samacharsecretary.com

DGP मकवाणा बोले- ईमानदारी और सत्यनिष्ठा ही युवा अधिकारियों की सबसे बड़ी पूंजी

ईमानदारी और सत्यनिष्ठा एक युवा अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी है- डीजीपी मकवाणा नवचयनित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को डीजीपी का मार्गदर्शन मध्‍यप्रदेश संवर्ग के 8 प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों ने की सौजन्‍य भेंट भोपाल  मध्‍यप्रदेश संवर्ग 2025 बैच के 08 परिवीक्षाधीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने आज पुलिस मुख्‍यालय में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से सौजन्‍य भेंट की। डीजीपी मकवाणा ने सभी अधिकारियों से परिचय प्राप्‍त कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्‍होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरी तन्‍मयता से प्राप्‍त करें ताकि शासन की जनकल्‍याणकारी योजनाओं का उत्‍कृष्‍ट निष्‍पादन कर सकें। उन्होंने कहा कि वे अपने अधीनस्थ अमले से भी सीखने में संकोच न करें। पुलिस महानिदेशक ने नवचयनित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि जनता की सेवा का दायित्व है। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नए आपराधिक कानून, साइबर सुरक्षा, साइबर फ्रॉड, नारकोटिक्स एवं नशा मुक्ति जैसे विषय प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बदलती चुनौतियों को देखते हुए अधिकारियों को निरंतर सीखते रहने और तकनीक का प्रभावी उपयोग करने की आवश्यकता है। डीजीपी ने अपने सेवाकाल के अनेक अनुभव साझा किए। उन्होंने मंदसौर की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, संवाद और सही नेतृत्व से बड़ी से बड़ी भीड़ को भी शांतिपूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने मुरैना में पदस्थापना के दौरान सड़क सुरक्षा अभियान और निष्पक्ष जांच के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि डायल-100 से 112 आपातकालीन सेवा में परिवर्तन आसान नहीं था। लगभग छह से सात महीने के अथक प्रयासों, टीमवर्क और समर्पण से इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े परिवर्तन के लिए धैर्य और सतत प्रयास आवश्यक हैं। नक्सल चुनौती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ने वर्ष 2025 में नक्सल समस्या से मुक्ति प्राप्त की। यह सुरक्षा बलों, प्रशासन और जनता के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। डीजीपी ने अधिकारियों को सलाह दी कि किसी भी सूचना पर तुरंत विश्वास करने के बजाय पहले उसका सत्यापन करें और उसके बाद ही निर्णय लें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निर्णय हमेशा तथ्यों और निष्पक्षता पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि ईमानदारी (Honesty) और सत्यनिष्ठा (Integrity) एक युवा अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी है। अधिकारियों को भ्रष्टाचार, भौतिकवादी सोच और व्यक्तिगत स्वार्थ से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी भी पद का अहंकार अपने ऊपर हावी न होने दें और प्रत्येक नागरिक की समस्या को स्वयं की समस्या समझकर उसका समाधान करने का प्रयास करें। डीजीपी ने कहा कि प्रशिक्षण अवधि सीखने का सर्वोत्तम अवसर होती है। इस दौरान किसी भी विषय पर प्रश्न पूछने में संकोच नहीं करना चाहिए, चाहे वह जूनियर से पूछना हो या सीनियर से। निरंतर सीखने की भावना ही एक सफल अधिकारी की पहचान है। साहबगिरी' नहीं, जनसेवा का भाव रखें डीजीपी ने नवचयनित अधिकारियों से कहा कि चयन के बाद कभी भी 'साहबगिरी' को अपने सिर पर न चढ़ने दें। उन्होंने अधिकारियों को सकारात्मक सोच अपनाने, विनम्र बने रहने और अपने समकक्ष अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ऐसा कैडर है जहां वरिष्ठ अधिकारी सहज उपलब्ध रहते हैं और सीखने का अनुकूल वातावरण मिलता है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों को इस प्रतिष्ठित सेवा में चयन पर बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। इसी दौरान पुलिस महानिदेशक ने वर्तमान में प्रदेशभर में संचालित "सेफ क्लिक 2.0" साइबर जागरूकता अभियान तथा आगामी 15 जुलाई से प्रारंभ होने वाले "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और नशा मुक्त समाज के निर्माण में प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अधिकारियों को इन अभियानों को जनभागीदारी के माध्यम से प्रभावी बनाते हुए अधिक से अधिक लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाना चाहिए, ताकि समाज को साइबर अपराधों और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से सुरक्षित रखा जा सके।  इस अवसर पर आर.सी.व्‍ही.पी. नरोन्‍हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी की कोर्स एसोसिएट डायरेक्‍टर सुप्रिया शर्मा, पीएसओटू डीजीपी विनीत कपूर, एसओटू डीजीपी मलय जैन, प्रशिक्षु आईएएस खोत पुष्पराज नानासाहेब, सुआयुषी बंसल, माधव अग्रवाल, श्लोक वाइकर, सुआशी शर्मा, शैलेंद्र चौधरी, सुशिल्पा चौहान, सुसौम्या मिश्रा उपस्थित रहीं।  

