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एमपी में डॉक्टरों की भर्ती का नया रिकार्ड, अस्पतालों के लिए जारी हुई सबसे बड़ी सूची

इंदौर  मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) इंदौर की ओर से मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित किया गया है। आयोग की ओर से जारी इस चयन परिणाम अब तक का सबसे बड़ा रिजल्ट माना जा रहा है, क्योंकि 1832 पदों के लिए 4 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। दो इंटरव्यू पैनल ने 45 दिनों के भीतर उम्मीदवारों का साक्षात्कार करवाया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद महीनेभर में आयोग की ओर से दो भाग में रिजल्ट बनाया गया, जिसमें 87 प्रतिशत मुख्य भाग का परिणाम निकाला है। आयोग ने मेडिकल ऑफिसर पद के लिए 27 जनवरी से इंटरव्यू रखे थे। इसमें 1832 पदों के लिए 4047 उम्मीदवार को बुलाया गया था। ये प्रक्रिया 10 अप्रैल तक चली। शुक्रवार को आयोग ने साक्षात्कार में चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें 87 फीसद (1649 पद) मुख्य भाग शामिल है। वेटिंग लिस्ट में 186 उम्मीदवार बता दें कि, 1649 उम्मीदवारों में से 384 सामान्य से हैं, जबकि 225 एससी, 642 एसटी, 197 ओबीसी और 201 ईडब्ल्यूएस पद हैं। लेकिन, 1220 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। जबकि, 186 उम्मीदवारों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है। 13 फीसदी पदों पर दूसरी सूची में आएगा परिणाम आयोग ने स्पष्ट किया है कि, शासन के निर्देशों के तहत फिलहाल 87 प्रतिशत पदों का परिणाम घोषित किया गया है, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों की चयन प्रक्रिया अलग से पूरी होगी। इन पदों का परिणाम बाद में जारी किए जाएंगे। भर्ती में कुछ पद विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी आरक्षित रखे गए हैं। आयोग के अनुसार, चयन पूरी तरह मेरिट एवं आरक्षण नियमों के आधार पर हुआ है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद और आरक्षण का पेंच अब इस मामले में अधिकारियों का मानना है कि, मेडिकल ऑफिसर के इतने बड़े स्तर पर चयन होने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होने के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने की संभावना बढ़ी है। आयोग के ओएसडी रवींद्र पंचभाई का कहना है कि, ओबीसी आरक्षण के चलते 13 फीसदी प्रावधिक भाग का रिजल्ट नहीं निकाला गया है। डिप्टी सीएम ने दिए थे जल्द भर्ती करने के निर्देश सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए उप स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विभाग को निर्देश दिए थे। उन्होंने बीते एक साल में कई बार विभाग की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देशित किया था कि, रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नए चिकित्सकों की भर्ती होनी चाहिए।

