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महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब, दान राशि पहुंची 142 करोड़ रुपए

उज्जैन  महाकाल लोक बनने के बाद बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ दान का प्रवाह भी लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में महाकाल मंदिर समिति को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई है, जिसमें केवल दान मद से ही 78 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। यह बीते छह वर्षों में सबसे अधिक दान है और पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 27 करोड़ रुपए ज्यादा है। मंदिर समिति के अनुसार दान पेटियों से 62 करोड़ रुपए, नगद काउंटर पर 5 करोड़ 50 लाख रुपए, मनी ऑर्डर से 1.23 लाख रुपए, ऑनलाइन माध्यम से 3 करोड़ 60 लाख रुपए, अन्नक्षेत्र से 3 करोड़ 38 लाख रुपए तथा गुप्त दान के रूप में 4 करोड़ 65 लाख रुपए प्राप्त हुए। लड्‌डू की बिक्री 65 करोड़ की वहीं लड्डू प्रसादी की बिक्री से 65 करोड़ रुपए की आय हुई। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के करोड़ों रुपए मूल्य के आभूषण भी दान किए हैं। गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री ने महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। इसके बाद महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में करीब तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। पहले जहां प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मंदिर की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दान कक्ष में सिली हुई जेब वाले कपड़ों में ही मिलती है एंट्री राम मंदिर में दान को लेकर चल रहे विवाद के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया ने बताया कि मंदिर में प्राप्त होने वाले दान के संबंध में पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। मंदिर परिसर में कुल 95 दान पेटियां स्थापित हैं, जिनमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में दान करते हैं। इसके अलावा श्रद्धालु क्यूआर कोड के माध्यम से भी ऑनलाइन दान कर रहे हैं। हर सप्ताह दान पेटियां खोली जाती हैं। इन्हें सुरक्षा व्यवस्था के बीच गणना कक्ष तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद निरीक्षक, सहायक प्रशासक तथा मंदिर समिति के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में दान पेटियां खोली जाती हैं। दान की गणना की फोटोग्राफी कराई जाती है और पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है। दान की गणना के लिए नियुक्त कर्मचारियों को विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। उन्हें बिना जेब वाले कपड़े या सिली हुई जेब वाले परिधान पहनने के बाद ही गणना कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे। दान बढ़ा तो खर्च भी दोगुना हुआ श्री महाकाल लोक के लोकार्पण से पहले महाकाल मंदिर का क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर था, जो विस्तार के बाद बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। वर्तमान में मंदिर समिति के कुल 306 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों के वेतन के अलावा मंदिर की सुरक्षा, साफ-सफाई, रखरखाव, निर्माण कार्य, पर्व-त्योहारों की व्यवस्थाएं, धर्मशाला, अन्नक्षेत्र, महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान, गोशाला तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर बड़ी राशि खर्च होती है। मासिक खर्च भी बढ़कर 5 करोड़ से ज्यादा इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि, श्रावण मास, नागपंचमी सहित अन्य प्रमुख पर्वों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी अतिरिक्त व्यय किया जाता है। पहले मंदिर का मासिक खर्च करीब 2.5 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 5 करोड़ रुपए से अधिक प्रतिमाह हो गया है।

मध्य प्रदेश में बदला मौसम, 15 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट; 48 जिलों में 52% कम बारिश

