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इंदौर के मेयर और पार्षद ने नल का पानी पीकर जताया विश्वास, भागीरथपुरा में दूषित पानी से 24 की मौत, 16 मरीज अस्पताल में

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। आईसीयू में एडमिट 6 मरीजों में से 1 को वार्ड में रेफर किया गया है, जबकि तीन मरीज लंबे समय से वेंटिलेटर पर ही हैं। वार्ड में 11 मरीज एडमिट हैं। इनके सहित अभी 16 मरीजों का अस्पताल में इलाज चल रहा।  मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने भागीरथपुरा क्षेत्र में जलप्रदाय की स्थिति का अवलोकन किया। इस दौरान नर्मदा जलप्रदाय के दौरान नल से ग्लास में पानी भरकर स्वयं पीकर उसकी गुणवत्ता की जांच की। उनके साथ क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला ने भी पानी पीकर लोगों को विश्वास हासिल करने का प्रयास किया। इस दौरान मेयर ने कहा कि नगर निगम, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भागीरथपुरा क्षेत्र में विगत दिनों से लगातार राहत एवं सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। इनमें क्षेत्र के नागरिकों का भी सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों से क्षेत्र में जलप्रदाय कर लगातार जल के सैंपल लिए गए। इस दौरान सभी आवश्यक जांच और निर्धारित मापदंडों के अनुरूप पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित की गई। 30% हिस्से में जल सुरक्षित सभी जांचों में जल सुरक्षित पाए जाने के बाद शुक्रवार को भागीरथपुरा क्षेत्र के लगभग 30% हिस्से में, जिसमें लगभग 15 हजार की आबादी है, नर्मदा जलप्रदाय को पुनः प्रारंभ किया गया है। मेयर ने भागीरथपुरा क्षेत्र के नागरिकों से अपील की कि जलप्रदाय प्रारम्भ होने के बाद भी सावधानी के तौर पर पानी को उबालकर ही उपयोग में लें। साथ ही नगर निगम, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का पूर्ण रूप से पालन करें। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की समस्या या असुविधा उत्पन्न होती है तो लोग तत्काल नगर निगम या जिला प्रशासन को सूचित करें, ताकि समस्या का त्वरित समाधान किया जा सके।

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 23वीं मौत, 13 मरीज ICU में, 3 वेंटिलेटर पर

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. सोमवार को एक ही दिन में दो और लोगों की मौत हो गई, जिससे इस मामले में अब तक मौतों का आंकड़ा बढ़कर 23 तक पहुंच गया है. मृतकों की पहचान 59 वर्षीय कमलाबाई और 64 वर्षीय भगवान दास सबनानी के रूप में हुई है. जानकारी के अनुसार, दोनों ही मरीज पिछले करीब 10 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. उन्हें उल्टी-दस्त और तेज कमजोरी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी और अब दोनों ने दम तोड़ दिया. हालांकि, इन दोनों मौतों को लेकर अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. बड़ी संख्या में लोग बीमार भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से दूषित पानी की सप्लाई के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नर्मदा पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिल जाने से यह स्थिति बनी है. इसके बाद इलाके में उल्टी, दस्त, बुखार और पेट दर्द के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में पानी की सप्लाई को बंद कर दिया था और वैकल्पिक रूप से टैंकरों के जरिए स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और बीमार लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा रहा है. अस्पतालों में एक्सट्रा बेड और डॉक्टरों की व्यवस्था भी की गई है. प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठे पानी के सैंपलों की जांच में खतरनाक बैक्टीरिया पाए जाने की पुष्टि पहले ही हो चुकी है, जिसके बाद पूरे इलाके में अलर्ट घोषित किया गया. इसके बावजूद लगातार सामने आ रही मौतों ने प्रशासन की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मृतकों के परिजनों को जल्द मुआवजा दिया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी समाधान किया जाए. वहीं, लोग अब भी दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं और प्रशासन से साफ और पारदर्शी जानकारी की मांग कर रहे हैं.

