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Patiala Police Under Scanner: CCTV न लगाने पर हाईकोर्ट सख्त, मांगा स्पष्टीकरण

पटियाला. थाने में सी.सी.टी.वी. कैमरे न लगाने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दायर एक कंटेम्प्ट पटीशन के चलते पंजाब पुलिस घिरती नजर आ रही है। हाई कोर्ट ने इस मामले में पंजाब पुलिस के डी.जी.पी. सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस संबंध में पटियाला जेल में बंद कैदी अमन प्रजापत ने अपने वकील एडवोकेट मयूर करकड़ा के माध्यम से पटीशन दायर की थी। नोटिस जारी होने के बाद एडवोकेट मयूर करकड़ा ने बताया कि उनके क्लाइंट अमन प्रजापत ने पंजाब पुलिस के खिलाफ पटीशन दायर कर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों का गंभीर उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। पटीशन में दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के हर पुलिस थाने और चौकी में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाना अनिवार्य किया था, लेकिन पटियाला पुलिस ने इन आदेशों की अवहेलना करते हुए कैमरे नहीं लगाए। पटीशनर की ओर से वकील मयूर करकड़ा ने अदालत में पक्ष रखा। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने नोटिस ऑफ मोशन जारी करते हुए पंजाब पुलिस को 30 अप्रैल 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। करकड़ा ने बताया कि यह मामला एफआईआर नंबर 28 दिनांक 28.03.2024 से संबंधित है, जो एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत थाना सदर पटियाला में दर्ज हुई थी। पटीशनर का आरोप है कि पुलिस पोस्ट बहादुरगढ़ में सी.सी.टी.वी. कैमरे नहीं लगे थे, जिसके कारण उसके केस से जुड़े अहम सबूत उपलब्ध नहीं हो सके। ट्रायल के दौरान पुलिस गवाहों ने भी स्वीकार किया कि संबंधित पुलिस पोस्ट पर सी.सी.टी.वी. कैमरे मौजूद नहीं थे, जिससे कंप्लायंस रिपोर्ट पर सवाल खड़े होते हैं। पटीशनर ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताते हुए पटियाला जिले में सी.सी.टी.वी. व्यवस्था की व्यापक जांच की मांग की है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस केस की पैरवी पटियाला की अदालत में आपराधिक मामलों के वरिष्ठ वकील सतीश करकड़ा कर रहे हैं और मामला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरजीत सिंह की अदालत में विचाराधीन है।

