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हरियाणा चुनाव में टिकट बेचने का विवाद, कांग्रेस से जुड़े लोगों पर FIR

 रोहतक  हरियाणा में 2024 के विधानसभा चुनाव को लेकर रेवाड़ी जिले की बावल विधानसभा सीट की कथित टिकट बेचने का मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। गौरव कुमार की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस पार्टी से जुड़े लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। महिला कांग्रेस की पूर्व पदाधिकारी सुचित्रा देवी ने कांग्रेस हाईकमान और गांधी परिवार पर आरोप लगाया था कि बावल सीट के टिकट के नाम पर करोड़ों रुपए की रकम ऐंठी गई। उनके पति गौरव कुमार ने इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली पुलिस को शिकायत दी थी। गौरव कुमार ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस पार्टी के कई नामी नेताओं और उनके निजी सचिवों ने रेवाड़ी की बावल विधानसभा सीट से टिकट देने के नाम पर करोड़ों रुपये लिए लेकिन अंत में टिकट नहीं दिया। इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज और व्हाट्सएप चैट भी उन्होंने पुलिस को उपलब्ध कराए। इन दस्तावेजों में पैसे की ट्रांजेक्शन, बातचीत और टिकट देने के वादों का विवरण मौजूद है। इस शिकायत के आधार पर 26 मार्च को दिल्ली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। दिल्ली की नॉर्थ एवेन्यू थाने में कांग्रेस पार्टी से जुड़े लोगों के खिलाफ FIR दर्ज सूत्रों के मुताबिक दिल्ली की नॉर्थ एवेन्यू थाने में दर्ज केस में कांग्रेस पार्टी से जुड़े लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और नॉर्थ एवेन्यू थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. पति गौरव कुमार द्वारा थाने दर्ज शिकायत में पार्टी के बड़े नेताओ पर करोड़ों की ठगी का आरोप लगाया गया था. गौरव कुमार ने आरोप लगाया था कि इस लेन-देन में के.सी. वेणुगोपाल और कोडिकुन्निल सुरेश सहित कई बड़े चेहरों के नाम जुड़े हैं।  टिकट के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और सहयोगियों को दिए 7 करोड़ रुपए गौरव का दावा है कि उन्होंने पत्नी को टिकट दिलाने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और उनके सहयोगियों को लगभग 7 करोड़ रुपये दिए थे. उनका आरोप है कि न तो उन्हें टिकट मिला और न ही उनके पैसे वापस किए जा रहे. उन्होंने सबूत के तौर पर व्हाट्सएप चैट और अन्य दस्तावेज दिल्ली पुलिस कमिश्नर को सौंपे हैं. उन्होंने बताया कि, हमने इस मामले में कई सबूत दिए हैं, इसमें बैंक स्टेटमेंट से लेकर ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल है।  यह एफआईआर नॉर्थ एवेन्यू थाने में दर्ज हुई है और इसे भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 61(2), 318(4) और 316(2) के तहत दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। फिलहाल किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करने की जानकारी नहीं मिली है। हालांकि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इसके खुलासे की उम्मीद है। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। एक तरफ जहां सुचित्रा देवी और उनके पति ने कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है, वहीं कांग्रेस पार्टी ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि जब सुचित्रा ने यह मुद्दा मीडिया में उठाया था तो हरियाणा कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। केसी वेणुगोपाल के एक आदमी द्वारा दो करोड़ रुपए का ऑफर देने का दावा इससे पहले गौरव ने दावा किया था कि मामले को लेकर उन्हें केसी वेणुगोपाल के एक आदमी का फोन आया और दो करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया. उनसे कहा गया कि वो मेरे खिलाफ झूठे बयान प्रेस ब्रीफिंग में दे दें. लेकिन केसी वेणुगोपाल यह भूल गए कि हमारे भी कुछ रिश्ते होते हैं. पैसे देकर आप कोई भी साजिश नहीं रच सकते. अगर आप मेरे खिलाफ बयान देने के लिए दो करोड़ दे सकते हैं, तो मेरे वो पैसे वापस कर दीजिए।  हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस को 37 सीटों से संतोष करना पड़ा गौरतलब है साल 2024 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में  भारतीय जनता पार्टी ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया था. भाजपा पहली पार्टी बन गई थी, जिसने लगातार तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने में सफल हुई थी. भाजपा 90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा में जीत के लिए जरूरी 46 सीटों से 2 सीट अतिरिक्त सीटें जीतकर सत्ता पर काबिज हुई थी, जबकि कांग्रेस को 37 सीटो से संतोष करना पड़ा था। 

