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पीढ़ियों को प्रभावित करने वाले सिकल सेल एनीमिया रोग के नियंत्रण में आगे है प्रदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के साथ जनजातीय समाज के विकास और समाज की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार कार्य कर रही है। सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण का कार्य वर्ष 2022 से प्रारंभ हुआ है। इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। कई पीढ़ियां प्रभावित करने वाली बीमारी सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग नियंत्रण और उपचार की दिशा में राज्य सरकार कार्य कर रही है। इस क्षेत्र में प्रदेश अग्रणी है। जनजातीय नायकों के सम्मान में प्रदेश में तीन विश्वविद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। सतपुड़ा क्षेत्र में राजा भभूत सिंह, राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह और रानी दुर्गावती की स्मृति में विभिन्न आयोजन किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के निकट ग्राम अचारपुरा में पांच दिवसीय शिल्पकार महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन और जनजातीय कार्य विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित महोत्सव में जनजातीय कलाकारों द्वारा तैयार शिल्प कृतियों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इन कलाकृतियों को पारंपरिक शैली में आधुनिकता के साथ पेश करने के प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलाकारों से आत्मीयता के साथ चर्चा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक से अधिक प्रयास किए जा रहे हैं। जनजातीय शिल्प का डंका देश-विदेश में बज रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विरासत से विकास के अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरे देश में लोक संस्कृति को बढ़ावा देते हुए प्रगति के कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु गत सप्ताह मध्यप्रदेश भ्रमण पर रहीं और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 24 जून को वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती ने गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयाँ प्रदान की। दुनिया ने उनकी वीरता, शौर्य और पराक्रम को देखा। रानी दुर्गावती ने गौंडवाना क्षेत्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए तत्कालीन मुगल सत्ता के विरुद्ध अनेकों युद्धों में विजय प्राप्त की। उन्होंने राष्ट्र गौरव के लिये संघर्ष करते हुए प्राणों की आहूति दे दी। आज हम रानी कमलापति के पराक्रम के क्षेत्र भोपाल में वीरांगना रानी दुर्गावती के शौर्य को नमन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अनेक जनजातीय वीरों की धरती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदिरंग शिल्पकार महोत्सव में जनजातीय कलाकारों ने प्रकृति के माध्यम से हमारे जीवन में उत्सव के रंग भरने का प्रयास किया है। एनआईडी ने जनजातीय परंपरागत कला को नए आयाम पर पहुंचाया है। कला-संस्कृति के माध्यम से कई लोगों के जीवन में आर्थिक समृद्धि का सूर्य उदय होगा। राज्य सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत चहुंमुखी विकास कर रहा है। राष्ट्रीय फलक पर पहचान बना रही जनजातीय कला जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन के साथ संयुक्त तत्वावधान में मनाये जा रहे इस आदिरंग शिल्पकार महोत्सव में जनजातीय समाज की प्रतिभा को देखने का अवसर मिला है। एनआईडी के समन्वय से मध्यप्रदेश की परंपरागत शिल्प को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। जनजातीय कार्य विभाग के प्रयासों से जनजातीय कलाकारों को प्रोत्साहन भी मिल रहा है। राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इस दिशा में बेहतर कार्य किये जा रहे हैं। राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) की निदेशक डॉ. विद्या राकेश ने कहा कि आदिरंग सिर्फ एक शिल्पकार महोत्सव नहीं, बल्कि डिजाइन, कल्चर, कम्युनिटी और एम्पॉवरमेंट को जोड़ने का एक प्रयास है। गत कुछ वर्षों में एनआईडी ने मध्यप्रदेश जनजातीय कार्य विभाग के साथ मिलकर बैगा, गौंड, भील और अन्य जनजातीय समाज के बीच डिजाइन डेवलपमेंट कार्यशालाएं आयोजित की हैं। इनके माध्यम से शिल्पकारों को डिजाइन अवेयरनेस, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, ब्रांडिग, पैकेजिंग और मार्केटिंग जैसे विषयों से परिचित करवाया गया है ताकि उनकी कला को वर्तमान बाजार की जरूरतों के हिसाब से लिंक किया जा सके। एनआईडी ने जनजातीय समुदायों की संस्कृति का दस्तावेजीकरण भी किया है। यह उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे रोजगार के साथ-साथ सांस्कृतिक विकास के नए अवसर भी विकसित होते हैं। एनआईडी जनजातीय समाज को वोकल फॉर लोकल से जोड़कर राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है। जनजातीय कलाकार  गगन सिंह मरावी ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आदिरंग महोत्सव में गौंड चित्रकारों को नई चीजें सीखने का मौका मिला। भील चित्रकार मती गोरिया भाबोर ने बताया कि इस महोत्सव में हमें अपनी चित्रकार को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है। आदिरंग महोत्सव में 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकार हुए शामिल समारोह में जनजातीय कला, शिल्प और आजीविका संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। पांच दिवसीय महोत्सव में मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकार शामिल हुए। भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के शिल्पकारों ने अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया। महोत्सव के दौरान आयोजित डिजाइन हस्तक्षेप कार्यशालाओं में शिल्पकारों ने एनआईडी मध्यप्रदेश के संकाय सदस्यों एवं छात्र स्वयंसेवकों के सहयोग से बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप नए उत्पाद विकसित किए। समापन समारोह में कार्यशालाओं के दौरान विकसित उत्पादों और डिजाइन अवधारणाओं की विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई। कार्यक्रम में विधायक  विष्णु खत्री, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रामदास रौतेल, अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य  भगत सिंह नेताम,  मंगल सिंह धुर्वे, प्रमुख सचिव जनजातीय विकास  गुलशन बामरा, आयुक्त  तरुण राठी और अन्य अधिकारी गण उपस्थित थे। कार्यक्रम में मती भगवती एवं साथी कलाकारों ने पारंपरिक लोक संगीत से मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अथितियों का स्वागत किया।मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह के रूप में गौंड चित्रकला से निर्मित कला-रूप भेंट किया गया। कार्यक्रम स्थल परिसर में मध्यप्रदेश के विभिन्न जनजाति अंचलों से आए कलाकारों के उल्लास पूर्ण नृत्य और संगीत से हर्ष, उल्लास का वातावरण निर्मितकर दिया।  

संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में मई-2025 बैच का वैलेडिक्टरी समारोह में प्रशिक्षणार्थियों को वितरित किए सर्टिफिकेट

भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश कौशल विकास के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क इसका सशक्त उदाहरण है, जिसने राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि कौशलयुक्त युवा ही विकसित भारत की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। युवा केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि रोजगार सृजित करने की क्षमता भी विकसित करें और "स्किल्ड इंडिया, कौशलयुक्त भारत" के संकल्प को साकार करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। मंत्री  टेटवाल संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क, भोपाल में आयोजित मई-2025 बैच के वैलेडिक्टरी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संत शिरोमणि रविदास की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए तथा विद्यार्थियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर संस्थान का प्रेरणादायी गीत भी प्रस्तुत किया गया। मंत्री  टेटवाल ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले सभी प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए कहा कि यह प्रमाण-पत्र केवल प्रशिक्षण पूर्ण होने का प्रतीक नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास, व्यावसायिक दक्षता और नए अवसरों की शुरुआत का प्रमाण है। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखते रहने, बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को विकसित करने तथा अपने कौशल से प्रदेश और देश की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया। समारोह में मई-2025 बैच के प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा विभिन्न ट्रेड्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। एडवांस नेटवर्किंग एंड सिस्टम्स एडमिनिस्ट्रेशन ट्रेड के छात्र आशीष कुमार को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए मेडल ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया गया। वहीं एडवांस इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी (पावर एंड कंट्रोल) ट्रेड की छात्रा सान्ध्री त्रिवेदी को अनुशासन, उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन और निरंतर उत्कृष्टता के लिए मिनिस्टर मेडल से सम्मानित किया गया। बैच के स्टूडेंट को-ऑर्डिनेटर्स को भी नेतृत्व क्षमता एवं संस्थान की गतिविधियों में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में विद्यार्थियों ने अपने प्रशिक्षण अनुभव साझा करते हुए संस्थान, फैकल्टी और प्लेसमेंट सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। इस बैच के अनेक प्रशिक्षुओं ने भारतीय वायु सेना, मध्यप्रदेश पुलिस, अदाणी समूह, हिंदुजा टेक लिमिटेड और ट्राइडेंट जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में रोजगार प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान "वॉक डाउन मेमोरी" वीडियो के माध्यम से विद्यार्थियों की एक वर्ष की प्रशिक्षण यात्रा, सीखने के अनुभव, सांस्कृतिक गतिविधियों, अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोजर और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। प्रमुख सचिव, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार  मनीष सिंह ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रशिक्षुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कौशल, समर्पण और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्थान के एलुमनाई नेटवर्क से जुड़े रहने का आग्रह किया। कौशल विकास संचालनालय के संचालक  बसंत कुर्रे ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने कौशल का निरंतर विकास करते हुए नए अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस के  प्रदीप राउत ने कहा कि उद्योग जगत आज ऐसे युवाओं की अपेक्षा करता है जो सीखने के लिए सदैव तैयार रहें और नवाचार की सोच के साथ आगे बढ़ें। संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) डॉ. गिरीश शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि मई-2025 बैच के प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण के दौरान केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि व्यावसायिकता, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता भी अर्जित की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान के प्रशिक्षु देश-विदेश में अपनी कार्यशैली और उत्कृष्ट प्रदर्शन से संस्थान तथा मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाएंगे। कार्यक्रम में कौशल विकास संचालनालय के संचालक  बसंत कुर्रे, संस्थान के डायरेक्टर एक्सटर्नल रिलेशंस  नीरज सहाय, डायरेक्टर प्रोक्योरमेंट एंड फैकल्टी  संजय जैन, डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन एंड फाइनेंस मती रोमा बाजपेयी, सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस के  प्रदीप राउत, उप संचालकगण, सहायक संचालकगण, संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी, प्रशिक्षु एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।  

