samacharsecretary.com

पानी नहीं, स्वच्छता है मुद्दा: इंदौर में जश्न और स्वच्छ वार्ड रैंकिंग की शुरुआत

इंदौर पूरे देश में स्वच्छता के लिए पहचाने जाने वाले इंदौर में दूषित पानी से कई लोगों की मौत नगर निगम के लिए अब कोई मुद्दा नहीं है. यही वजह है कि नगर निगम ने भागीरथपुरा के हालातों से किनारा करते हुए अब स्वच्छता रैंकिंग पर फोकस कर दिया है. इस बीच फिर यहां दो लोगों की मौत हो गई है. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण होने वाली मृत्यु का दौर जारी है. हालांकि 2 महीने बीतने के बाद भी न तो सरकार मृत्यु का कारण स्पष्ट कर पाई न ही मरने वालों की संख्या सार्वजनिक कर पाई. इस मामले में दायर जनहित याचिका के बाद हाईकोर्ट ने खुद एक सदस्य जांच आयोग गठित किया है. लेकिन इसके बावजूद सरकार भागीरथपुरा की स्थिति पर अब तक नियंत्रण नहीं कर पाई. भागीरथपुरा में दो लोगों की मौत नतीजेतन यहां बॉम्बे अस्पताल में बीते कुछ दिनों से भर्ती भागीरथपुरा निवासी 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर और 2 साल की मासूम रिया जो सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल में भर्ती थी की मौत हो गई. हालांकि नगर निगम कमिश्नर ने विगत दिनों भागीरथपुरा को लेकर दावा किया था कि वहां पानी की लाइन बदलने का काम अंतिम दौर में है वही नर्मदा के पानी की सप्लाई भी शुरू करवा दी गई है. यह बात और है कि अभी भी लोग वहां नलों से आने वाले पानी को पीने से डर रहे हैं. नगर निगम का दावा इंदौर के हालात सामान्य हालांकि नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने अपनी ओर से यह मान लिया है कि अब वहां के हालात पूरी तरह सामान्य है. इसलिए निगम ने अब स्वच्छता रैंकिंग पर फोकस कर दिया है. इसे लेकर मंगलवार को आयोजित एक समारोह में इंदौर को नवमी बार स्वच्छता रैंकिंग में पहले नंबर पर लाने के लिए वार्ड बार स्वच्छता अभियान की प्लानिंग की गई है. इसके अलावा शहर को स्वच्छता अभियान को लेकर प्रेरित करने के लिए नए सिरे से स्वच्छता गान तैयार किया गया है. स्वच्छता की शपथ दिलाई गई नगर निगम की परिषद में स्वास्थ्य प्रभारी अश्विनी शुक्ल ने बताया कि, ''स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के अंतर्गत स्वच्छता गीत 2025-26 की लाॅचिंग, स्वच्छ वार्ड रैकिंग लाॅचिंग की शुरुआत की गई.'' इसे लेकर आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री व महापौर ने इंदौर के स्वच्छता अभियान में सहयोगी स्वच्छता चैम्पियन का सम्मान तथा 22 जोनल कार्यालय के उत्कृष्ठ सफाई मित्रों का सम्मान किया. इस अवसर पर समस्त उपस्थित जन को स्वच्छता की शपथ दिलाते हुए, आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण की नवीन टूल किट की भी प्रेजेटेंशन के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी गई. इस दौरान कार्यक्रम मेंं मौजूद केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया का कहना था, ''इंदौर स्वच्छता का महागुरु है, जिससे की अन्य शहर स्वच्छता का पाठ पढ़ते है. इंदौर स्वच्छता का चैम्पियन है, मुझे पुरी उम्मीद है कि इंदौर नवीं बार भी स्वच्छता में नंबर वन आएगा.'' महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, ''इंदौर की स्वच्छता टीम ने इंदौर को आठ बार नंबर वन स्वच्छ शहर बनाने का गौरव हासिल किया. इसके साथ ही इंदौर जैसा बड़ा शहर अपने साथ ही देपालपुर को भी स्वच्छता में नंबर वन बनाने के लिये सहयोग कर रहा है.''

