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ईरान ने 14 दिन की जंग में US को भीख मंगवाया, दुबई बना घोस्ट टाउन! अमीरों ने छोड़ा ‘सबसे सुरक्षित’ शहर

दुबई
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग के कारण दुबई में अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। पहले दुनिया के सबसे सुरक्षित और चमकदार शहरों में शुमार दुबई अब लगभग खाली नजर आ रहा है। विदेशी निवासी और पर्यटक बड़े पैमाने पर शहर छोड़ चुके हैं, जबकि बीचेस, पार्टी पूल, बीच क्लब और रेस्तरां सुनसान पड़े हैं। केवल स्थानीय मजदूर वर्ग ही बचा हुआ है जो अब खाली जगहों पर काम कर रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, शहर की यह स्थिति ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों के हमलों से पैदा हुई है।

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद, ईरान ने पलटवार करते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। यूएई (अबू धाबी और अन्य इलाकों) में अमेरिकी बेस होने के कारण, ईरान ने यहां सैकड़ों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इसी तनाव ने दुबई की चकाचौंध को खौफ में बदल दिया है। दुबई से सामने आ रहे वीडियो में चकाचौंध से भरा रहने वाला यह शहर किसी घोस्ट टाउन जैसा दिख रहा है।

14 दिन की जंग में ही अमेरिका को भीख मंगवा दिया

 अमेरिका और ईरान के भी जंग के साथ बयानबाजी भी काफी तेज हो गई है. ईरान के खर्ग द्वीप को तबाह करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बीच तेहरान ने भी बेहद चुभने वाला कटाक्ष किया है।

शिया मुल्क ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा है कि मात्र 14 दिन की जंग में हमने अमेरिका से भीख मंगवा दिया है. ईरान का यह बयान रूस से तेल खरीदने की अमेरिकी अपील को लेकर आया है. दरअसल, अमेरिका ने दुनिया के देशों से रूस से तेल खरीदने की अपील की है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल को थामा जा सके।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- अमेरिका महीनों से भारत पर रूसी तेल नहीं खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह की जंग में ही व्हाइट हाउस अब भारत सहित दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा है. वह भीख मांग रहा है कि दुनिया रूस से तेल खरीदे।

अरागची ने यूरोपीय देशों को भी निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि वे अमेरिका के इस ‘अवैध जंग’ को सपोर्ट कर रहे हैं. उनको लगता है कि वे ईरान के खिलाफ अमेरिकी का इस अवैध जंग को सपोर्ट कर रूस के खिलाफ वाशिंगटन का समर्थन हासिल कर लेंगे. लेकिन, यह एक बकवास सोच है।

ईरान के हमलों का असर: 1700 मिसाइल-ड्रोन, लेकिन 90% रोक दिए गए
ईरान ने अमेरिकी-इजराइली हमलों के जवाब में पिछले दो हफ्तों में लगभग 1700 मिसाइलें और ड्रोन दुबई समेत यूएई पर दागे। यूएई की एयर डिफेंस सिस्टम ने करीब 90% हमलों को रोक लिया, लेकिन गिरते मलबे (डेब्री) ने बड़ा नुकसान पहुंचाया। बुर्ज अल अरब होटल, फेयरमॉन्ट द पाम, दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर, दुबई एयरपोर्ट और कई स्काईस्क्रेपर्स को नुकसान पहुंचा। एयरपोर्ट पर दो ड्रोनों के गिरने से चार लोग घायल हुए और उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी गईं। दुबई मीडिया ऑफिस ने शुरुआत में कोई घटना नहीं हुई कहा, लेकिन तस्वीरें और रिपोर्ट्स ने सच्चाई उजागर कर दी।

शहर खाली क्यों? एक्सपैट्स ने सामान बांधा, पालतू जानवर सड़कों पर छोड़े
द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई में रहने वाले हजारों अमीर विदेशी निवासी और पर्यटक शहर छोड़ चुके हैं। स्कूलों की स्प्रिंग ब्रेक शुरू होने के बावजूद पश्चिमी बच्चे नदारद हैं। बीच क्लबों और रेस्तरां में सन लाउंजर्स खाली पड़े हैं, जबकि पहले यहां इन्फ्लुएंसर्स और टूरिस्टों की भीड़ रहती थी। सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कई विदेशी निवासियों ने कहा कि जन-जीवन लगभग सामान्य है, लेकिन फोन पर शेल्टर अलर्ट, आसमान में फ्लैश और गिरते डेब्री की आग सब कुछ बदल देती है।

ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिमी देशों के पेशेवर और रईस लोग चार्टर्ड फ्लाइट्स के जरिए भारी रकम चुकाकर भाग रहे हैं। रातों-रात शहर छोड़ने की जल्दबाजी में कई लोग अपने पालतू जानवरों तक को सड़कों पर लावारिस छोड़ गए हैं। एयरपोर्ट पर उड़ानें सीमित हैं, जिससे हजारों लोग फंस गए थे। अमेरिका ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए चार्टर फ्लाइट्स शुरू की हैं।

टूरिज्म धड़ाम, जुमेराह बीच वीरान
'गल्फ टाइम्स' के अनुसार मध्य पूर्व में इस युद्ध के कारण पर्यटन उद्योग को रोजाना करीब 600 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। जुमेराह बीच रेजीडेंस (JBR), रेस्टोरेंट्स और दुबई मॉल जैसे इलाके, जहां पैर रखने की जगह नहीं होती थी, आज लगभग सुनसान पड़े हैं। दुनिया के सबसे बड़े फेरिस व्हील 'ऐन दुबई' के पहिए भी थम गए हैं।
फंस गए आम मजदूर

इस पूरी स्थिति का सबसे डरावना पहलू यह है कि जहां पैसे वाले लोग दुबई छोड़कर निकल गए, वहीं दक्षिण एशियाई देशों (भारत, पाकिस्तान, नेपाल आदि) के लाखों ब्लू-कॉलर वर्कर, टैक्सी ड्राइवर और होटल कर्मचारी यहीं फंस गए हैं। काम ठप होने से इनकी सैलरी रुक गई है और फ्लाइट्स का किराया तीन गुना तक बढ़ जाने के कारण इनके लिए स्वदेश लौटना नामुमकिन सा हो गया है। राहत की बात यह है कि इस अस्थिरता के बीच भारत सरकार और एयरलाइंस के प्रयासों से 1 से 7 मार्च के बीच 52,000 से अधिक भारतीय नागरिक यूएई और खाड़ी देशों से सुरक्षित भारत लौट चुके हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और फ्री स्पीच पर अंकुश
यूएई सरकार ने एयर डिफेंस को मजबूत किया और नागरिकों को आश्वासन दिया। लेकिन पुलिस ने चेतावनी दी है- हमले की तस्वीरें या वीडियो शेयर करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अब तक 21 लोगों पर अफवाह फैलाने का केस दर्ज किया जा चुका है, जिनमें एक 60 वर्षीय ब्रिटिश टूरिस्ट भी शामिल है। ब्रिटिश एंबेसी ने नागरिकों को सावधान किया है कि यूएई कानून बहुत सख्त हैं।

कुल मिलाकर दुबई की स्थिति अभी भी 'खतरे से बाहर' नहीं है, लेकिन बड़े पैमाने पर क्षति या हताहत नहीं हुए हैं। शहर की चमक कम हुई है, लेकिन मजदूर वर्ग और कुछ स्थानीय निवासियों के साथ जीवन जारी है। तेल की कीमतें, उड़ानें और पर्यटन पर असर वैश्विक स्तर पर पड़ रहा है।

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