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छत्तीसगढ़ कांग्रेस की अहम बैठक शुरू, सुखदेव भगत सहित दिग्गज नेता मौजूद

रायपुर. राजधानी रायपुर स्थित राजीव भवन में सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यकारणी की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। बैठक की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत कर रहे हैं। बैठक में PCC अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी शामिल हुए हैं। राजीव भवन में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक के बाद कनेक्ट सेंटर की टीम के साथ भी बैठक प्रस्तावित है। नए प्रदेश प्रभारी के तौर पर सुखदेव भगत का यह पहला छत्तीसगढ़ दौरा है, ऐसे में उनकी वरिष्ठ नेताओं और संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों के साथ हो रही बैठकों पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं। मुलाकात के दौरान नेताओं के बीच छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में नयी ऊर्जा का संचार करने, जिला एवं ब्लॉक इकाइयों को सक्रिय करने व आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ. चर्चा में संगठनात्मक एकजुटता, युवाओं व महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं पिछड़े वर्गों को संगठन में समुचित प्रतिनिधित्व देने तथा जनता के ज्वलंत मुद्दों महंगाई, बेरोजगारी, जल-जंगल-जमीन, किसानों-मजदूरों के हक को सड़क से सदन तक प्रभावी ढंग से उठाने पर विशेष जोर दिया गया. इस अवसर पर प्रभारी सुखदेव भगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी कांग्रेसी एक परिवार की तरह हैं. हम सब मिलकर संगठन को गांव-गांव, बूथ-बूथ तक मजबूत करेंगे. कार्यकर्ता ही हमारी असली पूंजी हैं, उनका सम्मान और मनोबल बढ़ाना मेरी पहली प्राथमिकता होगी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी एवं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ में संगठन को नयी धार दी जायेगी और भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सशक्त जनआंदोलन खड़ा किया जायेगा.

लॉरेंस गैंग के नाम पर कांग्रेस नेता से मांगी रंगदारी, शोएब ढेबर समेत 2 गिरफ्तार

रायपुर. लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को धमकी मिलने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों की गिरफ्तारी की है. पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भतीजे शोएब ढेबर और वेनिंगटन होटल के कर्मचारी पुलिस गिरफ्त में हैं. आरोप है कि लॉरेंस विश्नोई गैंग का गुर्गा बनकर कांग्रेस नेता से रंगदारी मांगी गई थी.  मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है. पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर अन्य लोगों को भी धमकी दी थी. पुलिस अब इस पूरे मामले में आरोपियों की भूमिका और उनसे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है. जांच के दौरान कुछ अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है. जानकारी के मुताबिक, हाल में ढेबर परिवार को भी बिश्नोई गैंग से धमकी भरा कॉल आया था और भारी भरकम पैसे की डिमांड की गई थी. पुलिस को शक है कि इन आरोपियों द्वारा ही यह कृत्य किया गया है, जिसकी जांच जारी है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि धमकी देने के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल थे. आरोपियों का नेटवर्क किन लोगों तक फैला हुआ है. बहरहाल, पुलिस ने शोएब ढेबर और होटल कर्मचारी को गिरफ्तार करने के बाद मामले की जांच तेज कर दी. मामले से संबंधित विस्तृत जानकारी और अब तक की जांच का खुलासा देर शाम तक किया जा सकता है. आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद मामले में और तथ्य स्पष्ट होंगे.

