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मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को 1189 करोड़ रूपये के विकास कार्यों का करेंगे भूमि-पूजन एवं लोकार्पण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को गुना जिले को विकास की बड़ी सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिले में औद्योगिक विकास, अधोसंरचनात्मक सुदृढ़ीकरण एवं रोजगार सृजन को नई गति देने के उद्देश्य से विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 1059 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाली अंबुजा सीमेंट फैक्ट्री का शिलान्यास करेंगे। साथ ही लगभग 130 करोड़ रुपये की लागत के 144 विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण करेंगे। इन विकास कार्यों से जिले में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा तथा आमजन को बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। जिले में मिलेगें रोजगार के अवसर अंबुजा कांक्रीट नार्थ प्रा.लि. (अडानी ग्रुप) द्वारा मावन में 32 हैक्टेयर भूमि पर स्थापित की जाने वाली यह सीमेंट प्रोजेक्ट जिले के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। परियोजना की उत्पादन क्षमता 2×2 मिलियन टन प्रतिवर्ष होगी। यह यूनिट गुना शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूरी पर स्थापित की जा रही है। सीमेंट प्रोजेक्ट के प्रारंभ होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। लगभग 500 लोगों को प्रत्यक्ष एवं 1000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। साथ ही शासन को प्रतिवर्ष लगभग 160 करोड़ रुपये के जीएसटी राजस्व की प्राप्ति होने की संभावना है। क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा प्रस्तावित परियोजना से न केवल औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि परिवहन, व्यापार, सेवा एवं अन्य सहायक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे गुना जिले की आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी तथा क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में केंद्रीय संचार मंत्री एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया, मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री एवं गुना जिले के प्रभारी मंत्री  गोविन्‍द सिंह राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहेंगे।  

‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापना कार्यक्रम के द्वितीय चरण का हुआ सफल संचालन

भोपाल मध्यप्रदेश के वन्य जीव संरक्षण इतिहास में कान्हा टाइगर रिजर्व में ‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापना कार्यक्रम के द्वितीय चरण के सफल संचालन से नया अध्याय जुड़ गया।  लगभग एक शताब्दी पूर्व प्रदेश के वनों से विलुप्त हो चुकी ‘जंगली भैंस’ प्रजाति की वापसी अब साकार हो रही है। कान्हा टाइगर रिजर्व, मंडला के सुपखार परिक्षेत्र में शुक्रवार को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) मती समिता राजोरा एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव)  एल. कृष्णमूर्ति ने 4 और जंगली भैंसों को विशेष रूप से निर्मित बाड़े में सफलतापूर्वक मुक्त किया। इस अवसर पर संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व  रविंद्र मणि त्रिपाठी, उप संचालक (कोर)  प्रकाश वर्मा, उप संचालक (बफर) सु अमिथा के.बी., समस्त सहायक संचालक, परिक्षेत्र अधिकारी एवं स्थानीय वन अमला उपस्थित रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में वन विभाग जैव विविधता संरक्षण और विलुप्तप्राय प्रजातियों के पुनर्वास के लिये विशेष अभियान चला रहा है। इसी के अंतर्गत असम के प्रसिद्ध काजीरंगा टाइगर रिजर्व से ‘जंगली भैंस’ को कान्हा के सुपखार क्षेत्र में पुनर्स्थापित किया जा रहा है। सुपखार वह क्षेत्र है, जहां ऐतिहासिक रूप से जंगली भैंसों की उपस्थिति होने के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। परियोजना के प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को 4 ‘जंगली भैंस’ (1 नर और 3 मादा)  को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुपखार स्थित विशेष बाड़े में मुक्त किया था। दूसरे चरण में 4 और जंगली भैंसों के आगमन के साथ कान्हा में इनकी संख्या बढ़कर 8 हो गई है। आगामी चरणों में भी परियोजना को और विस्तार दिया जाएगा। इससे प्रदेश में जंगली भैंसों की स्थायी और स्वस्थ आबादी विकसित होगी। काजीरंगा टाइगर रिजर्व से कान्हा टाइगर रिजर्व तक लगभग 2,220 किलोमीटर की लंबी दूरी विशेष वन्यजीव परिवहन वाहनों से तय की गई। यात्रा के दौरान दो विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों की टीम लगातार स्वास्थ्य परीक्षण और निगरानी करती रही। सहायक संचालक एवं परिक्षेत्र अधिकारी ने पूरे अभियान का नेतृत्व किया। यह अभियान लगभग 72 घंटे तक चला। ‘जंगली भैंस’ भारतीय वन्यजीव धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, साथ ही यह वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में भी अहम भूमिका निभाता है। ‘जंगली भैंस’ की वापसी से कान्हा क्षेत्र की जैव विविधता और अधिक समृद्ध होगी और परियोजना देश में वन्यजीव पुनर्स्थापना के सफल मॉडल के रूप में स्थापित हो सकेगी। मध्यप्रदेश, बाघ, चीता और गिद्ध संरक्षण जैसे अभियानों के लिए पहचान बना चुका है। ‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापना अभियान से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर अग्रसर है।  

