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पश्चिम बंगाल की राजनीति में गरमाए बयान, शुभेंदु अधिकारी ने सरकार गठन को लेकर कही बड़ी बात

कोलकाता मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार राष्ट्रवादियों की सरकार होगी, और यह भारतीय परंपरा और संस्कृति को बनाए रखेगी तथा राज्य की व्यवस्था को बदलने के लिए काम करेगी। उत्तर बंगाल के लोगों द्वारा भगवा पार्टी को लगातार दिए जा रहे समर्थन के लिए भाजपा की ओर से आभार व्यक्त करते हुए, अधिकारी ने मुख्यमंत्री के तौर पर इस क्षेत्र की अपनी पहली यात्रा के दौरान कहा कि नई बनी सरकार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के घोषणापत्र में किए गए सभी वादों को एक तय समय-सीमा के भीतर पूरा करेगी। अधिकारी ने कहा, "यह लोगों की सरकार होगी, राष्ट्रवादियों की सरकार होगी और यह भारतीय परंपरा और संस्कृति को बनाए रखेगी।" मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी एक सपनों की सरकार होगी जो लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी। हम सिर्फ सत्ताधारी पार्टी के झंडे का रंग या सत्ता में बैठे लोगों को बदलना नहीं चाहते। हम तो व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं।" हर महीने मिलेंगे तीन हजार रुपये उत्तरी बंगाल के सबसे बड़े शहर सिलीगुड़ी में भाजपा दफ्तर में बोलते हुए, अधिकारी ने कहा कि पार्टी ने अपने 'संकल्प पत्र' (चुनावी घोषणापत्र) में जो घोषणाएं की थीं, उन्हें पूरा किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और पार्टी के बीच तालमेल बना रहेगा। नई सरकार ने 'अन्नपूर्णा योजना' शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत, पिछली ममता बनर्जी सरकार की 'लक्ष्मी भंडार' योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली 1,500 रुपये की मासिक आर्थिक मदद को बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया जाएगा। बसों में सफर मुफ्त इसके अलावा, सरकार ने महिलाओं के लिए सरकारी बसों में सफर मुफ्त कर दिया है और राज्य में 'आयुष्मान भारत योजना' शुरू करने की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि बदली हुई स्थिति में, अब 'सिंडिकेट', 'कट मनी कल्चर' या 'माफिया राज' जैसी कोई चीज नहीं होगी, और पश्चिम बंगाल में किसी भी तरह की राष्ट्र-विरोधी गतिविधि नहीं होगी। 'सभी वादों तय समय-सीमा के भीतर पूरे होंगे' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार कहा था कि TMC शासन के दौरान पश्चिम बंगाल में 'सिंडिकेट राज', 'कट मनी कल्चर' और 'माफिया राज' का बोलबाला था, और उन्होंने राज्य में कानून का राज स्थापित करने का संकल्प लिया था। अधिकारी ने कहा कि नई भाजपा सरकार जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणबानंद के सपनों को पूरा करना सुनिश्चित करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में किए गए सभी वादों को एक तय समय-सीमा के भीतर पूरा करेगी।

लेनिन की मूर्ति हुई क्षतिग्रस्त, TMC कार्यालय पर कांग्रेस का अधिकार—बंगाल में बढ़ा उबाल

