samacharsecretary.com

Indore 311 App: प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े 21 सुधार के लिए घर बैठे कर सकेंगे आवेदन

इंदौर  इंदौर नगर निगम द्वारा जारी इंदौर 311 एप पर संपत्तिकर संबंधी नई आनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके माध्यम से नागरिक घर बैठे संपत्तिकर संबंधी दावे-आपत्ति एवं शिकायत दर्ज करने, अपनी संपत्ति का खुद असेसमेंट कर सकेंगे। इसके अलावा की स्वयं की संपत्ति के संपत्तिकर खाते में आवश्यक सुधार हेतु ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इस एप में अब शिकायत एवं आवेदनों की लाइव ट्रैकिंग भी हो सकेगी। शिकायतकर्ता जान सकेगा कि उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई है या शिकायत किस अधिकारी के पास जांच के लिए है। प्रॉपर्टी टैक्स पर दावे-आपत्ति के सहित 21 तरह के सुधार के झोन या नगर निगम कार्यालय जाने की जरूरत नहीं रहेगी। कई काम आसानी से घर बैठे मोबाइल एप के जरिए हो जाएंगे। प्रॉपर्टी का आकलन खुद कर सकेगा मालिक मोबाइल एप के जरिए संपत्ति के मालिक अब खुद ही प्रॉपर्टी टैक्स का आकलन कर सकते हैं। इसमें उसे प्रॉपर्टी सेल्फ असिसमेंट का ऑप्शन चुनकर इसमें मांगी गई जानकारिया दर्ज कर फार्म को सबमिट करना होगा। इसके साथ ही प्रॉपर्टी टैक्स में दोव और आपत्तियों की शिकायत भी इसी एप के जरिए दर्ज कराई जा सकेगी। अधिकारियों ने शहर के लोगों से अपील की है कि वे अब निगम के दफ्तर आने की जगह घर बैठे ही मोबाइल एप के जरिए इन सुविधाओं का उपयोग करें। एप में सबसे खास बात यह है कि लोग आपत्ति दर्ज कराने के साथ उसे ट्रैक भी कर सकेंगे। एक कॉल में मिलेंगे महापौर यदि आप नगर निगम की कोई भी सेवा से परेशान है जैसे, स्वच्छता, कचड़ा गाड़ी, जीरो वेस्ट ईवेंट,  प्रमाणपत्र, लाइट या अन्य समस्याओं के लिए परेशान हैं, तो 311 एप आप के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. इसके जरिए आप घर बैठे अपनी किसी भी समस्या का समाधान कर सकते हैं. इतना ही नहीं यहां आपको मेयर हेल्पलाइन पर सीधे महापौर तक अपनी समस्या पहुंचाने का मौका भी मिलेगा. इसके लिए आपको एक कंप्लेंट नंबर दिया जाएगा साथ ही आपके पास कॉल बैक भी आएगा. इसके लिए टोल फ्री नंबर 18002331311 भी जारी किया गया है।  एप पर शिकायत और फीडबैक दोनों दे सकते हैं Indore 311 App की खास बात ये है कि यहां आप शिकायत के अलावा अपना फीडबैक भी दे सकते हैं. इसके लिए आप अपनी समस्या की कैटेगरी चुनकर फोटो सहित रिपोर्ट करें और कंप्लेंट नंबर  सेव कर लें. यह एप में भी सेव रहता है. यहां आपको निगम की नई जानकारियां और नोटिस भी मिल जाएंगे. यदि कोई कर्मचारी आपसे सही बर्ताव नहीं करता है तो इसके लिए भी आप शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इस एप पर इंदौर म्युनिसिपल कमिश्नर और महापौर दोनों नजर रखते हैं।  एप इंदौर 311 क्या है? इंदौर 311 एप लोगों की सुविधाओं के लिए लाया गया है. इस एप के जरिए आप स्वच्छता, कचड़ा गाड़ी, जीरो वेस्ट ईवेंट, प्रमाणपत्र, लाइट या अन्य समस्याओं का समाधान सिर्फ एक कॉल के जरिए कर सकते हैं. इस एप की खास बात ये है कि इसके जरिए आप सीधे समुदाय के नेताओं के साथ संवाद कर सकते हैं. इंदौर 311 एप को नागरिक सेवाओं के उपयोग को आसान बनाने के लिए बनाया गया है।   

