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कपिल देव ने खोले राज: इन 3 कमजोरियों से टूटा भारत का ‘अभेद किला’

नई दिल्ली 
भारत को साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। कभी विदेशी टीमें भारतीय सरजमीं पर एक टेस्ट मैच जीतने को तरसती थी, ऐसे में पिछले 12 महीनों में दूसरी बार क्लीन स्वीप होना शर्मसार कर देने वाला है। भारतीय क्रिकेट को निचले स्तर पर देख कई दिग्गज लताड़ लगा रहे हैं तो कई कमजोरियां उजागर कर रहे हैं। इस बीच कपिल देव ने उन 3 कमजोरियों के बारे में बताया है जिन पर काम कर भारतीय टीम एक बार फिर अपने घर को अभेद किला बना सकती है। इनमें सबसे पहले खिलाड़ियों को डोमेस्टिक क्रिकेट खेलना, दूसरा टेस्ट मैच के लिए बेहतर पिचें बनाना और तीसरा व्हॉइट बॉल क्रिकेट के बढ़ते मैचों को रोकना शामिल है।
 
कपिल देव ने भारत की हार पर स्पोर्टस्टार से कहा, "ऐसा इसलिए था क्योंकि उनका अपना स्टाइल, फुटवर्क था, और यह बात भी कि उन्होंने अलग-अलग पिचों पर अच्छा डोमेस्टिक क्रिकेट खेला था। मैं बस यह जानना चाहता हूं कि आज के कितने टॉप खिलाड़ी डोमेस्टिक क्रिकेट खेल रहे हैं। यह सबसे जरूरी बात है। अगर आप डोमेस्टिक क्रिकेट नहीं खेलते हैं और अच्छे बॉलर्स का सामना नहीं करते हैं, तो आपको स्ट्रगल करना पड़ेगा।"

1983 वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान कपिल देव ने कोलकाता में पहले टेस्ट के लिए तैयार पिच की भी आलोचना की, जहां मैच तीन दिन के अंदर खत्म हो गया था। उन्होंने कहा कि आज के जमाने में जहां ज्यादातर ध्यान व्हाइट-बॉल क्रिकेट पर है, बल्लेबाज़ों को गेंदबाजों के लिए आसान पिचें नहीं मिलतीं और इसलिए वे मुश्किल हालात का सामना नहीं कर पाते।

उन्होंने कहा, “पिचें बहुत, बहुत जरूरी हैं। ऐसी नहीं जहां खेल ढाई दिन में खत्म हो जाए। आप टॉस हारते हैं और खेल हार जाते हैं। ऐसी पिच का क्या मतलब है जहां कोई भी टीम 200 रन पार न करे? यह पांच दिन के खेल के लिए अच्छा नहीं है। हम T20 और ODI में ज्यादा बिजी रहते हैं, जिसका मतलब है कि बैट्समैन को बॉलर-फ्रेंडली पिचों का सामना मुश्किल से ही करना पड़ता है। स्पिन और सीम को बहुत मदद देने वाली सतहों पर, आपको आगे बढ़ने के लिए सब्र और अलग तरह के स्किल्स की जरूरत होती है।”

 

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