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भू-जल संरक्षण के लिए रायपुर प्रशासन की नई पहल, वर्षा जल सहेजकर बढ़ाया जाएगा जल स्तर

रायपुर : वर्षा जल सहेजकर भू -जल स्तर बढ़ाने प्रशासन की अभिनव पहल मोर गांव,मोर पानी अभियान अंतर्गत 87 हजार से अधिक जल संचयन संरचनाएं निर्मित,राष्ट्रीय स्तर पर जिला तीसरे पायदान पर रायपुर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने और गिरते भू-जल स्तर को बचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई मुहिम अब धरातल पर बड़े सकारात्मक परिणाम दिखा रही है। बलौदाबाजार प्रशासन की दूरदर्शी सोच और जन-भागीदारी के समन्वय से जिले ने जल संचयन एवं संवर्धन के क्षेत्र में देश भर में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।     बलौदाबाजार जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए संचालित मोर गांव, मोर पानी अभियान 2.0 एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत अब तक जिले के 722 गांव,517 ग्राम पंचायत, 9 नगरीय क्षेत्र में 87137 जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें सोख्ता गड्ढे, चेक डैम, तालाबों का गहरीकरण और रूफ-टॉप हार्वेस्टिंग जैसे कार्य शामिल हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से बारिश के पानी को बहकर व्यर्थ जाने से रोककर सीधे जमीन के भीतर उतारा जा रहा है। प्रमुख जल संचयन संरचना निर्माण कार्य     कैच द रैन-जल शक्ति अभियान 2.0 जल शक्ति अभियान के तहत जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के कुल 87173 कार्यों का  जेएसए-सीटीआर पोर्टल में प्रविष्टि किया गया है। रैन वाटर हार्वेस्टिंग, सोक पीट 61831 कार्य,डबरी, कुंआ, तालाब, रिचार्ज पिट, डब्ल्यूएटी,एससीटी 7803 कार्य,जल संसाधन विभाग द्वारा एनीकट, स्टॉप डेम, डायवर्सन, जलाशय, नहर 21 कार्य,वन विभाग(कैम्पा) द्वारा एलबीसीडी, एससीटी, गाबिन, चेक डेम 15259 कार्य,कृषि विभाग द्वारा बोरवेल रिचार्ज,सोक पिट,ट्रेंच 1153 कार्य,अर्बन फंड द्वारा रैन वाटर हार्वेस्टिंग 1034 कार्य,सीएसआर मद द्वारा तालाब गहरीकरण, आरडब्ल्यूएच, ट्रेंच, चेक डेम 72 कार्य, अमृत सरोवर एवं नवीन तलब 51 शामिल है। राष्ट्रीय स्तर पर  उपलब्धि जल प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए  विभिन्न संरचना निर्माण में राष्ट्रीय स्टर पर जिला वर्तमान में जिला तीसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र के किसानों आम नागरिक एवं गांव में गठित जल संचय वाहनी क़ी  सक्रिय सहयोग का भी परिणाम है। इसके साथ ही जल संचय को जन आंदोलन का स्वरुप देकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। भू-जल स्तर में सुधार और कृषि को लाभ व्यापक स्तर पर बनी इन संरचनाओं के कारण क्षेत्र के भू-जल स्तर  में उल्लेखनीय सुधार होग़ा। इसका सीधा लाभ रबी और खरीफ दोनों फसलों के दौरान किसानों को मिलेगा। सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादकता में वृद्धि की उम्मीद है। प्रशासन का संकल्प जिला प्रशासन द्वारा जल संरक्षण की यह प्रक्रिया सतत रूप से जारी रहेगी। आगामी मानसून से पहले 1 लाख से अधिक संरचनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि जिले के प्रत्येक गांव को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

मोर गांव–मोर पानी अभियान से मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में जल संरक्षण हुआ सफल, बना मॉडल जिला

