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अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण संबंधी योजनाओं पर संसदीय समिति का अध्ययन दौरा

जनजातीय क्षेत्रों में साक्षरता और कौशल बढ़ाने पर जोर

भोपाल
अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण संबंधी योजनाओं के लिए मध्यप्रदेश के अध्ययन दौरे पर आई संसदीय समिति ने गुरूवार को भोपाल में इन वर्गों के कल्याण की योजनाओं एवं उनकी वर्तमान सामाजिक आर्थिक स्थिति की समीक्षा की। बैठक की अध्यक्षता सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने की। संसदीय समिति ने जनजातीय क्षेत्र में साक्षरता दर बढ़ाने, जनजातीय एवं अनुसूचित वर्गों के विद्यार्थियों को कौशल संपन्न बनाने और मैदानी स्तर पर उनकी कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन करने की अपेक्षा की।

राज्य शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल एवं पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना ने संसदीय समिति के सदस्यों को शासन के निर्णयों एवं कार्य योजनाओं से अवगत कराया। समिति के सदस्यों ने मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और जनजातियों के विकास की योजनाओं, जल जीवन मिशन के कार्यों, केन्द्रीय बजट के व्यय की स्थिति, विभिन्न विभागों में पदों की स्थिति एवं प्रतिनिधित्व, रोजगार, स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी मुद्दे, संविधान के अनुच्छेद 275 के अंतर्गत दिए बजट के उपयोग, वन अधिकार, पेसा कानून के क्रियान्वयन, अनुसूचित जाति/जनजाति के विरुद्ध अपराध की रोकथाम संबंधी कानून पर चर्चा की। समिति को म.प्र. में योजनाओं के क्रियान्वयन संबंधी और प्रगति से अवगत कराया गया।

अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल ने अध्ययन समिति को प्रशासन की नीतियों एवं योजनाओं से अवगत कराते हुए बताया कि संविधान की भावना के अनुरूप नीतियाँ और योजनाएं बनाई जा रही है। अनुसूचित जाति, जनजातियों के विरुद्ध संभावित अपराधों को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को सशक्त किया गया है। सरकारी नौकरियों, पदोन्नतियों में प्रतिनिधित्व का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य श्री गुलशन बामरा ने संसदीय समिति को अवगत कराया कि पीएम जनमन अभियान में प्रदेश को 7300 करोड रुपए की प्रावधानित राशि मिली है। विगत 5 वर्षों में 812 करोड रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं और प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना में 499 करोड रुपए स्वीकृत किए गए। पीएम जनमन में हितग्राहीमूलक योजना में आधार कार्ड, जन धन बैंक खाता, आयुष्मान भारत, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि, राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने में प्रदेश ने 100% उपलब्धि हासिल की है।

दूरस्थ गांव में मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित है। शिक्षा के लिए 106 छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत 704 आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए हैं और 135 नए केंद्रों का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। इनमें से 628 संचालित है। हर घर नल से जल योजना में 8 लाख 43 हजार जनजातीय परिवारों के घरों में नल से जल पहुंच रहा है। दूरस्थ गांव में मोबाइल नेटवर्क के लिए मोबाइल टॉवर स्थापित किये जा रहे हैं।

वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रगति की जानकारी देते हुए प्रमुख सचिव श्री बामरा ने समिति सदस्यों को बताया कि 2 लाख 89 हजार दावों को मान्य किया गया है और 87 हजार दावों का दोबारा परीक्षण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 28 हजार से ज्यादा सामुदायिक वन अधिकारों को मान्य किया गया है।

संसदीय समिति के सदस्यों में श्रीमती प्रतिमा मंडल, श्री अर्जुन कुमार सागर, श्री जगन्नाथ सरकार, श्री हरिश्चंद्र मीणा, श्री गोविंद मुकथप्पा करजोल, श्री दग्गुमल्ला प्रसाद राव, एडवोकेट श्री चंद्रशेखर, श्री विष्णु दयाल राम लोकसभा से और राज्यसभा से श्रीमती सुमित्रा बाल्मिक, श्री मिथलेश कुमार, श्री रवांगारा नार्जरी, श्रीमती फुलो देवी नेताम, श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. वी. स‍विदासन, श्रीमती ममता ठाकुर शामिल थे। राज्य शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव पंचायत श्रीमती दीपाली रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्री मनीष सिंह, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त अनुसूचित जाति श्री सौरभ कुमार सुमन एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। आयुक्त जनजातीय विकास अधिकारी श्री श्रीमन शुक्ला ने बैठक का संचालन किया। 

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