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज इलाके में लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने की घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, कुछ लोगों ने मौके पर पहुंचकर मूर्ति को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान आरोपियों ने नारेबाजी भी की। पुलिस के अनुसार आरोपियों की अभी पहचान नहीं हो सकती है। सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है। रात के अंधेरे में तोड़फोड़ यह घटना श्रीपत सिंह कॉलेज के सामने स्थित जियागंज-अजीमगंज नगर पालिका के वार्ड नंबर 2 में मंगलवार रात करीब 10:30 बजे हुई। इस घटना का एक वीडियो क्लिप सामने आया है, जिसमें कुछ लोग मूर्ति को नुकसान पहुंचाते हुए नजर आ रहे हैं, वीडियो में लोग जय श्री राम के नारे लगाते हुए भी दिख रहे हैं। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार, जब पुलिस को घटना की सूचना मिली तो मौके पर जियागंज थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उससे पहले ही घटना में शामिल लोग वहां से फरार हो गए। पुलिस ने बताया कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। इसके लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है। दोषियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने आम लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। तोड़ी गई लेनिन की प्रतिमा पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद के जियागंज में एक घटना सामने आई है, जहां लेनिन की दशकों पुरानी प्रतिमा को तोड़ दिया गया. महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा को गिराया और उसकी जगह दूसरी प्रतिमा लगाने की योजना बनाई. तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि इस तोड़फोड़ में बीजेपी समर्थकों का हाथ है।  वहीं, बीजेपी का कहना है कि इस घटना में उसके कार्यकर्ताओं या समर्थकों की कोई भूमिका नहीं थी. पार्टी का दावा है कि चुनाव के बाद के जश्न के दौरान वहां अलग-अलग समूहों के लोग मौजूद थे, और हो सकता है कि किसी अज्ञात शख्स ने यह हरकत की हो।  कांग्रेस ने नदिया में टीएमसी कार्यालय परकब्ज़ा कर लिया है. यह घटना नदिया जिले के करीमपुर 2 ब्लॉक की नतिडांगा ग्राम पंचायत में हुई. कांग्रेस का कहना है कि यह दफ्तर पहले उसी का था, टीएमसी ने इस पर कब्जा कर लिया था TMC दफ्तर पर बुलडोजर मंगलवार रात को मध्य कोलकाता में उस वक्त तनाव फैल गया, जब बुलडोजरों के साथ आए लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर ऐतिहासिक हॉग मार्केट इलाके के पास तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक दफ़्तर को निशाना बनाया. इस घटना से दुकानदारों में दहशत फैल गई और उन्हें अपनी दुकानें अचानक बंद करनी पड़ीं।  टीएमसी का न्यू मार्केट में यूनियन दफ़्तर लोगों का मुख्य निशाना था और उसे पूरी तरह से ढहा दिया गया. इलाके में हुई तोड़-फोड़ और अफरा-तफरी की तस्वीरें तेज़ी से फैल गईं, जिससे स्थानीय दुकानदारों की चिंता और बढ़ गई. कोलकाता के सबसे व्यस्त कारोबारी केंद्रों में से एक में जब हालात बिगड़ने लगे, तो घबराए हुए व्यापारियों ने अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए और वहां से भाग निकले।  न्यू मार्केट इलाके में हिंसा और बुलडोजर एक्शन को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्र ने सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "कोलकाता का ऐतिहासिक न्यू मार्केट. बंगाली परिवर्तन का आनंद ले रहे हैं।  TMC के सीनियर लीडर डेरेक ओ'ब्रायन ने यह भी आरोप लगाया कि यह तोड़फोड़ सरकारी निगरानी में की गई. उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मध्य कोलकाता में न्यू मार्केट के पास पुलिस की अनुमति से जीत के जश्न के हिस्से के तौर पर मीट की दुकानों को गिराने के लिए एक बुलडोजर लाया गया. CAPF के जवान आस-पास खड़े थे.” उन्होंने आगे कहा, “यही है बीजेपी. दुनिया इन तस्वीरों को देखे।  टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने लिखा, "जगतबल्लभपुर में TMC पार्टी के दफ़्तर को कथित तौर पर बीजेपी के उपद्रवियों ने आग लगा दी है. यह उस स्थिति का एक चिंताजनक आईना है, जिसे झेलने के लिए अब बंगाल के लोग मजबूर हैं।  'बीजेपी का परिवर्तन बुलडोजर के साथ…' ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को बीजेपी पर मध्य कोलकाता में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया. पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों ने न्यू मार्केट इलाके के पास दुकानों और एक पार्टी दफ़्तर में तोड़फोड़ की।  सोशल मीडिया पर जारी एक कड़े बयान में टीएमसी ने दावा किया कि 'बीजेपी समर्थकों की भीड़' ने जमकर उत्पात मचाया. टीएमसी ने इस घटना को 'खुली गुंडागर्दी और अराजकता' करार दिया है. पार्टी ने आरोप लगाया कि इस हिंसा में स्थानीय कारोबारियों और तृणमूल कांग्रेस के दफ़्तर को निशाना बनाया गया, जिससे व्यापारियों में दहशत फैल गई।  टीएमसी ने आगे आरोप लगाया कि बीजेपी के सीनियर नेता पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई ऐसी हरकतों को बढ़ावा दे रहे हैं. इन नेताओं में नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी शामिल हैं. बढ़ते तनाव पर चेतावनी देते हुए टीएमसी ने कहा कि यह घटना एक बड़े पैटर्न का हिस्सा है, जिसे पार्टी ने 'बुलडोजर की राजनीति' का नाम दिया है।  TMC और BJP वर्कर की हत्या बंगाल में जारी हिंसा में अब तक दो लोगों की मौत का मामला सामने आया है. एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल पुलिस ने बताया कि मंगलवार को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के एक-एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. पुलिस के मुताबिक, मंगलवार को दिन में बीरभूम के नानूर में बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ता अबीर शेख की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई।  वहीं, मंगलवार शाम न्यू टाउन इलाके में जीत के जुलूस के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर पीटे जाने के बाद बीजेपी कार्यकर्ता मधु मंडल की मौत हो गई।  चुनाव आयोग ने दिए कार्रवाई के निर्देश… निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुखों को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद किसी भी किस्म की और किसी के भी हिंसा फैलाने … Read more

