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कांग्रेस ने कसा शिकंजा: पार्टी में ‘अनुशासन अभियान’ 2 नवंबर से

चंडीगढ़
हरियाणा कांग्रेस में अब ‘अनुशासन की घंटी’ बज चुकी है। पार्टी अब ‘मनमानी की राजनीति’ नहीं, बल्कि ‘मर्यादा की राजनीति’ की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। चरखी दादरी में मनीषा सांगवान के समर्थकों द्वारा प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की मौजूदगी में किए गए हंगामे और नारेबाजी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को झकझोर कर रख दिया। यह घटना सिर्फ एक संगठनात्मक असहमति नहीं, बल्कि कांग्रेस की अनुशासन परंपरा पर सीधा सवाल थी और इसी ने पार्टी हाईकमान को ‘एक्शन मोड’ में ला दिया।

तीन दिन पहले ही कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने हरियाणा के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति का गठन किया है। अब 2 नवंबर को चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में इस समिति की पहली अहम बैठक होने जा रही है। बैठक में तय होगा कि हरियाणा कांग्रेस में अब आगे अनुशासन तोड़ने वालों का क्या अंजाम होगा। यह बैठक केवल औपचारिक नहीं, बल्कि संगठन के भीतर ‘संविधान से ऊपर कोई नहीं’ का संदेश देने वाली सख्त शुरुआत मानी जा रही है।

इस समिति की कमान पूर्व सांसद और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धर्मपाल सिंह मलिक को सौंपी गई है। उन्हें पार्टी में संयम और सख्ती दोनों के प्रतीक के तौर पर देखा जा सकता है। उनके नेतृत्व में 2 अक्तूबर को होने वाली बैठक में समिति की कार्यप्रणाली तय की जाएगी। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में बैठकों की तैयारी जोरों पर है और समिति के सभी सदस्यों को औपचारिक सूचना भेज दी गई है। समिति की घोषणा के बाद ही अब इसकी पहली रणनीतिक बैठक को लेकर संगठन के भीतर हलचल तेज है।

बैठक में नहीं होंगे हुड्डा और राव
यह बैठक केवल समिति सदस्यों की होगी, जिसमें प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा शामिल नहीं होंगे। राव नरेंद्र सिंह ने खुद निर्देश दिया है कि समिति पूरी तरह स्वायत्त होकर अपने फैसले और प्रक्रिया तय करे। सूत्रों का कहना है कि राव पिछले कुछ हफ्तों से अनुशासन और जवाबदेही को लेकर बेहद गंभीर हैं। चरखी दादरी की घटना के बाद उन्होंने साफ कहा था – ‘पार्टी की गरिमा सर्वोपरि है। कांग्रेस में कोई भी नेता या कार्यकर्ता संगठन से बड़ा नहीं हो सकता। अगर हम खुद पर नियंत्रण नहीं रखेंगे, तो जनता पर भरोसा कैसे कायम करेंगे।’ राव का यह बयान हरियाणा कांग्रेस में एक ‘नई कार्यशैली’ की नींव माना जा रहा है, जिसमें संगठन पहले, व्यक्ति बाद में होगा।

समिति यानी अनुभव और कानून की जोड़ी
समिति का गठन बेहद सोच-समझकर किया गया है। इसमें राजनीतिक अनुभव और कानूनी दृष्टि का संतुलित मेल दिखता है। चेयरमैन धर्मपाल सिंह मलिक के साथ जगाधरी विधायक अकरम खान, पूर्व सांसद कैलाशो सैनी और पूर्व विधायक अनिल धन्तौड़ी शामिल हैं। वहीं अंबाला सिटी के वरिष्ठ अधिवक्ता रोहित जैन को सदस्य सचिव बनाया गया है ताकि अनुशासनात्मक मामलों में कानूनी स्पष्टता और प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके।

मनीषा सांगवान विवाद ने खींची लकीर
चरखी दादरी की घटना ने पार्टी में गहरी प्रतिक्रिया पैदा की थी। जब मनीषा सांगवान के समर्थकों ने सार्वजनिक मंच पर प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र की मौजूदगी में नारेबाजी की, तो कांग्रेस नेतृत्व ने इसे सीधा अनुशासन भंग माना। प्रदेश प्रभारी और केंद्रीय नेताओं ने इसे ‘संगठनात्मक मर्यादा के उल्लंघन’ के तौर पर देखा और तुरंत सख्ती के निर्देश दिए। इसी घटना के बाद यह समिति बनी ताकि आगे से किसी भी स्तर पर ‘भीड़ की राजनीति’ या ‘गुटों का दबाव’ पार्टी अनुशासन से ऊपर न जा सके।

‘डिसिप्लिन कोड’ का खाका होगा तैयार होगा
बैठक में समिति ‘डिसिप्लिन कोड’ तैयार कर सकती है, जिसमें पहली गलती पर चेतावनी। दोहराने पर निलंबन और और बार-बार उल्लंघन करने पर निष्कासन जैसी तीन स्तरीय दंड प्रक्रिया प्रस्तावित की जा सकती है। साथ ही, समिति यह भी तय करेगी कि सोशल मीडिया पर अनुशासनहीन बयानबाजी, कार्यक्रमों में विरोध प्रदर्शन या वरिष्ठ नेताओं के प्रति असम्मानजनक व्यवहार को किस श्रेणी में रखा जाएगा।

कमेटी की भी अपनी सीमाएं
कांग्रेस संविधान के अनुसार, राज्य अनुशासन समिति विधायकों, पूर्व विधायकों, प्रदेश, जिला और ब्लॉक पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। लेकिन एआईसीसी सदस्यों, सांसदों और राष्ट्रीय पदाधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई का अधिकार नहीं है। ऐसे मामलों में समिति सिफारिशें तैयार कर पार्टी हाईकमान को भेजेगी। इससे यह स्पष्ट है कि समिति का मकसद ‘संगठन में डर नहीं, व्यवस्था पैदा करना’ है ताकि हर स्तर पर अनुशासन एक समान मानदंड से लागू हो।

अनुशासन ही कांग्रेस की आत्मा है : धर्मपाल मलिक
समिति चेयरमैन धर्मपाल सिंह मलिक ने कहा कि यह बैठक केवल दंडात्मक नहीं होगी, बल्कि संगठनात्मक मर्यादा को पुनर्स्थापित करने का संकल्प होगी। कांग्रेस में अनुशासन ही असली पहचान है, और जो इसे बनाए रखेगा वही संगठन का सच्चा सिपाही कहलाएगा। उन्होंने कहा कि कमेटी किसी गुट या व्यक्ति को निशाना नहीं बनाएगी, बल्कि यह सुनिश्चित करेगी कि हर कार्यकर्ता पार्टी के संविधान के दायरे में काम करे।

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