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ग्रीन इंदौर मिशन: 50 करोड़ की लागत से गार्डनों का सौंदर्यीकरण शुरू

इंदौर  इंदौर विकास प्राधिकरण ने शहर को हरा-भरा बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण दो दर्जन नए गार्डनों को विकसित करने जा रहा है, जिस पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बीते साल भी हरियाली महोत्सव और एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियानों के तहत ग्रीन बेल्ट और गार्डनों में हजारों पौधे लगाए गए थे, जो अब बड़े होकर हरे-भरे पेड़ों में तब्दील हो चुके हैं। स्कीम 78 में सिटी फारेस्ट बनाया आईडीए ने योजना क्रमांक 78 में मियावाकी पद्धति से गार्डन विकसित किया है। यह इसकी एक सफल मिसाल है। प्राधिकरण केवल पौधारोपण ही नहीं करता, बल्कि रख-रखाव के लिए भी ठेका देता है, जिससे पौधों का जीवित रहना सुनिश्चित होता है। रिंग रोड की हरियाली और सिटी फॉरेस्ट योजना को भी मिलेगा विस्तार प्राधिकरण के सीईओ आरपी अहिरवार के अनुसार, प्राधिकरण ने वर्षों पहले रिंग रोड पर जो चौड़े ग्रीन बेल्ट विकसित किए थे, वह आज भी हरे-भरे हैं, हालांकि मेट्रो प्रोजेक्ट और फ्लाईओवर निर्माण के कारण कुछ स्थानों पर ग्रीन बेल्ट हटाने की भी नौबत आई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद योजना क्रमांक 97 पार्ट-4 में 42 एकड़ भूमि पर सिटी फॉरेस्ट के लिए जमीन मिली है, जिसके लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। हाल ही में प्राधिकरण ने कुमेर्डी में आईएसबीटी के सामने 2100 पौधे लगाए हैं। पिछले वर्ष लगाए गए करीब ढाई लाख पौधे अब 10 से 15 फीट तक ऊंचे हो चुके हैं, जो इस योजना की सफलता दर्शाते हैं। नई टीपीएस योजनाओं में शामिल होंगे बड़े गार्डन क्षेत्र प्राधिकरण के सीईओ आरपी अहिरवार के अनुसार, इस वर्ष भी मां की बगिया और एक पौधा मां के नाम जैसे अभियानों के तहत मानसून सीजन में हजारों पौधे लगाए जा रहे हैं। साथ ही, जो नई टीपीएस योजनाएं घोषित की गई हैं, उनमें बड़ी संख्या में गार्डनों के लिए जमीन आरक्षित की गई है। इन दो दर्जन नए गार्डनों में ही ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। मियावाकी पद्धति के अतिरिक्त अन्य पौधारोपण कार्यों के लिए भी टेंडर बुलाए जा चुके हैं और विभिन्न ठेकेदार फर्मों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ठेकेदार फर्में करेंगी रखरखाव, प्राधिकरण करेगा सख्त मॉनिटरिंग पौधारोपण की सफलता का राज यह है कि प्राधिकरण पौधों के रख-रखाव की जिम्मेदारी भी ठेकेदारों को सौंपता है। पौधे सूखने की स्थिति में फर्म को नए पौधे लगाने होते हैं। इसके अलावा पौधारोपण से पहले गार्डनों और ग्रीन बेल्ट में बाउंड्री, फेंसिंग, बोरिंग और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्राधिकरण की टीम लगातार इसकी निगरानी करती है। हाल ही में पर्यावरण दिवस पर सिंदूर गार्डन में 1100 पौधे लगाए गए थे। अब बारिश के मौसम में प्राधिकरण पूरे शहर में बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने जा रहा है। 

सफाई में नंबर 1 इंदौर की नई पहल: ऑन डिमांड कचरा उठाने के लिए लॉन्च होगा मोबाइल ऐप