भोपाल  मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून अब कुछ ही दूरी पर है। एक-दो दिनों में यह मध्य प्रदेश में दाखिल होने वाला है। मानसून बालाघाट, सिवनी और मंडला इलाके से आने की संभावना है। मानसूनी बादलों ने पहले ही पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को कवर कर चुके हैं और जल्द ही मध्य प्रदेश की ओर बढ़ने की उम्मीद है। एक से दो दिन में मानसून देगी दस्तक मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य अरब सागर के बाकी हिस्सों, महाराष्ट्र के और इलाकों, तेलंगाना और ओडिशा के बाकी हिस्सों, और छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ा है। मानसून की उत्तरी सीमा अभी दहानू, वर्धा, रायपुर डाल्टनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है। अगले एक-दो दिनों में मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। आंधी-बारिश की वजह से दिन के तापमान में खासी गिरावट हुई है। पचमढ़ी में पारा सबसे कम 30.2 डिग्री दर्ज किया गया। खरगोन में 30.4 डिग्री, धार में 31 डिग्री, सिवनी में 32.2 डिग्री, छिंदवाड़ा में 35.3 डिग्री, बैतूल-मंडला में 35.5 डिग्री और रायसेन में 35.6 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में 33.9 डिग्री, भोपाल में 32.2 डिग्री, ग्वालियर में 41 डिग्री, उज्जैन में 34.8 डिग्री और जबलपुर में 35.4 डिग्री सेल्सियस रहा। दतिया-सीधी में पारा सबसे ज्यादा 41.2 डिग्री रहा। जारी है प्री मानसून बारिश वहीं, मध्य प्रदेश के कई इलाकों में प्री मानसून बारिश का दौर जारी है। भोपाल में बुधवार की सुबह भी बारिश हुई है। साथ ही लोगों को गर्मी और तापमान से राहत मिली है। मंगलवार को भोपाल में अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रहा। मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे तक भोपाल में बीते 24 घंटों में 19.8 मिमी बारिश हुई। भोपाल में बुधवार को होगी बारिश मौसम विभाग ने भोपाल में बुधवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान लगाया है। साथ ही दोपहर या शाम के समय आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और हल्की बारिश की संभावना है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। हवा की औसत गति लगभग 30 किमी प्रति घंटा रहेगी। कम बारिश वाले जिले- अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा। ज्यादा बारिश वाले जिले- भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर। धार में 2 इंच, भोपाल में पौन इंच बारिश, 17 जिलों में पानी गिरा इससे पहले सोमवार को प्रदेश में प्री-मानसूनी एक्टिविटी देखने को मिली। धार में करीब 2 इंच पानी गिर गया। वहीं, भोपाल में पौन इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। इंदौर, खंडवा, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना, सिवनी, बड़वानी, शाजापुर, सीहोर समेत कई जिलों में आंधी-बारिश का दौर बना रहा। मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां पर अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री दर्ज किया गया। धार में 32.9 डिग्री, सिवनी में 34.2 डिग्री, रायसेन में 35.4 डिग्री, शाजापुर में 35.7 डिग्री रहा। दतिया में सबसे ज्यादा 42.2 डिग्री दर्ज किया गया। सीधी, खजुराहो, टीकमगढ़ नौगांव और नरसिंहपुर में 40 डिग्री या इससे ज्यादा रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में 34.7 डिग्री, उज्जैन में 35 डिग्री, भोपाल में 35.2 डिग्री, जबलपुर में 36 डिग्री और ग्वालियर में 40.2 डिग्री सेल्सियस रहा। आंधी और बारिश की चेतावनी इसके साथ ही सीहोर, जबलपुर, सागर, भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, शाजापुर, आगर, गुना, अशोकनगर, सिंगरौली, रीवा, मऊगंज, सतना, अनुपपुर, शहडोल और उमरिया समेत एमपी के कई जिलों में आंधी बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है। साथ ही डिडोंरी, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, पांढुर्णा, सीधी और नरसिंहपुर के लिए भी चेतावनी जारी है।

मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती में नया मोड़, चॉइस फिलिंग जारी रहेगी लेकिन नियुक्ति पर अंतरिम रोक