योगी की रैलियों में उमड़ी भीड़, बंगाल में जीत का बनता समीकरण

बंगाल भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक में से एक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक प्रसिद्ध कविता है, ‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा.’ उनकी कविता की ये पंक्तियां आज बंगाल में साकार होती दिख रही है. भाजपा के मूल संगठन जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि में अब कमल खिलने जा रहा है. पश्चिम बंगाल में मतगणना जारी है. खबर लिखे जाने तक जो रुझान सामने आए हैं, उनके मुताबक बीजेपी करीब 190 सीटों पर आगे चल रही है. इन नतीजों के पीछे पूरे संगठन की मेहनत है. लेकिन इन सबसे इतर एक फैक्टर है जिसने इन चुनावों में खासा प्रभाव डाला है. विशेषकर जिन सीटों पर सीएम योगी ने प्रचार किया उनमें से अधिकतर सीटों पर भाजपा कब्जा करती दिख रही है. यानी योगी फैक्टर ने अपना जादू चला दिया है. बंगाल चुनाव में उत्तर प्रदेश के नेताओं की महती भूमिका रही है. देशभर में किसी भी राज्य में चुनाव हों उसमें एक जोड़ी हमेशा हिट रही है. वो है मोदी और योगी की जोड़ी. इसी तरह बंगाल के चुनाव में भी उत्तर प्रदेश के प्रमुख चेहरों ने मोर्चा संभाला. जिसमें सबसे पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. उन्होंने लगातार जनसभाएं और रैलियां की. इतना ही नहीं, उन्होंने सीधे जनता से जुड़ने का प्रयास किया. दुकान पर जाकर झालमुड़ी खाना, लोगों के बीच जाना इसका उदाहरण है. जिसने लोगों को प्रभावित किया. वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पार्टी के पक्ष में जमकर माहौल बनाया है. मुख्यमंत्री योगी की डिमांड हर राज्य में रही है. बिहार के चुनाव हों, महाराष्ट्र के चुनाव हों, ओडिशा के चुनाव हों, छत्तीसगढ़ के चुनाव हों, मध्यप्रदेश या राजस्थान के चुनाव हों, हर प्रदेश में सीएम योगी की अपनी फैन फॉलोविंग है. हिंदुत्व की छवि वाले योगी किसी भी क्षेत्र में जाकर वहां की जनता के बीच गहरी छाप छोड़ते हैं. बंगाल में भी इसका असर देखने को मिल रहा है. बंगाल में योगी की सभाओं में जबरदस्त भीड़ देखने को मिली. योगी को सुनने के लिए बड़ा जनसमूह उतरा. कई जगहों पर इतनी भीड़ दिखी कि वहां पैर रखने तक की जगह नहीं थी. कुल मिलाकर योगी ने इस भीड़ को वोट में तब्दील करने का पूरा प्रयास किया. जिसका नतीजा सकारात्मक दिख रहा है. जिन जिन क्षेत्र में योगी ने सभाएं की वहां अधिकतर सीटों पर कमल खिलता दिख रहा है. इन सीटों पर बीजेपी को बढ़त     कल्याणी विधानसभा में भाजपा को बढ़त मिल रही है. यहां अनुपम बिस्वास आगे चल रही हैं.     नंदकुमार सीट में खानरा निर्मल आगे चल रहे हैं.     बागदा विधानसभा में सोमा ठाकुर आगे चल रही हैं.     कटवा में कृष्णा घोष ने बढ़त बनाई हुई है.     माथाभांगा (कूच बिहार) में निशीथ प्रमाणिक जीत की ओर बढ़ रहे हैं.     धूपगुड़ी विधानसभा में नरेश चंद्र राय लीड लिए हुए हैं.     बांकुरा विधानसभा सीट पर नीलाद्री शेखर आगे चल रहे हैं.     कांथी दक्षिण सीट में भी अरुप कुमार दास बढ़त बनाए हुए हैं.     गोपालपुर विधानसभा सीट से तरुणज्योति तिवारी आगे चल रहे हैं.     दम दम विधानसभा सीट से अरिजीत बख्शी बढ़त बनाए हुए हैं.     जोरासांको सीट से विजय ओझा लीड बनाए हुए हैं.     चकदहा विधानसभा में बंकिम चंद्र घोष आगे चल रहे हैं.     उदयनारायणपुर सीट पर प्रभाकर पंडित बढ़त बनाए हुए हैं.     पिंगला विधानसभा में स्वागता मन्ना आगे चल रही हैं.     जॉयपुर सीट से बिस्वजीत महतो बढ़त बनाए हुए हैं.     गारबेटा विधानसभा में पारादीप लोधा जीत की ओर बढ़ रहे हैं.     बाराबनी सीट पर अरिजीत रॉय आगे चल रहे हैं.     रामपुरहाट विधानसभा में ध्रुब साहा बढ़त बनाए हुए हैं.     सोनामुखी विधानसभा में दिबाकर घरामी आगे चल रहे हैं. बता दें कि जिन विधानसभाओं में योगी ने धुंआधार प्रचार किया है उनके आसपास के क्षेत्रों में भी उनका प्रभाव पड़ा है. बिहार में चला था मोदी-योगी का जादू बता दें कि 5 महीने पहले हुए बिहार चुनाव में 202 सीटों के साथ NDA की प्रचंड जीत हुई थी. भाजपा ने अकेले 89 सीटें जीती थीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 रैलियों से NDA को 97 सीटें दिलाई थीं. इसमें 44 नई सीटें थीं. पीएम का स्ट्राइक रेट 80% रहा था. इसी तरह सीएम योगी ने भी 80% स्टाइक रेट के साथ 98 सीटें जितवाई थीं. बिहार में सबसे ज्यादा डिमांड भी सीएम योगी की रैलियों, सभा और रोड शो की रही थी.