इंदौर सफाई के मामले में इंदौर एक बार फिर नंबर बन रहा है। वहीं अब इंदौर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के बाद एक और सुविधा मिलने जा रही है। इस सुविधा के तहत लोग अपने मोबाइल में एक एप्लीकेशन के जरिए कचरा गाड़ी बुलवाकर कचरा दे सकेंगे। यह सुविधा घर और संस्थानों सभी के लिए उपलब्ध रहेगी। दरअसल, इस खास ऐप के जरिए लोगों को साफ-सफाई का ऑप्शन दिया जाएगा। इंदौर में शुरू होने वाले इस खास ऐप को 5 अगस्त को लॉन्च किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक जो ऐप लॉन्च किया जाएगा, वह एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ही एप्लीकेशन पर काम करेगा। इस ऐप का मकसद सफाई के मामले में इंदौर को और आगे ले जाना है। अब इंदौर में डोर टू डोर ही नहीं ऑन डिमांड भी कचरा किया जाएगा कलेक्ट, फूड डिलीवरी की तरह ही होगा काम कैसे काम करेगा यह ऐप? दरअसल, लॉन्च किया जाने वाला यह ऐप एकदम फूड डिलीवरी ऐप की तरह ही काम करेगा। जिस प्रकार से हम किसी फूड डिलीवरी ऐप पर जाकर फूड आइटम सेलेक्ट करते हैं और अपना एड्रेस डालकर ऑर्डर करते हैं, वैसे ही इस ऐप में भी सफाई के कुछ ऑप्शंस को सेलेक्ट करना होगा और अपने घर व संस्थान का एड्रेस देना होगा। इसके बाद गाड़ियां घर आएंगी और आपका कचरा कलेक्ट करेंगी। दरअसल, यह कचरा रोज़ाना के अलावा इकट्ठा होने वाला एक्स्ट्रा कचरा होगा। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि इसका चार्ज कितना होगा, लेकिन जल्द ही यह तय किया जा सकता है। यह चार्ज नगर निगम द्वारा लिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि 5 अगस्त को इस ऐप को लॉन्च किया जा सकता है। ये एप्लिकेशन एंड्राइड और आईओएस दोनों के लिए रहेगी। फूड डिलीवरी ऐप की तरह करेगी काम जिस प्रकार आप फूड डिलीवरी ऐप का इस्तेमाल करते हैं। वैसे ही ये ऐप भी काम करेगी। फूड डिलीवरी ऐप पर जिस प्रकार फूड को सिलेक्ट करते हैं उसके बाद ऑर्डर देते हैं। ऑर्डर होने के बाद फूड आपके घर या संस्थान तक पहुंचाया जाता है। उसी प्रकार इस ऐप के माध्यम से आप अपने घर या संस्थान से निकलने वाले कचरे (रोजाना के अलावा) कलेक्शन के लिए गाड़ियां बुला सकते हैं। बड़े संस्थान और बड़े इवेंट के लिए साफ-सफाई का भी ऑप्शन मिलेगा। हालांकि, इसके लिए नगर निगम द्वारा चार्ज लिया जाएगा, लेकिन कितना चार्ज लिया जाएगा ये फिलहाल तय नहीं हुआ हैं। ऐप को दिया ‘क्विक साफ' नाम स्वच्छ भारत मिशन द्वारा तैयार की गई इस ऐप को 'क्विक साफ' (Quick Saaf) नाम दिया है। इंदौर में लोगों के घरों में डोर-टू-डोर कचरा गाड़ी रोजाना आती हैं, जिसमें लोग गिला और सूखा कचरा अलग-अलग डालते हैं। 5 अगस्त को लॉन्च की जा सकती है ऐप 5 अगस्त को नगर निगम परिषद के कार्यकाल के तीन साल पूरे हो रहे हैं। महापौर भार्गव ने बताया कि 5 अगस्त को कार्यकाल पूरे हो रहे हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव से इस विषय में चर्चा की जाएगी। अगर अनुमति मिलती है तो इस ऐप को 5 अगस्त को ही लॉन्च कर दिया जाएगा। इस ऐप की फिलहाल दरें तय नहीं हुई है। दरें एमआईसी में अप्रूवल के लिए आई है। जल्द ही दरें भी अप्रूव हो जाएगी। मगर इस ऐप का इस्तेमाल से लोग अपने घरों और संस्थानों में निकलने वाले एक्स्ट्रा कचरे को देने के लिए गाड़ी बुक कर सकते