वाईफाई राउटर से हो सकती है हैकिंग और जासूसी, घर में इन गलतियों से बचें

  नई दिल्ली भारत सरकार ने हाल ही में चीनी CCTV कैमरों को लेकर सख्त कदम उठाया है और STQC सर्टिफिकेशन मैंडेटरी कर दिया है. इसका असर मोस्टली चीनी सीसीसीटीवी कैमरा कंपनियों पर पड़ा. इनमे Dahua और Hikvision हैं. साथ ही TP-Link के कैमरों पर भी शिकंज कसा जा सकता है. लेकिन इसी बहस के बीच एक और बड़ा खतरा चुपचाप हमारे घरों में मौजूद है, जिस पर अभी तक उतना ध्यान नहीं गया है. WiFi राउटर।  वाईफाई राउटर की सिक्योरिटी पर सवाल आज भारत में करोड़ों घरों में इंटरनेट कनेक्शन है. हर घर में एक राउटर है, जो सिर्फ इंटरनेट नहीं देता, बल्कि पूरे डिजिटल इकोसिस्टम का गेटवे होता है. आपके फोन से लेकर लैपटॉप, बैंकिंग ऐप से लेकर स्मार्ट टीवी और CCTV तक. सब कुछ इसी एक डिवाइस से होकर गुजरता है. ऐसे में अगर यही डिवाइस कमजोर हो, तो पूरा सिस्टम खुला हुआ दरवाजा बन जाता है।  अमेरिका ने बाहर के राउटर को अमेरिका में बैन किया इंटरनेशनल लेवल पर भी राउटर को लेकर खतरा तेजी से बढ़ा है. अमेरिका में हाल ही में फेडरल कम्युनिकेशन कमिशन (FCC) ने विदेशी इलेक्ट्रोनिक्स, खासकर चीन में बने नेटवर्क डिवाइसेज़ को लेकर चिंता जताई है. FCC ने बार बने हुए राउटर्स पर रोक लगाने का भी फैसला किया है।  रिपोर्ट्स में बताया गया कि मलेशियस एक्टर्स राउटर्स में मौजूद सिक्योरिटी गैप का फायदा उठाकर पूरे नेटवर्क को एक्सेस कर लेते हैं. यह सिर्फ डेटा चोरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बड़े स्तर पर नेटवर्क डिसरप्शन और जासूसी तक पहुंच जाता है।  पिछले कुछ सालों में Volt Typhoon और Flax Typhoon जैसे साइबर ऑपरेशंस में राउटर और नेटवर्क डिवाइसेज़ को टारगेट किया गया, जिससे यह साफ हो गया कि अब युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि नेटवर्क पर भी लड़ा जा रहा है।  भारत में चीनी राउटर्स की भरमार भारत में समस्या और भी बड़ी है. यहां ज्यादातर लोग सस्ते और बजट राउटर खरीदते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या चीन या चीनी सप्लाई चेन से जुड़े ब्रांड्स की होती है।  इन डिवाइसेज़ में अक्सर सिक्योरिटी अपडेट्स समय पर नहीं मिलते, और कई बार फर्मवेयर में ही कमजोरियां होती हैं. यूज़र को इस बारे में जानकारी तक नहीं होती।  लोगों में राउटर सिक्योरिटी अवेयरनेस की कमी इससे भी बड़ी बात यह है कि इन राउटर्स को इंस्टॉल करने वाले टेक्निशियन ही कई बार डिफॉल्ट यूज़रनेम और पासवर्ड सेट करके छोड़ देते हैं. और वही क्रेडेंशियल्स उनके पास भी रहते हैं. यानी आपके घर का इंटरनेट सिर्फ आपका नहीं होता, बल्कि किसी तीसरे व्यक्ति के पास भी उसकी चाबी हो सकती है।  भारत में आम यूज़र राउटर की सेटिंग्स तक पहुंचना भी नहीं जानता. IP एड्रेस क्या होता है, एडमिन पैनल कैसे खुलता है, फर्मवेयर अपडेट कैसे किया जाता है. ये सब चीजें ज्यादातर लोगों के लिए तकनीकी और जटिल लगती हैं।  नतीजा यह होता है कि सालों तक एक ही पासवर्ड चलता रहता है, और सिक्योरिटी सेटिंग्स कभी बदली ही नहीं जातीं. लोगों को अक्सर ये लगता है कि अगर उनका वाईफाई कोई यूज कर भी ले तो कोई खास फर्क नहीं पड़ता।  लेकिन यहां प्रॉब्लम ये है कि अगर कोई आपका वाईफाई ऐक्सेस कर सकता है तो मुमकिन है आपके राउटर का कंट्रोल पैनल भी ओपन कर सकता है. अगर इसका ऐक्सेस मिल गया तो समझिए की वो आपको ब्लैकमेल आसानी से कर सकता है और नेटवर्क से जुड़े दूसरे डिवाइसेज को भी नुकसान पहुंचा चा सकता है या हैक कर सकता है।  हैकर्स के लिए सॉफ्ट टार्गेट होते हैं वाईफाई राउटर्स हैकर्स के लिए ऐसे राउटर सोने की खान होते हैं. वे इंटरनेट पर ऐसे डिवाइसेज़ को स्कैन करते हैं जिनमें डिफॉल्ट क्रेडेंशियल्स होते हैं या जिनका फर्मवेयर आउटडेटेड होता है।  एक बार एक्सेस मिलते ही वे राउटर को अपने कंट्रोल में लेकर उसे बॉटनेट का हिस्सा बना सकते हैं. इसका इस्तेमाल बड़े साइबर अटैक में किया जाता है. जैसे DDoS अटैक, जहां लाखों डिवाइसेज़ एक साथ किसी सर्वर पर ट्रैफिक भेजते हैं।  दरअसल 2016 में सामने आया Mirai बॉटनेट इसका सबसे बड़ा उदाहरण था, जिसमें दुनिया भर के लाखों IoT डिवाइसेज़ और राउटर हैक करके बड़े पैमाने पर इंटरनेट सर्विसेज ठप कर दी गई थीं।  उसके बाद से ऐसे हमले और ज्यादा एडवांस हो गए हैं. अब अटैकर्स सिर्फ ट्रैफिक जाम नहीं करते, बल्कि लंबे समय तक नेटवर्क के अंदर छिपे रहते हैं और डेटा चुराते रहते हैं।  यूजर को मिलना चाहिए राउटर का पूरा कंट्रोल भारत के कॉन्टेक्स्ट में एक और गंभीर पहलू सामने आता है. यहां ISP (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) द्वारा दिए जाने वाले राउटर अक्सर कस्टम फर्मवेयर पर चलते हैं, जिनमें यूज़र को पूरा कंट्रोल नहीं मिलता।  कई बार रिमोट एक्सेस फीचर ऑन रहता है, जिससे कंपनी या टेक्नीशियन दूर से भी राउटर में लॉगिन कर सकते हैं. अगर यही एक्सेस गलत हाथों में चला जाए, तो यह एक बड़ा बैकडोर बन सकता है।  हाल के सालों में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने यह भी पाया है कि कई राउटर में हार्डकोडेड क्रेडेंशियल्स होते हैं, जिन्हें बदला ही नहीं जा सकता. यानी भले ही यूज़र अपना पासवर्ड बदल दे, लेकिन डिवाइस के अंदर एक मास्टर एक्सेस पहले से मौजूद रहता है. यही वजह है कि कई देश अब टेलीकॉम और नेटवर्क उपकरणों के लिए सख्त टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन लागू कर रहे हैं।  आपका वाईफाई राउटर हैक हो गया तो क्या होगा? अगर राउटर कम्प्रोमाइज हो गया, तो हैकर आपके नेटवर्क के अंदर मौजूद हर डिवाइस को मॉनिटर कर सकता है. कौन सी वेबसाइट खुल रही है, कौन सा डेटा ट्रांसफर हो रहा है, यहां तक कि बैंकिंग डिटेल्स तक लीक हो सकती हैं. कई मामलों में DNS सेटिंग्स बदलकर यूज़र को फेक वेबसाइट पर रीडायरेक्ट किया जाता है, जहां से सीधे फ्रॉड होता है।  सिर्फ इतना ही नहीं, कई बार राउटर का इस्तेमाल जासूसी के लिए भी किया जा सकता है. अगर किसी घर या ऑफिस का नेटवर्क टारगेट हो जाए, तो बिना किसी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए पूरे डेटा ट्रैफिक को इंटरसेप्ट किया जा सकता है. यह तरीका पारंपरिक हैकिंग से ज्यादा खतरनाक माना जाता है, क्योंकि यूज़र को इसका पता तक नहीं चलता।  नेशनल सिक्योरिटी के लिए भी अहम है सेफ राउटर यह खतरा सिर्फ … Read more

