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जानलेवा आवारा कुत्तों के खिलाफ पंजाब में बड़ा एक्शन, सुप्रीम कोर्ट आदेश पर अमल शुरू

चंडीगढ़  पंजाब में आज जानलेवा लावारिस कुत्तों के खात्मे के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इस संबंध में जानकारी दी थी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार एक बड़ा अभियान शुरू करेगी। इसका उद्देश्य उन जानलेवा लावारिस कुत्तों को खत्म करना है, जो बच्चों और राहगीरों के जीवन के लिए खतरा पैदा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने आदेश में कहा था कि रेबीज से संक्रमित, लाइलाज बीमारी से ग्रस्त या अत्यधिक आक्रामक व खतरनाक कुत्तों को कानून के तहत मृत्यु दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा था कि संविधान के तहत गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार में कुत्ते के हमलों के डर या खतरे के बिना स्वतंत्र रूप से घूमने का हक भी शामिल है। प्रदेश में पिछले कुछ समय से लावारिस कुत्तों के काटने के मामले में वृद्धि होती जा रही है। सरकार ने जनवरी में लुधियाना में राज्य की पहली डॉग सैंक्चुअरी का उद्घाटन भी किया था जिसका उद्देश्य डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण करना है। इसकी क्षमता लगभग 500 कुत्तों की है और इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है और प्रदेश के अन्य शहरों में भी इसी तर्ज पर डॉग सैंक्चुअरी स्थापित करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश में लावारिस कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2025 में कुत्तों के काटने के ढाई लाख से अधिक मामले सामने आए जबकि वर्ष 2024 में डॉग बाइट के 2.13 लाख मामले रिपोर्ट किए गए थे।  सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कई संगठनों में मायूसी पेटा (PETA) इंडिया के मुताबिक देश में आवारा कुत्तों की अनुमानित संख्या 6.2 करोड़ है। इनकी संख्या बढ़ने की मुख्य वजह एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स का सही पालन न होना है। इन नियमों के तहत कुत्तों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण होना चाहिए। पेटा ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की एसओपी पर ऐतराज जताया है। संगठन का कहना है कि इस एसओपी में हर कुत्ते के लिए सिर्फ 20 वर्गफुट जगह तय है। इतने छोटे स्थान में इन्हें नीचलन रखना क्रूरता है। इससे बीमारियां फैल सकती हैं। इतने बड़े स्तर पर कुत्तों को बंद रखने के लिए न पर्याप्त जगह है और न ही बजट और न ही प्रशासनिक व्यवस्था है। एक दैनिक अखबार में प्रकाशित कुत्तों के आंकड़ों पर आयोग ने कहा था कि 3.34 लाख डॉग बाइट के मामले चौंकाने वाले हैं। लावारिस कुत्ते सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं। बता दें कि पंजाब में 2025 में डॉग बाइट के 3.34 लाख मामले रिपोर्ट हुए थे जबकि 2026 में अब तक 50 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जस्टिस संत प्रकाश और जस्टिस गुरबीर सिंह जता चुके चिंता पंजाब -चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस संत प्रकाश और सदस्य जस्टिस गुरबीर सिंह पर आधारित आयोग ने जालंधर, लुधियाना, पटियाला और संगरूर के नगर निगम कमिश्नरों सहित निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पंजाब को नोटिस जारी कर कुत्तों के काटने के मामलों की रिपोर्ट पेश करने को कहा था। आयोग ने कहा था कि 2025 के 3.34 लाख मामलों में ही अगर पीड़ितों को मुआवजा दिया जाता है तो सूबा सरकार पर 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक का वित्तीय बोझ पड़ेगा। अकेले संगरूर जिले में ही नगर कौंसिल को 10 करोड़ रुपए का खर्च उठाना पड़ सकता है। 5 साल में तीन गुना बढ़े कुत्तों के काटने के केस हेल्थ विभाग पंजाब के आंकड़ों के अनुसार पिछले 5 सालों में पंजाब में कुत्तों के काटने के मामले तीन गुना बढ़े हैं। साल 2020 में जहां 1 लाख 10 हजार 472 मामले दर्ज थे, वहीं यह बढ़कर 2021 में 1 लाख 26 हजार 842 हो गए। इसी तरह साल 2022 में 1 लाख 65 हजार 133 मामले रिकॉर्ड हुए और 2023 में भी यह आंकड़े 1 लाख 65 हजार 133 ही दर्ज किए गए। इसके बाद 2024 में यह मामले बढ़कर 2 लाख 13 हजार 521 हुए और 2025 में रिकॉर्ड तोड़ 3 लाख 34 हजार 736 तक पहुंच गए। 2026 की बात करें तो अब तक पंजाब में 5 महीने में 50 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। SOP में हर कुत्ते के लिए सिर्फ 20 वर्गफुट जगह तय है ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के एमडी आलोकवर्मा सेनगुप्ता ने कहा कि इंसानों और आवारा कुत्तों के बीच बढ़ते संघर्ष की असली वजह कुत्तों की मौजूदगी नहीं, बल्कि सालों से नसबंदी और रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम का सही ढंग से लागू न होना है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि कानून और नियम पहले से मौजूद हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उन्हें प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया। संगठन ने अदालत के उस निर्देश का स्वागत किया, जिसमें उसने कहा है कि देश के हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह काम करने वाला एबीसी सेंटर बनाया जाए। जबरन कार्रवाई से बढ़ सकती है आवारा कुत्तों की समस्या: संगठन संगठन ने कहा कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे कदम न उठाएं जो कानून और वैधानिक प्रक्रिया से बाहर हो। इनमें कुत्तों को जबरन हटाने, बड़ी संख्या में पकड़कर बंद करने, मारना या हटाने की नीति अपनाने जैसे कदम शामिल हैं। उनका कहना है कि इससे समस्या कम नहीं होगी, बल्कि दोबारा आबादी बढ़ेगी और संघर्ष बढ़ सकता है। संगठनों ने क्या दिए सुझाव कुत्तों के लिए तय समय में बड़े स्तर पर वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी अभियान चले, रेबीज टीकाकरण हो, अवैध ब्रीडर और पालतू पशु दुकानों पर कार्रवाई हो, विदेशी नस्ल के डॉग्स के अवैध प्रजनन पर रोक लगे, कुत्तों को खाना खिलाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित हो, डॉग्स को गोद लेने को बढ़ावा दिया जाए और स्थानीय निकायो की जिम्मेदारी तय की जाए। कब-कब क्या हुआ? 28 जुलाई 2025 : SC ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार के में प्रकाशित समाचार 'आवारा कुत्तों से त्रस्त शहर, बच्चे भुगत रहे कीमत' (City hounded by strays and kids pay price) पर स्वतः संज्ञान (suo moto cognisance) लिया था। 11 अगस्त 2025 : कोर्ट ने दिल्ली और एमसीडी की अथॉरिटी को निर्देश जारी किया कि वे … Read more