कांग्रेस के प्रदर्शन में हंगामा, राजा वड़िंग हिरासत में; चन्नी नदारद

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़ रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की। प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद पुलिस ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट के नेतृत्व में निकले इस विरोध मार्च में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा शामिल नहीं हुए जबकि डॉ राजकुमार वेरका, परगट सिंह समेत कुछ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। वाटर कैनन का किया प्रयोग पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग कार्यालय तक पहुंचने से रोकने के लिए सेक्टर-17 में सुरक्षा का कड़ा घेरा बनाया था। जैसे ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें पीछे धकेलना शुरू किया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया। इसके बाद कई नेताओं को पुलिस वाहनों में बैठाकर थाने ले जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी। कई स्तरों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। कांग्रेस की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो और कार्रवाई की जाए। पार्टी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर भी लगातार सवाल उठा रही है। मतदाता सूची पुनरीक्षण पर भी सवाल पंजाब कांग्रेस विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी लगातार सवाल उठा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने विधानसभा चुनाव तक विशेष गहन पुनरीक्षण रोकने और पिछली मतदाता सूचियों के आधार पर चुनाव कराने की मांग की है। कांग्रेस की ओर से यह प्रदर्शन ऐसे समय किया जा रहा है, जब चुनाव आयोग के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण समेत कुछ प्रक्रियाओं को लेकर आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है। चुनाव आयोग ने कहा है कि तकनीकी टिप्पणियां और सवाल बहुसदस्यीय संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं तथा विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े अंतिम निर्णय तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस प्रभारी भगत की एंट्री, 27 से शुरू होगा पहला दौरा

रायपुर. लोकसभा सांसद सुखदेव भगत छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी नियुक्त किए जाने के बाद पहली बार 27 सितंबर को प्रदेश आ रहे हैं. तीन दिवसीय प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के साथ मैराथन बैठक करेंगे. जारी किए गए शेड्यूल के अनुसार, तीन दिवसीय प्रवास के दौरान पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी, ज़िला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों, संगठनों एवं विभागों प्रमुखों के अलावा कनेक्ट सेंटर टीम के साथ बैठक करेंगे. इसके अलावा वरिष्ठ नेताओं के साथ वन-टू-वन भी बैठक करेंगे. सुखदेव भगत के आगमन को देखते हुए पार्टी पदाधिकारियों ने भव्य स्वागत की तैयारी शुरू कर दी है. धरसीवा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष आशीष वर्मा ने बताया कि पार्टी के प्रदेश प्रभारी भगत के प्रथम छत्तीसगढ़ आगमन पर उनके ऐतिहासिक एवं भव्य स्वागत की तैयारी की जा रही हैं.

पंजाब में कांग्रेस का बड़ा विरोध प्रदर्शन, सचिन पायलट की मौजूदगी में सरकार को घेरने की तैयारी

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट मंगलवार को पहली बार पंजाब पहुंच रहे हैं और उनके आगमन के साथ ही कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी की है। पंजाब कांग्रेस भवन सेक्टर-15 से वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर प्रस्तावित मार्च को देखते हुए चंडीगढ़ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रदर्शन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल और मार्च के संभावित मार्ग पर चार से पांच स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की है। पंजाब कांग्रेस भवन से करीब एक किलोमीटर पहले ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद सुरक्षा व्यवस्था में चंडीगढ़ पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां भी लगाई गई हैं। प्रशासन की ओर से किसी भी स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन समेत अन्य इंतजाम भी किए गए हैं। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पहुंचने के कारण सेक्टर-15 और आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित होना शुरू हो गया है। करीब 11:30 बजे सचिन पायलट के पंजाब कांग्रेस भवन पहुंचने की उम्मीद है। उनके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना है। कांग्रेस गुलजार सिंह मामले में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने, उनकी गिरफ्तारी और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर यह प्रदर्शन कर रही है। पार्टी इसे कानून-व्यवस्था और सरकार के खिलाफ अपने अभियान को तेज करने के तौर पर भी देख रही है। 8 सितंबर को भी हुआ था प्रदर्शन इससे पहले आठ सितंबर को भी कांग्रेस ने चंडीगढ़ में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस दौरान राजा वड़िंग समेत 150 से अधिक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। हालांकि, मंगलवार का प्रदर्शन राजनीतिक रूप से ज्यादा अहम माना जा रहा है, क्योंकि नए प्रभारी सचिन पायलट की मौजूदगी में पंजाब कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेताओं के एक मंच पर आने की संभावना है। यह प्रदर्शन आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन भी माना जा रहा है। इससे पार्टी के भीतर नेताओं की सक्रियता, गुटों की ताकत और चुनावी रणनीति की दिशा का संकेत मिलने की उम्मीद है।  

2027 से पहले पंजाब कांग्रेस में घमासान, नेतृत्व परिवर्तन की मांग ने बढ़ाई मुश्किलें; फिर चेकमेट का डर

