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इंदौर के बोरिंग पानी में फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा 350 से ज्यादा, हैजा और टाइफाइड के खतरे का अलर्ट

इंदौर इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब एक और डराने वाली सच्चाई सामने आई है. शहर के भागीरथपुरा इलाके में अंडरग्राउंड यानी बोरिंग के पानी में गंभीर प्रदूषण की पुष्टि हुई है. रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि यहां का बोरवेल पानी पीने लायक नहीं है और लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन चुका है. जांच रिपोर्ट में क्या निकला पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए भागीरथपुरा इलाके की कुल 60 बोरिंग से सैंपल लिए गए थे. जांच में सामने आया कि इनमें से 35 सैंपल पूरी तरह फेल हो गए. सबसे गंभीर बात यह है कि बोरिंग के पानी में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया है, जो सीधे तौर पर मल-मूत्र से जुड़ा बैक्टीरिया होता है. मानकों के अनुसार पीने के पानी में फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा 0 प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन जांच में अलग-अलग बोरिंग के पानी में यह मात्रा 84 से लेकर 350 के पार तक पाई गई. कितनी खतरनाक है यह स्थिति फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया को बेहद खतरनाक माना जाता है. मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक यह बैक्टीरिया हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-A जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. खासतौर पर बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए यह पानी जानलेवा साबित हो सकता है. नर्मदा के पानी तक फैल रहा प्रदूषण रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भागीरथपुरा की बोरिंग का दूषित पानी नर्मदा के पानी को भी प्रभावित कर रहा था. यानी समस्या सिर्फ अंडरग्राउंड वॉटर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर शहर की मुख्य जल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है. इलाके में सैकड़ों बोरिंग, खतरा और बड़ा भागीरथपुरा क्षेत्र में 500 से ज्यादा सरकारी और निजी बोरिंग मौजूद हैं. जनवरी के पहले सप्ताह में आई इस रिपोर्ट ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है. सवाल यह है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो इंदौर में पानी से जुड़ा यह संकट और कितना बड़ा रूप ले सकता है. वॉटर एक्सपर्ट का कहना है कि बोरिंग के पानी की नियमित जांच, सीवेज सिस्टम की मरम्मत और दूषित बोरिंग को तत्काल बंद करना बेहद जरूरी है. वरना इंदौर में पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा और गहराता जाएगा.

भोपाल प्रशासन की नई पहल: घर-घर पानी कनेक्शन और स्मार्ट मीटर, शादी पंजीकरण शुल्क अब सिर्फ 130 रुपए

