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राज्य के पांच मेडिकल कॉलेजों में 366 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति और ईंट-भट्ठा कारोबारियों के लिए राहत की घोषणा।

 पटना  बिहार में विकास और रोजगार से जुड़े कई बड़े फैसलों पर मंगलवार को कैबिनेट की मुहर लगी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 17 एजेंडों को मंजूरी दी गई. इसमें मखाना विकास, बागवानी, मेडिकल कॉलेज, गया के विष्णुपद मंदिर, हवाई संपर्क और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े अहम फैसले शामिल हैं. मखाना विकास पर खर्च होंगे करीब 89.80 करोड़ कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्रीय मखाना विकास योजना के लिए करीब 89.80 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसका मकसद मखाना की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है. इसके तहत उत्पादन, बीज, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार की व्यवस्था पर काम होगा. निर्यात और सर्टिफिकेशन को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इससे किसानों, व्यापारियों और FPO की आय बढ़ाने पर जोर रहेगा. पांच मेडिकल कॉलेजों में 366 असिस्टेंट प्रोफेसर राज्य के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक के 366 रिक्त पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की जाएगी. इनमें बेतिया, पूर्णिया, मधेपुरा, छपरा और समस्तीपुर के मेडिकल कॉलेज शामिल हैं. नियमित नियुक्ति होने तक इन पदों पर संविदा नियुक्ति होगी. इससे मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी. विष्णुपद मंदिर का होगा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसा विकास गया के विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के विकास के लिए 2,520 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है. इसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने की योजना है. मंदिर परिसर, घाट, मल्टीलेवल पार्किंग, एलीवेटेड पथ, डोरमेट्री, कैंटीन और पैदल पुल समेत कई सुविधाएं विकसित होंगी. इसके साथ ही 996 करोड़ रुपये की सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना को भी मंजूरी दी गई है. दोनों परियोजनाओं पर कुल करीब 3,516 करोड़ रुपये खर्च होंगे. ईंट-भट्ठा कारोबारियों को बड़ी राहत ईंट-भट्ठों के बकाया भुगतान के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना को मंजूरी दी गई है. यह योजना तीन महीने तक लागू रहेगी. इसमें ईंट सत्र 2024-25 तक के बकाये में ब्याज की राशि छोड़कर मूल बकाया जमा करने का विकल्प मिलेगा. इससे कारोबारियों को राहत मिलेगी और सरकार को भी बकाया राजस्व तेजी से मिल सकेगा. जलस्रोतों की गाद से निपटने की तैयारी कैबिनेट ने बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 को मंजूरी दी है. नदियों, बराज और जलाशयों में जमा गाद हटाने पर जोर होगा. निकाली गई गाद का इस्तेमाल सड़क, रेलवे और दूसरी निर्माण परियोजनाओं में मिट्टी भराई के लिए भी किया जा सकेगा. बिहार में बढ़ेगा हवाई संपर्क Modified UDAN Scheme के तहत केंद्र, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और बिहार सरकार के बीच MoU को मंजूरी मिली है. इससे छोटे शहरों में हवाई संपर्क बढ़ाने में मदद मिलेगी. आकांक्षी जिलों में हेलीपोर्ट विकसित करने की योजना भी है. इससे पर्यटन, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. बाढ़ और सिंचाई के लिए 1000 करोड़ बिहार आकस्मिकता निधि से जल संसाधन विभाग को 1,000 करोड़ रुपये मिले हैं. इस राशि का इस्तेमाल बाढ़ सुरक्षा, सिंचाई और प्रगति यात्रा से जुड़े कार्यों में किया जाएगा. इसके अलावा बागवानी विकास मिशन के लिए भी करीब 78.34 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी मिली है. वहीं बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में पैरावेट स्कूल के लिए छह स्थायी पद सृजित करने को भी स्वीकृति दी गई है. 