स्वास्थ्य व्यवस्था होगी मजबूत, MP में बड़े पैमाने पर डॉक्टरों की नियुक्ति

इंदौर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) इंदौर की ओर से मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित किया गया है। आयोग की ओर से जारी इस चयन परिणाम अब तक का सबसे बड़ा रिजल्ट माना जा रहा है, क्योंकि 1832 पदों के लिए 4 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। दो इंटरव्यू पैनल ने 45 दिनों के भीतर उम्मीदवारों का साक्षात्कार करवाया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद महीनेभर में आयोग की ओर से दो भाग में रिजल्ट बनाया गया, जिसमें 87 प्रतिशत मुख्य भाग का परिणाम निकाला है। आयोग ने मेडिकल ऑफिसर पद के लिए 27 जनवरी से इंटरव्यू रखे थे। इसमें 1832 पदों के लिए 4047 उम्मीदवार को बुलाया गया था। ये प्रक्रिया 10 अप्रैल तक चली। शुक्रवार को आयोग ने साक्षात्कार में चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें 87 फीसद (1649 पद) मुख्य भाग शामिल है। वेटिंग लिस्ट में 186 उम्मीदवार बता दें कि, 1649 उम्मीदवारों में से 384 सामान्य से हैं, जबकि 225 एससी, 642 एसटी, 197 ओबीसी और 201 ईडब्ल्यूएस पद हैं। लेकिन, 1220 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। जबकि, 186 उम्मीदवारों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है।   13 फीसदी पदों पर दूसरी सूची में आएगा परिणाम आयोग ने स्पष्ट किया है कि, शासन के निर्देशों के तहत फिलहाल 87 प्रतिशत पदों का परिणाम घोषित किया गया है, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों की चयन प्रक्रिया अलग से पूरी होगी। इन पदों का परिणाम बाद में जारी किए जाएंगे। भर्ती में कुछ पद विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी आरक्षित रखे गए हैं। आयोग के अनुसार, चयन पूरी तरह मेरिट एवं आरक्षण नियमों के आधार पर हुआ है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद और आरक्षण का पेंच अब इस मामले में अधिकारियों का मानना है कि, मेडिकल ऑफिसर के इतने बड़े स्तर पर चयन होने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होने के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने की संभावना बढ़ी है। आयोग के ओएसडी रवींद्र पंचभाई का कहना है कि, ओबीसी आरक्षण के चलते 13 फीसदी प्रावधिक भाग का रिजल्ट नहीं निकाला गया है। डिप्टी सीएम ने दिए थे जल्द भर्ती करने के निर्देश सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए उप स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विभाग को निर्देश दिए थे। उन्होंने बीते एक साल में कई बार विभाग की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देशित किया था कि, रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नए चिकित्सकों की भर्ती होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में हुए शामिल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के साथ ही सुशासन, सुरक्षा और विकास के एक नवयुग का आरंभ हो गया है। पश्चिम बंगाल अब सच्चे अर्थो में 'आमार सोनार बांग्ला' बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन एवं पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री  सुवेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में यह राज्य अब अपने पुराने गौरव और वैभव को प्राप्त कर समग्र विकास, निवेश, सुशासन एवं जनकल्याण के नए-नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कोलकाता के बिग्रेड परेड ग्राउंड में पश्चिम बंगाल की नवगठित राज्य सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। समारोह में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह, केन्द्रीय रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह, अन्य वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्रीगण, एनडीए शासित विभिन्न राज्यों के विभिन्न मुख्यमंत्री एवं अतिविशिष्ट जनों की गरिमामय उपस्थिति में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में  सुवेन्दु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल  आर.एन. रवि ने  सुवेन्दु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद एवं नई सरकार के 5 अन्य मंत्रीगण को भी पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री  सुवेन्दु अधिकारी को लोक कल्याण के इस नए दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए समर्पित मैदानी कार्यकर्ताओं एवं राज्य की जागरूक जनता को भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं हैं।  