चंडीगढ़  पंजाब की सियासत में कांग्रेस एक बार फिर उसी दोराहे पर खड़ी दिख रही है, जहां वह 2022 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले खड़ी थी. कांग्रेस ने पांच साल पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को सत्ता की कमान सौंपी थी, लेकिन नवजोत सिंह सिद्ध की नाराजगी दूर नहीं हो सकी और कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ गई थी. अब कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में बदलाव शुरू।  कांग्रेस में नेतृत्व के टकराव के मुद्दे को सुलझाने के नाम पर पार्टी आलाकमान फैसले ले रहा है. भूपेश बघेल को हटाकर पार्टी ने सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बना दिया है. इसके बाद भी चन्नी खेमा राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहा है।  पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच कांग्रेस के सामने सियासी संकट खड़ा हो गया है. इस समय जहां चुनाव की तैयारी में राजनीतिक दल जुटे हैं, तो कांग्रेस अभी संगठन में ही उलझी है. कांग्रेस प्रभारी के बाद प्रदेश अध्यक्ष बदलती है तो मामला सुलझने से ज्यादा कहीं उलझ न जाए और फिर से उसे कहीं 'चेकमेट' का सामना न करना पड़ जाए? पांच साल पहले वाली गलती दोहरा रही कांग्रेस पंजाब में कांग्रेस एक बार फिर उसी मुकाम पर खड़ी है, जिसने 2021 में पार्टी को गहरे राजनीतिक संकट में डाल दिया था. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच चली लंबी खींचतान ने कांग्रेस को कमजोर कर दिया था. पार्टी नेतृत्व ने संगठन में अचानक बदलाव किए थे. मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक बदल दिए थे, लेकिन नतीजा यह हुआ कि पार्टी पूरी तरह बिखर और आम आदमी पार्टी (AAP) ने प्रचंड बहुमत हासिल कर कांग्रेस का किला ढहा दिया।  2022 में कांग्रेस को करारी मात खानी पड़ी थी. अब फिर कुछ वैसे ही हालत नजर आ रहे हैं. इस बार पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. साल 2021 में कांग्रेस ने इसी तरह की गुटबाजी को खत्म करने के लिए बदलाव किया था. अब फिर से कांग्रेस बदलाव कर मामले को सुलझाने की कवायद शुरू की है, जिसमें भूपेश बघेल को हटाकर सचिन पायलट को प्रभारी बनाया है।  चुनावी माहौल में बदलाव महंगा न पड़ जाए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी बदलने की चर्चा है, लेकिन यह बदलाव 2021 की तरह महंगा न पड़ जाए. पंजाब विधानसभा चुनाव को अब छह महीने से भी कम समय है. कांग्रेस हाईकमान ने करीब दो महीने के सियासी मंथन के बाद और राहुल गांधी ने पंजाब के एक-एक नेता से दिल्ली में बैठक कर फीडबैक लिया. इसके बाद एक जुलाई को राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष और चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया. इसके बाद से चन्नी गुट ने वड़िंग को हटाने की मांग उठा दी, जो सियासी टेंशन का सबब बना हुआ।  बता दें कि पंजाब के 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 18 सीटें मिली थी, जो राज्य में पार्टी का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन रहा था. आम आदमी पार्टी ने 92 सीटों के साथ शानदार जीत हासिल कर सरकार बनाई थी। 