इंदौर में दूषित पानी का कहर जारी, 22वीं मौत, 4 मरीज वेंटिलेटर पर

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से मौतों का सिलसिला जारी है।  22वीं मौत सामने आई। एमवाय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती भागीरथपुरा निवासी 59 वर्षीय कमला बाई ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। बता दें कि दूषित पेयजल से यहां 3300 से अधिक लोग बीमार हुए हैं। इनमें से कई लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। मकान मालिक मनोज कुमार के अनुसार, कमला बाई करीब एक माह पहले ही पति तुलसीराम के साथ उनके यहां किराये से कमरा लिया था। दोनों पति-पत्नी मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे थे। छह जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। स्वजन ने उन्हें संजीवनी क्लीनिक में दिखाया। प्राथमिक उपचार व दवाइयां देकर वहां से घर भेज दिया गया। मकान मालिक मनोज कुमार के अनुसार कमलाबाई करीब एक माह पहले अपने पति तुलसीराम के साथ उनके मकान में किराए से रहने आई थीं। दोनों पति-पत्नी मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे थे। 6 जनवरी को कमलाबाई को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई, जिस पर उन्हें भागीरथपुरा स्थित संजीवनी क्लिनिक में दिखाया गया। वहां प्राथमिक उपचार कर दवाईयां देकर घर भेज दिया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम क्षेत्र में पहुंची और मरीज को ओआरएस व कुछ गोलियां दीं, लेकिन तबीयत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। हालत लगातार बिगड़ने पर 7 जनवरी को परिजन उन्हें एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए आईसीयू में भर्ती किया। तमाम प्रयासों के बावजूद 9 जनवरी की सुबह कमलाबाई ने दम तोड़ दिया। अब भी 12 से ज्यादा मरीज ICU में गौरतलब है कि इंदौर के भागीरथपुरा में मौतों का मामला नहीं थम रहा है। नलों से आ रहे दूषित पानी पीने के कारण इससे 21 लोगों की मौत हो चुकी हैं। वहीं अभी भी क्षेत्र से रोजाना 15 से अधिक मरीज उल्टी-दस्त के सामने आ रहे हैं। 40 से अधिक मरीज अभी भी अस्पतालों में भर्ती है, वहीं 12 से अधिक मरीज आईसीयू में है। चार मरीज करीब सप्ताहभर से वेंटीलेटर पर है, उनमें कोई खास सुधार नहीं आ रहा है। स्वजन सुबह से शाम अस्पतालों में अपने मरीज के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं। 1 साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित थी एमवाय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव का कहना है कि कमला बाई भागीरथपुरा के मरीजों की यूनिट में भर्ती नहीं थी। वह पंचम की फेल की निवासी थी और पिछले एक साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित थी। मामला एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) का नहीं होने के कारण उनका पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया। आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या 13 हुई दूसरी तरफ, भागीरथपुरा में अभी भी लोगों में दूषित पानी का डर बना हुआ है। लोग आरओ, बोरिंग और बोतल के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। पानी को छानकर और उबालकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बीच, आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या कम ज्यादा हो रही है। 8 जनवरी को जहां आईसीयू में 10 मरीज थे। 10 जनवरी को ये आंकड़ा 11 तक पहुंच गया। वहीं, 11 जनवरी को आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या 13 हो गई। जबकि पिछले कई दिनों से 4 मरीज वेंटिलेटर पर बताए जा रहे हैं। 29 दिसंबर को जब कई लोग अस्पताल में भर्ती हुए तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ अस्पतालों में पहुंचे और मरीजों व उनके परिजनों से बातचीत की। देखते ही देखते दूषित पानी के कारण मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। एक के बाद एक कई लोगों की जान दूषित पानी के कारण चली गई। स्थिति ये है कि कई लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है। कुछ लोग आईसीयू में इलाजरत है। स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को बुलेटिन जारी किया। इसके मुताबिक 50 दलों ने भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे किया। 176 सदस्यों ने 924 घरों में ORS और जिंक की गोलियां दी। इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी जांचे भी की गई। इलाके में आज OPD में 13 मरीज डायरिया के आए, जिसमें से 1 को रेफर किया है। कुल भर्ती मरीज 427 डिस्चार्ज हुए 385 अभी इतने भर्ती 42 ICU में मरीज 13 एंबुलेंस की संख्या 3 निगम आयुक्त ने किया इलाके का दौरा रविवार को भी नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने भागीरथपुरा इलाके का दौरा किया। यहां पर चल रहे कामों को देखा। इलाके में टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई की भी समीक्षा की। लगातार टीम के माध्यम से लोगों को पानी उबालकर, छानकर पीने के संबंध में अनाउंसमेंट करने, ड्रेनेज सीवरेज लाइन की सफाई करने, सफाई के बाद निकलने वाली गाद को तुरंत हटाने, मलेरिया टीम द्वारा नाला सफाई करने के लिए भी कहा है। इसके अलावा निगमायुक्त ने भागीरथपुरा के सभी बीट प्रभारी, उपयंत्री को अपनी-अपनी बीट में आने वाले सरकारी बोरिंग में क्लोरिनेशन काम करने के लिए कहा है।    