प मुख्यमंत्री शुक्ल ने पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को दी बधाई

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने आज कोलकाता में पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री  सुवेन्दु अधिकारी से भेंट कर उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक जनादेश प्रदेश में विकास, सुशासन, सुरक्षा एवं राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रति जनता के अटूट विश्वास को नई मजबूती देगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री  अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विकास एवं जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर होगा और राज्य प्रगति एवं समृद्धि के नए प्रतिमान स्थापित करेगा।  

13 जिलों में मौसम अलर्ट, प्रदेश में दो सिस्टम सक्रिय; कल से बढ़ेगी गर्मी

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस बार मई की शुरुआत से ही मौसम ने अलग रंग दिखाया है। जहां आमतौर पर तेज गर्मी का असर रहता है, वहीं इस बार आंधी, बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि देखने को मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के बीचोंबीच से दो ट्रफ लाइन गुजर रही हैं और ऊपरी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है। इसी वजह से कई जिलों में मौसम लगातार बदल रहा है। इन जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट शनिवार को मौसम विभाग ने 13 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। राजधानी भोपाल स्थित राज्य मौसम विभाग ने शनिवार को सूबे के नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली यानी कुल 13 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इन्ही में से कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। इन जिलों में आंधी बारिश दर्ज इससे पहले शुक्रवार को कहीं तेज गर्मी तो कहीं आंधी-बारिश का दौर देखने को मिला। सिवनी, छिंदवाड़ा, रायसेन, सागर, दमोह, बालाघाट, भोपाल, देवास, खरगोन, राजगढ़, विदिशा, टीकमगढ़, अशोकनगर, शिवपुरी, बैतूल, नरसिंहपुर, मंडला, पांढुर्णा, डिंडौरी, अनूपपुर में कहीं तेज आंधी तो कहीं हल्की बारिश हुई। इन जिलों में तेज ग्रमी का असर वहीं, दिन में कई जिलों में गर्मी का असर देखा गया। इस वजह से रतलाम में पारा 43.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। शाजापुर में 42.6 डिग्री रहा। वहीं, पांच बड़े शहरों में उज्जैन में पारा 42.4 डिग्री, इंदौर-भोपाल में 41.2 डिग्री, जबलपुर में 38.8 डिग्री और ग्वालियर में 37.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 3 से 4 डिग्री तक तापमान में बढ़ोतरी का अनुमान मौसम विभाग ने शनिवार को भी आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है, लेकिन इसके बाद दिन के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। रविवार को मौसम शुष्क होने के कारण प्रदेश के लगभग सभी इलाकों में अदिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग की सावधानी बरतने की सलाह मौसम विभाग ने बिजली चमकने और आंधी के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। खासकर पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने को कहा गया। मौसम में बदलाव होने पर खुले – मैदानी क्षेत्र छोड़कर किसी पक्के मकान में शरण लेने की हिदायत दी गई है। बेमौसम हो रही इस बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका जताई जा रही है। मई में अब तक बारिश का दौर IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, इस बार मई के पहले ही दिन से प्रदेश में मौसम बदला हुआ है। आम तौर पर शुरुआत में तेज गर्मी का असर रहता है, लेकिन इस बार कहीं तेज आंधी-बारिश तो कहीं ओलावृष्टि वाला मौसम रहा। चक्रवात, ट्रफ और वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से ऐसा मौसम रहा। पारे में 3 से 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी होगी मौसम विभाग ने शनिवार को भी आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है, लेकिन इसके बाद दिन के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। रविवार को ज्यादातर शहरों में पारे में 3 से 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम विभाग की सावधानी बरतने की सलाह मौसम विभाग ने बिजली चमकने और आंधी के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। खुले मैदान में होने पर तुरंत किसी पक्के मकान की शरण लें। बेमौसम हो रही इस बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका जताई जा रही है।

23 साल पुराने आदेश पर सवाल, हिंदू पक्ष ने पूछा—ना वजूखाना, ना मीनार, फिर मस्जिद कैसे?