इंदौर में गंदे पानी से मौतें जारी, बच्ची और बुजुर्ग की जान गई; आंकड़ा 35 हुआ

इंदौर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को बस्ती में दो लोगों की मौत हो गई। इनमें दो साल की बच्ची रिया भी शामिल है। इसके अलावा 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर की भी जान चली गई। उन्हें सात दिन पहले उल्टी दस्त की शिकायत के चलते निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था।   परिजनों का कहना है कि उन्हें लकवे की शिकायत थी, अन्य कोई बीमारी नहीं थी। उधर दो वर्षीय रिया प्रजापति को भी दिसंबर में उल्टी दस्त की शिकायत के चलते भर्ती किया गया था। बाद में उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि बीमार होने के कारण रिया काफी कमजोर हो गई थी और उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। 15 दिन पहले रिया को चाचा नेहरू अस्पताल में एडमिट कराया गया था। उसे लीवर की शिकायत थी।  बच्ची ने इलाज के दौरान तोड़ा दम परिजनों के मुताबिक, बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर चाचा नेहरू अस्पताल में दाखिल किया गया था। वहां इलाज में फायदा नहीं होने पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में दाखिल किया गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इधर, 75 वर्षीय शालिग्राम के परिजनों ने बताया कि दो जनवरी को उल्टी-दस्त के कारण शैल्बी अस्पताल में रेफर किया गया था। वहां से उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। इसके बाद वह वेंटिलेटर पर ही थे। करीब 12 दिन पहले उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था। फिलहाल दोनों मौतों को मौत की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने डायरिया की वजह से नहीं की है। डॉक्टरों का कहना है कि दोनों को दूसरी बीमारियां भी थीं। बता दें कि अब तक 35 मौतें दूषित पानी के कारण हो चुकी हैं। कोर्ट ने अफसरों ने 16 लोगों की मौत डायरिया की वजह मानी है। आयोग ने जांच शुरू की इंदौर भागीरथपुरा में दूषित जल से 35 मौतें और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के मामले में उच्च न्यायालय द्वारा गठित आयोग की जांच शुरू हो गई है। आयोग के समक्ष रहवासी या अन्य व्यक्ति शिकायत और आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। उच्च न्यायालय ने भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल प्रदूषण तथा उससे जनस्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों पर पड़े प्रभाव की जांच के लिए न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया है। आयोग द्वारा जल प्रदूषण के कारणों, प्रशासनिक लापरवाही, जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई, जनहानि, चिकित्सकीय प्रभाव तथा सुधारात्मक उपायों की जांच की जाएगी। आयोग ने इसे लेकर सार्वजनिक सूचना जारी की है। इसके तहत भागीरथपुरा एवं आसपास के क्षेत्रों के सभी प्रभावित नागरिक, परिजन, जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, अस्पताल, सामाजिक संगठन, ठेकेदार, शासकीय अधिकारी अथवा कोई भी व्यक्ति, जिनके पास प्रकरण से संबंधित जानकारी, दस्तावेज या साक्ष्य उपलब्ध हों, वह आयोग के सामने पेश कर सकता है। साथ ही पेयजल प्रदूषण से संबंधित शिकायतें या आवेदन, चिकित्सकीय अभिलेख, अस्पताल में भर्ती होने की पर्चियां, डिस्चार्ज समरी, मृत्यु प्रमाण पत्र, जल पाइप लाइन में रिसाव, सीवरेज मिश्रण या क्षति से संबंधित फोटो/वीडियो, जल आपूर्ति से संबंधित टेंडर दस्तावेज, कार्य आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट या कोई अन्य सामग्री भी आयोग के कार्यालय स्कीम नंबर 140 आरसीएम 10, प्रथम मंजिल आनंद वन स्थित आयोग के कार्यालय में 28 फरवरी तक प्रस्तुत कर सकते हैं। बच्ची के लिवर में तकलीफ बताई गई थी 15 दिन पहले रिया को चाचा नेहरू अस्पताल में एडमिट किया गया था। यहां उसके लिवर में तकलीफ बताई गई थी। इसके बाद उसे सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल में एडमिट किया गया, जहां करीब 5 दिन बाद उसकी मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि दूषित पानी के कारण ही तबीयत बिगड़ी। उसका असर लिवर तक हुआ। गुइलेन बैरे सिंड्रोम से जूझ रही महिला 57 वर्षीय एक महिला गंभीर जीबीएस (गुइलेन बैरे सिंड्रोम) से जूझ रही हैं। हालांकि इस मरीज को जीबीएस होने का स्वास्थ्य विभाग खंडन कर चुका है, लेकिन परिजन का कहना है कि इसी बीमारी के कारण उन्हें HDU (High Dependency Unit) में एडमिट किया गया है। दरअसल, दूषित पानी के कारण इस महिला की हालत 28 दिसंबर को बिगड़ी थी। पहले उसे एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। इसके बाद 2 जनवरी को दूसरे बड़े हॉस्पिटल में रेफर किया गया। इस तरह करीब डेढ़ माह से इलाज चल रहा है। इस बीच हालत गंभीर होने पर 20 दिन से ज्यादा समय तक वह आईसीयू, वेंटिलेटर पर भी एडमिट रही। परिजन के मुताबिक, अभी ठीक होने में समय लगेगा। जीबीएस गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी जीबीएस एक दुर्लभ और गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही स्वस्थ तंत्रिकाओं पर हमला करने लगती है। इसका एक कारण गंदे पानी में पनपने वाला कैम्पीलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया भी है। बीमारी के तहत हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन होता है। यह गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का इंफेक्शन) देखने में आता है। इसमें मरीज को ठीक होने में समय लगता है। इसमें 70% मरीज स्वस्थ हो पाते हैं। इसमें मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। मरीज सांस तक नहीं ले पाता है और वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ता है। ये क्या…12 किमी दूर जाकर करें शिकायत जिस भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों व बीमारी के मामले में जांच होनी है, उसका ऑफिस भागीरथपुरा से करीब 12 किलोमीटर दूर खोला गया है। प्रशासन द्वारा ऑफिस के लिए जगह उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। पीडितों को शिकायत करने के लिए लंबी दूरी तय करनी होगी। भागीरथपुरा से स्कीम 140 तक का लंबा सफर चर्चा का विषय है। HC के आदेश पर बना आयोग कर रहा जांच मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच के लिए एक आयोग बनाया गया है। इस आयोग के अध्यक्ष एमपी हाईकोर्ट के रिटायर्ट जज सुशील कुमार गुप्ता हैं। आयोग किन पॉइंट्स पर जांच कर रहा?     पीने का पानी कैसे और क्यों प्रदूषित हुआ?     इसमें किस स्तर पर प्रशासन की लापरवाही हुई?     कौन-कौन लोग इसके जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?     लोगों की सेहत पर इसका क्या असर पड़ा?     कितनी जनहानि हुई?     भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या सुधार जरूरी हैं? इस मामले को लेकर आयोग ने सार्वजनिक सूचना भी … Read more