इंदौर में चेहरा ढंककर आए ग्राहकों को अब ज्वेलरी की दुकानों में एंट्री नहीं

इंदौर. शहर की सभी ज्वेलरी दुकानों में अब मास्क, हिजाब या कपड़े से चेहरा ढंककर आने वाले ग्राहकों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यदि गहने खरीदना है तो चेहरा खुला रखना होगा। इंदौर चांदी-सोना व्यापारी एसोसिएशन ने शहर की सभी ज्वेलरी दुकानों को निर्देश जारी किए हैं कि मास्क, हिजाब या किसी भी तरह से चेहरा ढंककर आने वाले ग्राहकों को गहने न दिखाए जाएं। यह आदेश एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी और मंत्री बसंत सोनी ने व्यापारियों के नाम लिखित पत्र जारी कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि देश के कई शहरों में पिछले कुछ महीनों में चेहरा ढंककर बदमाशों ने सराफा दुकानों में लूट की वारदातें अंजाम दी हैं। अपराधी सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए मास्क या कपड़ों से चेहरा छिपाकर दुकान में घुसते हैं और वारदात के बाद फरार हो जाते हैं। इसी खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। व्यापारियों का कहना है कि यह फैसला किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी तरह सुरक्षा कारणों से लिया गया है। बिहार में लागू, यूपी-झारखंड में तैयारी इसी तरह का नियम बिहार में लागू किया जा चुका है। झारखंड में भी तैयारी है, जबकि उत्तर प्रदेश के वाराणसी और झांसी के सराफा बाजारों में बुर्का, मास्क वाले ग्राहकों के प्रवेश पर रोक के पोस्टर लगाए जा चुके हैं। बिहार में इस फैसले के बाद तीखा विवाद खड़ा हो गया था। मुस्लिम संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक भेदभाव बताया। बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग भी की, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया। फैसले से होने वाले फायदे अपराध पर अंकुश अपराधियों की पहचान आसान होगी सीसीटीवी फुटेज से जांच में तेजी आएगी लूट और ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगेगा व्यापारियों की सुरक्षा स्टाफ का आत्मविश्वास बढ़ेगा हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में डर कम होगा दुकानों में सतर्कता बढ़ेगी ग्राहकों में भरोसा शोरूम में सुरक्षित माहौल बनेगा परिवार के साथ खरीदारी करने में भरोसा बढ़ेगा विरोध करने वालों की अपनी दलील यह फैसला भारत के संविधान और उसकी संवैधानिक परंपराओं के पूरी तरह खिलाफ है। ऐसी कार्रवाई के जरिए नागरिकों को संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। सुरक्षा के नाम पर हिजाब और नकाब को निशाना बनाना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि यह सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।

भागीरथपुरा दूषित पानी कांड से इंदौर का पर्यटन प्रभावित, टूर कैंसल, अंतरराष्ट्रीय छवि और व्यवसाय को नुकसान

 इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई 18 मौतों की चर्चा अब देश के साथ-साथ विदेशों में भी होने लगी है। विदेशी मीडिया में सुर्खियां बनने के कारण इसका सीधा असर इंदौर के पर्यटन क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। हाल ही में इंदौर के दो बड़े टूर निरस्त हो गए हैं और जो पर्यटक शहर आ रहे हैं, वे भी यहां के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंतित नजर आते हैं। आमतौर पर महेश्वर और ओंकारेश्वर जाने वाले पर्यटक इंदौर भी घूमने आया करते हैं, लेकिन  उनकी संख्या में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही कांग्रेस ने भी इंदौर के स्वच्छता अवार्डों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। भागीरथपुरा में 26 दिसंबर से मरीजों के आने का सिलसिला शुरू हुआ था, जिसके बाद मौतों की खबरें सामने आईं। इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, लेकिन दूषित पानी की इस घटना ने शहर की छवि को प्रभावित किया है। कांग्रेस ने इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इंदौर ट्रेवल्स एजेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष हेमेंद्र सिंह जादौन के अनुसार, मॉरीशस से अधिकारियों का एक दल जनवरी के पहले सप्ताह में इंदौर आने वाला था, जिसे रद्द कर दिया गया। इसी तरह बेंगलुरु से मध्य प्रदेश भ्रमण पर आने वाले एक समूह ने भी अपनी बुकिंग निरस्त करा दी है। दिसंबर और जनवरी के महीने पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन इस बार पर्यटकों की आमद कम है। भागीरथपुरा मुद्दे पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि गंदे पानी के कारण हुई ये मौतें एक बड़ा सबक हैं। उन्होंने बताया कि बस्ती में पेयजल लाइन बिछाने के प्रस्ताव लंबे समय से लंबित थे, जिन्हें समय पर लागू करने में विफलता हाथ लगी। विजयवर्गीय के अनुसार, वर्षों की मेहनत से शहर ने जो पहचान बनाई थी, इस घटना से उस पर दाग लगा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इंदौर इस दुखद घटना को लेकर बैठा नहीं रह सकता। इंदौर की प्रगति हमेशा सामूहिकता से हुई है और इस हादसे के बाद शहर का गौरव वापस लौटाने के लिए नए सिरे से संकल्प लिया जाएगा।    

