samacharsecretary.com

13 जिलों में सैलाब का तांडव, 29 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में; तस्वीरों में देखिए बिहार का हाल

 पटना बिहार में बाढ़ का दायरा लगातार फैलता जा रहा है. राज्य के 13 जिलों में करीब 29 लाख 13 हजार से ज्यादा आबादी सैलाब के बीच घिरी हुई है. पानी ने कहीं गांवों का संपर्क पूरी तरह काट दिया है, तो कहीं सड़कें डूबने से आवाजाही ठप हो चुकी है. कई इलाकों में लोगों के घरों और आंगनों तक दरिया बह रहा है. प्रशासन एक तरफ सुरक्षित ठिकानों तक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ बीमार लोगों तक इलाज पहुंचाने की मशक्कत चल रही है।  यह विकराल संकट पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल तक फैला हुआ है. इन जिलों के 77 प्रखंडों (ब्लॉक) की 438 ग्राम पंचायतों में जिंदगी ठहर सी गई है. हालांकि प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा के धीमे पड़ने से कुछ इलाकों में जलस्तर घटने की हल्की उम्मीद भी जगी है।  पटना में गंगा का पानी घटा, कई नदियां अब भी उफान पर पटना में गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर के रिकॉर्ड स्तर से घटकर 50.40 मीटर पर आ गया है. इलाहाबाद से वाराणसी तक गंगा के जलस्तर में आई गिरावट से पटना में भी आगे राहत की उम्मीद है. हालांकि पुनपुन नदी अभी खतरे के निशान से 2.93 मीटर ऊपर बह रही है।  कटिहार में गंगा और कोसी के संगम पर बना दबाव 35 पंचायतों के करीब साढ़े तीन लाख लोगों को घेरे हुए है. खगड़िया के चौथम प्रखंड समेत दियारा इलाकों में बागमती का पानी नई मुसीबतें खड़ी कर रहा है. उधर गोपालगंज में गंडक बैराज से सवा लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में निगरानी कड़ी कर दी गई है।  भागलपुर में ढाई फीट पानी, मुंगेर में घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी भागलपुर में नेशनल हाईवे-80 पर करीब ढाई फीट पानी बह रहा है, जिसके चलते गाड़ियों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं. अकेले इस जिले में सवा दो लाख से ज्यादा लोग सैलाब से घिरे हैं. यही हाल मुंगेर के बरियारपुर का भी है, जहां गंगा खतरे के निशान से सवा मीटर ऊपर बहने से सैकड़ों घरों में दरिया समा चुका है. वहीं, सीवान के दरौली में भी सरयू नदी लाल निशान से आधा मीटर ऊपर बहकर निचले इलाकों को डुबो रही है।  पानी का यह दबाव भोजपुर के आरा तक पहुंच चुका है. बड़हरा इलाके में गंगा का फैलाव बढ़ते ही हालात बेकाबू हो गए, जहां धमार गांव में डूबने से 32 साल के एक युवक की जान चली गई. इसके अलावा, सारण में माही नदी का जमींदारी बांध टूटने से आफत और बढ़ गई है. तेज बहाव के साथ पानी सीधा रिहायशी बस्तियों की ओर रुख कर रहा है।  दूसरी तरफ शेखपुरा में भी सैलाब का असर साफ दिखने लगा है. यहां हरोहर नदी का पानी पांच पंचायतों में फैलने से घरों के अलावा स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र डूब चुके हैं, जिससे आम लोगों की जिंदगी पूरी तरह बेपटरी हो गई है।  बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्कूल-पंचायत भवनों में इलाज पानी से घिरे लोगों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने भी व्यवस्था शुरू की है. प्रभावित इलाकों में स्कूलों और पंचायत भवनों में इलाज की सुविधा दी जा रही है. यहां डॉक्टरों और नर्सों की तैनाती के साथ जरूरी दवाइयों का इंतजाम किया गया है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को मौके पर ही इलाज देने की कोशिश की जा रही है. इस दौरान प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है।  बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. ऐसे में प्रशासन की नजर जलस्तर पर बनी हुई है. लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के साथ राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने का काम जारी है। 