महोबा में बैडमिंटन कोर्ट पर खेलते हुए खिलाड़ी की मौत, 5 सेकंड में हुआ दर्दनाक हादसा

महोबा  महोबा जिला स्टेडियम में बैडमिंटन खेल रहे पस्तोर गली निवासी 58 वर्षीय सुधीर गुप्ता की सडन कार्डियक अरेस्ट से अचानक मौत हो गई. रोजाना की तरह स्टेडियम पहुंचे सुधीर अपने साथियों के साथ पूरी ऊर्जा में खेल रहे थे. लगातार तीन शॉट खेलने के महज 11 सेकंड बाद उन्हें सीने में बेचैनी महसूस हुई. उन्होंने अपना हाथ दिल की तरफ ले जाने की कोशिश की, लेकिन 5 सेकंड के भीतर ही वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े. साथी खिलाड़ी उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।  सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर स्टेडियम के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि सुधीर गुप्ता पूरी तरह फिट लग रहे थे. खेल के दौरान अचानक उनके कदम लड़खड़ाए और वह संभल नहीं पाए।  डॉक्टरों का प्राथमिक अनुमान है कि यह साइलेंट हार्ट अटैक का मामला है. इस घातक अटैक ने उन्हें संभलने या मदद मांगने तक का मौका नहीं दिया. खेल का मैदान देखते ही देखते मातम के सन्नाटे में बदल गया।  परिवार में कोहराम, वीडियो वायरल सुधीर गुप्ता की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार और पस्तोर गली मोहल्ले में कोहराम मच गया है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. सोशल मीडिया पर अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जो लोगों को फिटनेस और जीवन की अनिश्चितता पर सोचने पर मजबूर कर रहा है. एक हंसते-खेलते इंसान का इस तरह अचानक चले जाना हर किसी को हैरान कर रहा। है।   

सरकार का नया नियम: CCTV कैमरे से हो रही थी जासूसी, डेटा पाकिस्तान तक पहुंच रहा था