इंदौर में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी, 32वीं महिला की हुई मौत, स्वास्थ्य स्थितियों का भी असर

इंदौर इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक महीना बीत जाने के बाद भी यहां मौतों का सिलसिला जारी है। रविवार को बस्ती में 32वीं मौत दर्ज की गई, जिसने इलाके में दहशत और बढ़ा दी है। ताज़ा मामला 65 वर्षीय अनिता कुशवाह का है, जिन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इलाज के दौरान बिगड़ी हालत अनिता को कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया था। शुरुआत में इसे सामान्य संक्रमण माना जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं। उनकी हालत इतनी नाजुक हो गई कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा, जिसके बाद उनकी स्थिति और बिगड़ती चली गई और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। बेटे नीलेश ने बताया कि उन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त के कारण भाग्यश्री हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। दो दिन बाद डिस्चार्ज होकर घर पर लाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद फिर हालत बिगड़ी। उन्हें 1 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। अरबिंदो हॉस्पिटल से उन्हें 4 जनवरी को बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया था। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती गई। हालत गंभीर होने पर किडनी फेल हो गई, जिसके चलते लगातार हेमोडायलिसिस किया जा रहा था। फिर वेंटिलेटर पर भी लिया गया। इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट भी आया। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि शासन की ओर से हायर सेंटर पर इलाज करवाया गया, लेकिन दुर्भाग्य से मरीज को बचाया नहीं जा सका। महिला के पति मिल से रिटायर्ड हैं। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। अनिता कुशवाह का अंतिम संस्कार आज होगा। भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे में अब तक 32 मौतें हो चुकी हैं। इस मामले में 450 से ज्यादा मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं, लेकिन दूसरी ओर तीन मरीज अब भी एडमिट हैं। इनमें से 2 आईसीयू में हैं। उनकी हालत काफी क्रिटिकल बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि बस्ती में अब तक 32 लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ 16 मौतें ही दर्ज हैं। विभाग इन मौतों की मुख्य वजह डायरिया (उल्टी-दस्त) मान रहा है। बाकी की अन्य मौतों का अभी तक कोई डेथ ऑडिट नहीं किया गया है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल बस्ती के दो और मरीज अस्पताल में भर्ती हैं जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। राहत की बात बस इतनी है कि अब नए मरीजों के मिलने की रफ्तार कम हुई है और मामूली लक्षण वाले लोगों का घर पर ही इलाज चल रहा है। बस्ती में पानी का संकट अभी भी गहराया हुआ है। नगर निगम अब तक केवल 30 प्रतिशत इलाके में ही नई नर्मदा लाइन बिछा पाया है। बाकी पूरी बस्ती अब भी टैंकरों के भरोसे है। दूषित पानी के खौफ की वजह से लोग नल या टैंकर का पानी पीने से डर रहे हैं। जो लोग सक्षम हैं, वे पीने के लिए बाहर से पानी खरीद रहे हैं। 24 घंटे चालू हैं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अभी मरीज आ रहे हैं, लेकिन डायरिया के मरीजों की संख्या एकदम कम हो गई है। रोज एक-दो मरीज आते हैं, लेकिन उन्हें एडमिट करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि यह केंद्र 24 घंटे खुला है और क्षेत्र में दो एम्बुलेंस भी तैनात हैं। 30 प्रतिशत हिस्से में की जा रही पानी की सप्लाई उधर, इलाके में एक दिन छोड़कर 30% हिस्से में पानी का सप्लाय जारी है। निगम का कहना है कि पानी अब साफ आ रहा है लेकिन रहवासी अभी भी आरओ और टैंकर का पानी ही उपयोग कर रहे हैं। दूसरी ओर बचे हुए 70% हिस्से की मेन पाइप लाइन का काम अंतिम दौर में है। इसके बाद यहां लीकेज टेस्ट करने के साथ सैंपल लिए जाएंगे।

पानी की जांच का बड़ा कदम: इंदौर के सभी वार्डों में वाटर टेस्टिंग लैब, नगर निगम ने टेंडर जारी किया