राज्यसभा क्रॉस वोटिंग के बाद मेवात में सियासी गर्मी, 2 मुस्लिम विधायक भाजपा में शामिल होने की ओर

मेवात  हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोपों ने मेवात की राजनीति को गरमा दिया है। यहां से कांग्रेस के दो विधायकों के नाम सामने आने के बाद सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। गांव की चौपाल से लेकर सोशल मीडिया तक इस मुद्दे पर बहस जारी है। भाजपा इसे अपने विस्तार के अवसर के रूप में देख रही है। कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों पर क्रॉस वोटिंग का आरोप लगाया है, जिनमें जिला पलवल की हथीन सीट से विधायक इसराइल और जिला नूंह की पुन्हाना सीट से विधायक इलियास शामिल हैं। पार्टी का कहना है कि इन विधायकों ने आधिकारिक उम्मीदवार के बजाय दूसरे प्रत्याशी को वोट दिया। इसके बाद पार्टी ने सभी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। इसराइल ने साफ किया है कि उन्होंने अपनी पसंद से वोट दिया और यह उनका अधिकार है। उन्होंने फिलहाल पार्टी छोड़ने की अटकलों से इनकार किया है और कहा कि आगे का फैसला जनता की राय के अनुसार होगा। इलियास की सक्रियता से बढ़ी अटकलें विधायक इलियास की हालिया गतिविधियों ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी है। बुधवार को मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात को कई लोग नए राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। चर्चा है कि वह अपने बेटे को राजनीति में आगे लाने की योजना बना रहे हैं और इसके लिए पार्टी बदलने का विकल्प भी खुला रख सकते हैं। हालांकि, उन्होंने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके कदमों पर सभी की नजर बनी हुई है। भाजपा की नजर मेवात के सियासी समीकरण पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा मेवात क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। क्रॉस वोटिंग की घटना को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। यह भी चर्चा है कि जिस निर्दलीय उम्मीदवार को वोट मिला, उसे भाजपा का समर्थन प्राप्त था। ऐसे में कांग्रेस विधायकों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। भाजपा लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है और अब उसे नए अवसर दिखाई दे रहे हैं। क्रॉस वोटिंग मामला हाईकमान तक पहुंचा सूत्रों के अनुसार हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग का मामला अब राहुल गांधी तक पहुंच गया है। इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस पार्टी ने हरियाणा के सभी विधायकों को दिल्ली बुलाया है, जहां विस्तार से चर्चा होगी। जिन पांच विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। पार्टी उन्हें निष्कासित करने या इस्तीफा लेने का फैसला भी कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश में उपचुनाव की स्थिति बन सकती है। दल बदल की पुरानी परंपरा, नए संकेत मेवात में पहले भी कई बड़े नेता कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। जाकिर हुसैन, आजाद मोहम्मद, नसीम और एजाज जैसे नाम इसके उदाहरण हैं। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम को भी उसी क्रम में देखा जा रहा है। भाजपा इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए स्थानीय प्रभावशाली नेताओं को साथ जोड़ने की रणनीति पर लगातार काम कर रही है।

कांग्रेस को असम चुनाव से पहले मिला तगड़ा झटका, सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने छोड़ा पार्टी

