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2029 की जंग से पहले दक्षिण में कांग्रेस मजबूत, क्या BJP की राह होगी मुश्किल?

नई दिल्ली केरल की सत्ता में वापसी के साथ कांग्रेस पार्टी के अरमानों को नए फंख लग गए हैं. इसके साथ ही कांग्रेस दक्षिण के पांच में से तीन राज्यों में सीधे और एक में परोक्ष रूप से सत्ता में भागीदार हो गई है. केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में उसकी हालत ठीक है. वहीं उत्तर में पार्टी की एक मात्र राज्य हिमाचल प्रदेश में सरकार है. लेकिन, दक्षिण में मिली सफलता के बाद राजनीतिक पंडितों का एक धड़ा इस बात की चर्चा करने लगा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी कहां खड़ी होती दिख रही है।  दरअसल, उत्तर और दक्षिण भारत का राजनीतिक मिजाज पूरी तरह अलग है. हर एक मानक पर देश के दोनों क्षेत्र बिल्कुल अलग है. देश भर में एकछत्र सफलता हासिल कर चुकी भाजपा दक्षिण की ओर बढ़ते-बढ़ते अपनी रफ्तार खो देती है. मौजूदा वक्त में केवल आंध्र प्रदेश में वह चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी सरकार में वह भागीदार है. हालांकि पुड्डुचेरी में भी उसी सरकार है. मगर पांचों बड़ों राज्यों यानी तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में से केवल कर्नाटक में ही पार्टी अपना एक ठोस जनाधार बना पाई है. वह कर्नाटक की सत्ता तक पहुंची है लेकिन बाकी के चारों राज्यों में उसकी मौजूदगी काफी कम है।  पूरे दक्षिण की बात करें तो यहां लोकसभा की कुल 130 सीटें हैं. इसमें से 39 तमिलनाडु, 28 कर्नाटक, 25 आंध्र प्रदेश, 20 केरल, 17 तेलंगाना और एक सीट पुड्डुचेरी में हैं. इसमें आंध्र प्रदेश को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर कांग्रेस की स्थिति अच्छी है. यानी कुल 106 सीटों पर कांग्रेस सीधी टक्कर में है. कांग्रेस ने बीते 2024 के लोकसभा चुनाव में दक्षिणी राज्यों में भी इंडिया गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ा. ऐसे में गठबंधन को कुल 74 और भाजपा की एनडीए को 49 सीटों पर जीत मिली थी. केवल कांग्रेस की बात करें तो उसने अपने दम पर तमिलनाडु में नौ, कर्नाटक में नौ, आंध्र प्रदेश में शून्य, तेलंगाना में आठ और केरल में 14 सीटों पर जीत हासिल की. इस तरह उसे कुल 40 सीटों पर जीत मिली. वहीं भाजपा को अपने दम पर तमिलनाडु में शून्य, कर्नाटक में 17, आंध्र प्रदेश में तीन, तेलंगाना में आठ और केरल में एक सीट पर जीत मिली. उसे कुल 29 सीटें मिलीं. इस तरह पूरे इलाके में अकेले और बतौर गठबंधन दोनों स्थितियों में कांग्रेस का पलड़ा भारी है।  तमिलनाडु में बदल चुकी है स्थिति तमिलनाडु में राजनीतिक स्थिति बदल चुकी है. कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके के साथ चली गई है. ऐसे में लोकसभा चुनाव में उसको इसका और अधिक फायदा मिल सकता है. दूसरी तरफ पार्टी केरलम में वापस सत्ता में आई है. तेलंगाना और कर्नाटक में उसकी सरकार है और वहां भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था. ऐसी स्थिति में दक्षिण में भाजपा के लिए चुनौती देखी जा रही है।  थोड़ी बात उत्तर की अब थोड़ी उत्तर भारत की भी बात कर लेते हैं. उत्तर भारत में वैसे तो कांग्रेस करीब-करीब पूरी तरह सत्ता से बाहर है लेकिन कुछ राज्यों में उसके मजबूत मौजूदगी को खारिज नहीं किया जा सकता. इसमें सबसे पहला नाम पंजाब का है. पंजाब में लोकसभा की 13 सीटें हैं. इसमें से सात पर कांग्रेस और तीन पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली थी. यहां आम आदमी पार्टी की सरकार है. राज्य में आम आदमी पार्टी दोफाड़ हो चुकी है. ऐसे में यहां पर भी कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है. इस राज्य में भाजपा की शून्य सीटें मिली थी।  इस कड़ी में दूसरा राज्य हरियाणा है. यहां लोकसभा की 10 सीटें हैं. भाजपा और कांग्रेस यहां बराबरी पर हैं और दोनों को पांच-पांच सीटों पर जीत मिली थी. उत्तर भारत में तीसरा सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है जहां कांग्रेस अभी भी मजबूत स्थिति में है. राज्य में लोकसभा की 26 सीटें हैं और बीते चुनाव में वह आठ सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई थी. भाजपा को यहां 14 सीटों पर जीत मिली थी. कहने का मतलब है कि इन कुछ राज्यों से कांग्रेस को उम्मीद है. राजनीति के जानकार और आंकड़ों भी बताते हैं कि यहां अपने दम पर कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. इस तरह से देखें तो दक्षिण की 130 और उत्तर भारत की 49 सीटों पर वह सीधे टक्कर में है. यानी कुल 179 सीटों पर वह टक्कर में है. इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस की ठीकठाक मौजूदगी है। 