रीवा लौटते समय दर्दनाक सड़क हादसा, पूर्व विधायक के परिवार के 5 सदस्यों की जान गई

 मैहर  मैहर-रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर  देर रात हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। नादन थाना क्षेत्र के ग्राम रीघरा के पास रात करीब एक बजे हुए इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। तेज रफ्तार से चल रही एक्सयूवी कार सामने चल रहे ट्रक में जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ी का अगला हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। उसमें सवार लोग कार के अंदर ही फंस गए। बताया जा रहा है कि ये सभी लोग किसी रिश्तेदार के यहां से जन्मदिन मनाकर वापस मैहर लौट रहे थे। घायल को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया घायल को प्राथमिक उपचार के बाद जबलपुर रेफर किया गया है। मृतकों की पहचान अंकुर पटेल, मृदुन पटेल, विशेष पटेल, हरिशंकर पटेल तथा एक अन्य परिजन के रूप में हुई है। संजीव कुमार पटेल की हालत चिंताजनक बताई जा रही है सभी मृतक पूर्व विधायक स्वर्गीय लालजी पटेल के परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं। हादसे में संजीव कुमार पटेल गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल भी अस्पताल पहुंचे और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया।  

दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को बनायेंगे देश का अव्वल राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उन्नत खेती व पशुपालन से बढ़ायेंगे किसानों की आमदनी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को बनायेंगे देश का अव्वल राज्य प्रदेश में प्राकृतिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को विशेष बढ़ावा मुख्यमंत्री ने ग्वालियर में उन्नत कृषि कार्यशाला में किसानों से किया संवाद अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन का किया भूमिपूजन ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की आमदनी केवल एक फसल से नहीं बल्कि बहु फसलों एवं उन्नत पशुपालन से बढ़ेगी। इस बात को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा उन्नत व प्राकृतिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हम अगले पाँच वर्षों में मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन में नम्बर वन राज्य बनायेंगे। इसी कड़ी में सरकार नेशनल डेयरी विकास योजना के तहत ग्वालियर दुग्ध संघ सहित साँची दुग्ध उत्पादन संघ को भरपूर मदद दे रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को ग्वालियर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्नत कृषि पर हुई संभागीय कार्यशाला में मौजूद किसानों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कार्यशाला में किसानों से सीधा संवाद करते हुए जैविक व प्राकृतिक खेती पर अनुभव सुने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में मूर्तरूप लेने जा रही अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन का भी रिमोट से भूमिपूजन किया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लगभग 13 करोड़ रुपए की लागत से ग्वालियर के खुरैरी एवं ग्राम जहांगीरपुर में इस हाईटेक नर्सरी के प्रथम चरण का कार्य होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उद्यानिकी, मत्स्य पालन एवं कृषि से जुड़े अन्य विभागों की योजनाओं के तहत विभिन्न किसानों को हितलाभ भी वितरित किए। कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्क्रण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, सांसद भारत सिंह कुशवाह, विधायक मोहन सिंह राठौर व श्रीमती सरला रावत, जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश कुँवर सिंह जाटव, अपेक्स बैंक के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष केशव सिंह बघेल, साडा अध्यक्ष अशोक शर्मा, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक जादौन, नगर निगम सभापति मनोज तोमर, जयप्रकाश राजौरिया, किसान मोर्चा के पदाधिकारी गिर्राज व्यास व अमरदीप सिंह औलख सहित जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल रहे। सिंचाई रकबा होगा 100 लाख हैक्टेयर तक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2023 