samacharsecretary.com

रांची में फीस वसूली पर कार्रवाई, रांची के स्कूलों को चेतावनी

 रांची  जिले के निजी स्कूलों पर शुल्क वसूली और अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) गठन को लेकर सख्ती बरतते हुए उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने 16 सीबीएसई- 2 आईसीएसई स्कूलों को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। जिन स्कूलों ने वार्षिक फीस स्ट्रक्चर और (पीटीए) का विवरण नहीं दिया है, उनके खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि एडमिशन व एनुअल चार्ज के नाम पर वसूले गए शुल्क को इस वर्ष की मासिक फीस में समायोजित करने का एक्शन प्लान 10 से 15 दिनों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपा जाए। यह निर्देश रांची के मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में दिए गए। बैठक में जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के प्राचार्यों व प्रतिनिधियों ने शिरकत की। उपायुक्त ने (पीटीए) गठन की समीक्षा की, जिसमें बताया गया कि जिले के कुल 149 सीबीएसई- आईसीएसई स्कूलों में से 131 ने अभिभावक-शिक्षक संघ का गठन कर लिया है। शेष 18 स्कूलों ने अभी तक जानकारी नहीं दी है। इनमें से दो स्कूलों को शोकॉज नोटिस भेजा जाएगा। साथ ही, बैठक में अनुपस्थित स्कूलों की कार्यात्मक स्थिति की जांच के आदेश भी दिए गए। बैठक का मुख्य फोकस स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि और वार्षिक शुल्क वसूली पर रहा। चर्चा में पाया गया कि कई स्कूल प्रबंधन (आरटीई) राइट-टू-एजुकेशन नियमों का उल्लंघन करते हुए नर्सरी से 12वीं तक 37 से 106 प्रतिशत तक वार्षिक शुल्क बढ़ा रहे हैं। उपायुक्त ने जोर देकर कहा कि फीस संरचना तर्कसंगत, पारदर्शी और अभिभावक अनुकूल होनी चाहिए, ताकि परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने स्कूलों को निर्देशित किया कि स्कूल बस चालकों की पूरी जानकारी शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराएं, जिससे प्रशासन ड्राइवर का सत्यापन कर सके। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत कमजोर वर्ग के 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन के दिशा-निर्देश भी दोहराए गए। उपायुक्त ने चिंता जताई कि कुछ स्कूल टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) जारी करने के लिए 25 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं, जो चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है। जिला प्रशासन शिक्षा क्षेत्र में पूर्ण पारदर्शिता चाहता है। नए सत्र के लिए शीघ्र बीपीएल बच्चों की लाटरी आयोजित की जाएगी। एक्शन प्लान पर अगले 10 दिनों में साक्षात्कार या ऑनलाइन बैठक होगी। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने स्कूल प्रतिनिधियों से अपील की कि अभिभावकों के हित में नियमों का पालन करें। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस पहल से रांची के अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर उन परिवारों को जो महंगी फीस से जूझ रहे हैं। बैठक में यह पाया गया कि राइट टू एजुकेशन एक्ट का उलंघन कर सभी 149 निजी स्कूलों ने प्रति वर्ष वार्षिक शुल्क बढ़ाया है। जिनमें केवल 2 वर्षों में वार्षिक शुल्क 10 प्रतिशत बढ़ानी हैं। इसपर स्कूल प्रबंधन ने अपना जवाब में पुन: विचार करने का आश्वासन दिया। इसी दौरान जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश बैठक में उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री उपस्थित सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्य व प्रतिनिधियों को सेंसस 2027 के अंतर्गत पोर्टल के माध्यम से स्वगणना करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है, इसके लिए बच्चों को भी जानकारी दें ताकि वो अपने माता-पिता अभिभावक को डिजिटल माध्यम से स्वगणना करने को कहें। जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज द्वारा बताया गया कि स्व-गणना अंतर्गत आनलाइन पोर्टल (एसई डाट सेंससडाट जीओभी डाट इन ) (se.census.gov.in) के माध्यम से स्वयं अपने परिवार व आवास संबंधी जानकारी आनलाइन उपलब्ध कराया जा सकता है। ये हैं बैठक में अनुपस्थित स्कूल जिन्हें किया गया शोकाज नोटिस     वाईबीएन पब्लिक स्कूल मैक्लुस्कीगंज     संत कोलंबस मूरबू     कैंब्रियन पब्लिक स्कूल रांची     सेंट्रल एकैडमी कांके     शाईन वैली स्कूल     रायल प्रोग्रेस स्कूल डकरा     झारखंड पब्लिक स्कूल डकरा     कैंब्रियन बीजूपाड़ा     सचिदानंद पब्लिक स्कूल डोरंडा     स्टार इंटरनेशनल स्कूल नगड़ी     एलए गार्डन स्कूल सामलोंग     छोटानागपुर पब्लिक स्कूल     आर्मी पब्लिक स्कूल दीपाटोली     सरस्वती शिशु विद्या मंदिर डकरा     सेंट्रल एकेडमी बरियातू     बलदेव पब्लिक स्कूल     उर्सुलाईन सिल्ली मूर     माउंट कार्मेंल ओरमाझी  