निशिकांत दुबे का बड़ा दावा: बंगाल में 1962 में पड़ी थी हिंदू विरोध की नींव

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की दयनीय स्थिति को लेकर कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि आज के पश्चिम बंगाल में 'हिंदू प्रताड़ित करो' और मुस्लिम तुष्टिकरण की नींव 3 मई 1962 को ही रखी गई। सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि 3 मई 1962 से 30 मई 1962 के बीच पश्चिम बंगाल के कई जिलों (मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और कूचबिहार) में हिंदू–मुस्लिम दंगे हुए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और कई लोग शरणार्थी बनने को मजबूर हुए। बीजेपी सांसद के निशाने पर कांग्रेस बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने रविवार सुबह एक्स पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, 'कांग्रेस का काला अध्याय'। बीजेपी नेता ने पोस्ट में आगे लिखा- '3 मई 1962 से लेकर 30 मई 1962 तक पूरा पश्चिम बंगाल हिंदू मुस्लिम दंगे में झुलसता रहा। हजारों हिंदू मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, कूचबिहार में मरते रहे, यही हाल पूर्वी पाकिस्तान/बांग्लादेश के हिंदुओं का हो रहा था। या तो हिंदू मारे गए या भागकर शरणार्थी बने जो ज्यादातर मतुआ यानि अनुसूचित जाति समुदाय के हैं जिन्हें हमारे मोदी सरकार ने नागरिकता दी।' पूर्व पीएम पंडित नेहरू को लेकर बड़ा आरोप निशिकांत दुबे ने आगे लिखा, 'नेहरू जी संसद में संसद के बाहर मुसलमानों का पक्ष लेते रहे। राजागोपालाचारी जी को लिखे पत्रों से कांग्रेस के वोट बैंक की राजनीति का पता चलता है। आज के पश्चिम बंगाल में हिंदू प्रताड़ित करो और मुस्लिम तुष्टिकरण की नींव 3 मई 1962 को ही रखी गई। #CongressDarkHistory'। बीजेपी सांसद ने अपनी पोस्ट के साथ कुछ डॉक्यूमेंट्स भी शेयर किए हैं। पंडित नेहरू के सी. राजगोपालाचारी को लिखे पत्र किए शेयर निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि उस समय के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संसद के भीतर और बाहर मुसलमानों के पक्ष में रुख अपनाया था। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति सी. राजगोपालाचारी को लिखे गए पत्रों का भी हवाला दिया। जवाहर लाल नेहरू की ओर से सी. राजगोपालाचारी को लिखे गए पत्रों को बीजेपी सांसद ने एक्स पर शेयर किया है।