के बाद सिंचाई रकबे में बड़ी बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2003 में प्रदेश का सिंचाई रकबा मात्र साढ़े 7 लाख हैक्टेयर था जो अब बढ़कर लगभग 50 लाख हैक्टेयर हो गया है। इसे हम 100 लाख हैक्टैयर तक ले जायेंगे। चंबल-पार्वती-काली सिंध एवं केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजनाओ के माध्यम से यह संभव हुआ। उन्होंने इन परियोजनाओं की मंजूरी के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। किसान अब चिंता मुक्त होकर जमा कर सकते हैं कृषि ऋण किसानों से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रदेश के कृषकों को 31 मार्च तक ऋण जमा करने की चिंता नहीं रही है। सरकार ने अब उन्हें ऋण जमा करने के लिये पूरे एक साल का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में सरकार द्वारा सभी प्रकार के कृषि उत्पादों व पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की सहूलियतों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। खिड़क प्रणाली के स्थान पर गौ-शालाओं की स्थापना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौ माता कभी आवारा नहीं हो सकती। इसी भाव के साथ प्रदेश सरकार द्वारा गौ संरक्षण एवं स्वदेशी गाय पालन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार ने इसी कड़ी में नगरीय क्षेत्रों में निराश्रित गायों को बंद करने के लिये कार्यरत खिड़क प्रणाली को समाप्त कर दिया है और बड़े पैमाने पर गौशालायें स्थापित की जा रही हैं। साथ ही देशी गायों में नस्ल सुधार के प्रयास भी प्रमुखता से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला की तरह प्रदेश के महानगर इंदौर, उज्जैन, जबलपुर व भोपाल में बड़ी गौशालाओं की स्थापना की जा रही है। जैविक व प्राकृतिक खेती पर किसानों ने किए अनुभव साझा उन्नत कृषि पर आयोजित हुई संभागीय कार्यशाला में कृषकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सभी कृषकों को अपने पास बुलाया और उत्साहवर्धन किया। ग्वालियर जिले के ग्राम बिलौआ निवासी उन्नत कृषक प्राण सिंह माथुर ने अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि वे अपने छोटे से कृषि फार्म में सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने पाँच नए किस्म के पौधों की खोज की है, जिसे वैज्ञानिक स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। उनके द्वारा ईजाद किए गए अमरूद की “बिलौआ-22” व “बिलौआ-रेड” किस्म पेटेंट हो चुकी हैं। प्राण सिंह अब तक 50 हजार से अधिक कृषकों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे चुके हैं। इसी तरह ग्राम देवरा निवासी बृजेन्द्र रावत ने बताया कि उन्होंने रासायनिक खेती छोड़कर पूरी तरह प्राकृतिक खेती को अपना लिया है। उन्नत प्राकृतिक खेती के लिये उनकी धर्मपत्नी को राष्ट्रीय स्तर पर पाँच अवार्ड मिल चुके हैं। भगवानपुरा मुरार निवासी कृषक देवराज कुशवाह का कहना था कि वे अब प्राकृतिक पद्धति से गेहूँ व सरसों जैसी खाद्यान्न फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इसके अलावा वे भिंडी, गेहूँ, मिर्च व आलू जैसी फसलें भी पैदा करते हैं। मुख्यमंत्री ने समन्वित कृषि प्रणाली एवं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाइयों का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय परिसर में समन्वित कृषि प्रणाली इकाई एवं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई का लोकार्पण भी किया। किसानों के लिए आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी खेती का व्यावहारिक मॉडल कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया है। इस “समन्वित कृषि प्रणाली इकाई” में फसल उत्पादन, बागवानी, डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन तथा जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियों को एकीकृत किया गया है। इस मॉडल में एक गतिविधि का अपशिष्ट दूसरी गतिविधि के लिए रॉ मटेरियल बनता है, जिससे लागत घटती है। साथ ही संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और किसानों को आय … Read more

Indore Traffic Alert: शहर में 5 नए ब्लैक स्पॉट की पहचान, रालामंडल चौराहे पर दुर्घटनाओं का सबसे ज्यादा खतरा