8.56 करोड़ खर्च फिर भी नहीं थमा डॉग बाइट संकट, भोपाल में एक भी शेल्टर नहीं

भोपाल  सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा और खतरनाक कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन भोपाल में इसका पालन आसान नहीं दिख रहा। निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में करीब 1.20 लाख आवारा कुत्ते हैं, लेकिन शहर में एक भी डॉग शेल्टर नहीं है। अगले कुछ महीनों में इसके बनने की उम्मीद भी नहीं है। आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन पर निगम पिछले पांच साल में 8.5 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। फिर भी रोजाना डॉग बाइट के शिकार करीब 81 लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। 15 शिकायतें निगम में रोज आ रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। रात के समय कई इलाकों में बाइक सवारों और पैदल लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा है। शेल्टर होम होगा आवारा श्वानों का ठिकाना सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई श्वान खतरनाक या रेबीज से संक्रमित पाया जाता है, तो उसे इंजेक्शन देकर समाप्त किया जा सकता है। साथ ही अदालत ने नवंबर 2025 में जारी पुनर्वास और नसबंदी संबंधी निर्देशों को प्रभावी बताते हुए कहा है कि इनका पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। 810 नो डॉग जोन बनने थे, पर यहां से एक भी कुत्ता नहीं हटा पिछले साल भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और खेल परिसरों समेत 810 सार्वजनिक जगहों को ‘नो-डॉग जोन’ के रूप में चिह्नित किया था। दावा था कि यहां से कुत्तों को हटाया जाएगा, लेकिन शेल्टर होम नहीं होने के कारण अब तक एक भी कुत्ता नहीं हटाया गया। शहर में सवा लाख से ज्यादा आवारा श्वान नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार भोपाल में आवारा श्वानों की संख्या सवा लाख से अधिक है। इसके मुकाबले हर साल केवल 20 से 25 हजार श्वानों की ही नसबंदी हो पाती है। वर्ष 2024-25 में निगम ने 21,452 श्वानों की नसबंदी और 26,427 श्वानों का एंटी-रेबीज टीकाकरण किया, जिस पर करीब 2.35 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 23,363 श्वानों की नसबंदी और 29,766 श्वानों का टीकाकरण किया जा चुका है। इस पर 2.56 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। इसके बावजूद शहर में श्वानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिंसक और संक्रमित श्वानों पर नियंत्रण की कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई जा रही है। इन इलाकों में ज्यादा खतरा अशोका गार्डन, अयोध्या बायपास, पिपलानी, कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद, करोंद, मीनाल रेसीडेंसी, पटेल नगर, छोला, बैरागढ़, लालघाटी-हलालपुर रोड, रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी और न्यू मार्केट के आसपास रात में कुत्तों के झुंड सबसे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। कई जगह फुटपाथों पर कुत्तों के डेरों के कारण पैदल निकलना मुश्किल हो रहा है। 600 कुत्तों की क्षमता, डॉग सवा लाख जानकारी के अनुसार नगर निगम के पास फिलहाल अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर हैं। तीनों की कुल क्षमता सिर्फ 600 कुत्तों की है। यहां रोज 20 से 25 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो रहा है। ये सेंटर केवल नसबंदी के लिए हैं, जबकि कोर्ट के निर्देश के मुताबिक स्थायी डॉग शेल्टर एक भी नहीं है। अब तक इतनी नसबंदी पिछले 5 साल में नगर निगम ने नसबंदी और टीकाकरण पर 8.56 करोड़ रुपए खर्च किए। इस दौरान 81,207 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का दावा किया गया, लेकिन शहर में डॉग बाइट और आवारा कुत्तों की शिकायतें लगातार बढ़ती रहीं। इंदौर में अप्रैल में हर दिन 146 केस इंदौर में अप्रैल के 24 दिनों (24 अप्रैल तक) में डॉग बाइट के 3493 मामले सामने आए हैं। यानी औसतन करीब 146 केस प्रतिदिन दर्ज किए गए हैं। जनवरी में 5198, मार्च में 5109 मामले आए थे। वहीं दिसंबर में 5471 केस थे। शहर में तीन एबीसी सेंटर संचालित फिलहाल भोपाल में कजलीखेड़ा, अरवलिया गोशाला के पीछे और आदमपुर कचरा खंती क्षेत्र में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक सेंटर की क्षमता करीब 150 श्वानों की है। नगर निगम की टीमें रोजाना शहर के अलग-अलग इलाकों से 50 से 65 आवारा श्वानों को पकड़कर नसबंदी और उपचार के लिए इन केंद्रों तक पहुंचा रही हैं। एमपी में डॉग बाइट के इतने आंकड़े पूरे मध्यप्रदेश में कुत्तों के काटने का खतरा बना रहता है। कई इलाके ऐसे हैं, जहां कुत्तों के डर से बच्चे घरों के बाहर खेलने तक नहीं जाते। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 2024 के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश में 10.09 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इनमें से 6 लाख से अधिक बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में हैं। 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से जनवरी 2025 तक प्रदेश में करीब 3.39 लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इनमें 2022 में 66,018, 2023 में 1,13,499, 2024 में 1,42,948 और 2025 (जनवरी) में 16,710 मामले दर्ज हुए। इसी अवधि में कम से कम 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई है। देशभर के आंकड़ों से तुलना करें तो मध्यप्रदेश डॉग बाइट मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है, जहां हर साल मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। 2022 में जहां करीब 21.89 लाख मामले देशभर में थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 37.15 लाख से अधिक हो गई। गर्मी में क्यों बढ़ते हैं कुत्तों के हमले पशु चिकित्सक एसआर नागर के मुताबिक गर्मी का मौसम कुत्तों के व्यवहार को आक्रामक बना देता है। कुत्तों के शरीर में स्वेट ग्लैंड (पसीना निकालने वाले छिद्र) नहीं होते, इसलिए वे इंसानों की तरह शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते। इस वजह से उनमें चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ जाती है। अगर उन्हें खाने-पीने की कमी हो या किसी तरह का खतरा महसूस हो, तो वे तुरंत हमला कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल से जून के बीच तापमान बढ़ने के साथ डॉग बाइट के मामलों में और तेजी आ सकती है। इस दौरान कुत्तों के खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें पर्याप्त पानी देना और तेज धूप से बचाना … Read more

Stray Dogs मामले में SC का बड़ा फैसला, बच्चों और मरीजों की सुरक्षा को दी प्राथमिकता