गुवाहाटी   असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका लिया है. असम से कांग्रेस के लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. प्रद्युत बोरदोलोई असम के कांग्रेस सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के काफी करीबी सहयोगी रहे हैं. उन्होंने मंगलवार को अपना इस्तीफा पत्र सौंपा. उनके इस्तीफे वाले पत्र में लिखा है कि वह बहुत दुख के साथ कांग्रेस के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं. वहीं, असम के लिए कांग्रेस के प्रभारी का कहना है कि वह कांग्रेस में थे और कांग्रेस में ही रहेंगे। प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राइमरी सदस्यता से इस्तीफा देते हुए अपना पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा. उन्होंने इस्तीफे में लिखा, ‘आज बहुत दुख के साथ मैं इंडियन नेशनल कांग्रेस के सभी पदों, खास अधिकारों और प्राइमरी मेंबरशिप से अपना इस्तीफा दे रहा हूं.’ पत्र में शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने पार्टी से अलविदा कहा। बोरदोलोई असम के डिब्रूगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं. उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी. डिब्रूगढ़ एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और चाय उत्पादन क्षेत्र है, जहां भाजपा की मजबूत पकड़ रही है. राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बोरदोलोई के भाजपा में शामिल होने की संभावना काफी मजबूत है। भाजपा में शामिल होने की अटकलें वे जल्द ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं और पार्टी की असम इकाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह घटना कांग्रेस के लिए असम में बड़ा झटका मानी जा रही है, जहां पार्टी पहले से ही संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक कलह से जूझ रही है। प्रद्युत बोरदोलोई लंबे समय से कांग्रेस के वफादार नेता रहे हैं. वे असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं और 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के अभियान में अहम भूमिका निभाई थी। अलग राह की वजह क्या हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में असम में कांग्रेस की लगातार हार और 2021 विधानसभा चुनाव में महज 29 सीटों पर सिमटने से पार्टी के कई नेताओं में असंतोष बढ़ा था. बोरदोलोई ने भी पार्टी की रणनीति, संगठनात्मक ढांचे और केंद्रीय नेतृत्व के फैसलों पर असहमति जताई थी. इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत असंतोष के अलावा असम की बदलती राजनीतिक हवा और भाजपा की बढ़ती ताकत को भी कारण माना जा रहा है। भाजपा 2026 से सत्ता में भाजपा 2016 से लगातार असम की सत्ता में है और 2024 लोकसभा चुनाव में राज्य की 14 में से 9 सीटें जीती थीं. कांग्रेस को महज 3 सीटें मिली थीं. ऐसे में बोरदोलोई जैसे प्रभावशाली नेता का भाजपा में जाना पार्टी को डिब्रूगढ़ और ऊपरी असम में और मजबूती दे सकता है। असम में कब वोटिंग और रिजल्ट बता दें कि असम की कुल 126 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को सामने आएंगे।

राज्यसभा की तीसरी सीट कांग्रेस के हाथ से जाएगी? हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर पार्टी में बढ़ी चिंता

भोपाल   विजयपुर विधानसभा मामले के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस को अब डर सता रहा है कि भाजपा उनसे राज्यसभा सीट छीन सकती है। दरअसल, मध्य प्रदेश में 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने वाली हैं। प्रदेश में विधायकों की संख्या के हिसाब से सत्ताधारी बीजेपी को 2 सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना है। लेकिन इस तीसरी सीट पर पेंच सकता है। आरोप है कि भाजपा अभी से जोड़तोड़ की नीति से तीसरी सीट हत्थियाने की चाल रही है। कांग्रेस को अपना डर अब सच होता दिख रहा है। क्योंकि विजयपुर विधानसभा सीट से विधायक मुकेश मल्होत्रा पर विधायकी रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बाद अब कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। लेकिन इसी बीच राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एमपी के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीजेपी पर राज्यसभा सीट के लिए जोड़तोड़ का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राज्यसभा सीट लेने के लिए बीजेपी सबकुछ कर रही है। बीजेपी हर मामले में जोड़तोड़ का प्रयास करती है। लेकिन, उन्हें वो प्रयास करने दीजिए। इसलिए एक-एक वोट की जरुरत है.इतना ही कांग्रेस के महासचिव Rakesh Singh Yadav ने दावा किया है कि इस घटनाक्रम का असर पार्टी की राज्यसभा सीट पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व, खासकर Rahul Gandhi को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने की सलाह दी है। कांग्रेस नेता Rakesh Singh Yadav ने दावा किया है कि इस घटनाक्रम का असर पार्टी की राज्यसभा सीट पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व, खासकर Rahul Gandhi को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने की सलाह दी है। राकेश सिंह यादव ने कहा कि पार्टी को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और संगठन स्तर पर मजबूत रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो कांग्रेस को राज्यसभा सीट के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। सबसे बड़ी और तीसरी वजह राजनीतिक गणित है। कांग्रेसियों के आरोपों के मुताबिक, बीजेपी की ओर से विधायकों को अगले इलेक्शन की टिकट और अन्य कुछ ऑफर दिए जा रहे हैं। यदि 6 विधायक इधर से उधर हुए तो ये सीट कांग्रेस के हाथ से जा सकती है। फिलहाल इस मामले को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर दोनों ही जगह राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।

चुनाव का ऐलान और सामने आया असम का ओपिनियन पोल, किस पार्टी की बन रही सरकार?