इंदौर  इंदौर शहर में सड़क सुरक्षा की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। एक ओर यातायात पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने पांच ब्लैक स्पॉट को सूची से हटाने में सफलता हासिल की, तो दूसरी ओर उतने ही नए ब्लैक स्पॉट सामने आ गए। सबसे गंभीर बात यह है कि शहर के 16 ब्लैक स्पाट में अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और बायपास कॉरिडोर पर हैं। इससे बायपास इंदौर का सबसे खतरनाक दुर्घटना कारिडोर बनकर उभरा है। रालामंडल चौराहा पूरे शहर का सबसे संवेदनशील ब्लैक स्पाट है, जहां वर्ष 2023 से 15 जून 2026 तक 13 दुर्घटनाओं में 14 लोगों की मौत हुई। यातायात पुलिस के वर्ष-2025 के ब्लैक स्पाट के आंकड़ों (2023, 2024, 2025 तथा 15 जून 2026 तक) के अनुसार, शहर में वर्तमान में 16 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। इनमें 11 पुराने स्थान अब भी सूची में बने हुए हैं, जबकि पांच नए स्थानों को पहली बार ब्लैक स्पाट घोषित किया गया है। दूसरी ओर, पांच पुराने ब्लैक स्पाट को इंजीनियरिंग सुधार के बाद सूची से हटा दिया गया है। यहां सबसे ज्यादा खतरा आंकड़ों के अनुसार, दुर्घटनाओं का सबसे अधिक दबाव अब बायपास और राष्ट्रीय राजमार्ग पर है। ओमेक्स सिटी, बिचौली मर्दाना ब्रिज, रालामंडल चौराहा, कैलोद करताल फाटा, कनाड़िया ब्रिज, यूनो बिजनेस पार्क, फीनिक्स माल और नावदापंथ ब्रिज सहित अधिकांश ब्लैक स्पाट एनएचएआई के हिस्से में आते हैं। तेज रफ्तार, भारी वाहनों की आवाजाही और जंक्शन की डिजाइन इस कॉरिडोर को अधिक जोखिमपूर्ण बना रही है। कैलोद करताल फाटा, लवकुश चौराहा और ओमेक्स सिटी भी लगातार हादसों की सूची में बने हुए हैं। कुछ को सुधारा तो नए उभरे रिजलाय फाटा, बेस्ट प्राइज, आईटी पार्क चौराहा और प्रभु तोल कांटा सहित पांच स्थानों को ब्लैक स्पाट की सूची से हटा दिया गया है। इन स्थानों पर इंजीनियरिंग सुधार और यातायात प्रबंधन का सकारात्मक असर दिखा है। वहीं एमआर-10 टोल, कनाड़िया ब्रिज, यूनो बिजनेस पार्क, फीनिक्स माल और नावदापंथ ब्रिज जैसे पांच नए स्थान ब्लैक स्पाट के रूप में सामने आए हैं। यानी जहां एक स्थान सुरक्षित हुआ, वहीं दूसरे स्थान पर खतरा बढ़ गया। सिर्फ छह माह में 2.48 लाख चालान यातायात पुलिस ने चालानी कार्रवाई में भी तेजी दिखाई है। एक जनवरी 2026 से 25 जून तक 2.48 लाख से अधिक चालान बनाए जा चुके हैं। सबसे अधिक कार्रवाई बिना हेलमेट, गलत पार्किंग और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर हुई है। इसके बावजूद ब्लैक स्पाट की संख्या में स्थायी कमी नहीं आई है। यह संकेत है कि केवल चालानी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। सड़क की डिजाइन, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था और यातायात इंजीनियरिंग में भी व्यापक सुधार की जरूरत है।     122 दुर्घटनाएं (2023 से 15 जून 2026 तक)     123 मौतें दर्ज     2,48,620 चालान ( एक जनवरी से 25 जून 2026 तक) आगे यह करना होगा ब्लैक स्पाट की सूची बताती है कि इंदौर में सड़क सुरक्षा का फोकस अब केवल शहर के चौराहों तक सीमित नहीं रह गया है। सबसे बड़ा जोखिम बायपास और राष्ट्रीय राजमार्ग के हिस्सों पर है। यदि इन कारिडोर पर इंजीनियरिंग सुधार, गति नियंत्रण और निगरानी को प्राथमिकता नहीं दी गई तो एक ब्लैक स्पाट हटने के साथ दूसरा बनने का सिलसिला जारी रहेगा।     राऊ, रालामंडल और अर्जुन बड़ौद में फ्लाइओवर शुरू होने से वहां के ब्लैक स्पाट समाप्त हो गए हैं। अर्जुन बड़ौद में पुल बनने से पहले यातायात का दबाव अधिक था। लाजिस्टिक क्षेत्र होने के कारण ट्रक और ट्राले गलत दिशा से आते थे तथा सड़क पर खड़े रहते थे। इससे दुर्घटनाएं अधिक होती थीं, जो अब समाप्त हो गई हैं। एमआर-10 बायपास पर 65 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन और करीब ढाई किलोमीटर लंबे फ्लाइओवर का निर्माण अगले दो माह में पूरा हो जाएगा। नेमावर रोड पर राघवगढ़ के पास भी दो माह में काम पूरा होने की संभावना है। इससे आवागमन और अधिक सुरक्षित होगा। – प्रवीण यादव, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई  

कोरोना के बाद बढ़ी स्लीपिंग पिल्स की मांग! ICMR रिपोर्ट में लाइफस्टाइल बदलाव का बड़ा खुलासा