भोपाल   नवविवाहित जोड़ों के लिए नए साल में भोपाल नगर निगम बड़ी राहत और खुशखबरी लेकर आया है। अब विवाह पंजीयन यानी मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना न सिर्फ आसान होगा, बल्कि बेहद सस्ता भी। नगर निगम ने मैरिज सर्टिफिकेट की फीस में भारी कटौती का प्रस्ताव तैयार कर मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) के समक्ष रखा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही नवदंपत्तियों को मैरिज सर्टिफिकेट के लिए अब 1100 रुपये की जगह मात्र 130 रुपये ही चुकाने होंगे। सबसे खास कुल 829 कॉलोनियों में पानी के बल्क कनेक्शन से व्यक्तिगत कनेक्शन मिलेंगे। इन दोनों बड़े फैसलों को 2 जनवरी को हुई मेयर इन कौंसिल (एमआईसी) की मीटिंग में मंजूरी मिल गई। अब 13 जनवरी को होने वाली निगम परिषद की बैठक में इन्हें रखा जाएगा। मैरिज रजिस्ट्रेशन फीस में 3900 रुपए की कटौती निगम के मुताबिक, अब तक निर्धारित शुल्क 1100 रुपए है। विलंब शुल्क 500 रुपए प्रति वर्ष और अधिकतम विलंब शुल्क 5 हजार रुपए लिया जाता था। प्रस्ताव पास होने के बाद रजिस्ट्रेशन फीस 130 रुपए लगेगी। ये राशि 30 दिन के अंदर आवेदन करने पर देना होगी। यदि 30 दिन के बाद आवेदन किया तो 1100 रुपए लगेंगे। यानी, पहले अधिकतम राशि 5 हजार रुपए थी, उसमें 3900 रुपए की कटौती की जा रही है। पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन नगर निगम में मैरिज सर्टिफिकेट के लिए 16 प्रकार की जानकारियों के साथ आवेदन करना होता है। अभी ऑनलाइन सुविधा होने के बावजूद अधिकांश लोग निगम कार्यालय जाकर आवेदन करते हैं। इसे देखते हुए निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने निर्देश दिए हैं कि अब सभी आवेदन अनिवार्य रूप से ऑनलाइन लिए जाएंगे और प्रमाण पत्र भी ऑनलाइन ही जारी किए जाएंगे। वार्ड कार्यालय से मिलेगा मैरिज सर्टिफिकेट विवाह पंजीयन प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए इसे विकेंद्रीकृत किया जा रहा है। अब सिर्फ एक केंद्र के बजाय नगर निगम के सभी 85 वार्ड कार्यालयों से मैरिज सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे। ऑनलाइन आवेदन करने पर संबंधित वार्ड कार्यालय की टीम घर जाकर सत्यापन करेगी। इससे नवदंपत्तियों को माता मंदिर स्थित विवाह पंजीयन शाखा के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नगर निगम की इस पहल को नए साल में आम नागरिकों के लिए बड़ी सुविधा और राहत के रूप में देखा जा रहा है। एमआईसी की मुहर के बाद लागू होगा नया नियम वर्तमान व्यवस्था में विवाह के एक साल बाद आवेदन करने पर 500 रुपये अतिरिक्त लेट फीस देनी पड़ती है। नए प्रस्ताव के अनुसार, यदि विवाह के एक महीने के भीतर आवेदन किया जाता है तो शुल्क सिर्फ 130 रुपये रहेगा। वहीं, एक महीने के बाद आवेदन करने पर अधिकतम 500 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। इस तरह किसी भी स्थिति में कुल शुल्क 630 रुपये से अधिक नहीं होगा।  होने वाली एमआईसी बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। व्यक्तिगत कनेक्शन पर 'शहर सरकार' का बड़ा फैसला एमआईसी में मंजूरी के बाद यदि परिषद की बैठक में व्यक्तिगत कनेक्शन का प्रस्ताव पास होता है तो यह शहर सरकार का बड़ा फैसला होगा। निगम चुनाव के दौरान बीजेपी ने इसे लेकर वादा किया था। वहीं, समय-समय पर सांसद-विधायक भी ये मांग उठा चुके हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार मांग करती आ रही है। ताकि, आम लोगों को फायदा मिल सके। कई बैठकों में यह मुद्दा उठ चुका है। बता दें कि बल्क कनेक्शन का मुद्दा कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी उठ चुका है। खासकर होशंगाबाद रोड की कॉलोनियों में बल्क कनेक्शन की बाध्यता होने से लोग कनेक्शन नहीं ले पा रहे हैं। लोग मांग उठा रहे हैं कि उन्हें सिंगल यानी व्यक्तिगत कनेक्शन दिए जाए। इससे बेवजह का बोझ नहीं पड़ेगा। यही प्रस्ताव अब 13 जनवरी की बैठक में आने वाला है। इसे लेकर जल कार्य अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट भी महापौर मालती राय को सौंप दी है। व्यक्तिगत कनेक्शन व्यवस्था लागू करने पर इतना खर्च भोपाल शहर में कुल 1566 कॉलोनियों हैं। जिनमें से 829 कॉलोनियां ऐसी हैं, जिनमें नगर निगम बल्क कनेक्शन के माध्यम से जलप्रदाय करता है। इन कॉलोनियों में व्यक्तिगत कनेक्शन के माध्यम से जल उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। यदि इन कॉलोनियों में नगर निगम संचालन करता है तो वाल्वमैन, ऑपरेटर, सुपरवाइजर, पाइपलाइन बिछाये जाने और इंटर कनेक्शन किए जाने पर कुल 801 करोड़ रुपए खर्च आएगा। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी बन गई है। इन कॉलोनियों के 74 हजार 905 घरों में स्मार्ट मीटर के माध्यम से जल उपलब्ध कराने पर प्रति आवास 9709 रुपए का खर्च होगा। कुल राशि 72.73 करोड़ रुपए खर्च आएगा। स्मार्ट मीटर लगाने सहित कुल व्यय राशि 874.43 करोड़ रुपए होगी। इनमें जलप्रदाय के संधारण/संचालन के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से कॉलोनी वासियों द्वारा कार्य कराया जा सकता है। जिसके लिए बल्क कनेक्शन का निर्धारित शुल्क 17 रुपए प्रति हजार लीटर नगर निगम को एजेंसी द्वारा दिया जाएगा। अतिरिक्त राशि एजेंसी द्वारा संबंधित कॉलोनी से ली जाएगी। इन कॉलोनियों में व्यक्तिगत कनेक्शन लिए जाने के लिए लोगों की सहमति जरूरी है। 70 प्रतिशत से अधिक सहमति प्राप्त होने पर ही व्यक्तिगत कनेक्शन प्रदान करने की कार्रवाई होगी। इन कॉलोनियों में प्रथम आओ प्रथम पाओ पद्धति के आधार पर व्यक्तिगत कनेक्शन प्रदान करने की प्रक्रिया की जा सकेगी। भोपाल में 2.30 लाख से ज्यादा कनेक्शन भोपाल में दो लाख 30 हजार से ज्यादा नल कनेक्शन हैं। इसके जरिए नगर निगम घर-घर तक सुबह और शाम पानी पहुंचाता है। इनमें बल्क कनेक्शन भी शामिल हैं। बल्क कनेक्शन की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए वे बल्क की जगह व्यक्तिगत यानी सिंगल कनेक्शन की मांग उठा रहे हैं। बहुत सारे उपभोक्ताओं को मिलाकर निगम बल्क कनेक्शन दे रहा है। इसमें कई व्यावहारिक दिक्कतें भी लोगों के सामने आ रही हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि व्यक्तिगत कनेक्शन मिलें। इससे लोग अपने हिसाब से कनेक्शन ले लेंगे और उन्हें ज्यादा कीमत भी नहीं चुकाना पड़ेगी। कांग्रेस भी चाहती है कि बाध्यता हटे बल्क के स्थान पर व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन दिए जाने के लिए कांग्रेस भी मुद्दा उठा रही थी। पिछली दो मीटिंगों में कांग्रेस पार्षद हंगामा भी कर चुके हैं। अमृत 2.0 से जुड़ा तीसरा प्रस्ताव एजेंडे में जो तीसरा प्रस्ताव शामिल हैं, वह अमृत 2.0 से संबंधित … Read more