पटना में बाढ़ को लेकर हाई अलर्ट, 13 जिलों की निगरानी के लिए मंत्रियों और सचिवों की तैनाती

 पटना बिहार में भारी बारिश और प्रमुख नदियों में उफान के बाद बाढ़ से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 13 मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में बाढ़ की निगरानी का काम सौंपा है। उनके साथ प्रभारी सचिवों की भी ड्यूटी लगाई गई है। बक्सर से पटना, समस्तीपुर और भागलपुर तक कई इलाके जलमग्न हैं। पटना में बाढ़ के चलते अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। सीएम सम्राट लगातार दूसरे दिन बाढ़ प्रभावित इलाके के हवाई सर्वे पर निकले हैं। शनिवार को वह भागलपुर में बाढ़ से राहत एवं बचाव कार्य का जायजा ले रहे हैं। बिहार सरकार की ओर से गंगा किनारे स्थित जिलों में राहत और बचाव कार्यों की सघन निगरानी का काम प्रभारी मंत्रियों और सचिवों को सौंपा है। जिन 13 जिलों के लिए निर्देश जारी हुए हैं, उनमें बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव संबंधित जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और जमीन पर राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी करेंगे। पटना में बाढ़ से हाई अलर्ट सीएम सम्राट ने पटना के शहरी क्षेत्र में गंगा के बढ़ते जलस्तर की विशेष निगरानी के आदेश दिए हैं। पटना में तटबंध और आसपास के क्षेत्र पर खास ध्यान दिया जाएगा। पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है। गंगा नदी का जलस्तर पटना में गांधी घाट के पास गंगा नदी खतरे के निशान ऊपर बह रही है। शनिवार सुबह 10 बजे गांधी घाट गेज साइट पर जलस्तर 50.53 मीटर दर्ज किया गया, जो 48.60 मीटर के खतरे के निशान से लगभग 1.93 मीटर ऊपर है। नदी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 50.52 मीटर के करीब बह रही है। अधिकारियों ने जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की चेतावनी दी है। बिहार बाढ़ की स्थिति बिहार में बाढ़ की वर्तमान स्थिति की जानकारी डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने ली। वह शनिवार को फिर पटना में सिंचाई भवन स्थित जल संसाधन विभाग के कंट्रोल कमांड सेंटर पहुंचे। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूरे राज्य के विभिन्न संवेदनशील स्थलों का जायजा लिया। अधिकारियों को तटबंधों पर सतत निगरानी के निर्देश दिए। बिहार बाढ़ से 10 लाख आबादी प्रभावित- सरकार आपदा प्रबंधन विभाग ने शनिवार को कहा कि बिहार के 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 पंचायतों में 10.28 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। यहां राहत एवं बचाव कार्य जारी है। इन जिलों में बाढ़ की निगरानी करेंगे प्रभारी मंत्री-     बक्सर – नंद किशोर राम     भोजपुर – अरुण शंकर प्रसाद     पटना – विजय चौधरी     सारण – बिजेंद्र प्रसाद यादव     वैशाली – निशांत कुमार     बेगूसराय – रामकृपाल यादव     समस्तीपुर – दामोदर रावत     लखीसराय – सुनील कुमार     खगड़िया – मदन सहनी     मुंगेर – संजय पासवान     भागलपुर – नीतीश मिश्रा     कटिहार – प्रमोद चंद्रवंशी

‘शॉर्टकट से कमाई की तो बेऊर जेल भेजेंगे’, CM सम्राट चौधरी का अपराधियों को खुला संदेश

पटना. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए कहा कि बिहार में शॉर्टकट से अमीर बनने वालों के लिए बेऊर जेल में जगह तय है। जो भी गलत तरीके से संपत्ति अर्जित करेगा या भ्रष्टाचार करेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि नेता, मंत्री, विधायक या अधिकारी, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। वे गुरुवार को बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राज्य में पहली बार बिहार सतर्कता जागरूकता सप्ताह का शुभारंभ किया। यह अभियान पूरे राज्य में एक सप्ताह तक चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के करीब 80 वर्ष बाद पहली बार भ्रष्टाचार के खिलाफ जन-जन तक जागरूकता पहुंचाने का व्यापक अभियान शुरू किया गया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में पारदर्शी एवं जवाबदेह शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए बिहार सरकार भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध व्यापक जनजागरण अभियान चला रही है। ट्रिपल-टी बनेगा सुशासन का आधार मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब टेक्नोलॉजी, ट्रांसपेरेंसी और ट्रस्ट (Tripple-T) के सिद्धांत पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग से सरकारी कार्यों में पारदर्शिता आएगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने सतर्कता विभाग के कार्यों की सराहना की। कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने की आवश्यकता है। राज्य की एजेंसियों को होना होगा और प्रभावी उन्होंने कहा कि बिहार में विजिलेंस, स्पेशल यूनिट और आर्थिक अपराध इकाई जैसी सक्षम एजेंसियां हैं। इन एजेंसियों को इतना प्रभावी बनना होगा कि बाहरी एजेंसियों के हस्तक्षेप की जरूरत ही न पड़े। जहां भी भ्रष्टाचार की शिकायत मिले, वहां बिना किसी दबाव के कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। 30 दिन में होगा शिकायतों का निपटारा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक जवाबदेही तय की गई है। किसी भी शिकायत के निपटारे के लिए 30 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है। यदि कोई अधिकारी गलत आदेश देता है तो उसकी शिकायत उनके वरिष्ठ से की जा सकती है, हरहाल में तय अवधि में उसका निष्पादन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ब्लॉक कार्यालयों और थानों में भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। संबंधित वरीय अधिकारियों को इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभानी होगी ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को समय पर न्याय मिल सके।