चुनावी मैदान में कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक, वापसी के लिए तैयार किया नया फॉर्मूला

भोपाल मध्यप्रदेश में सत्ता में वापसी की तैयारी में जुटी कांग्रेस ने अब नया सियासी दांव चल दिया है। पार्टी ने फैसला किया है कि आने वाले पंचायत चुनाव में सरपंच उम्मीदवारों को खुला समर्थन दिया जाएगा। अब तक पंचायत चुनाव गैर-दलीय आधार पर होते रहे हैं और राजनीतिक दल सीधे तौर पर दूरी बनाए रखते थे, लेकिन कांग्रेस ने इस परंपरा को तोड़ते हुए गांव स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बनाई है। दरअसल, कांग्रेस 2028 विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी ताकत का आंकलन करना चाहती है। पार्टी का मानना है कि पंचायत चुनाव के जरिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में पंचायत समितियों का गठन किया गया है। कांग्रेस का दावा है कि अब तक 21 हजार 478 पंचायत समितियां बनाई जा चुकी हैं, जिन्हें प्रत्याशी चयन और समन्वय की जिम्मेदारी दी जाएगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पंचायत कमेटियों के गठन का मकसद गांव-गांव संगठन को मजबूत करना है। पार्टी सरपंच चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को समर्थन देगी ताकि कार्यकर्ता सक्रिय हों और कांग्रेस की पकड़ ग्रामीण इलाकों में मजबूत हो सके। हालांकि कांग्रेस की इस रणनीति पर भाजपा ने सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गैर-दलीय पंचायत चुनाव में खुला समर्थन कांग्रेस के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकता है, लेकिन इससे अंदरूनी गुटबाजी बढ़ने का खतरा भी रहेगा। मध्यप्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव में समय है। ऐसे में कांग्रेस का यह ‘मिशन एमपी’ आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है। अब देखना होगा कि पंचायत चुनाव में खुलकर उतरने का कांग्रेस का यह दांव सत्ता वापसी की राह आसान करता है या नई चुनौतियां खड़ी करता है।

कांग्रेस ने किया ऐलान: किसानों के समर्थन में कल 7 स्थानों पर हाईवे जाम, दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद

भोपाल  मप्र में कल गुरुवार 7 मई को कांग्रेस बड़े आंदोलन की तैयारी में है। पार्टी प्रदेशभर में 7 अलग-अलग स्थानों पर नेशनल हाईवे जाम करेगी। आंदोलन का नेतृत्व वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने घोषित किया। बुधवार को भोपाल में पीसी शर्मा ने बताया कि सरकार की खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। बार-बार खरीदी और स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ाने से सिस्टम की कमजोरी उजागर हो गई है। उन्होंने कहा कि खरीदी के शुरुआती 14 दिनों में सिर्फ 9.30 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हुई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसान स्लॉट बुकिंग, पंजीयन पर्ची अपलोड और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कांग्रेस के इस आंदोलन से 11 जिलों के करीब 747 किलोमीटर क्षेत्र में यातायात प्रभावित होने की आशंका है। पार्टी ने इसे किसानों के हित में बड़ा आंदोलन बताया है, जबकि प्रशासन ने भी सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट की तैयारियां शुरू कर दी हैं। किसानों को नहीं मिल रहीं मूलभूत सुविधाएं कांग्रेस का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर पेयजल, छाया, बैठने और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। किसानों को कई दिनों तक ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ सड़कों पर इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि किसान मजबूरी में 1800 से 2022 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर व्यापारियों को गेहूं बेच रहे हैं। कांग्रेस की मांगें पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जाए और कम कीमत पर बेचे गए गेहूं का अंतर भावांतर योजना के तहत सीधे खातों में डाला जाए। साथ ही मूंग और सोयाबीन के दामों को लेकर भी जवाब मांगा गया है। मंत्री बोले- वेयरहाउस की क्षमता में 20% बढ़ाई मध्यप्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंदसिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री और विभाग द्वारा गेहूं खरीदी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की अनुमति थी, लेकिन किसानों के अधिक पंजीयन को देखते हुए केंद्र सरकार से इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन करा लिया गया है। मंत्री ने कहा कि खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और अब तक करीब 15 लाख स्लॉट बुक हो चुके हैं। 50 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी भी हो चुकी है। राजपूत ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए तौल कांटे बढ़ाए गए हैं और वेयरहाउस की क्षमता में 20% तक की बढ़ोतरी की गई है, ताकि भंडारण में दिक्कत न आए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री खुद औचक निरीक्षण कर रहे हैं और वे स्वयं भी विभिन्न केंद्रों का दौरा कर रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना- कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते और आंदोलन का ढोंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने के कारण कांग्रेस इस तरह के कदम उठा रही है, लेकिन हाईवे जाम से आम जनता को परेशानी होगी। राजपूत ने कहा कि सड़कों को जाम करने से लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी और इससे आम नागरिकों को अनावश्यक दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। उन्होंने कांग्रेस से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की। मंत्री ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में कांग्रेस की स्थिति कमजोर है और पार्टी को आंदोलन करने के बजाय आत्ममंथन करने की जरूरत है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले कांग्रेस ने आज तक अन्नदाता की चिंता नही की कांग्रेस को तो यह बात कहने का भी अधिकार नहीं हैं। हमारी सरकार बनने के बाद हम अन्नदाता को किसान सम्मान निधि दे रहे हैं। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी की जा रही हैं, जबकि बारदाने का संकट था। जीतू पटवारी को किसानों से माफी मांगना चाहिए। वो बताएं कि 2003-04 के पहले उन्होंने अन्नदाता के लिए क्या किया? जीतू पटवारी को आत्ममंथन और आत्मचिंतन करने की जरुरत है।

युवा कांग्रेस में अध्यक्ष के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू, तैयारी जोरों पर

रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजनीति में युवा कांग्रेस एक बार फिर सक्रिय मोड में है। संगठनात्मक चुनावों की आहट के साथ प्रदेशभर में हलचल तेज हो गई है। यह सिर्फ पदों की अदला-बदली भर नहीं, बल्कि संगठन की दिशा और भविष्य तय करने वाली प्रक्रिया भी है। तीन साल से अधिक समय से प्रदेश अध्यक्ष रहे आकाश शर्मा के कार्यकाल के बाद अब नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है।इस पूरी कवायद की शुरुआत सदस्यता अभियान से होगी, जो मई-जून में चलाया जाएगा। यही सदस्यता आगामी चुनाव की बुनियाद बनेगी। खास बात यह है कि इस बार सदस्यता शुल्क 50 रुपए से बढ़ाकर 75 रुपए कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी भले छोटी लगे, लेकिन इसके पीछे संगठन की गंभीरता और संसाधनों को मजबूत करने की रणनीति साफ झलकती है। युवा कांग्रेस इस बार प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने पर जोर दे रही है। सदस्यता से लेकर मतदान तक पूरा सिस्टम डिजिटल होगा और चुनाव को ब्लॉक स्तर तक ले जाया जाएगा। यह कदम न सिर्फ भागीदारी बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि स्थानीय नेतृत्व को उभारने की भी कोशिश है। चुनाव प्रक्रिया दो चरणों में होगी पहले मतदान और फिर इंटरव्यू। अंतिम चयन वरिष्ठ नेतृत्व के हाथ में रहेगा। इस बार उम्र को भी एक अहम पैमाना बनाया गया है, जिसमें खासतौर पर 1989, 1990 और 1991 आयु वर्ग के दावेदारों पर फोकस रहने की चर्चा है। इससे यह संकेत मिलता है कि संगठन अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच संतुलन साधने की कोशिश में है। पिछले सदस्यता अभियान में 11 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने संगठन को मजबूती दी थी। इस बार यह आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। यह सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर भी है। दूसरी ओर, दावेदारों की लंबी सूची इस चुनाव को और दिलचस्प बना रही है। नए और पुराने चेहरों के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। यह प्रतिस्पर्धा जहां संगठन में नई ऊर्जा भर सकती है, वहीं गुटबाजी की चुनौती भी खड़ी कर सकती है। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस का यह चुनाव महज संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक पुनर्संरचना का संकेत है। सदस्यता, डिजिटल चुनाव और नए चेहरों की एंट्री—ये तीनों फैक्टर मिलकर तय करेंगे कि आने वाले समय में संगठन किस दिशा में आगे बढ़ेगा। अगर यह प्रक्रिया पारदर्शिता और संतुलन के साथ पूरी होती है, तो यह कांग्रेस के लिए प्रदेश में नई ताकत बन सकती है।

निशिकांत दुबे का बड़ा दावा: बंगाल में 1962 में पड़ी थी हिंदू विरोध की नींव

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की दयनीय स्थिति को लेकर कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि आज के पश्चिम बंगाल में 'हिंदू प्रताड़ित करो' और मुस्लिम तुष्टिकरण की नींव 3 मई 1962 को ही रखी गई। सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि 3 मई 1962 से 30 मई 1962 के बीच पश्चिम बंगाल के कई जिलों (मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और कूचबिहार) में हिंदू–मुस्लिम दंगे हुए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और कई लोग शरणार्थी बनने को मजबूर हुए। बीजेपी सांसद के निशाने पर कांग्रेस बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने रविवार सुबह एक्स पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, 'कांग्रेस का काला अध्याय'। बीजेपी नेता ने पोस्ट में आगे लिखा- '3 मई 1962 से लेकर 30 मई 1962 तक पूरा पश्चिम बंगाल हिंदू मुस्लिम दंगे में झुलसता रहा। हजारों हिंदू मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, कूचबिहार में मरते रहे, यही हाल पूर्वी पाकिस्तान/बांग्लादेश के हिंदुओं का हो रहा था। या तो हिंदू मारे गए या भागकर शरणार्थी बने जो ज्यादातर मतुआ यानि अनुसूचित जाति समुदाय के हैं जिन्हें हमारे मोदी सरकार ने नागरिकता दी।' पूर्व पीएम पंडित नेहरू को लेकर बड़ा आरोप निशिकांत दुबे ने आगे लिखा, 'नेहरू जी संसद में संसद के बाहर मुसलमानों का पक्ष लेते रहे। राजागोपालाचारी जी को लिखे पत्रों से कांग्रेस के वोट बैंक की राजनीति का पता चलता है। आज के पश्चिम बंगाल में हिंदू प्रताड़ित करो और मुस्लिम तुष्टिकरण की नींव 3 मई 1962 को ही रखी गई। #CongressDarkHistory'। बीजेपी सांसद ने अपनी पोस्ट के साथ कुछ डॉक्यूमेंट्स भी शेयर किए हैं। पंडित नेहरू के सी. राजगोपालाचारी को लिखे पत्र किए शेयर निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि उस समय के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संसद के भीतर और बाहर मुसलमानों के पक्ष में रुख अपनाया था। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति सी. राजगोपालाचारी को लिखे गए पत्रों का भी हवाला दिया। जवाहर लाल नेहरू की ओर से सी. राजगोपालाचारी को लिखे गए पत्रों को बीजेपी सांसद ने एक्स पर शेयर किया है।