पहली कक्षा के बच्चों के बैग का वजन 1078 ग्राम तय, जबलपुर में DPI ने कलेक्टर-डीईओ को निर्देशित किया

जबलपुर  जबलपुर में बच्चों के भारी स्कूल बैग को लेकर अब प्रशासन सख्त हो गया है। बाल संरक्षण आयोग और लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने कलेक्टर को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि स्कूलों में नेशनल बैग पॉलिसी का सख्ती से पालन कराया जाए। संचालनालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों के लिए बैग की आवश्यकता ही नहीं है। वहीं कक्षा 1 से 12वीं तक छात्रों के बैग का अधिकतम वजन तय किया गया है। निर्देश में कहा गया है कि भारी बस्तों के कारण बच्चों के शारीरिक विकास पर असर पड़ सकता है और मानसिक दबाव भी बढ़ता है। डीईओ को बस्ते का वजन जांचने के निर्देश जानकारी के मुताबिक समग्र शिक्षा अभियान और लोक शिक्षण संचालनालय की अपर परियोजना संचालक नंदा भलावे ने जिला शिक्षा अधिकारियों को पहले ही पत्र भेजकर स्कूलों में बैग का वजन जांचने के निर्देश दिए थे। स्कूलों में निरीक्षण कर यह जानकारी भी मांगी गई थी कि छात्रों के बैग का वजन कितना पाया गया। हालांकि अभी तक किसी स्कूल में कार्रवाई या औपचारिक जांच सामने नहीं आई है। छुटि्टयों में कैसे जांचेंगे वजन बताया जा रहा है कि स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू होने के बाद रिपोर्ट मांगी गई है, ऐसे में निरीक्षण और वास्तविक जांच को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि कई जगह बिना जांच के रिपोर्ट भेजे जाने की आशंका है। आयोग बोला-अधिक वजन का स्वास्थ्य पर असर बाल संरक्षण आयोग ने अपने पत्र में कहा है कि कई निजी स्कूल अब भी नीति का पालन नहीं कर रहे हैं और छोटे बच्चों को भारी बस्ते लेकर स्कूल आने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। आयोग ने कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में इस नीति का पालन सुनिश्चित कराया जाए और उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। कक्षा अनुसार तय किया गया बैग का वजन प्री-प्राइमरी : बैग आवश्यक नहीं कक्षा 1 : 1078 ग्राम कक्षा 2 : 1080 ग्राम कक्षा 3 : 1572 ग्राम कक्षा 4 : 1804 ग्राम कक्षा 5 : 1916 ग्राम कक्षा 6 : 3080 ग्राम कक्षा 7 : 3508 ग्राम कक्षा 8 : 3640 ग्राम कक्षा 9 : 4400 ग्राम कक्षा 10 : 4182 ग्राम कक्षा 11वीं-12वीं : 3.5 किलो से 5 किलो तक  