मोर गांव – मोर पानी महाअभियान से मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी बना जल संरक्षण का मॉडल जिला मनरेगा एवं विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को मिली नई मजबूती रायपुर राज्य शासन के “मोर गांव – मोर पानी” महाअभियान अंतर्गत मोहला-मानपुर- अम्बागढ़ चौकी जिले ने जल संरक्षण एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) तथा विभिन्न योजनाओं के प्रभावी अभिसरण से जिले में जल संवर्धन, भू-जल स्तर सुधार और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में व्यापक कार्य किए गए हैं।   जिले में बनीं 17 सौ से अधिक आजीविका डबरी           “जल संरक्षण हमारी जिम्मेदारी” की थीम पर संचालित इस अभियान के तहत जिले में 1700 से अधिक आजीविका डबरी का निर्माण किया गया। प्रत्येक पंचायत में औसतन 9 डबरी विकसित कर जल संरक्षण को आजीविका संवर्धन से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया गया है। सामुदायिक सहभागिता और जिला प्रशासन के सतत प्रयासों से यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। पीएम आवासों में बने 2541 सोखता गड्ढे, 87 तलाबों का नवीनीकरण          वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को प्रेरित कर 2541 सोख्ता गड्ढे  का निर्माण कराया गया। इसके अलावा श्रमदान एवं जनसहभागिता से 175 बोरी बंधान, 3600 कंटूर ट्रेंच तथा 87 तालाबों का नवीनीकरण कर जल संरक्षण संरचनाओं को मजबूत किया गया। अभियान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए जिले में रैली, कलश यात्रा, शपथ एवं दीपदान जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।   जल स्तर में 2.19 मीटर की हुई वृद्धि         जलदूत ऐप से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जिले में भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। प्री मानसून 2024 की तुलना में प्री मानसून 2025 में जल स्तर में 1.81 मीटर तथा पोस्ट मानसून 2024 की तुलना में पोस्ट मानसून 2025 में 2.19 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़े अभियान की प्रभावशीलता और जिले में किए गए जल संरक्षण कार्यों की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।   जिले के तीन विकासखण्ड अब सेफ कैटेगरी में          अभियान के सकारात्मक परिणामों के फलस्वरूप ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिसूचना दिनांक 23 सितम्बर 2025 के अनुसार जिले के तीनों विकासखंड, जो पूर्व में सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में शामिल थे, अब “सेफ ब्लॉक” की श्रेणी में वर्गीकृत किए गए हैं। यह उपलब्धि मोहला-मानपुर- अम्बागढ़ चौकी जिले में सामूहिक प्रयास, जनसहभागिता और प्रभावी जल प्रबंधन की एक प्रेरणादायी मिसाल बनकर उभरी है।

दिल्ली के द्वारका में तीन बच्चों की मौत, गोल्फ कोर्स तालाब में डूबने से हुआ हादसा

नईदिल्ली  राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ है। द्वारका के सेक्‍टर 24 गोल्फ कोर्स डीडीए के तालाब में डूबने से तीन बच्चों की मौत हो गई। इस मामले की सूचना दमकल को सुबह 7:07 बजे मिली। घटना के बाद से इलाके में कोहराम मचा हुआ है। 8 से 10 साल के बीच थी बच्चो की उम्र पुलिस के अनुसार, द्वारका के सेक्टर 23 पुलिस स्टेशन में सुबह लगभग 7:07 बजे एक पीसीआर कॉल आई, जिसमें गोल्फ कोर्स परिसर में स्थित एक तालाब में तीन बच्चों के डूबने की जानकारी दी गई थी। इसपर तुरंत कार्रवाई करते हुए, स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) पुलिस कर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अन्य आपातकालीन एजेंसियों को भी तत्काल सूचित किया गया। मौके पर पहुंचने पर अधिकारियों ने तालाब में डूबे हुए 8 से 10 वर्ष की आयु के तीन बच्चों को पाया। दमकल कर्मियों की सहायता से तीनों को पानी से बाहर निकाला गया। हालांकि, उन्हें घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया गया। तालाब में नहाने गए थे बच्चे प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि बच्चे शाम को देर से चारदीवारी फांदकर परिसर में दाखिल हुए होंगे। उनके कपड़े तालाब के बाहर मिले, जिससे पुलिस को संदेह है कि वे वहां नहाने गए थे और गलती से डूब गए। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि विस्तृत जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकलेगा। बच्चों की पहचान में जुटी पुलिस बच्चों की पहचान का काम फिलहाल जारी है, और इस रिपोर्ट को लिखे जाने तक उनके विवरण से मेल खाने वाली किसी भी गुमशुदा व्यक्ति की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस ने मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है।