कांग्रेस ने किया बड़ा कदम, पदस्थ बड़े नेता को सस्पेंड किया, गंभीर आरोप लगे; पूरी कहानी जानें

रायपुर  छत्तीसगढ़ के इस जिले में कांग्रेस ने बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी ने अपने ही नेता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू पर चोरी का पैसा छिपाने का आरोप लगा है। मामले की जानकारी पर जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाला है। कहा- कानून से ऊपर कोई नहीं है।   जानकारी के अनुसार, एक कारोबारी से करीब 50 लाख रुपये की लूट हुई थी। आरोपी चालक कृष्णा साहू कारोबारी से लाखों रूपए लेकर फरार हो गया था। मामले में कारोबारी ने पुलिस को शिकायत सौंपी गई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी चालक कृष्णा साहू द्वारा चोरी के पैसों को छिपाने में ओम प्रकाश साहू की भूमिका सामने आई है। ओम प्रकाश साहू की पहचान बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद के रूप में हुई है। जिसके बाद पार्टी ने सख्त कार्रवाई करते हुए पार्षद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बिरगांव के अध्यक्ष योगेंद्र सोलंकी द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर जिला अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने यह कार्रवाई की। वहीं, पुलिस ने बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू को चोरी का पैसा छिपाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। ऐसे में मामला केवल आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। इधर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री (संगठन) मलकीत सिंह गेंदू को भेज दी गई है, ताकि आगे जरूरी कार्रवाई की जा सके। इससे साफ है कि पार्टी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इसमें कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

कांग्रेस के कई जिला अध्यक्षों की बढ़ी मुश्किलें, दिग्गज नेताओं की कुर्सी पर मंडराया खतरा