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक मामले में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए चॉइस फिलिंग की अनुमति दे दी है। साथ ही स्पष्ट किया है कि उनके नियुक्ति आदेश फिलहाल जारी नहीं किए जाएंगे और यह प्रक्रिया याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। यह मामला डेढ़ हजार से अधिक अभ्यर्थियों से जुड़ा है। कोर्ट के समक्ष भोपाल निवासी प्रिया देव सहित अन्य बनाम मध्य प्रदेश शासन व अन्य प्रकरण की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रवीण कुमार वर्मा व डॉ. ज्योति वर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि सभी याचिकाकर्ता एक जैसी शर्तों और विवाद से प्रभावित हैं, इसलिए अलग-अलग याचिकाएं दायर करना व्यावहारिक नहीं होगा। इस पर कोर्ट ने संयुक्त याचिका दायर करने संबंधी आवेदन स्वीकार कर लिया। चॉइस फिलिंग में भाग लेने की अनुमति दी अधिवक्ता वर्मा ने यह भी तर्क दिया कि इसी प्रकार के मामले डब्ल्यूपी क्रमांक 21474/2026 में हाई कोर्ट द्वारा 19 जून, 2026 को अंतरिम राहत प्रदान की जा चुकी है। तर्कों से सहमत होते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को चॉइस फिलिंग में भाग लेने की अनुमति दे दी, लेकिन नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी। राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रवीण नामदेव उपस्थित रहे। कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले को चार सप्ताह बाद संबंधित याचिका के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

सुभाषनगर-एम्स रूट पर 2 दिन नहीं चलेगी भोपाल मेट्रो, CMRS करेगी निरीक्षण

भोपाल राजधानी भोपाल के सुभाषनगर से एम्स के बीच दौड़ रही मेट्रो अगले 2 दिन यानी, बुधवार और गुरुवार को बंद रहेगी। यह आम लोगों के लिए नहीं दौड़ेगी। दो दिन तक कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) सिग्नलिंग सिस्टम की जांच करेगी। यह टीम भोपाल पहुंच गई है। निरीक्षण के बाद टीम 'ओके' रिपोर्ट देगी। इसके बाद सिग्नलिंग सिस्टम चालू हो जाएंगे। जिससे मेट्रो का नया शेड्यूल और टाइमिंग तय होगी। जुलाई में सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया शेड्यूल जारी होगा। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, निरीक्षण एवं परीक्षण पूरा होने के बाद 26 जून से मेट्रो फिर से अपने निर्धारित समय पर दौड़ने लगेगी। सुभाष नगर से एम्स के बीच करीब 7 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑरेंज-येलो लाइन के 2 रूट 30 किलोमीटर लंबे हैं। फिलहाल 12 किमी में ही मेट्रो दौड़ रही है, लेकिन इसकी रफ्तार काफी धीमी है। इस वजह से सवाल उठने लगे हैं। 800 करोड़ रुपए में नया सिस्टम भोपाल में मेट्रो संचालन की सुस्त रफ्तार को तेज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया। करीब 30 किमी के लिए हुए करीब 800 करोड़ रुपए के टेंडर का यह पहला चरण है। अभी एक ही ट्रैक पर दौड़ रही मेट्रो जानकारी के अनुसार, भोपाल और इंदौर में अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं है। इस वजह से मेट्रो प्रबंधन को केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) पर ट्रेन चलानी पड़ रही हैं। यही वजह है कि भोपाल में ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी 75 मिनट रखी गई है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। यहां दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बाद ही मेट्रो दौड़ रही है। जिस ट्रैक पर दौड़ती, उसी पर वापसी सुभाष नगर से एम्स के बीच डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में चलाई जा रही हैं। यानी जो जा रही है, वह उसी ट्रैक पर लौट रही है। जबकि अप ट्रैक (एम्स से सुभाष नगर) पर ट्रेन नहीं दौड़ती। नए सिस्टम के बाद दोनों तरफ से ट्रेन चलेगी। मेट्रो की रीढ़ होता है सिग्नलिंग सिस्टम जानकारों के मुताबिक सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा होता है। यही तय करता है कि ट्रेन कितनी दूरी पर चलेगी। ट्रेन की अधिकतम और न्यूनतम गति नियंत्रित करता है। ट्रेनों के बीच सुरक्षित गैप बनाए रखता है। ऑटोमेटेड ऑपरेशन और इमरजेंसी कंट्रोल संभालता है। सिस्टम के बिना मल्टी-ट्रैक ऑपरेशन संभव नहीं होता, जिससे पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता। दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो दिल्ली मेट्रो में इस्तेमाल होती है। इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेन दोनों ट्रैक पर चल सकेंगी। ट्रेनों के बीच का अंतर (हेडवे) कम होगा और फ्रिक्वेंसी तेजी से बढ़ाई जा सकेगी। नए सिस्टम से यह फायदा नए सिस्टम के शुरू होने के बाद मेट्रो दोनों ओर से चलेगी। इससे 75 मिनट की टाइमिंग कम होगी। इससे लोगों को आसानी से मेट्रो मिल सकेगी। फेरे भी बढ़ जाएंगे। ऐसे में सुबह और शाम को ऑफिस टाइमिंग पर भी मेट्रो मिल सकेगी।