BSF स्कूल सहित कई स्कूलों को धमकी, ADCP के अनुसार 5-6 संस्थानों को चेतावनी मिली

जालंधर  जालंधर में बीएसएफ चौक के पास एक्टिवा ब्लास्ट के बाद अब निजी स्कूलों को मिली धमकियों ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, बीएमसी चौक स्थित एपीजे स्कूल को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिसके बाद स्कूल प्रबंधन ने तुरंत एहतियातन सभी छात्रों की छुट्टी कर उन्हें घर भेज दिया।   धमकी की सूचना मिलते ही स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस व प्रशासनिक टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। पूरे इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और स्कूल परिसर की गहन जांच की जा रही है। फिलहाल किसी संदिग्ध वस्तु के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। एडीसीपी आकर्षि जैन ने बताया कि शहर के 5-6 स्कूलों को इसी तरह की धमकियां मिली हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से जांच कर रही हैं, जबकि साइबर क्राइम टीम धमकी भरे ई-मेल की जांच में जुटी हुई है। स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चों ने बताया कि उन्हें स्कूल में मैसेज दिखाकर कहा गया कि स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है, जिसके बाद तुरंत छुट्टी कर दी गई। इस घटना के बाद अभिभावकों में भी डर और चिंता का माहौल है।  बच्चों को घर लेजाने का आया संदेश अभिभावकों ने बताया कि उन्हें केवल इतना कहा गया कि सुरक्षा कारणों की वजह से बच्चों को तुरंत घर ले जाएं। किसी को धमकी के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि बीएसएफ चौक पर दो दिन पहले हुए धमाके के बाद लोग पहले से ही डरे हुए हैं। ऐसे माहौल में स्कूल को मिली धमकी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्कूल को एहतियातन खाली करवाया गया है और पूरे परिसर की गहन जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों की टीमें स्कूल के भीतर और आसपास जांच में जुटी हुई हैं। किसी भी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने जांच की शुरू जानकारी के अनुसार धमकी भरा संदेश मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। स्कूल के आसपास आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। वहीं अभिभावकों से भी शांति बनाए रखने की अपील की गई है। इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग को मुख्यमंत्री भगवंत मान की जालंधर यात्रा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री गुरुवार को अपनी शुक्राना यात्रा के तहत जालंधर पहुंचे हुए हैं। उनके कार्यक्रम को लेकर पहले ही शहर में कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। इसी बीच स्कूल को धमकी मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। बीएसएफ मुख्यालय और सेना कैंप के पास हाल ही में हुए धमाके के बाद शहर में पहले से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं। अब स्कूल को मिली धमकी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और धमकी भेजने वाले की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।   इस मौके स्कूल पहुंचे पेरेंट्स ने कहा कि उन्हें सिर्फ इतना मैसेज आया कि सिक्योरिटी रीजन है, इसलिए वह तुरंत अपने बच्चों को घर ले जाएं। कोई ड्यूटी पर था तो कोई अपने किसी पर्सनल काम पर, सब छोड़कर वह तुरंत बच्चों को लेने के लिए पहुंचे हैं। BSF हेडक्वार्टर और आर्मी कैंप में ब्लास्ट के बाद लोगों में ज्यादा डर है। इसी बीच जालंधर की ADCP आकर्षि जैन ने कहा कि जालंधर के 5 से 6 स्कूलों को धमकी भरी मेल मिली है, पुलिस सभी स्कूलों में जांच कर रही है। अभी तक कहीं से कुछ संदिग्ध नहीं मिला। इस धमकी की टाइमिंग भी सीएम भगवंत मान से जोड़कर देखी जा रही है। CM आज अपनी शुक्राना यात्रा के चलते जालंधर में हैं, जिसको लेकर पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। इसके बीच धमकी आने से पुलिस हाईअलर्ट पर है। वहीं, जालंधर और अमृतसर में हुए ब्लास्टों में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने जांच शुरू कर दी है। बुधवार को टीमें दोनों जगह पहुंचीं और जांच की। इसी बीच पंजाब पुलिस ने दावा किया है कि उन्होंने विस्फोटक सप्लायर को पकड़ लिया है। पुलिस का दावा है कि इसे जमशेर इलाके से गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान नवांशहर में बंगा के रहने वाले दविंदर के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया है कि हाल ही में चंडीगढ़ में भाजपा हेडक्वार्टर के बाहर हुए ग्रेनेड अटैक में भी इसी ने ग्रेनेड सप्लाई किया था। उसे पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए विस्फोटकों की सप्लाई मिलती है, जिसे वह आगे सप्लाई करता था। पुलिस ने CM भगवंत मान के गुरुवार के जालंधर दौरे से ठीक पहले यह दावा किया है। जालंधर में हुए धमाके का एक और वीडियो सामने आया है। इसमें बाइक पर एक पगड़ीधारी व्यक्ति आता है और धमाके वाली जगह रुकता है। कुछ ही देर में वह निकल जाता है, उसके जाने के 15 सेकेंड के बाद ब्लास्ट हो जाता है।

आधार लिंकिंग से हुआ बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ में स्कूलों में फर्जी नामांकन पकड़ा, 10 लाख छात्रों की संख्या में कमी

रायपुर  छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में यू डाइस सिस्टम (स्कूली शिक्षा प्रबंधन सूचना प्रणाली) में नाम और आधार एंट्री अनिवार्य होने के बाद विद्यार्थियों की संख्या लगभग 10 लाख घट गई है। वर्ष 2024 से 2026 के बीच प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से 10वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के आधार लिक करने से फर्जी नामांकन उजागर हुए हैं। डिजिटल सत्यापन के बाद इनकी वास्तविक संख्या सामने आई है । वर्ष 2024 में जहां 53.69 लाख विद्यार्थियों को किताबें बांटी गई थीं, वहीं 2026 में यह संख्या घटकर 43 लाख रह गई है। इससे अब लगभग 50 लाख किताबें कम छापनी होंगी। वर्षों तक स्थिर रहे आंकड़ों में अचानक आई इस कमी ने नि:शुल्क किताब वितरण और शिक्षा विभाग के खर्च पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञ इसे घोस्ट स्टूडेंट्स और फर्जी नामांकन पर नकेल का परिणाम मान रहे हैं।

मध्यप्रदेश में बढ़ी गर्मी, 30 अप्रैल तक स्कूलों की छुट्टी घोषित, सरकार ने जारी किया आदेश

