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ED की बड़ी कार्रवाई: LNCT समूह के ठिकानों पर रेड, 200 करोड़ के लेनदेन की जांच

 भोपाल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भोपाल के एलएनसीटी समूह से जुड़े कई स्थानों पर सोमवार को छापा मारा। जांच देर शाम तक जारी रही। ईओडब्ल्यू में सितंबर 2025 में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत ईडी ने प्रकरण कायम कर कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि भोपाल के अतिरिक्त ईडी ने इंदौर और बिलासपुर में भी संस्था से जुड़े स्थानों पर तलाशी ली है। सभी जगह से दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस जब्त की गई हैं। 200 करोड़ की हेराफेरी का आरोप ईओडब्ल्यू में दर्ज एफआईआर के अनुसार पूरे मामले में लगभग 200 करोड़ रुपये के हेरफेर का आरोप है। इसके अनुसार आस्था फाउंडेशन फॉर एजुकेशन सोसायटी के माध्यम से गड़बड़ी की गई थी, जिसमें ग्रुप के मालिकों, अधिकारियों को मिलाकर सात लोगों को आरोपित बनाया गया है। फीस, स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के लेन-देन जांच के दायरे में जांच में छात्रों की फ़ीस, स्कॉरशिप और एजुकेशन लोन से जुड़े वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताएं सामने आईं हैं। जो राशि संस्था को मिलनी थी उसे दूसरी जगह उपयोग करने का आरोप है। ईओडब्ल्यू की जांच में सोसायटी में दर्ज कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाकर दिखाने की बात सामने आई थी। दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही ईडी ईडी फिलहाल जब्त दस्तावेजों, कंप्यूटर डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं के जरिए प्राप्त राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया और क्या इसमें धन शोधन के तत्व शामिल हैं।  इस संबंध में पक्ष लेने के लिए मालिकों में शामिल अनुपम चौकसे को फोन लगाया, मैसेज भी किया, पर कोई जवाब नहीं मिला।