मानहानि मामले में आज आएगा बड़ा फैसला, राहुल गांधी की नजरें MP हाईकोर्ट पर

 जबलपुर  मध्य प्रदेश में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह की ओर से दायर मानहानि के केस में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को व्यक्तिगत उपस्थिति से राहत मिलेगी या नहीं, इसका निर्णय बुधवार को होगा। इसके लिए दायर राहुल की याचिका पर मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रकरण में कार्तिकेय सिंह का आरोप है कि वर्ष 2018 में झाबुआ जिले में एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स प्रकरण में उनके पिता शिवराज सिंह चौहान और उनके नाम का उल्लेख किया, जिससे उनकी मानहानि हुई। केस की सुनवाई भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट कर रही है। वहां से सुनवाई में पेश न होने पर राहुल गांधी को समन जारी किया गया था। इसे समन को हाई कोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ में चुनौती देते हुए राहुल की ओर से ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दिए जाने की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में ट्रायल कोर्ट से केस संबंधित रिकार्ड तलब किया था। मंगलवार की सुनवाई में कोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद प्रकरण में निर्णय बुधवार के लिए पुनः सूचीबद्ध कर दिया। अब हाई कोर्ट यह तय करेगी कि अंतिम निर्णय तक राहुल गांधी को कोई अस्थायी संरक्षण दिया जाए या नहीं।

आयकर विभाग में बड़ा फेरबदल, 200 से अधिक निरीक्षक इधर से उधर; जारी हुई सूची

भोपाल   मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 209 आयकर निरीक्षकों के तबादले किए हैं। प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश क्षेत्र की ओर से जारी आदेश में अधिकारियों को नई पदस्थापना स्थल पर 3 जुलाई तक कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। जारी सूची के अनुसार सबसे अधिक तबादले भोपाल और रायपुर में किए गए हैं। भोपाल में 46 और रायपुर में 31 आयकर निरीक्षकों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसके अलावा इंदौर में 21, भिलाई में 10 और बिलासपुर में 6 निरीक्षकों की पदस्थापना बदली गई है। तबादला सूची में ऐसे कई अधिकारी शामिल हैं जिन्हें छत्तीसगढ़ से मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में भेजा गया है। विभाग का कहना है कि यह बदलाव प्रशासनिक जरूरतों और कार्य संतुलन को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। सभी स्थानांतरित अधिकारियों को 3 जुलाई तक नई पदस्थापना स्थल पर ज्वाइन कर विभाग को इसकी सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।