रविन्द्र भवन से साइबर जागरूकता रथ को करेंगे रवाना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए बुधवार, 24 जून 2026 को राजधानी भोपाल के रविन्द्र भवन में राज्य स्तरीय साइबर जागरूकता अभियान "सेफ क्लिक 2.0" का शुभारंभ करेंगे। मध्यप्रदेश पुलिस के इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य आमजन, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को साइबर ठगी तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति जागरूक करना है जिससे वे सुरक्षित साइबर व्यवहार अपना सकें। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा और बाल संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए 'इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन' के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। साथ ही, स्कूली बच्चों में डिजिटल सुरक्षा के प्रति समझ विकसित करने के उद्देश्य से तैयार की गई एक विशेष साइबर जागरूकता बुकलेट और 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान के जागरूकता वीडियो का विमोचन भी किया जाएगा। इस अवसर पर जनसामान्य को सरल एवं प्रभावी ढंग से जागरूक करने के लिए साइबर सुरक्षा पर आधारित एक नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के विभिन्न जिलों में व्यापक स्तर पर जनजागरूकता गतिविधियों के संचालन के लिए 'साइबर जागरूकता रथ' को हरी झंडी दिखाकर (फ्लैग ऑफ) रवाना करेंगे। यह रथ पूरे प्रदेश का भ्रमण कर नागरिकों तक सुरक्षित डिजिटल व्यवहार और सतर्कता का संदेश पहुंचाएगा। इस अभियान के तहत मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर दें और एक सुरक्षित डिजिटल समाज के निर्माण में सहभागी बनें।  

सिवनी के ‘भूतबंधानी सीताफल’ को मिला GI टैग, दुनिया भर में चमकेगा मध्यप्रदेश का नाम