सरकारी अस्पताल में छापा, ऑपरेशन थिएटर से मिला सोना और नकदी

 साउथ 24 परगना पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना जिले में एक सरकारी अस्पताल से भारी मात्रा में कैश और सोना मिलने के बाद हड़कंप मच गया है. इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है, जहां बीजेपी ने टीएमसी नेताओं पर अवैध संपत्ति छिपाने का आरोप लगाया है. घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और पुलिस जांच में जुट गई है।  मामला साउथ 24 परगना के जिबंतला थाना क्षेत्र के माथेरदिघी ग्रामीण अस्पताल का है, जहां ऑपरेशन थिएटर से भारी मात्रा में कैश और सोने के गहने बरामद किए गए. मंगलवार सुबह इस घटना का खुलासा हुआ, जब अस्पताल के अंदर एक संदिग्ध बैग देखा गया. इस बैग को देखकर स्थानीय लोगों और अस्पताल स्टाफ को शक हुआ. जब बैग को खोला गया, तो उसके अंदर बड़ी मात्रा में नकदी, सोने के आभूषण और जमीन से जुड़े दस्तावेज मिले. इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।  बताया जा रहा है कि अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर जैसे संवेदनशील स्थान पर इतनी बड़ी मात्रा में अवैध संपत्ति का मिलना बेहद चौंकाने वाला है. आमतौर पर इस जगह पर मरीजों का इलाज होता है, लेकिन वहां इस तरह का बैग मिलने से कई सवाल खड़े हो गए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई साधारण मामला नहीं है और इसमें बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका है. घटना के बाद अस्पताल प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया है।  इस पूरे मामले में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बड़ा आरोप लगाया है. उनका दावा है कि यह अवैध संपत्ति टीएमसी के एक नेता के करीबी व्यक्ति की है. बीजेपी का कहना है कि साउकत मोल्ला के करीबी माने जाने वाले हुसैन गाजी ने इस संपत्ति को अस्पताल में छिपाकर रखा था. जैसे ही यह मामला सामने आया, बीजेपी कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. उन्होंने अस्पताल के इंचार्ज डॉक्टर को भी घेर लिया।  बीजेपी कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के कारण अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया. सूचना मिलने के बाद जिबंतला थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने की कोशिश की. पुलिस ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है. इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह कैश और सोना आखिर किसका है।  दूसरी तरफ, अस्पताल के डॉक्टर शाहरुख खान ने बीजेपी के आरोपों को लेकर अलग ही दावा किया है. उन्होंने बताया कि यह बैग समसेर मीर नाम के युवक का है, जो स्थानीय टीएमसी बूथ अध्यक्ष का बेटा है. डॉक्टर के मुताबिक, समसेर मीर अस्पताल में अस्थायी कर्मचारी के रूप में काम करता है. उनका कहना है कि बैग अस्पताल में उसी ने छोड़ा था, हालांकि इसके पीछे की असली वजह क्या है, यह अभी साफ नहीं हो पाया है।  इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. बीजेपी लगातार टीएमसी पर हमला बोल रही है और इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है. पार्टी का कहना है कि यह भ्रष्टाचार का बड़ा मामला है और इसमें कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं. वहीं, टीएमसी की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे सियासी विवाद और बढ़ गया है।  फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अस्पताल में इतनी बड़ी मात्रा में कैश और सोना कैसे पहुंचा. साथ ही, जमीन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है. इस घटना ने न सिर्फ अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है. आने वाले दिनों में जांच के बाद इस मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। 

जबलपुर में 5 अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन रद्द, 121 क्लीनिक पर भी हुआ कार्रवाई