ED की बड़ी कार्रवाई: LNCT समूह के ठिकानों पर रेड, 200 करोड़ के लेनदेन की जांच

 भोपाल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भोपाल के एलएनसीटी समूह से जुड़े कई स्थानों पर सोमवार को छापा मारा। जांच देर शाम तक जारी रही। ईओडब्ल्यू में सितंबर 2025 में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत ईडी ने प्रकरण कायम कर कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि भोपाल के अतिरिक्त ईडी ने इंदौर और बिलासपुर में भी संस्था से जुड़े स्थानों पर तलाशी ली है। सभी जगह से दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस जब्त की गई हैं। 200 करोड़ की हेराफेरी का आरोप ईओडब्ल्यू में दर्ज एफआईआर के अनुसार पूरे मामले में लगभग 200 करोड़ रुपये के हेरफेर का आरोप है। इसके अनुसार आस्था फाउंडेशन फॉर एजुकेशन सोसायटी के माध्यम से गड़बड़ी की गई थी, जिसमें ग्रुप के मालिकों, अधिकारियों को मिलाकर सात लोगों को आरोपित बनाया गया है। फीस, स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के लेन-देन जांच के दायरे में जांच में छात्रों की फ़ीस, स्कॉरशिप और एजुकेशन लोन से जुड़े वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताएं सामने आईं हैं। जो राशि संस्था को मिलनी थी उसे दूसरी जगह उपयोग करने का आरोप है। ईओडब्ल्यू की जांच में सोसायटी में दर्ज कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाकर दिखाने की बात सामने आई थी। दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही ईडी ईडी फिलहाल जब्त दस्तावेजों, कंप्यूटर डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं के जरिए प्राप्त राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया और क्या इसमें धन शोधन के तत्व शामिल हैं।  इस संबंध में पक्ष लेने के लिए मालिकों में शामिल अनुपम चौकसे को फोन लगाया, मैसेज भी किया, पर कोई जवाब नहीं मिला।