इंदौर में दूषित पानी से 17 मौतें, MP में 211 नदियां और 353 जल स्रोत दूषित, इको सिस्टम बिगड़ने की चिंता

भोपाल  मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पानी से 17 लोगों की असमय मौत और 1400 से ज्यादा लोगों में दूषित पानी के बेक्टीरिया पाए जाने के मामले ने देश के सबसे स्वच्छ शहर की पेयजल गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही नहीं, सामने आई इस गंभीर लापरवाही ने प्रदेशभर के हालातों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। ऐसे में आनन फानन में जांच पड़ताल शुरु हुई है, जिसमें बेहद चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। दरअसल, पेयजल आपूर्ति में बड़ा योगदान नदियों और जलाशयों को माना जाता है। लेकिन, गंभीर चिंतन की बात ये है कि, इन्हीं नदियों और जलाशयों में उद्योगों का रसायनयुक्त पानी मिलने से आम लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। हालिया खुलासे के अनुसार, राज्य में 2,515 उद्योग ऐसे हैं, जो जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं। इन उद्योगों ने प्रदूषित जल के ट्रीटमेंट के भी कोई उपाय नहीं किए और दूषित जल सीधे जल स्रोतों में छोड़ दिए। ऐसे लाल (रेड) केटेगिरीके उद्योगों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक का कोई बस नहीं चल पा रहा है। अनियंत्रित प्रदूषण और नियमों की अनदेखी आपको बता दें, उद्योगों की स्थापना और संचालन के लिए जल प्रदूषण नियंत्रण समेत अन्य पर्यावरण संबंधी अनुमतियां जरूरी होती हैं। प्रदेश में चल रहे 5,961 उद्योगों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से समेकित सहमति और प्राधिकरण (कंसोलिडेटेड कंसेंट एंड अथाराइजेशन-सीसीए) रिन्युएशन ही नहीं कराया है। ये अनियंत्रित प्रदूषण फैला रहे हैं, इनसे निकलने वाला अपशिष्ट नदियों का जल तक जहरीला कर रहा है। इनके अपशिष्ट से नदियों का इको सिस्टम बिगाड़ रहे हैं। CCA रिनिवल न कराने वाले उद्योगों की जानकारी -लाल (Red) कैटेगरी के उद्योग: कुल 2,515 उद्योग (इनमें 2,311 लघु, 153 मध्यम और 51 वृहद उद्योग शामिल हैं)। -नारंगी (Orange) कैटेगरी के उद्योग: कुल 1,398 उद्योग (इनमें 1,295 लघु, 80 मध्यम और 23 वृहद उद्योग शामिल हैं)। -हरा (Green) कैटेगरी के उद्योग: कुल 2,048 उद्योग (इनमें 2,022 लघु, 20 मध्यम और 6 वृहद उद्योग शामिल हैं)। -कुल अनियंत्रित उद्योग: इस तरह प्रदेश में कुल 5,961 उद्योगों ने अपना जरूरी रिनिवल ही नहीं कराया है। अमृत मित्र और प्रदूषित जल स्रोत हालात ये हैं कि, प्रदेशभर में 7 हजार अमृत मित्र हैं, फिर भी यहां 305 नदियां, तालाब और जलाशय प्रदूषण की चपेट में हैं। मध्य प्रदेश में 7 हजार अमृत मित्र जल गुणवत्ता परीक्षण का कार्य कर रहे हैं। इसके लिए भारत सरकार द्वारा अमृत 2.0 योजना के तहत 3.70 करोड़ रुपए बजट प्रदेश को दिया गया और अमृत मित्र अंतर्गत 184 परियोजनाएं भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की गई हैं। इसके बावजूद यहां 305 नदियां, तालाब और जलाशय प्रदूषण की चपेट में हैं। योजनाओं पर करोड़ों खर्च प्रदेश में अमृत मित्र योजना के अंतर्गत जल गुणवत्ता परीक्षण की 55 परियोजनाएं, हरित क्षेत्र की 10 परियोजनाएं, अर्बन फारेस्ट्री में 501 परियोजनाएं बनाई गई हैं। इनमें से 184 परियोजनाएं भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की जा चुकी हैं, शेष 317 परियोजनाएं भारत सरकार की समीक्षा में हैं। राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम में एमपी के चिह्नित दूषित स्रोत -नदियां: 211 -झीलें: 20 -तालाब: 11 -टैंक: 01 -भूजल स्रोत: 353 -जलाशय: 08 क्या कहता है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड? मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव अचुत्य ए. मिश्रा का कहना है कि, प्रदेश में रेड (लाल) श्रेणी के उद्योग प्रदूषणकारी हैं। समय-समय पर इनकी मानीटरिंग की जाती है। इनसे निकलने वाला अपशिष्ट नदियों के जल को प्रदूषित करता है। हालांकि कुछ उद्योगों में रियल टाइम मानीटरिंग सिस्टम भी लगाए गए हैं, लेकिन कुछ उद्योग ऐसे भी है जो अधिक प्रदूषणकारी हैं, उन्हें नोटिस देकर कार्रवाई भी की जाती है।