गुवाहाटी पांच राज्यों में चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही पहला ओपिनियन पोल भी आ चुका है। असम के लिए जो ओपिनियन पोल जारी हुआ है, उसमें भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर आ रहा है। मार्टिज-आईएनएस के ओपिनियन पोल में भाजपा को 96 से 98 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है। वहीं, दूसरे नंबर पर कांग्रेस को दिखाया गया है। अनुमान के मुताबिक कांग्रेस को 26 से 28 सीटें मिल सकती हैं। किस पार्टी को कितनी सीटों का अनुमान चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही आए मार्टिज-आईएएनएस के ओपिनियन पोल में भाजपा को 96 से 98, कांग्रेस को 26 से 28, एआईयूडडीएफ को 1 से 5 और अन्य को 1 से 3 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। असम की सभी 126 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में नौ अप्रैल को वोट डाले जायेंगे और मतगणना चार मई को होगी और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिया जायेगा। चुनाव आयोग ने यहां रविवार को संवाददाता सम्मेलन में राज्य के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, अधिसूचना 16 मार्च 2026 को जारी होगी और इसी के साथ नामांकन दाखिल करने का कार्य शुरू हो जाएगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च है और 24 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। नाम वापसी के लिए 26 मार्च तक का समय दिया गया है। आदर्श आचार संहिता लागू इसके साथ ही राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। कुल 126 सीटों में से 09 सीटें अनुसूचित जाति के लिए और 19 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राज्य की वर्तमान विधानसभा का पांच वर्षीय कार्यकाल 21 मई 2021 को प्रारंभ हुआ था, जो आगामी 20 मई 2026 को समाप्त होने जा रहा है। राज्य में कुल 2,35,01,164 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें सामान्य मतदाताओं की संख्या 2,34,40,296 दर्ज की गई है, जबकि सर्विस वोटर्स की संख्या 60,868 है। चुनाव आयोग द्वारा 11 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, मतदान प्रक्रिया में 476 थर्ड जेंडर मतदाता भी अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। कितने युवा मतदाता असम में इस बार 3,82,341 युवा मतदाता (18-19 वर्ष) पहली बार लोकतंत्र के इस पर्व में शामिल होकर अपना पहला वोट डालेंगे। इसके अतिरिक्त, राज्य में 1,59,335 दिव्यांग मतदाता और 85 वर्ष से अधिक आयु के 1,20,538 वरिष्ठ नागरिक पंजीकृत हैं। इन सभी वरिष्ठ मतदाताओं के लिए आयोग ने घर से मतदान करने हेतु वैकल्पिक डाक मतपत्र की विशेष सुविधा सुनिश्चित की है। मतदान की सुगमता के लिए बुनियादी ढांचे में विस्तार करते हुए आयोग ने असम में कुल 28,205 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं। आयोग ने प्रत्येक केंद्र पर मतदाताओं की औसत संख्या लगभग 831 रखी है, ताकि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सुविधाजनक तरीके से संपन्न हो सके।  