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्‍तों पर अपने पूर्व के फैसलों को बदलने की मांग को खारिज कर दिया है. Supreme Court of India ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और उनसे जुड़ी सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अपने 25 नवंबर के आदेश में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत ने स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संस्थागत क्षेत्रों से सभी आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश को बरकरार रखा है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि हटाए गए कुत्तों को दोबारा उसी स्थान पर छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।  मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ (Vikram Nath) की अगुवाई वाली बेंच ने की. सुनवाई के दौरान अदालत ने देशभर में बढ़ती स्ट्रे डॉग्स की समस्या पर गंभीर चिंता जताई और राज्यों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुपात में आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास नहीं किया गया. अदालत के मुताबिक नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान बिना किसी ठोस और दीर्घकालिक योजना के चलाए गए, जिसके कारण पूरे तंत्र का उद्देश्य प्रभावित हुआ।  सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी आज की सुनवाई में सबसे जरूरी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि अनुच्छेद 21 के तहत जिंदगी और आजादी के अधिकार में हर नागरिक का यह अधिकार शामिल है कि वह बिना किसी शारीरिक हमले के लगातार डर या सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों के काटने जैसी जानलेवा घटनाओं के खतरे के आजादी से घूम सके और सार्वजनिक जगहों तक पहुंच बना सके।  बेंच ने आगे कहा, 'राज्य मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता, जहां ह्यूमन लाइफ के लिए ऐसे खतरे, जिन्हें रोका जा सकता है. ऐसी घटनाएं उन वैधानिक तंत्रों के बावजूद बढ़ती जा रही हैं, जिन्हें विशेष रूप से इन खतरों से निपटने के लिए ही बनाया गया है।  बता दें कि आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 जुलाई को स्वत संज्ञान लिया था.  सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने सभी पक्षों को एक हफ्ते के अंदर अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश भी दिया था और इस मामले में 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. याचिकाकर्ताओं, प्रतिवादियों, भारत सरकार, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI), कुत्तों से प्यार करने वाले लोगों, कुत्तों के काटने से पीड़ित लोगों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, केंद्र और राज्य सरकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद, अब मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है।  नवंबर 2025 में क्या हुआ? पिछले साल कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे सार्वजनिक जगहों जैसे अस्पताल, पार्क, रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें शेल्टर में ले जाएं. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इन कुत्तों को एक बार नसबंदी हो जाने के बाद वापस उन्हीं इलाकों में नहीं छोड़ा जा सकता, जहां वो मिले थे।  कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगा दी थी, सिवाय उन जगहों के जो इसके लिए तय की गई थीं  अदालत का फैसला आने के बाद डॉग लवर्स और जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एनजीओ ने इस आदेशों को वापस लेने के लिए याचिकाएं दायर कीं. इनमें से कई याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने जनवरी में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।  राज्‍य सरकारों पर तीखी टिप्‍पणी सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यदि राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों ने समय रहते दूरदर्शिता के साथ काम किया होता, तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आवारा कुत्तों से होने वाली घटनाओं और बढ़ती शिकायतों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अदालत के निर्देशों के बाद अब राज्यों और नगर निकायों पर संस्थागत क्षेत्रों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखने और प्रभावी नियंत्रण नीति लागू करने का दबाव बढ़ गया है। 

राजस्थान में दिल दहला देने वाली घटना: स्कूल जाते ही 4 साल के बच्चे पर कुत्ते का हमला

बीकानेर राजस्थान के बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कूल के पहले ही दिन चार साल का एक मासूम आवारा कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना उपनी गांव के स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल की है, जहां बच्चा अपने बड़े भाई के साथ पहली बार स्कूल गया था। रिपोर्ट के मुताबिक क्लास से बाहर निकलते ही मेन गेट के पास आवारा कुत्तों ने उसे घेर लिया और बुरी तरह नोंच डाला। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल का गेट खुला होने और सुरक्षा गार्ड ना होने के कारण कुत्ते परिसर में दाखिल हुए। बच्चे को तुरंत बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, कुत्तों ने बच्चे के सिर की खाल को बुरी तरह फाड़ दिया है, जिससे उसे गहरे जख्म आए हैं। इस घटना ने स्कूल प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