रेगाकठेरा जलाशय योजना के कार्यों के लिए 2.07 करोड़ रूपए स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखण्ड-अम्बागढ़ चौकी की रेगाकठेरा जलाशय जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 2 करोड़ 7 लाख 82 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने के उपरांत रूपांकित सिंचाई क्षमता 80 हेक्टेयर के विरुद्ध 60 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्य अभियंता महानदी गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग रायपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

भीषण गर्मी में ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत: भरतपुर के कई गाँवों में खराब हैंडपंप हुए दुरुस्त

भीषण गर्मी में ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत: भरतपुर के कई गाँवों में खराब हैंडपंप हुए दुरुस्त मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और गहराते जल संकट के बीच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) ने पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए कमर कस ली है। प्रशासन की सक्रियता से ग्रामीण क्षेत्रों में बंद पड़े हैंडपंपों को युद्ध स्तर पर सुधारा जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। इन गाँवों में हुआ त्वरित सुधार विभागीय टीम ने हाल ही में विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत घाघरा, बेला और लरकोडा का दौरा किया। यहाँ लंबे समय से खराब और बंद पड़े हैंडपंपों का न केवल निरीक्षण किया गया, बल्कि मौके पर ही उनकी मरम्मत कर उन्हें दोबारा चालू किया गया। प्राथमिकता पर पेयजल आपूर्ति भीषण गर्मी की तीव्रता को देखते हुए प्रशासन ने खराब हैंडपंपों को प्राथमिकता के आधार पर सुधारने के निर्देश दिए है। (PHE) विभाग की इस मुस्तैदी से ग्रामीणों को अब स्वच्छ पेयजल के लिए दूर नहीं भटकना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की इस संवेदनशीलता और तत्परता की सराहना की है। जिलेभर में अभियान जारी प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जिले के अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी हैंडपंप सुधार का कार्य निरंतर प्रगति पर है। विभाग का लक्ष्य है कि इस भीषण तपिश में किसी भी ग्रामीण को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े।

इंदौर में जलसंकट बढ़ा, गर्मी के चलते निर्माण कार्य और सर्विस स्टेशनों में बोरिंग और नर्मदा जल का उपयोग

