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पंजाब में गहराया गेहूं भंडारण संकट, केंद्र से अनाज की आवाजाही तेज करने की मांग

चंडीगढ़.

पंजाब के अनाज से भरे गोदामों में जगह न होने से टेंशन बढ़ती जा रही हैं, जबकि दूसरी ओर से केंद्र सरकार से मिल रहे ठंडे रिस्पांस के कारण अप्रैल के अंत और मई के पहले हफ्ते तक मुश्किलें बढ़नी तय है। इसका कारण यह है कि मंडियों में आने वाली संभावित 125 लाख टन गेहूं में से 50 लाख टन गेहूं को रखने के लिए जगह नहीं है।

मंडियों में शेड को भी अगर अंतिम समय में ओपन प्लिंथों में बदल दिया जाए तो भी मुश्किल से 12 से 15 लाख टन जगह ही बन पाएगी। इसको लेकर पंजाब सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से यह मुद्दा केंद्र सरकार के पास उठाने का आग्रह किया है, ताकि 15 फरवरी से लेकर 15 अप्रैल तक अनाज की मूवमेंट को तेज करके गोदामों में जगह बनाई जा सके। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव राहुल तिवारी ने कहा है कि मुख्यमंत्री पहले भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के मंत्री प्रल्हाद जोशी के पास यह मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने आश्वासन दिया था कि आने वाले दिनों में पंजाब से चावल और गेहूं की दूसरे राज्यों में मूवमेंट बढ़ाई जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

आज भी मात्र पांच-पांच लाख टन चावल और गेहूं लिया जा रहा है। इससे पंजाब की समस्या खत्म नहीं होगी, क्योंकि दो महीने बाद पंजाब की मंडियों में 125 लाख टन गेहूं आने की उम्मीद है। जबकि हमारे पास पिछले साल का ही अभी 50 लाख टन गेहूं पड़ा हुआ है। राहुल तिवारी ने बताया कि 75 लाख टन गेहूं को ओपन प्लिंथ और साइलोज व कवर्ड गोदामों में रखने के लिए हमारे पास क्षमता है, लेकिन हमारी चिंता 50 लाख टन को लेकर है। उन्होंने कहा कि यह छोटी मात्रा नहीं है। यह बहुत बड़ी समस्या है और केंद्र सरकार को पंजाब से कम से कम इन दो महीनों,फरवरी और मार्च में 25 लाख टन से ज्यादा गेहूं यहां से दूसरे राज्यों को भेजने की व्यवस्था करनी होगी। गौरतलब है कि अगर अप्रैल माह तक मूवमेंट न हुई तो 15 अप्रैल के बाद मंडियो में आने वाली फसल को संभालना ही मुश्किल हो जाएगा। खरीद करते समय ढुलाई की समस्या आएगी और ढुलाई न होने से किसानों में रोष फैलना तय है।

क्यों बढ़ रही है दिक्कत
गौरतलब है कि देश के अन्य भागों में भी अब गेहूं और चावल उनकी जरूरतों के मुताबिक पैदा होना शुरू हो गया है। पंजाब में यह क्षमता से ज्यादा पैदा हो रहा है। देश में पैदावार 1,000 लाख टन की है जबकि जरूरत 700 लाख टन की है। ऐसे में या तो किसानों को कहकर इन दोनों फसलों का रकबा कम करना होगा या फिर इनका निर्यात खोलना होगा। हालांकि, कई राज्यों ने केंद्र सरकार को यह सुझाव भी दिया है कि जिन लोगों को निशुल्क अनाज मिलता है उसकी मात्रा 40 प्रतिशत बढ़ा दी जाए। इस समय प्रति व्यक्ति पांच किलो गेहूं या चावल देने का प्रावधान है, जिसको 7 किलो किया जा सकता है। इससे काफी मात्रा में अनाज गोदामों से निकल सकता है।

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