हाईकोर्ट ने इंदौर में हुई मौतों पर सरकार को दी फटकार, भागीरथपुरा में 38 नए मरीज मिले

 इंदौर   मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और बीमारी के मामले में बेहद तल्ख टिप्पणी (MP High Court on Indore Water Crisis) की है। एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मामले की सुनवाई चल रही है जिसमें कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में ऐसा हो रहा, बहुत दुखद है। देश ही नहीं विदेश तक में शहर की छवि बिगड़ी है। देश का नाम खराब हो रहा है। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से पैदा हुआ स्वास्थ्य संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। दूषित पानी ने अब तक 17 लोगों की जान ले ली है और 110 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। यह केवल बीमारी नहीं, बल्कि प्रशासन और न्याय की चुनौती भी बन चुका है। हर दिन नए मरीज सामने आ रहे हैं, हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है और प्रशासन राहत पहुंचाने में जुटा है। क्या इंदौर के लोग अब सुरक्षित पानी की उम्मीद कर पाएंगे, यह सवाल सभी के सिर पर मंडरा रहा है।  इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल से हुई मौतों को लेकर मंगलवार (6 जनवरी) को एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि इस घटना ने शहर की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है. कोर्ट ने कहा कि पीने का पानी ही अगर दूषित हो तो यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है। हम इस मामले में मुख्य सचिव को सुनना चाहते हैं, क्योंकि यह समस्या सिर्फ शहर के एक हिस्से तक सीमित नहीं है। दरअसल, पूरे इंदौर शहर का पीने का पानी सुरक्षित नहीं है। खास बात यह की कोर्ट ने अगली सुनवाई में मध्य प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी को वर्चुअली हाजिर होने को कहा है। अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी बता दें, दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अस्पतालों में 110 मरीज भर्ती हैं। अब तक कुल 421 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है। इनमें से 311 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। आईसीयू में 15 मरीजों का इलाज चल रहा है। तीसरी जनहित याचिका, जिम्मेदारी तय करने की मांग मामले में दायर तीसरी जनहित याचिका भी हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। भागीरथपुरा जैसा स्वास्थ्य संकट मप्र में पहली बार बता दें इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल संकट बना हुआ है। उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं। अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अस्पतालों में 110 मरीज भर्ती हैं। 15 का आइसीयू में इलाज चल रहा है। इस बीच, भोपाल से इंदौर पहुंची स्टेट इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (एसआइडीएसपी) टीम के प्रमुख डा. भागवत भार्गव ने कहा कि भागीरथपुरा जैसा स्वास्थ्य संकट मध्य प्रदेश में पहली बार सामने आया है। उन्होंने बताया कि इतने कम समय में, इतने सीमित क्षेत्र में बड़ी संख्या में मरीजों का सामने आना और महामारी (एपिडेमिक) जैसी स्थिति बनना बेहद असाधारण और चिंताजनक है। कांग्रेस का प्रदर्शन नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित 10 कांग्रेस नेताओं को भागीरथपुरा में जाने की अनुमति मिल गई है। ये सभी बाइक से क्षेत्र का दौरा करेंगे। इसके अलावा कांग्रेस ने शाम को कैंडल मार्च और हर वार्ड में रैली निकालने की घोषणा की है। उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं। इनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर किया गया है। आखिरकार इन्दौर प्रशासन ने 17 मौतें मानी भागीरथपुरा (Bhagirathpura) सहित प्रभावित क्षेत्रों में 17 मौतों को स्वीकारते हुए प्रशासन (administration)  ने सभी मृतकों के परिजनों (Finally) को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान कर दी।  कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों को चैक वितरित किए। प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे मृतकों की जांच रिपोर्ट सामने आती रही, चैक तैयार किए जाते रहे और उन्हें कल वितरित किया गया। क्षेत्रवासियों ने इस बात से भी राहत की सांस ली कि आखिरकार उनके परिजनों को मृतक की सूची में शामिल कर लिया गया। इन 17 लोगों की मौत हालिया बीमारी और दूषित जल से जुड़ी बताई जा रही थी। मृतकों में बुजुर्ग, महिलाएं और एक कम उम्र का बच्चा भी शामिल है। अधिकांश मामलों में उल्टी-दस्त और संक्रमण के लक्षण सामने आए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन जान नहीं बच सकी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सभी मामलों की जांच की गई। जिन-जिन के मामलों की पुष्टि होती गई चैक दिए गए हैं। प्रशासन पूरी मुस्तैदी से यहां के रहवासियों की मदद के लिए तैनात है। वहीं नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को क्षेत्र में शुद्ध पेयजल आपूर्ति, टंकियों की सफाई और दवा वितरण के निर्देश दिए गए हैं। इनको मिली 2- 2 लाख की मदद उर्मिला पति अलगू राम, मंजुला पति दिगंबर बाघे, सीमा पति गौरीशंकर, अवयान पिता सुनील साहू, तारारानी कोरी, नंदलाल सिद्धार्थ पाल, उमा बिहारीलाल कोरी, संतोष पिता कल्याण ,सुमित्रादेवी पति रामेश्वर दास, गोमती पति गोपाल, अशोक पिता मोतीलाल, रामकली पति जगदीश, शंकरलाल जीवनलाल बरेडे, श्रवण पिता नाथू व गीताबाई ध्रुवकर को देर शाम तक चैक का वितरण कर दिया गया। याचिकाकर्ता बोले- सप्लाई हो रहा पानी दूषित 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को यह निर्देश दिया था कि नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इस पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी है कि प्रभावित क्षेत्र में अब भी जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह दूषित है, न कि स्वच्छ और पीने योग्य। 15  जनवरी को अगली सुनवाई  हाई कोर्ट द्वारा मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए तलब किया गया. कोर्ट ने पूरे प्रदेश में पानी को लेकर चिंता जताई है. वहीं, स्टेटस रिपोर्ट में 4 मौत दिखाने को लेकर सरकार को फटकार भी लगाई है. जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अगली तारीख 15 जनवरी तय की है.  यदि शिकायतें सुन लेते तो ये नौबत नहीं आती अन्य याचिकाओं में यह मुद्दा … Read more

