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‘जलसेतु एप’: पानी की जानकारी और शिकायत निवारण के लिए टीना डाबी का अभिनव कदम

बाड़मेर बाड़मेर जिले में पानी संबंधित जानकारी और समस्याओं के समाधान के लिए जिला कलेक्टर टीना डाबी ने एक अभिनव पहल करते हुए जिला प्रशासन द्वारा ‘जलसेतु एप’ तैयार करवाया। यह एप जनता और प्रशासन के बीच मजबूत सेतु का काम करेगा और उपयोगकर्ताओं को पानी की आपूर्ति की स्थिति के बारे में वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करेगा। इससे लोगों को पानी की उपलब्धता और वितरण की सटीक जानकारी मिल सकेगी। जिला कलेक्टर टीना डाबी ने बताया कि यह जलसेतु एप एक अभिनव पहल है, जो नागरिकों को जल सेवाओं तक आसान पहुंच प्रदान करेगा। उनका कहना है कि हमारा लक्ष्य पारदर्शिता, दक्षता और स्थिरता के साथ जल प्रबंधन को बदलना है। उन्होंने कहा कि जिले में जनसुनवाई और रात्रि चौपालों में अधिकांश शिकायतें पानी से संबंधित आती हैं, जैसे गांव या शहर में पानी नहीं आना। एप तैयार करते समय सभी समस्याओं के समाधान पर ध्यान दिया गया, जिन्हें आमजन और उपभोक्ताओं द्वारा समय-समय पर बताया जाता रहा है। जलसेतु एप के माध्यम से उपभोक्ता अपनी समस्याओं का समाधान पा सकेंगे और उन्हें सभी उपयोगी सूचनाएं मोबाइल पर मिलेंगी। जिला कलेक्टर ने बताया कि कोई भी एंड्रॉइड यूजर इसे अपने फोन में डाउनलोड कर सकता है और एपल स्टोर पर भी जल्द ही उपलब्ध होगा। एप डाउनलोड करने के बाद उपयोगकर्ता अपनी आवश्यक सूचनाएं भरकर लोकेशन संबंधित जानकारी फीड कर सकता है। इसके बाद उसे हर रोज पानी सप्लाई का रियल टाइम शेड्यूल मिलेगा। यदि किसी कारण से पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही है, तो पांच किलोमीटर के दायरे में निकटतम जल स्रोत की जानकारी गूगल मैप लोकेशन के साथ मिलेगी। साथ ही, उस जल स्रोत पर पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता की जानकारी भी एप पर उपलब्ध होगी। टीना डाबी ने बताया कि कई बार पीएचईडी की पानी आपूर्ति लाइन पर मेंटेनेंस वर्क की वजह से जल आपूर्ति बाधित हो जाती है। इस स्थिति में एप पर अलर्ट दिया जाएगा कि लोकेशन पर मेंटेनेंस वर्क चल रहा है और जलापूर्ति बाधित रहेगी। साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी भी तुरंत उपभोक्ता को मिलेगी। यदि कोई उपभोक्ता लीकेज या अवैध कनेक्शन की शिकायत करता है, तो वह एप पर फोटो सहित संबंधित अधिकारी को टैग करके अपलोड कर सकता है। विभाग निर्धारित समय में शिकायत का निस्तारण करेगा। इसके अलावा, जलजीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों और पानी कनेक्शन से संबंधित सूचनाएं भी एप पर उपलब्ध कराई जाएंगी। जिला कलेक्टर ने बताया कि पहले बाड़मेर शहर में एक सप्ताह ट्रायल के रूप में एप चलाया जाएगा। ट्रायल के दौरान आने वाली समस्याओं और सुधारों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद इसे बाड़मेर ग्रामीण क्षेत्र में लॉन्च किया जाएगा और तीन से चार सप्ताह में पूरे जिले में लागू कर दिया जाएगा। प्रभारी मंत्री और पशुपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत, साथ ही बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी और जिला कलेक्टर टीना डाबी ने गुरुवार शाम को कलेक्ट्रेट कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘जलसेतु एप’ का लॉन्च किया। प्रभारी मंत्री ने कहा कि यह एप जिले की जल आवश्यकताओं की पूर्ति और जल समस्या समाधान के लिए मील का पत्थर साबित होगा।  