बिहार में बाढ़ से बिगड़े हालात, 22.42 लाख लोग पानी से घिरे; गंगा ने तोड़ा पुराना रिकॉर्ड

पटना  बिहार में बाढ़ से हाहाकार मचा है. राज्य के 12 जिलों के 22 लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित है. राजधानी पटना, छपरा, भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया, कटिहार सहित कई जिलों में गांव के गांव पानी में घिरा है. पटना में रविवार को गंगा नदी का जलस्तर बाढ़ के उच्चतम स्तर को पार कर गया, जिसके बाद अधिकारियों ने अलर्ट जारी किया है. गंगा के अलावा कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती भी उफान पर है. जिससे प्रभावित इलाकों में बाढ़ की स्थिति विकराल हो गई है. राज्य के 12 जिलों के 70 प्रखंडों की 368 पंचायतों में 22.42 लाख आबादी इस समय पानी के जद में है।  हाथीदह में लगातार खतरे के निशान के ऊपर गंगा इधर सेंट्रल वॉटर कमीशन ने बिहार के 3 फ्लड फोरकास्टिंग स्टेशनों पर अत्यधिक बाढ़ की चेतावनी जारी की है. CWC नेटवर्क के 3 फ्लड फोरकास्टिंग स्टेशनों – पटना जिले के गांधीघाट, हाथीदह और पंडारक – पर गंगा नदी में बाढ़ की स्थिति बहुत गंभीर है. हाथीदह में गंगा खतरे के निशान 41.76 मीटर से लगातार ऊपर बह रही है।  हाथीदह में आज सुबह गंगा का जलस्तर 43.52 मीटर दर्ज की गई CWC ने 8 अगस्त तक के लिए जारी की चेतावनी CWC का कहना है कि चूंकि बिहार में गंगा की मुख्य धारा को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की नदियों के साथ-साथ बिहार के भीतर अपनी उत्तरी सहायक नदियों से भी काफी पानी मिलता है, इसलिए 8 अगस्त तक बिहार के बक्सर, सारण, वैशाली, खगड़िया, मुंगेर और भागलपुर जिलों में नदी के जलस्तर में स्थिरता या बढ़ोतरी के साथ सामान्य से अधिक या गंभीर बाढ़ की स्थिति बने रहने की संभावना है।    गांधी घाट पर गंगा के जलस्तर ने तोड़ा 6 साल पुराना रिकॉर्ड इधर पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड 50.57 मीटर पर पहुंच गया है, जिसने 2016 का 50.52 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इससे पटना सिटी के कई मोहल्लों में पानी घुस गया है. पुनपुन के इलाकों में भी कई गांव बाढ़ की चपेट आ गए हैं. हथिदह में गंगा 2021 के रिकॉर्ड स्तर पर रात 11 बजे पहुंच गई। तब गंगा 43.52 मीटर पर पहुंची थी।  छपरा में माही नदी का तटबंध टूटने से कई गांव जलमग्न छपरा के दरियापुर में माही नदी का तटबंध 20 फीट टूटने से कई गांव जलमग्न हो गए. भागलपुर के अकबरनगर में रिंग बांध ओवरफ्लो होने से सुल्तानगंज की 9 पंचायतों के 4 हजार घर डूब गए. मध्य पूर्व रेलवे ने एक अधिसूचना जारी कर कहा कि पटना-गया खंड पर पुनपुन और परसा बाजार स्टेशनों को जोड़ने वाली पुल संख्या 21 पर जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाने के कारण कुछ रेलगाड़ियों को रद्द कर दिया गया है या फिर उनका मार्ग बदला गया है।  अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए अभी अलग-अलग जिलों में कुल 190 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही है और प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने और आवाजाही में मदद के लिए 1,429 नावों की सेवा ली जा रही है।  SDRF की 47 और NDRF की 10 टीम तैनात अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा, अलग-अलग जिलों में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की 27 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 10 टीम तैनात की गई हैं. अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के बाद पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर ‘बाढ़ के उच्चतम स्तर' (एचएफएल) से ऊपर चला गया है।  किस जिले में कौन सी नदी उफान पर अधिकारियों ने बताया कि राज्य में गंडक नदी डुमरियाघाट और हाजीपुर में, कोसी नदी बलतारा और कुरसेला में, बूढ़ी गंडक नदी खगड़िया में, गंगा नदी बक्सर, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव एवं मुंगेर में, पुनपुन नदी श्रीपालपुर में, घाघरा नदी दरौली में और बागमती नदी बेनीबाद में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है।  हाथीदह स्टेशन तक पहुंच सकता है पानी अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के बाद पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर उच्च बाढ़ स्तर से ऊपर चला गया है, जिससे अगले एक से तीन दिनों में राज्य की राजधानी में हाथीदह और अन्य स्टेशनों पर असर पड़ने की आशंका है. उन्होंने बताया कि कई नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल में लगभग 22.42 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।  विभाग की नई एडवाइजरी में क्या कहा गया? जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) की ओर से जारी नई एडवाइजरी के मुताबिक, हाथीदह में गंगा का जलस्तर अपने पिछले एचएफएल को पार कर सकता है. इसके मद्देनजर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जिलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है. परामर्श में कहा गया, ‘‘अधिकारियों और जमीनी स्तर के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सतर्क रहें और जरूरत के हिसाब से सावधानी बरतते हुए जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील जगहों और निचले इलाकों पर नियमित नजर रखें।  इसमें कहा गया, ‘‘अभियंताओं से बाढ़ से निपटने से संबंधित संसाधन और मशीनरी तैयार रखने को कहा गया है. प्रभावित इलाकों के लोगों को सलाह दी गई है कि वे नदी के पास न जाएं और सतर्क रहें.'' स्थानीय प्रशासन से कहा गया है कि वे नावों के संचालन पर नजर रखें, क्षमता से अधिक लोगों को नावों पर सवार नहीं होने दें और लोगों को हालात के बारे में जानकारी देते रहें।  अगले दो दिन कई जिलों में बारिश के भी आसार स्थानीय मौसम विज्ञान कार्यालय के अधिकारी ने अगले दो दिनों के दौरान राज्य में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई है. इस बीच, विपक्ष ने बिहार में आई बाढ़ को ‘राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की मांग की है।  राजद नेता तेजस्वी बोले- यह राष्ट्रीय आपदा, केंद्र करे मदद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार का 76 प्रतिशत इलाका बाढ़ से प्रभावित है और 19 जिलों के 20 लाख लोग इसकी चपेट में हैं. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर की गई पोस्ट में कहा, “बीस लाख से अधिक लोग इस आपदा में फंसे हुए हैं, पशुपालकों के मवेशी पानी में डूबकर बह गए हैं. … Read more