भोपाल  मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अब जिला अध्यक्षों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर सख्त फैसले की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक 9 से ज्यादा जिला अध्यक्षों की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है। खास बात यह है कि जिन नेताओं से संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और जनता के बीच पार्टी की पकड़ बढ़ाने की उम्मीद की गई थी, वे उसी कसौटी पर खरे नहीं उतर सके। बताया जा रहा है कि कई ऐसे जिला अध्यक्ष भी डेंजर जोन में हैं, जिन्हें सीधे राहुल गांधी की सहमति से जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन संगठन विस्तार, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और जमीनी सक्रियता के मामले में उनकी रिपोर्ट बेहद कमजोर पाई गई। यही वजह है कि अब कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं दिख रहा। सूत्रों के अनुसार डिंडोरी जिला अध्यक्ष ओमकार सिंह मरकाम, सतना ग्रामीण के सिद्धार्थ कुशवाह, मंडला के अशोक मर्सकोले समेत ग्वालियर ग्रामीण, रतलाम शहर, मंदसौर, अनूपपुर, दतिया, रीवा ग्रामीण, मऊगंज और आगर मालवा के जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट खराब बताई जा रही है। हालांकि कुछ जिलाध्यक्ष जातिगत और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के कारण राहत पा सकते हैं। करीब 8 महीने पहले संगठन सृजन अभियान के तहत इन जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी। उद्देश्य था कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाए, कांग्रेस की गतिविधियों को तेज किया जाए और जनता के मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया जाए। लेकिन कई जिलों में अपेक्षित काम नहीं हुआ। AICC की ओर से वामसी चंद रेड्डी को समीक्षा के लिए भेजा गया था। उन्होंने चार दिनों तक वन-टू-वन चर्चा कर जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट तैयार की। इस दौरान संगठन की मजबूती, ब्लॉक-मंडलम-पंचायत और वार्ड समितियों के गठन, AICC और PCC के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, प्रेस कॉन्फ्रेंस, धरना-प्रदर्शन, जिला कार्यकारिणी बैठकों और कनेक्ट सेंटर को रिपोर्टिंग जैसे कई बिंदुओं पर सवाल पूछे गए। जानकारी के मुताबिक डिंडोरी के ओमकार सिंह मरकाम और रतलाम ग्रामीण के सिद्धार्थ कुशवाहा ने तो अपने कामकाज की रिपोर्ट तक कनेक्ट सेंटर को नहीं भेजी, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर मानी जा रही है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जिन नेताओं को संगठन की नई ऊर्जा बनने के लिए जिम्मेदारी दी गई थी, वे अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। अब पार्टी ऐसे चेहरों को हटाकर नए और सक्रिय नेतृत्व को मौका देने के पक्ष में नजर आ रही है। आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है, जिससे प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में हलचल और तेज होना तय है।  

एमपी कांग्रेस में फिर से संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया, ओंकार और सिद्धार्थ समेत कई जिलाध्यक्षों की बारी