AI और रोबोट से बदलेगी कैंसर जांच की तस्वीर, इंदौर में 12 सेकंड में रिपोर्ट और मुफ्त स्क्रीनिंग

इंदौर  देश भर में तेजी से ओरल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में समय रहते बीमारियों की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काफी मददगार साबित हो रहा है. रोबोट डिवाइस मुंह से जुड़ी बीमारियों और खासतौर पर कैंसर का पता आसानी से और समय रहते लगा रहा है, जिससे मरीज को बीमारी के गंभीर होने से पहले इलाज मिल सकेगा।  हर साल कैंसर की चपेट में आ रहे हजारों लोग भारत में धूम्रपान की लत के अलावा, तंबाकू का सेवन और तरह-तरह के जानलेवा शौक से कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं. हर साल हजारों मरीज डायग्नोज हो रहे हैं, इनमें से अधिकांश थर्ड और फोर्थ स्टेज कंडीशन में होते हैं. इसलिए इनमें से हर साल 50 हजार लोगों की इलाज के बावजूद बीमारी फैलने के कारण मौत हो जाती है. हॉस्पिटल और ऑन्कोलॉजिस्ट वाले कैंसर सहित कई अन्य गंभीर बीमारियों को प्री स्टेज में पता करने के लिए स्कैन ओ एयर नामक रोबोटिक मशीन का उपयोग कर रहे हैं. यह मशीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बीमारी का 96% तक पता लगाने में सक्षम है।  फ्री में होगी जांच इंदौर स्थित एक निजी अस्पताल में पहली बार यह मशीन स्थपित किया गया है. जहां मुंह की किसी भी समस्या का निशुल्क जांच किया जा रहा है. जांच के बाद फौरन रिपोर्ट मरीज के मोबाइल नंबर में आ जाता है. अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट अमय बियानी ने कहा, "अधिकांश मरीजों को यह पता नहीं होता कि उनके मुंह की छोटी सी तकलीफ कभी भी कैंसर का रूप ले सकती है. अस्पताल में किसी भी तरह की तकलीफ में आने वाले लोग अपने मुंह की प्री मेलेनिन स्टेज में ही जांच कर सकें. इसलिए यह रोबोटिक मशीन स्थापित की गई है।  ओरल कैंसर के लिए क्रांतिकारी साबित इस रोबोटिक मशीन की खोज साल 2020 में पुणे की डेंटिस्ट विधि भानुशाली और रजत कबाड़े ने किया था, इसका उद्देश्य दांतों और मसूड़े की 40 तरह की बीमारियों की पहचान के लिए किया गया था. इस रोबोटिक मशीन से तरह-तरह की मुंह की जांच के अलावा, कैंसर की प्री स्टेज से संबंधित बीमारी और स्थितियां भी डायग्नोज होने लगी हैं, जिससे यह मशीन ओरल कैंसर के डायग्नोज के लिए क्रांतिकारी साबित हो रही है।    मेडिकल प्रोफेशनल के लिए सहायक कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा पवार ने कहा, "रोबोटिक मशीन की जांच रिपोर्ट से काफी हद तक मरीज की बीमारी का पता चल जाता है. जिससे यह डॉक्टर और मेडिकल प्रोफेशनल के लिए भी सहायक सिद्ध होगी. मशीन की जांच रिपोर्ट के बाद सिर्फ उन मरीजों को सीटी स्कैन अथवा बायोप्सी करनी जरूरी होगी. जिनका डायग्नोज मशीन द्वारा ओरल कैंसर के रूप में किया गया है इससे लोगों को अनावश्यक जांच के खतरे और आर्थिक समस्या से बचाव हो सकेगा। 