बिहार में आज तय होगा सत्ता का मालिक, लोकभवन सजा और तैयारियां पूरी

 पटना बिहार के लिए आज यानि मंगलवार का दिन बड़ा रहने वाला है. प्रदेश के मुखिया नीतीश कुमार इस्तीफा दे सकते हैं और साथ ही नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है. इस कड़ी में एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस) ने राजधानी पटना में विधयक दल की अहम बैठक बुलाई है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ऑब्जर्वर के तौर पर पहुंचेंगे।  14 अप्रैल को शाम 4 बजे पटना के विधानसभा भवन के सेंट्रल हॉल में एनडीए के सभी विधायक एक साथ बैठेंगे. इसे विधायक दल की बैठक कहते हैं. इसी बैठक में तय होगा कि एनडीए का नेता कौन होगा यानी बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा. जिस नेता को सबसे ज्यादा समर्थन मिलेगा उनके नाम पर सहमति बनेगी।  शपथ ग्रहण कब और कहां होगा? 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे पटना के लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा. लोकभवन बिहार सरकार का एक बड़ा सरकारी भवन है जहां ऐसे बड़े कार्यक्रम होते हैं. वहां तैयारियां जोरों पर हैं और काम को आखिरी रूप दिया जा रहा है।  सम्राट चौधरी का नाम क्यों आया? सूत्रों के मुताबिक लोकभवन के अधिकारियों ने डिप्टी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों की जानकारी दी. इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि वो इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम भूमिका में हैं।  नए मुख्यमंत्री का नाम अभी क्यों तय नहीं? यह सवाल सबके मन में है. एनडीए के गठबंधन में कई पार्टियां हैं और सभी की अपनी-अपनी पसंद होती है. इसीलिए पहले विधायक दल की बैठक होती है जहां सभी मिलकर एक नाम पर सहमति बनाते हैं. उसके बाद ही मुख्यमंत्री का चेहरा सामने आता है. कल की बैठक के बाद यह रहस्य खुल जाएगा।   