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से 31 लोगों की मौत के बाद नगर निगम ने पानी सप्लाई सिस्टम को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. इस घटना से यह साफ हो गया कि सिर्फ सेंट्रल लेवल पर पानी की टेस्टिंग काफी नहीं है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने शहर के सभी 85 वार्डों में पानी टेस्टिंग लैब बनाने का फैसला किया है. इससे हर वार्ड में पानी की क्वालिटी की रेगुलर मॉनिटरिंग हो सकेगी और दूषित पानी की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी. 85 वार्डों में बनेंगी वाटर टेस्टिंग लैब निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा है कि भागीरथपुरा इलाके में अभी पानी की सप्लाई पूरी तरह से बहाल नहीं की जाएगी. वहां पाइपलाइनों में सीवेज मिलने और लीकेज की जांच के लिए गहन टेस्टिंग की जा रही है. जब तक हर घर में पहुंचने वाला पानी 100% सुरक्षित नहीं पाया जाता, तब तक निवासियों को निगम के पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना होगा. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि टैंकरों की कोई कमी न हो. शहर के सभी 85 वार्डों में पानी टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएंगी. नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, अब तक पानी की जांच सीमित स्तर पर होती थी, लेकिन भागीरथपुरा की घटना के बाद यह साफ हो गया कि वार्ड स्तर पर निगरानी जरूरी है। इसी के तहत निगम ने निजी एजेंसी के माध्यम से वाटर टेस्टिंग और वाटर ऑडिट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है। भागीरथपुरा में अभी नहीं शुरू होगा पूर्ण जलप्रदाय निगम ने साफ कर दिया है कि भागीरथपुरा इलाके में अभी कुछ दिनों तक नल से पानी की नियमित सप्लाई शुरू नहीं की जाएगी। जब तक पाइपलाइनों की पूरी जांच, लीकेज और सीवेज मिक्सिंग की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता, तब तक क्षेत्र के रहवासियों को टैंकरों के माध्यम से ही पानी उपलब्ध कराया जाएगा। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि टैंकरों की संख्या कम न हो और पानी की सप्लाई में किसी तरह की कटौती न की जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि लोगों को सुरक्षित पानी मिलना प्राथमिकता है, भले ही इसके लिए अस्थायी व्यवस्था कुछ और समय तक चलानी पड़े। मौतों के बाद लोगों में भय का माहौल भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों के बाद इलाके में भय का माहौल अब भी बना हुआ है। लोग टैंकर से मिलने वाले पानी को भी उबालकर पीने को मजबूर हैं। जिन इलाकों में सीमित जलप्रदाय शुरू किया गया था, वहां भी रहवासी नल का पानी पीने से कतरा रहे हैं। कई परिवारों ने आरओ सिस्टम लगवा लिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक पानी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से नहीं दी जाती और निगम खुद पानी को सुरक्षित घोषित नहीं करता, तब तक वे नल का पानी इस्तेमाल नहीं करेंगे। निगम ने जारी किए टेंडर नगर निगम अधिकारियों के अनुसार पहले पानी की टेस्टिंग सीमित पैमाने पर की जाती थी, लेकिन भागीरथपुरा की घटना से यह साफ़ हो गया कि वार्ड लेवल पर मॉनिटरिंग ज़रूरी है. इसलिए कॉर्पोरेशन ने एक प्राइवेट एजेंसी के ज़रिए पानी की टेस्टिंग और वॉटर ऑडिट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए टेंडर जारी किया जा चुका है. दूषित पानी से खौफ में लोग इस बीच चंदन नगर और ग्रीन पार्क जैसी शहर की दूसरी कॉलोनियों में भी दूषित पानी की खबरों से निवासियों में डर का माहौल बन गया है. लोग अब नगर निगम के पानी की सप्लाई पर भरोसा करने के बजाय पीने से पहले नल के पानी को उबाल रहे हैं या अपने घरों में महंगे RO सिस्टम लगवा रहे हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम ने प्रभावित इलाकों का दौरा करने और पानी के सैंपल इकट्ठा करने के लिए खास टीमें भेजी हैं. इस कदम का मकसद न सिर्फ तुरंत राहत देना है, बल्कि यह इंदौर के पानी वितरण सिस्टम को स्थायी रूप से सुरक्षित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है.  वार्ड स्तर पर होगी तुरंत जांच, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई निगम अधिकारियों का कहना है कि 85 वार्डों में वाटर टेस्टिंग लैब शुरू होने के बाद किसी भी क्षेत्र से गंदे पानी की शिकायत आने पर तुरंत सैंपल लेकर जांच की जा सकेगी। इससे दूषित पानी की समस्या को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकेगा और भागीरथपुरा जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी। गंदे पानी की शिकायतों पर निगम की टीमें मैदान में भागीरथपुरा में 31 मौतों के बाद शहरभर में गंदे पानी को लेकर डर का माहौल है। चंदननगर, ग्रीन पार्क सहित कई कॉलोनियों के रहवासी निगम कार्यालय पहुंचे और गंदे पानी की परेशानी बताई। निगम ने इन शिकायतों के निराकरण के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन इलाकों से शिकायतें मिल रही हैं, वहां खुद मौके पर पहुंचकर जांच की जाए और लापरवाही किसी भी हाल में न हो। कुएं-बावड़ियों में भी गंदगी, पंचम की फैल में दो कुएं बंद शहर के कई इलाकों में वर्षों पुराने कुएं-बावड़ियां भी अब सुरक्षित नहीं रह गई हैं। पंचम की फैल क्षेत्र में तीन पुराने कुओं में से दो कुओं का पानी पूरी तरह खराब हो गया है। रहवासियों के अनुसार, इन कुओं में गंदा पानी आने के साथ लाल कीड़े निकलने लगे, जिसके बाद लोगों ने इनसे पानी लेना बंद कर दिया। शिकायतों के बाद एमआईसी मेंबर नंदकिशोर पहाड़िया ने मामला निगमायुक्त तक पहुंचाया। निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त क्षितिज सिंघल खुद मौके पर पहुंचे और रहवासियों से बातचीत की। लोगों ने आशंका जताई कि नालों या जल लाइनों का गंदा पानी कुओं में मिक्स हो रहा है। आयुक्त ने अधिकारियों को पूरे मामले की जांच कर कुओं के संरक्षण और सफाई की कार्रवाई तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