भारत ने सिंधु पानी पर लगाया रोक, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने लिया अहम फैसला

नई दिल्ली पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को मिलने वाले सिंधु नदी का पानी रोक दिया है, जिसके बाद कई इलाकों में उसे सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा है. इस बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के बाद पाकिस्तान में जल संकट और भी गंभीर हो सकता है.  तालिबान ने कुनार नदी का पानी नांगरहार क्षेत्र की ओर मोड़ने की योजना पर आगे बढ़ने का फैसला किया है. इस कदम से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में नदी के बहाव में भारी कमी आ सकती है. हाल के दिनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर काफी तनाव हो गया था, जिसमें दोनों देशों के कई सैनिक भी मारे गए.  तालिबान के आर्थिक आयोग के पास भेजा गया प्रस्ताव अफगानिस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय के आर्थिक आयोग की तकनीकी समिति की बैठक में कुनार नदी से नांगरहार स्थित दारुंता बांध में पानी मोड़ने के प्रस्ताव को चर्चा के बाद अनुमोदित कर अंतिम निर्णय के लिए आर्थिक आयोग को भेज दिया गया. एक बार लागू होने के बाद इस परियोजना से अफगानिस्तान के नंगरहार में कई कृषि भूमि को प्रभावित करने वाली जल की कमी का समाधान होने की उम्मीद है, लेकिन इससे पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पानी के प्रवाह पर असर पड़ेगा. तालिबान के फैसले से PAK पर क्या होगा असर? करीब 500 किलोमीटर लंबी कुनार नदी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चित्राल जिले में स्थित हिंदू कुश पर्वतमाला से निकलती है. इसके बाद यह दक्षिण की ओर अफगानिस्तान में बहती है और कुनार और नंगरहार प्रांतों से होते हुए काबुल नदी में मिल जाती है. यह नदी पाकिस्तान में बहने वाली सबसे बड़ी नदियों में से एक है और सिंधु नदी की तरह, सिंचाई, पीने के पानी और जलविद्युत उत्पादन का एक प्रमुख स्रोत है, विशेष रूप से सुदूर खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र के लिए जो सीमा पार हिंसा का केंद्र रहा है. अगर अफगानिस्तान कुनार नदी पर बांध बनाता है तो इससे सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और पनबिजली परियोजनाओं के लिए पानी तक पाकिस्तान की पहुंच बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है, खासकर उन लोगों के लिए जो भारत द्वारा सिंधु नदी के जल आपूर्ति को प्रतिबंधित करने के कारण पहले से ही सूखे से जूझ रहे हैं. PAK-तालिबान के बीच नहीं कोई समझौता इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली के साथ सिंधु जल संधि (IWT) के विपरीत, इस्लामाबाद का काबुल के साथ इन जलक्षेत्रों के बंटवारे को लेकर कोई समझौता नहीं है, जिसका अर्थ है कि तालिबान को पीछे हटने के लिए मजबूर करने का तत्काल कोई उपाय नहीं है. तालिबान के इस कदम से पाकिस्तान-अफगानिस्तान हिंसा के फिर से भड़कने की आशंका बढ़ गई है. 