इंदौर की हवा ने भी बढ़ाया शहर का गौरव, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में मिला दूसरा स्थान; 7 सितंबर को ऐलान

इंदौर  स्वच्छता के सिरमौर इंदौर ने अब अपनी आबोहवा को शुद्ध रखने में भी एक नया मुकाम हासिल किया है। 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026' में इंदौर ने देश के शीर्ष तीन शहरों में अपनी जगह पक्की कर ली है। सूत्रों की मानें तो इस प्रतिष्ठित सर्वेक्षण में शहर ने दूसरा पायदान हासिल किया है। हालांकि, रैंकिंग की आधिकारिक और अंतिम घोषणा 7 सितंबर को नई दिल्ली में की जाएगी। इस खास उपलब्धि के लिए इंदौर को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना है। दिल्ली में मिलेगा 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार'     सात सितंबर को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा ऑडिटोरियम में 'स्वच्छ वायु दिवस' कार्यक्रम आयोजित होगा। इसी समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव परिणामों की विधिवत घोषणा करेंगे।     कार्यक्रम के दौरान इंदौर को 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार' से नवाजा जाएगा। यह सम्मान ग्रहण करने के लिए शहर के महापौर और निगमायुक्त को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी इस पुरस्कार की सूचना पहुंच चुकी है। इन प्रयासों से सुधरी शहर की आबोहवा वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम ने जमीनी स्तर पर कई अहम कदम उठाए, जिनका सीधा और सकारात्मक असर इस सर्वेक्षण में नजर आया। निगम के प्रमुख प्रयास इस प्रकार रहे:     सड़कों की मशीनीकृत सफाई: हवा में धूल के कणों को उड़ने से रोकने के लिए मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया गया।     ग्रीन बेल्ट का विस्तार: पर्यावरण को शुद्ध रखने और हरियाली बढ़ाने के लिए शहरभर में नए ग्रीन बेल्ट विकसित किए गए।     मलबे का उचित प्रबंधन: निर्माण कार्यों और तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया गया।     रीसाइकिल और रीयूज: सीएंडडी कचरे (मलबे) के अधिकतम हिस्से को दोबारा उपयोग में लाने और उसे रीसाइकिल करने पर विशेष जोर दिया गया।     ई-वाहनों पर फोकस: प्रदूषण का स्तर घटाने के लिए सार्वजनिक परिवहन बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया गया। 7 सितंबर को आधिकारिक तौर पर साफ होगी तस्वीर वर्तमान में नगर निगम के सूत्रों के हवाले से इंदौर के दूसरे स्थान पर रहने की सुगबुगाहट है। हालांकि, शहर की वास्तविक रैंकिंग और स्थिति की अंतिम तस्वीर 7 सितंबर को दिल्ली के मुख्य समारोह में ही स्पष्ट होगी, जब परिणामों की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

इंदौर में Wrong Side Driving पर बड़ा एक्शन, 4 लोगों पर FIR; ड्रोन से रखी जा रही नजर