मोहन यादव पर आरोपों को लेकर BJP का पलटवार, कांग्रेस पर लगाया साजिश रचने का आरोप

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। पार्टी ने कहा है कि कांग्रेस भ्रम की स्थिति निर्मित कर रही है। प्रदेश की जनता कांग्रेस के षडयंत्र को बर्दाश्त नहीं करेगी। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोकप्रिय नेता हैं और प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में दिन-रात काम कर रहे हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी द्वारा हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर जो आरोप लगाया गया, वो पूरी तरह गलत है। कांग्रेस और उनके नेताओं द्वारा भ्रम की स्थिति निर्मित करने का प्रयास किया जा रहा है। मैं समझता हूं कि इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं बताना चाहता हूं कि हमारे मुख्यमंत्री के द्वारा साल 2023 में जो नामांकन दाखिल किया गया उसके मुताबिक उस वक्त उनके पास 17 एकड़ की जो जमीन थी, वो साल 2026 में भी उतनी ही है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ की जो जमीन थी, इसमें भी 2026 में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।" उन्होंने कहा कि एक सिद्धि विनायक कंपनी, जिसका आरोप में जिक्र किया गया, उसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून में घटकर मात्र 65 एकड़ रह गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साल 2017 में इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के बेटे वैभव के पास भी 2023 से पहले जो 16 एकड़ जमीन थी, उसमें डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई परिवर्तन नहीं आया। ये सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने से पहले की थी। उनकी बहू शालिनी यादव द्वारा 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई, जो मास्टर प्लान एरिया के बाहर की थी। आरोपों में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है। वो पूरी तरह से गलत है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई लेना देना नहीं है। उनके रिश्तेदारों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है। उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी में यह आया है कि रिश्तेदारों पर भी जो आरोप लगाए गए, उसमें भी दिए गए तथ्य गलत हैं। मुझे बताया गया है कि ये रिश्तेदार भी अपनी बात कहेंगे और कार्रवाई करेंगे। CM मोहन यादव पर कांग्रेस के आरोपों को भाजपा ने बताया षड्यंत्र मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की जमीन खरीद से जुड़े आरोपों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इसे पूरी तरह निराधार और राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि जब-जब ओबीसी वर्ग का मुख्यमंत्री बना और आगे बढ़ा तो यह कांग्रेस को रास नहीं आया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री मोहन पर जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। कांग्रेस और उसके नेताओं के द्वारा भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है‌। 2023 के बाद जमीन में कोई बढ़ोतरी नहीं उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के द्वारा 2023 के विधानसभा चुनाव में जो नामांकन दाखिल किया था, उस स्थिति में उनके पास 17 एकड़ जमीन थी। आज उसमें कुछ भी परिवर्तन नहीं हुआ है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ की जो जमीन थी, इसमें भी 2026 में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। जिस सिद्धिविनायक कंपनी का उल्लेख किया गया उसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून 2026 में घटकर 65 एकड़ रह गई। मुख्यमंत्री ने 2017 में इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके पुत्र वैभव के पास भी 2023 के पूर्व 16 एकड़ जो जमीन थी, डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया। यह सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने के पहले थी। पुत्रवधू द्वारा खरीदी गई 10 एकड़जमीन का भी दिया विवरण खंडेलवाल ने आगे कहा कि सीएम की पुत्रवधू शालिनी यादव के द्वारा जरूर 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई है, जो कि विकसित मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर थी। आरोप में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है, वह भी पूरी तरह से गलत है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई उसे लेना-देना है। उनके रिश्तेदारों का स्वतंत्र अस्तित्व है और मेरी जानकारी में यह आया है कि वे आरोपों के संबंध में अपना स्टैंड लेंगे और जो कार्रवाई करना होगी, वह करेंगे। प्रदेश के सतत विकास में जुटे सीएम खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के द्वारा प्रदेश के विकास में लगातार काम किया जा रहा है। इस प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने काम किया है फिर वह चाहे किसानों की बात हो या फिर चाहे औद्योगिक विकास की। इस प्रदेश को मध्य प्रदेश को देश के सबसे विकसित राज्यों में ले जाने का काम मुख्यमंत्री द्वारा किया जा रहा है। उनके खिलाफ षड्यंत्र का काम कांग्रेस पार्टी कर रही है। कांग्रेस कर रही षड्यंत्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जब-जब प्रदेश को ओबीसी मुख्यमंत्री मिला, चाहे उमा भारती हो, शिवराज सिंह चौहान या डॉ. मोहन यादव, उन्हें षड्यंत्र करके कमजोर करने का काम कई लोगों के द्वारा किया गया। इस तरह मुख्यमंत्री को कमजोर करने का काम कांग्रेस के लोग करते हैं। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को जनता के द्वारा जो विकास कार्य किए जा रहे हैं, उसमें पीछे नहीं कर पाए तो इस तरह के षड्यंत्र करके हमारी सरकार और मुख्यमंत्री को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। इसे इस प्रदेश की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेसी पिछड़े वर्ग का नेतृत्व बर्दाश्त नहीं करती प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि किसी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इस प्रदेश को विकसित बना रहे हैं। चाहे किसानों की बात करें, चाहे उद्योगों के विकास की बात करें, सीएम डॉ. यादव इस प्रदेश को आगे ले जा रहे हैं। उनके खिलाफ कांग्रेस पार्टी षडयंत्र रच रही है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि जब-जब एक पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री इस प्रदेश को मिला, चाहे उमा भारती हों, चाहे शिवराज सिंह चौहान हों, या मोहन यादव … Read more

इंजीनियरिंग छात्रों के लिए खुशखबरी: MP में घट सकती है कॉलेज फीस, निजी संस्थानों ने दिया प्रस्ताव