 सिवनी  जिले का प्रसिद्ध जम्बो सीताफल अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकेगा। कई वर्षों से जम्बो सीताफल को जीआई टैग दिलाने में जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग को सफलता मिल गई है। मध्य भारत सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में सिवनी का जम्बो सीताफल दीपोत्सव सहित अन्य त्योहार की प्राकृतिक मिठास व अनूठा स्वाद विशेष पहचान रखता है। औषधीय गुणों से भरपूर ’जम्बो सीताफल’ की प्राकृतिक रूप से सितंबर से नवंबर के बीच सर्वाधिक पैदावार होती है। जिले के छपारा भूतबंधानी में तैयार होने वाला जम्बो सीताफल ट्रकों से हर साल कानपुर, लखनऊ, दिल्ली जैसे महानगरों में भेजा जाता है। छपारा जंगल में प्राकृतिक रूप से उगने वाले स्वादिष्ट सीताफल की उपज का लाभ आदिवासी संग्राहकों को मिलता है। आदिवासियों की आजीविका का मुख्य जरिया 'जम्बो सीताफल’ सुदूर जंगल-पहाड़ी क्षेत्र व खेत की मेढ़ में प्राकृतिक रूप से तैयार 'जम्बो सीताफल' आदिवासियों की आजीविका का मुख्य जरिया है। 'बड़े आकार' व अनोखी 'मिठास' से विशेष पहचान बनाने वाले 'जम्बो सीताफल' की मांग साल दर साल बढ़ती जा रही है, जिससे इस पर निर्भर हजारों परिवारों की आय में वृद्धि हो रही है। लगभग 6 हजार मीट्रिक टन सीताफल का अनुमानित उत्पादन हर साल जिले में होता है, जिसके क्रय-विक्रय से 20-25 करोड़ रुपये का कारोबार दो से तीन माह में हो जाता है। जीआई टैग के मिलने से सिवनी के इस विशेष सीताफल की मार्केटिंग व बिक्री में वृद्धि होगी, सीताफल उत्पादक किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। उत्पादन, विपणन में मिलेगी नई दिशा उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की सहायक संचालक डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार ने बताया कि भोपाल में महानियंत्रक (पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेड मार्क्स) व रजिस्ट्रार (भौगोलिक संकेत) से चेन्नई जीआई रजिस्ट्री में किए गए आवेदन सुनवाई के बाद विभाग ने सिवनी के सीताफल को जीआई टैग जारी कर दिया है। जीआई टैग के लिए किसान उत्पादक संगठन भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधि सदम सिंह बरकडे व राजकुमार भलावी ने सुनवाई में सिवनी जम्बो सीताफल की विशिष्टता तथा इसके महत्व को अधिकारियों के समक्ष रखा था। जीआई टैग मिलने से सिवनी के सीताफल उत्पादन व विपणन में नई दिशा मिलेगी, जिससे स्थानीय सीताफल उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही यह सीताफल देशभर और विदेशों में अपनी विशेष पहचान बनाने में भी सक्षम होगा। सिवनी जम्बो सीताफल अपने बड़े आकार, विशिष्ट स्वाद और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। यह सीताफल अन्य स्थानों पर पाए जाने वाले सीताफलों से कहीं अधिक बड़ा और अधिक मीठा होता है। इन्हीं विशेषताओं के कारण जम्बो सीताफल को जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग दिया गया है। विशेष पहचान मिलने से जिले के सीताफल की बाजार में मांग बढ़ेगी और मूल्य में वृद्धि होने से किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे। जम्बो सीताफल की विशिष्टता     विशाल आकारः सिवनी के सीताफल का आकार अन्य स्थानों के सीताफल की तुलना में बहुत बड़ा होता है। जिले का सीताफल 400 ग्राम से अधिक बड़ा होता है। कुछ फल एक किग्रा तक भी होता है। अन्य जिलों का सीताफल औसत रूप से 100 से 150 ग्राम का होता है जबकि सिवनी जिले का छोटा फल भी 200 ग्राम से ज्यादा वजन का होता है। विशिष्ट स्वाद: जिले के सीताफल का स्वाद सबसे हटके है। यहां का सीताफल बहुत मीठा होता है अन्य स्थानों के सीताफल पनीले पानी के स्वाद का होता है। प्राकृतिक उत्पादन: जिले का सीताफल प्राकृतिक रूप से पैदावार होने के कारण पूर्णतः जैविक होता है, किसी भी प्रकार का खाद, उर्वरक का उपयोग नहीं किया जाता है। पल्प की अधिक मात्रा: जिले के सीताफल में पल्प (गूदा) की मात्रा अधिक होती है।  

काले हिरण व चिंकारा के शिकार कर अतंर्राज्यीय स्तर पर तस्करी करने वाले आरोपी रिजवान एवं इम्तियाज की जमानत याचिका ख़ारिज

भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर में आरोपी रिजवान और आरोपी इम्तियाज द्वारा जमानत याचिका दायर की गयी। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर के समक्ष स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश इकाई इंदौर द्वारा शासन का ठोस पक्ष रखा गया एवं अन्य प्रकरणों जैसे वीरूपक्षा गोडा विरूद्ध स्टेट आफ कर्नाटक राज्य में पारित आदेश एवं उक्त प्रकरण के महत्वपूर्ण तथ्यों से अगवत कराया गया। आरोपियों की मोबाइल फारेन्सिक रिपोर्ट से प्राप्त शिकार के साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर द्वारा स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश इकाई इंदौर द्वारा की गई सटीक विवेचना एवं रखे गए ठोस पक्ष के आधार पर उक्त जमानत याचिकाएं खारिज की गई। प्रकरण में अग्रिम विवेचना जारी है। स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स इकाई इंदौर द्वारा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) म.प्र. के निर्देश पर वनमण्डल इंदौर एवं स्थानीय पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से कार्यवाही की गई। किशनगंज जिला इंदौर से वन्यजीवों के मांस की तस्करी करने वाले 3 आरोपियों को 65 कि.ग्रा. (लगभग), एक नग देसी पिस्टल, 3 जिंदा कारतूस एवं एक नग चार पहिया वाहन टोयोटा इनोवा क्रिस्टा क्रमांक एम.एच-02-ई.पी.-4223 के साथ विभिन्न धाराओं में परिक्षेत्र महू वनमण्डल इंदौर के अंतर्गत वन अपराध प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार किया गया था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुये वन्यजीव मुख्यालय द्वारा इस प्रकरण को अग्रिम विवेचना के लिये स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) इकाई इंदौर को हस्तांतरित किया गया। एसटीएसएफ द्वारा वैज्ञानिक तकनीकी साक्ष्यों की सहायता से नया प्रकरण क्रमांक POR No. 237/22 दिनांक 21.08.25 दर्ज कर विवेचना की जा रही है। उक्त आरोपी इम्तियाज 19 माह से व आरोपी रिजवान 4 माह से ही न्यायिक अभिरक्षा में है। वर्तमान में प्रकरण में कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।  

हालैंड का जलवा और ‘वाइकिंग रो’ का जश्न—नॉर्वे की जीत बना स्टेडियम का यादगार नजारा