इंदौर  इंदौर में जैसे-जैसे गर्मी के तेवर तेज हो रहे हैं, शहर में जलसंकट भी गहराता जा रहा है। स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने 100 से अधिक टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की है। इसके साथ ही शुक्रवार से निर्माण कार्यों और सर्विस स्टेशनों पर बोरिंग व नर्मदा जल के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। इन कार्यों के लिए अब संचालकों को केवल ट्रीटेड पानी का उपयोग करना होगा। नगर निगम ने मध्य प्रदेश नगर पालिक अधिनियम की उपविधियों का हवाला देते हुए यह प्रतिबंध 30 जून तक लागू किया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्देशों का उल्लंघन किया गया, तो संबंधित बोरिंगों का अधिग्रहण करने के साथ ऑटोमोबाइल सेंटरों को सील भी किया जाएगा।नगर निगम के अनुसार, शहर के 35 स्थानों पर ट्रीटेड वॉटर के हाइड्रेंट स्थापित किए गए हैं, जहां से पानी लेकर निर्माण कार्यों में तराई के लिए उपयोग किया जा सकता है।  शहर में निजी और सार्वजनिक बोरिंगों की संख्या एक लाख से अधिक है। हर साल गर्मी बढ़ते ही कई बोरिंग सूख जाते हैं या उनकी जल क्षमता घट जाती है। इसके चलते कई रहवासियों को निजी टैंकरों से पानी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वाटर रिचार्जिंग अनिवार्य जलसंकट से निपटने के लिए नगर निगम ने रहवासी, बाजार और औद्योगिक क्षेत्रों में वाटर रिचार्जिंग को अनिवार्य कर दिया है। भवन निर्माताओं को जून तक रिचार्जिंग व्यवस्था करने का समय दिया गया है। इसके बाद निगम अभियान चलाकर स्थिति की समीक्षा करेगा। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा।   जलूद से रोजाना 500 एमएलडी पानी की आपूर्ति इंदौर को जलूद से प्रतिदिन 500 एमएलडी पानी मिलता है, जिससे शहर की 40 से अधिक टंकियां भरी जाती हैं। इसके अलावा 35 एमएलडी पानी यशवंत सागर से प्राप्त होता है। वहीं बोरिंगों से करीब 30 एमएलडी पानी का उपयोग किया जाता है हालांकि, गर्मी के दौरान बोरिंगों और यशवंत सागर से पानी की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ जाता है।

जल संकट पर प्रशासन का बड़ा प्रहार: गोदरीपारा में टैंकरों से राहत, 16 नई टंकियों से स्थायी समाधान की तैयारी

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी गोदरीपारा में पेयजल संकट को लेकर हुए चक्का जाम के बाद आखिरकार प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। अब न केवल त्वरित राहत दी जा रही है, बल्कि स्थायी समाधान की दिशा में भी तेज़ी से कदम उठाए जा रहे हैं। नगर पालिक निगम चिरमिरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में 14 टैंकरों के माध्यम से नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिससे लोगों को तत्काल राहत मिल रही है। अमृत मिशन 2.0 बनेगा गेम चेंजर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अमृत मिशन 2.0 के तहत घर-घर नल कनेक्शन देने का कार्य तेज़ी से जारी है। इसके साथ ही जल आपूर्ति प्रणाली को मजबूत करने और पाइपलाइन विस्तार पर विशेष फोकस किया जा रहा है। पाइपलाइन विस्तार से बढ़ेगी पहुंच 15वें वित्त आयोग की राशि से गोदरीपारा, डोमनहिल और बरतुंगा क्षेत्रों में पाइपलाइन विस्तार का काम तेजी से चल रहा है। वार्ड क्रमांक 26, 27, 30, 31, 32, 33, 34 और 35 में लगभग 100 मीटर नई पाइपलाइन जोड़कर बड़ाबाजार पानी टंकी से कनेक्शन दिया गया है, जिससे एसईसीएल कॉलोनी सहित आसपास के इलाकों में जल आपूर्ति बहाल हो रही है। गर्मी में राहत: टैंकरों की सतत सेवा भीषण गर्मी और गिरते जल स्तर के कारण उत्पन्न अस्थायी संकट को देखते हुए नगर निगम और एसईसीएल प्रबंधन के समन्वय से 14 टैंकरों द्वारा नियमित सप्लाई की जा रही है, ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। 15 दिन में कनेक्शन, सप्ताह में दो दिन पानी जन जागरण संघर्ष समिति की मांगों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि 15 दिनों के भीतर पाइपलाइन कनेक्शन पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही, सप्ताह में कम से कम दो दिन नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। 16 नई टंकियां बदलेंगी तस्वीर दीर्घकालिक समाधान के तहत अमृत मिशन 2.0 के अंतर्गत 16 नई पानी टंकियों के निर्माण के लिए स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं। योजना के पूर्ण होते ही क्षेत्र में जल संकट पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद है। प्रशासन का आश्वासन प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में कहीं भी जल संकट उत्पन्न होने पर तत्काल टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए नगर निगम और एसईसीएल के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया गया है। कुल मिलाकर, गोदरीपारा में जल संकट अब केवल अस्थायी राहत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल्द ही स्थायी समाधान की दिशा में एक बड़ी तस्वीर सामने आने वाली है।