2022 के बाद कांग्रेस में कोई नेता प्रदेश अध्यक्ष की कमान लेने को तैयार नहीं था. ऐसे में राहुल गांधी ने राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था।  राजा वडिंग ने पंजाब में सिर्फ संगठन की बागडोर ही नहीं संभाली बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को राज्य की 13 में से 7 लोकसभा सीटें जिताकर अपना लोहा भी मनवाया था, जबकि चरणजीत चन्नी 2022 के चुनाव हार के बाद पंजाब छोड़कर विदेश चले गए थे और रंधावा राजस्थान का प्रभार संभाल रहे थे. ऐसे में राजा वडिंग ने काफी मशक्कत कर कांग्रेस को खड़ा किया, लेकिन 2027 चुनाव की सियासी सरगर्मी बढ़ने के साथ ही चन्नी ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने का मोर्चा खोल दिया है।  चन्नी समर्थक विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने और वडिंग को हटाने की मांग को लेकर पार्टी नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं. ऐसे में प्रभारी रहे भूपेश बघेल गुटबाजी को दूर करने में नाकाम रहे और विवाद इतना बढ़ा कि पार्टी आलाकमान को सचिन पायलट को नया प्रभारी नियुक्त करना पड़ा. इसके बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की चर्चा चल रही है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले बिहार में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को बदलकर अपना हश्र देख चुकी है. ऐसे में क्या पंजाब में जोखिम भरा कदम उठाएगी? पंजाब की सत्ता में वापसी पर कहीं न लग जाए ग्रहण पंजाब की सियासत का इतिहास गवाह है कि जब-जब कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश अध्यक्ष के चेहरे पर अनिश्चितता पैदा की है, तब-तब उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा है. चन्नी खेमे की मांग है कि राज्य में दलित वोटों और समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व में बदलाव किया जाए या चन्नी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए।  वहीं, कांग्रेस हाईकमान के सामने जाट सिख और दलित नेतृत्व के बीच संतुलन साधने की बड़ी चुनौती बनी हुई है. पिछले 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जाट सिख की जगह चन्नी को आगे कर दलित दांव खेला था, लेकिन सफल नहीं रहा. कांग्रेस का परंपरागत मतदाता जाट सिख नाराज होकर आम आदमी पार्टी के साथ चला गया. चन्नी अपने दलित समुदाय को भी साधकर नहीं रख सके।  पंजाब में जाट सिख और दलित केमिस्ट्री में उलझी पंजाब में जाट सिख का दांव हमेंशा सफल रहा है. आजादी के बाद से पंजाब में जब-जब कांग्रेस ने जाट सिख चेहरे को आगे कर चुनाव लड़ा, पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ बड़ी सफलता मिली. 2002 और 2017 के विधानसभा चुनावों में जाट सिख नेतृत्व ने मालवा, माझा और दोआबा के ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस का आधार मजबूत किया।  पंजाब की ग्रामीण आबादी, कृषि अर्थव्यवस्था और किसान-समर्थित वोट बैंक में जाट सिख समुदाय का दबदबा माना जाता है. इस वर्ग से चेहरा आगे करने पर अकाली दल और आम आदमी पार्टी के पारंपरिक ग्रामीण वोट बैंक में सेंध लगाना आसान रहता है।  2022 में पार्टी ने चुनावों से ठीक पहले कैप्टन … Read more