भागीरथपुरा की जल आपदा: दूषित पानी से 30वीं मौत दर्ज, शहर में हड़कंप

इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार सुबह लक्ष्मी रजक नामक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही दूषित पानी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इससे पहले मंगलवार को उल्टी-दस्त से पीड़ित 75 वर्षीय खूबचंद (पिता गन्नुदास) की भी उपचार के दौरान मौत हो गई थी।बुधवार को उनके स्वजन और स्थानीय लोगों ने आक्रोश जताते हुए सड़क पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया, जिससे इलाके में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। समझाइश के बाद वे लोग अंत्येष्ठि के लिए माने और शव लेकर श्मशान घाट के लिए रवना हुए। लक्ष्मी रजक जैन (निवासी)दूध वाली गली) दूषित पानी से फैले संक्रमण की शिकार हुईं। विडंबना यह रही कि उनके पति स्वर्गीय डॉ. के.डी. रजक ने जीवनभर मरीजों का इलाज किया, लेकिन उनके ही परिवार को यह त्रासदी झेलनी पड़ी। परिजनों के अनुसार रविवार को लक्ष्मी रजक को अचानक घबराहट और पेट में तेज दर्द हुआ। हालत बिगड़ने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सीएचएल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अवधेश गुप्ता ने बताया कि जांच में लक्ष्मी रजक की किडनी में गंभीर संक्रमण पाया गया था। संक्रमण तेजी से फैल चुका था और अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार रात उन्होंने दम तोड़ दिया। उल्लेखनीय है कि उनके पति का निधन भी महज 17 माह पहले हुआ था, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इसी दिन भागीरथपुरा निवासी 62 वर्षीय पूर्व पहलवान खूबचंद बंधोनिया की भी उल्टी-दस्त से बिगड़ी हालत के बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से सीवरेज मिश्रित पानी की आपूर्ति हो रही है, जिसकी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अखाड़े में बड़े-बड़े पहलवानों को पटखनी देने वाले खूबचंद दूषित पानी के संक्रमण से जंग हार गए। दो मरीज वेंटिलेटर पर दिसंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई इस बीमारी का कहर भले ही अब काफी हद तक कम चुका है, लेकिन क्षेत्र के लोग अब भी परेशान है। भागीरथपुरा क्षेत्र में अब तक 4,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से लगभग 450 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। फिलहाल 10 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, जबकि दो की हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। घटना के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में पानी की नियमित जांच के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में अभी भी दहशत का माहौल बना हुआ है।    

खूबचंद की मौत के बाद प्रदर्शन जारी, इंदौर में दूषित पानी से संकट, ICU में तीन मरीज और वेंटिलेटर पर एक