इंदौर  देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में ट्रैफिक व्यवस्था की स्थिति को सुधारने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। पहली बार इंदौर में रॉन्ग साइड वाहन चलाने पर एफआईआर दर्ज की गई है। एक ही दिन में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके जरिए ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को सख्त संदेश दिए हैं। चाणक्यपुरी चौराहे पर की गई कार्रवाई इंदौर के चाणक्यपुरी चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस की ओर से चेकिंग अभियान चलाया गया है। इस दौरान ड्रोन सर्विलांस की भी मदद ली जा रही थी। नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों का चालान काटा जा रहा था। दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे चालक चेकिंग के दौरान यह भी पाया गया कि कुछ लोग विपरीत दिशा में वाहन चलाने के दौरान फोन पर बात कर रहे थे। उन्हें इस बात की परवाह नहीं थी कि इससे दूसरों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इंद्रप्रस्थ चौराहे पर एक ऐसे ही स्कूटी सवार को पकड़ा गया जो रॉन्ग साइड में चल रहा था। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि उसने हेलमेट भी नहीं पहन रखा था। साथ ही उसके पास वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं था। इन लापरवाहियों की वजह से पुलिस ने उसकी स्कूटी जब्त कर ली। साथ ही 4500 रुपए का चालान काटा है। एफआईआर भी दर्ज की गई अलग-अलग मामलों में रॉन्ग साइड वाहन चलाने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की गई है। ऐसे चालकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। मीडिया से बात करते हुए ट्रैफिक डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने कहा है कि रॉन्ग साइड में वाहन चलाकर लोग दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं। ऐसे मामलों में अब सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी। बचना है मुश्किल वहीं, ट्रैफिक चेकिंग के दौरान लोग अभी तक पुलिस को चकमा देकर निकल जाते हैं। मगर इंदौर ट्रैफिक पुलिस ड्रोन से लैस है। चेकिंग प्वाइंट पर ड्रोन से निगरानी की जाती है। अगर आपने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया है तो आपकी तस्वीर खींचकर चालान काटा जाएगा। साथ ही कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

Indore Green Bond Model की सफलता के बाद रायपुर भी जारी करेगा ₹100 करोड़ का ग्रीन बॉन्ड

 इंदौर  देश में ग्रीन बांड के जरिए शहरी विकास के लिए पूंजी जुटाने का सफल माडल पेश करने वाले इंदौर नगर निगम के नक्शे कदम पर अब रायपुर नगर निगम भी चल पड़ा है। इंदौर की कार्यप्रणाली और अनुभव के आधार पर रायपुर नगर निगम करीब 100 करोड़ रुपये का बांड जारी करने जा रहा है। बांड जारी करने की पूरी प्रक्रिया में इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक मार्गदर्शन दिया है। यह बांड जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त के पहले सप्ताह के बीच जारी हो जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इंदौर के ग्रीन बांड की तर्ज पर रायपुर के बांड को भी निवेशकों का अच्छा प्रतिसाद मिलेगा। ग्रीन बांड से मिलने वाली राशि का उपयोग रायपुर नगर निगम शहर में इलेक्ट्रानिक मार्केट और कमर्शियल कांप्लेक्स विकसित किए जाएंगे। एए रेटिंग मिली है रायपुर के बांड को रायपुर नगर निगम द्वारा शहर के विकास के लिए जारी किए जाने वाले बांड को एए रेटिंग मिली है, जबकि इंदौर नगर निगम द्वारा जारी बांड को एए प्लस रेटिंग मिली थी। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि एए रेटिंग को सामान्यत: अच्छा माना जाता है। रायपुर नगर निगम ने बांड से जुटाई जाने वाली राशि से किए जाने वाले विकास कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली है। शहर के विकास में हिस्सेदारी निभा रहे नागरिक बांड के माध्यम से शहर के विकास के लिए राशि जुटाने के इंदौर नगर निगम के माडल ने नगरीय निकायों के लिए वैकल्पिक वित्तीय संसाधन विकसित करने का नया रास्ता खोल दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ और नगरीय निकाय भी हैं, जो इसी तर्ज पर बांड लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके माध्यम से आम नागरिक अपने शहर के विकास में हिस्सेदारी निभा रहे हैं। यह है इंदौर का बांड मॉडल     जलूद में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए इंदौर नगर निगम ने 10 फरवरी 2023 को ग्रीन बांड जारी किया था।     सिर्फ तीन दिन में ही यह छह गुना अधिक सब्सक्राइब हो गया था।     ग्रीन बांड के माध्यम से नगर निगम ने 244 करोड़ रुपये जुटाए थे।     इस राशि से स्थापित किए गए सोलर प्लांट से निगम को प्रतिमाह करीब पांच करोड़ रुपये की बचत हो रही है।     इंदौर नगर निगम ग्रीन बांड होल्डर्स को 8.25 प्रतिशत ब्याज दे रहा है     ग्रीन बांड के लगभग 18 हजार बांड होल्डर हैं। कई निकाय भी ले रहे हैं सलाह     इंदौर एक दौर है। सिर्फ रायपुर ही नहीं, कई अन्य नगरीय निकाय भी इंदौर के बांड माडल को अपनाने जा रहे हैं। ये निकाय भी विकास कार्यों के लिए जनता से राशि जुटाना चाहते हैं। इंदौर ग्रीन बांड के बाद अब जल्द ही ब्लू बांड भी जारी हो जाएगा। -पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर सितंबर के अंत तक जारी हो जाएगा ब्लू बांड नर्मदा के चौथे चरण के लिए एक हजार करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से इंदौर नगर निगम द्वारा लाया जाने वाला ब्लू बांड सितंबर के अंत तक जारी हो जाएगा। सीए संतोष मुछाल ने बताया कि निगम ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है। दस्तावेज भी तैयार कर लिए गए हैं। लगभग सभी अनुमतियां मिल गई हैं।