मध्य प्रदेश में कांग्रेस का मिशन 2028! 70 कमजोर सीटों की पहचान, भाजपा की 35 सीटों पर खास नजर

 भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए अब लगभग दो वर्ष ही बचे हैं। ऐसे में पिछले चुनाव में करारी हार झेल चुकी कांग्रेस ने उन सीटों पर अभी से जोर लगाना शुरू कर दिया है, जिन पर वह कभी नहीं जीती या एक-दो बार ही जीती है। ऐसी 70 सीटों की पहचान की गई है। पार्टी सबसे पहले इन विधानसभा क्षेत्रों में घर-घर मतदाता सूची का सत्यापन करेगी। इंदौर में 19 सितंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी के दौरे के बाद पार्टी इन सीटों पर फोकस करेगी। मतदाताओं के नाम, फोन नंबर सहित उनकी जानकारी संकलित की जाएगी, जिससे उनसे संपर्क किया जा सके। बता दें कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कुल 230 सीटों में से 66 ही कांग्रेस को मिली थीं। कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती हैं ये विधानसभा सीटें भोपाल की गोविंदपुरा विधानसभा सीट पर 1980 से भाजपा का कब्जा है। यहां पहले बाबूलाल गौर और पिछले दो बार से उनकी बहू कृष्णा गौर विधायक हैं। सागर की रहली विधानसभा सीट से भाजपा के गोपाल भार्गव 1985 से लगातार जीत रहे हैं। इंदौर-2 विधानसभा सीट 1993 से भाजपा के पास है। घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन करेंगे पार्टी कार्यकर्ता महामंत्री एवं संगठन प्रभारी, प्रदेश कांग्रेस, डॉ. संजय कामले ने कहा कि पार्टी ने ऐसी 70 विधानसभा सीटें चिह्नित की हैं, जिनमें प्रदर्शन कमजोर रहा है। पार्टी इन सीटों पर कभी नहीं जीती या अभी तक में एक-दो बार ही जीती हैं। इन सीटों पर सबसे पहले मतदाता सूची के सत्यापन के लिए अभियान चलाया जाएगा जो लगभग छह माह चलेगा। भाजपा के लिए 35 सीटों पर चुनौती भाजपा ने भी जनसंघ के समय से नहीं जीती या बहुत कम बार जीती 35 सीटों की पहचान की है। इन सीटों की जिम्मेदारी बड़े नेताओं को दी जाएगी। चार-चार गांवों का क्लस्टर गठित कर एक प्रभारी बनाया जाएगा जो कमजोरियों की पहचान कर दूर करने का प्रयास करेगा। दरअसल, भाजपा ने वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में खुद को मजबूत बनाने के लिए माइक्रो-प्लानिंग रणनीति बनाई है। पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है। इसके लिए "पन्ना प्रमुखों" को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अल्पसंख्यक और जातिगत समीकरण को देखते हुए इन सीटों पर प्रभावी जाति समूहों एससी-एसटी व अन्य को साधने के लिए नजदीकी विधायकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। मंत्रियों की तैनाती भी इन "कठिन" सीटों पर की गई है। संगठन के दिग्गज मंत्रियों और कोर ग्रुप के सदस्यों को प्रभारी बनाया गया है ताकि वे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा जीत सकें। सीटें जो भाजपा के लिए हैं चुनौती गुना जिले की राघौगढ़ विधानसभा सीट पर 1977 से कांग्रेस का कब्जा है। सीधी जिले की चुरहट विधानसभा सीट से भाजपा सिर्फ दो बार जीत पाई है। भोपाल की उत्तर विधानसभा सीट वर्ष 1998 से कांग्रेस के पास है। कसरावद भीकनगांव में 2013 से लगातार कांग्रेस जीती है। बड़वानी के राजपुर से बाला बच्चन भी लगातार तीन बार से जीते हैं।  