रायपुर : सोरो व्यपवर्तन और कोनपारा तालाब के कार्यों के लिए 6.93 करोड़ रुपये स्वीकृत

रायपुर : सोरो व्यपवर्तन और कोनपारा तालाब के कार्यों के लिए 6.93 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा जशपुर जिले के की दो सिंचाई योजनाओं के लिए 6 करोड़ 93 लाख 35 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में विकासखण्ड-फरसाबहार की कोनपारा तालाब (दलटोली डेम) का मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य के लिए 3 करोड़ 47 लाख 21 हजार रुपये स्वीकृत किये गये है। योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने पर रूपांकित सिंचाई क्षमता 243 हेक्टेयर के विरूद्ध 201 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई उपलब्ध होगी।   जशपुर जिले के विकासखण्ड-बगीचा की सोरो व्यपवर्तन योजना का मरम्मत एवं जीर्णोंद्धार कार्य के लिए 3 करोड़ 46 लाख 14 हजार रुपये स्वीकृत किये गये है। योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने पर रूपांकित सिंचाई क्षमता 122 हेक्टेयर के विरूद्ध 86 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षे़त्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। सिंचाई योजनाओं के कार्यों को कराने के लिए मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अंबिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।  

रायपुर में विशेष पिछड़ी जनजातियों को अब शुद्ध पेयजल की सुविधा

रायपुर : विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को मिल रहा है शुद्ध पेयजल जल का लाभ 28 हजार से अधिक विशेष पिछड़ी जनजाति के घरों में नल कनेक्शन रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने दूरस्थ अंचलों के लोगों तक भी जल जीवन मिशन योजना के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश संबंधित विभागों को हैं। जशपुर जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति के 28 हजार से अधिक घरों में नल कनेक्शन के कार्यों को पूर्ण कर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है l  94 ग्रामों के विशेष पिछड़ी जनजाति बसाहटों के 28 हजार से अधिक घरों में नल कनेक्शन का कार्य को पूर्ण           जशपुर जिले में विशेष पिछड़ी जनजातियों में बिरहोर एवं पहाड़ी कोरवा निवास करती है। जिले के 94 ग्रामों में विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के लोग निवासरत् है। सम्पूर्ण जिले में नल जल प्रदाय के साथ-साथ इन 94 ग्रामों के विशेष पिछड़ी जनजाति के बसाहटों के कुल 36183 घरेलू नल कनेक्शन स्वीकृति किया गया है। इनमें से 28 हजार से अधिक नल कनेक्शन के कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है।             मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के दिशा-निर्देश में विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को केन्द्र और राज्य शासन की सभी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत दिलाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है।

तवा डैम में बढ़ा पानी, 3 गेट खोले गए; मक्का फसल खराब, धान भीगने से किसानों की चिंता