भोपाल  प्रदेश के निजी कॉलेजों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई और सस्ती हो जाएगी। कई इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शुल्क विनियामक समिति (एफआरसी) को अपने न्यूनतम शुल्क में कटौती का प्रस्ताव भेजा है। उनकी मांग है कि उनके यहां शिक्षण शुल्क 35 हजार रुपये सालाना कर दिया जाए। इसकी मंजूरी मिलती है तो यह निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के पूरे तंत्र को प्रभावित करेगा। छात्रों की कमी से जूझ रहे संस्थान दरअसल निजी संस्थान विद्यार्थियों की कमी से जूझ रहे हैं। पिछले एक दशक में 58 कॉलेज बंद हो चुके हैं। इस बीच केवल एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खुला है। पिछले वर्षों में इन कॉलेजों की औसतन 45 से 55 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाए। वहीं सरकारी कॉलेजों में 80 से 90 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं। इस वजह से घट रही संख्या विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योगों की जरूरतों और इंजीनियरिंग कोर्स के बीच बढ़ती दूरी, रोजगार को लेकर विद्यार्थियों की बदलती प्राथमिकताएं और नई तकनीकों के अनुरूप पाठ्यक्रम का समय पर अपडेट नहीं होना है इसका प्रमुख कारण है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में अधिकतर प्रवेश दूसरे राज्यों के विद्यार्थी लेते हैं। सीटें रिक्त रहने से बढ़ रही लागत कटौती का प्रस्ताव देने वाले कॉलेजों का तर्क है कि सीटें खाली रहने के कारण प्रति विद्यार्थी लागत बढ़ रही है। इससे संस्थान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। यदि शुल्क कम नहीं किया गया तो संचालन और मुश्किल हो जाएगा। कहा जा रहा है कि शुल्क कटौती से दूसरे प्रदेश के विद्यार्थियों के अलावा प्रदेश के कम आय वाले परिवारों के बच्चे भी आकर्षित होंगे। दूसरे राज्यों की तुलना में पहले से कम है फीस यहां पर यह भी बता दें कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों में इंजीनियरिंग का वार्षिक शुल्क औसतन एक से डेढ़ लाख रुपये तक है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने भी न्यूनमत शुल्क करीब 80 हजार रुपये तय किया है। इसके उलट मध्यप्रदेश में यह शुल्क 40 से 60 हजार रुपये तक है। पांच वर्षों के दौरान यह स्थिति वर्ष — कॉलेज — सीटें — प्रवेशित 2021-22 — 126 — 47,520 — 28,534 2022-23 — 124 — 58,535 — 31,659 2023-24 — 123 — 60,754 — 33,334 2024-25 — 142 — 73,637 — 42,924 2025-26 — 128 — 64,473 — 38,171     उप्र, महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों की तुलना में यहां इंजीनियरिंग का शुल्क कम है। इस कारण यहां पर दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी प्रवेश लेते हैं। कुछ कॉलेज विवि में कन्वर्ट हो रहे हैं, इसलिए वे काउंसलिंग में शामिल नहीं हो रहे हैं।     – डा. अजीत सिंह पटेल, उपाध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ टेक्निकल प्रोफेशनल इंस्टि्टयूशंस मप्र     पांच-छह इंजीनियरिंग कॉलेजों से शुल्क तय करने के प्रस्ताव आए हैं। समिति कालेजों का लेखा-जोखा देखकर न्यूनतम शुल्क तय करती है। इस पर विचार किया जा रहा है।     – डॉ. अनिल शिवानी, सचिव, एफआरसी  

श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना ने बनाया रिकॉर्ड, एक दिन में 11,721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का निस्तारण