चुनावी रण से पहले कांग्रेस में हलचल, पंजाब इकाई में बड़े बदलाव की चर्चा तेज

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. पार्टी नेतृत्व को चिंता है कि गुटबाजी, कई पावर सेंटर और अंदरूनी खींचतान का फायदा विरोधी दल उठा सकते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब पर फोकस बढ़ा दिया है।  कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के साथ पंजाब के वरिष्ठ नेताओं की बैठक की है. इस बैठक का मकसद संगठन की स्थिति, चुनावी तैयारियों और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं का आकलन करना है।  इसके बाद पार्टी ने अजय माकन समेत तीन सदस्यों की एक ऑब्जर्वर कमेटी गठित कर दी है. इस कमेटी को पंजाब की स्थिति का मूल्यांकन करने और भविष्य की रणनीति पर सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है. कमेटी की रिपोर्ट से पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष का नाम तय होगा।  हाईकमान ने हलचल बढ़ाई पंजाब को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की गंभीरता लगातार बढ़ती बैठकों से साफ दिखाई दे रही है. पिछले दो सप्ताह में ही पार्टी ने पंजाब मामलों पर चार महत्वपूर्ण बैठकें की हैं. इससे ये संकेत मिलता है कि हाईकमान चुनाव से काफी पहले संगठनात्मक कमियों को दूर करना चाहता है।  ऑब्जर्वर कमेटी ने करीब 70 नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया है. इनमें सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं. चर्चाओं का केंद्र संगठनात्मक पुनर्गठन, लंबित चुनावी समितियां और नेतृत्व में संभावित बदलाव है।  सूत्रों के मुताबिक, ऑब्जर्वर कमेटी ने नेताओं से मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष पर भी राय मांगी है. उनसे पूछा गया कि क्या वर्तमान नेतृत्व को जारी रखा जाना चाहिए या बदलाव की जरूरत है. कमेटी अगले दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. इसके बाद संगठनात्मक बदलाव हो सकते हैं।  PCC में बदलाव की बहस तेज स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की बहस को तेज कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा अमरिंदर सिंह वारिंग को अपने राजनीतिक गढ़ गिद्दड़बाहा में बड़ा झटका लगा. यहां आम आदमी पार्टी ने 19 में से 17 नगर निकाय वार्डों में जीत दर्ज की थी।  इस प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर कई नेताओं ने नेतृत्व में बदलाव पर जोर देना शुरू कर दिया है. उनका मानना है कि यदि कांग्रेस को 2027 में मजबूत चुनौती पेश करनी है, तो संगठन को नए सिरे से खड़ा करना होगा. दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का पलड़ा भारी हुआ है।  चन्नी स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के बाद अधिक मजबूत होकर उभरे हैं. चमकौर साहिब में कांग्रेस के अच्छे नतीजों ने उनके राजनीतिक कद को बढ़ाया है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि चन्नी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की संभावनाओं को लेकर सक्रिय हैं. उनके साथ कई नाम चर्चा में हैं।  चन्नी की महत्वाकांक्षा और चुनौती इसमें सुखजिंदर सिंह रंधावा और विजेंदर सिंगला के नाम भी संभावित PCC चीफ के तौर पर चर्चा में हैं. इससे साफ है कि नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर कई दावेदार मौजूद हैं. चन्नी की बढ़ती सक्रियता ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. वो अभी भी पंजाब में बड़े चेहरे हैं।  उनकी गिनती कांग्रेस के सबसे बड़े दलित चेहरे के रूप में होती है. लेकिन पार्टी नेतृत्व 2022 विधानसभा चुनाव के अनुभव को भी नजरअंदाज नहीं कर सकता. कांग्रेस ने तब उनको पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया था. इसके बावजूद पार्टी सत्ता बरकरार नहीं रख सकी।  यही कारण है कि संगठन के भीतर इस बात पर अलग-अलग राय है कि क्या चन्नी को फिर से पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाया जाना चाहिए. चन्नी समर्थकों का तर्क है कि उनके पास दलित समाज में मजबूत जनाधार है. इतना ही नहीं वो पार्टी को सामाजिक संतुलन देने की क्षमता रखते हैं।  जट्ट और दलित सिख समीकरण वहीं विरोधी खेमे का मानना है कि कांग्रेस को किसी एक चेहरे पर निर्भर होने की बजाय संगठन को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. पंजाब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती जट्ट और दलित सिख के बीच संतुलन बनाए रखने की है. दोनों बेहद प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं।  फिलहाल पार्टी के दो सबसे अहम पद जट्ट सिख नेताओं के पास हैं. राजा अमरिंदर सिंह वारिंग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं, जबकि प्रताप सिंह बाजवा कांग्रेस विधायक दल का नेतृत्व कर रहे हैं. ऐसे में चन्नी समर्थक दलित नेताओं का एक वर्ग संगठन में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहा है।  यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब देश का वह राज्य है, जहां अनुसूचित जाति की आबादी सबसे अधिक है. हालांकि, इसके साथ ही कांग्रेस के सामने एक और चुनौती है. पिछले कुछ वर्षों में चुनाव के दौरान दलित वोट बैंक का बड़ा हिस्सा आम आदमी पार्टी की ओर शिफ्ट हुआ है।  कमेटी की रिपोर्ट पर टिकीं निगाहें ऐसे में नेतृत्व से जुड़ा कोई भी फैसला केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं होगा, बल्कि उसका सीधा असर पार्टी के सामाजिक और चुनावी समीकरणों पर भी पड़ेगा. फिलहाल पंजाब कांग्रेस की राजनीति का केंद्र अजय माकन की अगुवाई वाली ऑब्जर्वर कमेटी की रिपोर्ट बन गई है।  ये रिपोर्ट तय कर सकती है कि कांग्रेस पार्टी नेतृत्व में बड़ा बदलाव होगा या मौजूदा टीम को ही 2027 चुनाव तक मौका दिया जाएगा. राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और भूपेश बघेल की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि कांग्रेस पंजाब को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। 

