भोपाल
अपर मुख्य सचिव गृह और संस्कृति शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि जिलों में लगातार पुलिस की सक्रिय भागीदारी और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा रहा है। जब महिलाएं सुरक्षित होती हैं, तब सब सुरक्षित होते हैं। महिला पर्यटक सहित हर महिला और बच्चे का विश्वास, जमीनी स्तर तक सुरक्षित रहना चाहिए। अपर मुख्य सचिव शुक्ला एमपीटी होटल पलाश में मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड (एमपीटीबी), पुलिस विभाग और यूएन वूमेन के समन्वय से आयोजित “पर्यटन स्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा पुलिस की भूमिका और रणनीति” विषय पर तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
अपर मुख्य सचिव शुक्ला ने कहा कि पर्यटन विभाग, पुलिस विभाग के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर पर्यटन स्थल पर सुरक्षा तंत्र प्रभावी रूप से कार्य करे। “निर्भया फ्रेमवर्क” जैसी पहल और कैमरा निगरानी प्रणाली में 19 करोड़ रुपये के निवेश से मध्यप्रदेश को महिला सुरक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा सुशासन की प्राथमिकता है। यह पर्यटन विकास और जनता के विश्वास से सीधे संबद्ध है।
सचिव पर्यटन एवं प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैया राजा टी. ने कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला प्रमुख क्षेत्र है, इसलिए पर्यटकों की सुरक्षा सबसे आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लोगों में पर्यटन की इच्छा बढ़ रही है। सुरक्षा की भावना, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा, पर्यटन ग्रोथ का निर्णायक कारक है। पुलिस विभाग और यूएन वूमेन सामंजस्य से सकारात्मक वातावरण निर्मित होगा।
सचिव डॉ. इलैया ने बताया कि पर्यटन बोर्ड महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दे रहा है। महिलाओं को ड्राइवर, गाइड और होम-स्टे संचालक के रूप में आगे लाया जा रहा है, क्योंकि सशक्त महिलाएं सुरक्षित पर्यटन स्थलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके साथ ही समुदाय स्तर पर महिलाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, ताकि उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़े और जमीनी स्तर पर सहभागिता मजबूत हो। उल्लेखनीय है कि “सेफ टूरिस्ट डेस्टिनेशन फॉर वीमेन” परियोजना के तहत तीन दिवसीय कार्यशाला 28 फरवरी तक आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना और पूरे प्रदेश में महिला यात्रियों के लिए सुरक्षित व संवेदनशील वातावरण सुनिश्चित करना है।
कार्यशाला में विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) पीएचक्यू भोपाल अनिल कुमार, पुलिस उप महानिरीक्षक (महिला सुरक्षा शाखा) संतोष गौर, पुलिस उप महानिरीक्षक (महिला सुरक्षा शाखा) मती किरणलता केरकेट्टा, पुलिस अधीक्षक (महिला सुरक्षा) सु बीना सिंह और सु स्वाति मुराव सहित गृह विभाग, पुलिस विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला के पहले दिन पर्यटन विभाग ने समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल के तहत महिलाओं की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए की जा रही पहलों की जानकारी दी। पुलिस विभाग के द्वारा कानूनी प्रावधानों, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली, हेल्पलाइन तंत्र और जेंडर-संवेदनशील पुलिसिंग की कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। साथ ही धार्मिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, पुरातात्विक स्थल, वन क्षेत्र, बड़े आयोजन, एडवेंचर पर्यटन, आतिथ्य संस्थान और साइबर से जुड़ी चुनौतियों जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
शुक्रवार और शनिवार के सत्रों में केस स्टडी, व्यवहारिक अभ्यास और रणनीति आधारित चर्चा होगी, जिनके माध्यम से राज्य के पर्यटन तंत्र में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए ठोस और लागू करने योग्य उपाय तैयार किए जाएंगे।