छात्रों के लिए बड़ा फैसला! स्कूल और कॉलेज के समय कोचिंग संचालन पर रोक, बिहार सरकार का आदेश

पटना  बिहार सरकार कोचिंग संस्थानों के लिए कानून बनाएगी. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग को इसे लेकर निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि स्कूल-कॉलेज के लिए तय समय के दौरान कोचिंग नहीं चलेंगे. विद्यार्थियों की जानकारी जिला प्रशासन को देनी होगी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सीएम ने बताया कि इसे लेकर सरकार का मकसद राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और पढ़ाई की क्वालिटी को बेहतर बनाना है।  कोचिंग संस्थानों को देना होगा ब्योरा  बता दें कि सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा कि सभी कोचिंग संस्थानों के लिए ये पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने यहां पढ़ने वाली सभी छात्र-छात्राओं की पूरी जानकारी जिला प्रशासन को सौंपे. कोई भी कोचिंग संस्थान अब बच्चों का ब्योरा छिपा नहीं सकेगा।  स्कूल-कॉलेज के समय नहीं चलेंगे कोचिंग  सरकार ने बच्चों पर ज्यादा प्रेशर और उनका स्कूल या कॉलेज न छूटें इसके लिए सख्त रुख अपनाया है. पोस्ट हुए निर्देश में उन्होंने साफ किया कि स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाई के दौरान कोई कोचिंग संस्थान अपनी क्लास नहीं चला सकेगा।  शिक्षा विभाग बनाएगी मैनुअल  इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर सही तरह से लागू करने के लिए सीएम ने शिक्षा विभाग को एक नई और मजबूत नियम तैयार करने का आदेश भी दिया है. सरकार का कहना है कि वे बिहार की शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और बच्चों को बेहतरीन शिक्षा देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबंद्ध हैं। 

बिहार की राजनीति में गरमाया आवास विवाद, सम्राट चौधरी ने लालू परिवार को घेरा

मुजफ्फरपुर. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बिहार संविधान से चल रहा है। कुछ इसे राजतंत्र के अनुसार चलाना चाहते हैं, मगर ऐसा नहीं होगा। बिहार में लोकतंत्र है। यहां कानून का राज है। आवास तो ख़ाली करना ही पड़ेगा। इसे कोई माई का लाल नहीं रोक सकता। उनका निशाना लालू परिवार पर था। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास खाली नहीं करने को लेकर कहा, पिता के लिए अलग, बेटा के लिए अलग, पत्नी के लिए अलग आवास चाहिए। सभी को अलग अलग सुरक्षा चाहिए। उन्हें नीति सिद्धांत से मतलब नहीं। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का पद छोड़ा तो आवास भी समय से खाली कर दिया। कुछ लोग यहाँ राजतंत्र चलाना चाहते, मगर ऐसा नहीं होगा। मुख्यमंत्री मंगलवार को मोतीपुर की परसौनी नाथ पंचायत में सहयोग शिविर का निरीक्षण करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मेरे आवास को लेकर बयान दे रहे हैं। उन्हें यह बता दूं कि उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री रहने पर भी वह पिता के घर में रहे। वह भी पिताजी ने घर का एक हिस्सा दिया। पीएम मोदी, नीतीश कुमार, एनडीए के नेता और जनता ने मुख्यमंत्री बनाया तो सीएम आवास में आया हूं। यहां जनता जिसे चाहेगी मुख्यमंत्री बनाएगी। सहयोग शिविर को लेकर उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार के मार्ग पर चल कर बिहार को समृद्ध बनाना है। लोगों की समस्या का समाधान देना है। इसलिए ही यह क़ानून बनाया गया है। आपकी समस्या का निदान कर्मचारियों और पदाधिकारियों को करना ही होगा। अगर 10 दिन में नहीं किया तो 11वें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से एक नोटिस जाएगा। फिर 20 दिन में नहीं किया तो 21वें दूसरा नोटिस जाएगा। तीसरा मौक़ा भी दिया जाएगा। लेकिन 26वें दिन तीसरा नोटिस जाएगा। तीस दिनों में समाधान नहीं हुआ तो नोटिस नहीं मुख्यमंत्री कार्यालय से नोटिस नहीं कर्मचारी और पदाधिकारी के निलंबन का आदेश जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा, नीतीश कुमार ने बिहार को विकसित किया। मैं भी आपको एक बात के लिए आश्वस्त करना चाहता हूं कि कोई भी अपराधी या गुंडा अगर पुलिस को चैलेंज करता है तो उसे 48 घंटे में जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा, हरा गमछा के मेरे बयान पर कुछ लोगों ने टिप्पणी की। मैं कहता हूं हरा रंग हरियाली का प्रतीक है। अगर कोई गुंडागर्दी करेगा तो उसकी जगह जेल में होगी।

बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ

रायपुर. बस्तर के सुदूर वनांचलों से डर और उपेक्षा का अंधेरा अब छंटने लगा है, और इसकी गवाह बनी सुकमा की वो तस्वीरें जहां जिले के मुखिया खुद दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना जनता के द्वार पहुंचे रहे हैं। कलेक्टर अमित कुमार और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने कोंटा विकासखंड के धुर नक्सल प्रभावित रहे और पहुंचविहीन गांवों भेज्जी, मैलापुर, दंतेशपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा का ऐतिहासिक दौरा किया। सालों से मुख्यधारा से कटे इन गांवों के उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों पर जब अधिकारियों का काफिला मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकला, तो यह सिर्फ एक निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीणों के मन में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास जगाने का सफर बन गया। आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर को अपने बीच पाकर ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। चौपाल पर संवाद और 'सुशासन परिसर' की सराहना अधिकारियों ने बुर्कलंका में बन रहे 'सुशासन परिसर' का बारीकी से निरीक्षण किया। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने दुर्गम घने जंगलों के बीच बसे इस गांव में बने परिसर की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी बताया। इस बहुद्देशीय परिसर में एक ही बाउंड्रीवाल के भीतर स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन को समेटा गया है, जो ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सारी मूलभूत सुविधाएं देने का बेहतरीन मॉडल है। सुशासन शिविर के दौरान मैलासुर पंचायत में अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर सरपंच, पटेल, मुखिया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी और निर्माणाधीन कार्यों को समय पर पूरा करने का संकल्प दोहराया। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगातें प्रशासन का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीणों की सेहत और बच्चों की शिक्षा पर रहा। कलेक्टर ने संवेदनशील पहल करते हुए भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में इसके लिए तत्काल जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए। गछनपाल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों के रहने के लिए स्टाफ क्वार्टर को मंजूरी दी गई, ताकि चौबीसों घंटे इलाज की सुविधा मिल सके। शिक्षा की लौ को मजबूत करने के लिए दंतेषपुरम में निर्माणाधीन प्राथमिक शाला भवन को बारिश के मौसम से पहले हर हाल में पूरा करने का निर्देश शिक्षा विभाग को दिया गया, साथ ही अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। पेयजल, आजीविका और कृषि को मिला नया जीवन गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता लाने के लिए कलेक्टर ने आजीविका के नए द्वार खोले। मैलासुर और दंतेषपुरम के ग्रामीणों की मांग पर मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हाँकन किया गया और ग्रामीणों को मछली बीज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दंतेषपुरम में एक नए डैम और तालाब निर्माण की बड़ी स्वीकृति दी गई, साथ ही क्रेड़ा विभाग को पानी टंकी बनाने के निर्देश दिए गए। मैलासुर और बोदराजपदर में पेयजल संकट को खत्म करने के लिए नए हैंडपंप और बोरिंग की तत्काल मंजूरी दी गई। पीएचई विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में जल जीवन मिशन का काम पूरा हो चुका है, वहां बिना देरी किए तत्काल जलापूर्ति शुरू की जाए। जहाँ काम पूरा नहीं हुआ है वहां तेजी से कार्य पूरा कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाये। कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में 'सुशासन परिसर' और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण वाकई प्रेरणादायी है। कलेक्टर ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो चुके इन अंतिम छोर के गांवों तक विकास की रफ्तार पहुंचाना है। बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण तक शासन की योजनाओं का सीधा लाभ पहुंच सके। सड़कों से जुड़ेंगे दिल और रास्ते, विकास की रफ्तार होगी तेज बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहे पहुंचविहीन रास्तों को अब पक्की सड़कों की मजबूती मिलने जा रही है। कलेक्टर ने बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेशपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजेएसवाई) का तत्काल प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। आरईएस विभाग द्वारा डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम का भी मुआयना किया गया। मोटर साइकिल के पहियों से शुरू हुआ प्रशासन का यह सफर सुकमा के इन दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिख गया है, जो यह साबित करता है कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर की पहचान बंदूक से नहीं, बल्कि सुशासन और समृद्धि से हो रही है। केलक्टर के निरीक्षण के दौरान एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला, जनपद सीईओ सुमित ध्रुव, एडिशनल एसपी मनोज तिर्की, कार्यपालन अभियंता पीएमजेएसवाई रविंद्र ताती, महिला एवं बाल विकास अधिकारी रितिश टंडन, बीएमओ डॉ. दीपेश चंद्राकर सहित अन्य जिलाधिकारी मौके पर उपस्थित थे।