शादी के मंडप में बवाल: कुत्ते को लेकर भिड़े दोनों पक्ष, लाठी-डंडे चले, चार घायल

फतेहपुर यूपी के फतेहपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक शादी समारोह में कुत्ते को लेकर जमकर बवाल हो गया। वर और वधू पक्ष के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मामला हाथापाई तक आ गया। दोनों तरफ से हुई मारपीट में चार लोग घायल हो गए। इसके अलावा शादी भी टूट गई। वहीं, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ये मामला खागा क्षेत्र के कैनाल स्थित एक मैरिज हॉल की है। जानकारी के मुताबिक कल रात 19 फरवरी इस मैरिज हॉल में शादी थी। रात करीब तीन बजे वरमाला के बाद वैवाहिक रस्मों की तैयारी चल रही थी। चर्चा रही कि इसी दौरान कन्या पक्ष के साथ आया पालतू कुत्ता मंडप के पास पहुंच गया। उसे हटाने को लेकर शुरू हुई कहासुनी ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया। आरोप प्रत्यारोप के बीच दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। लोगों को कमरों में बंद करना पड़ा। इस लेकर मौके पर अफरा तफरी मच गई। दोनों तरफ से हुई मारपीट में महिला समेत चार लोग घायल हो गए। वहीं, महिलाएं बचाव के लिए चिल्लाती रहीं। मैरिज हॉल में मारपीट की सूचना पर पहुंची पुलिस ने हालात काबू में किए और घायलों को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया। जहां हालत गंभीर देख प्राथमिक उपचार के बाद सभी को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। इस मामले में कोतवाली प्रभारी रमेश पटेल ने बताया कि सूचना पर पुलिस गई थी। कुत्ते को लेकर वर एवं वधू पक्ष में झगड़ा और मारपीट हो गया था। बाद में दोनों ने आपसी समझौता करते हुए शादी तोड़ने का फैसला किया है। लेनदेन कर तोड़ दी शादी गुरुवार को मारपीट के बाद दोनों पक्षों ने आपसी समझौते के अंतर्गत शादी न करने का फैसला किया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पक्षों से मिले उपहार एवं आभूषणों को लौटा दिया। घटना के बाद चर्चा का विषय यही रहा कि जहां विवाह जैसे पवित्र संस्कार को केंद्र में होना चाहिए था, वहां एक कुत्ते की एंट्री ने पूरा माहौल बिगाड़ दिया।  

झारखंड के नसबंदी डेटा पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, अन्य राज्यों को भी लगाई फटकार