हैं। बुकिंग पर गाड़ी आपके घर आएगी और घर या संस्थान से कचरा कलेक्ट कर ले जाएगी। बड़े इवेंट या बड़े संस्थानों में साफ-सफाई के लिए भी आप इस माध्यम से टीम को बुला सकते हैं। नवाचार और इनोवेशन से इंदौर नंबर वन महापौर पुष्यमित्र भार्गव से दैनिक भास्कर ने इसे लेकर खास चर्चा की। उन्होंने बताया कि इंदौर नगर निगम अपने नवाचार और इनोवेशन के कारण लगातार देश में नंबर वन हैं। गीले कचरे से बायो सीएनजी बन रही है, सूखे को रिसाइकिलिंग कर रहे हैं, हरे कचरे से प्लेट्स बनाने का काम इंदौर नगर निगम में शुरू हो गया है, लेकिन इस कचरा प्रबंधन को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने लिए अब इंदौर नगर निगम ऑन डिमांड कचरा कलेक्शन भी शुरू करने जा रहा है। क्विक साफ (Quick Saaf) नाम से ऐप हमारा बनकर तैयार हो गया है, जिसकी शुरुआत जल्द होने वाली है। फूड डिलीवरी ऐप पर जैसे खाने की डिलीवरी होती है। उसी तरह डोर-टू-डोर कचरा गाड़ी के अलावा जो कचरा है वह यदि कोई देना चाहता है तो ऐप के माध्यम से घर बुलाकर दे सकता है। वैसे ही किसी बडे़ आयोजन की साफ-सफाई करना है तो ऐप के माध्यम से रिक्वेस्ट भेज सकता है। टीम वहां जाकर साफ-सफाई भी कर देगी। कई नवाचार लाइन में हैं। रोड स्वीपिंग के हो, मिक्स्ड वेस्ट के या प्लास्टिक से फ्यूल बनाना हो। इन्हें हम तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। क्या है इस ऐप का नाम? बता दें कि इंदौर में डोर टू डोर कलेक्शन किया जाता है, यानी गाड़ियां लोगों के घर जाती हैं और वहां से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग इकट्ठा करती हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि जब महीने या हफ्ते में घर की सफाई की जाती है तो एक्स्ट्रा कचरा निकलता है। ऐसे में इस कचरे को डालना भी बड़ी समस्या बन सकता है। लेकिन इंदौर नगर निगम सफाई के मामले में बेहद ही सक्रिय है। अब एक्स्ट्रा कचरे के लिए लोग गाड़ी बुक कर सकेंगे। बुकिंग करने पर यह गाड़ी आपके घर आएगी और घर से यह कचरा कलेक्ट कर लेगी। यह बड़े इवेंट और संस्थाओं के लिए भी सफाई का अच्छा माध्यम बनेगी। बता दें कि इंदौर में शुरू होने वाले ऐप को क्विक साफ नाम से तैयार किया गया है।

इंदौर सफलता के पीछे रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल, रिफ्यूज, रिथिंक, रिपेयर, रिपर्पस और रिनोवेशन की महत्वपूर्ण भूमिका

इंदौर ने एक बार फिर स्वच्छता में अपनी श्रेष्ठता की साबित ,सुपर स्वच्छ लीग में नंबर वन का स्थान  इंदौर की सफलता के पीछे गीला और सूखा कचरा अलग करने की आदत एक महत्वपूर्ण कारक  इंदौर सफलता के पीछे रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल, रिफ्यूज, रिथिंक, रिपेयर, रिपर्पस और रिनोवेशन की महत्वपूर्ण भूमिका  इंदौर  इंदौर ने एक बार फिर बता दिया कि स्वच्छता में उसका कोई सानी नहीं है। गुरुवार सुबह जब दिल्ली के विज्ञान भवन में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, निगमायुक्त शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों से सम्मान स्वीकार कर रहे थे, हर इंदौरी खुद को गौरवांवित महसूस कर रहा था। जिन अष्टसिद्धियों को पाने का संकल्प हमने 11 मार्च 2024 को स्वच्छता का सातवां आसमान छूते वक्त लिया था, उन्हें आखिर पा ही लिया। अब तक स्वच्छ सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में शामिल रहे इंदौर को इस बार सुपर स्वच्छ लीग में रखा गया था, लेकिन पिछले सात वर्ष की तरह इंदौर ने यहां भी खुद को पहले स्थान पर कायम रखा। इस बार प्रतियोगिता में 4,989 शहर थे। इन सबमें इंदौर को सबसे ज्यादा अंक मिले। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई मौकों पर कह चुके हैं कि इंदौरियों को नंबर वन पर रहने की आदत है, गुरुवार को यह बात एक बार फिर साबित हो गई। कहा जाता है कि नंबर वन पर पहुंचना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल है इस पर लगातार बने रहना। इंदौर ने इस चुनौती को स्वीकारा और जीत हासिल की। कोई शहर यूं ही नहीं नंबर वन बन जाता। दरअसल स्वच्छता इंदौरियों के संस्कार में हैं, यहां के नागरिकों के रग-रग में रची-बसी है। आने वाले समय में चुनौतियां और कठिन होंगी। अष्टसिद्धि पाने के साथ ही इंदौर अब नई भूमिका में आ चुका है। अब खुद को स्वच्छ बनाए रखने के साथ-साथ इंदौर की जिम्मेदारी एक अन्य शहर को भी स्वच्छ बनाने की है। निश्चित ही इंदौर इस कठिन परीक्षा में भी सफल होगा। आखिर हमारी आदत है नंबर वन आने की। सुपर स्वच्छ लीग में शीर्ष पर रहने के मायने स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हुए इस बार सुपर स्वच्छ लीग में पांच अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई थीं। दस लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर के साथ 11 अन्य शहर प्रतिस्पर्धा में शामिल थे। पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में सूरत ने इंदौर को कड़ी चुनौती दी थी। इंदौर को पहला स्थान उसके साथ साझा तक करना पड़ा था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। पिछली बार से सबक लेते हुए इंदौर ने इस बार ऐसी तैयारी की कि सूरत उसके आसपास भी नहीं पहुंच सका। सुपर स्वच्छ लीग में शीर्ष पर रहने से इंदौर की जिम्मेदारी बढ़ गई है। वह अब बड़े भाई की भूमिका में आ गया है। परिवार के सदस्यों का ध्यान रखना उसकी जिम्मेदारी हो गई है। इंदौर की सफलता के पीछे गीला और सूखा कचरा अलग करने की आदत एक महत्वपूर्ण कारक  आठ साल पहले इंदौर ने स्वच्छता का संकल्प ले सड़क किनारे के कचरे के ढेर व कचरा पेटियों को हटाया और हर घर से गीला व सूखा कचरा अलग-अलग लेने (सोर्स सेग्रिगेशन) का नवाचार किया। नगर निगम द्वारा किए गए इस बदलाव का साथ शहरवासियों ने दिया। उन्होंने अपने घर में गीले व सूखे कचरे का डिब्बा अलग रखा। कचरा पृथक्करण की इस मूल आदत के कारण इंदौर सात साल से स्वच्छता में नंबर-1 रहा। वहीं आठवीं बार सुपर लीग में शामिल होने के बाद भी देश के सभी शहरों में इंदौर सबसे आगे रहा। घर-बाजार से गीला-सूखा नहीं, छह तरह का कचरा अलग देने की शहरवासियों की आदत ही इंदौर को दूसरे शहरों से आगे बनाए हुए है। अलसुबह 6.30 बजे से शहर की कालोनियों में पहुंचने वाली डोर टू डोर कचरा संग्रहण की गाड़ियां देर रात छप्पन दुकान व सराफा बाजार के बंद होने के पहले उनका कचरा एकत्र कर ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचाती हैं। इस कार्य में हर दिन दो हजार से ज्यादा कर्मचारी इन वाहनों