भोपाल  एमपी में इन दिनों आसमान से आग बरस रही है। भीषण गर्मी में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसी बीच स्कूल जाने वाले बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों में 30 अप्रैल तक अवकाश घोषित किया गया है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच प्रशासन ने यह अहम निर्णय लिया है। जानकारी के अनुसार राज्य के चार जिलों में भीषण गर्मी के कारण स्कूल में बच्चों को अवकाश घोषित किया गया है। इस दौरान जबलपुर, दमोह, रतलाम जिलों में कक्षा नर्सरी से पांचवीं तक 30 अप्रैल तक अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, पन्ना जिले में भी स्कूलों में 6वीं से 8वीं कक्षा के बच्चों को 30 अप्रैल तक छुट्टी रहेगी। यहां नर्सरी से 5वीं तक छोटे बच्चों को पहले ही छुट्टी घोषित कर दी गई है। इसके अलावा जिन स्कूलों में छुट्टियां अभी होनी है, शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों को निर्देश दिया है कि आउटडोर असेंबली को सीमित एवं छायादार स्थानों पर कराया जाए। तपती धूप और लू के बीच बच्चों की सेहत मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ती गर्मी अब आम जनजीवन के साथ साथ स्कूल शिक्षा व्यवस्था पर भी असर डालने लगी है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और कई शहरों में लू के साथ वार्म नाइट जैसी स्थिति बनी हुई है। सागर में स्कूलों की छुट्टी घोषित किए जाने के बाद अब जबलपुर, सिंगरौली, पन्ना, हरदा और नर्मदापुरम जिलों में भी स्कूलों के लिए अवकाश घोषित कर दिया गया है। प्रदेश में ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 मई 2026 से शुरू होना पहले से तय है लेकिन तेज गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए कई जिलों में यह छुट्टियां पहले ही लागू कर दी गई हैं। प्रशासन का कहना है कि बच्चों को लू और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। कक्षा 5वीं तक के बच्चों को राहत जबलपुर जिला प्रशासन ने भीषण गर्मी को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर राघवेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 5वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 30 अप्रैल 2026 तक अवकाश घोषित कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं और यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। शिक्षकों और स्कूल स्टाफ को नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहना होगा। उन्हें शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों का निष्पादन करना होगा। इससे पहले जिला प्रशासन ने स्कूलों का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक निर्धारित किया था लेकिन तापमान में लगातार बढ़ोतरी के कारण अब छुट्टी का निर्णय लिया गया है। छोटे बच्चों के लिए 24 अप्रैल से छुट्टी पन्ना जिले में भी गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी का आदेश जारी किया है। कलेक्टर ऊषा परमार ने प्री-प्राइमरी से कक्षा 5वीं तक के बच्चों के लिए 24 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक अवकाश घोषित किया है। कक्षा 6वीं से 12वीं तक की कक्षाएं पूर्व निर्धारित समयानुसार संचालित होंगी। इन कक्षाओं का समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रखा गया है। प्रशासन का मानना है कि छोटे बच्चों पर गर्मी का असर ज्यादा होता है इसलिए पहले उन्हें राहत दी गई है। गर्मी की तीव्रता और लू के बढ़ते खतरे सिंगरौली जिला प्रशासन ने भी इसी तरह का फैसला लिया है। कलेक्टर गौरव बेनल ने जिले के सभी स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 5वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 24 अप्रैल से 30 अप्रैल तक अवकाश घोषित किया है। गर्मी की तीव्रता और लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। जिला प्रशासन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम की स्थिति को देखते हुए आगे भी जरूरी निर्णय लिए जा सकते हैं। नर्सरी से 8वीं तक छुट्टी नर्मदापुरम जिले में तापमान में तेज वृद्धि और लू की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने और बड़ा फैसला लिया है। यहां नर्सरी से लेकर कक्षा 8वीं तक के सभी छात्रों के लिए आगामी आदेश तक अवकाश घोषित किया गया है। यह आदेश जिले के सभी सरकारी, निजी, सीबीएसई, आईसीएसई, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होगा। कलेक्टर सोमेश मिश्रा द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि शिक्षक और संस्था प्रमुख सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहेंगे और विभागीय कार्य करेंगे। वहीं पहले से निर्धारित परीक्षाएं और अन्य सरकारी कार्य पूर्व निर्देशानुसार जारी रहेंगे। गर्मी से बच्चों को मिली राहत हरदा जिले में भी गर्मी को देखते हुए स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के छात्रों के लिए 30 अप्रैल तक अवकाश घोषित किया है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई जारी रहेगी और इन कक्षाओं का समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक तय किया गया है। प्रशासन का कहना है कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। कई शहरों में लू का अलर्ट मध्य प्रदेश के कई शहरों में पिछले कुछ दिनों से तापमान लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार कई जिलों में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। दिन के साथ साथ रात के तापमान में भी कमी नहीं आ रही है जिसके चलते वार्म नाइट की स्थिति बनी हुई है। छोटे बच्चों में गर्मी का असर जल्दी होता है। लंबे समय तक धूप में रहने से डिहाइड्रेशन, चक्कर, उल्टी और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 1 मई से शुरू होंगे ग्रीष्मकालीन अवकाश प्रदेश में ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 मई 2026 से शुरू होने वाले हैं। ऐसे में कई जिलों ने सिर्फ कुछ दिनों पहले ही छुट्टी घोषित कर बच्चों को राहत दी है। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की ओर से अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे बच्चों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने दें और पर्याप्त पानी पिलाते रहें। बच्चों की सुरक्षा पर प्रशासन का फोकस गर्मी के बीच जिला प्रशासन का यह फैसला बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता … Read more