छत्तीसगढ़ सरकार की बड़ी पहल, रायपुर की दो सिंचाई योजनाओं के लिए 8.48 करोड़ मंजूर

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बेमेतरा जिले की दो सिंचाई योजनाओं के कार्यों में 8 करोड 48 लाख 10 हजार रुपये स्वीकृत किये गये है। स्वीकृत कार्यो में विकासखण्ड-बेरला की बांरगांव नाला व्यपवर्तन शीर्ष एवं नहर के जीर्णोद्धार और लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 23 लाख 84 हजार स्वीकृत किये गये है। योजना के कार्यों को पूर्ण होने पर रूपांकित सिंचाई क्षमता 200 हेक्टेयर विरूद्ध 200 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। बेरला-विकासखण्ड में ही बेरला के हस्दा नाला में उफरा(उभरा) स्टाप डेम कम रपटा निर्माण कार्य हेतु 4 करोड़ 24 लाख 26 हजार रुपयें स्वीकृत किये गये है। योजना से निस्तारी भू-जल संवर्धन, पेयजल आवा-गमन एवं किसानों द्वारा स्वयं के साधन से 46 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा प्रस्तावित है।  जल संसाधन विभाग मंत्रालय महानदी भवन से सिंचाई योजनाओं के कार्यों को पूर्ण कराने मुख्य अभियंता महानदी गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग रायपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

भारत का सिंधु योजना प्लान: अब अपने राज्यों को मिलेगा ज्यादा पानी, पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता

नई दिल्ली दिल्ली और आसपास के राज्यों में बढ़ते जल संकट के बीच केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने  एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दिए जाने वाले सिंधु जल संधि के तहत आने वाले पानी को अब दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान जैसे अन्य राज्यों की ओर मोड़ा जाएगा। यह कदम सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद उठाया जा रहा है, जो पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया था। खट्टर ने इसे "आपदा में अवसर" बताते हुए कहा कि अगले एक से डेढ़ वर्षों में यह पानी उपलब्ध हो सकेगा। खट्टर ने  घोषणा की कि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन के कारण बचा पानी अगले एक से डेढ़ साल के भीतर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी के जल निकासी मास्टर प्लान की शुरुआत के अवसर पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा, ‘‘पाकिस्तान की ओर बड़ी मात्रा में छोड़ा जाने वाला पानी अब आने वाले एक से डेढ़ साल में दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा।’’ भारत ने अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में दशकों पुरानी इस संधि को निलंबित करने का फैसला किया था। पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। वर्ष 1960 से प्रभावी यह संधि भारत तथा पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी तथा उसकी सहायक नदियों के जल वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती है। प्रभावित राज्य और जल संकट की स्थिति दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई राज्य गंभीर जल संकट का सामना करते हैं। गर्मियों में यमुना नदी का जलस्तर न्यूनतम होने से पेयजल की कमी हो जाती है। हरियाणा और राजस्थान में भी सिंचाई के लिए पानी की किल्लत होती है। खट्टर के अनुसार, सिंधु की पश्चिमी नदियों से बचने वाला पानी इन राज्यों को राहत देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को अतिरिक्त 30-40 अरब घन मीटर पानी उपलब्ध करा सकता है, हालांकि इसे स्टोर करने और वितरित करने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी।

अंतिम चरण में साँईखेड़ा जल-प्रदाय परियोजना, 40 हजार से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्प़नी द्वारा एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से नरसिंहपुर जिले के साँईखेडा, सालीचौका और चिचली कस्बों में समूह जल‑प्रदाय परियोजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुँच चुका है। परियोजना से 40 हजार से अधिक नागरिक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। परियोजना पर 52 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं। परियोजना के अंतर्गत नर्मदा नदी से जल संग्रहण कर 6.5 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। परियोजना से हर घर को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से व्यापक वितरण नेटवर्क स्थापित किया गया है।साँईखेडा में 33 किलोमीटर, सालीचौका में 41 किलोमीटर और चिचली में 40 किलोमीटर लंबी पाइप-लाइन बिछाई गई है। जल संग्रहण की व्यवस्था को मजबूत करने के लिये साँईखेडा और चिचली में दो‑दो नए ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं, जो मौजूदा टैंकों के साथ मिलकर आपूर्ति नेटवर्क की स्थिरता में सहयोग कर रहे हैं।परियोजना में प्रस्तावित 7 हजार 396 घरेलू कनेक्शनों में से अब तक 6 हजार 348 कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। क्षेत्र में शीघ्र ही परियोजना का प्रायोगिक परीक्षण भी प्रारंभ किया जायेगा।  

