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बेसमेंट बना सट्टे का अड्डा: छत्तीसगढ़ में करोड़ों के ऑनलाइन जुए का खुलासा, 7 आरोपी पकड़े गए

भिलाई

जिले में ऑनलाइन सट्टा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जामुल पुलिस ने संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मौके से सात आरोपितों को गिरफ्तार किया है जो आधुनिक तकनीक और इंटरनेट मीडिया के जरिये करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार कर रहे थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि प्रतिदिन तीन लाख से लेकर सात लाख रुपये तक के लेन-देन एवं करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार का संचालन होना पाया गया है।

किराए के मकान से चल रहा था नेटवर्क

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर सुखनंदन राठौर ने बताया कि जामुल पुलिस को जामुल थाना क्षेत्र अंतर्गत नालंदा स्कूल के पीछे सुंदर विहार कॉलोनी फेस-2 स्थित एक किराए के मकान में संगठित ऑनलाइन सट्टा गिरोह के संचालन की सूचना प्राप्त हुई। सूचना पर पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए मौके पर दबिश दी गई, जहां आरोपितों को ऑनलाइन सट्टा संचालन करते हुए पकड़ा गया। जांच में पाया गया कि आरोपितों द्वारा ड्रैगन टाइगर, अंदर-बाहर, तीन पत्ती, टेनिस, फुटबॉल एवं रूलेट जैसे खेलों पर ऑनलाइन सट्टा संचालित किया जा रहा था।

इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए बिछाया जाल

ग्राहकों को इंस्टाग्राम एवं व्हाट्सएप के माध्यम से जोड़कर आईडी उपलब्ध कराई जाती थी तथा मोबाइल एवं लैपटॉप के माध्यम से सट्टा खिलाया जाता था। प्रकरण में जिन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है उसमें पोषण निषाद (26) अंजोरा, योगेश कुमार विश्वकर्मा (22) जलेबी चौक छावनी, गौरव तिवारी (26) कबीर नगर रायपुर, संजय कुमार जायसवाल (26) कैंप-1 जलेबी चौक, चुनेश निषाद (20) श्याम नगर छावनी, विक्रम सिंह उर्फ विक्की (30) न्यू बसंत टाकीज़ के पास थाना छावनी और उदल हमणे (19) न्यू बसंत टाकीज़ के पास थाना छावनी शामिल हैं।

बीएनएस और जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज

प्रकरण में आरोपितों के विरुद्ध धारा 318(4) बीएनएस एवं 6, 7, 8 छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। प्रारंभिक जांच में प्रतिदिन तीन लाख रुपये से लेकर सात लाख तक के लेन-देन एवं करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार का संचालन होना पाया गया है। पुलिस अब इस गिरोह के मुख्य सरगना और अन्य संपर्कों की तलाश में जुट गई है।

म्यूल खातों के माध्यम से लेन-देन छिपाने का प्रयास

पुलिस ने बताया कि गिरोह द्वारा विभिन्न सिम कार्ड एवं म्यूल बैंक खातों के माध्यम से अवैध लेन-देन को छिपाने का प्रयास किया जाता था। गिरोह में कार्यों का स्पष्ट विभाजन था तथा तकनीकी रूप से बाहरी व्यक्तियों द्वारा भी संचालन नियंत्रित किया जाता था। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से एक लाख नगद रकम, सात बैंक पासबुक, 16 मोबाइल फोन, 15 एटीएम कार्ड, एक लैपटॉप, वाई-फाई उपकरण, लेन-देन संबंधी रजिस्टर और एक पासपोर्ट की जब्ती बनाई है।

 

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