मोहन यादव पर आरोपों को लेकर BJP का पलटवार, कांग्रेस पर लगाया साजिश रचने का आरोप

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। पार्टी ने कहा है कि कांग्रेस भ्रम की स्थिति निर्मित कर रही है। प्रदेश की जनता कांग्रेस के षडयंत्र को बर्दाश्त नहीं करेगी। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोकप्रिय नेता हैं और प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में दिन-रात काम कर रहे हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी द्वारा हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर जो आरोप लगाया गया, वो पूरी तरह गलत है। कांग्रेस और उनके नेताओं द्वारा भ्रम की स्थिति निर्मित करने का प्रयास किया जा रहा है। मैं समझता हूं कि इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं बताना चाहता हूं कि हमारे मुख्यमंत्री के द्वारा साल 2023 में जो नामांकन दाखिल किया गया उसके मुताबिक उस वक्त उनके पास 17 एकड़ की जो जमीन थी, वो साल 2026 में भी उतनी ही है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ की जो जमीन थी, इसमें भी 2026 में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।" उन्होंने कहा कि एक सिद्धि विनायक कंपनी, जिसका आरोप में जिक्र किया गया, उसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून में घटकर मात्र 65 एकड़ रह गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साल 2017 में इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के बेटे वैभव के पास भी 2023 से पहले जो 16 एकड़ जमीन थी, उसमें डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई परिवर्तन नहीं आया। ये सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने से पहले की थी। उनकी बहू शालिनी यादव द्वारा 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई, जो मास्टर प्लान एरिया के बाहर की थी। आरोपों में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है। वो पूरी तरह से गलत है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई लेना देना नहीं है। उनके रिश्तेदारों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है। उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी में यह आया है कि रिश्तेदारों पर भी जो आरोप लगाए गए, उसमें भी दिए गए तथ्य गलत हैं। मुझे बताया गया है कि ये रिश्तेदार भी अपनी बात कहेंगे और कार्रवाई करेंगे। CM मोहन यादव पर कांग्रेस के आरोपों को भाजपा ने बताया षड्यंत्र मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की जमीन खरीद से जुड़े आरोपों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इसे पूरी तरह निराधार और राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि जब-जब ओबीसी वर्ग का मुख्यमंत्री बना और आगे बढ़ा तो यह कांग्रेस को रास नहीं आया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री मोहन पर जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। कांग्रेस और उसके नेताओं के द्वारा भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है‌। 2023 के बाद जमीन में कोई बढ़ोतरी नहीं उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के द्वारा 2023 के विधानसभा चुनाव में जो नामांकन दाखिल किया था, उस स्थिति में उनके पास 17 एकड़ जमीन थी। आज उसमें कुछ भी परिवर्तन नहीं हुआ है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ की जो जमीन थी, इसमें भी 2026 में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। जिस सिद्धिविनायक कंपनी का उल्लेख किया गया उसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून 2026 में घटकर 65 एकड़ रह गई। मुख्यमंत्री ने 2017 में इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके पुत्र वैभव के पास भी 2023 के पूर्व 16 एकड़ जो जमीन थी, डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया। यह सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने के पहले थी। पुत्रवधू द्वारा खरीदी गई 10 एकड़जमीन का भी दिया विवरण खंडेलवाल ने आगे कहा कि सीएम की पुत्रवधू शालिनी यादव के द्वारा जरूर 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई है, जो कि विकसित मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर थी। आरोप में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है, वह भी पूरी तरह से गलत है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई उसे लेना-देना है। उनके रिश्तेदारों का स्वतंत्र अस्तित्व है और मेरी जानकारी में यह आया है कि वे आरोपों के संबंध में अपना स्टैंड लेंगे और जो कार्रवाई करना होगी, वह करेंगे। प्रदेश के सतत विकास में जुटे सीएम खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के द्वारा प्रदेश के विकास में लगातार काम किया जा रहा है। इस प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने काम किया है फिर वह चाहे किसानों की बात हो या फिर चाहे औद्योगिक विकास की। इस प्रदेश को मध्य प्रदेश को देश के सबसे विकसित राज्यों में ले जाने का काम मुख्यमंत्री द्वारा किया जा रहा है। उनके खिलाफ षड्यंत्र का काम कांग्रेस पार्टी कर रही है। कांग्रेस कर रही षड्यंत्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जब-जब प्रदेश को ओबीसी मुख्यमंत्री मिला, चाहे उमा भारती हो, शिवराज सिंह चौहान या डॉ. मोहन यादव, उन्हें षड्यंत्र करके कमजोर करने का काम कई लोगों के द्वारा किया गया। इस तरह मुख्यमंत्री को कमजोर करने का काम कांग्रेस के लोग करते हैं। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को जनता के द्वारा जो विकास कार्य किए जा रहे हैं, उसमें पीछे नहीं कर पाए तो इस तरह के षड्यंत्र करके हमारी सरकार और मुख्यमंत्री को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। इसे इस प्रदेश की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेसी पिछड़े वर्ग का नेतृत्व बर्दाश्त नहीं करती प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि किसी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इस प्रदेश को विकसित बना रहे हैं। चाहे किसानों की बात करें, चाहे उद्योगों के विकास की बात करें, सीएम डॉ. यादव इस प्रदेश को आगे ले जा रहे हैं। उनके खिलाफ कांग्रेस पार्टी षडयंत्र रच रही है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि जब-जब एक पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री इस प्रदेश को मिला, चाहे उमा भारती हों, चाहे शिवराज सिंह चौहान हों, या मोहन यादव … Read more

इंजीनियरिंग छात्रों के लिए खुशखबरी: MP में घट सकती है कॉलेज फीस, निजी संस्थानों ने दिया प्रस्ताव