धार  मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अदालत में मांग की गई कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई को भोजशाला परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश दिया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी जाए।  एएसआई के 2003 के आदेश को दी चुनौती हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती दी। इस आदेश के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार पूजा करने और मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में कहा कि एएसआई का यह आदेश प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 का खुला उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी संरक्षित स्मारक या तीर्थ स्थल का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। पूजा के अधिकार के उल्लंघन का आरोप हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि एएसआई के आदेश के आधार पर लागू व्यवस्था हिंदुओं के पूजा के अधिकार का उल्लंघन करती है। साथ ही उन्होंने मुस्लिम पक्ष की उस आपत्ति को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यह मामला जनहित याचिका नहीं बल्कि सिविल विवाद है और इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होनी चाहिए। हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष के तर्कों का खंडन करते हुए कहा कि उसके द्वारा दायर जनहित याचिका कोई दीवानी मुकदमा नहीं है। साथ ही हिंदू पक्ष ने यह भी पूछा कि जब उस इमारत में मीनार और वजूखाना दोनों नहीं है तो वह मस्जिद कैसे कहलाएगी। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने अदालत से गुहार लगाई की कि वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को 11वीं सदी के इस संरक्षित स्मारक का 'मूल धार्मिक स्वरूप' बहाल करने का निर्देश दे क्योंकि ASI की मौजूदा व्यवस्था से उसके बुनियादी अधिकारों का हनन हो रहा है। याचिकाकर्ताओं में शामिल संगठन 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के वकील विष्णु शंकर जैन ने विवादित स्मारक को लेकर ASI के सात अप्रैल 2003 के एक आदेश को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी और स्मारक में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिए जाने की गुहार लगाई। दरअसल ASI के वर्तमान आदेश के अनुसार विवादित परिसर में हर मंगलवार को हिंदुओं और हर शुक्रवार को मुस्लिमों को उपासना की अनुमति दी गई है। जैन ने कहा कि ASI का यह आदेश प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन करता है। ASI के आदेश को बुनियाद अधिकार का उल्लंघन बताया विष्णुशंकर जैन ने कहा कि इस कानून के एक प्रावधान में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि अगर केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित कोई स्मारक पूजास्थल या तीर्थस्थल है, तो उसका उपयोग उसके स्वरूप के विपरीत किसी भी उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा। जैन ने कहा, 'ASI के साल 2003 में दिए गए आदेश के आधार पर जारी व्यवस्था से हमारे उपासना के अधिकारों के साथ ही बुनियादी अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है।' सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पर विवादित स्मारक के 'मूल धार्मिक स्वरूप' के अनुरूप कार्य करने का वैधानिक दायित्व है। विष्णुशंकर जैन ने दिया मुस्लिम पक्ष के तमाम दलीलों का जवाब जैन ने मुस्लिम पक्ष की इस आपत्ति को खारिज किया कि भोजशाला विवाद को लेकर 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' की जनहित याचिका वस्तुतः एक दीवानी मुकदमा है और इसे उच्च न्यायालय की रिट कार्यवाही के बजाय किसी दीवानी अदालत में चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा,'यह कोई दीवानी मुकदमा नहीं है और इसमें तथ्यों से संबंधित कोई विवादित प्रश्न नहीं हैं।' मुस्लिम पक्ष ने दिया उपासना स्थल अधिनियम का हवाला मुस्लिम पक्ष का कहना है कि धार का विवादित स्मारक देश की आजादी की तारीख यानी 15 अगस्त 1947 को मस्जिद के रूप में वजूद में था, लिहाजा उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के प्रावधानों के तहत इसका धार्मिक स्वरूप बदला नहीं जा सकता। हालांकि जैन ने उनकी इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि भोजशाला पर यह कानून लागू नहीं होता क्योंकि वह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष के वकील ने पूछा- मीनार या वजूखाना नहीं तो मस्जिद कैसे उधर हिंदू पक्ष के एक अन्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने मुस्लिम पक्ष के दावों पर सवाल उठाए और कहा कि विवादित स्मारक में कोई मीनार या वजूखाना (नमाज से पहले हाथ-मुंह धोने का स्थान) नहीं है, ऐसे में इसे मस्जिद कैसे कहा जा सकता है? तिवारी ने इमारत के जैन मंदिर होने के दावे को भी नकारा साथ ही तिवारी ने भोजशाला के जैन मंदिर होने के दावे को भी गलत बताया और कहा कि यह स्मारक परमार राजवंश के राजा भोज द्वारा 1034 में स्थापित सरस्वती मंदिर है। मामले में अगली सुनवाई 11 मई को होगी। बता दें कि उच्च न्यायालय भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है। धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है।   मुस्लिम पक्ष ने पूजा स्थल अधिनियम का दिया हवाला सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि धार स्थित यह विवादित स्मारक 15 अगस्त 1947 यानी स्वतंत्रता के समय एक मस्जिद के रूप में मौजूद था। इसलिए पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम 1991 के तहत इसके धार्मिक स्वरूप को बदला नहीं जा सकता। इस पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने जवाब देते हुए कहा कि यह कानून भोजशाला परिसर पर लागू नहीं होता, क्योंकि यह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष ने कहा- भोजशाला मंदिर है, मस्जिद नहीं एक अन्य हिंदू याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से पेश वकील मनीष … Read more