गंगा का जलस्तर बढ़ा, बिजनौर के 50 से ज्यादा गांवों में मंडराया बाढ़ का संकट

बिजनौर  उत्तर प्रदेश के बिजनौर में गंगा नदी की धार ने गंगा बैराज के अपस्ट्रीम में बने तटबंध का कटान शुरू कर दिया है. पिछले दो दिनों से चल रहे इस कटान को अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया, जिसके बाद तटबंध का करीब तीन किलोमीटर हिस्सा गंगा में समा गया है.  लगातार हो रहे इस कटान से आसपास के लोगों में दहशत है. प्रशासन ने नवलपुर गांव को खाली करने का अलर्ट जारी कर दिया है और एसडीआरएफ की टीमें भी जिले में पहुंच गई हैं. सिंचाई विभाग और दिल्ली-पौड़ी नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट की टीमें मिलकर तटबंध को बचाने में जुटी हैं.  प्रशासन और विधायक मौके पर, डीएम ने जारी किया अलर्ट हालात की गंभीरता को देखते हुए डीएम जसजीत कौर ने बताया कि तटबंध का कटान शुरू होने के बाद सभी अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है. उन्होंने कहा कि स्थिति थोड़ी नाजुक है, फिर भी प्रयास जारी हैं. तटबंध को बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है.  डीएम ने कहा कि 10 से 12 गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है. उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ और टीआरएफ की टीमें भी बुलाई गई हैं जो किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं. देखें वीडियो-  दिन-रात चल रहा है मरम्मत का काम मौके पर मौजूद स्थानीय निवासियों ने बताया कि गंगा लगातार तटबंध को अपने अंदर समाती जा रही है, जिससे लोगों में दहशत बढ़ रही है. तटबंध को बचाने के लिए रात भर काम चल रहा है. बड़े-बड़े पेड़ और बालू से भरे बोरे डालकर कटान रोकने की कोशिश की जा रही है.   उधर, सदर विधायक सूची चौधरी ने भी मौके का मुआयना किया और कहा कि यह प्राकृतिक आपदा है और प्रशासन, ग्रामीण और सिख समाज के लोग मिलकर इसे रोकने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने प्रभारी मंत्री को भी इसकी जानकारी दी है. 

सलका जलाशय योजना के कार्यों के लिए 2.50 करोड़ रूपए स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी जिले में खड़गंवा की सलका जलाशय योजना के कार्यों के लिए दो करोड़ 50 लाख 18 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्यों के पूर्ण होने पर योजना की रूपांकित सिंचाई क्षमता 297 हेक्टेयर में 145 हेक्टेयर की कमी की पूर्ति होगी तथा 10 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई हो सकेगी। योजना से क्षेत्र के किसानों को कुल 307 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।

एशियन डेवलपमेंट बैंक सहयोग से नेमावर में पेयजल परियोजना, जल्द लाभान्वित होंगे हजारों लोग

भोपाल  मध्यप्रदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधीनस्थ उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा देवास जिले के नेमावर नगर परिषद् में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ए.डी.बी.) के सहयोग से एक महत्वाकांक्षी जल प्रदाय परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। यह परियोजना 10 वर्षों के संचालन एवं संधारण के साथ लगभग 21 करोड़ रूपये की लागत से क्रियान्वित की जा रही है। इसके अंतर्गत 1640 घरों को घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे, जिससे 6,498 की आबादी को प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। परियोजना के तहत् मध्यप्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा नदी से पानी लाकर उसे 2.41 एमएलडी क्षमता वाले जल शोधन संयंत्र में शोधित किया जाएगा। शोधित जल को लगभग 36 किलोमीटर लंबी वितरण पाइपलाइन के माध्यम से पूरे नगर में पहुँचाया जाएगा। शहर में जल भंडारण के लिए 2 ओवरहैड टैंक का निर्माण भी पूर्णता की ओर है। इससे जल आपूर्ति व्यवस्था को स्थायित्व और नियमितता प्राप्त होगी। यह परियोजना नेमावर नगर में नागरिकों की मूलभूत आवश्यकता – शुद्ध पेयजल – की सुनिश्चित आपूर्ति के लिये एक बड़ा कदम है। परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र के सामाजिक एवं स्वास्थ्य स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आयेगा।  