बिहार में CM पद को लेकर बयानबाजी तेज, पप्पू यादव ने रखी अपनी पसंद

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के MLA पद से इस्तीफे के बाद बिहार में सियासत तेज हो गई है और नए सीएम के नामों को लेकर अटकलें लगना शुरू हो गई हैं। इस बीच पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बड़ी डिमांड कर दी है। पप्पू यादव का कहना है कि बिहार का सीएम नीतीश कुमार को ही होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो नया चेहरा जेडीयू का ही हो। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार नैतिक मूल्यों से चलते हैं। उनका विचार गांधी और कर्पूरी के विचार हैं। जिस प्रकार के नीतीश कुमार को घेरा गया, वह गलत है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को बिहार नहीं छोड़ना चाहिए। अगर वो छोड़ें भी तो जदयू के चेहरे को नामित करें। अगर नीतीश कुमार भाजपा को मुख्यमंत्री पद सौंप रहे हैं तो ये भाजपा की भी दुर्गति होगी और JDU की भी दुर्गति होगी। पप्पू यादव ने कहा कि कायदे से जनता ने जिसे वोट दिया उसे ही मुख्यमंत्री रहना चाहिए। क्योंकि वोट नीतीश कुमार के नाम पर लिया गया है, नरेंद्र मोदी के नाम पर नहीं, फिर बिहार की जनता की पीठ में खंजर क्यों घोंपा जा रहा है। उन्होंने जदयू नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा कि विधान परिषद से इस्तीफा दिए हैं। भाजपा के सारथी लोग इतने परेशान क्यों हैं? अभी दिल्ली दूर है। आंख मिचौली का खेल देखते चलिए।

रहस्य से भरा बिहार का यह मेला, यूपी-बंगाल-नेपाल से खिंचे चले आते हैं श्रद्धालु

गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले में शारदीय नवरात्र के अवसर पर एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है, जो आधुनिक युग में भी प्राचीन मान्यताओं और गहरे अंधविश्वास की याद दिलाता है। जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित लक्षवार गांव का लक्षवार धाम इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसे स्थानीय लोग प्रेतबाधा से मुक्ति का धाम मानते हैं, जहां नवरात्र के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। कई राज्यों तक फैला है प्रभाव लक्षवार धाम की प्रसिद्धि केवल बिहार तक सीमित नहीं है। यहां उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में लगभग एक महीने तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि यहां की मिट्टी के स्पर्श मात्र से शरीर के भीतर मौजूद बुरी आत्माएं भाग जाती हैं। इसके अतिरिक्त यहां ललका बाबा द्वारा दी जाने वाली भभूत का भी विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्र में दिखते हैं विचलित करने वाले दृश्य शारदीय नवरात्र के मौके पर मंदिर परिसर में कई विचलित करने वाले दृश्य देखने को मिलते हैं। कहीं महिलाएं जोर-जोर से सिर हिलाती नजर आती हैं, तो कहीं पुरुष जमीन पर लोटकर अजीबोगरीब हरकतें करते दिखते हैं। अंधविश्वास का आलम यह है कि यहां आने वाले लोग इन गतिविधियों को इंसानी रूप में मौजूद भूत-प्रेत मानते हैं। पीड़ा से मुक्ति पाने की चाह में लोग मर्यादा और लोक-लाज की परवाह किए बिना घंटों तक इन क्रियाओं में लीन रहते हैं। शक्तिपीठ से शिवधाम तक का सफर मंदिर के पुजारी के अनुसार, इस परंपरा की जड़ें दशकों पुरानी हैं। वर्ष 1972 में माता के आदेश पर लक्षवार शक्तिपीठ से पिंड का कुछ अंश लाकर कुचायकोट के जलालपुर बाजार में शिवधाम की स्थापना की गई थी। इसके बाद से ही यहां तांत्रिकों द्वारा भूत-प्रेत भगाने और मानसिक रोगों के उपचार का दावा करने का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज एक विशाल मेले का रूप ले चुका है। जहां एक ओर श्रद्धालु इसे दैवीय चमत्कार मानते हैं, वहीं चिकित्सा जगत इसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या और सामाजिक धारणा के रूप में देखता है।