एमसीबी : भीषण गर्मी में राहतरू बंद हैंडपंप चालू, गांवों में लौटी पानी की उम्मीद

एमसीबी : भीषण गर्मी में राहतरू बंद हैंडपंप चालू, गांवों में लौटी पानी की उम्मीद PHE की मुहिम से ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत, जल संकट में आई कमी एमसीबी जिले में भीषण गर्मी और बढ़ते जल संकट के बीच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की पहल ग्रामीणों के लिए राहत लेकर आई है। विभाग द्वारा बंद पड़े हैंडपंपों की मरम्मत और संधारण कार्य तेज़ी से किया जा रहा है, जिससे गांवों में पेयजल की उपलब्धता फिर से सुनिश्चित हो रही है। गर्मी के इस कठिन दौर में पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए विभाग की टीम लगातार गांव-गांव पहुंचकर खराब हैंडपंपों को सुधार रही है। इसी क्रम में विकासखंड खड़गवां के ग्राम पंचायत सलका के स्कूल पारा में लंबे समय से खराब पड़े हैंडपंप को ठीक कर पुनः चालू किया गया। पानी मिलते ही खिले ग्रामीणों के चेहरे हैंडपंप के चालू होते ही पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से लोगों के चेहरे पर खुशी लौट आई और दैनिक जीवन भी सुगम हुआ। संवेदनशील प्रशासन, त्वरित समाधान विभाग की त्वरित और सक्रिय कार्यप्रणाली यह दर्शाती है कि प्रशासन आमजन की मूलभूत आवश्यकताओं को लेकर पूरी तरह सजग है। समय पर किए जा रहे ये प्रयास न केवल जल संकट को कम कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों के जीवन को भी आसान बना रहे हैं।

इंदौर में जल संकट: नए बोरिंग की अनुमति पर रोक, घोषित किया जल अभावग्रस्त

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में बढ़ती गर्मी के बीच जल संकट के हालात गंभीर होते जा रहे हैं। तालाबों का जलस्तर घटने और भूजल तेजी से नीचे जाने के कारण प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए शहर में नए बोरिंग कराने पर रोक लगा दी है। शहर में गर्मी के चलते तालाबों का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। इसका सीधा असर आसपास के क्षेत्रों के भूजल स्तर पर भी पड़ रहा है। कई बोरिंग में पानी कम हो चुका है, जिससे जल संकट की स्थिति बन रही है। प्रशासन ने 30 जून 2026 तक शहर में नए बोरिंग कराने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।  इंदौर को घोषित किया गया जल अभावग्रस्त क्षेत्र इंदौर के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया गया है। यह फैसला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (जलप्रदाय) नगर निगम की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। रिपोर्ट में क्या कहा गया रिपोर्ट के अनुसार, शहर में भूजल स्रोतों का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे जलस्तर तेजी से गिर रहा है। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले समय में जल संकट और गहरा सकता है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 और संशोधन अधिनियम 2002 के तहत पूरे जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। अधिनियम की धारा 6(1) के अंतर्गत जिले में निजी और अशासकीय नलकूप खनन (बोरिंग) पर 30 जून 2026 तक प्रतिबंध लगाया गया है।  अवैध बोरिंग पर सख्त कार्रवाई ऐसी बोरिंग मशीनें जो प्रतिबंध के बावजूद जिले में प्रवेश करेंगी या बोरिंग करने का प्रयास करेंगी, उन्हें जब्त किया जाएगा और संबंधित थाना क्षेत्र में एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर 2 हजार रुपये का जुर्माना और दो साल तक की सजा या दोनों का प्रावधान है। यह आदेश सरकारी योजनाओं के तहत होने वाले नलकूप उत्खनन पर लागू नहीं होगा। यदि जल संकट और बढ़ता है, तो प्रशासन धारा-4 के तहत निजी बोरिंग का अधिग्रहण भी कर सकता है।