गैस संकट के खिलाफ कांग्रेस सड़कों पर, खाली सिलिंडर के साथ किया प्रदर्शन

जयपुर देशभर में लोग एलपीजी गैस सिलिंडर की कमी से परेशान हैं। ईरान–इस्राइल युद्ध के कारण गैस की सप्लाई प्रभावित होने की चर्चा के बीच कई जगह गैस एजेंसियों पर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर राजस्थान में कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। शुक्रवार को कांग्रेस ने पूरे राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। इसी क्रम में जयपुर के चांदपोल इलाके में कांग्रेस कार्यकर्ता इकट्ठा हुए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार का पुतला भी जलाया। साथ ही गैस सिलिंडर की प्रतीकात्मक शवयात्रा भी निकाली गई।  अजमेर में चूल्हा जलाकर जताया विरोध अजमेर में भी रसोई गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के विरोध में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता खाली गैस सिलिंडर ठेले पर रखकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और उन्हें सड़क पर रखकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। वहीं महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर चूल्हा जलाकर प्रतीकात्मक रूप से खाना बनाते हुए महंगाई और गैस सिलिंडर की किल्लत के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से गैस सिलिंडर की कीमतों में कमी करने और आम लोगों को राहत देने की मांग की। इस मौके पर राजस्थान सरकार के पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है और आम लोगों का जीवन कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को गैस सिलिंडर लेने के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से थाली और ताली बजाने की अपील की थी, लेकिन अब जनता को गैस सिलिंडर के लिए फिर से लाइनों में लगना पड़ रहा है। यह सरकार की नीतियों की विफलता को दिखाता है। वहीं किशनगढ़ से कांग्रेस विधायक डॉ. विकास चौधरी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महंगाई कम करने का वादा करके सत्ता में आए थे, लेकिन इसके बावजूद महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज आम आदमी की हालत बहुत खराब हो चुकी है और घरेलू गैस सिलिंडर के लिए भी लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के पास महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं है, जिससे आम जनता को परेशानी हो रही है।   श्रीगंगानगर में भी जोरदार विरोध श्रीगंगानगर में भी गैस सिलिंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों के विरोध में कांग्रेस ने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया। एनएसयूआई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका। प्रदर्शन के दौरान महिलाएं और युवा कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रूपिंदर सिंह कुन्नर ने कहा कि 56 इंच की छाती वाले प्रधानमंत्री ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं। इसका नतीजा अब देश में गैस सिलिंडर की भारी कमी के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि इस समय शादी-ब्याह का सीजन चल रहा है, लेकिन लोग गैस सिलिंडर के लिए परेशान हैं और गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण देशभर में यह संकट पैदा हुआ है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह प्रदर्शन सरकार को चेतावनी देने के लिए किया गया है। अगर जल्द ही राजस्थान और देश में गैस की कीमतों और किल्लत को कम नहीं किया गया तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कलेक्ट्रेट के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इस मौके पर एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष ईशानवीर सिंह मान, पूर्व विधायक राजकुमार, सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गेदर सहित कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।  

कांग्रेस का विरोध अब देश के खिलाफ दिखने लगा : संजय सरावगी का हमला

पटना,  बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने एसआईआर को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बिहार में जिस तरह चुनाव प्रचार कर रहे थे और बार-बार उन्हीं मुद्दों को उठा रहे थे लेकिन आम जनता ने इसे नकार दिया और कांग्रेस का सफाया कर दिया। उनके पास विधायकों की संख्या नाममात्र की है। संजय सरावगी ने कहा कि पूरे देश में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। बिहार में भी एसआईआर हुआ और एक भी व्यक्ति न्यायालय में नहीं गया। इन बातों का जनता पर असर नहीं होता। मुद्दों को भटकाने वाली बातों को आम जनता नकार चुकी है। कांग्रेस का तो चाल, चरित्र और चेहरा उजागर हो चुका है। कांग्रेस भाजपा का विरोध करते-करते देश का विरोध करने लगी है। देश की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। बता दें कि देश के कई राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है और विपक्ष एसआईआर का विरोध कर रहा है। बंगाल में ममता बनर्जी एसआईआर के बाद मतदाताओं के नाम कटने का आरोप लगा रही हैं और धरना प्रदर्शन कर रही हैं। 10 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में एसआईआर को धोखाधड़ी करार दिया था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने एसआईआर को लेकर राज्यसभा में कहा था कि एसआईआर के नाम पर हर जगह धोखाधड़ी हो रही है। यह सबसे बुरा है और सारी कवायद चुनाव जीतने के लिए हो रही है। इस तरह की कवायद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कर्नाटक में हो रही है। हर जगह और हर राज्य में धोखाधड़ी ही धोखाधड़ी है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 9 मार्च को आरोप लगाया था कि राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में बदलाव का मकसद आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाना है। ममता बनर्जी ने धरनास्थल से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर चुनौती देते हुए कहा था कि अगर भाजपा को चुनाव आयोग का समर्थन भी मिल जाए, तो भी वह चुनाव नहीं जीत पाएगी। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अपने अधिकार छीनने वालों को करारा जवाब देगी।  