नशे का बड़ा खेल बेनकाब: साबूदाने की आड़ में हेरोइन तस्करी, 2 आरोपी गिरफ्तार; असम से बिहार तक नेटवर्क

समस्तीपुर बिहार के समस्तीपुर जिले में पुलिस और नारकोटिक्स सेल के एक संयुक्त अभियान ने एक नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके परिणामस्वरूप दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और लगभग 6 लाख रुपए मूल्य की हेरोइन जब्त की गई है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 21 मार्च, 2026 की सुबह एक विशेष खुफिया जानकारी मिली थी कि एक नशीले पदार्थों के गिरोह के सदस्य हेरोइन की एक खेप लेकर शाहपुर पटोरी रेलवे स्टेशन पर पहुंचेंगे। तेजी से कार्रवाई करते हुए, स्थानीय पुलिस अधिकारियों और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को मिलाकर एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने एक जाल बिछाया और स्टेशन के पास के इलाके की घेराबंदी कर दी। 4 डिब्बों में छिपाकर रखी थी हेरोइन अभियान के दौरान, दो व्यक्तियों (एक पुरुष और एक महिला) को स्टेशन के बाहर संदिग्ध परिस्थितियों में घूमते हुए पकड़ा गया। आरोपियों की पहचान वैशाली निवासी राहुल कुमार (26) और असम निवासी शांति देवी के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान, पुलिस ने हेरोइन जिसे स्थानीय रूप से 'कोटा' कहा जाता है बरामद की, जिसे साबूदाना (sago) के चार डिब्बों के अंदर छिपाकर रखा गया था। इसके अलावा, उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन, नकदी, रेलवे टिकट और पहचान पत्र भी जब्त किए गए। बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क की संलिप्तता का संदेह शुरुआती पूछताछ में पता चला कि आरोपी पूर्वोत्तर राज्यों से बिहार में नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल थे। पुलिस को एक बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क की संलिप्तता का संदेह है और वह गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने तथा उनके आपराधिक संपर्कों का पता लगाने पर काम कर रही है। पटोरी पुलिस स्टेशन में NDPS अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक मामला दर्ज किया गया है, और आगे की जांच जारी है।  

बिहार राजनीति में हलचल: क्या रामनवमी पर BJP घोषित करेगी अपना CM चेहरा?