हाईकोर्ट ने इंदौर में हुई मौतों पर सरकार को दी फटकार, भागीरथपुरा में 38 नए मरीज मिले

 इंदौर   मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और बीमारी के मामले में बेहद तल्ख टिप्पणी (MP High Court on Indore Water Crisis) की है। एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मामले की सुनवाई चल रही है जिसमें कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में ऐसा हो रहा, बहुत दुखद है। देश ही नहीं विदेश तक में शहर की छवि बिगड़ी है। देश का नाम खराब हो रहा है। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से पैदा हुआ स्वास्थ्य संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। दूषित पानी ने अब तक 17 लोगों की जान ले ली है और 110 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। यह केवल बीमारी नहीं, बल्कि प्रशासन और न्याय की चुनौती भी बन चुका है। हर दिन नए मरीज सामने आ रहे हैं, हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है और प्रशासन राहत पहुंचाने में जुटा है। क्या इंदौर के लोग अब सुरक्षित पानी की उम्मीद कर पाएंगे, यह सवाल सभी के सिर पर मंडरा रहा है।  इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल से हुई मौतों को लेकर मंगलवार (6 जनवरी) को एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि इस घटना ने शहर की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है. कोर्ट ने कहा कि पीने का पानी ही अगर दूषित हो तो यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है। हम इस मामले में मुख्य सचिव को सुनना चाहते हैं, क्योंकि यह समस्या सिर्फ शहर के एक हिस्से तक सीमित नहीं है। दरअसल, पूरे इंदौर शहर का पीने का पानी सुरक्षित नहीं है। खास बात यह की कोर्ट ने अगली सुनवाई में मध्य प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी को वर्चुअली हाजिर होने को कहा है। अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी बता दें, दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अस्पतालों में 110 मरीज भर्ती हैं। अब तक कुल 421 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है। इनमें से 311 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। आईसीयू में 15 मरीजों का इलाज चल रहा है। तीसरी जनहित याचिका, जिम्मेदारी तय करने की मांग मामले में दायर तीसरी जनहित याचिका भी हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। भागीरथपुरा जैसा स्वास्थ्य संकट मप्र में पहली बार बता दें इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल संकट बना हुआ है। उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं। अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अस्पतालों में 110 मरीज भर्ती हैं। 15 का आइसीयू में इलाज चल रहा है। इस बीच, भोपाल से इंदौर पहुंची स्टेट इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (एसआइडीएसपी) टीम के प्रमुख डा. भागवत भार्गव ने कहा कि भागीरथपुरा जैसा स्वास्थ्य संकट मध्य प्रदेश में पहली बार सामने आया है। उन्होंने बताया कि इतने कम समय में, इतने सीमित क्षेत्र में बड़ी संख्या में मरीजों का सामने आना और महामारी (एपिडेमिक) जैसी स्थिति बनना बेहद असाधारण और चिंताजनक है। कांग्रेस का प्रदर्शन नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित 10 कांग्रेस नेताओं को भागीरथपुरा में जाने की अनुमति मिल गई है। ये सभी बाइक से क्षेत्र का दौरा करेंगे। इसके अलावा कांग्रेस ने शाम को कैंडल मार्च और हर वार्ड में रैली निकालने की घोषणा की है। उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं। इनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर किया गया है। आखिरकार इन्दौर प्रशासन ने 17 मौतें मानी भागीरथपुरा (Bhagirathpura) सहित प्रभावित क्षेत्रों में 17 मौतों को स्वीकारते हुए प्रशासन (administration)  ने सभी मृतकों के परिजनों (Finally) को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान कर दी।  कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों को चैक वितरित किए। प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे मृतकों की जांच रिपोर्ट सामने आती रही, चैक तैयार किए जाते रहे और उन्हें कल वितरित किया गया। क्षेत्रवासियों ने इस बात से भी राहत की सांस ली कि आखिरकार उनके परिजनों को मृतक की सूची में शामिल कर लिया गया। इन 17 लोगों की मौत हालिया बीमारी और दूषित जल से जुड़ी बताई जा रही थी। मृतकों में बुजुर्ग, महिलाएं और एक कम उम्र का बच्चा भी शामिल है। अधिकांश मामलों में उल्टी-दस्त और संक्रमण के लक्षण सामने आए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन जान नहीं बच सकी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सभी मामलों की जांच की गई। जिन-जिन के मामलों की पुष्टि होती गई चैक दिए गए हैं। प्रशासन पूरी मुस्तैदी से यहां के रहवासियों की मदद के लिए तैनात है। वहीं नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को क्षेत्र में शुद्ध पेयजल आपूर्ति, टंकियों की सफाई और दवा वितरण के निर्देश दिए गए हैं। इनको मिली 2- 2 लाख की मदद उर्मिला पति अलगू राम, मंजुला पति दिगंबर बाघे, सीमा पति गौरीशंकर, अवयान पिता सुनील साहू, तारारानी कोरी, नंदलाल सिद्धार्थ पाल, उमा बिहारीलाल कोरी, संतोष पिता कल्याण ,सुमित्रादेवी पति रामेश्वर दास, गोमती पति गोपाल, अशोक पिता मोतीलाल, रामकली पति जगदीश, शंकरलाल जीवनलाल बरेडे, श्रवण पिता नाथू व गीताबाई ध्रुवकर को देर शाम तक चैक का वितरण कर दिया गया। याचिकाकर्ता बोले- सप्लाई हो रहा पानी दूषित 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को यह निर्देश दिया था कि नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इस पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी है कि प्रभावित क्षेत्र में अब भी जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह दूषित है, न कि स्वच्छ और पीने योग्य। 15  जनवरी को अगली सुनवाई  हाई कोर्ट द्वारा मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए तलब किया गया. कोर्ट ने पूरे प्रदेश में पानी को लेकर चिंता जताई है. वहीं, स्टेटस रिपोर्ट में 4 मौत दिखाने को लेकर सरकार को फटकार भी लगाई है. जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अगली तारीख 15 जनवरी तय की है.  यदि शिकायतें सुन लेते तो ये नौबत नहीं आती अन्य याचिकाओं में यह मुद्दा … Read more