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले पर साफ कहा कि राज्य सरकारें सिर्फ हवा में बातें कर रही हैं. धरातल पर कोई ठोस काम नहीं दिख रहा है. एमीकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट के सामने कई राज्यों की रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट ने राज्यों की पोल खोलकर रख दी है. बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख राज्यों के प्रति बहुत सख्त नजर आया है. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य के वकीलों को आगे बुलाया और दखल देने वालों को पीछे हटने को कहा. बेंच ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि वकीलों को संभालना बहुत मुश्किल काम हो गया है. पहले सिस्टम को ठीक करना जरूरी है. सुनवाई के दौरान एमीकस क्यूरी ने चार मुख्य बिंदुओं पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है. इसमें एबीसी सेंटर्स की कार्यप्रणाली और डॉग शेल्टर बनाने की बात शामिल है. संस्थानों से कुत्ते हटाने और हाईवे से मवेशी हटाने पर भी चर्चा हुई है. कोर्ट ने राज्यों के हलफनामों को देखने के बाद उन्हें ‘आई वॉश’ यानी आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है. पढ़ें, आज की सुनवाई में क्या-क्या हुआ. असम और झारखंड के आंकड़ों में क्या है फर्जीवाड़ा? असम सरकार की रिपोर्ट ने कोर्ट को सबसे ज्यादा हैरान किया है. असम में डॉग बाइट यानी कुत्तों के काटने के आंकड़े बहुत डरावने हैं. साल 2024 में वहां कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले सामने आए थे. साल 2025 के सिर्फ जनवरी महीने में ही 20900 मामले दर्ज हुए हैं. कोर्ट ने इन आंकड़ों को देखकर बहुत चिंता जाहिर की है. असम के पास कुत्तों के लिए पर्याप्त सेंटर भी मौजूद नहीं हैं. एमीकस क्यूरी ने बताया कि असम में 318 स्टेडियम हैं लेकिन कुत्तों के लिए व्यवस्था नहीं है. कोर्ट ने कहा कि असम के हलफनामे में मैनपावर की जानकारी ही गायब है. असम सरकार ने इसके लिए 6 महीने का समय मांगा है. वहीं, झारखंड के आंकड़ों ने तो कोर्ट को गुस्से से भर दिया. झारखंड सरकार ने दावा किया कि उन्होंने 1.89 लाख कुत्तों की नसबंदी की है. कोर्ट ने जब गहराई से देखा तो पता चला कि इसमें से 1.6 लाख नसबंदी सिर्फ 2 महीने में दिखाई गई है. कोर्ट ने इसे पूरी तरह फर्जी आंकड़ा करार दिया है. जजों ने पूछा कि एक गाड़ी में एक दिन में कितने कुत्ते पकड़े जा सकते हैं. झारखंड के इन आंकड़ों को कोर्ट ने पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है. शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों में कुत्तों का खतरा कैसे टलेगा? सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और अस्पतालों जैसे संस्थानों से कुत्ते हटाने पर विशेष जोर दिया है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि कर्नाटक ने संस्थानों में कुत्तों की पहचान तो की है लेकिन उन्हें हटाया नहीं गया है. कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक ने अब तक एक भी कुत्ता संस्थानों से बाहर नहीं निकाला है. जजों ने साफ किया कि हर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के पास बाउंड्री वॉल होनी चाहिए. सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत जरूरी है. स्कूलों में बाउंड्री वॉल न होना बच्चों के लिए बड़ा खतरा है. कोर्ट ने राज्यों से पूछा कि उन्होंने इन संस्थानों से कुत्ते हटाने के लिए क्या किया है. हरियाणा जैसे राज्यों का हलफनामा इस मामले में पूरी तरह चुप है. कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य समय मांगते तो समझ आता. लेकिन गलत और अस्पष्ट जानकारी देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. राज्यों को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि आप लोग सिर्फ हवा में महल बना रहे हैं. किसी भी राज्य ने डॉग बाइट के सही आंकड़े पेश नहीं किए हैं. केवल असम ने ही इस मामले में डेटा दिया है जो कि बहुत डराने वाला है. गोवा और केरल के टूरिज्म पर आवारा कुत्तों