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ट्रैफिक नियम तोड़े तो तैयार रहें: हाईकोर्ट ने E-Challan सिस्टम को दी कड़ी मंजूरी

पंजाब 
पंजाब के वाहन चालकों से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। ई-चालान को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला लिया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को साफ कहा है कि ई-चालान प्रणाली लागू करने में अब टालमटोल नहीं चलेगी। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की बेंच ने ये आदेश पंजाब में ई-चालान को पूरी तरह लागू करने की मांग वाली एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिए।

याचिका में कहा गया कि 2019 में मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव के बाद ई-चालान की संख्या बढ़ी है, लेकिन लोगों को अभी भी चालान फाइल करने के लिए कोर्ट या ऑफिस में फिजिकली जाना पड़ता है। याचिका में दलील दी गई कि हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ में पहले से ही नेशनल वर्चुअल कोर्ट पोर्टल हैं, जिनके जरिए लोग छोटे चालान ऑनलाइन भर सकते हैं। पंजाब में इस देरी को 'समझ से बाहर' बताते हुए, पूरे राज्य में इस सिस्टम को लागू करने की मांग की गई। सुनवाई के दौरान NIC ने बताया कि अभी HLR ई-चालान एप्लीकेशन सिर्फ मोहाली में काम कर रहा है। इसका कारण यह है कि ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने अभी तक दूसरे जिलों के लिए फॉर्मल अपील नहीं भेजी है। NIC अधिकारियों ने कहा कि राज्य जिस भी जिले के लिए अपील भेजेगा, वहां 2 हफ्ते के अंदर एप्लीकेशन एक्टिवेट हो जाएगी।

NIC ने यह भी साफ किया कि ई-चालान लागू करने का प्रोसेस 2 हिस्सों में बंटा हुआ है। पहला, जनरल लाइन एप्लीकेशन जिसे ई-कमेटी की मंजूरी के बिना तुरंत सेट अप किया जा सकता है। राज्य को बस अपील और इंफ्रास्ट्रक्चर देना होगा। दूसरा हिस्सा वह खास मॉड्यूल है जिसकी मांग राज्य ने की है, जिसके लिए ई-कमेटी की मंजूरी जरूरी है। यह प्रोसेस रजिस्ट्रार जनरल और हाई कोर्ट की टीम के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा। सुनवाई के दौरान यह भी सुझाव दिया गया कि रजिस्ट्रार जनरल को ज़रूरी पार्टी बनाया जाए ताकि पूरा मामला ई-कमेटी तक ठीक से पहुंच सके। NIC ने एक बार फिर दोहराया कि बेसिक ई-चालान एप्लीकेशन तुरंत लागू किया जा सकता है, बशर्ते राज्य फॉर्मल अपील भेजे।
 
जालंधर और अमृतसर में भी पूरा हो चुका काम
राज्य की ओर से पेश वकील ने कहा कि जालंधर और अमृतसर में ई-चालान से जुड़ा ज़्यादातर टेक्निकल काम पूरा हो चुका है। लुधियाना में कैमरे और इक्विपमेंट लगा दिए गए हैं। उन्होंने माना कि कुछ टेक्निकल दिक्कतों की वजह से देरी हुई है, लेकिन राज्य सभी जिलों में ई-चालान के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर देने के लिए पूरी तरह से कमिटेड है। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट पर भी नाराजगी जताई और पूछा कि पहले फाइल की गई रिपोर्ट में इन बातों का ज़िक्र क्यों नहीं किया गया। राज्य ने कहा कि ये डेवलपमेंट हाल ही में हुए हैं और पैराग्राफ-वाइज़ जवाब देने के लिए और समय चाहिए। कोर्ट ने इसे मानते हुए कड़ा रुख दिखाया और कहा कि अगली तारीख तक डिटेल में जवाब फाइल करना होगा।

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