श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना ने एक दिन में रिकार्ड 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का किया निस्तारण भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना दोंगलिया ने फ्लाई ऐश के उपयोग एवं पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना में गत दिवस एक ही दिन में कुल 284 बल्करों के माध्यम से लगभग 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का परिवहन कर अब तक सर्वाधिक फ्लाई ऐश परिवहन करने का रिकार्ड बनाया गया। इनमें 114 बल्कर परियोजना के विद्युत गृह क्रमांक एक से और 170 बल्कर विद्युत गृह क्रमांक दो से लोड कर निस्तारित किए गए। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना द्वारा 30 मार्च 2025 को 236 बल्करों के माध्यम से 9429 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश परिवहन का रिकॉर्ड स्थापित किया गया था। उस दौरान विद्युत गृह क्रमांक 1 से 132 बल्कर व विद्युत गृह क्रमांक 2 से 104 बल्कर लोड किए गए थे। इस नवीन उपलब्धि ने न केवल इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, बल्कि फ्लाई ऐश प्रबंधन एवं निस्तारण के क्षेत्र में परियोजना की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को भी दर्शाया है।  

नया बिजली कनेक्शन लेना हुआ आसान, सरल संयोजन पोर्टल से करें ऑनलाइन आवेदन

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिये सरल और सुविधाजनक तरीके से त्वरित नवीन बिजली कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं को सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में घर बैठे ही नवीन कनेक्शन उपलब्ध कराये जा रहे हैं। गौरतलब है कि कंपनी द्वारा विगत जुलाई 2023 से शुरू किये गये ऑनलाइन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से अब तक भोपाल शहर एवं भोपाल ग्रामीण वृत्त में एक लाख 21 हजार 619 नए कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं, जबकि पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र में 6 लाख 11 हजार से अधिक नए कनेक्शन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से सफलतापूर्वक दिये गए हैं। इनमें 10 किलोवॉट तक के अस्थायी कनेक्शन भी शामिल हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने बताया है कि कंपनी के सरल संयोजन पोर्टल पर आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में तत्काल नया बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। नये कनेक्शन लेने के लिये उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी के पोर्टल https://saralsanyojan.mpcz.in:8888/home अथवा UPAY ऐप पर जाकर जरूरी दस्तावेज अपलोड कर समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। आवेदक द्वारा विधिवत ऑनलाइन आवेदन और भुगतान प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत बिजली कंपनी द्वारा सर्वे एवं अन्य औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर उपभोक्ता के परिसर में नया कनेक्शन उपलब्ध करा दिया जाएगा।  

कौन हैं जज रंजना प्रकाश देसाई? जिनकी निगरानी में तैयार होगा UCC का ड्राफ्ट, कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं

भोपाल  मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है. राज्य सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने और इसकी व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है. सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में UCC का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा. इसके लिए न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को जिम्मेदारी सौंपी गई है. उनकी अध्यक्षता में बनी कमेटी भोपाल पहुंच चुकी है. 22 जून से कमेटी ने काम शुरू भी कर दिया है. अब सवाल है कि न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को यूसीसी ड्राफ्ट के लिए क्यों चुना गया है. जानते हैं कौन है न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई जिनकी निगरानी में तैयारी हो रही है? वहीं, कांग्रेस यूसीसी को लेकर बीजेपी पर लगातार हमले कर रही है।  न्यायमूर्ति रंजना की अध्यक्षता में बनी कमेटी प्रदेश की एससी, एसटी और महिला सहित सभी आयोग के पदाधिकारियों के साथ मीटिंग करेंगी. इसके अलावा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, धर्म गुरुओं के साथ चर्चा की जाएगी. छह सदस्यों वाली इस कमेटी में जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रसाद देसाई के साथ रिटायर्ड IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और समाजसेवी बुधपाल सिंह शामिल हैं. सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय कटेसरिया को कमिटी का सचिव नियुक्त किया गया है।  कौन हैं जस्टिस रंजना प्रसाद देसाई न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई देश की सबसे अनुभवी सेवानिवृत्त न्यायाधीशों में मानी जाती हैं और कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समितियों का नेतृत्व कर चुकी हैं. उनका जन्म 30 अक्टूबर 1949 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था. उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज से बीए और साल 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज मुंबई से LLB की पढ़ाई पूरी की. उनके पिता एक मशहूर आपराधिक वकील थे।  30 जुलाई 1973 से उन्होंने वकालत शुरू की. शुरुआत में उन्होंने न्यायमूर्ति प्रताप के सहायक के तौर पर काम किया. 1979 में वह सरकारी वकील बनी और 1 नवंबर 1995 को उन्हें मुंबई हाईकोर्ट में सरकारी वकील नियुक्त किया गया. वह 1996 में बॉम्बे हाई कोर्ट की जज बनीं और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की न्यायाधीश नियुक्त हुईं. 29 अक्टूबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुईं।  रिटायरमेंट के बाद मिली जिम्मेदारियां लोकपाल चयन समिति की सदस्य डिलिमिटेशन कमीशन (सीमांकन आयोग) की अध्यक्ष प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की अध्यक्ष उत्तराखंड UCC समिति की अध्यक्ष गुजरात UCC समिति की अध्यक्ष 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) की अध्यक्ष