का क्या असर है? सुनवाई के दौरान गोवा और केरल के समुद्र तटों यानी बीचेस पर चर्चा हुई है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि गोवा के बीचेस पर बहुत ज्यादा कुत्ते मौजूद हैं. वहां ये कुत्ते शैक और मछली के अवशेषों पर निर्भर रहते हैं. कोर्ट ने कहा कि इससे गोवा का टूरिज्म बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. हाल ही में एससीओआरए कॉन्फ्रेस के दौरान जजों ने खुद यह स्थिति देखी है. जजों का कहना है कि इन कुत्तों को वहां से हटाकर अच्छी जगह रखना होगा. इनके लिए कोई बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की जरूरत नहीं है. बस एक सुरक्षित जगह चाहिए जहां इनकी देखभाल हो सके. गुजरात सरकार ने बताया कि उन्होंने इसके लिए 60 करोड़ का बजट रखा है. अगले साल के लिए 75 करोड़ का बजट भी तय किया गया है. लेकिन कोर्ट गुजरात की रिपोर्ट से भी संतुष्ट नहीं दिखा है. वहां डॉग पाउंड्स के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है. कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी है कि वे अगले हलफनामे में सही डेटा पेश करें. हाईवे पर आवारा पशुओं से होने वाले हादसों का जिम्मेदार कौन है? कोर्ट ने कुत्तों के साथ-साथ हाईवे पर आवारा मवेशियों के मुद्दे को भी उठाया है. एनएचएआई और राज्यों को इस पर मिलकर काम करने को कहा गया है. एमीकस क्यूरी ने हाईवे पर उन जगहों की पहचान करने को कहा है जहां मवेशी सबसे ज्यादा आते हैं. असम में राइनो यानी गैंडों के हाईवे पार करने की समस्या पर भी बात हुई है. इसके लिए वहां एलिवेटेड रोड बनाई गई है. कोर्ट ने कहा कि मवेशियों के हाईवे पर आने के कारणों का पता लगाना जरूरी है. आंध्र प्रदेश ने 14000 संस्थानों की पहचान की है जहां फेंसिंग का काम चल रहा है. लेकिन एमीकस क्यूरी का कहना है कि नसबंदी सेंटर्स की क्षमता का ऑडिट होना चाहिए. राज्यों को यह बताना होगा कि उनके पास मौजूद सेंटर पूरी तरह इस्तेमाल हो रहे हैं या नहीं. कोर्ट ने कहा कि पालतू कुत्ते भी कभी-कभी काट लेते हैं चाहे उन्हें वैक्सीन लगी हो. इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए. कोर्ट अब इस मामले में राज्यों के खिलाफ सख्त आदेश पारित करने की तैयारी में है.

MP में कुत्तों और मवेशियों का ‘आतंक’ खत्म होगा, स्कूल और अस्पतालों के बाहर बनाई जाएगी ‘किलानुमा’ दीवार

भोपाल  मध्यप्रदेश की गलियों और मुख्य सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे आवारा कुत्तों और बेसहारा मवेशियों के खिलाफ मोहन सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा 'डेथ वारंट' जारी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने एक ऐसी एसओपी (SOP) तैयार की है, जो शहरों की तस्वीर बदल देगी। अब आवारा जानवरों का खुलेआम घूमना बीते दिनों की बात होगी। खूनी आंकड़ों ने हिलाया प्रशासन: 6 महीने, 14 हजार शिकार प्रदेश के छह बड़े शहरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रतलाम को पूरी तरह 'रैबीज मुक्त' करने का महाभियान शुरू हो रहा है। यह फैसला बेवजह नहीं है; साल 2025 के शुरुआती छह महीनों में ही इन शहरों में 13,947 निर्दोष लोग खूंखार कुत्तों का शिकार बन चुके हैं। किलानुमा बाउंड्रीवाल से सुरक्षित होंगे सार्वजनिक स्थल नई एसओपी के तहत अब स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील इलाकों के चारों ओर ऊंची बाउंड्रीवाल खड़ी की जाएगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इन 'सेफ जोन' में एक भी कुत्ता या मवेशी नजर नहीं आना चाहिए। स्थानीय निकायों को आदेश दिए गए हैं कि वे उन 'हॉटस्पॉट्स' को तुरंत चिह्नित करें जहां कुत्तों का आतंक सबसे ज्यादा है। बनेगा आश्रय, मवेशियों पर भी होगा कड़ा पहरा सड़कों पर यमराज की तरह घूमने वाले बेसहारा मवेशियों को अब गौशालाओं और शेल्टर होम्स का रास्ता दिखाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य साफ है: आम आदमी की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और बेसहारा जानवरों को भी व्यवस्थित ठिकाना मिलेगा।  