के साथ मौसम की परवाह किए बगैर नियमित जिम्मेदारी निभाते हैं। साल के 365 दिन शहरवासियों व निगम के कर्मचारियों की शहर को नंबर एक बनाने के प्रण की यह जीवटता ही जो इंदौर को हर मुकाबले में सिरमौर बनाती है। गीला-सूखा कचरा अलग-अलग लेने से आगे रहा इंदौर सुपर स्वच्छ लीग में शामिल इंदौर के शामिल होने के कारण इस बार इंदौर किसी भी शहर से नंबर-1 के खिताब के लिए मुकाबला नहीं था। इस सर्वेक्षण में देश के अन्य शहरों के साथ इंदौर का स्कोर कार्ड भी जारी किया गया। लीग में शामिल सूरत व इस बार का नंबर-1 स्वच्छ शहर अहमदाबाद भी स्वच्छता के अन्य मापदंडों पर इंदौर की तरह शत प्रतिशत अंक लाए हैं। सोर्स सेग्रिगेशन यानि घर-बाजारों से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग मिलने वाली श्रेणी में इंदौर को 98 प्रतिशत अंक मिले। वहीं सूरत को 92 व अहमदाबाद को 94 प्रतिशत अंक मिले। यानी इंदौर के मुकाबले सूरत, अहमदाबाद व अन्य शहरों को गीला-सूखा कचरा पूर्ण रूप से अलग-अलग नहीं मिल पा रहा है। इसी वजह से सोर्स सेग्रिगेशन ने इंदौर को स्कोर कार्ड में सबसे ऊपर खड़ा कर दिया।  इंदौर सफलता के पीछे रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल, रिफ्यूज, रिथिंक, रिपेयर, रिपर्पस और रिनोवेशन की महत्वपूर्ण भूमिका  स्वच्छता के जिन सितारों को अपने दामन में संजोने का स्वप्न देखते-देखते देश के बड़े शहरों की आंखे पथरा गईं उन सितारों को इंदौर ने अपने आसमान पर संजो लिया है। गुरूवार को दिल्ली में जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इंदौर को सुपर लीग श्रेणी में देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया तो मालवा के सिरमौर शहर इंदौर के लोगों ने कुछ यही पंक्तियां याद करते हुए बड़े गर्व से अपनी सफलता को सराहा। स्वच्छता की दौड़ में अपने मानक ऊंचे कर इंदौर इतना आगे निकल आया है कि प्रतिस्पर्धा करने वाले शहर सशंकित ही रहते हैं कि स्पर्धा में नंबर वन तो इंदौर को ही आना है, उन्हें दूसरा-तीसरा स्थान भी मिल जाए तो बात बन जाए। सफलता की सही कसौटी उसकी निरंतरता ही होती है। स्वच्छता की अष्टसिद्धि प्राप्त करके इंदौर ने दुनिया को बता दिया कि यूं ही कोई शहर इंदौर नहीं हो जाता। इसके … Read more

स्वच्छता में नंबर वन इंदौर ने अनोखे अंदाज़ में मनाया जश्न, आतिशबाजी के बाद खुद की सफाई, जिम्मेदारी भी निभाई

इंदौर का स्वच्छता मॉडल बना ग्लोबल आइकन, 50 देशों के प्रतिनिधि हुए प्रेरित इंदौर की सफाई को कांग्रेस सांसद ने बताया मिसाल, कहा – यूरोप नहीं, यहां से सीखें स्वच्छता में नंबर वन इंदौर ने अनोखे अंदाज़ में मनाया जश्न, आतिशबाजी के बाद खुद की सफाई, जिम्मेदारी भी निभाई इंदौर पिछले कई वर्षों से ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ में सबसे साफ शहर बनकर उभरा इंदौर अब वैश्विक स्तर पर स्वच्छता के लिए जाना जाने लगा है। इसके सख्त सफाई और कचरा प्रबंधन नीतियों ने इसे एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र भी बना दिया है, जहां दुनियाभर के देश अपने प्रतिनिधियों को भेजकर इसकी प्रणाली सीखने की प्रेरणा पा रहे हैं। कुछ साल के अंदर कई दल इंदौर आ चुके हैं और उन्होंने यहां से सीखी स्वच्छता की बातों को अपने देशों में भी लागू किया है। अब तक देश के अलग अलग शहरों के 100 से अधिक प्रतिनिधि स्वच्छता मॉडल को देखने के लिए आ चुके हैं।  