जबलपुर   भागदौड़ और तनावभरी जीवनशैली के बीच पर्याप्त नींद न लेना लोगों की सेहत के लिए गम्भीर चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन छह घंटे से भी कम नींद ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम नींद न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि कार्यक्षमता और अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डालती है। एमपी के जबलपुर शहर में भी अनिद्रा की स्थिति गम्भीर होती जा रही है। ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. डीके जैन के अनुसार कोरोना काल के बाद से नींद से सम्बंधित विभिन्न दवाइयों की मांग और बिक्री में भारी उछाल आया है। स्थानीय थोक दवा व्यापारियों के मुताबिक शहर में हर माह सवा करोड़ से दो करोड़ रुपए की नींद सम्बंधी दवाएं बिक रही हैं। शरीर की जैविक जरूरत मनोचिकित्सक डॉ. ओपी रायचंदानी के अनुसार नींद शरीर का एक बायोलॉजिकल फंक्शन है, जो सभी अंगों को री-स्टोर करती है। इसे आलस्य समझना गलत है। उनके अनुसार शहर में दस में से छह लोग कम नींद के कारण किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से प्रभावित हैं। सेहत पर असर नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, एक वयस्क के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद अनिवार्य है। रिसर्च के अनुसार खराब स्लीप -क्वालिटी के कारण देश को सालाना लगभग 29 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब कोई कर्मचारी अधूरी नींद के साथ काम करता है, तो उसकी कार्यक्षमता (प्रोडक्टिविटी) घट जाती है और गलतियों की आशंका बढ़ जाती है। अनिद्रा के कारण विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली और डिजिटल आदतें अनिद्रा की प्रमुख वजह बन रही हैं। इनमें प्रमुख हैं- डिजिटल स्क्रीन की लत: सोने से पहले लम्बे समय तक मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग। बिंज वाचिंग : लोग सोशल मीडिया और देर रात तक फिल्में या वेब सीरीज देखने के आदी हैं। सामाजिक और आर्थिक कारक: शहरी शोर-शराबा, भीषण गर्मी और महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारियों का मानसिक दबाव। नींद लाने के लिए करें ये काम -समय पर नींद लाने के लिए रात का खाना सोने से 3-4 घंटे पहले खा लें। -भारी, मसालेदार या तला हुआ खाना सोने में दिक्कत पैदा कर सकता -रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में शहद या खसखस मिलाकर पीने से मस्तिष्क शांत होता है और अच्छी नींद आती है। -शाम 4 बजे के बाद चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स जैसे कैफीन वाले पदार्थों का सेवन न करें। -सोने वाले कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें। -बिस्तर पर केवल सोने के उद्देश्य से जाएं। वहां बैठकर टीवी देखने या ऑफिस का काम करने से बचें।

मध्य प्रदेश में ट्रैफिक जाम से राहत की तैयारी, Google Maps के पीक ऑवर डेटा से तैयार होगा नया रोड प्लान

भोपाल  प्रदेश के बड़े शहरों के भीतर ट्रैफिक के दवाब को कम करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने डी-कंजेशन पॉलिसी पर काम करना शुरू कर दिया है। शहर के सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव वाले लोकेशन पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। शुरुआत में 6 शहरों का चयन कर काम शुरू किया गया है। इसमें जबलपुर में एक कॉरिडोर तैयार किया भी जा चुका है। इसके अलावा शहर में ही एक और नया कॉरिडोर बनाने की तैयारी की जा रही है। वहीं, राजधानी भोपाल में भी 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। ऐसे 6 शहरों में डी-कंजेशन पॉलिसी के तहत एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने हैं। इन एलिवेटेड कॉरिडोर से बड़े शहरों का ट्रैफिक दबाव होगा कम -भोपाल : शहर के बैरागढ़ इलाके में स्थित लाउखेड़ी से निगम विसर्जन घाट तक 3.7 किमी का 306 करोड़ से कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है, जिसका 80 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है। -इंदौर : शहर के एलआइजी से नवलखा चौराहे तक 7.44 किमी का 306 करोड़ से एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार करने का काम शुरू किया जा चुका है। -उज्जैन : शहर के हरिफाटक फ्लाइओवर और चिमनगंज मंडी चौराहे से इंदौर गेट तक दाने वाले 5.32 कि.मी का 945 करोड़ की लागत से कॉरिडोर बनाने का काम शुरू किया जा चुका है। -जबलपुर : शहर में 7 कि.मी का एक कॉरिडोर 1019 करोड़ से बनकर तैयार किया जा चुका है। जबकि, दूसरा बनाने की तैयारी विभाग द्वारा शुरू कर दी गई है। -ग्वालियर: आईआईआईटीएम महारानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा, स्वर्ण रेखा नदी, गिरबाई एबी रोड पर 13.3 किमी का 1065 करोड़ से फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण काम 75 प्रतिशत पूरा हो चुका है। -रीवा : शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर की डीपीआर बनाई जा रही है, जल्द काम शुरु किया जाएगा। डिजाइन तैयार करने से पहले इन पर विश्लेषण -प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या -पीक आवर में जाम की स्थिति -सड़क की क्षमता दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड -भविष्य के यातायाता का अनुमान गूगल से डेटा परीक्षण कर बनेगी डिजाइन एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने से पहले वैज्ञानिक आधारों पर परीक्षण किया जाता है। खास बात यह है कि गूगल से पहले हर घंटे का डेटा एकत्रित किया जाता है। इसके बाद इस बात का विश्लेषण करते हैं कि, सबसे पीक ऑवर में यहां ट्रैफिक की क्या स्थिति रहती है। उसके आधार पर कॉरिडोर का लेआउट-डिजाइन तैयार करते हैं। इसका डिजाइन ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय से तैयार करवाया जा रहा है। साथ ही रोड सेफ्टी का भी ध्यान रखा जा रहा है।