चुनावी शेड्यूल जारी: बंगाल में दो चरण, बाकी चार राज्यों में एक चरण में वोटिंग

नई दिल्ली चुनाव आयोग आगामी विधानसभा चुनावों के लिए आज शाम 4 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है। इस दौरान पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होगी। इन पांच राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई-जून 2026 में समाप्त हो रहा है। पश्चिम बंगाल की विधानसभा 7 मई, तमिलनाडु की 10 मई, असम की 20 मई, केरल की 23 मई और पुडुचेरी की 15 जून 2026 को खत्म होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेंगे। चुनाव आयोग ने इन राज्यों में मतदाता सूची, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य तैयारियों का आकलन पूरा कर लिया है, जिसके बाद यह ऐलान किया जाएगा। यह चुनाव राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इनमें सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, तमिलनाडु में डीएमके, केरल में वाममोर्चा, असम में भाजपा और पुडुचेरी में एनआर कांग्रेस जैसी पार्टियां सत्ता बचाने या हासिल करने की कोशिश करेंगी। चुनाव आयोग ने सभी राज्यों में आचार संहिता लागू होने के साथ ही निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल—इन पांच राज्यों में कुल 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले हैं, जहां 2.19 लाख मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। 25 लाख ईवीएम मशीनों के माध्यम से 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव कराया जा रहा है।’ मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के लिए सूचना है कि पिछले कुछ दिनों में निर्वाचन आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए सभी मतदान वाले राज्यों का दौरा किया। इन दौरों के दौरान आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से मुलाकात की और उनके सुझाव प्राप्त किए। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों, एसपी, आईजी, डीआईजी तथा सभी प्रवर्तन एजेंसियों के नोडल अधिकारियों से भी भेंट की। साथ ही, संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, मुख्य सचिवों तथा डीजीपी के साथ भी बैठकें की गईं।’ चुनाव आयोग ने पहले असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी का दौरा पूरा किया, उसके बाद केरल (6-7 मार्च) और पश्चिम बंगाल (9-10 मार्च) का निरीक्षण किया। इन दौरों में राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रवर्तन एजेंसियों से मुलाकात की गई ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें। कितने चरणों में होगा चुनाव चुनावों की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिससे विकास कार्यों और सरकारी घोषणाओं पर रोक लग जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव एक से अधिक चरणों में हो सकते हैं, खासकर पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य में जहां हिंसा की आशंका रहती है।

ममता बनर्जी बोलीं—बंगाल को टारगेट किया जा रहा, प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप खारिज

कोलकाता पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं है। कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी निजी आयोजकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की थी। इसलिए अगर कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं पर आती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को शनिवार को होने वाले राष्ट्रपति के कार्यक्रम की पूरी जानकारी भी नहीं दी गई थी और न ही सरकार को इस आयोजन में शामिल किया गया था। उनके मुताबिक, जब राज्य सरकार को कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी ही नहीं थी, तो उस पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप लगाना सही नहीं है। सीएम ममता ने यह भी कहा कि गंदगी, ग्रीन रूम की समस्या और महिलाओं के टॉयलेट की कमी जैसी शिकायतें भी आयोजकों और एएआई की जिम्मेदारी हैं। पीएम मोदी के आरोपों पर पलटवार मुख्यमंत्री ने कोलकाता के केंद्रीय धरना स्थल से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी सरकार पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया, जबकि वास्तविकता अलग है। उन्होंने प्रधानमंत्री की एक तस्वीर दिखाते हुए कहा कि तस्वीर में प्रधानमंत्री बैठे हैं और राष्ट्रपति खड़ी हैं। सीएम ममता ने कहा कि हम कभी ऐसा नहीं करते। यह भाजपा की संस्कृति है, हम कभी राष्ट्रपति का अपमान नहीं करते। संविधान का पूरा सम्मान करती हैं बंगाल सरकार- ममता ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार राष्ट्रपति के पद और संविधान का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और राज्य सरकार हमेशा उसकी गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहती है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति का सम्मान हर सरकारी की जिम्मेदारी- ममता उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं ताकि राज्य सरकार की छवि खराब की जा सके। ममता बनर्जी ने दोहराया कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपति के दौरे के दौरान अपनी तरफ से सभी जरूरी सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और संविधान का सम्मान करना हर सरकार और नागरिक की जिम्मेदारी है, और पश्चिम बंगाल सरकार इस जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाती है। लोगों के अधिकार के लिए धरना पर बैठी हूं- ममता ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब ने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए राष्ट्रपति का बैगडोगरा हवाई अड्डे पर स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं धरना पर बैठी हूं ताकि लोगों के अधिकार सुरक्षित रहें। मैं इसे कैसे छोड़ सकती हूं? उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने दोहराया कि राज्य सरकार हमेशा राष्ट्रपति और संविधान का सम्मान करती है और कार्यक्रम में किसी भी तरह की अव्यवस्था के लिए इसे जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। क्या है पूरा मामला, समझिए गौरतलब है कि बंगाल की राजनीति में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोपों के मामले में सियासत सातवें आसमान पर पहुंच गई है। इसकी शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति मुर्मू ने शनिवार को दार्जिलिंग में 9वें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन के आयोजन को लेकर असंतोष व्यक्त किया था और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति पर टिप्पणी की थी। इसके बाद क्या था, भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप लगाया और खूब बयानबाजी की। दूसरी ओर जबकि टीएमसी ने प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप को खारिज किया है।