जबलपुर  जबलपुर शहर के पांच निजी अस्पतालों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। इसी तरह जिले के 240 निजी क्लीनिकों का पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित था, पंजीयन की आवश्यक औपचारिकता पूर्ण न करने पर कुल 121 क्लीनिकों का संचालन बंद करने का आदेश मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी ने दिए हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग होम शाखा प्रभारी डॉ. आदर्श विश्नोई ने बताया कि नियमानुसार निजी अस्पतालों व क्लीनिकों को पंजीयन तीन साल की अवधि के लिए प्रदान किया जाता है। निर्धारित अवधि पूर्ण होने पर संबंधित संस्थानों को पंजीयन नवीनीकरण हेतु आवेदन करना अनिवार्य है। इस साल नवीनीकरण की प्रक्रिया पोर्टल के माध्यम से एक जनवरी से 28 फरवरी तक संचालित हुई। इसके बाद मार्च में संबंधित अस्पतालों व क्लीनिकों का निरीक्षण किया गया और आवश्यक सुविधाओं का आकलन किया गया। 55 में से पांच बंद, जिसमें दो ने स्वयं अस्पताल में लगाया ताला वर्ष 2025-26 में कुल 55 अस्पतालों का पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित था, जिसमें दो अस्पतालों बटालिया आई हास्पिटल, सरकार हास्पिटल ने स्वयं अस्पताल बंद करने आवेदन प्रस्तुत किया। वहीं एक अस्पताल नामदेव नर्सिंग होम ने आवेदन ही नहीं किया। जबकि संकल्प हॉस्पिटल ने दस्तावेज नगर निगम व अन्य विभागों से सत्यापित नहीं कराए। इस तरह एससी गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल व रिसर्च सेंटर में निरीक्षण के दौरान उपयुक्त स्टाफ उपस्थित नहीं था। जिसके बाद अब इनका संचालन नहीं हो सकेगा। 89 क्लीनिक ने आवेदन नहीं किया, 32 के पास दस्तावेज कम जबलपुर जिले में कुल 240 निजी क्लीनिकों का पंजीयन नवीनीकरण इस बार प्रस्तावित था। जिनमें से 89 क्लीनिकों द्वारा नवीनीकरण के लिए आवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया। जबकि 32 क्लीनिक ने नियमानुसार पूरे दस्तावेज ही नवीनीकरण टीम को नहीं सौंपे। जिसके चलते पंजीयन नवीनीकरण नहीं हो सका। पंजीयन नवीनीकरण प्रक्रिया को ऐसे समझें स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पताल व क्लीनिकों संचालन के लिए नियमानुसार प्रत्येक तीन साल में एक बार पंजीयन नवीनीकरण प्रक्रिया से गुजरना होता है। अस्पताल-क्लीनिकों के पंजीयन का नवीनीकरण एक अनिवार्य प्रक्रिया है। प्रदेश के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 126 अस्पतालों की मान्यता खत्म कर दी है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में यह कदम उन अस्पतालों पर उठाया गया है, जिन्होंने NABH सर्टिफिकेट की जानकारी तय समय में नहीं दी। आयुष्मान कार्यालय ने पहले अस्पतालों को नोटिस देकर मौका दिया था, लेकिन इन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। रविवार 12 बजे इन अस्पतालों को नोटिस देकर जानकारी दी जाएगी। अब इन अस्पतालों में आयुष्मान के तहत मुफ्त इलाज नहीं मिलेगा। 4 शहरों में 398 में से 126 अस्पताल प्रभावित प्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में कुल 398 अस्पताल योजना से जुड़े हैं। इनमें से 126 अस्पताल NABH सर्टिफिकेट की जानकारी नहीं दे सके, जिस कारण उन पर कार्रवाई हुई। इनमें भोपाल के 51, इंदौर-30, ग्वालियर-33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं। आयुष्मान CEO बोले- मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा आयुष्मान भारत मध्यप्रदेश के CEO डॉ. योगेश भरसट ने कहा, यह कदम अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उठाया गया है। नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिल सके। एनएबीएच सर्टिफिकेट न देने वाले अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता रद्द कर दी गई है। कई नोटिस देने के बावजूद डॉक्यूमेंट नहीं जमा हुए। निजी अस्पतालों का कहना है कि सर्टिफिकेट प्रक्रिया महंगी और लंबी है, इसलिए छोटे अस्पताल समय पर पूरा नहीं कर पाए। डॉ. योगेश भरसट ने कहा, अब इन अस्पतालों के मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया जाएगा। नए मरीजों के क्लेम स्वीकार नहीं होंगे। पुराने पेमेंट के बाद भी सर्टिफिकेट जमा होने तक ये अस्पताल इंपैनल्ड सूची में नहीं लौटेंगे।

डॉ. रश्मि कुमार की वापसी से 220 बिस्तर अस्पताल में मातृ सेवाओं को मिली नई मजबूती

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले के 220 बिस्तर अस्पताल मनेंद्रगढ़ के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। निजी कारणों से अवकाश पर चल रही वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कुमार ने पुनः अपना कार्यभार संभाल लिया है। उनकी वापसी से अस्पताल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नया विस्तार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। डॉ. रश्मि कुमार के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ अब फिर से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को मिलेगा। अपने पूर्व कार्यकाल में उन्होंने जटिल प्रसव और स्त्री रोग से जुड़े मामलों का सफलतापूर्वक उपचार कर मरीजों का भरोसा जीता था, जिससे अस्पताल की सेवाओं पर विश्वास और मजबूत हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि डॉ. रश्मि कुमार की वापसी से प्रसूति सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार आएगा। अब सामान्य प्रसव के साथ-साथ जटिल मामलों का भी बेहतर इलाज स्थानीय स्तर पर संभव हो सकेगा, जिससे मरीजों को बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम पड़ेगी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी ने भी उनकी वापसी पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि मातृ मृत्यु दर को कम करने और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने भी डॉ. रश्मि कुमार की वापसी का स्वागत किया है। अस्पताल में लगातार सुविधाओं के विस्तार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है, और उनकी पुनः तैनाती से इस दिशा में और सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।

अमृतसर में हेल्थ कार्ड से इलाज पर अस्पताल का विरोध, AAP विधायक ने की हस्तक्षेप, बच्चा रेफर