Indore Green Bond Model की सफलता के बाद रायपुर भी जारी करेगा ₹100 करोड़ का ग्रीन बॉन्ड

 इंदौर  देश में ग्रीन बांड के जरिए शहरी विकास के लिए पूंजी जुटाने का सफल माडल पेश करने वाले इंदौर नगर निगम के नक्शे कदम पर अब रायपुर नगर निगम भी चल पड़ा है। इंदौर की कार्यप्रणाली और अनुभव के आधार पर रायपुर नगर निगम करीब 100 करोड़ रुपये का बांड जारी करने जा रहा है। बांड जारी करने की पूरी प्रक्रिया में इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक मार्गदर्शन दिया है। यह बांड जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त के पहले सप्ताह के बीच जारी हो जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इंदौर के ग्रीन बांड की तर्ज पर रायपुर के बांड को भी निवेशकों का अच्छा प्रतिसाद मिलेगा। ग्रीन बांड से मिलने वाली राशि का उपयोग रायपुर नगर निगम शहर में इलेक्ट्रानिक मार्केट और कमर्शियल कांप्लेक्स विकसित किए जाएंगे। एए रेटिंग मिली है रायपुर के बांड को रायपुर नगर निगम द्वारा शहर के विकास के लिए जारी किए जाने वाले बांड को एए रेटिंग मिली है, जबकि इंदौर नगर निगम द्वारा जारी बांड को एए प्लस रेटिंग मिली थी। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि एए रेटिंग को सामान्यत: अच्छा माना जाता है। रायपुर नगर निगम ने बांड से जुटाई जाने वाली राशि से किए जाने वाले विकास कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली है। शहर के विकास में हिस्सेदारी निभा रहे नागरिक बांड के माध्यम से शहर के विकास के लिए राशि जुटाने के इंदौर नगर निगम के माडल ने नगरीय निकायों के लिए वैकल्पिक वित्तीय संसाधन विकसित करने का नया रास्ता खोल दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ और नगरीय निकाय भी हैं, जो इसी तर्ज पर बांड लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके माध्यम से आम नागरिक अपने शहर के विकास में हिस्सेदारी निभा रहे हैं। यह है इंदौर का बांड मॉडल     जलूद में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए इंदौर नगर निगम ने 10 फरवरी 2023 को ग्रीन बांड जारी किया था।     सिर्फ तीन दिन में ही यह छह गुना अधिक सब्सक्राइब हो गया था।     ग्रीन बांड के माध्यम से नगर निगम ने 244 करोड़ रुपये जुटाए थे।     इस राशि से स्थापित किए गए सोलर प्लांट से निगम को प्रतिमाह करीब पांच करोड़ रुपये की बचत हो रही है।     इंदौर नगर निगम ग्रीन बांड होल्डर्स को 8.25 प्रतिशत ब्याज दे रहा है     ग्रीन बांड के लगभग 18 हजार बांड होल्डर हैं। कई निकाय भी ले रहे हैं सलाह     इंदौर एक दौर है। सिर्फ रायपुर ही नहीं, कई अन्य नगरीय निकाय भी इंदौर के बांड माडल को अपनाने जा रहे हैं। ये निकाय भी विकास कार्यों के लिए जनता से राशि जुटाना चाहते हैं। इंदौर ग्रीन बांड के बाद अब जल्द ही ब्लू बांड भी जारी हो जाएगा। -पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर सितंबर के अंत तक जारी हो जाएगा ब्लू बांड नर्मदा के चौथे चरण के लिए एक हजार करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से इंदौर नगर निगम द्वारा लाया जाने वाला ब्लू बांड सितंबर के अंत तक जारी हो जाएगा। सीए संतोष मुछाल ने बताया कि निगम ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है। दस्तावेज भी तैयार कर लिए गए हैं। लगभग सभी अनुमतियां मिल गई हैं।