इंदौर में डायरिया की हालत गंभीर, 516 बोरिंग का पानी रोकने के बाद 398 मरीज, 9 हजार से अधिक की स्क्रीनिंग

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 17 लोगों की जान चली गई। अभी भी यहां लोगों में नर्मदा और टैंकर के पानी को लेकर लोगों में डर का माहौल है। जिससे इलाके में आरओ की डिमांड बढ़ गई है।भागीरथपुरा में अब बोरिंग का पानी भी दूषित मिला है। मामला सामने आने के बाद शहर में बोरिंग के पानी के सैंपल लिए गए थे। जिनमें से 35 सैंपल फेल हो गए हैं। इनका पानी पीने योग्य नहीं है। ऐसे में इलाके के 516 बोरिंग के पानी के यूज पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें 400 निजी और 116 सरकारी हैं। इसके अलावा 112 पानी की टंकियों, नलों का पानी और बोरिंग के भी रविवार को सैंपल लिए गए। जिनकी जांच निजी लैब में कराई जाएगी। निगम की खुद की एक लैब है, लेकिन वहां भी कम कर्मचारी हैं। 9 हजार से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग, 20 नए केस  डायरिया संक्रमण के ग्राउंड जीरो माने जा रहे भगीरथपुरा इलाके में स्वास्थ्य टीमों ने रविवार को 2,354 घरों के 9,416 लोगों की जांच की. इस दौरान 20 नए डायरिया मरीज सामने आए. 429 पुराने मरीजों का फॉलोअप भी किया गया. इसी इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है. जांच में जुटी ICMR से जुड़ी टीम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि कोलकाता स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इंफेक्शंस (NIRBI) की एक टीम इंदौर पहुंच चुकी है. यह संस्थान ICMR से संबद्ध है. उन्होंने कहा कि NIRBI के विशेषज्ञ स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी सहयोग दे रहे हैं, ताकि संक्रमण को पूरी तरह रोका जा सके और इसके कारणों की गहराई से जांच हो सके.  डॉ. हासानी ने बताया कि भागीरथपुरा इलाके के प्रत्येक घर में ओआरएस के 10 पैकेट और 30 जिंक गोलियां वितरित की गईं. पानी को शुद्ध करने के लिए क्लीन वेट की बोतल की किट प्रत्येक घरों में दी गई है. उपयोग के बारे में भी विस्तार से बताया जा रहा है. इलाके में 17 टीमें लगाई हैं. यहां 5 एंबुलेंस लगाई गई हैं. 24 घंटे डॉक्टर्स की ड्यूटी है.  मौतों के आंकड़ों पर विवाद प्रशासन ने अब तक 6 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है. हालांकि, इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने मृतकों की संख्या 10 बताई है. स्थानीय लोगों का दावा है कि 6 महीने के बच्चे समेत 16 लोगों की मौत हुई है. 'घंटा' बयान पर सियासी बवाल मौतों को लेकर आक्रोश के बीच कांग्रेस ने पूरे मध्य प्रदेश में घंटी बजाकर प्रदर्शन किया. यह विरोध मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के उस बयान को लेकर था, जिसमें उन्होंने 31 दिसंबर की रात मीडिया के सवाल पर कैमरे के सामने 'घंटा' शब्द का इस्तेमाल किया था. कांग्रेस ने इसे असंवेदनशील और अमानवीय बताते हुए विजयवर्गीय के इस्तीफे और न्यायिक जांच की मांग की. विजयवर्गीय के पास शहरी विकास और आवास विभाग का प्रभार है और भगीरथपुरा इलाका उनकी इंदौर-1 विधानसभा सीट में आता है. 