सम्राट चौधरी ने AI समिट से दिया सियासी संदेश, गंगा एक्सप्रेसवे पर 19 हजार करोड़ खर्च होंगे

पटना. मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को राजधानी पटना में आयोजित एआई समिट में बिहार के विकास, तकनीक, कानून-व्यवस्था और शिक्षा को लेकर बड़ा विजन पेश किया। उन्होंने कहा कि आने वाला दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है और बिहार की अर्थव्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था, पुलिसिंग तथा उद्योग विकास में इसकी बड़ी भूमिका होने वाली है। ऊर्जा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में हजारों सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और एआई तकनीक की मदद से अपराधियों तक बेहद तेजी से पहुंचा जा सकता है। हरे गमछे पर सीएम का तंज  उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि सिस्टम को किसी हरे गमछे वाले व्यक्ति को खोजने का निर्देश दिया जाए तो एआई तुरंत उसे ट्रैक कर सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा किसी विशेष व्यक्ति की ओर नहीं था। मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश देते हुए कहा कि बिहार में अपराधियों की कोई जाति या धर्म नहीं होता। पुलिस को पूरी छूट दी गई है। और यदि कोई अपराधी पुलिस या प्रशासन को चुनौती देता है तो 48 घंटे के भीतर जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'रूल ऑफ लॉ' स्थापित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। AI से प्रशासन और टेंडर सिस्टम में बचत सम्राट चौधरी ने कहा कि एआई का इस्तेमाल केवल पुलिसिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभिन्न विभागों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए भी किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि टेंडरों की दोबारा जांच में एआई के इस्तेमाल से सरकार के काफी पैसे बचे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि “सहयोग पोर्टल” पर ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जाए। जहां बिहार या देश-दुनिया में रहने वाले लोग मगध और बिहार की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सुझाव दे सकें। बिहार लौटें या बाहर रहकर करें योगदान मुख्यमंत्री ने युवाओं और प्रवासी बिहारियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि जो लोग बाहर या विदेश में बेहतर काम कर रहे हैं, वे वहीं रहकर भी अपनी जन्मभूमि का कर्ज चुका सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मजदूरी के लिए पलायन करने वालों की चिंता करेगी, लेकिन जो लोग सफलता हासिल कर चुके हैं, वे बिहार के विकास में योगदान दें। गंगा एक्सप्रेसवे, IT हब और 20 हजार मेगावाट बिजली का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सिर्फ उद्योग लगाना ही उद्देश्य नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि राज्य का राजस्व 60 हजार करोड़ रुपये है, जिसे बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपये तक ले जाने की तैयारी है। उन्होंने घोषणा की कि पटना का मरीन ड्राइव अभी 21 किलोमीटर लंबा है, लेकिन अब करीब 125 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। यह लगभग 19 हजार करोड़ रुपये की परियोजना होगी और पीपीपी मॉडल पर अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में आईटी हब, डेटा सेंटर और पावर सेक्टर में बड़े निवेश आ रहे हैं। राज्य अभी 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है और अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 20 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य तय किया गया है। मॉडल स्कूल, कोचिंग और नई यूनिवर्सिटी का ऐलान मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े बदलावों का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी 534 ब्लॉकों में मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे। पटना में 10 मॉडल स्कूल, जबकि गया, बिहारशरीफ, पूर्णिया, दरभंगा और भागलपुर जैसे नगर निगम क्षेत्रों में पांच-पांच मॉडल स्कूल बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार प्रतिभाशाली बच्चों के लिए कोचिंग व्यवस्था भी विकसित करेगी और 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे। आने वाले समय में बिहार में फिजिक्स, मैथेमेटिक्स और आर्किटेक्चर जैसी विशेष यूनिवर्सिटी स्थापित करने की भी योजना है। सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के युवाओं के पास नई तकनीक और नई सोच है, इसलिए अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी प्रशासन और राजनीति को भी आधुनिक सोच सिखाए। उन्होंने कहा कि “एआई के माध्यम से बिहार को बदलने का रास्ता तैयार करना है।”