भोपाल  प्रदेश के निजी कॉलेजों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई और सस्ती हो जाएगी। कई इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शुल्क विनियामक समिति (एफआरसी) को अपने न्यूनतम शुल्क में कटौती का प्रस्ताव भेजा है। उनकी मांग है कि उनके यहां शिक्षण शुल्क 35 हजार रुपये सालाना कर दिया जाए। इसकी मंजूरी मिलती है तो यह निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के पूरे तंत्र को प्रभावित करेगा। छात्रों की कमी से जूझ रहे संस्थान दरअसल निजी संस्थान विद्यार्थियों की कमी से जूझ रहे हैं। पिछले एक दशक में 58 कॉलेज बंद हो चुके हैं। इस बीच केवल एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खुला है। पिछले वर्षों में इन कॉलेजों की औसतन 45 से 55 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाए। वहीं सरकारी कॉलेजों में 80 से 90 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं। इस वजह से घट रही संख्या विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योगों की जरूरतों और इंजीनियरिंग कोर्स के बीच बढ़ती दूरी, रोजगार को लेकर विद्यार्थियों की बदलती प्राथमिकताएं और नई तकनीकों के अनुरूप पाठ्यक्रम का समय पर अपडेट नहीं होना है इसका प्रमुख कारण है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में अधिकतर प्रवेश दूसरे राज्यों के विद्यार्थी लेते हैं। सीटें रिक्त रहने से बढ़ रही लागत कटौती का प्रस्ताव देने वाले कॉलेजों का तर्क है कि सीटें खाली रहने के कारण प्रति विद्यार्थी लागत बढ़ रही है। इससे संस्थान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। यदि शुल्क कम नहीं किया गया तो संचालन और मुश्किल हो जाएगा। कहा जा रहा है कि शुल्क कटौती से दूसरे प्रदेश के विद्यार्थियों के अलावा प्रदेश के कम आय वाले परिवारों के बच्चे भी आकर्षित होंगे। दूसरे राज्यों की तुलना में पहले से कम है फीस यहां पर यह भी बता दें कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों में इंजीनियरिंग का वार्षिक शुल्क औसतन एक से डेढ़ लाख रुपये तक है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने भी न्यूनमत शुल्क करीब 80 हजार रुपये तय किया है। इसके उलट मध्यप्रदेश में यह शुल्क 40 से 60 हजार रुपये तक है। पांच वर्षों के दौरान यह स्थिति वर्ष — कॉलेज — सीटें — प्रवेशित 2021-22 — 126 — 47,520 — 28,534 2022-23 — 124 — 58,535 — 31,659 2023-24 — 123 — 60,754 — 33,334 2024-25 — 142 — 73,637 — 42,924 2025-26 — 128 — 64,473 — 38,171     उप्र, महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों की तुलना में यहां इंजीनियरिंग का शुल्क कम है। इस कारण यहां पर दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी प्रवेश लेते हैं। कुछ कॉलेज विवि में कन्वर्ट हो रहे हैं, इसलिए वे काउंसलिंग में शामिल नहीं हो रहे हैं।     – डा. अजीत सिंह पटेल, उपाध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ टेक्निकल प्रोफेशनल इंस्टि्टयूशंस मप्र     पांच-छह इंजीनियरिंग कॉलेजों से शुल्क तय करने के प्रस्ताव आए हैं। समिति कालेजों का लेखा-जोखा देखकर न्यूनतम शुल्क तय करती है। इस पर विचार किया जा रहा है।     – डॉ. अनिल शिवानी, सचिव, एफआरसी  

श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना ने बनाया रिकॉर्ड, एक दिन में 11,721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का निस्तारण

श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना ने एक दिन में रिकार्ड 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का किया निस्तारण भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना दोंगलिया ने फ्लाई ऐश के उपयोग एवं पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना में गत दिवस एक ही दिन में कुल 284 बल्करों के माध्यम से लगभग 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का परिवहन कर अब तक सर्वाधिक फ्लाई ऐश परिवहन करने का रिकार्ड बनाया गया। इनमें 114 बल्कर परियोजना के विद्युत गृह क्रमांक एक से और 170 बल्कर विद्युत गृह क्रमांक दो से लोड कर निस्तारित किए गए। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना द्वारा 30 मार्च 2025 को 236 बल्करों के माध्यम से 9429 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश परिवहन का रिकॉर्ड स्थापित किया गया था। उस दौरान विद्युत गृह क्रमांक 1 से 132 बल्कर व विद्युत गृह क्रमांक 2 से 104 बल्कर लोड किए गए थे। इस नवीन उपलब्धि ने न केवल इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, बल्कि फ्लाई ऐश प्रबंधन एवं निस्तारण के क्षेत्र में परियोजना की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को भी दर्शाया है।