11 जनवरी से आंदोलन की चेतावनी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो 11 जनवरी से बड़ा आंदोलन किया जाएगा. पटवारी ने इंदौर मेयर पुष्यमित्र भार्गव और संबंधित नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की मांग की. उन्होंने कहा, 16 लोगों की मौत हुई है. ये मौतें बीजेपी को मिले जनादेश की हत्या हैं. दूषित पानी से हुई मौतों की न्यायिक जांच होनी चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए. पटवारी ने दावा किया कि भगीरथपुरा के लोग पिछले 8 महीनों से नलों में गंदा पानी आने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टैंकरों से सप्लाई किया जा रहा पानी भी दूषित है. देवास में SDM सस्पेंड इस पूरे विवाद के बीच पड़ोसी जिले देवास में एक SDM को सस्पेंड कर दिया गया है. आरोप है कि SDM ने अपने आधिकारिक आदेश में मंत्री के विवादित बयान और कांग्रेस के आरोपों का उल्लेख कर दिया. उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने SDM को गंभीर लापरवाही, उदासीनता और अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किया. अधिकारियों के मुताबिक, SDM ने कांग्रेस के ज्ञापन के एक हिस्से को जैसा का तैसा सरकारी आदेश में कॉपी कर दिया था.   ‘सिस्टम की देन है यह आपदा’ प्रसिद्ध जल संरक्षण विशेषज्ञ और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने इन मौतों को सिस्टम से पैदा हुई आपदा करार दिया. उन्होंने कहा कि यह हैरान करने वाला है कि भारत के सबसे साफ शहर में ऐसा संकट पैदा हुआ. अगर क्लीन सिटी में यह हाल है, तो बाकी शहरों में पीने के पानी की हालत कितनी खराब होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सीवर लाइन से निकला गंदा पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल गया, जिससे उल्टी-दस्त के गंभीर मामले सामने आए. उन्होंने कहा, पैसा बचाने के चक्कर में ठेकेदार ड्रेनेज लाइन के पास ही पानी की पाइपलाइन डाल देते हैं. भ्रष्टाचार ने पूरे सिस्टम को बर्बाद कर दिया है. नर्मदा पर निर्भर इंदौर इंदौर की पानी की जरूरतें पूरी तरह नर्मदा नदी पर निर्भर हैं. नगर निगम की पाइपलाइनों के जरिए खरगोन जिले के जलूद से 80 किलोमीटर दूर से नर्मदा का पानी इंदौर लाया जाता है और एक दिन छोड़कर एक दिन घरों में सप्लाई किया जाता है. नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना में सिर्फ बिजली बिल पर हर महीने करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होते हैं. 'हम पानी नहीं, घी पीते हैं' इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 27 जून 2024 को एक सेमिनार में कहा था, मेयर बनने के बाद से मैं मजाक करता हूं कि इंदौर एशिया के सबसे अमीर शहरों में से एक है, क्योंकि हम 21 रुपये प्रति लीटर का पानी पीते हैं और उसे बेकार भी बहा देते हैं. हम पानी नहीं, घी पीते हैं. अब यह बयान इंदौर के जल संकट के बीच चर्चा में है. मामला सामने आने के बाद से डर का माहौल 29 दिसंबर को मामला सामने आने के बाद से इलाके में डर का माहौल है। कई लोग जहां नर्मदा का पानी भरने से बच रहे … Read more