हरियाणा में बीएसएल से पानी की सप्लाई रुकी, सरकार ने BBMB से मांगा जवाब, गेज रीडिंग 4 मार्च से जीरो

चंडीगढ़  हरियाणा को बीस-सतलुज लिंक (BSL) से 4 मार्च 2026 से लगातार पानी की सप्लाई नहीं मिल रही है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता ने इस संबंध में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को लेटर लिखकर कारण बताने और तुरंत पानी छोड़ने की मांग की है। विभाग के अनुसार 4 मार्च से अब तक गेज रीडिंग शून्य दर्ज की गई है, जिससे स्पष्ट है कि हरियाणा को इस अवधि में BSL के माध्यम से कोई पानी नहीं मिला। लेटर में कहा गया है कि BSL सिस्टम से पानी का प्रवाह पूरी तरह बंद रहने के कारण हरियाणा को अपने हिस्से से कम पानी मिल रहा है। राज्य की जल आपूर्ति काफी हद तक ब्यास और सतलुज नदियों पर निर्भर है, इसलिए पानी की उपलब्धता में कमी का सीधा असर राज्य की जरूरतों और दिल्ली-एनसीआर की सप्लाई पर पड़ सकता है। बन सकती है गंभीर स्थिति विभाग ने यह भी उल्लेख किया है कि SYL के योगदान न होने के कारण हरियाणा मौजूदा सिस्टम से केवल 1.62 MAF पानी ही वहन कर पा रहा है। ऐसे में पानी की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कटौती राज्य के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। अंत में BBMB से आग्रह किया गया है कि हरियाणा को उसका निर्धारित हिस्सा तत्काल जारी किया जाए और BSL सुंदर नगर के माध्यम से पानी की सप्लाई शून्य स्तर तक कम न होने दी जाए। 4 मार्च से सप्लाई बंद लेटर में लिखा है कि 4 मार्च 2026 से BSL से हरियाणा को पानी की सप्लाई बंद है। लगातार गेज रीडिंग शून्य दर्ज की जा रही है। सिंचाई विभाग ने BBMB से इसको लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। राज्य को अपने हिस्से से कम पानी मिलने की आशंका जताई गई है। दरअसल, हरियाणा ब्यास और सतलुज के पानी पर काफी निर्भर है। SYL नहीं बनने से क्षमता पहले ही सीमित है। पानी की कमी का असर दिल्ली-NCR सप्लाई पर भी पड़ सकता है बीबीएमबी की ओर से ये दिया गया तर्क वहीं, सूत्रों के अनुसार, बीएसएल के माध्यम से कम जल प्रवाह का कारण डायवर्जन प्रणाली के एक महत्वपूर्ण कंपोनेंट, देहर पावर हाउस में तकनीकी दिक्कतें हैं। देहर परियोजना में छह टरबाइनों में से केवल दो ही वर्तमान में चालू हैं, जिससे ब्यास बेसिन से सतलुज में जल का स्थानांतरण काफी हद तक सीमित हो गया है। बीबीएमबी ने इस समस्या का कारण पुरानी अवसंरचना को बताया है और कहा कि चार दशक से अधिक पुराने देहर पावर हाउस को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। CEA को लेटर लिख चुका बीबीएमबी अधिकारियों ने बताया कि बीबीएमबी ने टर्बाइनों के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के लिए परामर्श सेवाएं प्रदान करने हेतु केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) से पहले ही संपर्क कर लिया है। मरम्मत और जीर्णोद्धार प्रक्रिया में समय लगने की संभावना है, जिसके दौरान विद्युत प्रवाह को मोड़ने की क्षमता सीमित रह सकती है।