इंदौर एयरपोर्ट विस्तार पर ब्रेक! 143 एकड़ जमीन की जरूरत, एक दशक से अटका मामला

इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहर और मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा मिले लंबा समय बीत चुका है। इसके बावजूद, शहर को आज भी सीधी वैश्विक कनेक्टिविटी नहीं मिल पा रही है। इस गतिरोध की मुख्य वजह एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक महज 143 एकड़ जमीन का आवंटन रुकना है। सालाना 40 लाख यात्री और 80 फ्लाइट्स का दबाव झेल रहे इस एयरपोर्ट का विस्तार बेहद जरूरी हो गया है। जिला प्रशासन द्वारा भेजा गया भूमि अधिग्रहण का यह प्रस्ताव लंबे समय से विचाराधीन है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस संबंध में कई बार पत्र भी लिख चुका है, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर अंतिम मंजूरी का इंतजार है। यदि यह जमीन मिल जाए, तो इंदौर से सीधे बड़े अंतरराष्ट्रीय विमान उड़ान भर सकेंगे और यात्रियों को दिल्ली-मुंबई की कनेक्टिंग फ्लाइट्स के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। विलंब के कारण संरक्षित जमीन पर अतिक्रमण और अन्य प्रोजेक्ट के लिए आवंटन का डर है। कुछ जमीन मेट्रो के स्टेशन के लिए दी जा चुकी है। हालांकि, अफसरों का दावा है कि इस पर तेजी से काम चल रहा है। विस्तार का गणित: दो चरणों में बदलना है नक्शा एयरपोर्ट प्रबंधन और प्रशासन ने वर्तमान आवश्यकताओं को देखते हुए विस्तार के मूल प्लान को दो चरणों में रीडिजाइन किया है:     पहला चरण (89 एकड़ की जरूरत): रनवे की लंबाई 2700 मीटर से बढ़ाकर 3500 और फिर 4000 मीटर करना है। इससे प्रति घंटे 15 के बजाय 24 फ्लाइट आ-जा सकेंगी।     दूसरा चरण (54 एकड़ की जरूरत): नया आधुनिक टर्मिनल बनाया जाएगा। विमान पार्किंग की क्षमता 26 से बढ़कर 54 हो जाएगी, जिससे रात में भी बड़े विमान पार्क हो सकेंगे। विजन 2047: जब 729 एकड़ का परिसर तीन गुना होगा इंदौर एयरपोर्ट वर्तमान में केवल 729 एकड़ में है। वर्ष 2047 तक की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आसपास के गांवों—सिंहासा और कोड़िया बड़ी की 1100 एकड़ जमीन मिलाकर 1950 एकड़ का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। तब तक यात्री क्षमता 10 से 12 गुना बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, आरक्षित जमीन की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, बड़े हिस्से पर अतिक्रमण हो चुका है, जिससे फनल और लाइट एरिया भी प्रभावित हुआ है। चापड़ा योजना निरस्त, अब उज्जैन भी रेस में आगे जमीन की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों को देखते हुए पूर्व में इंदौर से 45 किलोमीटर दूर चापड़ा में एक नया 'ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट' बनाने की योजना तैयार की गई थी। इसके चलते इंदौर एयरपोर्ट के मूल विस्तार प्लान को सीमित कर दिया गया था, लेकिन अब चापड़ा का प्रस्ताव पूरी तरह निरस्त हो चुका है। वहीं, उज्जैन में नया प्रोजेक्ट मंजूर किया गया है। सबसे बड़ा पेंच… भूमि अधिग्रहण का मुआवजा मेट्रोपॉलिटन रीजन के विकास के तहत पड़ोसी धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ के मद्देनजर नए एयरपोर्ट की प्लानिंग तेजी से आगे बढ़ी है, जिसके लिए 45 करोड़ की राशि भी स्वीकृत हो चुकी है। इंदौर के विस्तार प्रस्ताव में सबसे बड़ा पेंच भूमि अधिग्रहण के मुआवजे की राशि को लेकर फंसा है, जिसकी व्यवस्था राज्य सरकार को करनी है। देरी का खामियाजा… मेट्रो को दी 20 एकड़ जमीन पूर्व में जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट प्रबंधन को सुविधा विस्तार के लिए 20 एकड़ जमीन सौंपी थी। लंबे समय तक उपयोग नहीं किया गया और योजनाएं कागजों में ही घूमती रहीं। परिणाम यह हुआ कि अब उस आवंटित जमीन पर मेट्रो ट्रेन का स्टेशन बनाया जा रहा है, जिससे एयरपोर्ट के पास उपलब्ध आंतरिक स्पेस और कम हो गया है।