इंदौर निगम कमिश्नर का आईएएस क्षितिज सिंघल ने आधी रात संभाला कामकाज

इंदौर. दूषित जल आपूर्ति मामले हुई मौतों के मामले में इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाकर आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल को निगम आयुक्त पदस्थ किया है। वे शनिवार रात 11:45 बजे इंदौर पहुंचे और सीधे निगम मुख्यालय जाकर पदभार संभाला। सिंघल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी का कार्यभार संभाल रहे थे। सामान्य प्रशासन विभाग ने दिलीप यादव को हटाने के दूसरे दिन शनिवार को सिंघल को इंदौर नगर निगम का आयुक्त पदस्थ किया है। पांच अपर आयुक्त और 32 उपयंत्री मैदान में इंदौर नगर निगम ने भागीरथपुरा में दूषित पानी के लीकेज को खोजने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। शनिवार से लीकेज खोजने, पानी की सैंपलिंग व जांच के लिए इंदौर नगर निगम में आए तीनों नए अपर आयुक्तों के साथ पहले से मौजूद पांच अपर आयुक्तों को निरीक्षण व निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। भागीरथपुरा की 32 गलियों में 32 उपयंत्री व सहायक यंत्री भी बीट अनुसार सफाई, सैंपलिंग, लीकेज खोजने में जुटे हैं। नगर निगम की टीम ने 15 स्थानों पर गड्ढे खोदकर पाइप लाइन चेक की। इसमें सात स्थानों पर लीकेज मिला, जिसे दुरस्त किया गया। क्षेत्र में 100 सार्वजनिक व निजी बोरिंग में क्लोरिन डाला गया। शनिवार को भागीरथपुरा पानी की टंकी से जल वितरण नहीं किया गया। क्षेत्र में पानी के टैंकरों से जल वितरित किया गया। गंदे पानी की समस्या का 48 घंटे में समाधान करें गंदे पानी की समस्या के त्वरित समाधान के लिए जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शनिवार को कलेक्टर शिवम वर्मा तथा निगम के सभी अपर आयुक्तों के साथ बैठक की। बैठक में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में गंदे पानी की समस्या की समीक्षा की गई और कार्य विभाजन किया गया। महापौर ने कहा कि कठिन समय में जनता के साथ खड़े होकर उनकी समस्याओं का समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है। पूरे शहर में सर्वे कराया जाएगा और जहां-जहां गंदे पानी की समस्या सामने आएगी, वहां 48 घंटे के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार कार्य वितरण कर तत्काल कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। बैठक में जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा, अपर आयुक्त अर्थ जैन, अभय राजनगांवकर, आकाश सिंह, मनोज पाठक, नरेंद्र नाथ पांडे, देवघर दरवाई तथा कार्यपालन यंत्री अश्विनी जनवदे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

इंदौर में गंदा पानी पीने से कई मौते

इंदौर में गंदा पानी पीने से कई मौते  इंदौर  मौतो के जिम्मेदारो, शर्म करो डूब मरो कितने नालायक हो किसे दोष दे कर्मचारी अधिकारी नेता पार्षद मेयर विधायक मंत्री सरकार या अपने भाग्य को ….  7 साल से स्वच्छ इंदौर रहने वाले इंदौर की जनता वाकय में बहुत महान है बहुत सहनशील है और सत्ता पार्टी पर लगातार लंबे समय से अति विश्वास रखा।  अनेक बार चिल्लाते आए इंदौर नगर निगम सैकड़ो हजारों की भ्रष्टाचारियों का अड्डा बन गया लापरवाही का अड्डा बन गया पर जनता ने एक बार भी विरोध नहीं किया, क्या मिला मौत भी ढंग से नसीब नहीं हुई गंदा पानी पी के मौत मिली।  इंदौर के नागरिक होने के नाते मैं आप सबसे अनुरोध करता हूं कि आप इन सब लोगों को जगाए इनका विरोध करें इनकी ड्यूटी याद दिलाए इनके नागरिक कर्तव्य याद दिलाए और जो इन्हे नशा चढ़ा है उसे उतारे। बोलकर लिखकर आपस में चर्चा में हर जगह इन लोगों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की बातें करें और विरोध प्रकट करें जिम्मेदारों को कड़ी सजा मिले ताकि भविष्य में घटना फिर ना हो। अशोक मेहता, इंदौर (लेखक पत्रकार पर्यावरणविद्)  अपील – मृत आत्माओं के लिए कृपया अपने मत अनुसार शांति पाठ करें।