स्कूलों की छुट्टी के लिए शिक्षा विभाग का प्रस्ताव, एमपी में गर्मी से बीमार हो रहे बच्चों को मिली राहत की उम्मीद

भोपाल  मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है। इससे बच्चों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। जबर्दस्त गर्मी के कारण बच्चों की सेहत पर पड़ते बुरे असर की शिकायतें बढ़ गई हैं। राजधानी भोपाल में ही स्कूलों में अनेक विद्यार्थी बीमार हुए हैं। ऐसे में अभिभावकों ने स्कूलों की छुट्टी घोषित करने की मांग की है। मामले में कलेक्टर से शिकायत करते हुए उन्हें पत्र सौंपा गया है। इस बीच कई प्राइवेट स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। इधर तेज गर्मी को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग ने स्कूलों में अवकाश घोषित करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। कलेक्टर की मंजूरी मिलते ही आदेश लागू कर दिया जाएगा। दोपहर में वैन और बस से वापसी ज्यादा भारी पड़ रही अभिभावकों ने बताया कि दोपहर में वैन और बस से वापसी ज्यादा भारी पड़ रही है। गर्मी में ये गर्म चैंबर की तरह प्रतीत हो रही है। इनमें दो से तीन घंटे का सफर तय कर बच्चे घर पहुंचते हैं। पैरेंट्स वॉइस एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक सिंह बताते हैं कि बढ़ते तापमान के बीच स्कूलों में बच्चों की दोपहर में आवाजाही सबसे ज्यादा पैरेंट्स वॉइस एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक सिंह बताते हैं कि बढ़ते तापमान के बीच स्कूलों में बच्चों की दोपहर में आवाजाही सबसे ज्यादा है। शहर में अधिकांश स्कूल बाहरी क्षेत्रों में हैं। यहां तक आने-जाने में लगने वाला समय ही तीन से चार घंंटे है। 12 बजे छुट्टी के बाद डेढ़ से दो बजे बच्चे घर पहुंचते हैं। यही हाल सुबह है। आधा दर्जन स्कूलों ने नर्सरी व प्राइमरी कक्षाओं का समय बदला, अभिभावकों को मैसेज से जानकारी दी: राजधानी के आधा दर्जन स्कूलों ने नर्सरी व प्राइमरी कक्षाओं का समय बदला है। अपने स्तर पर निर्णय लेते हुए कक्षा का समय 10.30 बजे किया गया। अभिभावकों को मैसेज से यह जानकारी दी गई। बाकी का समय पहले की ही तरह है। जिला शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र अहिरवार ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत के आधार पर मामले में प्रस्ताव तैयार किया भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र अहिरवार ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत के आधार पर मामले में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव कलेक्टर को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी अनुमति मिलते ही स्कूलों में अवकाश की घोषणा कर दी जाएगी। 2000 स्कूलों के बच्चे गर्मी के कारण आने जाने में परेशान राजधानी के 2000 स्कूलों के बच्चे गर्मी के कारण आने जाने में परेशान हैं। अब नजरें कलेक्टर के अगले आदेश पर टिकी हैं।

पंजाब में प्राइवेट स्कूलों के लिए किताबों की सीधी सप्लाई, बिचौलियों का खेल खत्म, अभिभावकों को मिली बड़ी राहत

 चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों के लिए पाठ्य-पुस्तकों के वितरण में एक बड़ा सुधार किया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) से संबंधित निजी स्कूलों में पढ़ रहे पहली से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को किताबों की सप्लाई सीधे तौर पर बोर्ड द्वारा की जाएगी। इस पहल से न केवल अधिकृत एजेंसियों और किताबें बेचने वाली दुकानों की एकाधिकार व्यवस्था खत्म होगी, बल्कि विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी राहत मिलेगी। नए सुधार की घोषणा करते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि यह निर्णय पारदर्शिता को बेहतर बनाने, परिवारों का खर्च कम करने और बिचौलियों पर निर्भरता घटाने के साथ-साथ पाठ्य-पुस्तकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि स्कूल सख्ती से यह सुनिश्चित करेंगे कि पुस्तकों के लिए छपी हुई कीमत से अधिक पैसा न लिया जाए। यह केवल पुस्तकों के वितरण की सुविधा होगी, न कि राजस्व जुटाने का माध्यम। इससे निजी स्कूलों के दस लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि 15 प्रतिशत छूट, जो पहले पुस्तक बेचने वालों को मिलती थी, अब सीधे तौर पर विद्यार्थियों को मिलेगी। 10 लाख से ज़्यादा छात्रों को होगा फायदा एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "स्कूल इस बात का सख्ती से ध्यान रखेंगे कि बिल पर छपी रियायती कीमत से ज़्यादा कोई भी रकम न ली जाए. वे बिना कोई मुनाफा कमाए, सिर्फ किताबों के वितरण में मदद करेंगे. इससे निजी स्कूलों के 10 लाख से ज़्यादा छात्रों को फायदा होगा।  शिक्षा मंत्री ने बताया कि 15 प्रतिशत की जो छूट पहले किताब बेचने वालों को दी जाती थी, अब उसका सीधा फायदा स्कूलों के जरिए छात्रों को मिलेगा. उम्मीद है कि इस कदम से परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होगा और साथ ही व्यवस्था में ज़्यादा जवाबदेही आएगी।  शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का बयान शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस सुधार की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना, परिवारों पर वित्तीय दबाव घटाना और किताबों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह जनहित में है और इससे निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। पारदर्शिता और सख्त नियम लागू मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी स्थिति में पुस्तकों पर अंकित मूल्य से अधिक शुल्क नहीं लिया जाए। यह व्यवस्था केवल वितरण को सरल बनाने के लिए है, न कि अतिरिक्त आय का साधन बनने के लिए। सरकार के अनुसार, इस नई प्रणाली से राज्य के लगभग 10 लाख से अधिक निजी स्कूल छात्रों को फायदा होगा। इसकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताते हुए, मंत्री बैंस ने जानकारी दी कि PSEB ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक खास ई-कॉमर्स पोर्टल बनाया है. छात्र मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए पाठ्यपुस्तकों की मांग कर सकेंगे, जबकि स्कूल कक्षा और विषय के हिसाब से अपनी ज़रूरतें डिजिटल रूप से अपलोड करेंगे. उन्होंने आगे कहा, "हर छात्र को अलग से लॉगिन क्रेडेंशियल (पहचान पत्र) दिए जाएंगे, ताकि ज़रूरत पड़ने पर माता-पिता सीधे ऑर्डर दे सकें।  पंजाब सरकार द्वारा सुलभ और किफायती शिक्षा पर दिए जा रहे प्रयासों को दोहराते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि 15% की छूट, जो पहले केवल पुस्तक विक्रेताओं को दी जाती थी, अब स्कूलों के माध्यम से सीधे छात्रों को लाभ पहुंचाएगी। इस कदम से परिवारों पर वित्तीय बोझ काफी कम होने की उम्मीद है और साथ ही व्यवस्था में जवाबदेही भी बढ़ेगी। परिचालन ढांचे के बारे में विस्तार से बताते हुए मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने जानकारी दी कि पीएसईबी ने प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक समर्पित ई-कॉमर्स पोर्टल विकसित किया है। छात्र मोबाइल एप्लिकेशन या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पाठ्यपुस्तकों की मांग कर सकेंगे, जबकि स्कूल कक्षावार और विषयवार आवश्यकताओं को डिजिटल रूप से अपलोड करेंगे। उन्होंने आगे कहा, “प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत लॉगिन क्रेडेंशियल प्रदान किए जाएंगे, जिससे आवश्यकता पड़ने पर अभिभावक सीधे ऑर्डर दे सकेंगे।” पीएसईबी के अध्यक्ष डॉ. अमरपाल सिंह ने बताया कि पोर्टल को सुरक्षित ऑनलाइन भुगतान गेटवे से एकीकृत किया गया है ताकि निर्बाध, पारदर्शी और कुशल लेनदेन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विशेष रूप से अधिक शुल्क लेने की किसी भी संभावना को खत्म करने और पूरी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिज़ाइन की गई है।  