कागजों पर बने ड्रेनेज-सीवरेज प्रोजेक्ट का खुलासा, इंदौर में ED की बड़ी कार्रवाई

इंदौर  दौर नगर निगम के चर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड और निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ED की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेजी प्रमाण सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी धन की हेराफेरी कर अर्जित राशि से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में संपत्तियां खरीदी गईं। इसी के तहत 43 संपत्तियों को अटैच किया गया है। फर्जी बिलों के जरिए निकाली गई करोड़ों की राशि जांच में सामने आया है कि ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार किए गए। आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने मिलीभगत कर ऐसे कामों के भुगतान मंजूर कराए, जो या तो धरातल पर अस्तित्व में ही नहीं थे या फिर वास्तविक कार्य की तुलना में कई गुना अधिक दर्शाए गए। ED के अनुसार कई प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपएका भुगतान किया गया, लेकिन मौके पर जांच के दौरान संबंधित कार्यों का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच के प्रमुख बिंदु     करीब 92 करोड़ रुपएके कथित घोटाले के साक्ष्य मिले।     पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर समेत तीन आरोपी गिरफ्तार।     स्पेशल कोर्ट ने तीन दिन की ईडी रिमांड मंजूर की।     मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की 43 संपत्तियां अटैच।     फर्जी निर्माण कार्यों और जाली बिलों के माध्यम से राशि निकाले जाने का आरोप।     अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की भूमिका जांच के दायरे में। घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद ED की कार्रवाई के बाद नगर निगम के /यह चर्चित घोटाले में फिर चर्चाओं में है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान पूछताछ से रुपयों के लेन-देन, संपत्तियों की खरीद और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

इंदौर में सड़क विकास: मधु मिलन–छावनी मार्ग होगा 60 फीट चौड़ा, अवरोध हटाने की तैयारी