बंगाल में वोटर लिस्ट पर संकट, मुस्लिम बहुल जिलों में नाम कटने का खतरा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। राज्य में शनिवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने वाली है, लेकिन करीब 60,06,675 मतदाताओं के नाम पर अभी भी असमंजस के बादल छाए हुए हैं। ये कुल मतदाताओं का लगभग 8.5% हिस्सा हैं, जिनकी पात्रता की समीक्षा अब निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के बजाय सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारी कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग के वैधानिक अधिकारियों (EROs और AEROs) ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि उन्होंने पूरी सावधानी से दस्तावेजों की जांच कर लाखों नामों को मंजूरी दे दी थी। हालांकि आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर्स द्वारा विसंगतियां बताए जाने के बाद इन स्वीकृत नामों को सिस्टम से रिवर्स कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि सुनवाई की अंतिम तिथि 14 फरवरी तक यह संख्या अचानक कुछ लाख से बढ़कर 60 लाख के पार पहुंच गई। एक अधिकारी ने बताया कि 11 फरवरी के बाद से माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने उन मामलों को भी वापस भेजना शुरू कर दिया जिन्हें पहले हरी झंडी मिल चुकी थी। इसमें एक सेवारत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। मुस्लिम बहुल जिलों में सबसे ज्यादा मामले लंबित आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मतदाता सूची से नाम कटने या समीक्षा के दायरे में आने का सबसे ज्यादा असर अल्पसंख्यक बहुल जिलों में दिख रहा है। मुर्शिदाबाद में 11 लाख, मालदा में 8.28 लाख, दक्षिण 24 परगना में 5.22 लाख, उत्तर 24 परगना में 5 लाख, झारग्राम में 6,682 और कालिम्पोंग में 6,790 मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के 530 न्यायिक अधिकारी इस सप्ताह से इन 60 लाख मतदाताओं के भाग्य का फैसला कर रहे हैं। जब तक ये अधिकारी नामों को मंजूरी नहीं देते, ये मतदाता आगामी विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे। अंतिम सूची में इनके नाम के आगे निर्णय के अधीन लिखा होगा, जिसे न्यायिक मंजूरी मिलने के बाद ही हटाया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में करीब 8,100 सूक्ष्म-प्रेक्षकों की नियुक्ति की थी, जो देश के किसी अन्य राज्य में नहीं किया गया। तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि इन प्रेक्षकों ने वैधानिक अधिकारियों (EROs) के अधिकारों का अतिक्रमण किया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के अधिकारियों का तर्क है कि दस्तावेजों में भारी अनियमितताएं पाई गईं। आरोप है कि कई मामलों में AI-जनरेटेड वोटर आईडी और अवैध दस्तावेज अपलोड किए गए थे। एक रोल ऑब्जर्वर ने बताया कि पुरुषों के आवासीय प्रमाण के रूप में ICDS प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज दिए गए थे। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्थिति को अत्यंत अनिश्चित बताया है। उन्होंने कहा कि अदालती हस्तक्षेप और बार-बार की अपीलों के कारण न्यायिक अधिकारियों द्वारा संशोधन की यह अनूठी मिसाल बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की पात्रता पर सवाल उठना न केवल प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है, बल्कि यह चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करता है। यदि इन 60 लाख लोगों में से एक बड़ा हिस्सा वोट देने से वंचित रह जाता है तो इसके चुनावी परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।