राहुल गांधी के बयान पर सियासी घमासान, NDA नेताओं ने की तीखी आलोचना

पटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की एक टिप्पणी के बाद से सियासी उबाल मचा हुआ है। सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने राहुल गांधी की टिप्पणी की आलोचना की है और इसे देश विरोधी तक बता दिया है। अब बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी राहुल गांधी के इस बयान पर भड़के हुए हैं और उन्होंने भी इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सम्राट चौधरी ने कहा है कि राहुल गांधी ने ऐसी टिप्पणी कर 140 करोड़ देशवासियों का अपमान किया है और उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चााहिए। सीएम सम्राट चौधरी ने एक्स पर यह भी लिखा कि राहुल गांधी जी का बयान बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण और उनकी अराजकतावादी सोच को दर्शाने वाला है। सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा, 'देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति राहुल गांधी जी का बयान बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण और उनकी अराजकतावादी सोच को दर्शाने वाला है। लगातार चुनावी हार और निराशा अब उनके शब्दों और व्यवहार में साफ दिखाई देने लगी है। गांधी परिवार के आरंभ से अंत तक अपने शासनकाल में सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार किया, राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखा, लेकिन ये रंग बदलने वाले देशहित और लोकतंत्र की बात किस मुंह से करते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की सीमाएं सुरक्षित हुई हैं, आतंकवाद पर लगाम लगी है, लोकतंत्र सशक्त हुआ और भारत का सम्मान विश्वभर में बढ़ा है। राहुल गांधी जी ने केवल प्रधानमंत्री का नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की भावनाओं का अपमान किया है। इस बेतुके बयान के लिए सार्वजनिक रूप से उन्हें माफी मांगनी चाहिए। अत्यंत निंदनीय!' जीतन राम मांझी क्या बोले इधर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई है। जीतन राम मांझी ने एक्स पर लिखा, 'राहुल गांधी, हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ‘खुद्दार’ हैं। 5 में से 4 राज्यों के चुनाव में बुरी तरह से हारने का ये मतलब नहीं कि आप अनाप शनाप भाषा का इस्तेमाल करेंगे। राहुल गांधी जी आपकी भाषा और बचकानी हरकत का नतीजा है कि कांग्रेस देश से विलुप्त हो रही है। जो खुद ना घर के ना घाट के हैं। उनसे ऐसी ही अमर्यादित भाषा की उम्मीद कर सकते है। लोकतंत्र में इस तरह की भाषा का मैं कड़ी निंदा करता हूँ। चिराग पासवान ने की निंदा एलजेपी (आऱ) सुप्रीमो और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी राहुल गांधी के बयान की निंदा की है। चिराग पासवान ने एक्स पर लिखा, 'कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के लिए इस प्रकार की अभद्र टिप्पणी करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है। हमारे प्रधानमंत्री देश की 140 करोड़ आबादी का प्रतिनिधित्व कर रहें है , ऐसे में जब ऐसी भाषाएं नेतृत्वकर्ता के लिए कही जाती है तो उसका प्रभाव देश की आबादी पर भी पड़ता जो कतई उचित नहीं है। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की गरिमा और संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान बनाए रखना प्रत्येक जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। मैं और मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) इस बयान की कड़ी निंदा करती है।' राहुल गांधी ने क्या कहा था आपको बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस को '' गद्दार'' करार देते हुए आरोप लगाया था कि वे रोजाना संविधान पर हमला कर रहे हैं और चुनिंदा उद्योगपतियों को देश के हित बेच चुके हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ये गंभीर आरोप अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली के दौरे के दौरान दिन लगाए थे। राहुल गांधी ने रायबरेली में क्रांतिकारी वीरा पासी की स्मृति में आयोजित 'बहुजन स्वाभिमान सभा' को संबोधित करते हुए संविधान को डॉ. बीआर आंबेडकर व महात्मा गांधी की ''आवाज का प्रतिनिधित्व'' करने वाला दस्तावेज बताया था और इसकी रक्षा करने का आह्वान किया था। उन्होंने लोगों से आह्वान करते हुए कहा, '' आपको खड़े होकर लड़ना होगा। जब आरएसएस कार्यकर्ता आपके घरों में आकर नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के बारे में बात करें, तो आपको उन्हें बताना होगा कि उनके प्रधानमंत्री, उनके गृह मंत्री और उनका संगठन 'गद्दार' हैं। उन्होंने हमारे हिंदुस्तान को बेच दिया है और हमारे संविधान, आंबेडकर जी और महात्मा गांधी पर हमला किया है। राहुल गांधी ने बाद में अमेठी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रायबरेली में दिए गए अपने बयान का जिक्र करते हुए कहा था मैंने कहा था कि मोदी और अमित शाह गद्दार हैं। अगर कोई हमारे संविधान को कमजोर और नष्ट करता है, तो उसे गद्दार के अलावा और क्या कहा जाना चाहिए?'' उन्होंने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, ''वे मुझसे माफी मांगने को कहते हैं। मैं कभी माफी नहीं मांगूंगा। मैं उनसे डरता नहीं हूं।''