Ken-Betwa Link Project: नहरों के लिए जमीन देने वाले किसानों को 4 गुना मुआवजा, सर्वे का काम पूरा

 छतरपुर  देश की पहली नदी जोड़ परियोजना छतरपुर में आकार ले रही है। पहले चरण में करीब 3400 करोड़ का ढोडन बांध बनाया जा रहा है। इस बांध से जिलेभर में नहरें बनाई जाएंगी। जिससे जिले के गांव सिंचाई क्षेत्र से जुड़ सकें। नहरें कहां से डाली जानी हैं और कौन से गांवों से होकर गुजरेंगी इसकी पूरी प्लानिंग की जा चुकी है। जिन किसानों की जमीनें नहरों के दायरे में आएंगी उनको भी सरकार जमीन की कीमत से चार गुना मुआवजा देगी। जिससे किसानों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आए। जिलेभर के 54 गांवों से होकर केन बेतवा की नहरें निकलेंगी। जिसका सर्वे भी किया जा चुका है। केन बेतवा लिंक परियोजना का ढोड़न बांध बनने से 14 गांव डूब में आए थे। इन गांवों को सरकार ने दूसरी जगहों पर विस्थापित किया है। साथ ही उनके लिए कालोनियों बनाई गई हैं। मुआजवा के तौर पर साढ़े बारह लाख रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा दिया गया है। अब सरकार ने मुआवजा नीति को बदलते हुए ग्रामीण क्षेत्र की जमीनों का मआवजा चार गुना तक कर दिया गया है। बांध के डूब क्षेत्र में करीब पांच हजार परिवार प्रभावित हुए। पहले चरण में बांध बनने के बाद दूसरा चरण नहरों का होगा। बांध से बरूआसागर तक बनेगी 218 किमी लंबी कैनाल सरकार का लक्ष्य केन बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड को सिंचाई से जोड़ना है। ढोड़न बांध से यूपी के बरुआसागर तक करीब 218 किमी लंबी केनाल बनाई जाएगी। इस लंबी कैनाल से छोटी टोटी माइनर नहरें निकाली जाएंगी। जिले में सबसे ज्यादा नौगांव के गांव आ रहे हैं जो करीब 21 गांव हैं। जहां से होकर नहरें गुजरेंगी। सरकार ने अपडेट किया मुआवजे का प्रविधान जमीन अधिग्रहण के तहत सरकार अधिग्रहण पर कलेक्टर रेट से दोगुना मुआवजा दिया जाता था लेकिन अब सरकार ने नया आदेश जारी कर मुआवजा राशि को चार गुना कर दिया है। अगर किसी किसान की जमीन की कीमत एक लाख होगी तो सरकार किसान को 4 लाख का मुआवजा देगी। भू अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब सिर्फ किसानों को भुगतान होना है। यह भुगतान 54 गांव के चिन्हित किसानों को किया जाएगा। सरकार ने जमीन अधिग्रहण को लेकर नया आदेश दिया है। इस आदेश के तहत किसानों को उनकी जमीन का सरकारी रेट से चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो गई है अब सिर्फ किसानों को पैसा दिया जाना है। बांध से लेकर बरुआसागर तक बड़ी कैनाल बनेगी उससे माइनर नहरें जोड़ी जाएंगी।- उमा गुप्ता, ईई, केन बेतवा लिंक परियोजना  