NDA की बड़ी जीत के बाद सीएम साय का हमला: पश्चिम बंगाल की जनता बदलाव की ओर

रायपुर बस्तर दौरे पर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिहार चुनाव के परिणाम को लेकर कहा कि जनता ने पीएम मोदी पर भरोसा जताया है. बिहार में एनडीए की बड़ी जीत हुई है. पहले बिहार को कुशासन और जंगलराज से जोड़कर देखा जाता था. लेकिन अब एनडीए सरकार में सुशासन और विकास हो रहा है. उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में भी जंगलराज है, वहां की जनता भी उससे छुटकारा चाहती है. धान खरीदी पर कांग्रेस के आरोप पर सीएम साय का पलटवार धान खरीदी को लेकर सीएम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष मुद्दाविहीन है, हार से बौखलाए हुए हैं. पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने वहां की कमान संभाली थी, लेकिन उनके पास कुछ नहीं है, इसलिए कुछ भी बोल रहे हैं. पूरे प्रदेश में आज से धान खरीदी की भव्य शुरुआत हो रही है. जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में सीएम होंगे शामिल बस्तर के जगदलपुर दौरे को लेकर सीएम साय ने जानकारी दी और कहा कि आज 15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर प्रदेशभर में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जा रहा है. सीएम ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन किया. उन्होने कहब कि इसी शुभ दिन पर धान खरीदी की भी भव्य शुरुआत हो रही है.

कल से देशभर में SIR की शुरुआत, 12 राज्यों की सरकारें विरोध के मोर्चे पर

नई दिल्ली छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों में 4 नवंबर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम शुरू हो रहा है। हालांकि पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक चुनाव आयोग को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके समेत कई प्रमुख विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। ममता बनर्जी मार्च निकालेंगी तो डीएमके ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। बता दें कि चुनाव आयोग ने इसी साल बिहार में इस प्रक्रिया को किया और अब 12 राज्यों में की जा रही है। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके ने SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इसे लेकर अन्य पार्टियों के साथ बैठक भी की। उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल पार्टियों ने एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का प्रस्ताव पारित किया है। तमिलनाडु में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। उनकी मांग है कि ये प्रक्रिया चुनाव बाद हो, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे नहीं माना। SIR के विरोध में हुई बैठक में डीएमके के अलावा कांग्रेस, मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (MDMK), विदुथलाई चिरुथिगल काची, वामपंथी दलों, कमल हासन के नेतृत्व वाली मक्कल नीधि मय्यम, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, कोंगुनाडु मक्कल देसिया काची और तमिलागा वाझ्वुरिमई काची सहित सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल सहयोगियों ने हिस्सा लिया। देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कषगम (DMDK) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) तथा डीएमके के वैचारिक मूल संगठन द्रविड़ार कषगम सहित मित्र दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए। इधर पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी इसके विरोध में है। इसके खिलाफ 4 नवंबर को कोलकाता में टीएमसी मार्च भी निकाल रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मार्च का नेतृत्व करेंगी। इसके विरोध में टीएमसी ने कहा कि तथाकथित विशेष गहन पुनरीक्षण वास्तव में खामोशी से की जाने वाली धांधली है। हम यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। केरल की लेफ्ट सरकार ने भी किया विरोध वहीं केरल की लेफ्ट सरकार भी इसके विरोध में है। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने निर्वाचन आयोग से उसके फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया है। इस पर गठबंधन के सहयोगियों की बैठक हुई। गठबंधन का कहना है कि ऐसे समय में जब स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राज्य में यह संशोधन लागू नहीं किया जाना चाहिए। ये समझना चाहिए कि एसआईआर लोगों को कैसे प्रभावित करता है. आयोग को इस मामले में समीक्षा करनी चाहिए। कांग्रेस कर रही विरोध कांग्रेस शुरू से ही इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और बीजेपी पर हमलावर है। राहुल गांधी वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने बिहार में इसके विरोध में वोटर अधिकार यात्रा भी निकाली। उनका कहना है कि चुनाव आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि इसके माध्यम से विपक्षी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश रची जा रही है। इसके साथ हो जातीय जनगणना: सपा उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने इसे लेकर एक मांग की है। सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि ये बड़ी एक्सरसाइज है। हम चाहते हैं कि SIR में एक कॉलम और बढ़ाया जाए जिससे जातीय जनगणना करी जा सके। प्रथम चरण की प्रक्रिया     जिनका नाम 2003 के एसआईआर नाम है उन्हें दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है     केवल 5-6 प्रतिशत मतदाताओं को ही दस्तावेज देने की होगी जरूरत     असुविधा होने पर मतदाता हेल्पलाइन नंबर 1950     बीएलओ कॉल रिक्वेस्ट के माध्यम से ले सकते हैं मदद     मुद्रण प्रशिक्षण कार्य दिनांक 28.10.2025 से 03.11.2025 तक     घर घर गणना चरण अवधि (घर-घर जाकर सत्यापन) कार्य दिनांक 04.11.2025 से 04.12.2025 तक     मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन दिनांक 09.12.2025 होगा     दावे और आपत्ति की अवधि दिनांक 09.12.2025 से 08.01.2026 तक रहेगा     नोटिस चरण सुनवाई और सत्यापन दिनांक 09.12.2025 से 31.01.2026     मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन दिनांक 07.02.2026 होगा     छत्तीसगढ़ में विगत एसआईआर की मतदाता सूची वर्ष 2003 को आधार मानकर जो मिलान किया गयाहै     बीएलओ द्वारा वर्तमान में केवल अपने मतदान केंद्र के मतदाताओं का मिलान किया गया है     जो कि 71 प्रतिशत के करीब है     मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने बताया     2003 के बाद से आज पर्यंत कई मतदाता अन्यत्र शिफ्ट हुए हैं     मतदान केन्द्रों का परिसीमन भी हुआ है     एन्यूमरेशन फेज में बीएलओ द्वारा मतदाताओं के घर-घर सर्वे के दौरान यह मिलान प्रतिशत 10-15 प्रतिशत और बढ़ जाएगा     मतदाता सूची में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं हैं     वर्ष 2003 के एसआईआर के बाद विवाहित महिलाएं अपने तत्कालीन मतदान केंद्र से अन्यत्र स्थानांतरित हुई हैं     बीएलओ द्वारा घर-घर एन्यूमरेशन फेज में 15 से 20 प्रतिशत और महिला मतदाताओं का मिलान किया जा सकेगा     इस प्रकार मिलान का कुल प्रतिशत 71 प्रतिशत से बढ़कर 94-95 प्रतिशत हो जाएगा     केवल शेष बचे मतदाताओं से ही दस्तावेज लेने की आवश्यकता होगी     भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के दौरान विभिन्न नवाचारों के माध्यम से मतदाताओं को सुविधा प्रदान करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है     किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर मतदाता हेल्पलाइन नंबर 1950     बीएलओ कॉल रिक्वेस्ट (BLO Call Request) के माध्यम से मतदाता सूची से संबंधित सहायता प्राप्त कर सकते हैं     सीईओ यशवंत कुमार ने राजनीतिक दलों से किया आग्रह     पुनरीक्षण के दौरान अपने बूथ स्तरीय एजेंटों (BLAs) के माध्यम से निर्वाचन आयोग के कर्मचारियों को पूरा सहयोग दें     ताकि छूटे हुए पात्र नागरिकों के नाम सूची में जोड़े जा सकें और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें 7 फरवरी को आएगी अंतिम मतदाता सूची गणना के बाद 9 दिसंबर को मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी किया जाएगा। इसी दिन से दावे और आपत्ति दर्ज कराई जा सकती हैं, जो कि 8 जनवरी 2026 तक चलेंगी. 9 दिसंबर से 31 जनवरी 2026 तक नोटिस फेज रहेगा। जिसमें सुनवाई और वैरिफिकेशन का काम किया जाएगा। इन सबके बाद 7 फरवरी को 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी। दूसरे चरण में जिन-जिन राज्यों में एसआईार की प्रक्रिया होनी … Read more