दुनियाभर के 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भी यहां पर आकर स्वच्छता के गुर सीख चुके हैं। फ्रांस से लेकर फिजी और जाम्बिया तक के देशों ने इंदौर के सफाई मॉडल पर विश्वास दिखाया है। देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों ने इसकी उत्कृष्टता को सराहा और उसे सीखने की इच्छा जताई है, जो स्वच्छ भारत और ग्लोबल सिटी मॉडल की दिशा में एक मजबूत कदम है।   प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भी स्वच्छता रही मुख्य आकर्षण साल 2023 में इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान दुनियाभर के देशों से लोग इंदौर आए। यहां पर सभी के लिए स्वच्छता आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। विदेशी दलों को नगर निगम की टीम पर्यटन स्थलों के साथ में स्वच्छता के मुख्य केंद्रो पर भी ले गई।  बांग्लादेश ने भेजा विशेष दल बांग्लादेश के ज्वाइंट सेक्रेटरी निरोद चंद्र मंडल के नेतृत्व में 13 बांग्लादेशी प्रतिनिधियों का दल इंदौर आया। इन्होंने शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी इकट्ठा की। इसके साथ ही सॉलिड वेस्ट मैनजमेंट सिस्टम को भी समझा बारीकी से समझा। विदेशी प्रतिनिधिमंडल आए 22 सदस्यीय विदेशी टीम इंदौर आई। यह 6 अलग-अलग देशों से थी। इन्होंने इंदौर के बायो‑CNG संयंत्र, घर-घर कूड़ा संग्रह, कंपोस्टिंग समाधान और सफाई स्टाफ की प्रशिक्षण विधियों का ज्ञान साझा किया। इस टीम में यह देश शामिल थे… फ्रांस (France) उरुग्वे (Uruguay) फिजी (Fiji) जाम्बिया (Zambia) ग्वाटेमाला (Guatemala) होंडूरस (Honduras)  प्रदेशों ने भी भेजे अपने दल उत्तर प्रदेश का एक दस-सदस्यीय दल  जिसमें “Safai Mitra” एवं राज्य के अधिकारी शामिल थे, नवंबर 2022 में इंदौर आया। उन्होंने इंदौर की बायो-CNG संयंत्र सुविधा को समझा और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल की पूरी जानकारी ली और अपनी नगरपालिकाओं में इसके मॉडल को लागू करने की योजना बनाई। हैदराबाद की मेयर और 40 GHMC निगम सदस्य सितंबर 2024 में आए, ताकि इंदौर के door-to-door collection, स्रोत पर कचरा विभाजन (segregation), और सफाई कर्मचारियों के सशक्त बनावट मॉडल को सीख सकें।  इन सभी दलों ने इंदौर के कई पहलुओं को समझा, जिनमें मुख्य रूप से यह बातें शामिल थी… wet waste से bio-CNG उत्पादन, बायो‑CNG संयंत्र (Asia's largest) dry waste का पुनः उपयोग  100% door-to-door कचरा संग्रह होम कंपोस्टिंग टेक्निक zero-landfill नीति सफाई संगठनों (Safai Mitras) की कार्यप्रणाली 'Reduce‑Reuse‑Recycle' मॉडल आईआईएम ने शुरू किया कोर्स, देशभर से आ रहे अधिकारी इंदौर आईआईएम द्वारा शुरू की गई पहल अन्वेषण से देशभर में स्वच्छता के लिए जागरूकता बढ़ रही है। अन्वेषण आईआईएम इंदौर द्वारा चलाया जा रहा कोर्स है जिसमें देशभर के निगम आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी स्वच्छता से जुड़ी ट्रेनिंग लेते हैं। अपशिष्ट प्रबंधन और वॉश (WASH: Water, Sanitation and Hygiene – जल, स्वच्छता और सफाई) पर केंद्रित अन्वेषण