नई दिल्ली  नॉर्वे ने सोमवार को न्यू जर्सी में सेनेगल को 3-2 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली। जीत के बाद खिलाड़ियों ने कप्तान मार्टिन ओडेगार्ड के नेतृत्व में समर्थकों के साथ पारंपरिक "वाइकिंग रो" के जरिए जश्न मनाया। वाइकिंग रो वर्ल्ड कप के दौरान नॉर्वे के प्रशंसकों के बीच एक लोकप्रिय परंपरा बन गई है। इसमें समर्थक वाइकिंग्स की लंबी नाव जैसी आकृति में बैठते हैं और ढोल की ताल पर चप्पू चलाने जैसी गतिविधि करते हैं। इसकी तुलना अक्सर आइसलैंड के प्रसिद्ध "वाइकिंग क्लैप" से की जाती है। खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ ने साथ मनाया जश्न नॉर्वे के समर्थक अपने दोनों वर्ल्ड कप मुकाबलों के दौरान और मेजबान शहरों बोस्टन और न्यूयॉर्क सिटी में इस नारे और उत्सव का प्रदर्शन कर चुके हैं। सोमवार की जीत के बाद खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने भी प्रशंसकों के साथ इस जश्न में भाग लिया मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले एरलिंग हालैंड ने कहा कि अगर नॉर्वे जीत हासिल करता है तो वह इस उत्सव को मनाने के लिए उत्सुक थे। हालैंड ने फॉक्स स्पोर्ट्स से कहा, 'मैंने इसे इंटरनेट पर देखा था यह पूरी तरह वायरल हो चुका है। मैच से पहले मार्टिन ओडेगार्ड ने मुझसे पूछा, क्या तुम्हें लगता है कि हमें भी इसमें शामिल होना चाहिए?' मैंने कहा, 'अगर हम जीतते हैं, तो जरूर करेंगे।' क्या होता है वाइकिंग रो? कहा जाता है कि वाइकिंग रो एकता शक्ति और टीमवर्क का प्रतीक है। यह परंपरा युद्ध से पहले एक साथ चप्पू चलाने वाले वाइकिंग योद्धाओं की छवि से प्रेरित है। राष्ट्रीय टीम के प्रति समर्थन दिखाने के लिए प्रशंसक एक साथ तालमेल में यह गतिविधि करते हैं। फुटबॉल कै मैदान पर भी खिलाड़ी एकता के साथ खेलते हैं। इसीलिए खेल में भी इस सेलिब्रेशन का खास महत्व है। कैसा रह मैच का हाल इसके साथ ही बात की जाए मैच की तो नॉर्वे ने 43वें मिनट में मार्कस होल्मग्रेन पेडरसन के गोल की बदौलत बढ़त हासिल की। इसके बाद एरलिंग हालैंड ने 48वें और 58वें मिनट में गोल दागकर विपक्षी खेमे पर दबाव बना दिया। इस परिणाम के साथ नॉर्वे ने ग्रुप I में कम से कम दूसरा स्थान सुनिश्चित कर लिया है। शुक्रवार को मैसाचुसेट्स के फॉक्सबोरो में फ्रांस के खिलाफ होने वाला उनका अंतिम ग्रुप-स्टेज मुकाबला यह तय करेगा कि ग्रुप में शीर्ष स्थान किस टीम के पास जाएगा।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने की मांग, जबलपुर एयरपोर्ट को मिले मां रानी दुर्गावती का नाम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने मंगलवार को मंत्रालय में सौजन्य भेंट की। इस दौरान मंत्री  सिंह ने जबलपुर एयरपोर्ट का नामकरण वीरांगना मां रानी दुर्गावती के नाम पर किए जाने का अनुरोध किया।  सिंह ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक पत्र सौंपते हुए कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती भारतीय इतिहास की गौरवशाली वीरांगनाओं में से एक हैं। उन्होंने अपने साहस, पराक्रम और बलिदान से देश और समाज के लिए अमूल्य योगदान दिया है। विशेष रूप से महाकौशल क्षेत्र और जबलपुर से उनका ऐतिहासिक संबंध रहा है, जिसके कारण उनके नाम पर एयरपोर्ट का नामकरण क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। लोक निर्माण मंत्री ने मुख्यमंत्री से इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जबलपुर एयरपोर्ट को मां रानी दुर्गावती के नाम से जोड़ना उनकी वीरता और बलिदान को सम्मान देने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से प्रेरणा लेने का अवसर भी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्री  सिंह द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महापुरुषों के सम्मान से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई।

15 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर संपन्‍न

भोपाल बदलते अपराध स्वरूपों और आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप पुलिस बल को अधिक सक्षम, तकनीकी रूप से दक्ष एवं जनोन्मुख बनाने के उद्देश्य से शासकीय रेल पुलिस (जीआरपी) द्वारा आयोजित 15 दिवसीय विशेष पुलिस प्रशिक्षण (Smart Policing Training) शिविर का समापन विशेष पुलिस महानिदेशक दूरसंचार  संजीव कुमार शमी तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेल, भोपाल  राजाबाबू सिंह के मुख्य आतिथ्‍य में पी.टी.आर.आई. प्रशिक्षण केंद्र, भोपाल में सम्पन्न हुआ। 08 जून से 22 जून तक आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में जीआरपी भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर इकाइयों के आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक के कुल 30 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता कर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस बल को आधुनिक अधिक 'स्मार्ट', तकनीकी रूप से सक्षम, और संवेदनशील बनाना था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को साइबर अपराधों की जांच एवं रोकथाम, फॉरेंसिक विज्ञान, मानवाधिकार संरक्षण, तनाव प्रबंधन तथा नागरिकों के साथ बेहतर संवाद एवं जनसंपर्क स्थापित करने संबंधी विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। पुलिस अधीक्षक रेल भोपाल  अंकित जायसवाल ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।  

परोपकारी संस्थाओं के प्रोत्साहन से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का किया जाएगा सशक्तीकरण

भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में वल्लभ भवन में मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 के प्रारूप पर मंत्रिपरिषद समिति ने विमर्श किया। बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और समिति के सदस्यों ने नीति को जन-केंद्रित, सेवा-उन्मुख, गरीब एवं वंचित वर्गों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में मंत्रिपरिषद समिति के सदस्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री  चैतन्य काश्यप, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री मती राधा सिंह सहित अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  अशोक बर्णवाल, आयुक्त  धनराजू एस तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण तृतीयक एवं सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, ग्रामीण क्षेत्रों तथा दूरस्थ अंचलों के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए परोपकारी संस्थाओं की सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति का मूल उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को सेवा-भाव एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आमजन तक पहुंचाना है। वर्तमान में प्रदेश गुणवत्तापूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं पहुंच के क्षेत्र में चुनौतियों का सामना कर रहा है। सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों सहित उच्चस्तरीय स्वास्थ्य संस्थान मुख्यतः बड़े शहरों तक सीमित हैं, जिससे प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के नागरिकों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को प्रभावित करती है। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य प्रदेश में उच्चस्तरीय तृतीयक एवं सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की स्थापना को प्रोत्साहित करना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करना, विशेषज्ञ एवं एमबीबीएस चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाना, गरीब मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना, अन्य राज्यों में उपचार के लिये मरीजों के पलायन को कम करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाना है। नीति के अंतर्गत केवल सेवा-उन्मुख एवं लाभ-निरपेक्ष परोपकारी संस्थाओं को पात्र माना जाएगा। इनमें कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के अंतर्गत पंजीकृत कंपनियां, भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के अंतर्गत पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट तथा सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत संस्थाएं शामिल हो सकेंगी। पात्र संस्थाओं के लिए न्यूनतम तीन वर्ष का पंजीकरण एवं सेवा गतिविधियों का संतोषजनक अनुभव होना प्रस्तावित किया गया है। चिकित्सा महाविद्यालय एवं नर्सिंग कॉलेज जैसी अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करने वाली संस्थाओं को प्राथमिकता दिए जाने का भी प्रस्ताव है। बैठक में प्रस्तावित प्रोत्साहनों की भी समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा उपयुक्त भूमि का चयन कर रियायती दरों पर दीर्घकालीन लीज पर उपलब्ध कराने, सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिये उच्च लागत वाले चिकित्सा उपकरणों पर निर्धारित शर्तों के अधीन अनुदान उपलब्ध कराने तथा विभिन्न स्वीकृतियों के लिए सिंगल-पॉइंट क्लियरेंस प्रणाली विकसित करने जैसे प्रावधानों पर चर्चा की गई। मंत्रिपरिषद समिति ने नीति के प्रारूप का परीक्षण करते हुए सुझाव दिया कि इसके सभी प्रावधानों का केंद्र बिंदु आमजन, विशेषकर गरीब एवं वंचित वर्गों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। समिति ने नीति को अधिक सेवा-उन्मुख, पारदर्शी एवं जनहितकारी स्वरूप प्रदान करने पर बल दिया।  

लापरवाह ठेकेदारों पर सख्त एक्शन, राज्यमंत्री गौर ने ब्लैकलिस्ट करने के दिए निर्देश

लापरवाह ठेकेदारों एक्शन की तैयारी, राज्यमंत्री गौर ने ब्लैक लिस्ट करने के दिए निर्देश विकास कार्यों की हुई समीक्षा, 3 दिनों में लंबित कार्य पूर्ण करने के दिये निर्देश भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने मंगलवार को मंत्रालय में विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में निर्माण कार्यों में देरी और लापरवाही पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए नगर निगम के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जो ठेकेदार निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं कर रहे हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाए। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि जनता की सुविधा से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में जिन विकास कार्यों के वर्कऑर्डर जारी हो चुके हैं, उनका शीघ्र भूमि पूजन कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाए, जिससे आमजन को समय पर इन सुविधाओं का लाभ मिल सके। बैठक में उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति और समय-सीमा की विस्तार से समीक्षा की तथा अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग कर कार्यों को तय समय में पूर्ण कराने के निर्देश दिए।