नई दिल्ली भारत सरकार CCTV कैमरों को लेकर सख्त हो गई है.  देश में सीसीटीवी कैमरों को लेकर बड़ा खतरा सामने आया है. अब यह सिर्फ निगरानी का मामला नहीं रहा, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी का मुद्दा बन गया है।  हाल ही में जांच एजेंसियों ने एक नेटवर्क पकड़ा है, जिसमें सीसीटीवी कैमरों से रिकॉर्ड डेटा पाकिस्तान भेजा जा रहा था. कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है. सरकार ने एक गाइडलाइन जारी की है।  CCTV की सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं. कंपनियों को अगाह कर दिया गया है कि जो मार्केट में सीसीटीव कैमरे बेचे जा रहे हैं उसमे स्टैंडर्ड फॉलो किए जाएं. सरकार ने ये भी कहा है कि सराकरी डिपार्टमेंट क्राटेरिया मैच ना करने वाली कंपनियों से सीसीटीवी नहीं खरीदें।  भारत में कमजोर है सीसीटीवी की सिक्योरिटी! यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पहले से ही विदेशी सीसीटीवी और सर्विलांस सिस्टम पर सवाल उठते रहे हैं. खासकर चीनी डिवाइस को लेकर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि इंटरनेट से जुड़े कैमरों को दूर बैठकर कंट्रोल किया जा सकता है और डेटा बाहर भेजा जा सकता है।  अब सवाल ये है कि क्या भारत में लगे सीसीटीवी कैमरे सुरक्षित हैं. जवाब थोड़ा चिंता बढ़ाने वाला है. साइबर रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश में हजारों सीसीटीवी कैमरे खुले इंटरनेट पर एक्सपोज्ड हैं और उनमें बेसिक सिक्योरिटी की कमी है. ऐसे कैमरे हैकिंग और डेटा लीक के लिए आसान टारगेट बन जाते हैं।  CERT-In और दूसरी साइबर एजेंसियों ने भी कई बार चेतावनी दी है कि IP कैमरों में सिक्योरिटी खामियां पाई जाती हैं. डिफॉल्ट पासवर्ड, कमजोर सॉफ्टवेयर और अपडेट की कमी सबसे बड़ी वजह है. ऐसे डिवाइस को इंटरनेट पर स्कैन करके हैक किया जा सकता है।  दूर से हैक हो सकते हैं कैमरे एजेंसियों का कहना है कि हैकर्स इन कैमरों को बॉटनेट में बदल सकते हैं. यानी हजारों कैमरे एक साथ कंट्रोल किए जा सकते हैं. Cyber Swachhta Kendra के तहत भी ऐसे खतरों को लेकर अलर्ट जारी किया जाता है।  इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. PIB की प्रेस रिलीज में सीसीटीवी को लेकर बड़े फैसले बताए गए हैं. सरकार ने कहा है कि अब सीसीटीवी के लिए सख्त सिक्योरिटी नियम लागू होंगे. हर डिवाइस के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की पूरी जानकारी देनी होगी।  इसमें चिप, फर्मवेयर और सोर्स तक की डिटेल शामिल होगी. ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई संदिग्ध सोर्स तो नहीं है. सरकार ने साफ किया है कि किसी भी कैमरे में बैकडोर नहीं होना चाहिए. यानी ऐसा कोई रास्ता नहीं होना चाहिए जिससे डेटा बाहर भेजा जा सके।  सीसीटीवी खरीदने से पहले जरूर देखें सर्टिफिकेशन हर सीसीटीवी कैमरे को सर्टिफिकेशन से गुजरना होगा. यह टेस्टिंग सिर्फ सरकारी मान्यता प्राप्त लैब में होगी. बिना टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के कोई भी कैमरा भारत में नहीं बिक सकेगा।  सरकारी विभागों को भी निर्देश दिए गए हैं. वे सिर्फ उन्हीं कैमरों को खरीदेंगे जो इन नियमों को फॉलो करते हैं. साथ ही सभी मंत्रालयों को अपने CCTV सिस्टम की सिक्योरिटी जांचने के निर्देश दिए गए हैं।  चीनी सीसीटीवी कैमरों पर अपना स्टिकर लगा कर बेचती हैं कई भारतीय कंपनियां चिंता वाली बात ये है कि देश में करोड़ों सीसीटीवी कैमरे पब्लिक प्लेस पर लगे हैं. सीसीटीवी की सिक्योरिटी पर काफी समय से उतना ध्यान नहीं दिया गया. हैकर्स या क्रिमिनल्स समय समय पर सीसीटीवी हैक करके सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं. भले ही सरकार ने नए खरीद पर सख्ती लगाई है, लेकिन उन पुराने कैमरों का क्या?  दरअसल सीसीटीवी की सिक्योरिटी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनें पर टिकी होती है. कंपनियां आम तौर पर चीन से कैमरा इंपोर्ट करके अपनी ब्रांडिंग करके भारत में बेचती हैं. उनके पास अपना सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन तक नहीं होता है. इसके लिए भी वो चीनी सॉफ्टवेयर पर भरोसा करती हैं. ऐसे में बैकडोर एंट्री यानी हैकिंग के चासेस बढ़ जाते हैं।  भारत में सीसीटीवी कैमरे बेचने वाली कंपनियों पर सरकार को शिकंजा कसना होगा. खास तौर पर ऐसी कंपनियां जो चीन से कैमरा इंपोर्ट करके अपनी ब्रांडिंग के साथ बेचते हैं और सॉफ्टवेयर तक अपना नहीं बनाते हैं. इस तरह के चीनी कैमरे सस्ते मिलते हैं और सर्विस कॉस्ट भी कम होती है. इसलिए ये बाजार में सबसे सस्ते और ज्यादा एवेलेबल होते हैं।  दिलचस्प ये है कि कई भारतीय ब्रांड चीनी कैमरों पर अपना स्टिकर लगा कर, सॉफ्टवेयर या फर्मवेयर में थोडे़ बदलाव करके ऑनलाइन-ऑफलान धड़ल्ले से बेच रही हैं. सोचिए आप घर के अंदर इन कैमरों को लगाते हैं और वो फुटेज चीनी हैकर्स को मिल रहा हो? CP Plus ने क्या कहा? इस बीच इंडस्ट्री ने भी सरकार के इस कदम का समर्थन किया है. CP PLUS के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य खेमका ने कहा, 'भारत ने सीसीटीवी सिक्योरिटी के लिए सख्त नियम लागू करके बड़ा कदम उठाया है. जब कई देश अभी भी कमजोरियों से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में भारत ने लीडरशिप दिखाई है' हमारे हिसाब से यह बहुत अहम कदम है. हार्डवेयर की पूरी जानकारी, सिक्योरिटी टेस्टिंग और सरकारी जांच जैसे नियम CCTV सिस्टम को डिजाइन से ही सुरक्षित बनाएंगे. इससे आम लोगों और संस्थानों का भरोसा भी बढ़ेगा।  एक जैसी राष्ट्रीय पॉलिसी से पूरा सिस्टम स्टैंडर्ड बनेगा. हर कैमरा एक ही नियम पर चलेगा. इससे कमजोर कड़ी खत्म होगी और साइबर खतरे कम होंगे. इंडस्ट्री भी इसके लिए तैयार है. सैकड़ों सर्टिफाइड मॉडल पहले ही बाजार में आ चुके हैं।  अब जब AI, IoT और क्लाउड के साथ सर्विलांस आगे बढ़ रहा है, तो सिक्योरिटी सबसे जरूरी है. यह कदम भारत को ग्लोबल लेवल पर मजबूत बनाएगा और सुरक्षित सर्विलांस का भविष्य तय करेगा। 

PAK की साजिश का खुलासा, दिल्ली से कश्मीर तक सेना की जासूसी के लिए CCTV कैमरे लगवा रहा था

गाजियाबाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत गाजियाबाद पुलिस ने पाकिस्तान की ISI से जुड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. अब तक इस मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो आरोपियों नौशाद अली और समीर की तलाश जारी है. आरोपियों ने पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के इशारे पर भारतीय सेना की जासूसी की योजना बनाई थी।  जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क दिल्ली और सोनीपत रेलवे स्टेशन समेत कई महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठानों में सोलर पावर्ड CCTV कैमरे लगाकर लाइव फीड पाकिस्तान भेजने की योजना बना रहा था. इन कैमरों के जरिए सेना की मूवमेंट, हथियार और अन्य संवेदनशील जानकारी भेजी जानी थी।  पाकिस्तान ISI का जासूसी रैकेट का खुलासा  जासूसी नेटवर्क का संचालन सुहैल मलिक उर्फ रोमियो, नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर कर रहे थे. सुहैल मलिक को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जबकि साने इरम उर्फ महक इस नेटवर्क को चलाने में सक्रिय भूमिका निभा रही थी. इसके अलावा प्रवीन, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि और रितिक गंगवार भी गिरफ्तार हुए हैं. पूछताछ में पता चला कि नेटवर्क का विस्तार उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और नेपाल तक फैला हुआ था।  CCTV और GPS लोकेशन का इस्तेमाल आरोपियों ने रेलवे स्टेशन और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की लाइव वीडियो और GPS लोकेशन विदेश में बैठे हैंडलर्स को भेजी. इसके लिए मोबाइल फोन में एक खास एप्लिकेशन इंस्टॉल किया गया था, जिसकी ट्रेनिंग ऑनलाइन पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स ने दी थी. नेटवर्क के कई आरोपियों ने दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर कैमरे छिपाकर लगाये. पुलिस ने इन्हें बरामद कर लिया है।  14 मार्च से SIT की कार्रवाई इस मामले की शुरुआत 14 मार्च 2026 को हुई, जब थाना कौशांबी पुलिस को भोवापुर इलाके में कुछ युवकों की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली. इसके बाद BNS की धारा 61(2)/152 और ऑफिशियल एक्ट की धारा 3/5 के तहत केस दर्ज किया गया. 5 युवक और 1 महिला को गिरफ्तार किया गया।  पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की, जिसमें कई आपत्तिजनक वीडियो, फोटो और महत्वपूर्ण लोकेशन मिलीं. इनके खिलाफ जांच के लिए एसआइटी गठित की गई. SIT में एसीपी रैंक के दो अधिकारी और चार इंस्पेक्टर शामिल हैं. इसमें अपराध शाखा, खुफिया विभाग, साइबर क्राइम टीम और SWAT टीम की मदद ली जा रही है।  20 मार्च को 9 और आरोपी गिरफ्तार SIT ने 20 मार्च को 9 और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 5 नाबालिग भी शामिल थे. गिरफ्तार आरोपियों में गणेश, विवेक, गगन कुमार प्रजापति और दुर्गेश निषाद के नाम सामने आए. पूछताछ में पता चला कि आरोपी विदेश में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर रेलवे और सुरक्षा ठिकानों की रेकी करते और फोटो, वीडियो व GPS लोकेशन भेजते थे।  जासूसी नेटवर्क ने भारतीय मोबाइल नंबरों के OTP विदेश भेजकर व्हाट्सएप और सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने की योजना बनाई थी. इसके लिए आरोपी 500 से 5000 रुपये तक लेते थे. सिम कार्ड हासिल करने के लिए स्नैचिंग, एजेंट्स से प्री-एक्टिवेटेड सिम खरीदना और अपने या परिवार के नाम पर सिम लेना जैसे तरीके अपनाए गए. पैसे के लेन-देन के लिए UPI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया, लेकिन सीधे खाते में पैसे नहीं लिए. इसके बजाय जन सेवा केंद्रों या दुकानों के जरिए ट्रांसफर कर नकद राशि हासिल की जाती थी।  मोबाइल, OTP और सिम कार्ड के जरिए जासूसी जांच में यह भी पता चला कि नेटवर्क ने तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं को अपने साथ जोड़ा था, जैसे मोबाइल मैकेनिक, CCTV ऑपरेटर और कंप्यूटर से जुड़े लोग. इन युवाओं को पैसों के लालच और विदेश में बैठे हैंडलर्स के निर्देशों के तहत शामिल किया गया. पुलिस फिलहाल फरार आरोपियों नौशाद अली और समीर की तलाश में लगी हुई है. जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और इसके पीछे की साजिश की गहनता से जांच कर रही हैं. यह मामला देश की सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। 

