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भारत की नई दवा ने बढ़ाई उम्मीदें, कैंसर उपचार होगा और भी प्रभावी

नई दिल्ली

लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों का जोखिम बढ़ा दिया है। डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं अब काफी आम हो गई हैं। कैंसर के मामले भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि कैंसर के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है।

साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में कैंसर से लगभग 9.7 मिलियन (97 लाख) मौतें हुईं। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि साल 2050 तक यह आंकड़ा बढ़कर 18.2 मिलियन (1.82 करोड़) होने का अनुमान है।

अध्ययनों से पता चलता है कि कैंसर से होने वाली लगभग एक-तिहाई मौतें तंबाकू-शराब के सेवन, हाई बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण होती हैं। 2022 में फेफड़े, ब्रेस्ट और कोलोरेक्टल कैंसर के कारण सबसे ज्यादा मौतें हुईं।

एक-दो दशकों पहले की तुलना में मेडिकल साइंस में हुई प्रगति और आधुनिक उपचार विधियों ने कैंसर के इलाज को काफी आसान बना दिया है। इसी क्रम में दवा बनाने वाली कंपनी ल्यूपिन को इलाज के लिए असदार मानी जानी वाली दवा के लिए मंजूरी मिल गई है। इससे कैंसर के इलाज की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कैंसर की दवा को मिली मंजूरी
दवा बनाने वाली कंपनी ल्यूपिन ने सोमवार (1 दिसंबर 2025) को बताया कि उसे कैंसर के मरीजों में न्यूट्रोपेनिया के इलाज की बायोसिमिलर दवा के लिए यूएस हेल्थ रेगुलेटर से मंज़ूरी मिल गई है।

मुंबई स्थित इस कंपनी ने एक बयान में कहा कि यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने आर्मलुपेग (पेगफिलग्रास्टिम-उन्ने) 6 mg/0.6 mL इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है। न्यूलास्टा (पेगफिलग्रास्टिम) इंजेक्शन के बायोसिमिलर के तौर पर इस सिंगल-डोज प्रीफिल्ड सिरिंज से कैंसर के इलाज में मदद मिलने की उम्मीद है।

कैंसर का इलाज होगा सस्ता और आसान
ल्यूपिन की सीईओ विनीता गुप्ता ने कहा, "यह कदम मरीजों को ज्यादी सस्ती और आसानी से मिलने वाली दवाएं देने के ल्यूपिन के उद्देश्य की दिशा में एक अहम कदम है। हम अगले कुछ वर्षों में बायोसिमिलर का एक मजबूत पोर्टफोलियो लाने की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे मरीजो की देखभाल की क्वालिटी बेहतर करने में मदद मिलेगी।

 

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