लुधियाना के स्कूलों में फिर बम की धमकी, पुलिस ने ईमेल के बाद अलर्ट जारी किया

लुधियाना लुधियाना के स्कूलों को एक बार फिर से बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल जारी हुआ है। फिलहाल चार स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इनमें स्प्रिंग डेल पब्लिक स्कूल, पौदार इंटरनेशनल स्कूल, मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल, बीआरएस नगर का डीएवी पब्लिक स्कूल शामिल है। धमकी भरा ई-मेल जारी होने के बाद स्कूलों ने अभिभावकों के ग्रुपस में जानकारी शेयर की और पुलिस प्रशासन को भी सूचित कर दिया। स्प्रिंग डेल स्कूल ने तो बच्चों की छुट्टी कर दी। फिलहाल स्कूल में पुलिस की ओर से चैकिंग चल रही है। इससे पहले 10 मार्च को भी लुधियाना के कुछ स्कूलों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली थी, जिससे हड़कंप मच गया था। सुबह करीब 7 बजे ई-मेल के जरिए सीबीएसई से संबंधित 3 स्कूलों को धमकी भरा संदेश मिला था, जिसमें स्कूल परिसर में बम होने की बात कही गई थी। धमकी भरा मेल मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी थी। इसके बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की टीमें मौके पर पहुंच गईं थी और स्कूल परिसरों की गहन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया था। सुबह 9.15 पर मिली धमकी भरी ईमेल स्कूल के प्रिंसिपल अनिल शर्मा ने बताया कि सुबह करीब 9:15 बजे स्कूल को एक ईमेल के जरिए धमकी मिली। ईमेल में स्कूल को बम से उड़ाने की बात कही गई थी। धमकी मिलते ही स्कूल प्रशासन ने बिना देरी किए सभी विद्यार्थियों के अभिभावकों को सूचित किया और करीब 2500 छात्रों को सुरक्षित घर भेज दिया। स्कूल की चेयरपर्सन अविनाश कौर वालिया ने बताया कि जब ई-मेल मिला, उस समय स्कूल में बच्चे मौजूद थे। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और एहतियात के तौर पर सभी बच्चों को सुरक्षित घर भेज दिया गया। मिली जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 9:30 बजे स्कूल प्रबंधन को एक ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें दावा किया गया कि शहर के कई स्कूलों और रेलवे ट्रैक को निशाना बनाया जा सकता है। ई-मेल में यह भी कहा गया कि ‘ब्लैकआउट’ के कारण 23 और 24 अप्रैल को बड़े धमाके हो सकते हैं। धमकी के बाद रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस ने रेलवे लाइनों की भी बारीकी से जांच शुरू कर दी है। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। साइबर सेल की मदद से ई-मेल आईडी को ट्रेस किया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें। पूरे शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और हर जगह निगरानी बढ़ा दी गई है। फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि यह शरारत है या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा। स्टाफ और अभिभावकों में चिंता का माहौल प्रिंसिपल अनिल शर्मा ने बताया कि स्कूल में इस तरह की धमकी पहली बार मिली है, जिससे स्टाफ और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। स्कूल प्रबंधन ने धमकी भरे ईमेल की आईडी पुलिस को सौंप दी है, जिसके आधार पर आरोपी की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। मामले की हर एंगल से जांच-पुलिस पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले को गंभीरता से लिया गया है और हर एंगल से जांच की जा रही है। जल्द ही सच्चाई सामने लाने का दावा किया गया है।

एमपी के मैहर जिले में कक्षा 5 तक स्कूलों की छुट्टियां, प्रशासन ने जारी किया आदेश

 मैहर  एमपी के मैहर जिले में कक्षा 5 तक छुट्टियां घोषित की गई है। इसके लिए आदेश जारी किया गया है। मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक 21 अप्रैल से 30 अप्रैल तक छोटे बच्चों के स्कूल बंद रहेगे। शहर में भीषण गर्मी के कारण छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह अहम निर्णय लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, मैहर जिले में कक्षा नर्सरी से 5वीं तक के सभी स्कूलों में छुट्टी का ऐलान किया गया है। जिसमें सभी सरकारी, प्राइवेट और सीबीएसई और केंद्रीय स्कूल बंद रहेंगे। जबकि कक्षा 6 से 12 तक की कक्षाएं सुबह 7:30 से 12:30 बजे तक लगेगी। वहीं, शिक्षक दोपहर 1:30 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहेंगे। मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ये आदेश जारी किया है। 21 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक अवकाश जारी आदेश के अनुसार, प्री-प्रायमरी से लेकर कक्षा 5वीं तक के सभी शासकीय, अशासकीय, केन्द्रीय, सीबीएसई और अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों में 21 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक अवकाश रहेगा। Maihar Collector Order Heatwave हालांकि, कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए स्कूल बंद नहीं किए गए हैं; उनकी कक्षाएं पूर्व निर्धारित समय यानी सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक यथावत संचालित रहेंगी। स्टाफ को दोपहर 1:30 बजे तक उपस्थित रहकर करना होगा काम विद्यालय के शैक्षणिक स्टाफ को दोपहर 1:30 बजे तक उपस्थित रहकर अपने प्रशासनिक कार्य पूर्ण करने होंगे। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से निर्धारित परीक्षाएं और अन्य आवश्यक कार्यक्रम अपने तय समय पर ही होंगे।मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, जिले में अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।  

योगी सरकार के तहत बेसिक शिक्षा में ऐतिहासिक सुधार, नामांकन से लेकर गुणवत्ता तक बदलाव