इंदौर  भागीरथपुरा के खूबचंद पिता गन्नूदास की दूषित पानी से मंगलवार को मौत हो गई थी। बुधवार को उनके परिजनों ने अंत्येष्टी से पहले सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया। खूबचंद की मौत के साथ ही भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों की संख्या 29 हो चुकी है।  यह कहा जाता है कि द्यजल ही जीवन हैद्ग, लेकिन देश के सबसे साफ शहर माने जाने वाले इंदौर की एक बस्ती में पानी ही मौत की वजह बन गया है। दूषित पानी के कारण भागीरथपुरा में 30 दिन में 29 मौतें हो चुकी हैं। अभी भी तीन लोग जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस कांड को एक माह पूरा हो रहा है, लेकिन अभी भी पूरी बस्ती में साफ पानी नहीं मिल पाया है और न ही अफसर यह बता पाए कि दूषित पानी के कारण आखिर इतनी मौतें कैसे हो गईं? यह कांड सामने आने के बाद कई सरकारी जांचें हुईं और आयोग का गठन भी हो चुका है। मामला कोर्ट में है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं हुआ है। 29 दिसंबर को भागीरथपुरा बस्ती के 20 मरीज दो अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। उन्हें देखने क्षेत्रीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय पहुंचे थे, जिसके बाद दूषित पानी से फैल रही बीमारी का खुलासा हुआ। 30 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती एक व्यक्ति की पहली मौत हुई थी। इन मौतों के पीछे नगर निगम की भारी लापरवाही उजागर हुई है। बस्ती की पाइपलाइनें 30 साल से ज्यादा पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। भागीरथपुरा से जुड़ा नगर निगम का जोन शिकायतों के मामले में शहर में दूसरे स्थान पर है। पिछले दो माह में यहाँ सबसे ज्यादा गंदे पानी की शिकायतें मिली थीं, लेकिन अफसरों ने उन पर ध्यान नहीं दिया। शौचालय के नीचे से गुजरती रही पाइपलाइन हैरानी की बात यह है कि सालभर से लाइन बदलने के प्रस्ताव तैयार थे, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। गंदे पानी की शिकायतों को अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया। जिस नर्मदा लाइन से घरों में पानी जाता है, उसके ऊपर पुलिस चौकी का शौचालय बना दिया गया और मल-मूत्र का पानी नर्मदा लाइन में समाता रहा। जब मौतें होने लगीं, तब अफसरों ने शौचालय तोड़कर लीकेज खोजा। पूरी लाइन में 30 से ज्यादा लीकेज मिले, जिन्हें एक माह बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सका है। कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम की पेश रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सुरक्षित पानी की आपूर्ति, इलाज और जांच संबंधी निर्देशों का पूरा पालन नहीं हुआ है। मौतों के आंकड़ों को लेकर भी गंभीर असहमति सामने आई। जहां सरकारी रिपोर्ट में 16 मौतों को जलजनित बीमारी से जोड़ा गया है, वहीं याचिकाकर्ताओं ने मृतकों की संख्या लगभग 30 बताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग बनाया है। आयोग जल प्रदूषण के कारणों, वास्तविक मौतों की संख्या, बीमारियों की प्रकृति, चिकित्सा व्यवस्था की पर्याप्तता, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवजे पर रिपोर्ट देगा। कोर्ट ने दैनिक जल गुणवत्ता जांच और नियमित स्वास्थ्य शिविर जारी रखने के निर्देश देते हुए चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी। आयोग को व्यापक अधिकार आयोग को सिविल कोर्ट के समान अधिकार दिए गए हैं। वह अधिकारियों व गवाहों को तलब कर सकेगा, दस्तावेज मंगा सकेगा, जल गुणवत्ता परीक्षण करा सकेगा और स्थल निरीक्षण कर सकेगा। राज्य सरकार आयोग को आवश्यक स्टाफ, कार्यालय और संसाधन उपलब्ध कराएगी। रिपोर्ट में मौतों के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि भागीरथपुरा के 30 प्रतिशत हिस्से में वाटर सप्लाई शुरू कर दी गई है। यह हिस्सा साढ़े 9 किमी का है। हालांकि, जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की पीठ ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में यूज किए गए वर्बल अटॉप्सी शब्द पर भी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने पूछा है कि यह शब्द मेडिकल का है या आपके द्वारा ईजाद किया है। अदालत ने यह भी पाया कि रिपोर्ट में मौतों के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं और उसमें पर्याप्त तर्क एवं सहायक सामग्री का अभाव है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट की विश्वसनीयता सिद्ध करने के लिए अधिक उपयुक्त, ठोस और प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करें। इसके अलावा अंतरिम राहत के स्वरूप पर भी चिंता व्यक्त की। सवाल उठाया है कि समिति अपने सुझावों का प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन किस प्रकार सुनिश्चित करेगी। क्षेत्र में लगातार हो रही मौतें और उनके कारणों की अनिश्चितता अत्यंत चिंताजनक है। रिपोर्ट को बताया ‘आई-वॉश’ सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को अस्पष्ट बताते हुए उसे मात्र एक 'आई-वॉश' करार दिया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने नगर निगम को निर्देशित किया कि वरिष्ठ अधिवक्ता के सुझाए गए परीक्षणों पर गंभीरता से विचार किया जाए। कोर्ट की सभी चिंताओं का स्पष्ट एवं ठोस उत्तर प्रस्तुत करें। इसके अलावा, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने न्यायालय परिसर में स्वच्छता और जल की स्थिति का भी संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सिर्फ 8 पैरामीटर्स पर पानी की कैसी टेस्टिंग निगम की ओर से तर्क दिया कि पानी की टेस्टिंग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि सिर्फ 8 मानकों पर पानी की टेस्टिंग की गई जबकि 2018 में मप्र प्रदूषण मंडल ने भागीरथपुरा समेत इंदौर के पानी की 34 मानकों पर टेस्टिंग की थी। इस पानी को फिकल कंटामिनेटेड पाया था। ऐसे में जब भागीरथपुरा में 28 मौतें हो चुकी हैं तो निगम सिर्फ 8 मानकों पर टेस्टिंग कैसे कर रही है। निगम ने यह भी नहीं बताया कि टेस्टिंग का तरीका क्या था। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से विश्वस्तरीय तीन पैरामीटर्स पर पानी की टेस्टिंग के तीन तरीके बताए गए। मदद रेडक्रॉस से, शासन की ओर से कुछ भी नहीं याचिकाकर्ता की ओर से बताया कि मुआवजे को लेकर भी झूठी जानकारी दी जा रही है। अभी मृतकों को जो 2-2 लाख रुपए की राशि दी गई है वह रेड क्रॉस सोसायटी की ओर … Read more

इंदौर में महिला की हत्‍या कर कपड़े बदल कर भागे आरोपी

इंदौर. महिला की हत्या में शामिल बदमाश पुलिस को छका रहे है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज से आरोपितों का पीछा कर रही है। आरोपित कपड़े बदल कर भागे है। आरोपित घटना स्थल के आसपास ही देखे गए है। बाणगंगा थाना क्षेत्र स्थित नंदबाग निवासी गायत्री धीमान की घर में ही गला घोंटकर हत्या कर दी थी। बदमाश वारदात के बाद महिला के हाथ पैर बांध कर मुंह में कपड़ा ठूंस कर भागे थे। गायत्री सुपर कॉरिडोर स्थित आईटी कंपनी में हाऊस किपिंग का काम करती थी। पुलिस ने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज निकाले तो दो बदमाश स्कूटर से भागते हुए नजर आए। पुलिस ने टिगरिया बादशाह क्षेत्र से सीसीटीवी फुटेज की कड़ियां जोड़ी तो पता चला बदमाशों ने चकमा देने के लिए कपड़े भी बदल लिए थे। करीब 20 किमी घुमने के बाद आरोपित पुन:घटना स्थल के आसपास आए हैं। जोन-3 के डीसीपी राजेश व्यास ने तीन टीमों का गठन किया है। आरोपितों की गिरफ्तारी पर इनाम भी घोषित किया है। पुलिस के अनुसार आरोपितों के बारे में कुछ भी पता नहीं चल रहा है। महिला की सीडीआर में भी नंबर नहीं है। स्वजन ने भी पहचाने से इनकार किया है। युवक को अगवा करने वाले बदमाश बिहार भागे 28 वर्षीय युवक को अगवा कर पीटने वाले बदमाश बिहार भाग गए है। पुलिस आरोपितों की तलाश में जुटी है। बाणगंगा थाना क्षेत्र निवासी युवक को चाचा-चाची और उसके साथियों ने जमीन के लिए अगवा किया था। युवक को शाजापुर स्थित दोस्त के खेत पर पेड़ से बांधा और गरम सरिये से नाजुक स्थानों पर दागा। पीड़ित के खिलाफ ही नाबालिग बेटी से दुष्कर्म की रिपोर्ट लिखवा दी। चोट के कारण पुलिस ने पीड़ित को अस्पताल पहुंचाया लेकिन उसकी मौत हो गई। पुलिस ने चाचा चाची सहित तीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया लेकिन अन्य फरार हो गए।