महिला का लिफ्ट में प्राइवेट वीडियो वायरल, हिडन कैमरा पहचानने के उपाय जानें

मुंबई मुंबई के अंधेरी में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. एक 36 साल की महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. उनका आरोप है कि की लिफ्ट में लगे CCTV का एक निजी वीडियो अचानक वायरल हो गया।  रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला लिफ्ट में एक व्यक्ति के साथ थी और दोनों को यह पता नहीं था कि कैमरा उनकी रिकॉर्डिंग कर रहा है. बाद में यह वीडियो किसी ने CCTV बैकअप सिस्टम से निकालकर सोसाइटी और सोशल मीडिया में फैलाना शुरू कर दिया, जिसके बाद महिला को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।  पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि CCTV सिस्टम तक पहुंच रखने वाले व्यक्ति ने ही बैकअप से वीडियो निकाला और उसे शेयर किया. इस मामले में IT एक्ट और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. CCTV की सिक्योरिटी पर सवाल यह घटना सिर्फ एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं है. यह एक बड़ा सवाल भी उठाती है कि आज के समय में जब हर जगह कैमरे लगे हैं, तो हमारी प्राइवेसी कितनी सुरक्षित है. CCTV या कैमरा सिस्टम सुरक्षित तरीके से मैनेज नहीं किया जाए तो उसका गलत इस्तेमाल बहुत आसानी से हो सकता है. कई बार छोटी गलती जैसे सॉफ्टवेयर अपडेट ना करने की वजह से भी कैमरा हैक हो सकता है.  होटल और ट्रायल रूम में हिडेन कैमरा का खतरा आजकल होटल, ट्रायल रूम, चेंजिंग रूम और रेंटल अपार्टमेंट में छिपे कैमरों की खबरें भी सामने आती रहती हैं. टेक्नोलॉजी छोटी और सस्ती होने की वजह से ऐसे स्पाई कैमरे बनाना आसान हो गया है जिन्हें स्मोक डिटेक्टर, चार्जर, घड़ी, एयर वेंट या दीवार के छोटे छेद में छिपाया जा सकता है. कई बार लोग सोचते हैं कि चेंजिंग रूम या ट्रायल रूम पूरी तरह सुरक्षित जगह है. लेकिन अगर समय समय पर ट्रायल रूम और होटल के लीक्ड फुटेज की खबरें आती रहती हैं. कैसे पता लगाएं हिडेन कैमरा कहां है?  ऐसे में सबसे पहला सवाल यही है कि किसी कमरे में छिपा कैमरा है या नहीं, यह कैसे पहचाना जाए?  कमरे में घुसते ही सबसे पहले आसपास की चीजों को ध्यान से देखना जरूरी है. अगर कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अजीब जगह लगा हुआ है या किसी चीज में छोटा गोल छेद दिखाई देता है तो उस पर ध्यान देना चाहिए. स्पाई कैमरे अक्सर ऐसी जगहों पर लगाए जाते हैं जहां से पूरा कमरा दिखाई दे सके, जैसे दीवार के कोने, छत के पास लगे डिवाइस या स्मोक डिटेक्टर. मोबाइल फोन से पता करें मोबाइल फोन भी छिपे कैमरे पहचानने में मदद कर सकता है. अगर कमरे की लाइट बंद करके मोबाइल की टॉर्च दीवारों और उपकरणों पर डाली जाए तो कैमरे का लेंस अक्सर रोशनी को रिफ्लेक्ट करता है. अगर कहीं छोटा सा चमकता हुआ बिंदु दिखाई दे तो वहां कैमरा हो सकता है. कुछ स्पाई कैमरे इन्फ्रारेड लाइट का इस्तेमाल करते हैं ताकि वे कम रोशनी में भी रिकॉर्डिंग कर सकें. यह रोशनी इंसानी आंख से दिखाई नहीं देती लेकिन मोबाइल कैमरा उसे पकड़ सकता है. अगर मोबाइल कैमरे से कमरे को स्कैन किया जाए और स्क्रीन पर कहीं छोटी चमकती रोशनी दिखे तो वहां कैमरा हो सकता है. WiFI स्कैनिंग से भी जान सकते हैं इसके अलावा कई कैमरे इंटरनेट से जुड़े होते हैं. ऐसे में अगर आप कमरे के WiFi नेटवर्क से जुड़े हैं तो नेटवर्क स्कैनिंग ऐप से यह देखा जा सकता है कि कितने डिवाइस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं. अगर कोई संदिग्ध डिवाइस दिखाई दे तो सावधान रहने की जरूरत होती है. एक और तरीका है कमरे के शीशों की जांच करना. कई बार टू-वे मिरर का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें एक तरफ से आईना दिखाई देता है लेकिन दूसरी तरफ से कमरे के अंदर देखा जा सकता है. ऐसे शीशे की पहचान करने के लिए लोग उंगली टेस्ट भी करते हैं. सिक्योरिटी बेहद जरूरी हालांकि सिर्फ छिपे कैमरे ही खतरा नहीं हैं. कई बार कैमरे तो सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं लेकिन बाद में उनकी रिकॉर्डिंग का गलत इस्तेमाल किया जाता है. अंधेरी का मामला इसी बात का उदाहरण है जहां एक निजी पल CCTV में रिकॉर्ड हुआ और फिर सिस्टम से निकालकर वायरल कर दिया गया. साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि CCTV सिस्टम को ठीक से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. अगर बैकअप सर्वर या रिकॉर्डिंग सिस्टम तक बहुत ज्यादा लोगों की पहुंच हो तो फुटेज चोरी या लीक होने का खतरा बढ़ जाता है. स्पाई कैम का खतरा होने पर तुरंत रिकॉर्ड कर लें अगर किसी जगह आपको स्पाई कैमरा होने का शक हो तो उसे तुरंत छेड़ना नहीं चाहिए. पहले उसकी फोटो या वीडियो रिकॉर्ड कर लें ताकि सबूत सुरक्षित रहे. इसके बाद होटल मैनेजमेंट, स्टोर स्टाफ या संबंधित लोगों को जानकारी दें. जरूरत पड़े तो पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है. आज के डिजिटल दौर में कैमरे सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, लेकिन अगर उनका गलत इस्तेमाल हो जाए तो वही कैमरे किसी की प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं. इसलिए चाहे होटल का कमरा हो, ट्रायल रूम हो या चेंजिंग रूम, कुछ मिनट का सावधानी भरा चेक कई बार आपकी प्राइवेसी को सुरक्षित रख सकता है.