की कई बैच निकल चुकी हैं। चार दिवसीय कार्यक्रम में देश के कई राज्यों के नगर निगम आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। अन्वेषण की यह बैच अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता के माध्यम से देशभर के अधिकारियों को एक मंच पर लाने का काम करती है। आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान और अंतर्दृष्टि का उपयोग कर सभी अधिकारी अपने संबंधित शहरों में स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को लागू कर रहे हैं। इससे स्वच्छ भारत अभियान में महत्वपूर्ण योगदान हो रहा है।  इंदौर की सफाई को कांग्रेस सांसद ने बताया मिसाल, कहा – यूरोप नहीं, यहां से सीखें इंदौर का स्वच्छता का डंका न सिर्फ देश में बल्कि दुनियाभर में बजता है। भारत में ही हर पार्टी के नेता इंदौर की स्वच्छता के गुर सिखाने के लिए अपने दल भेजते रहते हैं। समय समय पर देशभर के जनप्रतिनिधि इंदौर की तारीफ भी करते रहते हैं।  कांग्रेस सांसद बोले स्वच्छता सीखने यूरोप क्यों जा रहे, इंदौर जाइए इस साल मार्च में चेन्नई का विशेष दल स्वच्छता के गुर सीखने यूरोप जा रहा था। कांग्रेस के सांसद कार्ति चिदंबरम इस पर नाराज हो गए और कहा कि चेन्नई नगर निगम के अधिकारियों को कचरा प्रबंधन के गुर सीखने के लिए यूरोप क्यों जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए सबसे पहले इंदौर का दौरा किया जाना चाहिए।  रायपुर की महापौर बोली इंदौर जैसे काम करेंगे, नंबर वन बनेंगे पिछले महीने इंदौर आई रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने इंदौर में दो दिवसीय कार्यक्रम में स्वच्छता की बारीकियां सीखी। यहां से लौटने के बाद रायपुर की स्वच्छता और विकास के लिए कई ठोस कदमों की घोषणा की। महापौर ने बताया कि इंदौर से मिले अनुभव और मॉडल को रायपुर में अपनाकर शहर को स्वच्छता के मामले में नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास किया जाएगा। महापौर चौबे ने कहा कि रायपुर में इंदौर की तरह सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए आमजन को जागरूक किया जाएगा। इसमें एनजीओ की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही शहर के सभी 10 जोनों में आरआरआर (रियूज, रिड्यूस, रिसाइकल) केंद्र खोलकर उनके प्रभावी संचालन के लिए एनजीओ के सहयोग से रणनीति बनाई जाएगी।  भागलपुर की महापौर बोली इंदौर की ट्रेनिंग से हुआ फायदा भागलपुर की महापौर वसुंधरा लाल ने अपने शहर के सफाई कर्मचारियों को इंदौर भेजा ताकि वे वहां की सफाई व्यवस्था को समझकर भागलपुर में लागू कर सकें। वसुंधरा ने कहा कि इंदौर में सफाई व्यवस्था की ट्रेनिंग … Read more

कोर्ट ने शहर में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या और ट्रैफिक सिग्नलों की खराब स्थिति पर भी चिंता जताई, मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई को