अमृतसर  पंजाब के अमृतसर से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां सरकार की स्वास्थ्य योजना होने के बावजूद एक गरीब परिवार को अपने बीमार बच्चे के इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ी। घटना मकबूलपुरा क्षेत्र के एक निजी अस्पताल की है, जहां स्वास्थ्य कार्ड के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे का उपचार करने से इन्कार कर दिया। पीड़ित परिवार की सदस्य मनीषा ने बताया कि उनका बच्चा लंबे समय से बीमार है और वे अलग-अलग अस्पतालों में उसका इलाज करवा रहे हैं। इस बार उन्हें उम्मीद थी कि स्वास्थ्य योजना के तहत उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन अस्पताल द्वारा इलाज से मना करने पर उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। इस दौरान अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। अस्पताल में बिगढ़ा माहौल मामले की जानकारी मिलते ही आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेता कमल कुमार मौके पर पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के साथ तीखी बहस की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी अस्पताल सरकारी योजनाओं को सही ढंग से लागू नहीं कर रहे हैं और गरीब मरीजों से अनुचित तरीके से पैसे वसूलने की कोशिश की जाती है। विवाद बढ़ने पर क्षेत्र की विधायक जीवनजोत कौर भी अस्पताल पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इसे गलतफहमी का मामला बताते हुए कहा कि अस्पतालों को मरीजों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर प्रकार की बीमारी का इलाज हर अस्पताल में संभव नहीं होता, इसलिए कई बार मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे बड़े केंद्रों पर भेजना पड़ता है। विधायक बोलीं-गलतफहमी हुई विवाद बढ़ने पर पूर्वी हलके की विधायक जीवनजोत कौर भी मौके पर आईं। उन्होंने इसे गलतफहमी का मामला बताया और कहा कि अस्पतालों को मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर बीमारी का इलाज हर अस्पताल में संभव नहीं होता, इसलिए मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर करना पड़ता है। अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. ऋषभ ने कहा कि मरीज की बीमारी योजना के तहत कवर नहीं थी, जिससे यह गलतफहमी पैदा हुई। उन्होंने बताया कि अब मरीज को बेहतर इलाज के लिए उच्च केंद्र पर रेफर कर दिया गया है और मामला आपसी सहमति से सुलझ गया है। बच्चे की बिमारी योजना से बाहर वहीं अस्पताल के निदेशक डॉ. ऋषभ ने अपनी सफाई में कहा कि बच्चे की बीमारी स्वास्थ्य योजना के दायरे में नहीं आती थी, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने बताया कि मरीज को अब बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र में भेज दिया गया है और मामला आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और निजी अस्पतालों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सरकार इस तरह के मामलों की गंभीरता से जांच करे, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।  

काटजू अस्पताल में मेनोपॉज से इन्फर्टिलिटी तक का इलाज, में तैयार हुआ हाईटेक गायनेकोलॉजी सेंटर