HAM प्रत्याशी पर हमले की निंदा करते हुए मांझी बोले—RJD फैला रही है अराजकता

गया बिहार के गया जिले के टिकारी विधानसभा में बुधवार को प्रचार के लिए पहुंचे हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रत्याशी एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. अनिल कुमार पर असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया है, जिसमें उन्हें गंभीर रूप से चोट लगी। वहीं, केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने पार्टी के उम्मीदवार अनिल कुमार पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। जीतन राम मांझी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा, "माननीय विधायक अनिल कुमार जी के ऊपर हुआ हमला विपक्ष के कायरता और हताशा का जीता जागता उदाहरण है। राजद के लोग बिहार को बंगाल बनाने की कोशिश कर रहें है…अनिल जी के उपर चले हर पत्थर का जवाब बिहार की जनता वोट के चोट से देगी।" इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी पर 'नचनिया' शब्द का इस्तेमाल करने पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, "राहुल गांधी बचकाना व्यवहार कर रहे हैं। उनमें कोई गंभीरता नहीं है…छठ पवित्रता और आध्यात्मिकता का त्योहार है…छठ पूजा करने वालों के लिए 'नचनिया' शब्द का इस्तेमाल कर वह अपने पूर्वजों का भी अपमान कर रहे हैं। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए दो चरण में 06 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान कराया जाना है। 14 नवंबर को मतगणना होगी और चुनाव की प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी हो जायेगी। बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है।