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बिहार में पशुपालन मित्रों की नियुक्ति से ग्रामीण युवाओं को मिलेगा रोजगार

जहानाबाद.

पशु पालन विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक अहम पहल की जा रही है। सरकार की पशुपालन मैत्री योजना अब धरातल पर उतरने वाली है। जिसके तहत पंचायत स्तर पर स्थानीय युवाओं को जोड़कर न केवल उन्हें रोजगार दिया जाएगा, बल्कि पशुपालकों को भी प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जाएगा।

इस योजना का उद्देश्य पशुपालन को वैज्ञानिक आधार पर सशक्त बनाना और गांवों में ही पशु स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित युवाओं को पशुओं के कृत्रिम गर्भधारण तथा सामान्य पशु रोगों की पहचान और प्राथमिक उपचार का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में सेवाएं दे सकें। वर्तमान में जिले में पशुपालन विभाग से जुड़े केवल 16 कर्मी कृत्रिम गर्भधारण का कार्य कर रहे हैं,जो बढ़ती मांग के अनुरूप अपर्याप्त माने जा रहे हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए अब पंचायत स्तर पर इस योजना का विस्तार किया जा रहा है।

प्रावधान के अनुसार,प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक और अधिकतम तीन पशुपालन मैत्री नियुक्त किए जाएंगे। चयनित युवा अपने ही गांव अथवा आसपास के क्षेत्रों में कार्य करेंगे,जिससे पशुपालकों को गर्भधारण सेवाओं के लिए दूर-दराज भटकना नहीं पड़ेगा। समय पर सेवा मिलने से पशुओं की दूध उत्पादन में सुधार होगा और पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होगी। जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया की इस योजना उद्देश्य दोहरा है। एक ओर पशुपालकों को सुलभ, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना,वहीं दूसरी ओर ग्रामीण स्तर पर शिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जुड़ने का मौका मिलेगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद पशुपालन मैत्री पंचायत में पशुपालकों के लिए संपर्क सूत्र की तरह कार्य करेंगे और विभाग की योजनाओं को गांव तक पहुंचाने में भी सहायक बनेंगे।

पशुपालन मैत्री योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल बेरोजगारी कम होगी,बल्कि पशुपालन एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में और अधिक विकसित होगा। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जल्द ही जिले में इस योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया जाएगा।

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