भोपाल भोपाल के शासकीय कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में महिलाओं के लिए एक बड़ी और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है। यहां “स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी” स्थापित किया जा रहा है।  करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक और हाईटेक मशीनें अस्पताल में पहुंच चुकी हैं और उनके इंस्टालेशन का काम लगभग पूरा हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस सेंटर को नवरात्र के दौरान शुरू किए जाने की तैयारी है। इस सेंटर के शुरू होने से मेनोपॉज, निसंतानता, पीसीओएस, मोटापा, अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी महिलाओं से जुड़ी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। अभी तक इन बीमारियों के इलाज के लिए महिलाओं को अलग-अलग अस्पतालों और विशेषज्ञों के पास जाना पड़ता था, लेकिन अब जांच से लेकर उपचार तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी। किशोरियों से महिलाओं तक 100 से अधिक रोगों का इलाज इस नए सेंटर में किशोरियों से लेकर वयस्क महिलाओं तक की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। यहां महिलाओं से जुड़े 100 से अधिक रोगों की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, सेंटर के लिए ग्राउंड फ्लोर और ऊपरी मंजिलों में स्थान तय कर दिया गया है। यहां प्रजनन स्वास्थ्य से लेकर गर्भाशय कैंसर तक की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था होगी। मेनोपॉज और हार्मोनल समस्याओं के लिए विशेष सुविधा काटजू अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. रचना दुबे के अनुसार महिलाओं में आमतौर पर 45 से 50 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज की स्थिति शुरू होती है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिससे हड्डियों से जुड़ी समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। नए सेंटर में इन सभी समस्याओं के लिए विशेष परामर्श, जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इन्फर्टिलिटी और गर्भधारण से जुड़ी समस्याओं का इलाज इस सेंटर में बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं के इलाज पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां पीसीओएस, फाइब्रॉइड, हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्त्री रोगों की जांच आधुनिक तकनीकों के माध्यम से की जाएगी। गर्भधारण में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए आईयूआई जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस सेंटर में वीआईए तकनीक के माध्यम से कैंसर की शुरुआती जांच की जाएगी। इस तकनीक की मदद से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का प्रारंभिक चरण में ही पता लगाया जा सकेगा, जिससे समय रहते इलाज संभव हो सकेगा और महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी। आधुनिक मशीनों से होगा इलाज केगेल चेयर- पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करने वाली मशीन है। जिन महिलाओं को बच्चेदानी या पेल्विक मांसपेशियों के ढीले होने की समस्या होती है, उनमें बिना सर्जरी के उपचार संभव हो सकेगा। कोलपोस्कोप- मशीन के जरिए गर्भाशय ग्रीवा, योनि और संबंधित अंगों की गहन जांच की जाएगी। लेजर मशीन- इसके माध्यम से सिस्ट, मेनोपॉज से जुड़ी समस्याएं और यूरीन लीक जैसी बीमारियों का इलाज आसान हो जाएगा। रोगों की रोकथाम पर रहेगा विशेष फोकस विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेंटर केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं में रोगों की रोकथाम और शुरुआती पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खराब जीवनशैली और बदलती जीवनशैली के कारण महिलाओं में कई स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी शुरुआत अक्सर पीसीओएस जैसी बीमारी से होती है। किशोरियों में बढ़ रही पीसीओएस की समस्या विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में हर चार में से एक किशोरी में पीसीओएस के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वहीं अस्पतालों में आने वाली महिलाओं में भी लगभग आधी महिलाएं इसी समस्या से प्रभावित होती हैं। ऐसे में इस सेंटर के माध्यम से समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिलने से महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा कार्यक्रम भी चलेंगे सेंटर की इंचार्ज डॉ. रचना दुबे के अनुसार इस सेंटर की तैयारी पिछले कई महीनों से की जा रही है और उम्मीद है कि यह क्लीनिक जल्द ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां केवल जांच और इलाज ही नहीं होगा, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।  

भोपाल के 6 प्राइवेट हॉस्पिटल 1 अप्रैल से हो सकते हैं बंद, सीएमएचओ ने रिन्यू न करने पर भेजा नोटिस

भोपाल   राजधानी में लाइसेंस और पंजीयन का नवीनीकरण नहीं कराने वाले आधा दर्जन निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय ने ऐसे 6 अस्पतालों को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2026 के बाद बिना नवीनीकरण के उनका संचालन नहीं किया जा सकेगा. वहीं तय समय में आवेदन नहीं करने पर अब इन अस्पतालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. अस्पतालों के संचालन के लिए यह नियम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भोपाल द्वारा शहर के 6 निजी अस्पतालों को लाइसेंस नवीनीकरण का आवेदन नहीं करने पर नोटिस जारी किया गया है. इन अस्पतालों ने निर्धारित समय सीमा के अंदर अपने अस्पताल के लाइसेंस और पंजीयन के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था. मध्यप्रदेश उपचारगृह व रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (पंजीयन व अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 व नियम 1997 (संशोधित 2021) के तहत निजी स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीयन अनिवार्य है. इस अधिनियम की धारा 3 के अनुसार बिना पंजीयन के किसी भी निजी स्वास्थ्य संस्था का संचालन नहीं किया जा सकता. इन अस्पतालों को जारी किया गया नोटिस सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार लालघाटी चौराहा स्थित जहरा अस्पताल, मोतिया तालाब रोड स्थित सरदार पटेल अस्पताल, कैपिटल पेट्रोल पंप के पास राय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, बीडीए कॉलोनी गोदरमऊ गांधीनगर स्थित हेल्थ केयर हॉस्पिटल, दानिश कुंज कोलार रोड स्थित भगवती गौतम अस्पताल व सोनागिरी पिपलानी पेट्रोल पंप के पास स्थित सचिन ममता अस्पताल को नोटिस जारी किया गया है. ढाई महीने का समय देने के बाद भी नहीं कराया रिन्यू सीएमएचओ कार्यालय से अस्पताल संचालन के लिए पंजीयन और लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है, जो हर तीन वर्ष के लिए जारी किया जाता है. इस वर्ष निजी अस्पतालों और क्लिनिकों को एनएचएस पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने के लिए करीब ढाई महीने का समय दिया गया था, लेकिन इन छह अस्पतालों ने निर्धारित अवधि में नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया. 31 मार्च के बाद होगी कार्रवाई मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने बताया, '' नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के तहत रिन्यूअल आवेदन जमा नहीं करने पर इन अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है. यदि 31 मार्च के बाद भी ये अस्पताल संचालित पाए गए तो उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.'' डॉ. शर्मा ने बताया कि इसके साथ अन्या अस्पतालों का अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है. यदि कोई कमी सामने आती है, तो ऐसे अस्पतालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