कांग्रेस ने याद दिलाया- इराक की भारत ने की थी 100 करोड़ की मदद

नई दिल्ली. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों की ओर से मांग की जा रही है कि सरकार को ईरान के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। इन दलों का कहना है कि ईरान पर हमला और अयातुल्लाह खामेनेई के कत्ल पर भारत सरकार को सख्त रुख दिखाना चाहिए। ईरान के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए। इसी को लेकर चर्चा की मांग भी विपक्ष कर रहा है। इस बीच कांग्रेस ने 2003 में संसद में लाए गए प्रस्ताव की याद दिलाई है, जब अमेरिका ने ही इराक पर हमला किया था। तब इराक को 100 करोड़ रुपये की मदद की गई थी। इसमें नकद राशि और राशन आदि शामिल था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उस प्रस्ताव की प्रति को एक्स पर शेयर किया है। जयराम रमेश ने जो प्रस्ताव शेयर किया, उसमें लिखा था कि हम इराक के खिलाफ अमेरिका की लीडरशिप में हुए हमले की निंदा करते हैं। इराक में सत्ता परिवर्तन के लिए की गई सैनिक कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है। युद्ध के फलस्वरूप में इराक के मासूम लोगों, महिलाओं और बच्चों की वेदनाएं एक गंभीर मानवीय मसला है। यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विशेष मंजूरी के बिना की गई है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है। अत: यह सदन इराक के लोगों के लिए गंभीर संताप और गहन सहानुभूति प्रकट करता है। इसी प्रस्ताव में आगे जानकारी दी गई थी कि नकद और सामग्री के माध्यम से 100 करोड़ रुपये की सहायता देने का फैसला लिया गया है। इसमें विश्व खाद्य कार्यक्रम के लिए 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं देना भी शामिल है। यह भी हम विश्वास दिलाते हैं कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। राज्यसभा के प्रस्ताव की प्रति भी जयराम रमेश ने शेयर की है। इसमें लिखा था कि यह सदन तत्काल युद्ध समाप्ति का आह्वान करता है और गठबंधन सेनाओं की शीघ्र वापसी की मांग करता है। यह सदन संयुक्त राष्ट्र से इस बात की भी मांग करता है कि वह इराक की प्रभुसत्ता की रक्षा करे। यह सुनिश्चित करे कि इराक का पुनर्निर्माण संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में हो। ईरानी प्रतिनिधि से मिलकर आए थे कांग्रेस के कई नेता गौरतलब है कि ईरान के मसले पर कांग्रेस नेता ऐक्टिव हैं। सांसद इमरान मसूद ने दिल्ली में स्थित ईरान के शीर्ष नेता के प्रतिनिधि से मुलाकात की थी और संवेदनाएं प्रकट की थीं। इसके अलावा ईरानी दूतावास में भी एक श्रद्धांजलि आयोजन हुआ था। इसमें भी कई नेता पहुंचे थे। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा के सांसद कपिल सिब्बल भी इस आयोजन में गए थे।

मध्यप्रदेश में हनी ट्रैप का मामला, कांग्रेस नेत्री गिरफ्तार, राजस्थान के व्यापारी से लूटा 8 तोला सोना

