिखाएं नगर निगम करेगा सभी के परीक्षण आवासीय क्षेत्र के मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अनुमति और वैधानिकता की जांच नगरनिगम भोपाल करेगा। हाईकोर्ट में सोमवार को 42 याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। वहीं, मंगलवार को दस नम्बर, कलियासोत और बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने सम्बंधी आदेश और शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। शोकॉज नोटिस की याचिकाओं का निराकरण करते हुए कोर्ट ने नगर निगम को याचिकाकर्ताओं के जवाब का विधि के अनुसार परीक्षण कर कारण सहित आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे। मकानों को तोड़ने के मामले में दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। एकलपीठ ने मकान तोड़ने पर लगी रोक बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर निर्धारित की है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत हाईकोर्ट के रुख का स्थानीय रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने इसे शहर के आवासीय इलाकों को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि अब अनुमति के नाम पर टालमटोल या बहानेबाजी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि असली परीक्षा भोपाल नगर निगम की है, जिसे यह साबित करना होगा कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति। शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई रहवासी लवनीश भाटी और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पैदा हो रही ट्रैफिक, पार्किंग, अत्यधिक शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई। रहवासियों का कहना हैं कि वे वर्षों से इन दिक्कतों को झेल रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।

भोपाल में विकास कार्यों पर फिर सवाल, करोड़ों का फुटपाथ तैयार; लोगों के लिए पहुंचना बना चुनौती

 भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहले 90 डिग्री वाले रेलवे ओवरब्रिज को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी. अब राजधानी का एक और निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गया है. इस बार मामला किसी पुल का नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए फुटपाथ का है।  शहर के वार्ड-32 स्थित पीएंडटी चौराहे पर सौंदर्याकरण के तहत फुटपाथ का निर्माण कराया गया. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि फुटपाथ के किनारे इतनी ऊंची लोहे की रेलिंग लगा दी गई कि अब वहां पहुंचना ही मुश्किल हो गया है. यानी जिस सुविधा को पैदल यात्रियों के लिए बनाया गया, उसका इस्तेमाल करना ही चुनौती बन गया है।  स्थानीय रहवासियों के मुताबिक, सड़क किनारे करीब तीन फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग लगा दी गई है. कई जगहों पर रेलिंग के साथ पहले से बनी दीवार भी मौजूद है. ऐसे में फुटपाथ पूरी तरह घिरा हुआ नजर आता है।  सबसे बड़ी समस्या यह बताई जा रही है कि कई हिस्सों में फुटपाथ पर चढ़ने या एंट्री करने के लिए पर्याप्त रास्ता ही नहीं छोड़ा गया. नतीजा यह कि लोग फुटपाथ का इस्तेमाल करने के बजाय सड़क पर चलने को मजबूर हैं।  रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बस या अन्य वाहनों से उतरने के बाद फुटपाथ तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं बचा है।  ऐसे में यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है. लोगों का सवाल है कि जब फुटपाथ का उद्देश्य ही पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता देना है, तो फिर उसके इस्तेमाल में ऐसी बाधाएं क्यों खड़ी की गईं? फुटपाथ बना या पिंजरा? निर्माण पर उठ रहे सवाल लोगों का आरोप है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जिसमें पैदल यात्रियों की जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया. उनका कहना है कि योजना बनाते समय जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया गया. लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि फुटपाथ तक पहुंचना ही मुश्किल हो जाए तो फिर उस पर खर्च किए गए सरकारी धन का क्या मतलब रह जाता है।  रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलिंग के बीच-बीच में पर्याप्त प्रवेश द्वार या गैप बनाए जाएं, ताकि लोग आसानी से फुटपाथ का उपयोग कर सकें. उनका कहना है कि पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए डिजाइन में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए. फिलहाल यह निर्माण कार्य स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।