  पटना भारतीय जनता पार्टी अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्यादा समय देने के विचार में नहीं है। बिहार में इतिहास रचने के लिए वह खरमास के खत्म होने का इंतजार करे, यह भी शायद संभव नहीं हो। और, मौका है रामनवमी का तो तैयारी उसी हिसाब से हो रही है। जी हां, संभव है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाने वाली पार्टी इस बार रामनवमी पर बिहार में पहली बार भाजपाई मुख्यमंत्री की शपथ करा ले। इसके लिए अंदर तैयारी है और बाहर माहौल बनाया जाने लगा है। खास बात यह भी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चौंकाने वाले नाम-काम से अलग भाजपा अपनी राह खुद तैयार कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्लानिंग कभी भी सामने आ सकती है। रोज चौंका रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भाजपा ने राज्यसभा जाने के लिए राजी कराया है, यह राज्य का बच्चा-बच्चा जानता है। लेकिन, अब यह भी लोग समझ रहे हैं कि मुख्यमंत्री भाजपा को संशय में डाल रहे हैं। इधर उन्होंने राज्यसभा का नामांकन किया और उधर समृद्धि यात्रा पर निकल गए। राज्यसभा चुनाव के दिन पटना में रहे, लेकिन वोटिंग के दौरान विधानसभा का रुख भी नहीं किया। और तो और, अगले दिन फिर समृद्धि यात्रा पर बिहार के लोगों से मिलने निकल गए। अलग-अलग जिले घूम रहे हैं। इस दौरान वह यह तो बता रहे हैं कि आगे की जिम्मेदारी कौन संभालेगा, लेकिन यह नहीं कह रहे हैं कि वह बिहार छोड़ने जा रहे हैं। अब तक कई कंधों पर हाथ रख चुके नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री या उप मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, यह उन्होंने कभी नहीं कहा। निशांत के राजनीति में आने पर भी उन्होंने एक बार भी कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ नीतीश समर्थक निशांत के लिए डिप्टी सीएम की कुर्सी पर अड़े हैं। हालांकि, नीतीश कुमार लगातार अलग-अलग संकेत देकर भाजपा को ही संशय में डाल रहे। समृद्धि यात्रा में उन्होंने सबसे ज्यादा भाजपाई डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रख आगे की जिम्मेदारी संभालने की बात कही, जबकि भाजपा के अंदर से संघ-विद्यार्थी परिषद् बैकग्राउंड वाले किसी नेता को आगे करने की चर्चा निकल रही है। नीतीश ने सम्राट चौधरी को पसंद बताया है। लेकिन, वह इसके साथ ही बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी व लेसी सिंह के अलावा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के कंधे पर भी इसी अंदाज में हाथ रख चुके हैं। भाजपा की प्लानिंग अब आएगी सामने चैत्र नवरात्र शुरू हो चुका है। पहले बात चल रही थी कि 15 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास के बीच नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण नहीं होगा। लेकिन, अब भाजपा की तैयारी नवरात्र में ही अपने पहले मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने की है। बिहार भाजपा में नेताओं की चर्चा के दौरान अब भी रोज कई मुख्यमंत्री बन रहे हैं और हट रहे हैं, हालांकि नवरात्र का पहला दिन निकलते-निकलते यह कहा जा रहा है कि भाजपा के रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम चर्चा कर ली है। इसपर सर्व-सहमति की तैयारी की जा रही है। कहा जा रहा है कि रामनवमी या उसके अगले दिन नई सरकार का शपथ ग्रहण करा लिया जाएगा। नवरात्र के लिए राजनीतिक माहौल बनाया खरमास बाद नई सरकार की चर्चा चल रही थी। कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार राज्यसभा के नए कार्यकाल के लिए अप्रैल में मौजूदा सांसदों का समय पूरा होने तक यहीं जमे रहेंगे। लेकिन, अब नवरात्र शुरू होते ही माहौल बदला है। भाजपा प्रदेश मुख्यालय के नेताओं की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास यह जानकारी पहुंचा दी गई है कि उन्हें 30 मार्च के पहले ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करनी है। वह 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, इसलिए 14 दिन ही उनके पास निर्णय के लिए बचते हैं। नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता 30 मार्च के पहले ले लेंगे तो उसके बाद उन्हें नई सरकार के शपथ ग्रहण तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए रखने का विकल्प हो सकता है या नहीं- इसपर भी चर्चा चल रही है। हालांकि इन चर्चाओं के बीच रामनवमी पर शपथ ग्रहण की चर्चा भाजपा में पटना से लेकर दिल्ली तक है।