ब्रिज विवाद में सस्पेंड इंजीनियर्स की बहाली, मंत्री के नोटशीट निर्देश से हुआ फैसला

भोपाल  राजधानी भोपाल के चर्चित 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज मामले में निलंबित किए गए सभी सात इंजीनियरों को लोक निर्माण विभाग ने बहाल करने की तैयारी कर ली है। इनमें दो चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। इस ओवरब्रिज के डिजाइन और निर्माण को लेकर देशभर में मध्य प्रदेश सरकार और पीडब्ल्यूडी की काफी आलोचना हुई थी। जानकारी के अनुसार, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने बहाली संबंधी नोटशीट पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि संबंधित अधिकारी जून 2025 से निलंबित हैं, इसलिए उन्हें पुनः सेवा में लिया जाए। इसके बाद विभाग ने बहाली आदेश जारी करने की तैयारी कर रहा है।  सस्पेंशन के दौरान दोनों तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियरों को ईएनसी कार्यालय से संबद्ध किया गया था, जबकि अन्य इंजीनियर भोपाल के फील्ड कार्यालयों में अटैच थे। अब बहाली के बाद सभी अधिकारियों की पदस्थापना ईएनसी कार्यालय में किए जाने की तैयारी है।   पहले जारी हो चुके थे आरोप पत्र जानकारी के अनुसार, सभी सात इंजीनियरों को पूर्व में आरोप पत्र जारी किए गए थे और उनसे जवाब मांगा गया था। डिजाइन से जुड़े अधिकारियों ने अपने जवाब में किसी प्रकार की गलती से इनकार किया। विभाग द्वारा जवाबों का परीक्षण करने के बाद अधिकांश अधिकारियों को बिना अतिरिक्त कार्रवाई के बहाल कर दिया गया।  इन अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई मामले में  चीफ इंजीनियर संजय खांडे, चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा,  प्रभारी ईई शबाना रज्जाक, सहायक यंत्री शानुल सक्सेना, उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा, प्रभारी एसडीओ रवि शुक्ला, प्रभारी ईई जावेद शकील और सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री एमपी सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। आरोप था कि रेलवे की मंजूरी के बिना ड्राइंग अनुमोदन और डिजाइन से जुड़ी प्रक्रियाओं में गंभीर त्रुटियां हुईं। विभागीय जांच अभी जारी रहेगी पीडब्ल्यूडी ने स्पष्ट किया है कि कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच आगे भी जारी रहेगी। इसके लिए अलग से जांच अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो दस्तावेज, बयान और साक्ष्यों का परीक्षण करेगा। यह प्रक्रिया अगले चार से पांच महीने तक चल सकती है। बताया गया है कि तत्कालीन चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा, एसडीओ रवि शुक्ला और उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा के मामलों में बहाली के साथ विभागीय जांच भी जारी रहेगी, जबकि अन्य अधिकारियों को फिलहाल राहत दे दी गई है।  ब्रिज का दोबारा हो रहा री-डिजाइन भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में बने इस रेलवे ओवरब्रिज का तीखा मोड़ शुरुआत से विवादों में रहा है। विशेषज्ञों ने इसे यातायात के लिहाज से जोखिमभरा बताया था। अब पीडब्ल्यूडी और रेलवे मिलकर ब्रिज के टर्निंग हिस्से का दोबारा डिजाइन तैयार कर रहे हैं, हालांकि निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो पाया है। इससे क्षेत्र के हजारों लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि मामला सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया से तकनीकी जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में ब्रिज पर 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से वाहन चलाने को खतरनाक बताया गया था।  