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी में है। पार्टी के भीतर 'शौक' के लिए पद पर काबिज नेताओं और निष्क्रिय पदाधिकारियों के खिलाफ अब सख्त रुख अपनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के 71 जिला अध्यक्षों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो चुका है, संगठन सृजन अभियान की लंबी प्रक्रिया के बाद एमपी में बनाए गए कांग्रेस के जिलाध्यक्षों में कई दिग्गज उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की ओर से एमपी भेजे गए वामसी रेड्‌डी की समीक्षा में करीब 12 जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट चिंताजनक पाई गई है। अब एआईसीसी यानी राष्ट्रीय नेतृत्व को जिलाध्यक्षों की रिव्यू रिपोर्ट भेजी जाएगी। दिल्ली की हरी झंडी मिलने के बाद पुअर परफॉरमेंस वाले जिला अध्यक्षों को हटाया जा सकता है। बडे़ नेता भी जिलाध्यक्ष के तौर पर कमजोर साबित हुए पार्टी सूत्रों की मानें तो जिन जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट रिव्यू में कमजोर मिली है। उनमें सीनियर लीडर भी बतौर जिलाध्यक्ष फेल साबित हुए हैं। पूर्व मंत्री और कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) के मेंबर ओमकार सिंह मरकाम(जिलाध्यक्ष डिंडोरी) , सतना विधायक और ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह(जिलाध्यक्ष सतना), मंडला के पूर्व विधायक डॉ अशोक मर्सकोले(जिलाध्यक्ष मंडला) जैसे नेता भी जिलों में अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे। इंदौर शहर अध्यक्ष को भी बदला जा सकता है कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि पार्टी आलाकमान इंदौर के शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के निर्णयों और बयानों से संगठन नाराज है। दिग्विजय सिंह के इंदौर में एक प्रदर्शन को लेकर चिंटू चौकसे ने बयान दिया था। पार्षदों के वंदे मातरम विवाद पर पार्टी आलाकमान से चर्चा किए बिना की गई बयानबाजी के बाद अब इंदौर में शहर अध्यक्ष को बदला जा सकता है। आठ महीने पहले हुई थी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पिछले साल जून 2025 में भोपाल में राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान की शुरुआत की थी। करीब दो महीनों के लंबे मंथन और बैठकों के बाद जिला अध्यचों के नाम तय किए गए थे। अब सिर्फ पद नहीं, काम जरूरी बैठक में ब्लॉक अध्यक्षों को साफ शब्दों में संदेश दिया गया कि अब जिम्मेदारी मिलने का मतलब केवल पद संभालना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से काम करना है। उन्हें निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मंडल, ब्लॉक, गांव और वार्ड स्तर तक संगठन का मजबूत ढांचा खड़ा करें और हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाएं। नेताओं ने यह भी कहा कि अब केवल कागजों पर कमेटियां बनाकर सूची भेजना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर नियुक्ति और हर इकाई का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा। यदि कोई पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी से अनजान पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।  परफॉर्मेंस पर टिकेगा भविष्य, समीक्षा तय बैठक में संगठन के भीतर जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया गया। जिला अध्यक्षों के काम का मूल्यांकन पहले से जारी है। ब्लॉक अध्यक्षों के काम की भी छह महीने बाद समीक्षा की जाएगी। इससे साफ संकेत मिला कि आने वाले समय में संगठन में परफॉर्मेंस बेस्ड सिस्टम लागू होगा, जहां सक्रिय और काम करने वाले नेताओं को ही आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। जन संवाद के जरिए जनता से सीधा संपर्क बढ़ाने की रणनीति संगठन प्रभारी संजय कामले ने कहा कि अब हर ब्लॉक स्तर पर जन संवाद कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि वे रोजाना लोगों से मिलें, उनकी समस्याएं सुनें और उन्हें पार्टी की विचारधारा से जोड़ें। नेताओं का मानना है कि जनता से सीधा संवाद ही संगठन को मजबूत करने का सबसे प्रभावी तरीका है और इससे पार्टी की पकड़ फिर से मजबूत होगी।   2028 चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा संगठन पूरे सम्मेलन में यह साफ दिखा कि कांग्रेस अब 2023 की हार के बाद संगठन को दोबारा मजबूत करने में जुटी है। ब्लॉक स्तर से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत आधार तैयार करने की कोशिश की जा रही है। हर परिवार से 100 रुपए लेने का प्रस्ताव भी चर्चा में बैठक के दौरान एक अहम प्रस्ताव यह भी सामने आया कि हर विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक परिवार से 100 रुपए सहयोग राशि ली जाए। इस राशि को जिला और ब्लॉक स्तर पर ही खर्च किया जाएगा, ताकि संगठन को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके और स्थानीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो सकें। नेताओं का मानना है कि इससे न केवल संसाधन जुटेंगे, बल्कि आम लोगों के साथ पार्टी का सीधा जुड़ाव भी बढ़ेगा। 

कांग्रेस ने एमपी के वरिष्ठ नेता को 6 वर्ष के लिए निष्कासित किया, पार्टी में खलबली