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में हनी ट्रैप के जरिए कोटा के ऑटो पार्ट्स व्यापारी और रामलीला के कलाकार भरत भूटानी से 12 लाख के सोने के गहने लूटने के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को शुक्रवार की रात गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान कांग्रेस नेत्री रीता आर्य, उनके पति राजेंद्र बुंदेला, बेटी निधि आर्य और दामाद विशाल आर्य के रूप में हुई है। पुलिस ने चारों को कांच मिल क्षेत्र से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार राजस्थान निवासी भरत भूटानी को गांधीनगर स्थित आई-82 स्थित घर पर बुलाया गया था। यहां रीता आर्य ने अपने पति, बेटी और दामाद के साथ मिलकर पहले से उसे फंसाने की योजना बना रखी थी। पुलिस पूछताछ में रीता आर्य ने बताया कि भरत भूटानी से उनकी दोस्ती इंदौर निवासी सहेली नेहा ने करवाई थी। भरत इन दिनों रामलीला में काम करने के लिए ग्वालियर आए हुए थे। मेहमान की तरह स्वागत कर बनाया था शिकार भरत भूटानी रीता के घर पहुंचे, तो रीता और उनकी बेटी निधि ने उन्हें मेहमान की तरह बैठाया और बाद में रीता उन्हें कमरे में ले गई। इसी दौरान रसोई में छिपे राजेंद्र और विशाल मुंह पर कपड़ा बांधकर कमरे में घुस आए। दोनों ने मोबाइल में रिकॉर्डिंग चालू कर भरत पर आरोप लगाए और उसे जेल भेजने की धमकी दी। इसके बाद उन्होंने भरत के हाथ से अंगूठी, कड़ा और गले से सोने की चेन छीन ली। ग्वालियर में पति, बेटी और दामाद के साथ कांग्रेस नेत्री गिरफ्तार, हनी ट्रैप के जरिए लूटा था 8 लाख का सोना लूटा था 12 लाख रुपए की कीमत का 8 तोला सोना मामले की जानकारी देते हुए पड़ाव थाना पर प्रभारी शैलेन्द्र भार्गव ने कहा है कि कोटा के ऑटो पार्ट्स कारोबारी को हनीट्रैप में फंसाकर उससे 12 लाख रुपए की कीमत के 8 तोला सोने के जेवर ठगने वाली गैंग को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गैंग की मास्टरमाइंड एक महिला बताई जा रही है। जिसके साथ उसका पति, बेटी और दामाद भी इस वारदात में शामिल थे। वहीं पुलिस ने चारों को दबोचकर उनके पास से कारोबारी से ठगे गए सोने के जेवर भी बरामद कर लिए हैं और अब आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। व्यापारी ने पुलिस को बताई थी लूट की कहानी भार्गव ने आगे बताया कि वारदात के बाद कारोबारी भरत भूटानी ने शुरुआत में लूट की कहानी बताई थी, लेकिन जांच के दौरान जब आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई, तो उसमें राजेंद्र और विशाल चेहरा छिपाकर भागते दिखाई दिए। कुछ देर बाद रीता और निधि भी उनके ठिकाने पर पहुंचती नजर आईं। जिसके बाद पुलिस ने लोकेशन के आधार पर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से व्यापारी भरत भूटानी से लूटे गए सोने के गहने भी बरामद कर लिए हैं। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

कांग्रेस का बड़ा प्लान: 2028 चुनाव में नए चेहरों को मिलेगा मौका, नेता के बयान से बढ़ी हलचल

सरगुजा छत्तीसगढ़ की राजनीति में कभी “जय-वीरू” के नाम से चर्चित भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव की जोड़ी अब पुराने अंदाज में शायद नजर न आए। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने इशारों-इशारों में कहा है कि राजनीति की नई फिल्म में नए किरदार भी सामने आ सकते हैं। दरअसल 2018 के विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव की जोड़ी को कांग्रेस की जीत का बड़ा कारण माना गया था। उस समय दोनों नेताओं को “जय-वीरू” की जोड़ी कहा जाता था। अब सिंहदेव ने इस पर बयान देते हुए कहा कि एक फिल्म हिट होने के बाद उसी तरह की फिल्म बार-बार नहीं बनती। जैसे शोले एक सुपरहिट फिल्म थी, लेकिन उसकी कई सीक्वल नहीं बनीं। आगे नई फिल्म बनेगी, जिसमें पुराने कलाकार भी हो सकते हैं और नए चेहरे भी नजर आ सकते हैं। सिंहदेव ने यह भी कहा कि उस समय सिर्फ दो नाम ज्यादा चर्चा में थे क्योंकि भूपेश बघेल पीसीसी अध्यक्ष थे और वे नेता प्रतिपक्ष थे, लेकिन असल में पूरी टीम ने मिलकर काम किया था। सिंहदेव के इस बयान को कांग्रेस के भीतर बदलते सियासी समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह किसी मतभेद की वजह से नहीं बल्कि समय और परिस्थितियों के बदलने की वजह से है। अब 2028 के चुनावी मैदान में कांग्रेस की “नई फिल्म” में मुख्य किरदार कौन निभाएगा, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।