बिहार की राजनीति में हलचल: ‘अगला CM चिराग पासवान’ वाले पोस्टरों से मचा बवाल

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच बिहार में पॉलिटिकल हलचल तेज हो गई है। इसी बीच चिराग पासवान को अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग वाले पोस्टर पटना की सड़कों पर दिखे हैं। ये पोस्टर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जिला अध्यक्ष इमाम गजाली ने लगाए हैं। पोस्टर, जिसमें चिराग पासवान के सिर पर ताज दिखाया गया है, पर नारे लिखे थे, जैसे, “उन्हें ताज पहनाओ, तभी बिहार का सुनहरा दौर आएगा। मोदी ने उन्हें आशीर्वाद दिया है। चिराग बिहार के नए नेता होंगे। बिहार को चिराग की जरूरत है। अब, एक युवा मुख्यमंत्री बनाने का समय आ गया है। नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस सरकार बनाएगी, और चिराग मुख्यमंत्री होंगे।” यह पहली बार नहीं है जब पार्टी के समर्थकों ने चिराग पासवान को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है। इससे पहले, जमुई से सांसद और चिराग पासवान के साले अरुण भारती ने भी चिराग को बिहार का नेतृत्व करते देखने की इच्छा जताई थी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर आखिरी फैसला NDA करेगा। इससे पहले, चिराग पासवान की मां राजकुमारी देवी ने सबके सामने इच्छा जताई थी कि वह उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनते देखना चाहती हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि चिराग पासवान मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार से बेहतर काम करेंगे। उन्होंने अपने बेटे को आशीर्वाद देते हुए और लोगों से उनका समर्थन करने की अपील करते हुए कहा, “हम जानते हैं कि चिराग मुख्यमंत्री बनेंगे। वह नीतीश कुमार से बेहतर काम करेंगे।”

बिहार की सियासत में हलचल: अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे सम्राट चौधरी

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को दिल्ली बुलाया है। बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर चल रहीं चर्चाओं के बीच सियासी हलचल तेज है। सम्राट रविवार को शाह से मिलने पटना से दिल्ली जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद बिहार में नए सीएम के नाम पर मंथन चल रहा है। चर्चा है कि अगला सीएम भारतीय जनता पार्टी से होगा। अमित शाह ने सम्राट चौधरी को दिल्ली क्यों बुलाया है, इस बारे में कोई स्पष्ट वजह तो सामने नहीं आई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद नई सरकार के गठन को लेकर उनसे चर्चा की जा सकती है। सम्राट बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में नंबर दो की पॉजिशन पर हैं। वह राज्य का सबसे अहम माने जाने वाला गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, जो पहले नीतीश के पास हुआ करता था। बताया जा रहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने संभावित सीएम पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने के बाद वे बिहार सीएम पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद नए सिरे से सरकार का गठन किया जा सकता है। अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका ऐलान उसी समय होने की संभावना है।  

बिहार सरकार ने शुरू किया महिलाओं के रोजगार का सर्वे, 10 हजार रुपये लेने वाली महिलाओं की ड्यूटी पर जीविका कर्मचारी

 रजौली  रजौली प्रखंड क्षेत्र में 28000 महिलाओं को राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपये की सहायता प्राप्त करने वाली महिलाओं के रोजगार की स्थिति जानने के लिए व्यापक सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर आत्मनिर्भर बनाना है। अब यह आकलन किया जा रहा है कि मिली आर्थिक सहायता का उपयोग किस प्रकार के व्यवसाय में किया गया और उसका वर्तमान स्वरूप क्या है। सर्वे की जिम्मेदारी जीविका समूह के कर्मियों को सौंपी गई है। जीविका कर्मी मोबाइल एप के माध्यम से लाभुक महिलाओं से सीधे संपर्क कर रहे हैं। वे उनसे व्यवसाय की प्रकृति, आय की स्थिति, सामने आ रही चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं से संबंधित जानकारी जुटा रहे हैं। एकत्रित डेटा को तत्काल एप पर अपलोड किया जा रहा है, जिससे विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा की जा सके। किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, डेयरी, बकरी पालन समेत अन्य रोजगार के लिए लिए हैं रुपये प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कई महिलाओं ने किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन और सब्जी बिक्री जैसे छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं। कुछ महिलाओं ने घर आधारित खाद्य सामग्री निर्माण का कार्य भी शुरू किया है। सर्वे के माध्यम से यह भी देखा जाएगा कि व्यवसाय कितना सफल रहा और किन लाभुकों को आगे अतिरिक्त मार्गदर्शन या वित्तीय सहयोग की आवश्यकता है। सरकार का मानना है कि सही मूल्यांकन के आधार पर अगली किस्त का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचे और उनके आर्थिक सशक्तिकरण का लक्ष्य पूरा हो सके। क्या कहते हैं जीविका बीपीएम? रजौली जीविका के बीपीएम मनीष कुमार ने बताया कि सभी महिलाओं को प्रशिक्षण कार्य जल्दी शुरू कर दिया जाएगा।