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कनाडा में सख्त आव्रजन नियमों का असर, 55 हजार लोगों को किया गया देश से बाहर

हलवारा

आव्रजन नियमों में सख्ती और डिपोर्टेशन के कारण कनाडा की जनसंख्या में ऐतिहासिक गिरावट आई है। सरकार की ओर से 2025 में 55,000 से अधिक लोगों को डिपोर्ट करने और आव्रजन प्रतिबंधों के कारण 4 करोड़ 18 लाख की आबादी वाला कनाडा अब तक की सबसे बड़ी जनसंख्या कमी से जूझ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार कनाडा की जनसंख्या घटकर 4 करोड़ 16 लाख हो गई है जो जनसंख्या में गिरावट के रूप में इतिहास में दर्ज की गई है।

आव्रजन नीति में सख्ती से कनाडा के शिक्षा क्षेत्र पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है। शिक्षण संस्थानों में सन्नाटा छा गया है और कई निजी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कटौती की गई है। पगार देने में असमर्थ होने के कारण कई संस्थान सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन हालात में सुधार की कोई उम्मीद नहीं दिखती। इससे वहां के शैक्षणिक माहौल में भी मंदी आई है।

कनाडा में शरणार्थियों की बढ़ती संख्या भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। यूक्रेन, अफगानिस्तान और कई मुस्लिम देशों से आए लाखों शरणार्थियों का बोझ कनाडा की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। इन शरणार्थियों को प्रति माह 2,000 से 2,500 डॉलर का भत्ता और रहने की सुविधाएं देने से सरकार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों से हुई अरबों डॉलर की कमाई का बड़ा हिस्सा इन शरणार्थियों की देखभाल पर खर्च हो रहा है। इससे मूल निवासियों में असंतोष बढ़ा है और बेरोजगारी दर में वृद्धि हुई है।

आव्रजन नीति में बदलाव

कनाडा की प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में आव्रजन नीति में बड़े बदलाव आए हैं। 2022 में, पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 2023 से 2025 तक 15 लाख प्रवासियों को स्वीकार करने का लक्ष्य रखा था लेकिन कार्नी सरकार के आने के बाद यह लक्ष्य घटाकर 12 लाख कर दिया गया। 

अक्तूबर 2024 में नए लक्ष्य के तहत 2026 और 2027 के लिए आव्रजन लक्ष्यों में भी कटौती की गई। इसके परिणामस्वरूप, कनाडा के शिक्षा और श्रम बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कनाडा में शरणार्थी आवेदन की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। 2022 में 161,000 शरण आवेदन दर्ज किए गए थे जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 505,000 तक पहुंचने की संभावना है। इससे कनाडा की आर्थिक स्थिति पर और दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद, शरणार्थियों के लिए पहले की उदार नीतियों का असर आज कनाडा की स्थिति पर साफ नजर आ रहा है।

सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ा

कनाडा में शरणार्थियों की संख्या बढ़ने से सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ा है। शरणार्थियों को भत्ता देने और आवास की व्यवस्था करने में कनाडा की सरकार को भारी खर्च उठाना पड़ रहा है, जो देश की आर्थिक हालत को और भी कमजोर कर रहा है।

 

 

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