देश का पहला रेयर अर्थ टाइटेनियम पार्क भोपाल में आज खुलेगा

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब क्रिटिकल मिनरल्स इनोवेशन के बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। यहां देश के पहले ‘रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क’ की स्थापना की गई है, जिसका उद्घाटन आज 9 मई को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत के. मोहंती करेंगे। परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड द्वारा विकसित यह पार्क केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं होगा, बल्कि अनुसंधान से उद्योग तक तकनीक पहुंचाने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बनेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को औद्योगिक उपयोग से जोड़ते हुए भारत को रेयर अर्थ मिनरल्स और टाइटेनियम तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। पार्क में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की विकसित आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। यहां नियोडिमियम और सेरियम जैसे दुर्लभ खनिजों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़ी उन्नत प्रक्रियाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही अनुपयोगी और पुराने मैग्नेट्स की रिसाइक्लिंग कर मूल्यवान तत्वों को दोबारा प्राप्त करने की तकनीक भी दिखाई जाएगी। इस पार्क को "प्रयोगशाला से उत्पाद" की अवधारणा पर डिजाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटना है। इससे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उन्नत स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा और उद्योगों के लिए उनकी उपयोगिता प्रदर्शित की जा सकेगी। इस पार्क की कार्यप्रणाली 3P ढांचे पर आधारित है—प्रक्रिया, प्रदर्शन और लोग। इस ढांचे के तहत, पार्क अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रदर्शन, उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से कुशल कार्यबल तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस सुविधा का एक प्रमुख उद्देश्य चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास को बढ़ावा देना है। यह पार्क नियोडिमियम और सेरियम जैसी दुर्लभ धातुओं के उत्पादन की विधियों को प्रदर्शित करेगा, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा सहित आधुनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें बेकार पड़े चुम्बकों को पुनर्चक्रित करके मूल्यवान तत्वों को पुनः प्राप्त करने की तकनीक भी शामिल होगी, जिससे अपशिष्ट कम होगा और संसाधन दक्षता में वृद्धि होगी। अधिकारियों ने आगे कहा कि "दुर्लभ पृथ्वी और टाइटेनियम थीम पार्क" भारत की खनिज आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस विशिष्ट केंद्र की स्थापना महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थिरता, नवाचार और कौशल विकास पर जोर देने के साथ, यह पार्क अत्याधुनिक अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग का केंद्र बनने के लिए तैयार है, जिससे वैश्विक खनिज अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होगी। अस्वीकरण: यह पोस्ट किसी एजेंसी फीड से स्वतः प्रकाशित की गई है और इसमें पाठ में कोई संशोधन नहीं किया गया है। संपादक द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गई है। इस परियोजना का मुख्य फोकस सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा। पार्क में खनिज संसाधनों के पुनः उपयोग और रिसाइक्लिंग तकनीकों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण के साथ आयात निर्भरता कम करने की दिशा में काम किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रेयर अर्थ मिनरल्स की बढ़ती मांग के बीच भोपाल का यह पार्क भारत को रणनीतिक खनिज क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह थीम पार्क ‘3पी फ्रेमवर्क’ पर आधारित होगा। इसके तहत नई तकनीकों और नवाचारों का विकास, उच्च औद्योगिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करना प्रमुख लक्ष्य होंगे। भोपाल में बनने वाला संस्थान क्यों महत्वपूर्ण? भोपाल में आज 9 मई को जिस “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क ”का लोकार्पण होना है, उसे भारत की नई रेयर अर्थ रणनीति के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी विकास और उद्योग सहयोग का केंद्र बन सकती है। भोपाल के आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क” विकसित किए जाने का उद्देश्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि देश में संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तैयार करना है, ताकि भारत केवल कच्चा माल बेचने वाला देश न रह जाए। 'प्रयोगशाला से उत्पाद' की अनूठी अवधारणा विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भोपाल के इस केंद्र में शोध, परीक्षण, प्रोटोटाइप विकास और उद्योगों के लिए तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएं विकसित होती हैं, तो मध्यप्रदेश देश के रेयर अर्थ मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है।यह केवल औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मिशन बन जाएगा। 3पी फ्रेमवर्क पर आधारित कार्यप्रणाली:     प्रक्रिया (प्रोसेस) – दुर्लभ मृदा एवं टाइटेनियम क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों एवं नवाचार उत्पादों का विकास एवं प्रदर्शन।     प्रदर्शन (पर्फार्मेंस) – उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना, जिससे तकनीकों की दक्षता, विश्वसनीयता एवं विस्तार क्षमता सुनिश्चित हो सके।     मानव संसाधन (पीपुल) – युवाओं एवं पेशेवरों के कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से एक सक्षम कार्यबल तैयार