30 दिन में फाइल निपटाओ वरना सस्पेंशन तय: बिहार सरकार का सख्त संदेश

पटना बिहार में जनता की समस्याओं के समाधान का फाइल लटकाने वालों अफसरों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अफसरों को दो टूक शब्दों में संदेश था कि कि हर हाल में जनता की समस्याओं का समाधान कम से कम समय में करना पड़ेगा। सीएम के ऐलान के बाद पहला विकेट मुजफ्फरपुर में गिरा। जिले में एक राजस्व अधिकारी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। मंत्री ठीक से काम करेगा तो अधिकाकारियों और कर्मचारियों को भी अपने दायित्यव का समय से पालन करना पड़ेगा। भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। इसी के तहत मुजफ्फरपुर के कुढनी में पदस्थापित राजस्व अधिकारी धर्मेंद्र कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। इस विभाग पर भ्रष्टाचार का सबसे अधिक आरोप लगता है। इसने कैंसर रोग की तरह विभाग को जकड़ लिया है। इसलिए एंटिबायोटिक से इलाज शुरू हो गया है। धर्मेंद्र कुमार पर कई बार काम में लापरवाही के आरोप लगे। यह सभी अधिकारियों के लिए एक मैसेज है। तीन महीनों तक हड़ताल के कारण काम काफी पीछे पड़ गया है। अधिकारियों को दिन रात एक करके इमानदारी के साथ काम करना पड़ेगा। जब मंत्री इमानदारी से काम करेंगे तो अधिकारियों और कर्मियों को भी अपने कार्य व्यवहार में सुधार लाना पड़ेगा। दिलीप जायसवाल ने कहा कि लापरवारी पर कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी। माननीय मुख्यमंत्री ने भी साफ कर दिया है कि जनता का काम सफर नहीं करना चाहिए। इसके लिए तीस दिनों का समय भी तय कर दिया गया है। इस समय सीमा का पालन होना चाहिए। जो कोताही बरतेंगे वे नप जाएंगे। उन्हें कोई नहीं बचा पाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश को जमीन पर उतारा जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीते 11 मई को ही साफ कर दिया था कि किसी भी फाइल को 30 दिनों में निष्पादित कर देना पड़ेगा। ऐसा नहीं करने पर 31वें दिन अधिकारी सस्पेंड हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने सहयोग पोर्टल और सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100 का भी शुभारंभ किया था। सोमवार को उन्होंने फिर से यह बात दोहराई। कहा कि फाइलों को अटकाना और भटकाना नहीं है। जो मामले न्यायालय से संबंधित हैं उनमें भी तीस दिनों के अंदर कोई ना कोई ऐक्शन दिखना चाहिए। अंतिम नहीं तो अंतरिम आदेश तो होना ही चाहिए। ऐसे मामलों में अधिकारियों को 10 दिन और 20 दिनों पर नोटिस दी जाएगी। 25वें दिन की नोटिस के बाद ऐसे अधिकारी खुद को निलंबित समझें।