दूषित पानी का कहर इंदौर में, पिता के जाने से 4 बेटियों का परिवार बिखरा, मौतें 25 तक पहुंचीं

इंदौर मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार देर रात इलाज के दौरान एक और व्यक्ति, हेमंत गायकवाड़ (51), ने दम तोड़ दिया। इस ताजा मौत के साथ ही शहर में दूषित पानी से मरने वालों की कुल संख्या अब 25 हो गई है। अस्पताल में 14 दिनों तक चला संघर्ष भागीरथपुरा निवासी हेमंत गायकवाड़ को 22 दिसंबर को गंदा पानी पीने के बाद उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। हालत बिगड़ने पर उन्हें पहले वर्मा नर्सिंग होम और बाद में 7 जनवरी को अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, हेमंत पहले से कैंसर और किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन दूषित पानी के संक्रमण (उल्टी-दस्त) के बाद उनकी स्थिति गंभीर हो गई और अंततः उन्हें बचाया नहीं जा सका। बेटी बोली- अचानक बिगड़ी थी तबीयत गायकवाड़ की बेटी जिया ने बताया, पिताजी को उल्टी दस्त के कारण पहले 24 दिसंबर को वर्मा नर्सिंग होम में एडमिट किया था l 28 दिसंबर को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था l इसके बाद घर पर फिर उनकी तबीयत खराब हुई और 8 जनवरी को अरविंदो अस्पताल में एडमिट किया गया l वहां पता चला कि उन्हें कैंसर और किडनी की तकलीफ भी है l परिवार का कहना है कि हेमंत राहुल गांधी से मिलना चाहते थे, लेकिन अस्पताल में एडमिट होने के कारण वह मुलाकात नहीं कर पाए। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे से अपनी स्थिति बता दी थी। दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी है। अब तक 25 मौत हो चुकी है। अभी 38 मरीज एडमिट हैं, जिनमें से 10 आईसीयू में हैं। इनमें भी तीन वेंटिलेटर पर हैं। लगातार हो रही मौतों को लेकर अभी भी क्षेत्र में दहशत है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ हेमंत परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और ई-रिक्शा चलाकर घर का गुजारा करते थे। उनकी मौत के बाद उनकी चार बेटियां— रिया (21), जिया (20), खुशबू (16) और मनाली (12)— अनाथ हो गई हैं। परिवार के सामने अब जीवन-यापन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बेटी जिया ने बताया कि तबीयत बिगड़ने के कारण पिता की राहुल गांधी से मिलने की अंतिम इच्छा भी अधूरी रह गई। भागीरथपुरा में दहशत का माहौल क्षेत्र में नई पाइपलाइन बिछाने के काम के दौरान गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतें लंबे समय से मिल रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए। ताजा स्थिति : कुल मौतें-25, अभी भर्ती मरीज-38, ICU में- 10 मरीज (3 वेंटिलेटर पर)। प्रशासनिक लापरवाही : भागीरथपुरा क्षेत्र में लगातार हो रही मौतों के कारण लोगों में भारी आक्रोश और दहशत है। अस्पताल में अभी भी कई मरीजों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

बीच सड़क पर शराब पीने से रोका तो ट्रैफिक पुलिसकर्मी का फोड़ा सिर

इंदौर. कनाड़िया थाना क्षेत्र के बिचौली अंडरपास में ड्यूटी पर तैनात यातायात पुलिसकर्मी ने ड्राइवर और क्लीनर को शराब पीने से रोका तो उन्होंने पत्थर से सिर फोड़ दिया। वह लहूलुहान हालत में कनाड़िया थाने गया तो वहां भी उसकी मदद नहीं की गई। इसके बाद वह स्वयं इलाज करवाकर घर लौट गया। हालांकि बाद में पुलिस ने आरोपित ड्राइवर और मालिक के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया। यातायात पुलिसकर्मी अनुराग शर्मा ने बताया कि बिचौली अंडर ब्रिज पर स्कीम 140 पर भारी वाहन प्रवेश रोकने के लिए बल लगाया था, वहां मेरी ड्यूटी थी। एक चार पहिया वाहन में दो लोग बैठकर शराब पी रहे थे। इस पर उन्हें रोका और आरक्षक विष्णु भदौरिया को बुलाया। जिसके पास वायरलेस सेट था, उसे कहा कि आगे सूचना दी जाए। इस पर ड्राइवर ने हाथ जोड़कर कहा कि मालिक पीछे ही रहते हैं, उन्हें बुला लेता हूं। मालिक ने आते ही ड्राइवर-क्लीनर को भगाया पुलिसकर्मी ने बताया कि मालिक आया और ड्राइवर-क्लीनर को मौके से भगा दिया। इसके बाद वह अपशब्द कहने लगा। इस पर उसे पकड़ लिया था, इसके बाद छोड़ा तो पीछे से आकर सिर पर पत्थर मार दिया। इसके बाद कनाड़िया थाने गया और वहां पांच मिनट बैठा रहा। मुझे उम्मीद थी कि कोई मदद करेगा। थाने में खून टपक रहा था फर्श पर लेकिन इसके बावजूद कोई पुलिसकर्मी मदद के लिए नहीं आया। इसके बाद गुस्से में घर चले गया। मामले में यातायात डीसीपी आनंद कलादगी का कहना है कि आरोपित शराब पी रहे थे, इस पर ट्रैफिक कर्मचारी वहां पहुंचा। दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कनाड़िया पुलिस ने पुलिसकर्मी की मदद की और उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए। आरोपितों को हिरासत में ले लिया गया।