योगी सरकार में बदली बेसिक शिक्षा की तस्वीर, नामांकन से लेकर गुणवत्ता तक ऐतिहासिक सुधार  स्कूल चलो अभियान से लाखों बच्चों की वापसी, सरकारी स्कूलों पर बढ़ा भरोसा  ऑपरेशन कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और DBT योजनाओं से शिक्षा व्यवस्था हुई मजबूत  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग ने व्यापक और ठोस बदलाव दर्ज किया है। यह परिवर्तन केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम के रूप में सामने आया है। परिषदीय विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन इसका प्रमाण है। इस वर्ष अप्रैल माह से गतिशील इस अभियान के अंतर्गत 20 अप्रैल तक, यानी मात्र 20 दिनों में ही 8 लाख 79 हजार से अधिक नए बच्चों का नामांकन दर्ज किया जा चुका है, जो परिषदीय शिक्षा को सार्वभौमिक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। योगी सरकार ने आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा है। अवस्थापना के स्तर पर 1.32 लाख से अधिक विद्यालयों को ऑपरेशन कायाकल्प से जोड़ा गया। 2017-18 में मात्र 36 प्रतिशत स्कूल ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त थे, जो अब बढ़कर 96.30 प्रतिशत हो गए हैं। 75 जनपदों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। तकनीक, प्रशिक्षण और पोषण योजनाओं के साथ शिक्षा को समग्र रूप से मजबूत किया गया है। स्पष्ट है कि योगी सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और परिणाम अब व्यवस्थित रूप में दिख रहे हैं। नामांकन और मुख्यधारा से जुड़ाव प्रदेश में स्कूल चलो अभियान और सर्वे आधारित रणनीति ने शिक्षा से दूर बच्चों को जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई है। वर्ष 2024-25 में 7.73 लाख आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान की गई। इनमें से 2.69 लाख बच्चों को कक्षा-1 में सीधे प्रवेश दिया गया, जबकि 5.04 लाख बच्चों को विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से मुख्यधारा में जोड़ा गया। यह प्रयास केवल आंकड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार को धरातल पर लागू करने का उदाहरण है। लगातार बढ़ते नामांकन से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी विद्यालयों के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। निःशुल्क सुविधाएं और छात्र हित सरकार ने आर्थिक बाधाओं को कम करने पर विशेष ध्यान दिया है। प्रतिवर्ष 1.30 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को DBT के माध्यम से यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, बैग और स्टेशनरी के लिए ₹1200 प्रति छात्र की सहायता दी जाती है। कक्षा 1 से 8 तक सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें और कार्यपुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन उपायों से अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम हुआ है और स्कूलों में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हुई। अवस्थापना विकास में बड़ा सुधार ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं में व्यापक सुधार हुआ है। 1.32 लाख से अधिक विद्यालय इस अभियान से आच्छादित हुए हैं। हर विद्यालय में डेस्क-बेंच, शौचालय, पेयजल, बिजली और कक्षाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं थे, वहां नए आवासीय विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की दिशा में काम हो रहा है। मॉडल विद्यालयों से नई दिशा प्रदेश में शिक्षा के नए मानक स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं। 75 जनपदों में 150 विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक शिक्षा दी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय पर लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत आ रही है और कुल बजट 4500 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। हर विद्यालय में 1500 से अधिक छात्रों के अध्ययन की व्यवस्था होगी, जिससे कुल 2.25 लाख विद्यार्थी सीधे लाभान्वित होंगे। साथ ही 75 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी। यह पहल शिक्षा के मानकों को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो रही है। तकनीक आधारित शिक्षा का विस्तार शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल संसाधनों का व्यापक उपयोग किया गया है। हजारों विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और ICT (इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) लैब स्थापित की गई हैं। 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट वितरित किए गए हैं, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनी है। वर्ष 2024-25 में 4.53 लाख शिक्षकों और शिक्षामित्रों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी आधारित चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 2025-26 में 4.33 लाख शिक्षकों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसी क्रम में 1,32,828 परिषदीय विद्यालयों में पुस्तकालय स्थापित कर उन्हें क्रियाशील बनाया गया है। समग्र शिक्षा और पीएम योजना के तहत 2022-23 से 2024-25 तक कुल 25,954 विद्यालयों को स्मार्ट क्लास से आच्छादित किया गया है। 2025-26 में 5,924 अन्य विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित किए गए। इसके साथ ही 880 ब्लॉक संसाधन केंद्रों में आईसीटी लैब स्थापित की जा चुकी हैं तथा 2023-24 और 2024-25 में 5,817 विद्यालयों को आईसीटी लैब से जोड़ा गया है, जबकि 2025-26 में 8,291 विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापना की गई।  बालिका शिक्षा को मजबूती कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के तहत 746 विद्यालय संचालित हैं, जिन्हें कक्षा 6 से 12 तक उच्चीकृत किया गया है। इनमें 87,647 बालिकाएं नामांकित हैं। स्मार्ट क्लास, ICT लैब, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों से बालिकाओं का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। यह पहल न केवल शिक्षा, बल्कि सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। समावेशी शिक्षा और सामाजिक न्याय दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2024-25 में 29, 241 बच्चों को और 2025-26 में 25,397 बच्चों के दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाए गए। इसके साथ ही सहायक उपकरण, एस्कॉर्ट अलाउंस और छात्रवृत्ति DBT के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। इससे हर बच्चे को शिक्षा के दायरे में लाने का प्रयास सफल होता दिख रहा है। पीएम योजना और आरटीई के तहत अवसर पीएम योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1,722 विद्यालयों को आच्छादित किया गया है, जहां स्मार्ट क्लास, ICT लैब और खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। वहीं आरटीई के तहत 2024-25 में 1.65 लाख और 2025-26 … Read more