शिक्षा और विकास पर फोकस,हर प्रखंड में मॉडल स्कूल और नए डिग्री कॉलेज

पटना बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए की नई सरकार का गठन हुए एक महीना हो गया है। सम्राट चौधरी ने बीते 15 अप्रैल को उन्होंने लोक भवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अपने एक माह के कार्यक्रम में उन्होंने 7 बड़े फैसले लिए हैं। इनमें बिहार के 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप बनाना भी शामिल है। इन टाउनशिप में पूरे प्लान के साथ कॉलोनियां बसेंगी। इनमें एक तरफ बाजार होंगे तो दूसरी ओर लोगों के रहने के लिए आवास तय होंगे। कॉलोनियों में चौड़ी सड़कों का निर्माण होगा। कॉलोनियों को हरा-भरा रखने के लिए सड़कों के किनारे और पार्कों में बड़ी संख्या में पेड़ लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री का यह ड्रीम प्रोजेक्ट में एक है। इसमें सासाराम को जोड़ने का प्रस्ताव आया है। इससे शहरी दबाव में कमी आएगी, लोगों को सुविधायुक्त जीवन का लाभ मिल सकेगा। इन स्थानों पर बनेंगी टाउनशिप पटना में पाटलिपुत्र, सोनपुर में हरिहरनाथपुर, गया में मगध, दरभंगा में मिथिला, सहरसा में कोसी, पूर्णिया में पूर्णिया, मुंगेर में अंग, सीतामढ़ी में सीतापुरम, भागलपुर में विक्रमशिला, मुजफ्फरपुर में तिरहुत और छपरा में सारण नाम से टाउनशिप बनेगी। हर प्रखंड में मॉडल स्कूल और डिग्री कॉलेज सम्राट सरकार ने अपने दूसरी कैबिनेट की बैठक में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने सभी जिला स्कूलों और प्रत्येक प्रखंड के चयनित एक उच्च माध्यमिक विद्यालय को ‘मॉडल स्कूल’ के रूप में विकसित करने की योजना को मंजूरी दी। साथ ही इसके लिए मुख्यमंत्री ₹800 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी, ताकि इस योजना को धरातल पर उतारने में दिक्कत नहीं आए। वहीं, उन्होंने डिग्री कॉलेज रहित 211 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए ₹104 करोड़ (₹50 लाख प्रति कॉलेज) भी स्वीकृत किए। इसके लिए 9152 पदों का सृजन होगा। सहयोग पोर्टल और सहयोग शिविर लोगों की समस्याओं के त्वरित निष्पादन और सरकार के उत्तरदायित्व को ध्यान में रखकर सहयोग की त्रिवेणी को शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सहयोग हेल्पलाइन : 1100, सहयोग पोर्टल : sahyog.bihar.gov.in और पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाने का निर्णय लिया है। शिविर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को लगेंगे। शिविर में ब्लॉक, थाना और अंचल की तमाम शिकायतों की सुनवाई होगी। पोर्टल पर सरकारी योजना से जुड़ी शिकायत के निबटारे के लिए 30 दिन का लक्ष्य तय है। 30 में शिकायत का निबटारा नहीं होता है, तोदोषी अधिकारी या कर्मचारी का निलंबन तय है। निजी स्कूलों में मनमानी फीस पर लगाम निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर भी एक बड़ी पहल मुख्यमंत्री ने की। उन्होंने कहा है कि निजी विद्यालयों को फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। मनमानी फीस बढ़ोतरी और अनावश्यक शुल्क पर रोक रहेगी। छात्रों के परिजनों को किताबें और यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदने की स्वतंत्रता होगी। इसके लिए स्कूल प्रबंधन किसी को खास दुकान से खरीदने को बाध्य नहीं करेंगे। 50 करोड़ तक के ठेके बिहारियों को मिलेंगे छठे फैसले में 50 करोड़ रुपये तक के सिविल कार्यों में राज्य के ठेकेदारों (संवेदकों) को प्राथमिकता देने के लिए बिहार लोक निर्माण संहिता में संशोधन किया गया। अब से 50 करोड़ रुपये तक कार्यों के ठेके बिहारियों को मिलेंगे। इससे राज्य के लोगों को काम के अधिक मौके मिलेंगे। ‘पुलिस दीदी योजना’ की शुरुआत मुख्यमंत्री ने इसी प्रकार ‘पुलिस दीदी योजना’ की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा बढ़ाना तथा पुलिस और समाज के बीच भरोसे को मजबूत करना है। इसके लिए 1500 स्कूटी महिला पुलिस के लिए खरीदने का निर्णय लिया गया है। कॉलेज और स्कूल के सामने पुलिस दीदी की तैनाती होगी, ताकि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध पर नकेल कसी जा सके।