इंदौर में 2 साल में शुरू हुए 44,000 नए उद्योग, 1.70 लाख को मिला रोजगार

इंदौर  इंदौर जिला वर्तमान में औद्योगिक क्रांति के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों के दौरान इंदौर में औद्योगिक गतिविधियों में भारी उछाल आया है। महाप्रबंधक स्वप्निल गर्ग ने जानकारी दी है कि जिले में संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से हजारों नए उद्यमियों को सहायता प्रदान की गई है। पिछले तीन वर्षों के भीतर इंदौर में पंद्रह नए औद्योगिक पार्क स्थापित किए गए हैं, जिनमें सात सौ से अधिक नई इकाइयां आकार ले रही हैं। इन नए उद्योगों के माध्यम से लगभग बीस हजार युवाओं के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। औद्योगिक विस्तार और निवेश का प्रमुख केंद्र बन रहा इंदौर गर्ग ने कहा कि इंदौर अपनी बेहतर औद्योगिक संस्कृति, कुशल श्रमिकों की उपलब्धता और मजबूत कनेक्टिविटी के कारण निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला बनाने के बजाय नौकरी देने वाला उद्यमी बनाना है। इसके लिए प्रदेश में निरंतर उद्योग मित्र नीतियां लागू की जा रही हैं, जिससे निवेश की प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हुई है। लॉजिस्टिक और रेलवे नेटवर्क में क्रांतिकारी बदलाव आएगा आने वाले तीन से चार वर्षों में इंदौर देश के एक बड़े रेलवे हब के रूप में पहचाना जाएगा। वर्तमान में यहां से संचालित होने वाली ट्रेनों की संख्या सौ से कम है, जिसे बढ़ाकर तीन सौ तक करने की योजना है। छह अलग-अलग दिशाओं में सशक्त रेल कनेक्टिविटी के साथ-साथ सड़क नेटवर्क का भी विस्तार किया जा रहा है। इंदौर की सात सौ किलोमीटर की परिधि में देश की साठ प्रतिशत आबादी के आने से लॉजिस्टिक लागत में बड़ी कमी आएगी। सरकार का लक्ष्य वर्तमान चौदह प्रतिशत की लॉजिस्टिक लागत को घटाकर सात से आठ प्रतिशत तक लाना है, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। महिला उद्यमिता में सकारात्मक नतीजे मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान कुल नौ सौ चौंसठ उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। विशेष रूप से महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई विभाग द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप तीन सौ एक महिला उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत कुल तीन सौ इकतालीस इकाइयों को तीन सौ अट्ठाइस करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की जा रही है, जो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में एक बड़ा कदम है। शत-प्रतिशत उद्योग ग्राम पंचायत वाला जिला बना इंदौर इंदौर जिले ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2024-25 की शुरुआत में जिले की एक सौ नवासी ग्राम पंचायतें उद्योग विहीन थीं। प्रशासन और उद्योग विभाग के समन्वित प्रयासों से इन सभी पंचायतों में सूक्ष्म उद्योग स्थापित किए गए हैं। अब इंदौर की सभी तीन सौ चौंतीस ग्राम पंचायतों में उद्योग संचालित हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर दो हजार से अधिक ग्रामीणों को रोजगार मिला है। उद्यम पंजीयन के क्षेत्र में भी जिले ने रिकॉर्ड बनाया है, जहां पिछले दो वर्षों में कुल चौवालीस हजार पांच सौ एक उद्यमों का पंजीयन हुआ है, जिनसे एक लाख सत्तर हजार से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। जरूरी आंकड़े… 44 हजार 501 उद्यमों का पंजीयन इंदौर जिले में पिछले दो वर्षों के सफल कार्यकाल के दौरान किया गया है। 1 लाख 70 हजार 678 लोगों को निर्माण एवं सेवा क्षेत्र की गतिविधियों के विस्तार से रोजगार प्राप्त हुआ है। 15 नए इंडस्ट्रियल पार्क पिछले तीन वर्षों में इंदौर जिले की सीमाओं के भीतर स्थापित किए गए हैं। 328.50 करोड़ रुपये से अधिक का कुल अनुदान एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के तहत विभिन्न इकाइयों को स्वीकृत हुआ है। 300 तक इंदौर में ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है जो वर्तमान में 100 से भी कम है। 60 प्रतिशत देश की आबादी इंदौर के 700 किलोमीटर के सड़क नेटवर्क दायरे में भविष्य में आ जाएगी।