ग्वालियर एवं शिवपुरी सहित अब 10 जिलों में संचालित हो रहे आधार सेवा केंद्र

भोपाल  भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा मध्यप्रदेश में आधार सेवाओं को नागरिकों तक अधिक सुगमता, पारदर्शिता और दक्षता के साथ पहुंचाने के लिए आधार सेवा अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। इस पहल से प्रदेश के नागरिकों को आधार नामांकन एवं अद्यतन संबंधी सेवाएं अपने निकट ही उपलब्ध हो सकेंगी। वर्तमान में यूआईडीएआई द्वारा संचालित आधार सेवा केंद्र (एएसके) प्रदेश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, राजगढ़, रायसेन, विदिशा एवं भिण्ड में संचालित हैं। ग्वालियर और शिवपुरी में मंगलवार से आधार सेवा केंद्रों का संचालन प्रारंभ हो गया है। इस प्रकार प्रदेश के 10 जिलों में आधार सेवा केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं। आधार केंद्रों पर नागरिकों को आधार नामांकन, डेमोग्राफिक एवं बायोमेट्रिक अपडेट सहित विभिन्न आधार सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। नागरिकों की सुविधा के लिए इन केन्द्रों पर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। प्रदेश में आधार सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 26 अन्य जिलों में नए आधार सेवा केंद्र स्थापित किए जाने की प्रक्रिया प्रगति पर है। इन केंद्रों के शुरू होने से नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं अपने निकट ही उपलब्ध होंगी और आधार संबंधी कार्यों में समय और संसाधनों की बचत होगी। यूआईडीएआई द्वारा संचालित आधार सेवा केंद्रों के अतिरिक्त प्रदेश में लगभग सभी लोक सेवा केंद्र, राज्य सरकार के विभिन्न कार्यालय जैसे नगर निगम, कलेक्टर कार्यालय, महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना कार्यालय, जनपद पंचायत, शिक्षा विभाग के ब्लॉक संसाधन केंद्र, डाकघर, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और चयनित बैंक शाखाओं के माध्यम से भी आधार सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यूआईडीएआई राज्य कार्यालय, भोपाल के निदेशक  सुमित मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में 2 हजार 800 से अधिक आधार नामांकन केंद्र कार्य कर रहे हैं। नागरिक यूआईडीएआई की वेबसाइट के माध्यम से अपने निकटतम आधार केंद्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आधार में मोबाइल नंबर सहित अन्य विवरण अपडेट रखें। आधार संबंधी किसी भी जानकारी अथवा सहायता के लिए यूआईडीएआई हेल्पलाइन 1947 पर संपर्क किया जा सकता है।  