 इंदौर  इंदौर शहर के बदहाल ट्रैफिक को लेकर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने कलेक्टर आशीष सिंह, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह और निगमायुक्त शिवम वर्मा से व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के लिए कहा है, ताकि इस समस्या का समाधान निकल सके। कोर्ट ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव से कहा है कि वे सुनवाई के दौरान न्यायमित्र के रूप में उपस्थित रहें और कोर्ट का सहयोग करें। शहर में लगातार बढ़ रही ई-रिक्शा की संख्या को लेकर भी कोर्ट ने शासन को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में ई-रिक्शा संचालन के लिए राज्य सरकार और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) के पास कोई नीति नहीं है। ई-रिक्शा की संख्या, मार्ग और किराए पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है। कोर्ट ने ध्वस्त हो चुकी शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर शासन और पुलिस विभाग से बिंदुवार विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने यह आदेश राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से दायर जनहित याचिका में दिया है। दो जुलाई को याचिका में बहस के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था जो  देर शाम जारी हुआ। याचिका में शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को लेकर कहा है कि रात के वक्त एक भी चौराहे पर यातायात सिग्नल चालू नहीं रहते। चौराहों पर लगे सिग्नल बंद कर दिए जाते हैं। दुर्घटना रोकने को कोई इंतजाम नहीं दुर्घटना संभावित क्षेत्र तो चिह्नित कर लिए गए, लेकिन यहां दुर्घटना रोकने के कोई इंतजाम नहीं किए गए। हालत यह है कि चौराहों से सुबह और शाम को निकलना मुश्किल है। दुकान से ज्यादा सामान तो दुकानदार बाहर रखते हैं। शहर में ई-रिक्शा की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे नियंत्रित करने की कोई नीति नहीं है। मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। इन बिंदुओं पर मांगी जानकारी     शहर में प्रमुख चौराहों पर कितनी ट्रैफिक लाइटें लगाई गई हैं और कितनी काम कर रही हैं।     मार्ग चौड़ीकरण के माध्यम से कितने लेफ्ट टर्न बनाए गए हैं।     मुख्य और साइड लेन सड़कों पर रोड मार्किंग की गई या नहीं।     शहर में प्रमुख चौराहों पर यातायात पुलिसकर्मियों की तैनाती।     दुर्घटना, ब्लैक स्पाट की पहचान के लिए क्या किया।     पिछले पांच वर्ष के दौरान कितने स्पीड ब्रेकर, पार्किंग जोन, फुट ओवर ब्रिज बनाए।     दुकानों के बाहर सड़क और फुटपाथ पर सामान रखने वाले दुकानदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की। ज्यादातर जगह तो दुकानदार दुकान के क्षेत्रफल से ज्यादा फुटपाथ इस्तेमाल कर रहे हैं।     सार्वजनिक स्थानों पर ठेले, गुमटियों को हटाने के लिए क्या कार्रवाई की और पिछले पांच वर्ष में कितने चालान बनाए।     हेलमेट नहीं पहनने वाले और लाल लाइट का उल्लंघन करने वाले कितने दोपहिया वाहन चालकों के चालान बनाए।     ऐसे दो पहिया वाहन जिन पर दो से अधिक यात्री यात्रा करते हैं वह भी बगैर हेलमेट के, उन्हें नियंत्रित करने के लिए क्या योजना है। यह भी बताएं कि पुलिस सख्ती क्यों नहीं बरतती। बीआरटीएस में निजी वाहन नहीं चलेंगे कोर्ट ने तीन पेज के आदेश में स्पष्ट किया है कि जब तक बीआरटीएस चालू है, तब तक इसमें केवल आईबस, एंबुलेंस और पुलिस वाहन ही चलेंगे। निजी वाहनों को बीआरटीएस का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।