भोपाल  एमपी कांग्रेस में अंदरुनी कलह लगातार जारी है। इंदौर नगर निगम में कांग्रेस की दो महिला पार्षदों द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के कथित अपमान के मामले में कार्रवाई पर पार्टी का अंतर्विरोध सामने आ चुका है। इस बीच कांग्रेस ने एक वरिष्ठ नेता को निष्कासित कर दिया है। पार्टी ने पूर्व प्रदेश प्रवक्ता सिंगरौली के भास्कर मिश्रा पर ये कार्रवाई की है। उन्हें कांग्रेस से 6 वर्ष के लिए निष्कासित करने का आदेश जारी किया गया है। पार्टी की इस सख्ती से खलबली सी मची है। पूर्व प्रदेश प्रवक्ता भास्कर मिश्रा पर अनुशासनहीनता करने पर ये सख्ती दिखाई गई। इससे पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। कांग्रेस ने भास्कर मिश्रा से स्पष्टीकरण तलब किया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का आदेश जारी कर दिया गया। सिंगरौली शहर अध्यक्ष प्रवीण सिंह चौहान ने पूर्व प्रदेश प्रवक्ता भास्कर मिश्रा को कांग्रेस की सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है। संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की है। भास्कर को इससे पहले पार्टी की ओर से पांच बिंदुओं पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था शहर अध्यक्ष प्रवीण सिंह चौहान ने बताया कि अनुशासनहीनता पर भास्कर को इससे पहले पार्टी की ओर से पांच बिंदुओं पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने तय समय सीमा के भीतर इसका कोई जवाब नहीं दिया। जीतू पटवारी से मांगा जवाब इधर इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान कांग्रेस की दो महिला पार्षदों द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के कथित अपमान का मामला राजनीतिक टकराव का केंद्र बना हुआ है। देशभर में चर्चा के बीच कांग्रेस की ओर से सख्त कार्रवाई न होने पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के रुख को बेहद आपत्तिजनक बताया। रविवार को चर्चा में भार्गव ने कहा कि दोनों पार्षदों ने राष्ट्रगीत के बाद मीडिया में बयान देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। ऐसे में अनुशासन समिति की जांच की बात किस आधार पर हो रही है, यह कांग्रेस ही स्पष्ट करे। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस कार्यालय में भी वंदे मातरम् गाया जाता है, तो जो लोग नहीं गाते, उनके खिलाफ पार्टी क्या रुख अपनाती है, इस पर पटवारी को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। महापौर ने कहा कि शनिवार को पत्रकार वार्ता में जीतू पटवारी ने चुनौती देते हुए कहा था कि कोई ईमानदार है तो हाथ उठाए, हम उसका भ्रष्टाचार सिद्ध करेंगे। इस पर भार्गव ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि किसी पर भ्रष्टाचार का आरोप है तो प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं। ईमानदारी का प्रश्न उठाकर सिद्ध करने की परिपाटी कब से शुरू हुई? उन्होंने कहा कि जिन पर जनता पहले ही निर्णय दे चुकी है, उन्हें ऐसे आरोप शोभा नहीं देते। एक दिन का सदन बुलाने की मांग पर महापौर ने कहा कि परिषद जल्द ही सदन बुलाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगीत का अपमान करने वाले पार्षदों की पार्षदी समाप्त करने का प्रस्ताव भी लाया जाएगा।

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान मनेन्द्रगढ़/एमसीबी राजनीतिक मजबूती का असली आधार केवल पद नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की ऊर्जा होती है – इसी सोच के साथ नगर पंचायत नई लेदरी में कांग्रेस ने संगठन को नई धार देने का बिगुल फूंक दिया है। रविवार को आयोजित अहम बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि अब हर मंडल और हर बूथ पर मजबूत, जागरूक और सक्रिय टीम तैयार की जाएगी। बैठक में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विष्णु दास ने स्पष्ट कहा कि संगठन निर्माण का उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि हर स्तर पर ऐसी टीम खड़ी करना है जो जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों को प्रभावी ढंग से पहुंचा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं होंगे, तब तक संगठन की असली ताकत सामने नहीं आ पाएगी। मंडल अध्यक्ष राजाराम कोल की उपस्थिति में हुई इस बैठक में संगठन की मजबूती को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि आने वाले समय में कांग्रेस को क्षेत्र में और सशक्त बनाने के लिए बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने और नियमित संवाद बनाए रखने की रणनीति तैयार की गई। बैठक में सांसद प्रतिनिधि मकबूल अख्तर, हसदेव मंडल प्रभारी लक्ष्मी दास, मंडल सचिव राम भजन, नेता प्रतिपक्ष विकास दीवान, ब्लॉक उपाध्यक्ष शंभु घोष सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्षद अनामिका, अजय लाल, रानी मैना, शेखर टंडन, अंकित खरे, अमर पाव और अन्य कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इस बैठक के माध्यम से कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि अब संगठन को कागजों से निकालकर जमीनी हकीकत में उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। मजबूत रणनीति और सक्रिय टीम के सहारे पार्टी आने वाले समय में क्षेत्र में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।