इंदौर में डॉग फीडिंग के नियमों में बदलाव, निगम ने 172 फूड प्वाइंट्स तय कर सख्त गाइडलाइन जारी की

इंदौर नगर निगम ने शहर में आवारा श्वानों को लेकर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली है। शहरभर के सभी वार्डों में 172 स्थानों को आवारा श्वानों के लिए फूड प्वाइंट के रूप में चिन्हित किया गया है। इन स्थानों पर आने वाले दिनों में सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे, ताकि नागरिकों को तय स्थानों की जानकारी मिल सके। शहर में विवाद रोकने के लिए तय किए गए फूड प्वाइंट नगर निगम द्वारा सभी जोनों के अंतर्गत आने वाले वार्डों में ऐसे खुले स्थानों की पहचान की गई है, जहां आवारा श्वानों को भोजन दिया जा सके। अक्सर गलियों और रहवासी इलाकों में श्वानों को भोजन देने को लेकर विवाद की स्थिति बनती रही है। इसी को देखते हुए निगम ने ऐसे स्थान तय किए हैं, जहां किसी भी रहवासी को आपत्ति न हो। ये स्थान खुले इलाकों में और रहवासी क्षेत्रों से दूर रखे गए हैं। 172 स्थानों की सूची निगम वेबसाइट पर उपलब्ध नगर निगम अधिकारी डॉ. उत्तम यादव के अनुसार पहले चरण में 172 स्थानों को आवारा श्वानों के लिए फूड प्वाइंट के रूप में चिह्नित किया गया है। इन सभी स्थानों की सूची निगम की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। जल्द ही यह सूची सभी जोनल कार्यालयों को भेजी जाएगी, ताकि संबंधित कार्यालयों में इसे चस्पा किया जा सके। तय स्थानों पर सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे, जिससे लोग केवल निर्धारित स्थानों पर ही भोजन सामग्री दे सकें। नियम तोड़ने वालों पर होगी चालानी कार्रवाई नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे आवारा श्वानों को भोजन केवल तय किए गए फूड प्वाइंट पर ही दें। प्रारंभ में लोगों को समझाइश दी जाएगी, लेकिन बाद में नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। निर्धारित स्थानों के अलावा अन्य जगहों पर श्वानों को भोजन देने वालों के खिलाफ निगम द्वारा चालान बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। पालतू श्वान मालिकों के लिए भी जारी की चेतावनी नगर निगम ने पालतू श्वान पालने वालों के लिए भी जाहिर सूचना जारी की है। निगम ने श्वान मालिकों से अपील की है कि वे अपने पालतू श्वानों का रजिस्ट्रेशन और टीकाकरण अनिवार्य रूप से कराएं। पत्थर गोदाम रोड स्थित निगम मुख्यालय में टीकाकरण और रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध है। निगम के अनुसार शहर में बड़ी संख्या में श्वान पालने वाले ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक अपने श्वानों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है।  

रायगढ़ में कुत्तों को नसबंदी के बाद बिरयानी? कांग्रेस और मेयर के बीच सत्ता-विपक्ष की भिड़ंत