इंदौर  मधुमिलन-छावनी मार्ग पर वर्षों से ट्रैफिक जाम की समस्या रहती थी, लेकिन अब यह समस्या हल होगी। नगर निगम ने इस मार्ग को 60 फीट चौड़ा करने का मन बना लिया है और इसके लिए दो-तीन दिन में 100 से ज्यादा अतिक्रमण भी हटाने की तैयारी की जा रही है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव खुद इस मार्ग पर अतिक्रमण हटाने से पहले रहवासियों से मिलने पहुंचे और रहवासियों से आग्रह किया कि वे अगले दो से तीन दिनों के भीतर अपने-अपने अतिक्रमण खुद हटा लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने पर नगर निगम द्वारा कार्रवाई कर उन्हें हटाया जाएगा। कुछ रहवासी स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के लिए तैयार हो चुके हैं। भार्गव ने बताया कि मधुमिलन चौराहे से छावनी तक का यह मार्ग शहर के ट्रैफिक के लिए महत्वपूर्ण है। इसका निर्माण निगम की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के तहत इस सड़क को प्रथम चरण में 60 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके बाद यातायात की स्थिति के अनुसार आगे की योजना बनाई जाएगी।   उन्होंने यह भी बताया कि 60 फीट चौड़ाई को लेकर क्षेत्र के अधिकांश रहवासी सहमत हैं, जिससे कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। आपको बता दें कि छह साल पहले भी तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने इस सड़क को चौड़ा करने की योजना बनाई थी और तब मथुरवाला स्वीट्स का निर्माण भी तोड़ा गया था, लेकिन बाद में उनका तबादला हो गया और सड़क चौड़ी नहीं हो पाई थी।

इंदौर में बनेगी 30 मंजिला ऊंची बिल्डिंग, शॉपिंग मॉल, होटल-रेस्टोरेंट और स्टार्टअप पार्क की सुविधा

इंदौर  सुपर कॉरिडोर पर करीब 8.2 हेक्टेयर जमीन पर स्टार्टअप पार्क के लिए सरकार ने अनुमति दे दी है। इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) पीपीपी मॉडल पर आइटी कंपनियों व स्टार्टअप के लिए इको सिस्टम तैयार कर रहा है। स्टार्टअप पार्क करीब 90 मीटर ऊंचा, यानी 30-32 मंजिल का होगा। यह प्रदेश की सबसे ऊंची इमारत होगी। इनमें देशभर की बड़ी आइटी व कॉर्पोरेट कंपनियों को जगह दी जाएगी। उन्हें एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलेंगी। स्टार्टअप पार्क से 10 हजार युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है। पिछले दिनों बैठक में नगरीय प्रशसन विभाग के एसीएस संजय दुबे ने इस योजना को मंजूरी दी। 90 मीटर ऊंची विश्वस्तरीय सुविधाओं वाली बिल्डिंग का निर्माण पीपीपी आधार पर आइडीए के सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े ने बताया, पार्क के लिए हाईराइज बिल्डिंग मंजूरी मिली है। 90 मीटर ऊंची विश्वस्तरीय सुविधाओं वाली बिल्डिंग का निर्माण पीपीपी आधार पर होगा। 2 साल में निर्माण का लक्ष्य है। 15 दिन में टेंडर जारी होगा। पहले चरण में शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, स्टार्टअप ऑफिस, कॉर्पोरेट ऑफिस, दूसरे चरण में आइटी बिल्डिंग आइडीए की योजना के अनुसार, करीब 1200 करोड़ से सुपर कॉरिडोर पर 8.2 हेक्टेयर जमीन पर स्टार्टअप पार्क बनेगा। अलग अलग फेज में निर्माण होगा। पहले चरण में तल मंजिल पर शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, स्टार्टअप ऑफिस, कॉर्पोरेट ऑफिस होंगे। दूसरे चरण में आइटी बिल्डिंग व तीसरे चरण में कन्वेंशन सेंटर तथा 5 स्टार होटल बनाने का प्रस्ताव है। आइडीए ने मूल डिजाइन तैयार की है। इसमें बड़े शहरों की तरह ट्विन बिल्डिंग बनाने की योजना है। हालांकि, पीपीपी मॉडल पर काम होगा। एजेंसी भी अलग डिजाइन भी बना सकती है। लाखों खर्च कर बनाई योजना रद्द, अब नए तरीके से काम आइडीए ने करीब तीन साल पहले स्टार्टअप पार्क की योजना बनाई थी। तब इसे आइडीए ही बनाने की तैयारी में था। जिसे इसकी डिजाइन बनाने का काम दिया, उसने बंगलूरु, हैदराबाद और पुणे आदि बड़े शहरों में आइटी और स्टार्टअप कंपनियों के लिए सुविधाओं का सर्वे कर योजना बनाई। बाद में आइडीए ने पीपीपी मॉडल पर स्टार्टअप बनाने की योजना बनाई। ऐसी सुविधाएं पार्किंग के लिए 3 बेसमेंट। 4 फ़्लोर पर शॉपिंग मॉल, 1 फ़्लोर पर सर्विस। पार्क में देशी-विदेशी 100 से अधिक कंपनियों को मिलेगी जगह। 1000 आइटी प्रोफशनल्स को यहां नौकरी मिलेगी। सभी सुविधाएं विकसित होने पर 10 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार पार्क बनाने वाली कंपनी से प्रीमियम राशि लेकर ऑफिस बेचकर आय का विकल्प दे सकता है आइडीए।