मध्य प्रदेश: सरकारी अस्पताल में पहली बार मोटापा क्लिनिक, मरीजों को मिलेगा फ्री इलाज

इंदौर   मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर के शासकीय एमवाय अस्पताल में सोमवार से बेरियेट्रिक (मोटापा) और मेटाबोलिक क्लिनिक की शुरुआत की गई। ये प्रदेश के सरकारी क्षेत्र में अपनी तरह की पहली सुविधा है, जिससे अब मोटापे के मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने क्लिनिक का शुभारंभ करते हुए कहा कि, मोटापा तेजी से गंभीर सामाजिक समस्या बनता जा रहा है। इसके कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं। बदलती जीवनशैली और गलत खान-पान इसकी बड़ी वजह हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों का इलाज निशुल्क किया जाएगा। जहां निजी अस्पतालों में इस सर्जरी का खर्च 4 से 5 लाख रुपए तक आता है। वहीं, अब ये सुविधा एमवाय में मुफ्त उपलब्ध होगी। क्लिनिक में मरीजों की जांच, काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की सुविधा एक ही स्थान पर मिलेगी। लोगों को बड़ी राहत शहर के खजराना में रहने 30 वर्षीय गुल अफशां के अनुसार, सर्जरी के बाद उनका वजन 120 किलोग्राम से घटकर डेढ़ महीने में 97 किलोग्राम हो गया है। इससे डायबिटीज में राहत मिली और अब वो पहले से अधिक स्वस्थ महसूस कर रही हैं। इसी तरह सुषमा भिलवारे का कहना है कि, उनका वजन 103 किलोग्राम से घटकर 70 किलोग्राम हो गया है, जिससे बीपी और अन्य समस्याओं में सुधार हुआ है।

छतरपुर का हाईटेक अस्पताल, 32.50 करोड़ में बनेगा, केंद्रीय AC के साथ मिलेगा बेहतर इलाज