 नर्मदापुरम   तवा बांध का जलस्तर अपने पूर्ण भराव क्षमता को पार कर चुका है, जिसके कारण बांध के गेट अब भी खुले हुए हैं। आज सोमवार, 27 अक्टूबर 2025 को सुबह 11:30 बजे की स्थिति के अनुसार, बांध में जल की आवक जारी रहने से कुल 19,778 क्यूसेक पानी तवा नदी में छोड़ा जा रहा है। वर्तमान स्थिति     वर्तमान जलस्तर : 1166.3 फीट (355.48 मीटर)     पूर्ण भराव स्तर : 1166.0 फीट (355.40 मीटर)     भराव क्षमता : डैम अपनी लाइव क्षमता का 100.87 प्रतिशत भरा हुआ है।     जल आवक : बांध में औसतन 5,300 क्यूसेक (150 क्यूमेक) पानी की आवक हो रही है। पानी की निकासी     बांध में अतिरिक्त जल भराव को नियंत्रित करने के लिए प्रबंधन द्वारा पानी की निकासी जारी है।     गेटों की स्थिति : तवा बांध के 3 गेट 3-3 फीट तक खोले गए हैं।     स्पिलवे से डिस्चार्ज : खोले गए गेटों से 16,078 क्यूसेक (455 क्यूमेक) पानी छोड़ा जा रहा है।     पावर हाउस से निकासी : जलविद्युत गृह से 3,708 क्यूसेक (105 क्यूमेक) पानी छोड़ा जा रहा है।     नदी में कुल बहाव : तवा नदी में कुल 19,778 क्यूसेक (560 क्यूमेक) पानी छोड़ा जा रहा है। भोपाल, नर्मदापुरम, नौगांव, दतिया, गुना, रायसेन, उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, राजगढ़, आगर-मालवा, देवास, टीकमगढ़, इंदौर, दतिया, उमरिया, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, खजुराहो, हरदा, पांढुर्णा, सागर, सीधी, मंडला और नरसिंहपुर में भी बारिश हुई। आज भी ग्वालियर समेत कई जिलों में बारिश हो रही है। रविवार रात को बारिश के बाद सोमवार को भी कई जगह बूंदा-बांदी हो रही है। इटारसी के तवा डैम के जलस्तर को काबू पर रखने के लिए सोमवार सुबह 3 गेट खोले गए हैं। गुना में खेतों पर सूख रही मक्का फसल बारिश के चलते खराब हो गई। सोमवार को किसान फसल को खेतों से निकालने में लगे रहे। श्योपुर में खुले में रखी धान की फसल गीली हो गई। तिरपाल ढककर फसल को बचाने की कोशिश की जा रही है। तवा डैम के 3 गेट 3-3 फीट तक खोले गए तवा डैम में बढ़ते जलस्तर को काबू में करने के लिए प्रशासन ने सोमवार सुबह 11 बजे से तीन गेट खोल दिए हैं। इन गेटों को 3-3 फीट की ऊंचाई तक खोला गया है, जिससे बांध से 16,070 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। कार्यपालन यंत्री एन. के. सूर्यवंशी के अनुसार, डैम का वर्तमान जलस्तर 1166.30 फीट दर्ज किया गया है। जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बरसात के कारण बांध में पानी की आवक बनी हुई है। सीजन में 73वीं बार खोले गए तवा डैम के गेट मानसूनी सीजन में तवा डैम के गेट कुल 72 बार खोले गए। वहीं, अब 73वीं बार गेट खुले हैं। इससे पहले साल 2022 में तवा के गेट सर्वाधिक 136 बार खोले गए थे। 2023 में सबसे कम 39 बार गेट खोलने पड़े थे। अफसरों ने बताया कि अक्टूबर में भी कई बार गेट खुल चुके हैं। साल 2023 में 1 अक्टूबर को और 2022 में 12 अक्टूबर को गेट खुले थे। इस साल भी 2 अक्टूबर तक गेट खुले रहे थे। इस सीजन में तवा डैम के कुल 13 में से केवल सात गेट ही खुल पाए हैं, जबकि पिछले साल सभी 13 गेट खोले गए थे। गुना में 7.2 मिमी बारिश, मक्का फसल खराब गुना में रविवार रात को 7.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा बारिश म्याना इलाके में हुई। यहां खेतों में पानी भर गया। खेतों में सूख रही मक्के की फसल भीग गई। किसान पानी से फसल को निकालते हुए दिखाई दिए। वहीं अंडर ब्रिज में भी पानी भर गया, जिस कारण वाहनों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ स्कूली बच्चों का वाहन नहीं निकल पाया, तो वह लौट गए। श्योपुर में कटाई के बाद खुले में रखा धान भीगा श्योपुर मे सोमवार को फिर से शुरू हुई बारिश ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। किसानों का कटाई के बाद खुले में रखा धान भीग रहा है। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है।किलगाबड़ी गांव के किसान बसंत सिंह का खुले में रखा करीब 12 ट्रॉली धान पूरी तरह भीग गया। इसलिए बदला मौसम, 3 दिन असर सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि अरब सागर की खाड़ी में एक डिप्रेशन एक्टिव है। इससे एक ट्रफ भी जुड़ी है, जो मध्यप्रदेश के बीचों-बीच तक आ रही है। इस वजह से अगले 3 दिन तक बारिश होने का अनुमान है। अगले 24 घंटे में यह ग्वालियर-चंबल समेत उत्तरी हिस्से में ज्यादा असर दिखाएगा। इसलिए कुछ जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है। इसके बाद पूर्वी हिस्से में भी तेज बारिश होगी। वहीं, बंगाल की खाड़ी में एक डीप डिप्रेशन एक्टिव है, जो अगले 48 घंटे में एमपी में असर दिखाने लगेगा। इससे भी बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी। 30 अक्टूबर तक ऐसा ही मौसम मौसम विभाग ने 27 से 30 अक्टूबर तक बारिश, गरज-चमक और आंधी का अलर्ट जारी किया है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और जबलपुर संभाग में असर देखने को मिलेगा। दिन के पारे में गिरावट, 23 डिग्री तक पहुंचा बता दें कि प्रदेश में पिछले कुछ दिन से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट देखने को मिली थी। खासकर रात का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, लेकिन अब तापमान बढ़ गया है। रविवार को बारिश होने की वजह से कई शहरों में दिन के तापमान में गिरावट हुई है। बारिश का दौर थमने के बाद रात के तापमान में गिरावट होने का अनुमान है। रविवार को भोपाल में दिन का तापमान 24.2 डिग्री, बैतूल में 26.5 डिग्री, धार में 23.2 डिग्री, नर्मदापुरम में 24.6 डिग्री, इंदौर में 23.5 डिग्री, खंडवा में 28.5 डिग्री, पचमढ़ी में 23.8 डिग्री, रायसेन में 28.2 डिग्री, रतलाम में 24.2 डिग्री, शिवपुरी में 29.2 डिग्री, उज्जैन में 25.7 डिग्री, छिंदवाड़ा में 27 डिग्री, दमोह में 26.6 डिग्री, जबलपुर में 24.8 डिग्री रहा। इसी तरह मंडला में 26.8 डिग्री, रीवा में 28.1 डिग्री, सागर में 25.7 डिग्री, सतना में 28.8 डिग्री, सिवनी में 28.4 डिग्री, सीधी में 27 डिग्री, उमरिया में 28.5 डिग्री और मलाजखंड में 29.8 डिग्री सेल्सियस … Read more

पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव: अफगानिस्तान भी रोकेगा पानी, कुनार नदी पर बांध का ऐलान

काबुल  भारत के बाद अब अफगानिस्तान भी पाकिस्तान की जल आपूर्ति को प्रतिबंधित कर सकता है. तालिबान के उप सूचना मंत्री मुजाहिद फाराही ने ऐलान किया है कि जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को तालिबान के सर्वोच्च नेता शेख हिबतुल्लाह अखुंदजादा से कुनार नदी पर बिना किसी देरी के बांधों का निर्माण शुरू करने के निर्देश मिले हैं. यह नदी पाकिस्तान में बहती है और पाकिस्तान के लिए पानी का एक बड़ा सोर्स है.  मुजाहिद फाराही के मुताबिक, अमीर अल-मुमिनीन ने मंत्रालय को विदेशी फर्मों का इंतजार करने के बजाय घरेलू अफगान कंपनियों के साथ अनुबंध करने का आदेश दिया है. इस बीच, जल एवं ऊर्जा मंत्री मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसूर ने जोर देते हुए कहा, "अफगानों को अपने जल संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार है." घरेलू कंपनियों से जल्द अनुबंध करने का निर्देश उप सूचना मंत्री मुजाहिद फाराही ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि सर्वोच्च नेता शेख हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने कुनार नदी पर बांधों का निर्माण तुरंत शुरू करने के लिए जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को निर्देश दिए हैं. इन निर्देशों में यह भी शामिल है कि विदेशी कंपनियों के बजाय घरेलू अफगान कंपनियों के साथ अनुबंध किए जाएं, जिससे काम में देरी न हो. अफगानों को अपने जल पर अधिकार जल एवं ऊर्जा मंत्री मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसूर ने इस कदम का सपोर्ट करते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ किया है कि अफगानों को अपने जल संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार है.  काबुल और कुनार नदी, जो पाकिस्तान में बहती है, पाकिस्तान में पानी का एक बड़ा स्रोत रही है. जब भारत ने रोका पानी… पिछले दिनों पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने भी पाकिस्तान के साथ हुई जल संधि रद्द कर दी और जल आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाने की बातें की गई थीं. कश्मीर में 26 नागरिकों के मारे जाने के तुरंत बाद, सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि में अपनी भागीदारी सस्पेंड कर दी थी, जो सिंधु नदी सिस्टम के इस्तेमाल को कंट्रोल करती है. इनमें से एक मुख्य योजना चिनाब नदी पर रणबीर नहर की लंबाई को दोगुना करके 120 किमी करने की है, जो भारत से होकर पाकिस्तान के पंजाब के कृषि क्षेत्र तक जाती है. 

सुबह खाली पेट पानी पीने से मिलते हैं ये चौंकाने वाले फायदे

क्या आपको पता सुबह उठ कर खाली पेट पानी पीने से कीतने फायदें होते हैं। आईए हम आपको बताते है। अगर आप भी इस आदत का पालन करते हैं तो आपको बता दें कि सुबह खाली पेट पानी पीने से कई तरह की बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है। खाली पेट पानी पीने से शरीर की सारी गंदगी साफ हो जाती है और खून साफ होता है। वैसे तो एक शख्स को सुबह उठकर लगभग 4 से 5 गिलास पानी पीना चाहिए लेकिन आप इस आदत को डालने की सोच रहे हैं तो शुरुआत एक या दो गिलास से कर सकते हैं। -सुबह उठकर पानी पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे खून साफ हो जाता है। खून साफ हो जाने से त्वचा पर भी चमक आती है। -सुबह उठकर पानी पीने से नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। इसके अलावा मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं। -सुबह उठकर पानी पीने से मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। अगर आप वजन घटाना चाह रहे हैं तो जितना जल्दी हो सके सुबह उठकर खाली पेट पानी पीना शुरू कर दीजिए। -जो लोग सुबह उठकर खाली पेट पानी पीते हैं उन्हें कब्ज की शिकायत नहीं होती। सुबह पेट साफ होने की वजह से ऐसे लोग जो कुछ भी खाते हैं उसका उनके शरीर को पूरा फायदा मिलता है। कब्ज की वजह से होने वाले अन्य रोग भी नहीं होते। -सुबह उठकर पानी पीने से गले, मासिक धर्म, आंखों, पेशाब और किडनी संबंधी कई समस्याएं शरीर से दूर रहती हैं।