37 करोड़ की लागत से डुबान जलाशय में बनेगा राज्य का पहला एक्वा पार्क, रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरबा जिले के हसदेव बांगो डुबान जलाशय में राज्य का पहला ‘ एक्वा पार्क ’ बनाने का फैसला किया है। ‘एक्वा पार्क’ के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत केंद्र सरकार से 37.10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत हो चुकी है। यह पार्क एतमा नगर और सतरेंगा क्षेत्र में फैले सैकड़ों एकड़ डुबान जलाशय में विकसित होगा। सीएम साय ने इस प्रोजेक्ट की स्वीकृति के लिए पीएम मोदी का आभार जताया है। अधिकारियों ने बताया कि इस पार्क के विकसित होने से राज्य में मछली पालन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन होगा और मछली उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, विक्रय, निर्यात व ‘एक्वा टूरिजम’ से क्षेत्र के ग्रामीणों की आय बढ़ेगी। अधिकारियों ने बताया कि एतमा नगर में मछलियों के उत्पादन से लेकर उनके प्रसंस्करण और विपणन के साथ-साथ उन्हें विदेशों में निर्यात करने की सुविधा भी विकसित होगी। एक्वा म्यूजियम बनेगा उन्होंने बताया कि एतमा नगर की इस प्रसंस्करण इकाई से हटकर सतरेंगा में ‘एक्वा म्यूजियम’ बनेगा। अधिकारियों ने बताया कि ‘एक्वा म्यूजियम’ बन जाने से पर्यटकों की जानकारी के लिए यहां विभिन्न प्रकार की मछलियों को रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही सतरेंगा में ‘एंगलिंग डेस्क’, कैफेटेरिया, ‘फ्लोटिंग हाउस’ और ‘मोटर बोट’ सहित वाटर स्पोर्ट्स की सविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र में पर्यटन बढ़ेगा। रोजगार के बढ़ेंगे अवसर अधिकारियों ने बताया कि पर्यटन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय ग्रामीणों की आय बढ़ने से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में ‘एक्वा पार्क’ के लिए स्वीकृति मिलने पर राज्य के मछली पालकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस ‘एक्वा पार्क’ से न केवल मछली पालन की नई उन्नत तकनीक लोगों तक पहुंचेंगी बल्कि प्रसंस्करण-पैकेजिंग इकाई से मछली व्यवसाय को नई दिशा मिलेगी। व्यापार के खुलेंगे द्वार उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ की तिलपिया मछली की विदेशों में बहुत मांग है और इस ‘एक्वा पार्क’ में इस मछली के उत्पादन से छत्तीसगढ़ के मछली पालकों के लिए अब सात समुंदर पार भी व्यापार के द्वार खुलेंगे।” साय ने ‘एक्वा पार्क’ की स्थापना को मछली पालन के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने वाला निर्णय बताया।