MP Transco की 593 EHV लाइनों ने रचा रिकॉर्ड, 4 साल से बिना ब्रेकडाउन जारी बिजली पारेषण

एमपी ट्रांसको की 593 ईएचवी लाइनों ने बनाया चार वर्षों से बिना ब्रेकडाउन के बिजली पारेषण का उल्लेखनीय कीर्तिमान : ऊर्जा मंत्री तोमर भोपाल  आंधी-तूफान, तेज बारिश, बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक चुनौतियों और अन्य अप्रत्याशित व्यवधानों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की 593 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (ईएचवी) ट्रांसमिशन लाइनों ने पिछले चार वर्षों (करीब 1500 दिन) से बिना किसी ब्रेकडाउन के निर्बाध विद्युत पारेषण का उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित किया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इससे विद्युत पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता और मजबूती प्रमाणित हुई है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि कंपनी के अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों तथा ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस में संलग्न आउटसोर्स कर्मियों की प्रतिबद्धता, दक्षता और टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इन लाइनों की इस उपलब्धि के पीछे सतत एवं सजग मेंटेनेंस, प्रभावी मॉनिटरिंग तथा अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मियों की निरंतर तत्परता प्रमुख कारण रहा है। आधुनिक तकनीक और नवाचार के इस्तेमाल से मिली सफलता ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि प्रदेश में विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क को अधिक विश्वसनीय एवं सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीकों के उपयोग, विभिन्न नवाचार,नियमित मेंटेनेंस, समयबद्ध निरीक्षण तथा प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में ईएचवी लाइनें लंबे समय से बिना किसी ब्रेकडाउन के सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। साथ ही इस उपलब्धि के पीछे ट्रांसमिशन लाइनों की नियमित पेट्रोलिंग, थर्मो-विजन निरीक्षण, संवेदनशील स्थलों की विशेष निगरानी, प्री-मानसून मेंटेनेंस अभियान तथा एससीएडीए आधारित सतत मॉनिटरिंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा लाइन कॉरिडोर का प्रभावी प्रबंधन, पेड़ों की समयबद्ध कटाई-छंटाई, इंसुलेटर, कंडक्टर, जंपर एवं अन्य हार्डवेयर का निवारक अनुरक्षण तथा संभावित तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान कर उनका निराकरण किए जाने से ब्रेकडाउन की स्थितियों को प्रभावी रूप से रोका जा सका।  

आदिवासी अंचल से निकली सफलता की मिसाल, उमरिया की प्रियंका सिंह मसराम बनीं MPPSC से हिंदी असिस्टेंट प्रोफेसर

उमरिया  जब हौसले बुलंद हों और लक्ष्य के प्रति ईमानदारी हो, तो बंदिशें और संसाधन कभी आड़े नहीं आते। संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम के तहत आने वाले उमरिया जिले के सुदूर आदिवासी अंचल, पाली विकासखंड के ग्राम कुमूर्दु की बहू प्रियंका सिंह मसराम ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। प्रियंका ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक (हिन्दी) भर्ती परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि और पारंपरिक जिम्मेदारियों के बीच प्रियंका की यह छलांग सिर्फ एक व्यक्तिगत नौकरी का मामला नहीं है, बल्कि यह इस आदिवासी बेल्ट में महिलाओं की बदलती सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का एक बड़ा जमीनी दस्तावेज है। खुद की मेहनत से बनाई अलग पहचान प्रियंका के पति धर्मपाल सिंह वर्तमान में बैतूल जिले की मुलताई जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के पद पर तैनात हैं। प्रशासनिक माहौल घर में होने के बावजूद प्रियंका ने अपनी पढ़ाई की निरंतरता को टूटने नहीं दिया। उन्होंने अपनी इस सफलता से साबित किया कि शादी और पारिवारिक दायित्वों के बाद भी अगर जिद पक्की हो, तो देश की कठिनतम परीक्षाओं में से एक को भी पास किया जा सकता है। ग्रामीण अंचल में जश्न और प्रेरणा की नई लहर कुमूर्दु गांव और आसपास के इलाकों में प्रियंका की इस कामयाबी के बाद से खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है: पपाराजी को रवि किशन ने सुनाया 'मिर्जापुर' का दमदार डायलॉग, देखिए वीडियो     यह सफलता अंचल की अन्य युवतियों में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति एक नया आत्मविश्वास पैदा करेगी।     पांचवीं अनुसूची वाले इस पिछड़े क्षेत्र में उच्च शिक्षा को लेकर समाज का नजरिया तेजी से बदलेगा।     प्रियंका की यह जीत आने वाली पीढ़ी के लिए अब एक गाइडिंग लाइट (प्रेरणा स्रोत) की तरह काम करेगी। स्थानीय स्तर पर परिजनों और समाज के प्रबुद्ध जनों ने प्रियंका सिंह मसराम को इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।  