तरनतारन कॉलेज में स्टूडेंट ने छात्रा को मारी गोली, फिर आरोपी छात्र ने भी की आत्महत्या

तरन तारन पंजाब के तरनतारन जिले में एक फर्स्ट ईयर के लॉ स्टूडेंट ने कथित तौर पर अपनी क्लासमेट लड़की को गोली मारकर हत्या कर दी। फिर उसी हथियार से उसने खुद को भी गोली मार ली। पुलिस ने बताया कि तरनतारन के लॉ कॉलेज में सोमवार (9 फरवरी) को यह घटना घटी। पुलिस ने बताया कि युवक ने पहले सरेआम युवती की गोली मारकर हत्या कर दी। फिर खुद भी गोली मारकर सुसाइड कर लिया। यह गोलीबारी क्लासरूम के CCTV कैमरे में कैद हो गई। घटना से जुड़ा 10 सेकंड का एक CCTV फुटेज भी सामने आया है। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि छात्रा क्लासरूम में बैंच पर बैठी है, इसी दौरान युवक उसे गोली मारता है। फिर पलक झपकते ही स्टूडेंट ने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद कॉलेज कैंपस में हड़कंप मच गया। छात्र-छात्राओं में दहशत का माहौल है। डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) जगबीर सिंह ने PTI को फोन पर बताया कि प्रिंस राज ने क्लासरूम के अंदर संदीप कौर पर गोलियां चलाई। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद उसने खुद को भी गोली मार ली। पुलिस ने बताया कि राज द्वारा कौर की हत्या के पीछे का मकसद अभी पता नहीं चला है। फिलहाल, मामले की जांच चल रही है। पुलिस के मुताबिक, दोनों तरनतारन के उस्मा गांव में स्थित एक लॉ कॉलेज में फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट थे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि राज क्लास शुरू होने से पहले क्लासरूम में घुसा और पिस्तौल से कौर के सिर में गोली मार दी। इसके बाद उसने उसी हथियार से क्लासरूम के अंदर खुद को भी गोली मार ली। उन्होंने बताया कि कौर की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि राज को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। यह घटना उस्मा के माई भागो लॉ कॉलेज (Mai Bhago Law College in Usma) में हुई। दोनों को मृत घोषित कर दिया गया है। CCTV फुटेज में प्रिंस राज पीठ पर बैग टांगे क्लासरूम में जाते दिख रहा है। फिर वह कौर और एक दूसरी महिला क्लासमेट के पास जाता है। इस दौरान उनसे थोड़ी देर बात करता है। इसके बाद तीनों क्लासरूम के पीछे की सीटों पर चले जाते हैं। यहां तीनों बातें करते रहते हैं। कुछ ही देर बाद वीडियो में दिखता है कि प्रिंस राज अचानक खड़ा होता है और दोनों महिलाओं की तरफ पीठ करके अपना बैग खोलता है। वह एक बंदूक निकालता है। फिर मुड़ता है और कौर पर बहुत करीब से गोली चला देता है। इसके बाद कौर जमीन पर गिर जाती है। जबकि दूसरी क्लासमेट सदमे से पीछे हट जाती है। फिर प्रिंस राज बंदूक अपनी कनपटी पर रखता है और गोली चला देता है। फिर वह जमीन पर गिर जाता है।

कानून-व्यवस्था पर सख्ती: झारखंड HC ने थानों में CCTV लगाने की तय की अंतिम तिथि

रांची  झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि यह कार्यवाही तय समयसीमा के भीतर पूरी की जानी चाहिए, ताकि थानों में होने वाली हर गतिविधि पारदर्शी रहे और किसी भी प्रकार की अवैध कारर्वाई पर रोक लग सके। झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को ‘प्रॉपर्टी रिएल्टी प्राइवेट लिमिटेड‘, शौभिक बनर्जी सहित अन्य की ओर से दाखिल एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।  पिछली सुनवाई में अदालत ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और आईटी विभाग की सचिव को सशरीर उपस्थित होने का आदेश दिया था। अदालत के निर्देश पर ये सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित हुए और कोर्ट के समक्ष अब तक की प्रगति रिपोर्ट पेश की। सभी 334 थानों में जल्द से जल्द कैमरे लगाने का आदेश सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि 31 दिसंबर से पहले सभी जिलों के थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इसके बाद राज्य के सभी 334 थानों में जल्द से जल्द कैमरे लगाने का काम आरंभ किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सीसीटीवी कैमरे चालू अवस्था में रहें और उनका डाटा नियमित रूप से संरक्षित किया जाए। साथ ही कोटर् ने 5 जनवरी तक आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी है। यह मामला पश्चिम बंगाल निवासी शौभिक बनर्जी की याचिका पर आधारित है। याचिकाकर्ता ने बताया कि चेक बाउंस मामले में वह धनबाद कोर्ट में जमानत के लिए आए थे, लेकिन धनबाद पुलिस ने उन्हें दो दिनों तक अवैध रूप से थाना परिसर में रोके रखा और जबरन दबाव बनाकर दूसरे पक्ष का पक्ष लिया। उन्होंने दावा किया कि पूरी घटना बैंक मोड़ थाना में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई थी, किंतु पुलिस ने अदालत को बताया कि केवल दो दिन का ही सीसीटीवी बैकअप उपलब्ध है। अदालत ने इस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि धनबाद जैसे अपराधग्रस्त शहर में सीसीटीवी डेटा का सही रखरखाव न होना बेहद चिंताजनक है। अदालत ने सरकार को आदेश दिया कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो और सभी थानों में रिकॉडिर्ंग का पर्याप्त स्टोरेज सुनिश्चित किया जाए।