यूसीसी में बड़ा बदलाव, एमपी में एक समुदाय को मिलेगी 70% तक छूट

भोपाल   मध्यप्रदेश में इस साल के अंत तक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो सकती है। सरकार ने इसके लिए कवायद तेज कर दी है। उच्च स्तरीय समिति गठित करने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के मुख्य सचिव को अलग से कहा है कि वे समिति से समन्वय के लिए अपनी निगरानी में अधिकारियों के एक दल को लगाएं ताकि समिति की बैठकें समय-समय पर होती रहें। समिति को जो सहयोग चाहिए, वह राज्य की ओर से उपलब्ध कराया जाए। खास बात यह है कि प्रदेश में यूसीसी में आदिवासियों को 50 से 70 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। असल में उत्तराखंड व गुजरात ने यूसीसी लागू कर दिया है। अब सीएम चाहते हैं कि मप्र इन दोनों राज्यों के बाद यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बने। हालांकि भाजपा व एनडीए शासित दूसरे राज्यों में भी यह कवायद तेजी से चल रही है। सूत्रों के मुताबिक यूपी व असम में भी तैयारियां हो चुकी हैं। समिति को 60 दिन में करने होंगे ये काम प्रदेश में मौजूदा विभिन्न व्यक्तिक, पारिवारिक विधियों, जिनमें विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण- पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक, लिव-इन का अध्ययन। उत्तराखंड-गुजरात में अपनाए गए मॉडल व प्रक्रिया का अध्ययन। राज्य के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए संतुलित-व्यावहारिक विधिक संरचना का प्रस्ताव देना। विभिन्न हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां लेकर उनका निराकरण कराना। सुनवाई व परामर्श बैठकें कर प्रक्रिया में लोगों की सहभागिता। प्रस्तावित व्यवस्था में महिला- बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, समानता एवं सुरक्षा से जरुरी प्रावधानों पर विचार देना। लिव-इन संबंधों के विनियमन, पंजीयन से उत्पन्न अधिकारों के संबंध में सुझाव देना। विधेयक के विधिक, प्रशासनिक एवं क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं का परीक्षण करना, ताकि भविष्य में विधिक जटिलता का सामना न करना पड़े। क्या कहता है यूसीसी विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामले वर्तमान में अलग-अलग व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों द्वारा शासित हैं। यूसीसी में कहा गया है कि यह सभी नागरिकों के बीच समानता, निष्पक्षता और कानूनी स्पष्टता वाले होने चाहिए। एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी संरचना से देश व राज्यों के विकास में सहायता मिलेगी। मप्र में अब तक ये काम हुआ 27 अप्रेल को यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई को अध्यक्ष बनाया है। जबकि सेवानिवृत्त आइएएस शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद् अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह को सदस्य बनाया है। समिति के सचिव का जिम्मा जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया को दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में यूसीसी को लेकर की जा रही तैयारियों पर अधिकारियों से लगातार फीडबैक ले रहे हैं। पिछले सप्ताह सामान्य प्रशासन विभाग की समीक्षा बैठक में भी इस संबंध में जानकारी ली गई थी। कांग्रेस आदिवासियों को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखने के पक्ष में, विरोध पर कर रही विचार उधर कांग्रेस भी यूसीसी पर नजर गड़ाए बैठी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी का एक दल यूसीसी को लेकर सरकार द्वारा की जा रही तैयारियों को देख रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस आदिवासियों को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखने के पक्ष में है।