मध्य प्रदेश में मानसून मेहरबान, 22 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी; मौसम विभाग ने बताया कब तक जारी रहेगा दौर

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून ने पूरी ताकत के साथ एंट्री मार दी है. मानसून ने मध्य प्रदेश को पूरे तरीके से कवर कर लिया है. भोपाल, इंदौर सहित हर जिले में बारिश का दौरा देखने को मिल रहा है. इसी बीच बिजली गिरने सहित हादसों की खबरें भी सामने आ रही है. अब तक कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. अब चूंकि इस बार मध्य प्रदेश में मानसून तय टाइम से देरी से आया था. ऐसे में मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी भरपाई के लिए मानसून अधिक समय तक सक्रिय रह सकता है. आर्टिकल में जानिए मानसून की गतिविधियां।  कब तक एक्टिव रहेगा मानसून मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, आमतौर पर मानसून का मौसम जून से सितंबर तक रहता है. इसलिए फिलहाल सितंबर तक इसके प्रभावी बने रहने की संभावना है. लेकिन मानसून की सक्रियता पूरी तरह मानसूनी ट्रफ की स्थिति पर डिपेंड करती है. ऐसे में बीच-बीच में कुछ दिनों के लिए बारिश कम हो सकती है. इसके बाद ट्रफ के अनुकूल होने पर बारिश का दौर फिर से तेज होने की संभावना रहेगी. सितंबर के बाद मानसून लौटना शुरु हो जाएगा।  मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, ''मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रभाव सामान्यतः जून से सितंबर तक रहता है. इस दौरान मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं रहता, बल्कि इसकी तीव्रता मानसून ट्रफ की स्थिति के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है. वहीं बीच-बीच में ब्रेक की स्थिति भी बन सकती है, लेकिन फिर मानसून दोबारा सक्रिय हो जाता है. मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई सामान्यतः सितंबर के तीसरे सप्ताह से शुरू होकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरी होती है।  कैसे आता है मानसून, कैसे बनते हैं बादल मानसून भारत में सबसे पहले केरल में पहुंचता है. मानसून के बनने का प्रोसेस भी काफी रोचक है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून गर्मियों में जमीन के तेजी से गर्म होने और समुद्र से उठने वाली नमी वाली हवाओं के कारण आता है. हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर हवाएं भारत की ओर आती हैं. नमी वाली हवाएं ठंडी होकर घने बादलों में तब्दील हो जाती हैं और बारिश होने लगती है. मानसून 15 जून से भारत में एक्टिव हो जाता है. जो सितंबर तक चलता है. सिंतबर के बाद मानसून विदा लेने लगता है।  22 जिलों में होगी भारी बारिश 7 जुलाई सुबह 8:30 से 8 जुलाई सुबह 8:30 तक विदिशा, रायसेन, शहडोल और उमरिया जिलों में अति भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. वहीं राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास, सीधी, रीवा, मऊगंज, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, सिंगरौली, सतना और अनूपपुर सहित 22 जिलों में भारी वर्षा के साथ वज्रपात एवं तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है. इसके अलावा भोपाल सहित 28 जिलों में झंझावात, वज्रपात और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।  7 जुलाई सुबह 8:30 से 9 जुलाई सुबह 8:30 तक रायसेन, गुना, अशोकनगर और सागर जिलों में अति भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है. विदिशा, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, श्योपुरकलां, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी सहित 16 जिलों में भारी वर्षा के साथ वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट है. वहीं भोपाल सहित 34 जिलों में झंझावात, वज्रपात और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।  9 जुलाई सुबह 8:30 से 10 जुलाई सुबह 8:30 तक गुना और अशोकनगर में अति भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है. राजगढ़, आगर, मंदसौर, नीमच, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, मुरैना, श्योपुरकलां, कटनी, पन्ना, दमोह, सागर और छतरपुर सहित 13 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है. इसके अलावा भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, भिंड, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्णा सहित 39 जिलों में वज्रपात, झंझावात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है।