इंदौर एयरपोर्ट विस्तार पर ब्रेक! 143 एकड़ जमीन की जरूरत, एक दशक से अटका मामला

इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहर और मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा मिले लंबा समय बीत चुका है। इसके बावजूद, शहर को आज भी सीधी वैश्विक कनेक्टिविटी नहीं मिल पा रही है। इस गतिरोध की मुख्य वजह एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक महज 143 एकड़ जमीन का आवंटन रुकना है। सालाना 40 लाख यात्री और 80 फ्लाइट्स का दबाव झेल रहे इस एयरपोर्ट का विस्तार बेहद जरूरी हो गया है। जिला प्रशासन द्वारा भेजा गया भूमि अधिग्रहण का यह प्रस्ताव लंबे समय से विचाराधीन है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस संबंध में कई बार पत्र भी लिख चुका है, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर अंतिम मंजूरी का इंतजार है। यदि यह जमीन मिल जाए, तो इंदौर से सीधे बड़े अंतरराष्ट्रीय विमान उड़ान भर सकेंगे और यात्रियों को दिल्ली-मुंबई की कनेक्टिंग फ्लाइट्स के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। विलंब के कारण संरक्षित जमीन पर अतिक्रमण और अन्य प्रोजेक्ट के लिए आवंटन का डर है। कुछ जमीन मेट्रो के स्टेशन के लिए दी जा चुकी है। हालांकि, अफसरों का दावा है कि इस पर तेजी से काम चल रहा है। विस्तार का गणित: दो चरणों में बदलना है नक्शा एयरपोर्ट प्रबंधन और प्रशासन ने वर्तमान आवश्यकताओं को देखते हुए विस्तार के मूल प्लान को दो चरणों में रीडिजाइन किया है:     पहला चरण (89 एकड़ की जरूरत): रनवे की लंबाई 2700 मीटर से बढ़ाकर 3500 और फिर 4000 मीटर करना है। इससे प्रति घंटे 15 के बजाय 24 फ्लाइट आ-जा सकेंगी।     दूसरा चरण (54 एकड़ की जरूरत): नया आधुनिक टर्मिनल बनाया जाएगा। विमान पार्किंग की क्षमता 26 से बढ़कर 54 हो जाएगी, जिससे रात में भी बड़े विमान पार्क हो सकेंगे। विजन 2047: जब 729 एकड़ का परिसर तीन गुना होगा इंदौर एयरपोर्ट वर्तमान में केवल 729 एकड़ में है। वर्ष 2047 तक की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आसपास के गांवों—सिंहासा और कोड़िया बड़ी की 1100 एकड़ जमीन मिलाकर 1950 एकड़ का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। तब तक यात्री क्षमता 10 से 12 गुना बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, आरक्षित जमीन की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, बड़े हिस्से पर अतिक्रमण हो चुका है, जिससे फनल और लाइट एरिया भी प्रभावित हुआ है। चापड़ा योजना निरस्त, अब उज्जैन भी रेस में आगे जमीन की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों को देखते हुए पूर्व में इंदौर से 45 किलोमीटर दूर चापड़ा में एक नया 'ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट' बनाने की योजना तैयार की गई थी। इसके चलते इंदौर एयरपोर्ट के मूल विस्तार प्लान को सीमित कर दिया गया था, लेकिन अब चापड़ा का प्रस्ताव पूरी तरह निरस्त हो चुका है। वहीं, उज्जैन में नया प्रोजेक्ट मंजूर किया गया है। सबसे बड़ा पेंच… भूमि अधिग्रहण का मुआवजा मेट्रोपॉलिटन रीजन के विकास के तहत पड़ोसी धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ के मद्देनजर नए एयरपोर्ट की प्लानिंग तेजी से आगे बढ़ी है, जिसके लिए 45 करोड़ की राशि भी स्वीकृत हो चुकी है। इंदौर के विस्तार प्रस्ताव में सबसे बड़ा पेंच भूमि अधिग्रहण के मुआवजे की राशि को लेकर फंसा है, जिसकी व्यवस्था राज्य सरकार को करनी है। देरी का खामियाजा… मेट्रो को दी 20 एकड़ जमीन पूर्व में जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट प्रबंधन को सुविधा विस्तार के लिए 20 एकड़ जमीन सौंपी थी। लंबे समय तक उपयोग नहीं किया गया और योजनाएं कागजों में ही घूमती रहीं। परिणाम यह हुआ कि अब उस आवंटित जमीन पर मेट्रो ट्रेन का स्टेशन बनाया जा रहा है, जिससे एयरपोर्ट के पास उपलब्ध आंतरिक स्पेस और कम हो गया है।

Vande Bharat Special Offer: सफर के दौरान फ्री मील और पानी, लेकिन यात्रियों को माननी होगी ये शर्त