इंदौर नगर निगम का सख्त कदम: व्यावसायिक इमारतों को नोटिस, बेसमेंट में बाजार हटाने का फरमान

इंदौर इंदौर नगर निगम द्वारा शहर की व्यावसायिक इमारतों के तलघर में चल रही व्यापारिक गतिविधियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा गया है। निगम प्रशासन ने शहर की ऐसी 35 प्रमुख बिल्डिंगों को चिन्हित किया है, जहां बेसमेंट का उपयोग पार्किंग के स्थान पर दुकानों या अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए किया जा रहा था। इन सभी भवन स्वामियों को औपचारिक नोटिस जारी कर सख्त हिदायत दी गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर नियमों का पालन सुनिश्चित करें।  दस दिनों के भीतर पार्किंग व्यवस्था बहाल करने के निर्देश नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा द्वारा जारी किए गए इन नोटिसों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भवन संचालकों को 10 दिन का समय दिया जा रहा है। इस अवधि के भीतर उन्हें तलघर में किए गए अवैध व्यावसायिक निर्माण को हटाना होगा और वहां पार्किंग की व्यवस्था को फिर से सुचारू करना होगा। निगम के अधिकारियों ने साफ किया है कि यदि इस समय सीमा के बाद भी भवनों में पार्किंग की जगह व्यापारिक गतिविधियां संचालित पाई गईं, तो निगम की टीम स्वयं वहां पहुंचकर निर्माण कार्य को ध्वस्त करने की सीधी कार्रवाई करेगी। हर साल चलने वाले अभियान की सार्थकता पर सवाल उल्लेखनीय है कि इंदौर नगर निगम द्वारा बेसमेंट की जांच और नोटिस देने की यह प्रक्रिया हर एक या दो साल में दोहराई जाती है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, हर बार भवन अधिकारियों और भवन निरीक्षकों द्वारा जोनल स्तर पर इमारतों की सघन जांच की जाती है और नोटिस भी बांटे जाते हैं। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और जानकारों का कहना है कि इन अभियानों का परिणाम अक्सर सिफर ही रहता है। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है, जिससे पार्किंग की समस्या जस की तस बनी रहती है। जोनल कार्यालयों में सक्रिय हुए भवन अधिकारी और निरीक्षक वर्तमान में नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा के निर्देशों के बाद सभी जोनल कार्यालयों में तैनात भवन अधिकारी और भवन निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों की इमारतों का सर्वे कर रहे हैं। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन इमारतों ने भवन अनुज्ञा के समय पार्किंग के लिए जगह मंजूर करवाई थी लेकिन बाद में वहां व्यावसायिक निर्माण कर लिया। निगम का कहना है कि इस बार लापरवाही बरतने वाले भवन स्वामियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और पार्किंग नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।