दिल्ली धमाका: पहली बार सामने आया वीडियो, गाड़ियों के बीच ब्लास्ट का खौफनाक दृश्य

नई दिल्ली दिल्ली कार ब्लास्ट का नया वीडियो सामने आया है.यह वीडियो उस वक्त का है जब ब्लास्ट हुआ था. वीडियो में एक आई 20 कार नजर आ रही है जो पार्किंग से निकलते ही ब्लास्ट हो जाती है. पुलिस जांच कर रही है और नए सीसीटीवी फुटेज सामने आ रहे हैं. माना जा रहा है कि यह पैनिक में किया गया अटैक था और टारगेट कुछ और था. ब्लास्ट का असर पूरे इलाके में देखा गया. लाल किले के पास सोमवार शाम हुए कार धमाके का वीडियो पहली बार सामने आया है। सीसीटीवी वीडियो में वह मंजर कैद हुआ है जब विस्फोटक लदे कार में जोरदार धमाके ने 12 लोगों की जिंदगी छीन ली और बहुतों को बुरी तरह जख्मी कर दिया। सीसीटीवी फुटेज पर 10 नवंबर 2025 की तारीख है तो समय 18:50:52 सेकेंड दिखता है। अंधेरा हो चुका है और चौराहे पर काफी ट्रैफिक है। बाइक, कार और ऑटो की कतारें हैं। ट्रैफिक सिग्नल भी ग्रीन हो चुका होता है और गाड़ियां धीमे-धीमे आगे बढ़ रही हैं तभी अचानक वहां एक आग का गोला उठता है और फिर अंधेरा छा जाता है। सोमवार शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास ट्रैफिक सिग्नल पर धीमी गति से चल रही कार में धमाका हुआ था। इस धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई जबकि 20 अन्य घायल हो गए। धमाके की चपेट में आने कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। इससे पहले कुछ वीडियो सामने आए थे जिसमें लोग धमाके के बाद इधर, उधर भागते हुए दिखे थे। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि विस्फोटक से लदी कार को जानबूझकर व्यस्त चौराहे पर लाया गया था। जांच में ये भी पता चला है कि ये विस्फोट हड़बड़ी में हुआ। मुख्य आरोपी के रूप में डॉक्टर उमर नबी का नाम सामने आया है, जो जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला एक डॉक्टर है और संदेह है कि वह ही कार चला रहा था जब धमाका हुआ। उसके परिवार के सदस्यों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है, जबकि फरीदाबाद में छापेमारी से बरामद अमोनियम नाइट्रेट जैसे विस्फोटक पदार्थों से इस घटना का लिंक जोड़ा जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की और जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए कश्मीर से दिल्ली-एनसीआर तक सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। पुलिस की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को केस सौंप दिया गया है, और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब संदिग्धों की तलाश में लगी हुई है।इस तरह की घटना ने राजधानी में आतंकवाद की पुरानी यादों को ताजा कर दिया है, जहां पहले भी इसी तरह के हमलों ने आम जनजीवन को प्रभावित किया था।

कोर्ट का निर्देश: शराब घोटाले में EOW कार्यालय के सभी CCTV रिकॉर्ड्स को तुरंत संरक्षित किया जाए

रायपुर  विशेष अदालत ने राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (EOW-ACB) को अपने कार्यालय के 122 दिनों के सीसीटीवी फुटेज और आवक-जावक रजिस्टर सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। यह निर्देश 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़े एक मामले में रायपुर सेंट्रल जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल (CG Liquor Scam News) की ओर से दाखिल आवेदन पर सुनवाई के बाद दिया गया। कोर्ट का आदेश EOW-ACB विशेष न्यायाधीश नीरज शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 5 जून 2025 से 5 अक्टूबर 2025 तक के सभी सीसीटीवी फुटेज और कार्यालय के आवक-जावक रजिस्टर को न्यायालय के अवलोकन के लिए सुरक्षित रखा जाए। इस दौरान कोर्ट में राज्य के उप महाधिवक्ता और एसीबी के विशेष लोक अभियोजक डॉ. सौरभ कुमार पांडेय तथा एडीपीओ एक्का मौजूद रहे। न्यायालय ने उन्हें निर्देश दिया कि वे इस आदेश की जानकारी संबंधित प्राधिकरण को तुरंत दें और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। जेल से किया गया दूसरा आवेदन चैतन्य बघेल की ओर से दाखिल एक अन्य आवेदन में आग्रह किया गया कि उन्हें रायपुर सेंट्रल जेल में अपने एकाउंटेंट, लेखा परीक्षक, प्रबंधकीय कर्मचारियों और व्यवसायिक सहयोगियों से अलग कक्ष में प्रत्येक कार्य दिवस पर मुलाकात की अनुमति दी जाए। इस पर एसीबी की ओर से कोई आपत्ति नहीं जताई गई। कोर्ट ने चैतन्य बघेल के अधिवक्ता फैजल रिजवी को निर्देश दिया कि वे मुलाकात करने वाले व्यक्तियों के नाम के साथ पृथक आवेदन प्रस्तुत करें, जिस पर आगे निर्णय लिया जाएगा। जांच के लिए अहम माना गया आदेश शराब घोटाले की जांच के बीच यह आदेश बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जा रहा है। कोर्ट के इस निर्देश से अब EOW कार्यालय की कार्यप्रणाली और वहां हुई गतिविधियों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, जो जांच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।