NDA में दरार के संकेत? उम्मीद से ज्यादा वोट मिलने पर कांग्रेस उत्साहित, BJP की बढ़ी चिंता

बेंगलुरु  भारत की राजनीति में इन दिनों विपक्षी खेमे में टूट की खबरें लगातार आती रही हैं। वर्षों के बाद यह पहला मामला सामने आया है जिसमें केंद्र की सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन को तगड़ा झटका लगा है। कर्नाटक में गुरुवार को घोषित हुए विधान परिषद चुनाव के नतीजों में कांग्रेस ने पांच सीटों पर आरामदायक जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही विपक्षी भाजपा-जेडीएस गठबंधन के खेमे में हड़कंप मच गया है। चुनाव के आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि विपक्ष के कई विधायकों ने पाला बदलकर कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की है। इस भीतरघात के बाद अब कर्नाटक में NDA के नेता अपनी ही पार्टियों में छिपे गद्दारों की तलाश में जुट गए हैं। चुनाव में गद्दारी के पुख्ता सबूत तो मिल चुके हैं, लेकिन गुप्त मतदान होने के कारण दोषियों का कोई स्पष्ट सुराग हाथ नहीं लग रहा है। कांग्रेस को मिले उम्मीद से ज्यादा वोट कांग्रेस उम्मीदवार विनय कार्तिक सबसे ज्यादा 32 वोट पाकर विजयी घोषित हुए। यह संख्या जीत के लिए जरूरी कोटे से कहीं अधिक थी और कांग्रेस विधायकों की अपनी ताकत से भी काफी ज्यादा थी। वोटों के इस गणित से अंदाजा लगाया जा रहा है कि उन्हें भाजपा और जेडीएस के कम से कम एक दर्जन 12 विधायकों का साथ मिला है। भाजपा के नेताओं का कहना है कि उनके खेमे से केवल तीन विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की है। भाजपा ने आरोप लगाया कि जेडीएस के कम से कम 8 विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवारों का समर्थन किया है। जेडीएस नेताओं ने भाजपा के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उनका तर्क है कि उनके खेमे से केवल 4 वोट ही कांग्रेस को जा सकते थे, बाकी की पूरी मदद भाजपा विधायकों की तरफ से मिली है। शक के घेरे में आए बड़े नाम इस उलटफेर के बाद जेडीएस के जीटी देवगौड़ा और एमआर मंजूनाथ तथा भाजपा के दिग्गज नेता रमेश जारकीहोली, बीपी हरीश, एम चंद्रप्पा और एचके सुरेश तुरंत जांच के दायरे में आ गए हैं। हालांकि, इन सभी नेताओं ने क्रॉस-वोटिंग के आरोपों से साफ इनकार किया है। गठबंधन की सिरदर्दी इस चुनाव में गुप्त मतदान प्रणाली होने की वजह से जिम्मेदारी तय करना बेहद मुश्किल हो गया है। राज्यसभा या अन्य ओपन वोटिंग के उलट जहां पार्टी व्हिप के जरिए यह जांचा जा सकता है कि किसने किसे वोट दिया, विधान परिषद की इस प्रक्रिया ने संदेह के लिए तो बहुत जगह छोड़ दी है, लेकिन सबूत जुटाने का कोई मौका नहीं दिया है। इस अनिश्चितता ने गठबंधन के भीतर अविश्वास को और गहरा कर दिया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी इन गद्दारों की पहचान करेगी और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर जेडीएस के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद इसे अपनी पहली चुनावी जीत बताते हुए डीके शिवकुमार काफी उत्साहित दिखे। हालांकि, उन्होंने इस कयासबाजी को हवा न देते हुए हल्के अंदाज में कहा, "मुझे कोई अंदाजा नहीं है कि किसने क्रॉस-वोटिंग की है।" NDA के लिए बड़ा झटका यह चुनावी नतीजा भाजपा और जेडीएस दोनों के लिए ही आने वाले दिनों में बड़ी मुसीबतें खड़ी कर सकता है। पहले से ही अस्तित्व के संकट से जूझ रही जेडीएस के लिए यह हार एक बड़ा झटका है। अब पार्टी आलाकमान को अपने दूसरे स्तर के नेताओं और पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष पर गंभीरता से ध्यान देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। भाजपा में विजयेंद्र पर बढ़ेगा दबाव भाजपा के लिए भी यह परिणाम बेहद चिंताजनक है। इस बगावत से पार्टी के भीतर मौजूद असंतुष्ट गुट को बल मिलेगा, जो लगातार यह दावा कर रहा है कि राज्य में नेतृत्व की कमी के कारण पार्टी भटक रही है। विरोधी नेता अब प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र को पद से हटाने के लिए दबाव और तेज कर सकते हैं।