इंदौर में इलाज के दौरान 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत, मरने वालों की संख्या 15 तक पहुंची

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से शुक्रवार को एक और बुजुर्ग महिला की मौत की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही दूषित पानी से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 15 पर पहुंच गया है। जानकारी के मुताबिक बुजुर्ग महिला का अरविंदो अस्पताल में इलाज चल रहा था। गुरुवार को कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता मरीजों से मिलेंगे और उन्हें नारियल व अन्य जरूरत का सामान भी देंगे, लेकिन दूसरी ओर उन्हीं के समर्थक भागीरथपुरा में रहवासियों को समस्या बताने से भी रोक रहे हैं। मीडिया से बात करने पर उन्हें धमका रहे हैं कि समस्या का निराकरण हमसे चाहते हो या नहीं। गुरुवार को आकाश विजयवर्गीय पार्षद कमल वाघेला के कार्यालय पर पहुंचे। इस दौरान 25 दिसंबर को दूषित पानी के कारण मौत का शिकार हुए संतोष बिगोलिया के स्वजन उनसे मुलाकात करने के लिए पहुंचे। उन्होंने नईदुनिया अखबार की प्रति दिखाते हुए कहा कि हमारे परिवार के सदस्य की मौत दूषित पानी के कारण हुई है, लेकिन कोई मान नहीं रही है। इस पर उन्होंने प्रशासन की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता की मांग की। इसके बाद जब मीडिया मृतक के बेटे शुभम और बहू से चर्चा कर रही थी। 'आपकी समस्या का निराकरण हमसे चाहते हैं या मीडिया से' तभी भाजपा कार्यकर्ता चंदन सिंह बैस वहां आया और परिवार को कहने लगा कि आपकी समस्या का निराकरण हमसे चाहते हो या फिर मीडिया से। इसके अलावा कई ओर परिवार भी है, जिन्हें इसी प्रकार कहा जा रहा है। इससे साफ लगता है कि मामले को दबाने के लिए लोगों को बात करने से रोका जा रहा है। यह मामला चर्चाओं में बना हुआ है। छह माह के अव्यान के माता-पिता ने आर्थिक मदद लेने से इंकार किया भागीरथपुरा में गुरुवार को मंत्री विजयवर्गीय जब मृतकों के स्वजन से मिलने पहुंचे तो उन्हें रहवासियों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। मंत्री के अलावा उनके समर्थक जब आठ मृतकों के स्वजन को आर्थिक मदद के चेक देने पहुंचे तो छह माह के अव्यान के माता-पिता ने मदद लेने से इंकार कर दिया। अव्यान के गमगीन माता-पिता बोले कि हमारा बच्चा दस साल की मन्नत के बाद जन्मा था। अब हमें कोई आर्थिक मदद नहीं चाहिए। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री मृतिका उर्मिला यादव के घर पहुंचे तो उन्होंने सहायता राशि लेने से मना कर दिया और कहा कि नहीं चाहिए हमें कोई राशि। बाद में समझाइश के बाद उन्होंने ले ली। स्वजन ने बताया कि मृतिका के बेटे और बहू दोनों अभी अस्पताल में भर्ती है। वहीं, निधि यादव गोद में बच्चा लेकर पहुंची। उसने कहा कि मेरी 70 साल की सास सात दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी किडनी फेल हो गई है। उनको कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा? अस्पताल वाले स्लिप देकर पैसे मांग रहे हैं। हमारे पेट में दर्द है, फिर भी बच्चे लेकर दौड़ रहे हैं। मंत्री से मिलने गए तो उनके लोगों ने मिलने भी नहीं दिया। महिला को मंत्री से मिलने नहीं दिया।