सशक्तिकरण की ओर कदम: अब महिलाएं करेंगी जलकर संग्रहण, मिलेगा प्रोत्साहन राशि

उज्जैन  उज्जैन जिले में गांवों में जल कर राशि जमा करवाने का चुनौतीभरा काम अब महिलाएं अपने हाथों में लेने वाली हैं। वे हर महीने जल जीवन मिशन के उपभोक्ताओं के घर पहुंचेंगी और उनसे जल कर की राशि लेंगी। इसके एवज में उन्हें भी जमा जलकर राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। जल जीवन मिशन अंतर्गत अधिकांश गांवों के कई घरों में नल कनेक्शन हैं। इनमें से कई परिवार रोज नलों से पानी भी लेते हैं लेकिन इसके बदले में जलकर जमा करने वालों की संया बहुत ही कम है। जलकर वसूली के लिए अभी तक प्रभावी व्यवस्था भी नहीं बनी है। ऐसे में पंचायत को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है वहीं राशि की कमी में योजना का मेंटिनेंस भी नहीं हो पाता है। स्वसहायता समूह की महिलाएं देंगी दस्तक गांवों में राजस्व वसूली बढ़ाने अब जिले में नवाचार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत अब महीने की 1 से 10 तारीख के बीच नल जल के उपभोक्ताओं के घर स्वसहायता समूह की महिलाएं दस्तक देंगी। वे उपभोक्ताओं को जलकर की जानकारी देने के साथ इसकी बकाया राशि जमा करवाएंगी। राशि क्यूआर कोड से भी जमा करवाई जाएगी ताकि पादर्शिता बनी रहे। साथ ही तीन रसीद बनेगी जिनमें एक उपभोक्ता, दूसरी पंचायत व तीसरी महिला सदस्य के पास रहेगी। जलकर वसूली की नई व्यवस्था जल्द ही लागू होने वाली है। शुरुआत उज्जैन जनपद के 57 व अन्य जनपदों की 10-10 योजनाओं (एक योजना में एक गावं) से होगी। व्यवस्था कारगर होने पर जिले की सभी योजनाओं में इसे लागू कर दिया जाएगा। महिलाओं को आर्थिक लाभ भी मिलेगा जल कर संग्रहित करने के लिए प्रत्येक गांव में स्वसहायता समूह की तीन-चार महिलाओं को अधिक्रत किया जाएगा। महीने की 1 से10 तारीख तक कर जमा करने के बाद इसकी 20 प्रतिशत राशि महिला के बैंक खाते में सीधे जमा की जाएगी। बता दें कि वर्तमान में पंचायत में 60 से 100 रुपए प्रतिमाह जलकर निर्धारित है। अभी इसे जमा करवाने की ठोस व्यवस्था नहीं है। हालांकि नलजल मिशन अंतर्गत ग्राम जल स्वच्छता समिति पहले से गठित है। जनपदवार दे रहे प्रशिक्षण जिले में नई व्यवस्था लागू करने से पूर्व जिला पंचायत के माध्यम से जनपदवार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला पंचायत की जिला समन्यक व ट्रेनिंग कार्यक्रम की नोडल अधिकारी कविता उपाध्याय ने बताया, कलेक्टर के निर्देश व जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन में नई व्यवस्था शुरू की जा रही है। समूह की चिन्हित महिलाओं व संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। जल जीवन मिशन अंतर्गत जलकर राशि संग्रहण के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसमें स्वसहायता समूह की महिलाओं को जोडक़र उन्हें इसकी जिमेदारी दी जा रही है। इससे राजस्व संग्रहण में बढ़ोतरी होगी। – जयति सिंह, जिपं. सीईओ

रीवा जिले के मनमोहक जलप्रपातों पर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कोटवार और पुलिस के साथ अब पटवारियों की भी ड्यूटी लगा दी

रीवा  रीवा जिले के मनमोहक जलप्रपातों पर बढ़ती पर्यटक संख्या के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कोटवार और पुलिस के साथ अब पटवारियों की भी ड्यूटी लगा दी है। बता दें कि, जिले में पूर्वा, क्योंटी और चचाई तीन प्रमुख जलप्रपात हैं, जहां वीकेंड पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है। हालांकि, पूर्वा जलप्रपात को छोड़कर चचाई और क्योंटी में अभी तक सुरक्षा रेलिंग तक नहीं लगाई गई है। वीकेंड पर लगेगी पुलिस-पटवारियों की ड्यूटी कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि शनिवार और रविवार को विशेष सावधानी की जरूरत होती है। इसलिए वीकेंड पर कोटवार, पुलिस और ग्राम पंचायत कर्मियों के अलावा पटवारियों को भी तैनात किया जाएगा। साथ ही खतरनाक स्थानों पर रेलिंग लगाने का काम भी किया जाएगा। लोग बोले- इससे पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रशासन का यह कदम पर्यटकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्सर रोमांच या लापरवाही के चलते दुर्घटनाएं होती हैं। इन उपायों से जलप्रपातों की सुंदरता का आनंद लेने के साथ पर्यटकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।