भोपाल   इंडियन रेलवे की सबसे आधुनिक ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार की सुविधाएं यात्रियों को दी जा रही हैं. ये ट्रेन तूफानी स्पीड और बेहतरीन सुविधाओं के साथ फिक्स टाइमिंग के लिए जान जाती है. अब रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों के लिए और खुशखबरी दी है।  2 घंटे लेट होने पर यात्रियों को ऑफर इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) के अनुसार वंदे भारत एक्सप्रेस अगर अपने फिक्स टाइम से लेट आती है या स्टेशन से देरी से रवाना होती है तो यात्रा के दौरान यात्रियों को फ्री में भोजन उपलब्ध कराया जाएगा. रेलवे के इस ऑफर से यात्रियों का भरोसा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर और बढ़ेगा. इस ऑफर का मकसद यात्रियों को सफर के दौरान होने वाली असुविधा से बचाना है. रेलवे के अनुसार अगर वंदे भारत एक्सप्रेस अपने तय समय से 2 घंटे या उससे अधिक की देरी से चल रही है, तो यात्रियों को आईआरसीटीसी की तरफ से मुफ्त में खाना, नाश्ता और पीने का पानी दिया जाएगा।  सुबह और रात के हिसाब से खाने का मेनू तय रेलवे ने साफ किया है कि इसके तहत यात्रियों से एक भी पैसा नहीं लिया जाएगा. बुकिंग के समय भी इस मद का कोई चार्ज नहीं जोड़ा जाएगा. ट्रेन के लेटलतीफ होने पर समय के अनुसार खाने का मेन्यू तय होगा. अगर ट्रेन सुबह 2 घंटे से ज्यादा लेट है तो चाय-कॉफी के साथ हेवी ब्रेफास्ट पैसेंजर्स को सर्व किया जाएगा. यदि ट्रेन दोपहर या रात के भोजन के समय लेट होती है, तो यात्रियों को पूरा शाकाहारी भोजन मिलेगा. यात्रियों को रेल नीर (पीने का पानी) भी अतिरिक्त रूप से मुफ्त दिया जाएगा।  बुकिंग के समय नो फूड विकल्प चुनने पर भी सुविधा इस ऑफर में ध्यान रखने योग्य बात ये है कि अगर आपने बुकिंग के दौरान नो फूड का ऑप्शन चुना है तो भी ट्रेन के लेट होने पर फ्री में भोजन व पानी मिलेगा. रेलवे ने साफ किया है कि फ्री मील सर्विस सभी यात्रियों के लिए होगी. टिकट बुक कराते समय आपने फूड का विकल्प चुना हो या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।  मध्य प्रदेश से चलती है 5 वंदे भारत एक्सप्रेस मध्य प्रदेश को कुल 5 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात मिल चुकी है. ये ट्रेनें राज्य के प्रमुख शहरों जैसे भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और खजुराहो को आपस में और देश के अन्य हिस्सों से जोड़ती हैं. ये हैं रानी कमलापति (भोपाल)- हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली), भोपाल- इंदौर-नागपुर ट्रेन, भोपाल-जबलपुर-रीवा वंदे भारत ट्रेन, खजुराहो- हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन, वाराणसी से खजुराहो के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस।  भोपाल रेल मंडल के जनसम्पर्क अधिकारी नवल अग्रवाल ने बताया "वंदे भारत एक्सप्रेस के 2 घंटे या उससे अधिक लेट होने पर यात्रियों को होने वाली असुविधा से बचाने के लिए रेलवे द्वारा बिल्कुल मुफ्त भोजन, नाश्ता और रेल नीर की सुविधा दी जाएगी. ट्रेन के देरी से चलने के समय के आधार पर यात्रियों को भारी नाश्ता या पूरा शाकाहारी भोजन निःशुल्क परोसा जाएगा. यह रेलवे की तरफ से मिलने वाली पूरी तरह से काम्प्लीमेंट्री सेवा है।