छतरपुर  जिला अस्पताल के इतिहास में एक नया अध्याय जुडऩे जा रहा है। अब मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ग्वालियर, भोपाल या दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। केंद्र सरकार की योजना के तहत करीब 32.50 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार 200 बेड का अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है। यह पांच मंजिला भवन न केवल छतरपुर बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी जीवनदायिनी साबित होगा। 18 हजार वर्ग फीट में फैला आधुनिक चिकित्सा का केंद्र यह भव्य पांच मंजिला अस्पताल करीब 18 हजार वर्ग फीट के विशाल क्षेत्र में निर्मित किया गया है। पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड एसी युक्त इस भवन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां आने वाले मरीजों को किसी निजी कॉर्पोरेट अस्पताल जैसी सुविधाएं मिल सकें। जिला प्रशासन ने आगामी 30 सितंबर को मुख्यमंत्री द्वारा इस ब्लॉक के संभावित उद्घाटन की तैयारियां युद्ध स्तर पर तेज कर दी हैं। इस ब्लॉक के शुरू होते ही जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। सेंट्रल ऑक्सीजन और मॉड्यूलर ओटी इस नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक की सबसे बड़ी ताकत यहां की अत्याधुनिक तकनीक है। भवन में कुल 200 बेड स्थापित किए गए हैं और प्रत्येक पलंग तक सेंट्रल ऑक्सीजन गैस पाइपलाइन पहुंचाई गई है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आपातकालीन स्थिति में ऑक्सीजन सिलेंडरों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। भवन में कुल 5 अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और 2 माइनर ओटी बनाए गए हैं। खास रणनीतिक डिजाइन के तहत ग्राउंड फ्लोर पर ही एक माइनर और एक मॉड्यूलर ओटी रखा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि कोई मरीज सडक़ दुर्घटना, हार्ट अटैक या अन्य गंभीर स्थिति में आता है, तो उसे ऊपरी मंजिल पर ले जाने में वक्त गंवाए बिना तत्काल सर्जरी की सुविधा मिल सके। आईसीयू, कार्डियो और डायलिसिस की एकीकृत सुविधाएं भवन के भीतर सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। इसमें महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू)- गंभीर मरीजों के लिए उन्नत लाइफ सपोर्ट सिस्टम। कार्डियो यूनिट- हृदय रोगियों के लिए त्वरित उपचार और मॉनिटरिंग। डायलिसिस केंद्र- गुर्दा रोगियों के लिए आधुनिक मशीनों के साथ डायलिसिस की सुविधा। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य- बच्चों के लिए विशेष एसएनसीयू और पीएनसी वार्ड के साथ उच्च स्तरीय लेबर रूम। मरीजों की सुविधा के लिए 5 लिफ्ट और विशाल रैंप अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। भवन में कुल 5 लिफ्ट लगाई गई हैं, ताकि आवाजाही में भीड़ न हो। साथ ही, एक विशाल स्ट्रेचर रैंप भी बनाया गया है ताकि बिजली गुल होने या तकनीकी खराबी की स्थिति में मरीजों को स्ट्रेचर के माध्यम से सुरक्षित ऊपर-नीचे ले जाया जा सके। रेफर केस घटेंगे सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने बताया कि प्रारंभ में भवन की अनुमानित लागत 29.81 करोड़ रुपए थी, लेकिन मरीजों के हित में जोड़ी गई अतिरिक्त आधुनिक सुविधाओं और उपकरणों के कारण यह लागत बढकऱ 32.50 करोड़ रुपए तक पहुंची है। इस ब्लॉक के संचालन से जिला अस्पताल के पास पहले से उपलब्ध करोड़ों रुपए की हाईटेक मशीनों का पूर्ण सदुपयोग हो सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिले से होने वाले रेफर केसों में भारी कमी आएगी, जिससे गरीब परिवारों का आर्थिक बोझ भी कम होगा।

मौसम की मार से बिगड़ रही सेहत, इंदौर के अस्पतालों में रोज पहुंच रहे सैकड़ों मरीज

इंदौर मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। दिन में तेज धूप और गर्मी बढ़ी जबकि रात में ठंडक के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है। इसका सीधा असर वायरल फीवर के रूप में सामने आ रहा है। एमवाय अस्पताल में ही एक दिन में करीब एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। शहर के शासकीय और निजी अस्पतालों में बुखार, सर्दी-खांसी, गले में खराश और बदन दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय मौसम का उतार-चढ़ाव संक्रमण के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। दिन में पसीना और रात में ठंडी हवा चलने से लोग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। खासतौर पर वे लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जो देर रात तक बाहर रहते हैं या ठंड-गर्मी के बीच लापरवाही बरतते हैं।   शादियों का सीजन भी बढ़ा रहा खतरा इन दिनों शादी समारोह का सीजन चल रहा है। देर रात तक कार्यक्रमों में शामिल होना, ठंडी चीजें खाना, नींद पूरी न होना और भीड़भाड़ में समय बिताने से भी वायरल संक्रमण फैलने की बड़ी वजह सामने आई है। डाक्टरों के अनुसार कई लोग हल्का बुखार या सर्दी होने के बाद भी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो रही है। संक्रमण परिवार के अन्य लोगों तक भी फैल रहा है। गंभीर बीमारियों वाले मरीजों के लिए ज्यादा जोखिम शुगर, बीपी, कैंसर, ह्दय रोग, लिवर, अस्थमा, गर्भवती महिलाओं और किडनी से संबंधित बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। वायरल फीवर होने पर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों की रिकवरी धीमी हो जाती है। कई बार उनकी स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ रहा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण संक्रमण का असर ज्यादा समय तक बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर डॉक्टरों के अनुसार छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी वायरल फीवर के मामले बढ़ रहे हैं। तापमान में अचानक बदलाव से उनकी इम्युनिटी जल्दी प्रभावित होती है, जिससे बुखार और खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बचाव ही सबसे बड़ा इलाज इस मौसम में हल्के गर्म कपड़े साथ रखना, ठंडी चीजों से परहेज करना और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतना जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, फल-सब्जियां और भरपूर नींद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।