पंजाब की सियासत में बढ़ी हलचल, जल्द चुनाव की संभावना पर कांग्रेस ने कसी कमर

चंडीगढ़ पंजाब विधानसभा चुनाव भले ही आधिकारिक तौर पर फरवरी 2027 में प्रस्तावित हों, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ती जा रही है कि राज्य में चुनाव तय समय से पहले, यानी नवंबर 2026 में भी कराए जा सकते हैं। इस संभावित राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए राज्य की प्रमुख पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) जहां सरकार की उपलब्धियों के सहारे चुनावी अभियान की शुरुआत कर चुकी है, वहीं कांग्रेस भी संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय होती दिखाई दे रही है। पार्टी आलाकमान लगातार पंजाब इकाई के नेताओं के साथ बैठकें कर रणनीति बनाने में जुटा है। पंजाब की राजनीति में पिछले कुछ सप्ताह से असामान्य गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में लगातार बैठकें, राज्य के नेताओं से फीडबैक लेना, संगठन की स्थिति की समीक्षा और चुनावी तैयारियों पर जोर इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी किसी भी संभावित राजनीतिक परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहती है। कांग्रेस ने शुरू की चुनावी तैयारी सूत्रों के अनुसार, पिछले लगभग एक महीने के दौरान कांग्रेस आलाकमान की ओर से पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ चार से पांच महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में संगठन की स्थिति, पार्टी की मजबूती और कमजोरियों, संभावित उम्मीदवारों, विभिन्न जिलों की राजनीतिक परिस्थितियों और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इन बैठकों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, विधायक दल के नेता, पूर्व मंत्रियों और विभिन्न जिलों से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की राय भी ली गई। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पंजाब में कांग्रेस अभी भी एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में मौजूद है और यदि संगठन को एकजुट रखते हुए समय रहते तैयारी कर ली जाए तो आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है। तीन सदस्यीय ऑब्जर्वर कमेटी का गठन कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर नजर रखने और संगठनात्मक तैयारियों का आकलन करने के लिए तीन सदस्यीय ऑब्जर्वर कमेटी का गठन भी किया है। इस समिति में पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजनलाल जाधव को शामिल किया गया है। कमेटी की जिम्मेदारी राज्य के नेताओं से संवाद स्थापित करना, संगठन की गतिविधियों की निगरानी करना, जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता का मूल्यांकन करना और आगामी चुनाव के लिए पार्टी को आवश्यक सुझाव देना है। माना जा रहा है कि यह समिति नियमित रूप से अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष और केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पंजाब में कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी की समस्या से जूझती रही है। ऐसे में ऑब्जर्वर कमेटी का गठन संगठन को एकजुट रखने और संभावित मतभेदों को समय रहते दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जमीनी स्तर पर सक्रिय हुई पंजाब कांग्रेस पंजाब कांग्रेस ने भी चुनावी तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। जिला और ब्लॉक स्तर पर बैठकों का दौर चल रहा है। बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है ताकि चुनावी समय में पार्टी के पास प्रभावी नेटवर्क मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में विभिन्न जनसंपर्क अभियानों की शुरुआत की जाएगी। गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों से संवाद स्थापित करने, मौजूदा सरकार के खिलाफ मुद्दों को उठाने और कांग्रेस की नीतियों को जनता तक पहुंचाने की योजना तैयार की जा रही है। इसके अलावा युवाओं, महिलाओं, किसानों और व्यापारियों जैसे विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाने की भी तैयारी है। कांग्रेस का मानना है कि यदि जनता के बीच लगातार उपस्थिति बनाए रखी जाए तो पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार किया जा सकता है।