रायगढ़ रायगढ़ नगर निगम के आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनके आहार को लेकर शहर में विवाद खड़ा हो गया है। महापौर जीवर्धन चौहान ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों का बधियाकरण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान उन्हें बताया गया कि नसबंदी के बाद कुत्ते दो दिन तक कुछ नहीं खाते। ऐसे कमजोर कुत्तों को विशेष आहार के तौर पर बिरयानी खिलाई जाती है। महापौर का यह बयान अलग तरीके से तोड़-मरोड़कर पेश किया जाने लगा, जिसके बाद विपक्ष के नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार और अनावश्यक खर्च बताया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी आवारा कुत्तों के आहार और खर्च पर पारदर्शिता नहीं दिखा रही है। वहीं कुत्तों को बिरयानी खिलाने को लेकर निगम के नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने बीजेपी मेयर जीवर्धन चौहान को घेरा है। उन्होंने ने कहा कि अब आवारा कुत्ते भी बिरयानी खाएंगे। कुत्तों को चिकन या मटन किसकी बिरयानी खिलाई जाएगी। इसके लिए फंड किस मद से खर्च किया जाएगा। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, रायगढ़ में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान शुरू किया गया है। पिछले दिनों रायगढ़ के महापौर जीवर्धन चौहान खुद नसबंदी केंद्र पहुंचे। वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। कुत्तों की देखभाल और दिए जाने वाले भोजन की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान महापौर जीवर्धन चौहान ने कुत्तों को पौष्टिक आहार देने की बात कही। उन्होंने अपने बयान में कुत्तों को खिचड़ी, दलिया और बिरयानी का जिक्र किया। महापौर के इसी बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। चिकन या मटन की खिलाएंगे बिरयानी- कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने कहा कि, अगर आवारा कुत्तों को बिरयानी खिलाई जाएगी, तो यह स्पष्ट किया जाए कि वह चिकन की होगी या मटन की। साथ ही सवाल उठाया कि इसके लिए शासन से कोई आदेश आया है या नहीं। खर्च किस मद से किया जाएगा। नगर निगम ने इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए भिलाई के एक एनजीओ को जिम्मेदारी सौंपी है। एनजीओ कुत्तों को ट्रांसपोर्ट नगर लाकर नसबंदी करता है और दो दिनों तक उन्हें वहां रखकर स्वास्थ्य स्थिति की जांच करता है। नसबंदी और स्वास्थ्य देखभाल की निगरानी के लिए तीन डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। महापौर जीवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया, “मैं बधियाकरण का निरीक्षण करने गया था। टीम ने मुझे कुत्तों की नसबंदी, खान-पान और उपचार की जानकारी दी। कुछ कुत्ते नसबंदी के बाद एक-दो दिन तक खाना नहीं खाते हैं, इसलिए उनको बिरयानी दी जाती है। इस बयान को अलग तरीके से तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।” नगर निगम रायगढ़ ने आवारा कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए बजट भी तय किया है। इस राशि के तहत एनजीओ को समुचित व्यवस्था करने और कुत्तों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने का निर्देश दिया गया है। शहर में इस समस्या को लेकर अभी भी बहस जारी है और राजनीतिक बयानबाजी तेज़ है।     शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा रह है। इसके लिए बजट भी तय किया गया है। इस राशि में एनजीओ को समुचित व्यवस्था करना है। बधियाकरण का निरीक्षण करने मैं गया था, वहां टीम से कुत्तों की नसबंदी, खान-पान व उपचार की जानकारी दी। यह भी बताया गया कि कुछ कुत्ते नसबंदी के बाद एक-दो दिन खाना नहीं खाते है, तो उनको बिरयानी खिलाया जाता है। बिरयानी खिलाने वाले बयान को अलग तरीके से तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है।     – जीवर्धन चौहान महापौर, नगर निगम रायगढ़।  

कॉलेज-स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों की मॉनिटरिंग अनिवार्य, शिक्षकों को जल्द सौंपनी होगी रिपोर्ट

चंडीगढ़  सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हरियाणा के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा निदेशालय की ओर से आए आदेशों में कहा गया है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय, कॉलेज और स्कूल में एक प्रोफेसर या शिक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो कुत्तों की निगरानी और जोखिम की स्थिति में स्थानीय प्रशासन या नगर निगम को सूचित करने की जिम्मेदारी निभाएगा। इसके तहत रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, हिसार, कैथल सहित अन्य जिलों के स्कूलों में खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश भेजे जा चुके हैं। हर स्कूल में नोडल अधिकारी का नाम, पद और मोबाइल नंबर परिसर में प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही इस कार्य की रिपोर्ट शुक्रवार तक मांगे जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। हसला ने जताई नाराजगी हालांकि, इस आदेश के बाद शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जाहिर की है। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (HASLA) के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने कहा कि शिक्षक पहले ही शिक्षण कार्य के अतिरिक्त 20 से अधिक गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। अब कुत्तों की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं सौंपना बिल्कुल अनुचित है।   आदेश तुरंत रद्द किए जाऐं उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मूल भूमिका विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, न कि पशु नियंत्रण से जुड़े कार्य करना। आवारा पशुओं व कुत्तों को नियंत्रित करना नगर निगम, पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसे शिक्षकों पर थोपना शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करेगा। शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि यह आदेश तुरंत रद्द किया जाए और आवारा कुत्तों के प्रबंधन का दायित्व संबंधित विभागों को ही सौंपा जाए।